Monday, 5 October 2015

गो दान की महिमा और गाय की रक्छा से पुण्य की प्राप्ति ------भीष्म पितामह ने युधिस्ठर से कहा ---गायें संपूर्ण प्राणियों की माता कहलाती हैं ! बे सबको सुख देने वाली हैं ! जो अपनी उन्नति की इक्छा रखता हो ! उसे गायों को सदा दाहिने रख कर चलना चाहिए ! गायों को लात ना मारे ! उनके बीच से होकर ना निकले ! बे मंगल प्रदान करने वाली देवियाँ है ! अतः उनकी सदा ही पूजा करनी चाहिए ! जब गाएँ प्यास से पीड़ित हों तब जल प्राप्ति की इक्छा से बे अपने मालिक की और देखती हैं ! अगर उन्हें पानी नहीं  मिलता है ! तब बे रुष्ट होकर उस मालिक की धन संपत्ति का नाश कर देती हैं ! गाय  गोबर से लीपने पर देवताओं के मंदिर और पितरों के श्राद्ध स्थान पवित्र होते है ! गायों से  बढ़कर पवित्र और कौन हो सकता है ? जो एक साल तक प्रतिदिन स्वयं भोजन करने के पहले दूसरे की गाय को घास खिलाता है ! उसका यह पवित्र कर्म उसकी समस्त कामनाओ की पूर्ति कर देता है  !उसको पुत्र यश धन की प्राप्ति होती है  !गो दान करने वाला दाता उत्तम लोकों की प्राप्ति करता है ! !

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