Sunday, 11 October 2015

ये वैदिक संस्कृति का विकृत चित्रण है !यह उस मानसिकता और शिक्छण प्रसिक्छण की उपज है ! जिस काल में भारत में इस्लाम का प्रवेश हुआ ! और फिर बाद में ईसाई धर्म का प्रवेश हुआ !भारत के लोगों को मुसलमान और ईसाई धर्म अपनाने के लिए ये विकासवाद की थ्योरी विकसित की गयी !और वैदिक संस्कृति के केंद्र में स्थापित ब्राह्मणो  को निशाना बनाया गया !जैन धर्म वैदिक धर्म की ही तरह प्राचीन है !यह किसी व्यक्ति द्वारा स्थापित नहीं किया गया है !महाबीर इस धर्म के अंतिम २४ बे तीर्थंकर  थे !और इस प्रकार तीर्थंकरों की यह अनादि परम्परा चलती रहती है !भगवान बुद्ध का बौद्ध धर्म उनके निर्वाण के बाद प्रारम्भ हुआ !बुद्ध का निर्वाण उनकी तपस्या से और अंतिम संस्कार सनातन परम्परा से हुआ !जैन धर्म और बौद्ध धर्म में भी ब्राह्मणो की आलोचना नहीं की गयी है !उन्होंने ब्राह्मण की प्रितिस्ठा जन्म  के आधार पर नहीं कर्मोँ के आधार पर की है !वैदिक संस्कृति में वेदों को परमात्मा की बाणी बताया गया है !और वेद में गाय को विश्व की माता कहा गया है !गाय का या किसी भी पशु का मास का भक्छण यहाँ सामान्य तौर पर नहीं किया जाता था !गाय की महत्ता भारतीय बेदों पुराणो उपनिषदों आदि धर्मग्रंथों में की गयी है !महाभारत काल में यानी लगभग पांच हजार पांचसौ साल पूर्व   भगवान श्री कृष्णा ने गीता का उपदेश दिया है !उसमे उन्होंने १०(२८)में गाय को अपना स्वरुप बताया है  ओर१८(४४)में कहा है कि खेती करना और गाय का पालन औरउसकी रक्छा करना तथा व्योपार करना ये वैश्य का स्वाभाविक कर्म है !गीता में ही १७(२३)में श्रीकृष्ण ने कहा है कि ओम तत  सत इन तीन प्रकार के नामो से जिस परमात्मा का निर्देश किया गया है ! उसी परमात्मा से श्रष्टि के प्रारम्भ में ही वेदों तथा ब्राह्मणो और यज्ञों की रचना हुई !३(१०)में कहा है प्रजापति ब्रह्मा जी ने श्रष्टि के प्रारम्भ में कर्तव्य कर्मों के साथ मनुष्य आदि की रचना की !तथा श्रष्टि का निर्माण करने के बाद उन्होंने मनुष्यों से कहा कि तुमलोग अपने कर्तव्य कर्मो से सभी प्राणियों की उन्नति करो ! उनके प्राणो की रक्छा करो ! तथा इस  कर्तव्य पालन के लिए सामग्री तुमको  प्रकृति से हमेशा प्राप्त होती रहेगी !यह विकासवाद का सिद्धांत काल्पनिक मनगढंत और वैदिक सनकृति में वर्णित तथ्यों के विपरीत है !यदि मनुष्य जंगली अवस्था से आधुनिक सभ्य मनुष्य के रूप में परिवर्तित हुआ है !तो आज भी भारत में और बाहर भी ऐसे मनुष्य पाये जाते हैं ! जो नग्न अवस्था में रहते हैं  !और शिकार करके भोजन की प्राप्ति करते है !आज भी मनष्य का मास खाने वाले कबीले हैं !फिर इनका रूपांतरण  क्यों नहीं हुआ है ?वैदिक धर्म जैन और बौद्ध धर्म में बर्तमान काल सबसे खराब काल माना गया है !जिसे अन्य धर्माबलम्बी विकास काल मानते है !१४०० साल पुरानी पवित्र कुरान को अल्लाह की किताब मानते हैं ! !ईसा  को ईश्वर का पुत्र मानते हैं !ज्ञान के आदि  वेदों को मनुष्य कृत मानते हैं !और भगवान श्री कृष्ण और राम को मनुष्य कहते हैं !तथा ब्रह्मा शंकर देवी देवताओं और ब्रह्मा विष्णु को ब्राह्मणो के दिमाग की उपज बताते हैं !यह सब वैदिक संस्कृति को बदनाम करने और गाय के मास का भक्छण करने की सोची समझी नीति के तहत किया जाने वाला कुत्सित प्रयत्न है !वैदिक धर्म १५०० साल की गुलामी के बाद भी नष्ट नहीं हुआ !विकृत अवश्य हुआ है  !किन्तु यह फिर से खड़ा होगया है  ! वैदिक संस्कृति के ज्ञान की पुष्टि विज्ञान भी कर रहा है !और गाय के दूध की पौष्टिकता चिकित्सा शास्त्र सिद्ध कर रहा है !और गाय के मूत्र से कैंसर जैसी बीमारियां ठीक हो रही है ! उसके गोबर का उपयोग रसोई गैस और खाद के रूप में प्रयुक्त हो रहा है !

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