Tuesday, 6 October 2015

शंख और ढपोल शंख में फर्क यह होता है !कि शंख की करनी और कथनी में फर्क नहीं होता है !किन्तु ढपोल शंख बोलता बहुत है !किन्तु करता कुछ नहीं है !देश में ढपोल शंखों का बाहुल्य और वर्चस्व है !विशेष रूप से राजनीति में ये बहुत अधिक मात्रा में दिखाई देते हैं !!किन्तु इन ढपोल शंखयों के राजनीति में वर्चस्व और बाहुल्य में मतदाताओं का भी सहयोग और समर्थन है !क्योँकि ये ढपोल शंख चुनाव जीत कर ही सत्ता में आते हैं !और देश में ढपोल शंखी व्यबस्था का निर्माण करते है !गाय के मामले में भी ढपोलशंखी वक्तव्य दीये जा रहे हैं !किन्तु उसकी दुर्दशा की और कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है !गो माता सड़कों पर भूखी और मैला तथा पन्नी खाती हुई आबरा घुमरही हैं !और इस आवश्यकता से  अधिक आबादी वाले देश में आवागमन में बाधा भी उत्पन्न कर रहीं है !बीफ के नाम पर देश में अशांति उत्पन्न की जा रही है !और बीफ के समर्थन और विरोध में वक्तव्य आ रहे हैं !प्राचीन भारत में गाय का क्या महत्त्व था ?इस सम्बन्ध में विदेशी लेखकों  द्वारा लिखे ग्रंथों को आधार मान कर असत्य तथा भ्रामक वक्तव्य भी प्रकाशित किये जा रहे हैं !जबकि महाभारत में गाय की महिमा का जोचित्रण किया गया है !उसकी चर्चा नहीं हो रही है !इस सबके बाद भी जो अनुत्तरित प्रशन है !उसका समाधान नहीं खोज जा रहा है ?गाय को इस दुर्व्यबस्था तक पहुंचाने की जिम्मेदारी उन्ही लोगों की है !जो गाय को पूज्य मानते है !और उसको गोमाता कहते हैं!इसीलिए गाय के क़त्ल करने वालों को सजा का  जो प्रावधान है !उतनी ही सजा गाय को सड़कों पर छोड़ने वालों और उसका पालन पोषण न करने वालों को भी होना चाहिए !गाय का क़त्ल और बीफ खाने वाले लोगों से अधिक दोषी गाय को माता और और उसको पूज्य मानने वाले लोग है ! गाय की उत्तम और अधिक दूध देना वाली नस्ल पैदा करनी चाहिए !उसके मूत्र गोबर और मृत शरीर का उपयोग जैविक खाद के निर्माण के लिए होना चाहिए !और प्रत्येक किसान को गाय का पालन करना चाहिए !गाय बध के प्रितिबंध के साथ गाय के पालन पोषण की व्यबस्था करनी चाहिए !देश का माहौल बिगाड़ने  का काम गौ रक्छा के नाम पर नहीं होना चाहिए !

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