Wednesday, 30 September 2015

डिजिटल इंडिया विश्व के वैज्ञानिक विकास की कड़ी में जुडने का एक प्रयास है !विज्ञानं भारत भूमि में अनादिकाल से कार्यरत रहा है !और आज से ५००० बरष पूर्व का भारत वैज्ञानिक उपलब्धियों के उच्चतम शिखर पर था !भारत में वायुयान भी थे! यंत्रचालित नौकाएं भी थी ! और विशालकारिणी ऐसी औषधियां भी थी ! जिनसे युद्ध में घायल योद्धाओं के घाओं को तुरत भर दिया जाता था !सम्पूर्ण भारत धन धान्य से समृद्ध था !पर्याबरण आदि की समस्यायों से भारत पूरी तरह मुक्त था !कृषि, गाय का पालन उसकी रक्छा और वाणिज्य आर्थिक समृद्धि के मुख्य श्रोत थे !कृषि कार्य में संलग्न कृषक अत्यधिक संपन्न और समृद्ध थे !और यह उक्ति प्रचिलित थी !उत्तम खेती ,माध्यम बान ,अधम चाकरी  भीख निदान !नौकरी को बहुत हेय दृष्टि से देखा जाता था !कोई भी नौकरी करने के लिए तैयार नहीं होता था !आज स्थिति बदल गयी है !लोग नौकरी को जीवन यापन का श्रेष्ठतम साधन मानते हैं !नौकरी को सभी प्रकार के भौतिक साधनो की समृद्धि को एक मात्र अचूक और प्रभाव शाली उपाय मानते है !इसीलिए देश में दबे, कुचले, वंचित ,पिछड़े लोगों को विकास की अग्रिम पंकति में लाने केलिए !संविधान में सरकारी सेवाओं में १० साल के लिए आरक्छण का प्रावधान किया गया था !किन्तु वह अभी भी जारी है !मोदी जी युवाओं को सरकारी नौकरी के व्यामोह और मायाजाल से मुक्त करने के लिए स्वाबलम्बी रोजगार प्रदान करने के लिए स्मार्ट सिटी, डिजिटल इंडिया आदि के प्रोग्राम लागू कर रहे हैं !विकास यादव की जिस गरीबी का चित्रण प्रस्तुत किया गया है !कर्ज और गरीबी के कारण उसके कृषक पिता ने आत्महत्या की है !और अब डिजिटल इंडिया के लिए उसने अपने घर को गिरवी रख दिया है !ये स्थिति देश के आम किसान की है! !हजारों की संख्या में किसान आत्महत्या कर रहे हैं !नौकरी प्राप्त करने के लिए किसान अपनी कृषि भूमि बेचकर रिश्वत देकर नौकरी प्राप्त करने की चेस्टा करते है !देश में सबसे अधिक पीड़ित किसान ही है !जिसे अन्नदाता कहाजाता था !आज वह भूख से मौत को गले लगा रहा है !कृषि कार्य से वह अपने परिवार का पालन पोषण नहीं कर पा रहा हैं !गाओं जो उत्पादन की रीढ़ थे ! बे उजड़ रहे हैं !लोग गाओं  से शहरों की और पलायन कर रहे हैं !यह विकास का स्मार्ट सिटी और डिजिटल इंडिया आदि किस हद तक कृषकों की आर्थिक स्थिति में सुधार के साधन बनेगें !इस बात पर भी लोकतान्त्रिक सरकारों को ध्यान देना चाहिए !कृषि प्रधान  भारत को डिजिटल इंडिया प्रधान भारत बनाने का प्रयत्न कितना किसानो के आर्थिक विकास में सहायक होगा ?यह अर्थशास्त्रियों के विचार का विषय है !
इस्लामिक संगठन को भले ही युवाओं काब्यापक समर्थन प्राप्त हो रहा हो !और इसका सर्वाधिक प्रभाव महाराष्ट्र उत्तरप्रदेह असम और कश्मीर आदि  मेदेखा जारहा हो !किन्तु यह संगठन अब भारत में अपने क्रूर हिंसक कामों कोसफलता पूर्वक अंजाम नहीं दे पायेगा !इस समय भारतीय सेना और सुरक्छा दलों को ऐसे आत्तंकवादी संगठनो को समाप्त करने की खुली छूट है !देश बासियों को भी इनकी गतििधियों की तुरत और सही सुचना अधिकारियों के पास पहुचाना  चाहिए !ताकि ये अपनी नृशंश गतिविधियों को अंजाम ना दे सकें ! और इनको सहयोग देने के रूप में किसी निर्दोष युवा या व्यक्तिका उत्पीड़न ना हो !इसमें जो १८ से २० साल तक कीआयु के युवा इस्लामिक संगठन के समर्थन में और इसकी हिंसक और क्रूर गतिविधियों में शामिल होने के लिए उत्सुक दिखाई दे रहे हैं !और जिनके चित्र प्रदर्शित किये गए हैं !बे सब मुसलिम युवा मालुम पड़ते हैं !इसीलिए मुसलिम युवाओं पर दोहरी जिमेदारी है (१)बे मुसलिम  युवाओं को इस्लामिक संगठन में प्रवेश करने से रोकें !(२)जैसे  ही इस्लामिक संगठन की गतिविधियों की जानकारी होउसकीसूचना तुरत पुलिस को दें !ताकि किसी निर्दोष युवा को इस्लामिक  संगठन का सहयोगीहोने का अनावश्यक दंड ना भोगना पड़े !
मशहूर शायर और राज्यसभा सदस्य जावेद अख्तर ने कहा था ! कि पाकिस्तान का झंडा लहराने वाले और पाकिस्तान जिंदाबाद का नारा लगाने वाले ! अगर पाकिस्तान जाएँ और वहां के हालत देख आएं  तो बो हिन्दुस्तान की जमीन को चूम लेंगे !गांधी जी ने कहा था ! जो इस देश में पैदा हुए हैं ! और इसे अपनी मातृभूमि समझने का दावा  करते हैं ! बे सब भाई भाई हैं ! हमें जन्म देने वाली माता हमारी श्रद्धा और पूजा की अधिकारिणी है ! ऐसी पूजा से हमारी आत्मा पवित्र होती है ! तब फिर हमारी विशिष्ट अविनाशी भारत माता जिसके बक्छस्थल पर हमने जन्म लिया है ! और जिसके बक्छ स्थल पर हम मरेंगे ! हम सबकी बफादारी और पूज्य भाव की कितनी अधिक अधिकारिणी है !पाकिस्तान एक आततायी आतंकबाद का पोषक देश है !उस देश में जनता के द्वारा निर्बाचित सरकार से अधिक प्रभाव शाली सेना और चरम पंथी है !अगर कश्मीर के कब्जे वाले कश्मीरी न्याय के लिए गांधी जी के द्वारा बताये गए सत्य अहिंसा के मार्ग से शांतिपूर्ण तरीके से अपने प्राणो का उत्सर्ग कर प्रतिरोध करें !तो उनको पाकिस्तानी कुशासन से मुक्ति मिल सकती है !और जम्मुकश्मीर में पाकिस्तान के जरखरीद गुलाम जो भारत सरकार की नाक में दम किये हुए हैं ! उनके प्रभाव का भी अंत घाटी के मुसलमानो पर हो सकता है !

Tuesday, 29 September 2015

विश्व सहित भारत में लोकतंत्र की स्थापना के लिए मानवता की स्थापना के लिए बड़ा लम्बा संघर्ष मानवता वादियों    ने किया था !इस संघर्ष में अनेकों ने अपने जीवनो को कुर्बान कर दिया था ! और बहुतों ने अपने जीवन की जबानी सुख ऐश्वर्य का संपूर्ण त्याग इस लोकतान्त्रिक व्यबस्था की स्थापना के लिए कर दिया था ! और आज भी कर रहे हैं !परिणाम स्वरुप विश्व के अनेक देशों में लोकतान्त्रिक व्यबस्था की स्थापना हो गयी ! किन्तु लोकतंत्रीय जीवन जीने के लिए मनुष्यों का मानस अभी नहीं बन पाया है !यूरोपियन देशों में लोकतंत्रीय मानस निर्माण करने के लिए !गांधीजी द्वारा आचरित सत्य अहिंसा को आधार बनाकर अब लोग इन देशों में सक्रिय हो गए हैं !भारत ने गांधीजी को बाहर का रास्ता दिखा दिया है !गांधीजी अभी भारत की जरुरत नहीं बन पाये हैं !भारत में अभी सत्य अहिंसा की भूख जाग्रत नहीं हो पायी है !और गांधी जी को भी स्वतंत्र भारत में ५ माह से अधिक जीवित नहीं रहने दिया गया !परिणाम स्वरुप जिस सत्य अहिंसा की शक्ति का प्रयोग उन्होंने गुलाम भारत को आजाद कराने के लिए किया था ! वह आजाद भारत में लोकतांत्रिक मानस के निर्माण के लिए नहीं कर पाये !भारत में इसीलिए ३० जनबरी १९४८ तक के गांधी जी की चर्चा होती है !जिसमे कुछ लोग गांधी जी को खल नायक के रूप में प्रस्तुत करते हैं !और कुछ उनका स्तुति गान करके अपनी गांधी भक्ति का प्रदर्शन कर के अपना उत्तरदायित्त्व पूर्ण कर देते हैं !किन्तु गांधी आचरण में ना उनको खलनायक बताने वालों में है ! और ना गांधी के भक्तों में !क्योँकि अभी हम सबकी आवश्यकता पैसा और पद प्रितिष्ठा प्राप्त करने की है !इसीलिए इसी एक मात्र लक्छ्य की प्राप्ति के लिए संसद  से लेकर ग्राम सभाओं तक में प्रवेश करने के प्रयत्न में नेता लगे दिखाई देते हैं !और इनमे प्रवेश के लिए धनबल, बाहुबल ,जाति बल और साम्प्रदायिक बल का  प्रयोग किया जा रहा है !ग्राम स्वाराज्य को गांधी जी ने देश के विकास का माध्यम बनाया था !इसी दृष्टि को ध्यान में रख कर राजीव गांधी की सरकार ने ग्राम स्वराज्य की स्थापना का कानून पास करा दिया था !इस क़ानून से गाओं के लोगों की भागी दारी शासन प्रशासन में बड़ी !किन्तु नेताओं का मानस ग्राम स्वराज्य के मूलभूत सिद्धांतों के अनुसार नहीं बदला !इसीलिए ग्राम स्वराज्य के लिए आवंटित धन का उपयोग प्रधान या सरपंच अपने निजी कार्योँ के लिए करने लगे !और गाओं से लेकर जिला स्तर तक नेताओं ने ग्राम स्वराज की स्थापना को भ्रष्टाचार का केंद्र बना दिया है  !जिस प्रकार से सांसद या विधायक निर्वाचित होने के बाद  नेता अकूत संपत्ति के मालिक हो जाते हैं !उसी प्रकार ग्राम प्रधानऔर जनपद पंचायत का अध्यक्छ बन जाने के बाद ये अकूत संपत्ति के मालिक बन जाते हैं !इसलिए इन पदों के लिए चुने जाने के लिए नेता धन बल, बाहु बल जाति बल साम्प्रदायिक बल आदि का खुला प्रदर्शन करते  हैं !अभी तो देश बासियों को सिर्फ इस बात से ही संतोष करना पड़ेगा कि देश में लोकतंत्र है !इसकी बास्तविक स्थापना के लिए नया संघर्श शुरू करना पड़ेगा
आजकल यह समाचार बहुत प्रमुखता से प्रकाशित हो रहे हैं !कि इस्लामिक संगठन भारत में भी अपनी जड़ें जमा  रहा है !और कश्मीर तथा कुछ विशेष स्थानो में उसका प्रवेश भी हो चुका है !आसाम से ऐसे समाचार आ रहे हैं !कि वहां इस्लामिक संगठन प्रवेश कर चूका है !आज बांग्लादेश  में एक इटालियन की हत्या कर दी गयी है !और हत्या करने वालों के रूप में सुई इस्लामिक संगठन की ओर घूम रही है !इस घटना के बाद यह भी कहा जा रहा है !कि इस्लामिक संगठन भारत के बहुत समीप पहुँच गया है !इस्लामिकसंगठन का प्रतिरोध भारतीय शासन करेगा !लेकिन एकबात जो समझ में नहीं आतीहै !कि आखिर इस्लामिक संगठन भारत को निशाना क्यों बना रहा है ?भारत में हिन्दू मुसलिम एकता बहुत सुद्रढ़ है !यहाँ मुसलमानो को संविधान के अंतर्गत समान अधिकार प्रदान किये गए है !यहाँ चपरासी से लेकर उच्चतम  न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के  पद पर अनेक मुसलिम न्यायाधीश रह चुके हैं !आजाद भारत के तीन राष्ट्रपति मुसलमान रहे हैं !केंद्र में और राज्यों में अनेक मुख्य मंत्री और मंत्री मुसलिम समुदाय  से हुए है !देश में कई  मुसलमान बहुत बड़े उद्द्योग्पति और पूंजीपत हैं !भारत में सार्वजानिक राजनैतिक औद्योगिक व्योपरिक सरकारी गैर सरकारी शैछणिक और चिकित्सा आदि का कोई भी छेत्र ऐसा नहीं है !जहां मुसलिम समुदाय के लोग प्रमुख पदों पर आसन ना रहे हों !इसीलिए इस्लामिक संगठन का भारत में क्रूर नरसंघार गतिविधियों के लिए   प्रवेश आश्चर्य जनक है ?
मोदी जी का विदेशों में विशेष तौर पर अमेरिका में बहुत अधिक स्वागत हो रहा है !कुछ मोदीजी के आलोचक इस स्वागत पर प्रश्न चिन्ह खड़े कर कहते हैं !कि अमेरिका में गुजराती धनाढ्य समाज उनके स्वागत आदि का व्यय भार बहन करता है !और संघ के कार्यकर्ता उसका व्यबस्थित ढंग से प्रचार कर मोदीजी के व्यक्तित्त्व को उभारते हैं !और भारतीय मीडिया इसको प्रमुखता से प्रकाशित करता है !जबकि अमेरिकी समाचार पत्र या इलेक्ट्रॉनिक मीडिया मोदीजी को इतनी प्रधानता प्रदान नहीं करता है !इसमें कितना सत्य है? और कितना असत्य है? !इसका आकलन कर पाना सामान्य मनुष्यों के बस की बात नहीं है !किन्तु एक बात जो स्पष्ट दिखाई दे रही है !कि आजादी के  बाद जितनी भी सरकारें देश में आई है !मोदीजी की सरकार के पूर्व किसी भी सरकार से अमेरिका के इतने प्रगाढ़ सम्बन्ध कायम नहीं हुए हैं !और ना ही किसी भारतीय प्रधान मंत्री ने  इतना महत्त्व देशी विदेशी पूंजीपतियों और उद्द्योग पतियों को दिया है !मोदी जी देश की अर्थव्यबस्था में आमूल चूल परिवतर्न कर देश को आर्थिक तंगी और आम  आदमी को गरीबी से मुक्क्त करना चाहते हैं !मोदी जीने इसकेलिए जो विकास का मॉडल और एजेंडा निश्चित और अपनी सरकार के लिए निर्धारित किया है !वह अब तक के सभी विकास के मॉडलों से उलट है !मोदीजी को कई छेत्रों  में व्यापक सुधार और परिवर्तन करना है !तथा विश्व की समस्त सरकारों से मैत्रीपूर्ण सम्बन्ध भी स्थापित करना है !देश में साम्प्रदायिक सद्भाव भी कायम करना है !देश में उद्योग के लिए अच्छा और रचनात्मक सिस्टम का जन्म हो !भ्रष्टाचार और अधिकारीयों की लेट लतीफी के कारण विकास की गति वाधित ना हो !इसके लिए राजनीति से लेकर प्रसाशन आदि को भी भ्रष्टाचार मुक्त करना है !विदेशों में भारत की प्रतिष्ठा बड़ी है ! इसका प्रभाव अगर भारत की अर्थ व्यबस्था पर पड़े ! और समाज को उसका लाभ प्राप्त हो ! तभी विदेशों में भारत की बड़ी हुई  प्रतिष्ठा की सार्थकता सिद्ध हो सकती है !मोदी जी को अभी बहुत लम्बी और खतरे भरी यात्रा तै करनी है !अगर बो अपने ध्येय में सफलता प्राप्त करते है !तो राष्ट्र पुरुष कहलायेंगे और अगर विफल होते हैं !तो क्या कहकायेंगे बताना मुश्किल है ?
बेबाकी से बात करना अलगबात है ! और बेबाकी से जनहित  के काम करना अलग बात है !देश में बे बाकी से बात करने वाले बहुत से राजनेता हैं !किन्तु सत्ता की चमक दमक भोग और ऐश्वर्य की प्राप्ति इन्हे कुनवा परस्ती और सार्वजानिक हित के मुद्दों जैसे दलितों पिछड़ों का विकास      के मुद्दे  अपना और अपने परिवार तथा अपने वोट बैंक को मजबूत बनानने तक ही सिमित कर देता है !लालू नितीश रामविलाश पासवान  ये सभी नेता जयप्रकाश के आंदोलन से शक्ति पाकर राजनीति में सफलता प्राप्त कर मुख्य मंत्री और केंद्रीय मंत्री के पद तक पहुंचे !सत्ता में पहुँचने के बाद ये जयप्रकाश नारायण और सम्पूर्ण क्रांति को भूल गए !और इनको अब अपना और अपने परिवार के हित में ही सम्पूर्ण क्रांति और सामाजिक बदलाव का मूलाधार दिखने लगा !इन नेताओं के राजनीति में पद प्राप्ति और प्रमुखता से एक लाभ तो हुआ है !कि चाय बेचने वाले लालू और अत्यंत सामान्य और दलित परिवार से निकले नितीश और रामविलास पासवान सत्ता के शीर्ष पदों तक पहुंचने  में सफल हो गए ! इन लोगों ने और इन्ही बर्गों और जातियों से निकले लोगों ने  लोकतंत्र को अपना और अपने परिवार के विकास का साधन बना लिया

Monday, 28 September 2015


भारत श्रष्टि काल से ही धार्मिक देश रहा है !भारत की बुनियाद ही धर्म पर आधारित है !यहाँ ऋषियों मुनियों साधु सन्यासियों की अवाध श्रंखला अवाध गति से प्रवाहित होती रही है !इस भूमि पर ईश्वर ने भी अनेक रूपों में अवतार ग्रहण किये हैं !और आत्मा की खोज जितनी इस पवित्र भूमि भारत में हुई है !उतनी विश्व के अन्य किसी देश में नहीं हुई है !बर्तमान समय के दो सर्वाधिक धर्म ईसाई और इस्लाम में भी वैदिक संस्कृति के सनातन तत्त्व विद्यमान है !वैदिक संस्कृति के मूल तत्त्व सत्य अहिंसा अपरिग्रह ब्रह्मचर्य और अस्तेय हैं !इन्ही तत्त्वों के आधार पर सारी वैदिक संस्कृति और वैदिक धर्म विकसित हुआ है !अध्यात्मनिष्ठा में ईश्वर के साक्छात कार के लिए शरीर को माध्यम माना गया है !इसिलीए काम लोभ लालच आसक्ति आदि जो आध्यात्मिक जीवन में बाधाएं उत्पन्न करती है !उनके शोधन और निवारण के लिए विविध साधनाएं वैदिक धर्म में अपनायी गयी हैं !इस सम्बन्ध में विभिन्न धर्मग्रन्थ लिखे गए हैं !तथा परमात्मा की उपासना के भक्तियोग , ज्ञान योग  और कर्मयोग के मार्ग भी निर्देशित किये गयेहैं !और ईश्वर को समग्र रूप को  सगुण साकार सगुण निराकार निर्गुण निराकार आदि रूपों में प्रस्तुत किया गया है !धार्मिक उदारता और सर्वसमावेशी धर्म को मान्यता देने वाले वैदिक धर्म की छत्र छाया में इस देश माँ बाहर से आगंतुक धर्म इस्लाम और ईसाई धर्म को भी  विकसित होने के पूर्ण अवसर प्राप्त हुए हैं !मंदिर में ईश्वर दर्शन तीर्थ भ्रमण और पवित्र नदियों गंगा जमुना सरस्वती कावेरी नर्मदा गोदावरी आदि नदियों में स्नान कर शरीर शुद्ध करने की अवाध परम्परा अनादि कल से भारत में प्रचिलित है !भगवान श्री राम के जीवन चरित्र में भी ऋषियों मुनियों के आश्रमों में उनका दर्शन कर उनके पूजन आदि के अनेक प्रसंग रामायण में वर्णित है !इसी प्रकार से महाभारत में भी पांडवों द्वारा बनवासकाल में अनेक ऋषियों मुनियोँ और नदियों कुंडो आदि में स्नान के अनेक प्रसंग विस्तार से बताये गए है !बलराम तो महायुद्ध के दौरान पूरे समय तीर्थ यात्रा ही करते रहे !भगवान श्री कृष्ण गीता में १७(२३)में कहा है कि श्रष्टि के आदि काल में ही ओम तत सत इन तीन प्रकार से परमात्मा के नामो का निर्देश किया है ! उसी परमात्मा ने श्रष्टि रचने के प्रारम्भ में ही वेद और वेद ज्ञान को समझ कर साधना से अंतःकरण में धारण करने वाले साधकों की भी श्रष्टि की थी ! इसलिए तीर्थ यात्रा और पावन नदियों के पवित्र जल  में स्नान और मंदिर में दर्शन पूजन भारत में अनादि काल से प्रचिलित है !और यह सब कर पुण्य लाभ प्राप्त करने के लिए शास्त्रो में विधान भी बताये गए हैं !इसीलिए तीर्थ आदि की यात्रा  में शास्त्र विधान का भी पालन करना चाहिए !ताकि पूर्ण लाभ की प्राप्ति हो सके !
इन शहीदों के बारे में बहुत सी मनगढंत बातें भी ख्याति के भूखे लोग कर देते हैं !आज एक समाचार पत्र में  ऐसे ही एक क्रन्तिकारियों के जीवन की जानकारी रखने वाले दम्भी ने लिखा है  कि भगत सिंह ने फांसी पर झूलने के पहले सफाई कर्मचारी के हाथ की रोटी खाने की इक्छा प्रगट की थी !और उसके हाथ की रोटी खाकर ही भगत सिंध प्रसन्नता पूर्वक फांसी के फंदे पर झूल गए थे !किन्तु यहां जो जानकारी उनके परिवार द्वारा दी गयी है !कि उन्होंने अंतिम समय रसगुल्ला खाया था !और लेनिन की जीवनी पड़ी थी !यह बात अधिक प्रमाणिक प्रतीत होती है !इसी प्रकार एक झूठ व्यापक स्तर पर फैलाया जा रहा है !की गांधी जी ने भगत सिंह को फांसी से नहीं बचाया था !जबकि बो चाहते तो भगत सिंह राजगुरु और सुखदेव को फांसी से बचा सकते थे !ये लोग राजनैतिक लाभ उठाने की दृष्टि से बड़े से बड़ा झूठ बोलने में भी शर्म महसूस नहीं करते हैं !गांधी जी ने इन युवा क्रांतिकारियों को फांसी ना हो इसके लिए अपनी पूरी ताकत लगा दे थी !गांधी जी ने उस समय के वायसराय इरविन से व्यक्तिगत तौर पर  मिलकर और पत्र लिख कर भी कहा था ! कि जनमत इन क्रांतिकारियों को मौत की सजा देना के विरुद्ध है !और सरकार को जनमत का आदर कर इन युवा देश भक्तों की फांसी माफ़ कर देनी चाहिए !किन्तु ब्रिटिश हुकूमत ने गांधी जी की बात मानने से इंकार कर दिया था !गांधी जी का भगत सिंह को बचाने का यह सम्पूर्ण  प्रयास विस्तार से सम्पूर्ण गांधी बांग्मय में बिस्तार से वर्णित है !इसके अलावा यह भगत सिंह आदि की जान बचाने के प्रयत्नो की चर्चा करनेवाले लोग यह भूल जाते हैं !कि भगत सिंह की राष्ट्र भक्तिऔर बलिदान की भावना इन तथाकथित नेताओं की तरह सिर्फ शाब्दिक ही नहीं थी ! वह बास्तविक थी !उनके पिताजी ने पुत्र मोह से आसक्त होकर एक पात्र ब्रिटिश हुकूमत को लिख दिया था !जब इसका पता भगत सिंह को लगा था !तो उन्होंने अपने पिता को कड़ा प्रतिरोध  प्रेषित किया था !हम सबको इन युवा क्रांतिकारियों के सम्बन्ध मेसिर्फ प्रमाणिक जानकारी ही प्रकाशित करनी चाहिए !
हिमांचल प्रदेश के मुख्य मंत्री के आवास पर लड़की की शादी के अवसर पर जिस तरह से सीबीआई ने छापामारी की है !उसका विरोध हिमांचल के पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार और भाजपा के पदाधिकारियों ने भी की है !सीबीआई पर जो आरोप सत्ता दल का समर्थन करने के लगते आये हैं !उसका यह एक और उदाहरण सीबीआई ने पुत्री के विवाह के दौरान छापे मारी कर प्रस्तुत कर दिया है !किन्तु इसके लिए सिर्फ सीबीआई को दोषी ठहराना ठीक नहीं होगा !इसके लिए जिम्मेदार तो सत्ता दल के नेता ही होते हैं !इसीलिए जब कांग्रेस सत्ता में होती है ! और कार्यबाही भाजपा आदि बिपक्छी दलों पर होती है !तो ये नेता चिल्लाते हैं ! कि सीबीआई सरकार के दबाव में काम करती है !औरयह बात इस  छापामारी से सही  सिद्ध  हो  रही  है !सुप्रीम कोर्ट को यह कहना पड़ा था  !कि सीबीआई सरकारी तोता है !और अभी हाल ही में एक टिप्पड़ीं में सुप्रीम कोर्ट ने कहा है ! कि सीबीआई की जाँच के लिए भी एक और सीबीआई का गठन करना पड़ेगा !यह लोकतंत्र के लिए अत्यंत दुर्भाग्य की बात है कि राजनेता अपने निकृष्ट स्वार्थों की पूर्ति के लिए स्वस्थ लोकतान्त्रिक परम्पराओं को विकसित नहीं होने देरहे हैं !इतिहास में इन नेताओं का नाम लोकतंत्र विनाशक के रूप में दर्ज होगा !और आने वाले समय में बच्चे आजादी दिलाने वाले महान नेताओं का इतिहास भी पड़ेंगे और इन लोकतंत्र विनाशक स्वारथी नेताओं का इतिहास भी पड़ेंगे !
भगवान श्री कृष्ण ने गीता १६(२३)में कहा है कि जो मनुष्य शाश्त्र विधि का त्याग करके अपनी इक्छा से मनमाना आचरण करता है ! वह ना तो अंतःकरण की शुद्धि और पवित्रता को प्राप्त करता है ! और ना ही उसे सुख शांति की प्राप्ति होती है ! और न ही परम गति प्राप्त होती है ! अतः धार्मिक विधि विधान की पूर्णता के लिए क्या करना चाहिए ? और क्या नहीं करना चाहिए ? इसके लिए शाश्त्र ही प्रमाण है ! इसीलिए सारे धार्मिक उत्सव और सारे धार्मिक कृत्य शाश्त्र विधि के अनुसार ही करना चाहिए !आज कल लोगों में धर्म कृत्यों में आस्था तो बढ़ रही है !किन्तु बे कृत्य मनमाने ढंग से किये जा रहे हैं !उसका दृश्य गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन मेदिखायी दे रहा है! !गणेश की मूर्ति स्थापना के दिन से ही साधकों को नियम संयम का पालन करना चाहिए !और जोगणेश पूजन का शास्त्रीय विधि विधान है उसका पालन करना चाहिए !किन्तु गणेश मूर्ति की स्थापना के दिन न तो कोई नियम संयम पूर्वक ब्रत उपवास करता है !और ना ही गणेश प्रतिमा का निर्माण शाश्त्र विधि के अनुसार किया जाता है !और  ना ही स्थापना विधि विधान के अनुसार की जाती है !और ना ही जिस दिन से मूर्ति की स्थापना होती है !उस दिन से गणेश प्रतिमा के बिसर्जन तक प्रतिमा का शाश्त्र विधि के अनुसार पूजन किया जाता है !कहीं कहीं तो यह भी देखने में अत है कि आयोजन करने वाले युवक शराब आदि पीकर हुल्लड़ मचाते हैं !आम रास्ता रोक कर लोगों का आवागमन भी अवरुद्ध कर देते हैं !यह संपूर्ण कृत्य धर्म के प्रति श्रद्धा की अभिव्यक्ति तो करते हैं !किन्तु ऐसे आयोजनो के लिए धार्मिक विधि विधान का पालन नहीं करते हैं !जिस तरह से भवन निर्माण का शाश्त्र है !चिकित्सा और एटम बम निर्माण का शाश्त्र है !मनुष्य के जीवन के लिए जितने भी उपयोगी कार्य कलाप हैं !उन सबके अलग अलग शाश्त्र हैं !यदि उन शाश्त्रो का कार्य संपन्न करने के लिए उपयोग ना किया जाय तो बे कार्य संपन्न नही हो सकते हैं !उसी प्रकार धार्मिक कार्यों का जन्म से मरण तक और  विवाह आदि के भी शाश्त्र हैं !और उन शास्त्रीय  विधियों का श्रद्धा पूर्वक पालन करने से ही उन कार्योँ की सिद्धि होती है !ये सम्पूर्ण शाश्त्र विधियां धर्म ग्रंथों में लिखी हुई है !इनका ज्ञान कर्मकांडी ब्राह्मणो को होता है !इसलिए मूर्ति स्थापना से लेकर बिसर्जन तक के अभी कार्य इन शाश्त्री ब्राह्मणो के निर्देशन में ही सम्पन्न होने चाहिए !अगर इस प्रकार के शाश्त्री ब्राह्मण उपलब्ध ना हों !तो गीता प्रेस गोरखपुर ने सभी देवी देवताओं के पूजन विधान के ग्रन्थ प्रकाशित किये हैं !जो अत्यंत अल्प मूल्य में बाजारों में उपलब्ध हैं !उनको खरीद कर उनमे बर्णित नियमो का पालन कर मूर्ति स्थापना और विसर्जन का कार्य संपन्न किया जा सकता है !इन सभी धार्मिक कृत्योँ के किये प्रमाणित सामग्री सिर्फ गीता प्रेस की पुस्तकों में ही मिलेगी !

Sunday, 27 September 2015

 राजनैतिक स्वार्थ सिद्धि की सीमा ये भारतीय राजनेता कब समझेंगे ?और कब भारत की जनता को गुमराह और युवाओं को भ्रमित करने का काम बंद करेंगे? इन आँख के अंधे और दिमाग से शून्य व्यक्तिगत सत्ता सुख की व्यग्रता में संलग्न इन राजनेताओं को इस लोकतंत्र का स्वरुप और स्वभाव तथा राजतंत्र के समूल नाश के इतिहास की और ध्यान भी क्योँ  नहीं जाता है ?! यह भी नहीं देखना समझना चाहते हैं !कि यह लोकतंत्र की ही शक्ति है जिसने इन्हे सत्ता और महत्ता में प्रवेश करा  दिया है !जो समाज में बंचित और उपेक्छित तथा पीड़ित समझे जाते थे !बे ही आज शासन प्रशासन के शीर्ष पर बैठे हुए हैं !और राजनैतिक सत्ता में भी महत्त्व पूर्ण भागीदारी भी कर रहे हैं !किन्तु बे इस बात को नजरंदाज  कर रहे हैं !कि लोकतंत्र  में सत्ता आमजन के बिकास के लिए होती है !व्यक्तिगत स्वार्थों की पूर्ति के लिए नहीं !और इसके लिए निर्मित कानूनो का पालन उन्हें भी करना पड़ता है ! और लोकतंत्र के स्वरुप और स्वभाव के अनुसार सामान्य से महत्त्व पूर्ण और महत्त्वपूर्ण से सामान्य बन ने की सहज प्रक्रिया को दिल और दिमाग से स्वीकार करना पड़ता है !लोकतंत्र में सभी प्रकार के अधिकार कर्त्तव्य करने के लिए प्राप्त होते हैं !अपने घर परिवार और व्यक्तिगत सुख समृद्धि के विस्तार के लिए प्राप्त नहीं होते हैं !जब राजाओं ने राज्य को अपने सुख और स्वार्थ प्राप्ति का साधन बनाया तो लाखों साल का राज तंत्र भी सूखे पत्तों की तरह हवा में उड़कर नष्ट हो गया !फिर लोकतंत्र तो अभी अपने शैशव  काल  में ही हैं !इस लोकतंत्र का पालन कीजिये !इसको कर्त्तव्य त्याग और निष्पक्छता से  जिन महापुरुषों ने इस लोकतंत्र के लिए सिद्धांत निष्ठा के साथ अपने जीवन की कुर्वानी दी और जिन्होंने जीवित रहकर लोकतंतांत्रिक निष्ठाओं का जीवन पर्यन्त पालन किया !तथा आज जिनका स्मरण सम्पूर्ण विश्व आदर से  करता है !उनके चित्र और चरित्र को अपने राजनैतिक स्वार्थों की पूर्ति के लिए गलत ढंग से प्रस्तुत कर देश के युवाओं को भटकाने का काम बंद कीजिये !और खुद जिस डाल पर बैठे हो उसको काटना बंद कीजिये !भारत माता की जय सिर्फ शब्दों में ही नहीं उनको दिल दिमाग में बैठाकर अपने कर्तव्यों का पालन कीजिये !
लोकतंत्र में सत्ता आमआदमी निर्बाचन के माध्यम से प्राप्त करता है !और लोकतंत्र के विकास के लिए निर्बाचित व्यक्ति का यह उत्तरदायित्त्व हो जाता है !कि वह लोकतंत्र में सत्ता आमआदमी को लोकतान्त्रिक पद्धति से प्रदान करे !यूरोप के मुल्कों में विकसित लोकतंत्र है !इसीलिए वहां अत्यंत सामान्य संघर्ष शील व्यक्ति सत्ता  के उच्चतम पायदान पर पहुँच जाते हैं !और बे सत्ता के माध्यम से लोकतंत्र को विकास शील और शसक्त बनाते हैं !वहां आपको खोजने के बाद भी ऐसे उदाहरण मुश्किल से मिलेंगे की निर्बाचित होने के बाद उन्होंने अपनी आर्थिक उन्नति में विकास किया हो !या परिवार को लाभान्वित किया हो !किन्तु भारत बर्ष में आपको खोजने पर भी ऐसे उदहारण मुश्किलसे मिलेंगे जहां निर्वाचित होने के बाद नेताओं ने अकूत धन संपत्ति ना कमाई हो परिवार को अवैधानिक तरीके से राजनैतिक और आर्थिकलभ ना पहुंचाया हो !अमेरिका के जिन धन मान  से समृद्ध जुकेरबर्ग आदि के उदहारण यहाँ दिए गए हैं !जिन्होंने सामान्य मजदूरों की तरह जीवन का प्रारम्भ किया और आज समृद्धि की उचाई पर पहुँच गए हैं !यह कोई आश्चर्यजनक घटना नहीं है !वहां होटल शराब कि  बार  में मजदूरी करने वाले ऐसे अनगनित उदाहरण मिलेंगे जिन्होंने असाधारण ख्याति और समृद्धि प्राप्त की थी !भारतीय राजनीति में केंद्र में मोदी जी ही  एक मात्र व्यक्तिदिखायी देते हैं !जिनका परिवार उनसे लाभान्वित होता दिखाई नहीं देता है !वह प्रधान मंत्री निवास में एकाकी जीवन जीते है !और कठोर श्रम करते हैं !उनके सगे भाई भतीजे और यहाँ तक की उनकी माता जी भी उनके सरकारी आवास में औपचारिक भेंट करने भी नहीं आ पाते  हैं !बंगाल में ममता बनर्जी और बहुत से अन्य नेता भी हैं !जिनका राजनीति में चरित्र बेदाग है !केरल और त्रिपुरा आदि में भी आपको बहुत से साम्यबादी नेता मिल जाएंगे जो अत्यंत सादगी पूर्ण जीवन जी रहे हैं !केंद्रमें सुरेश प्रभु और पारकर जैसे मंत्री हैं जो लोक में ईमानदार नेता के रूप में प्रसिद्ध हैं !और भी कई नेता हो सकते हैं जिनका चरित्र बेदाग़ हो !राहुल गांधी और सोनिआ गांधी भी उच्चकोटि की ईमानदारी से युक्त हैं !

Saturday, 26 September 2015

मृत्यु के इतने लम्बे समय बाद इस मामले को उठाया जा रहा है !अगर कोई रहस्य उनकी मृत्यु के सम्बन्ध में है जो उनकी मृत्यु को हत्या मानता हो !और यदि उसका रहस्य सरकार के पास हो तो उसे सरकार को शीघ्र प्रकाशित कर देना चाहिए !जो भी लिखित जानकारी सरकार के पास हो उसे जनता के सामने रखने में कोई दिक्कत भारत सरकार को नहीं होनी चाहिए !यह बात ताशकंद समझौते के समय में भी समाचार पत्रों में प्रकाशित हुई थी !कि ताशकंद समझौता रूस के दबाव में किया गया था !और भारत में भी इसका स्वागत नहीं हुआ था !समझौते के विरोध में केंद्रीय मंत्री महावीर त्यागी ने त्यागपत्र दे दिया था !पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब शाश्त्री जी से हाथ नहीं मिलान चाहते थे !कोशिजिन ने अयूब को शाश्त्री जी से हाथ मिलाने के लिए बाध्य किया था !शाश्त्री जी के भासण पर तालियां बजी थी किन्तु भुट्टो ने तालियां नहीं बजाई थी !अयूब को भुट्टो को तालियां बजाने के लिए  को कुहनी से इशारा करना पड़ा था !समझौते के बाद शाश्त्री जी की हत्या समझ में नहीं आती है !क्योँकि पाकिस्तान रूस की मदद से अपने उद्देश्य  में सफल हो गया था !समझौते से लाभ तो पाकिस्तान को ही  हुआ   था
भारतीय प्रधान मंत्री ने अंतर राष्ट्रिय   मंच   पर  यह  अत्यंत     महत्त्व  पूर्ण  मुद्दा  उठाया  है !इस्लामिक संगठन विश्व शांति के लिए सबसे बड़ा खतरा है !प्रधान मंत्री का यह कथन भी सही है !कि आतंकवाद को धर्म से अलग रख कर उस पर विचार करना चाहिए !किन्तु यह कैंसे संभव है ?!कि इस्लामिक संगठन और बोको हराम और हाफिज सईद और कश्मीर में पाकिस्तान समर्थक लोगों की आत्तंकवादी गतिविधियों को धर्म से अलग करके देखा जाय !क्योँकि ये सारे संगठन धर्म के नाम पर ही सारी क्रूर क्रियाओं को अंजाम देते हैं !और जहां तक समाचार पत्रों और इलेक्ट्रॉनिक मीडियामें प्रचारित और प्रकाशित समाचारों से ज्ञात होता है !इन संगठनो के सभी सदस्य मुसलिम १८ वर्ष से ३० साल के युवक और युवतियां हीहोते हैं !इसीलिए विश्व के राज नेताओं को इस पर भी गंभीरता से विचार करना चाहिए कि इन आत्तंकवादी संगठनो को धर्म से कैसे दूर रखा जा सकता है ?
इंदौर के शहर काजी का मक्का हादसे पर यह व्यान कि क्या अल्लाह हमसे नाराज है ?का जबाब काजी ने इस्लाम मजहब के हिसाब से दिया है !अगर इस हादसे का जबाब वैदिक धर्म के हिसाब से दिया जाय तो निश्चित तौर पर जो हिंसा और क्रूरतम कृत्य इस्लाम के नाम पर इस्लामिक संगठन और बोकोहराम  आदि जैंसे संगठनो द्वारा किये जा रहे हैं !उस से अल्लाह कभी प्रसन्न नहीं हो सकता है ! ये आततायी संगठन निरपराध लोगों के क्रूरता पूर्वक शीश काट ते हैं !महिलाओं बच्चियों के साथ बलात्कार करते हैं !जबरन धर्म परिवर्तन कराते हैं !और यह सब करते हुए बे कुरआन की आयतें जोर जोर से पढ़ते हैं !और जो इस्लाम को नहीं मानते हैं !उनको काफ़िर कहते है !और घोषणा करते हैं की जो मुसलमान नहीं है !उनका क़त्ल करना जायज है !और उनकी औरतों के साथ बलात्कार करना उनको बेच देना भी जायज है !जबकि वैदिक धर्म कहता है !कि जो सभी धर्मों का आदर करते हैं !सभी देवताओं को शीश झुकाते हैं !और किसी का भी बध नहीं करते हैं !भगवान उनसे प्रसन्न रहते हैं !किन्तु इस्लाम में यह शिक्छा नहीं दी जाती है !१४०० साल पुराना इस्लाम करोङो बर्ष पुराने सनातन धर्म को नष्ट करना चाहता है !उसके पूजास्थल ध्वस्त करता हैं !पाकिस्तान बांग्लादेश इसके प्रमाण है !अतः यह जो हादसा मक्का  में हुआ है !यह निश्चित ही अल्लाह की नाराजी प्रगट करता है !इसलिए मुसलमानो को इस्लाम के शांति और सद्भाव तथा सबधर्मों के प्रति आदरभाव को विकसित करना चाहिए !और जैसे वैदिक धर्मों में सभी धर्मों का आदर किया जाता है !उसी प्रकार से इस्लाम को भी सभी धर्मों का आदर करना चाहिए !भगवान श्री कृष्ण ने गीता में कहा है कि जो मनुष्य सम्पूर्ण स्थावर जंगम ,चर अचर आदि संपूर्ण प्राणियों में एक ही परमात्मा को परिपूर्ण रूप से स्थित देखता है !और यह अनुभव करता है कि जो परमात्मा की सत्ता हमारे अंदर है !वही परमात्म सत्ता  गाय बकरा आदि में भी है ! तब वह किसी भी प्राणी की हिंसा नहीं करता है ! सब में ईश्वर का दर्शन करता है ! गाय बकरा आदिकी कुर्बानी नहीं करता है ! बल्कि उनका पालन पोषण अपने शरीर और पुत्र आदि की तरह करता है १३(२८) ! जो ऐसा नहीं करता है !वह अपनी आत्मा का स्वयं नाश करता है !वैदिक धर्म की दृष्टि से अगर इस्लामिक संगठन आदि की हिंसात्मक गतिविधियों पर निर्णय दिया जाय !तो यह निष्कर्ष निकलेगा कि अभी तो मक्का  हादसे में सिर्फ अल्लाह ने अपना गुस्सा ही प्रगट किया है !अगर मुसलमानो ने अपनी जीवन दृष्टि और आचरण पद्धति में जीव रक्छा को स्थान नहीं दिया !तो निश्चय ही  अल्लाह का कहर बरपा होगा !
आर के सिंह जी आप अवकाश प्राप्त गृह सचिव हैं !गृह सचिव होने के बाद भी आपको राजनैतिक दलों और राजनेताओं की कर्मकुंडली का ज्ञान नहीं हो पाया !भारत की राजनीति सिद्धांतों पर आधारित राजनीति नहीं है !इसीलिए यह भ्रम पाल लेना कि कोई राजनेता या राजनैतिक दल नैतिकता के आधार पर निर्णय लेगा यह अँधेरे कुँए में प्रकाश तलाशने की तलाश जैसा है !इस स्वार्थनिष्ठ राजनीति के बदलाव में अभी समय लगेगा !यह समय सर्वत्र स्वार्थनिष्ठ व्यक्तियों के मध्य विवेक और धैर्यपूर्वक स्वार्थ रहित देश निष्ठ और सेवा तथा लोकसेवा के लिए स्वभावगत लोकसेवकों को काम करने का है ! कोई भी व्यक्ति किसी राजनैतिक दल के सहयोग से किसी निर्वाचित पद पर पहुंचने   की आकांछा करेगा !तो उसे उस दल के के आतंरिक कुरूप को शांतिपूर्वक स्वीकार करना पड़ेगा ! और सिद्धांत की बातें कहकर स्वार्थों की पूर्ति के लिए संकल्पित होना पड़ेगा इसलिए इस बार अप्प सांसद निर्वाचित हो गए हैं !अगली बार तो आप संसद भी निर्बाचित नहीं हो पाएंगे ! अगर आप इस तरह के वक्तव्य देंगे तो फिर तो आपको भाजपा का टिकट भी नहीं मिलेगा !इसलिए आप सांसद की तरह अपने संसदीय छेत्र का  विकास  करें !

Friday, 25 September 2015

राजतन्त्र के विकल्प के रूपमे भारी कुरबानियों के बाद विश्व के मुसलिम देशों को छोड़कर लोकतंत्र आया !और इस लोकतंत्र का स्वरुप भी साम्यबाद और समाज बाद के रूप में प्रस्तुत हुआ !लोकतंत्र के इन स्वरूपों ने पूंजीबाद पर हमला किया !और प्राकृतिक संसाधनो को व्यक्तिगत मालिकी से छीनकर साम्यबाद ने शाशन को सुपुर्द करने का दर्शन प्रस्तुत किया !और समाजवाद ने समाज के सुपुर्द करने की बात रखी !किन्तु पहले मनुष्य राजा के रूप में सामंत वादी स्वरुप से प्राकृतिक संसाधनो पर काबिज था !लोकतंत्र में मनुष्य साम्यवाद और समाजवाद का चोला ओढ़कर टोली बनाकर प्राकृतिक संसाधनो पर काबिज हो गया !जनता को उसका बाजिब हक़ आज भी प्राप्त नहीं हुआ है !और आज भी संयुक्त राष्ट्र संघ के मंच से प्रधान मंत्री गरीबी उन्मूलन की बात कर रहे हैं !और गरीबी उन्मूलन के रूप में प्राकृतिक संसाधनो को उद्योग पतियों के अधिकार से मुक्त करने के बजाय गरीबों के स्किल बिकास की बात कर रहे हैं !यह तो ऐसा हीहै !जैसे  कोई आग बुझाने का प्रयत्न आग लगाकर करे !हर बर्ष सालों से संयुक्त राष्ट्र संघ के मंच से विश्व की सरकारों के प्रधान मंत्री गरीबी उन्मूलन की बात करते हैं !किन्तु गरीबी घटने के बजाय बढ़ जाती है !जब तक सत्ता में पहुंचे लोगों के ह्रदय में स्वार्थ बृत्ति का अधिपत्य रहेगा ! तब तक वह राजा के रूप में हो या लोकतंत्र में साम्यबदी या समाजवादी के रूप में हो उसके द्वारा आम जनता का शोषण होतरहेगा !और गरीबी कभी भी  समाप्त नहीं होगी !इसीलिए व्यबस्था परिवर्तन के स्थान पर व्यक्ति के स्वार्थनिष्ठ   आचरण में परिवर्तन को प्राथमिकता देनी होगी !क्योँकि व्यबस्था कोई भी हो उसका संचालक और व्यबस्थापक तो मनुष्य ही होगा !अगर मनुष्य नहीं बदलेगा !तो व्यबस्था बदलते रहने का कोई अर्थ नहीं होगा ! इसीलिए गांधीजी व्यबस्था परिवर्तन के साथ चित्त शुद्धि परविशेष जोर देते थे ! मनुष्य को शुद्ध पवित्र प्रेम करुणा और परमार्थ और  आत्मदृष्टि से सभी प्राणियोँ में एक ही आत्मा को जानकर और मानकर सभी के दुःख निवारण के लिए मन बुद्धि चित्त को सुधार करने की साधना न तो समाजवाद में हैं और न साम्यवाद और पूंजीवाद में है !यह साधना भारत बर्ष में गीता ग्रन्थ में है !जो अनासक्ति का उपदेश करके प्रत्येक व्यक्ति को राग द्वेष से मुक्त होकर कर्तव्य कर्म करने की शिक्छा देती है !और मन बुद्धि को रागद्वेष से मुक्त करने के उपाय भी बताती है !
आरक्छण ख़त्म किया जाय ?या ना किया जाय ?यह विचार का विषय हो सकता है ?आरक्छण जाति के आधार पर हो या आर्थिक आधार पर हो ?यह भी विचारणीय है !किन्तु आरक्छन जिन दलित जातियों को दिया गया !और पिछड़ी जातियोँ को दिया गया !क्या उन सभी जातियों को अब तक आरक्छन का लाभ मिला है ?जिन जातियोँ को आरक्छन का लाभ मिला है !उनमे आरक्छन का लाभ कुछ प्रतिशत परिवारों को ही मिला है !जो राजनीति से लेकर प्रशासनिक  अधिकारियों की जगहों पर आरक्छन का लाभ उठाकर माल काट रहे हैं ?इसीलिए इस तथ्य को उजागर करने के लिए सभी सरकारों को स्वेतपत्र जारी करना चाहिए !क्योंकि आरकच्छित  जातियों में भी  सबसे ज्यादा लाभ आरक्छन का कुछ कुछ ही जातियों को मिला है !   शेष !दलित जातियां अभी भी दलितों को प्राप्त आरक्छन से वंचित है !इसी प्रकार पिछड़ी जातियोंके आरक्छन का लाभ भी सिर्फ चंद पिछड़ी जातियों और परिवारों को ही प्राप्त हुआ है !शेष पिछड़ी जातियां अभी भी अरकछन से वंचित है !इसलिए अरकछन का न्याय युक्त विभाजन तो पहले आरकच्छित जातियों में ही  किया जाय !इसके बाद जातिगत आरक्छन के स्थान पर आरक्छन क स्वरुप बदल कर आर्थिक आधार पर किया जाय !

Thursday, 24 September 2015

मध्य प्रदेश सरकार भ्रष्टाचार के मामलों में जीरो टॉलरेंस की बात करती है !जब इस प्रकार की घोसणा कोई सरकार करती है ,तो भ्रष्टाचार से पीड़ित आम जनता को यह आशा बंधती है !कि अब  भ्रष्टाचार पर नियंत्रण होगा !किन्तु भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारी कर्मचारी इस प्रकार की घोसनाओ से जरा भी भयभीत नहीं होते हैं !और ना ही भ्रष्ट आचरण में कोई सुधार लाते हैं भगवान कृष्ण गीता में ३(२१)में कहा है कि सामान्य जन श्रेष्ठ पुरुषों के आचरण कोही प्रमाण मान कर तदनुसार आचरण करते हैं लोकतंत्र में मंत्रियों का आचरण यदि शुद्ध नहीं होगा !तो राज्य के अन्य अधिकारीयों का आचरण भी शुद्ध पवित्र नहीं रह सकता है !यहां कैलाश विजयबर्गीय के भ्रष्टाचार के आरोप के सम्बन्ध में जो उच्च न्यायालय की इंदौर  खंड पीठ ने टिप्पड़ी की है ! कि सरकार बिजयवर्गीय के विरुद्ध अपराधिक प्रकरण पंजीकृत करने के लिए अनुमति नहीं दे रही है !इस से सरकार की भ्रष्टाचार को मिटाने की प्रतिबद्धता संदेह के घेरे में आजाती है !सरकार को शीघ्र विजयबर्गीय आदि के बिरुद्ध अपराधिक प्रकरण पंजीकृत करने की अनुमति प्रदान कर देनी चाहिए !ताकि मध्य प्रदेश सरकार की भ्रष्टाचार के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस की घोसणा अप्रमाणिक सिद्ध न हो
 इस बकरीद का रहस्य हजरत इब्राहीम की खुदापरस्ती  में छिपा हुआ है ! वह खुदा की इबादत   खुदा की राह में अपने आप को कुर्बान करके करते थे !उनके दिल दिमाग में अल्लाह के अलावा और किसी बस्तु का महत्त्व नहीं था !अल्लाह ने उनकी इबादत की परीक्छाली और उनसे उनके पुत्र की कुर्बानी मांगी !अल्लाह की राह में बे तुरत अपने जिगर के टुकड़े को कुर्बान करने के लिए तैयार हो गए !और उनका लखते जिगर भी ख़ुशी  ख़ुशी  अपनी कुर्बानी देने  को तैयार हो गया !अल्लाह अपने इन दो महान भक्तों की कुर्बानी से अभी भूत हो गया !पिता ने अपने पुत्र प्रेम को अल्लाह को अर्पित कर दिया !और पुत्र ने खुसी खुसी अपने शरीर को अल्लाह के लिए क़ुरबानी के लिए सुपुर्द कर दिया !इसीलिए अल्लाह ने इस उच्चकोटि की कुर्बानी को संकेत रूप में स्वीकार  करने केलिए !बकरे को भेज दिया !और बकरा कुर्बान कर दिया गया !तब से यह बकरा कुर्बान करने की परम्परा चालू हो गयी !और हरसाल बकरीद करोङो बकरों के लिए मौत का पैगाम लेकर आती है !मुसलमानो के लिए यह क़ुरबानी होती है !और बकरों के लिए यह मौत की निशानी होती है !इस बकरीद का रहस्य बकरे की कुर्बानी में नहीं है !बल्कि अपनी सबसे प्रिय बस्तु की कुर्बानी में है !क्योँकि जिन बकरों की कुर्बानी दी जाती है !बे बिशेष तौर पर बकरीद के दिन ही अल्लाह की कृपा से जन्म नहीं लेते हैं !अगर मुसलमान बकरीद के दिन अपनी प्रिय बस्तु की कुर्बानी हजरत इब्राहीम की तरह  दें    !तो  अल्लाह की रहमत  उनपर  बरसेगी  !बकरा मुसलमानो की सबसे प्रिय  बस्तु नहीं होती है !वह तो  कुछ  रुपयों  में खरीद  कर कुर्बान कर दिया जाता  है !इसीलिए  अब  बकरीद के दिन कुछ  मुस्लमान  बकरे की कुर्बानी देने के बजाय  मजलूमों  और गरीबों  को बकरी दान  में देने लगे  हैं !इसीलिए   वह गरीब व्यक्ति बकरी का दूध भी खाता है !और बकरी के जो बच्चे होते हैं !उनसे उसको बेचने से आय भी होती है !किसी गरीब को कुर्बानी के बकरे का गोश्त देने से उसका एक दिन का पेट पलता है !किन्तु उसको जीवित बकरी देने से सालों साल उसको दूध भी मिलता रहता है !और बकरी के बच्चों को बेचने से उसको कई साल तक रुपया भी प्राप्त होते रहते हैं !
हिन्दुओं के धार्मिक उत्सवों आयोजनो और तीर्थ यात्राओं में हादसों में प्रायः श्रद्धालुओं के मौत के समाचार आते रहते हैं !इसीप्रकार मुसलमानो की मक्का में भी हज करनेवालों की हादसों में मौत हो जाती है !इन हज पर जाने वालों को इस पर विचार करना चाहिए कि मुहम्मद साहब की पनाह और अल्लाह के लिए हज यात्रा करने वालों की हादसों में ही मृत्यु क्योँ होती है ?आखिर अल्लाह तो रहीम है ! और करीम है !और वह इन्साफ करनेवाला भी है !तो हज यात्रियोँ पर उसकी रहमत क्योँ नहीं होती है ?उसकी नजर से तो कुछ भी पोशीदा नहीं है !और अल्लाह अपनी रहमत से अपने बन्दों को जुदा भी नहीं कर सकता है !किन्तु अल्लाह इन्साफ भी करता है !और उसका इन्साफ कभी गलत नहीं हो सकता है !अल्लाह अपने इबादत करने वाले बन्दों को कभी भी  और अपनी पनाह में आने वालों को हादसों का शिकार नहीं होने दे सकता है !अल्लाह के बन्दों को इन हादसों के सम्बन्ध में इन सभी दृष्टियों से विचार करना चाहिए !और कोशिश करना चाहये कि इस प्रकार के हादसे भविष्य में ना हों !

Monday, 21 September 2015

आपातकाल का समर्थन राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का एक राजनैतिक कदम था ! संघ का एकमात्र उद्देश्य कांग्रेस को देश की सत्ता से बाहर  करने का रहा है !परतंत्र भारत में आजादी की लड़ाई लड़ने वाला एक मात्र राजनैतिक दाल कांग्रेस ही था !जिसमे हिन्दू वादी समाजवादी क्रांतिकारी आदि सभी विचारों के नेता थे ! गांधीजी का उदय राजनीति  में धूमकेतु की तरह हुआ !बे विश्व राजनीति के सबसे प्रभाव शाली व्यक्ति हो गए !कांग्रेस में जोहिंदू वादी नेता थे !बे गांधीजी को  मुसलिम समर्थक और हिन्दू विरोधी मानते थे !इसीलिए देश की संरचना हिन्दू राष्ट्र के रूप में स्थापित करने वाले नेता उनके घोर विरोधी हो गए !परिणामस्वरूप  डॉ हेडगेवार ने राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की स्थापना की ! जिसका मुख्य कार्य  देश में हिन्दू गौरव की पुनः स्थापना करना है !गांधीजी को मुसलिम समर्थक और हिन्दू धर्म का  विरोधी मानने वाले गोडसे ने उनकी हत्या कर दी थी !संघ i पर अनेक बार प्रतिबन्ध लगाए जा चुके हैं ! आपात काल में भी इस पर प्रतिबन्ध लगाया गया था ! स्वयंसेवकों  को जेलों में ठूंस दिया गया था !इनको उत्पीड़न से बचाने के लिए संघ ने आपातकाल का समर्थन किया था
लालू के इस व्यान ने राजाओं के राज समाप्त होनेके पूर्व  उस कथन को जीवित कर दिया है !जब राजा लोग कहते थे ! कि हमारे बाप दादों ने भुजबल से राज्य प्राप्त किया था !उसको ये गांधी कपडे का लत्ता (झंडा ) दिखाकर कैसे समाप्त कर सकता है ?लेकिन राजतंत्र उसी झंडे ने समाप्त कर दिया जिसे राजा लोग लत्ते का टुकड़ा कहते थे !आरक्छण की वकालत लालू ऐसे लोग नहीं करेंगे ?तो और कौन करेगा ?इसी अन्याय युक्त आरक्छण ने लालू के कथन के अनुसार ही होटल में चाय सर्व करनेवाले और भेंस चराने वाले लालू के पास इतनी अकूत संपत्ति इकट्ठी  कर दी है !और इतनी  अधिक राजनैतिक सत्ता प्रदान करा दी है !कि जिस अरक्छित समुदाय से लालू आते हैं !उस अरक्छित समुदाय के प्रत्येक व्यक्ति के लाभ के लिए  १० लाख साल  भी आरक्छण रहे तब भी उनको  लाभ प्राप्त नहीं हो पायेगा !किन्तु दलित हों या पिछड़े इनमे भी चंद  आरकच्छित जातियां और उनमे भी  चंद लोग ही राजनैतिक दृष्टि से सत्ता में सपरिवार बने रहेंगे ! और आरक्छण से लाभ प्राप्त करने वाले चंद लोग ही मलाई और मालमत्ता उड़ाते रहेंगे !किन्तु इस प्रकार के लोग भूतकाल में भी थे !और आज भी है !किन्तु ये सिर्फ राक्छ्सों की तरह पृथवी  का भोग करना ही जानते हैं !और इनका विनाश  स्वयं श्रष्टि का निर्माता ही करता है !इन राक्छ्सों दैत्यों और दानवों की भौतिक शक्तिइतनी अधिक बढ़ जाती है !कि आम आदमी इनका मुकाबला नहीं कर सकता है !इसीलिए लालू यादव का यह कथन सही कि अगर माँ का दूध पिया हो !तो आरक्छण ख़त्म कर के दिखाओ ?बैसे भी माँ का दूध बालपन में ही पोषण प्रदान करता है !बाद में तो गाय का दूध सद्बुद्धि प्रदान करता है !और भेंस का दूध बुद्धि को भौंथरी  कर देता है !और लालू को भेंस का दूध प्रिय है ! !लालू जी आप सुखी और समृद्ध रहें और सपरिवार सत्ता सुख भोगते रहें
इन सभी महापुरुषों की आकस्मिक मृत्यु संदेह के घेरों में है !और इन सबकी मृत्यु के रहस्य का खुलासा आज तक नहीं हो पाया है !किन्तु श्यामाप्रसाद मुकर्जी लालबहादुर शाश्त्री और सुभासचन्द्र बोस की मृत्यु के जो तथ्य प्रस्तुत किये गए है !बे बहुत अधिक संदेहास्पद है !श्यामाप्रसाद मुकर्जी की मृत्यु कश्मीर में हुई थी !बे अत्यंत निर्भीक निडर और उच्चकोटि के राष्ट्रभक्त थे !और जम्मुकश्मीर के भारत में विलय के प्रबल समर्थक थे !इसीलिए बे कश्मीर के उस छेत्र में बिना अनुज्ञापत्र के प्रवेश कर गए थे  !जो जम्मू कश्मीर के भारत में बिलय कप्रेबल विरोधी था !इसीलिए परिस्थितियां इस और संकेत करती है !कि उनकी मृत्यु स्वाभाविक नहीं थी ? शाश्त्री जी के परिवार वालों का यह कथन है !की शाश्त्री जी ने मृत्यु के कुछ समय पूर्व ही प्रसन्न चित्त और स्वस्थ अवस्था में  टेलेफोन से बात की थी !उनके परिवार के लोग भी शाश्त्री जी की मृत्यु को स्वाभाविक मृत्यु नहीं मानते थे !किन्तु इन सबसे अधिक विवाद नेताजी सुभास की मृत्यु का है !कोई भी फाइल उनकी मृत्यु के रहस्य को उजागर नहीं कर सकती है !क्योँकि उनकी मृत्यु १९४५ में हबाई दुर्घटना में हुई !इसके चश्मदीद गबाह उनके साथ उस हबाई जहाज दुर्घटना में घायल होने के बाद भी जीवित बचे कर्नल हवीबुर्रहमान का व्यान है !जिन्होंने नेताजी की दुर्घटना में मृत्यु के पूर्व नेताजी के कथन का  शब्दसः बर्णन किया है !तथा उन्होंने नेताजी की मृत्यु का समय भी बताया था !यह विवरण उन्होंने गांधी जी को रोते हुए बताया था !अगर सुभास बोस की मृत्यु दुर्घटना में नहीं हुई थी !तो वह कब हुई ?कैसे हुई ?इसका रहस्य सिर्फ नेताजी सुभास ही बता सकते थे !किन्तु अब तो निश्चित तौर पर यह कहा ही जा सकता है !कि अब बो जीवितनही है !अगर नेताजी सुभास बोस देश कीस्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भी जीवित थे ?तो उनको छिपे रहने की क्या आवश्यकता थी ?नेताजी की लोकप्रियता देश और विदेश में इतनी अधिक थी !कि स्वतंत्र भारत में कोई भी शक्ति चाहे भारतीय राजनीति की रही हो या इंग्लैंड की रही हो ?या बे युद्ध अपराधी रहे हों ?उनको दण्डित करने की शक्ति किसी में नहीं थी !फिर भी जीवित होने के बाद भी प्रगट ना होना और अज्ञात रूप में रहना !इसका रहस्य नेताजी के सिबा और कौन बता सकता है ? इसीलिए इन सभी की मृत्यु के रहस्य देवकी नंदन  खत्री के लिखे चन्द्रकान्ता संतति उपन्यास के रहस्यों की तरह रहस्य ही बने रहनेवाले है !
तहसीलदार तहसील स्तर पर प्रशासनिक अधिकारी होने  के साथ उसको मजिस्ट्रेट के अधिकार भी होते हैं इसीलिए तहसील दार से यह आशा कदापि नहीं की जाती है !की वह अन्याय भी करेगा ! और झूठ भी बोलेगा !यहां तहसीलदार की यह बात प्रथम दृष्टि में ही झूठी दिखाई देती है !कि जो महिला सांसद के द्वारा हड़पी गयी जमीन के विरोध में धरना दे रही थी !उसकी तबीयत बिगड़ने के कारण उसे बे हॉस्पिटल ले जा रहे थे !इसीलिए उसने अपने कपडे खुद फाड़ लिए थे !और वह मारपीट और कपडे फाड़ने का झूठा आरोप लगा रही है !हमीरपुर के सांसद चंदेल कभी प्रभाव शाली व्यक्ति हैं !उन्होंने मिहला की जमीन हड़पी या नहीं हड़पी ? इसकी जांच करायी जानी चाहिए थी !ताकि आरोप का सही समाधान होता !किन्तु उसके विपरीत उसकी मारपीट की गयी !उसके बस्त्र फाड़ दिए गए !उसको निर्बस्त्र कर दिया गया !और पुलिस सांसद के प्रभाव के कारण मूक दर्शक बनी रही !ये आरोप बिना जाँच के गलत सिद्ध नहीं किये जा सकते हैं !जबकि तहसीलदार का झूठ साफ़ साफ़ दिखाई देता है !अगर अनसन या धरने पर बैठे हुए किसी अनसनकारी या धरना देने वाले की हालत बिगड़ती है !तो उसके स्वास्थ्य की जांच अनसन स्थल पर जाकर डॉक्टर करता है !फिर उसकी जांच के बाद पुलिस उसको डॉक्टर की देख रेख में हॉस्पिटल ले जाती है !यह काम तहसीलदार नहीं करता है !इसीलिए इस प्रकरण की जांच उत्तरप्रदेश सरकार को जिलाधिकारी से कराना चाहिए !और अगर जाँच में मिहला के आरोप सिद्ध हो जाते है !तो तहसीलदार के विरुद्ध कानूनी कार्यबाही की जानी चाहिए !और इस गरीब महिला की  जमीन को भी अवैधानिक कब्जे से मुक्त कराया जाना चाहिए !

Saturday, 19 September 2015

पुलिस अभीतक अपना सामंत वादी रबैया नहीं बदलपाई है !यद्द्पि अब पुलिस में सिपाही से लेकर थानेदार तक कभी पड़े लिखे लोग भर्ती होते हैं !बहुत से सिपाही भी क़ानून की एल एल बी डिग्री धारक भी हैं !इसके बाद भी इनका गरीबों के प्रति व्योहार  बहुत क्रूरता पूर्ण और अमानवीय  होता है !इस प्रकरण में भी दरोगा का ब्योहार अत्यंत अशोभनीय अमानवीय और क्रूर है !जिस प्रकार से इस थाने दार ने बुजुर्ग का टाइप राईटर उठाकर लात से तोडा है !और बुजुर्ग आरजू मिन्नत करता रहा कि उसकी जीविका का साधन यह टाइप राईटर इसको ना तोड़ें किन्तु थानेदार ने उसकी बुजुर्गी और गरीबी का  ध्यान ना देकर उसको तोड़ दिया !इसमें थानेदार ने मानवता की सारी हदें पार कर दी !मुख्य मंत्री जी ने इस घटना का संज्ञान लेकर जो कार्यबाही की और बुजुर्ग के अपमान और टाइप राइटर को देने के लिए जिलाधिकारी और सुपेरिन्डेन्ट को बुजुर्ग के घर भेजा और उसको टूटे हुए टाइप राइटर के स्थान पर नया टाइप राइटर प्रदान किया !और पुलिस सुपेरिन्डेन्ट ने थाने दार की गलती मानकर उसको तत्काल निलम्वित कर दिया !यह सराहनीय कदम है !किन्तु इस प्रकार की घटनाओं की पुनराब्रती ना हो ! इसका स्थायी समाधान भी खोजा जाना चाहिए !पुलिस के ऊपर यह जिम्मेदारी है कि वह फुटपाथों को चाय बेचने वाले ठेला लगाने वाले या अन्य प्रकार से फुट पाथों पर कब्ज़ा करने वालों के विरुद्ध कार्यबाही करे !और फुट पाथों से अनाधिकृत कब्जा करने वालों को हटाये !यहाँ इस थानेदार का इतना ही अपराध है !कि इसने फूटपाथ पर कब्ज़ा करने वालों के साथ अमानवीय व्योहार किया !जो सुपेरिन्डेन्ट जिलाधिकारी !आदि कार्यालयों में बैठकर अधीनस्थ पुलिस अधिकारायिओं विशेषकर थानेदारों के कान ऐंठते रहते है !कि तुम लोग फुट पाथों से कब्ज़ा करने वालों को हटाते नहीं हो ?उसीका यह परिणाम है कि थानेदार इतनी सख्ती करता  दिखाई दे रहा है !हो सकता है !इसने पहले कभी इस फुट पाथ पर कब्जा करने वालों को पहले समझाया हो !और इसके बाद भी ये लोग ना माने हों !और गुस्से में इस अधिकारी ने यह अमानवीय कृत्य कर दिया हो ? एक समस्या और है !कि जो बड़े दुकानदार फुट पाथों पर अवैध  कब्जा किये रहते है !उनके साथ ये पुलिस वाले ऐसा व्योहार नहीं करपाते हैं !क्योँकि बे बड़े दुकानदार होते हैं !और रसूखदार होते हैं !इसीलिए पुलिस वालों को इन गरीब लोगों के साथ भी मानवीय व्योहार करना चाहिए !

Friday, 18 September 2015

मोदी जी के जन्मदिन पर बधायिओं का तांता लगा रहा है !किन्तु मोदीजी को बधाई देने वालों में सत्य का अंश कहीं तारीफ़ के कारण लुप्त रहा !तो बिरोध और मजाक उड़ाने वाली बधाईयों में भी सत्य का अंश गुप्त रहा !सत्ता के शीर्ष पर बैठे लोगों की प्रसंशा करना ये देश के स्वार्थी और लाभ प्राप्त करने वालों के दिल दिमाग  और शब्दों में हाबी रहता है !और यह शब्दानुराग उन्ही के दल के घोर विरोधी नेताओं में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है !भाजपा के नेता मोदी जी की प्रसंशा इसीलिए यथार्थ से अधिक करते दिखाई देते हैं !क्योँकि जो सत्ता पर सबार है !उन्हें भी मोदी जी की प्रसन्नता चाहिए !और जो सत्ता पर सबार होना चाहते हैं !और जिनका मुख संसद या विधान सभाओं की ओर है !उन्हें भी सिर्फ मोदी जी के आशीर्वाद की ही आवश्यकता है !जिन लोगों ने मोदी जी के मजाकिया चित्र प्रस्तुत किये है !और मोदी जी का मजाक उड़ाया है !बे भी  सत्य से बहुत दूर हैं !उनका मोदी जी की खिल्ली उड़ाना उनकी राजनैतिक मजबूरी है !मोदी जी की राजनैतिक जीवन का जो सबसे उज्जवल चित्र है !वह है उनकी व्यक्तिगत ईमानदारी !और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से प्राप्त वैदिक संस्कृति से अगाध प्रेम और अंध राष्ट्र भक्ति !जिसके कारण उनके दल के बहुत से शव्द बहादुर ईमानदारी और राष्ट्र प्रेम का गुण गान करने वाले भ्रष्टाचार में आकंठ डूबे नेताओं पर कठोर नियंत्रण !जिस से केंद्र में किसी भी प्रकार का घोटाला अभी तक नहीं हो पाया है !उनकी राजनीति में परिवार पोषण की बृत्ति का भी अभाव है !वह प्रधान मंत्री निवास में एकाकी जीवन जीते हैं !वहां पर उनकी पूज्य नीय  माता जी तक नहीं जाती हैं !मोदी जी की राजनीति का सबसे अधिक दुःख पहुंचाएं वाला पक्छ है !उनका अम्बानी अडानी और देश विदेश के सभी पूंजीपतियों को महत्ता देना !और देश की अर्थव्यबस्था को पूंजी पतियों के हाथों में सुपुर्द कर देने का प्रयत्न !उनके भारत विकास में गाओं और ग्रामस्वराज का विनाश साफ़ साफ़ दिखाई देता है !ग्रामस्वराज सेही देश का विकास होगा ! और देश में स्वाबलम्बी समाज का निर्माण होगा !यह गांधी जी के जीवन दर्शन का सार तत्त्व   था  !और इसी बुनियाद पर गाओं को मजबूत करने का प्रयत्न किया जाना चाहिए था !किन्तु स्मार्ट सिटी निर्माण योजना में ग्रामस्वराज्य के बिनाश के बीज मोदी जी ने बो दिए है !और जब यह ब्रक्छ फलदेना शुरू करेगा तो गाओं शहरों के गुलाम हो जायेंगे ! मोदी जी के भासणो में सत्यांश कम होता है !उनके भासण राजनैतिक दृष्टि से राजनैतिक लाभ के लिए होते हैं !जो लोकतान्त्रिक देश के प्रधान मंत्री के आचरण के योग्य नहीं है !भाजपा के संगठन और सत्ता के सभी सूत्र मोदी जी के हाथ में है !और मोदीजी के नियंत्रण की डोर संघ के हाथों में है !मोदी जी दीर्घ आयु हों !भारत के राजनेता उनकी व्यक्तिगत ईमानदारी और परिवार से मुक्त रहने से प्रेरणा प्राप्त कर भारत में लोकतंत्र के लिए कार्य करें !किन्तु मोदी जी की राजनीति का अनुकरण ना करें ! i

Thursday, 17 September 2015

समाज में भी समुद्र की तरह तरंगे उठती और गिरती रहती हैं !कभी संसार के प्रति बैराग्य और आत्मा के प्रति अनुराग की लहर उठती है !और बुद्ध ,महाबीर आदि इस लहर को प्रतिबिंबित करते हैं !यह लहर समाज के स्वरूप में तीब्र करुणा प्रेम मानवता अहिंसा आदि के बीज बो देती है !और कुछ समय के लिए सामाजिक जीवन में त्याग तपस्या और मानवता के असंख्य   फलदार ब्रक्छ  दिखाई देने लगते हैं !और सम्राट अशोक जैसे क्रूर शासक भी हिंसा का मार्ग त्याग कर अहिंसक हो जाते हैं !समाज में व्यक्तिगत सुख वैभव के स्थान पर समाज को सुखी समृद्ध बनाने के लिए संकल्पित सज्जनो के समूह क्रियाशील हो जाते हैं !धीरे धीरे यह लहर नीचे गिरना शुरू हो जाती है !और अंत में इस लहर का  नाम और रूप ही रह जाता है !किन्तु इसमें से त्याग और  तपस्या के मूल तत्त्व नष्ट हो जाते हैं !इस समय समाज में निम्नस्तरीय स्वार्थ पूर्ति की लहर पूरे बेग से ऊंचाई पर पहुंची हुई है !इस लहर का स्वाभाविक स्वरुप  और  गतिविधि समाज के हितों को बलिदान कर व्यक्तिगत स्वार्थ की पूर्ति करने का होता है !और इस स्वार्थपूर्ति के लिए धन संपत्ति का  संचय आवश्यक अंग होता है !इसीलिए धन कमाने के लिए लोग सभी अनैतिक साधनो को अंगीकार कर लेते हैं !रेलवे में भी जब ठेके दिए जाते हैं !तो ठेका लेनेवालों से रिश्वत आदि ली जाती है !इस कार्य में दलाल और अधिकारी कर्मचारी सभी शामिल होते हैं !यात्रियोँ को भोजन देने का भी ठेका होता है !यात्रिओं को शुद्ध ,साफ़ और उत्तम भोजन प्रदान किया जाय !इसके लिए खाद्य पदार्थों की गुणबत्ता का विशेष तौर पर वर्णन सिद्धांत रूप में किया जाता है !किन्तु यह सब कार्य ऊपरी तौर पर मात्र दिखाबे के लिए किया जाता है !किन्तु भोजन का ठेका देने केसमय जो ईमानदार भोजन निर्माता है !उनको ठेका ना देकर शिफारिश और सुविधा शुल्क लेकर ठेका दे दिया जाता है !उसका परिणाम यह होता है !कि न तो भोजन सामग्री में उत्तम खाद्द्यान का प्रयोग किया जाता है !और ना भोजन को साफ़ सफाई से बनाया जाता है !इसीलिए कभी भोजन  में कीड़े निकलता हैं !और कभी भोजन वासी ही गरम करके परोश दिया जाता है यहां जिस बात का खुलासा  किया गया है !कि यात्रियोँ का जूठा बचा हुआ खाना गंदे बर्तनो में इकट्ठा किया जाता है !और फिर उसी जूठे खाने को ताजा बने हुए खाने के साथ बढ़िया कागजों में लपेटकर  और प्लेटों  में सजाकर यात्रियों को परोश दिया जाता है !यह बात शिकायत के बाद विजिलेंस टीम ने पकड़ी है !इस से ऐसे दीखता है कि विजिलेंस टीम सिर्फ शिकायत प्राप्त होने पर ही विजिलेंट  होती है !बाकी समय सिर्फ तनख्वाह लेती रहती है !और आराम करती रहती है !यह सब समाज में इस समय स्वार्थ निष्ठा की उठीहुई तरंग  का ही परिणाम है !और इसका दर्शन और प्रभाव भारतीय समाज के सभी अंगो और छेत्रों में दिखाई दे रहा है !किन्तु अब इस तरंग की गति पर भी थोड़ा बहुत शिकंजा कसता दिखाई दे रहा है !इसके रोकथाम का प्रयत्न भी होता रहेगा !किन्तु समाज की यह तरंग भी धीरे धीरे काल के प्रभाव से नीचे गिरना शुरू हो जायेगी !जैसे समुद्र की सभी ऊँची नीची तरंगे समुद्र में ही उठती है !और अंत में समुद्र में ही गिरती हैं !उसीप्रकार समाज समुद्र की तरंगे भी समाज में ही उठती और समाज में ही बिलीन हो जाती हैं !किन्तु समुद्र की तरह समाज का नाश नहीं होता है !रेलवे में जूठा भोजन यात्रियों को परोसने का यह समाचार जरूर यात्रिओं को जागरूक करेगा !और रेलवे प्रशासन भी अपनी जिम्मेदारी समझेगा !और भोजन में इस तरह की गड़बड़ी भविष्य में ना हो इसके लिए विजिलैंट टीम को हमेशा विजिलैंट रखेगा !
गांधीजी ने कहा था कायरता से अच्छी तो कोई भी पद्धति हो सकती है !सुनील पाण्डेय ने अहिंसा और गांधीवाद पर डॉक्टरेट की है !इस से यह मतलब नहीं निकाला जा सकता है !कि यह व्यक्ति वास्तव में अहिंसा की आत्मिक शक्ति प्राप्त कर चुका है !अहिंसा की प्राप्ति आत्मविजय के अधीन है !और आत्मविजय के लिए !जैसा की भगवान श्रीकृष्ण ने ६(२९,३०,३१, ३२)में कहा है  ! जो सबजगह अपने निज स्वरुप को देखने वाला है ! और ध्यान योग से युक्त अन्तःकरणवाला है !तथा  अपने आप को सम्पूर्ण प्राणियों में स्थित देखता है ! और सम्पूर्ण प्राणियों को अपने में स्थित देखता है !ऐसा अहिंसक व्यक्ति कभी भी हिंसा नहीं कर सकता है ! जवह सभी प्राणियों में एक ही आत्मा का दर्शन करता है ! सब में परमात्मा को देखता है  !और परमात्मा मय सम्पूर्ण संसार को देखता है ! उसकी दृष्टि से प्रेम करुणा और प्राणिमात्र के हित चिंतन का भाव  कभी ओझल नहीं होता है !और वह प्राणिमात्र के प्रेम और सद्भाव से कभी भी बंचित नहीं होता है !और  परमात्मा की दृष्टि से भी ओझल नहीं होता है ! आत्मा के एकी भाव  में   स्थित हुआ ही यह अहिंसा का साधक संपूर्ण प्राणियों के कल्याण की भावना से भवित प्रभावित होता है  !और वह अपने शरीर की उपमा से ही सब को सामान दृष्टि से देखता है !सब प्राणियों के शरीरों का रक्छण पोषण अपने ही शरीर के समान करता है वह अपने सुख और दुःख की तरह ही  संपूर्ण प्राणियों के दुखनिबृत्ति और सुख प्राप्त कराने के लिए प्रयत्नशील होता है !उसी को वास्तव में अहिंसक कहा जाता है !यह तो उसीप्रकार के अहिंसक गांधीवादीहै !जैसे राजनीति शाश्त्र के डिग्रीधारी राजनीति नहीं जानते है !और नागरिक शाश्त्र के डिग्रीधारी नागरिकता केसभी गुणों से बंचित होते हैं !कृषि विज्ञान का स्नातक गाय का दूध दुहना नहीं जानता है !सुनील पण्डे को परिस्थिति ने हिंसक और अपराधी बना दिया !अगर उन्होंने वास्तव में अहिंसा को अपने जीवन में उतारा होता !तो बे बिहार को हिंसा मुक्त बनाने की चेस्टा करते !किन्तु शाब्दिक अहिंसा के ज्ञान ने उनको अहिंसक बनने कीसाधना में दीक्छित नहीं किय !यह भी बिहार की बहुत ही विचित्र स्थिति है !की जिस पवित्र भूमि पर महावीर बौद्ध और अशोक जैसे महान अहिंसक रहे हों !जहां नालंदा जैसा संसार प्रसिद्ध शिक्छा का महान केंद्र और अशोक जैसा सम्राट रहा हो !वहां की राजनीति में आज संगीन अपराधों  में लिप्त राजनेताओं का वर्चस्व और महत्त्व होगया है  !समय का उलटफेर और विधि का विधान बड़ा विचित्र होता है !

Wednesday, 16 September 2015

रहमान जन्म से हिन्दू है !किन्तु उन्होंने स्वेक्छा से इस्लाम धर्म कबूल कर लिया है !इसीलिए हिन्दू धर्म के जो धार्मिक  स्वतंत्रता के जन्मजात बीज उनमे है ! बे अचानक उनकी बिना समझ के अंकुरित हो गए !और यह भूल उनसे हो गयी !जिसके कारण उनके खिलाफ मुसलिम विद्वान ने कलमा पढ़ने का यह फतवा उन पर जारी कर दिया !मुझे इस बात की धार्मिक  जानकारीनही है !कि उनको कलमा पढ़ने के लिए क्योँ बाध्य किया जा रहा है? इसका अर्थ यह तो नहीं है !कि अब उनको मुसलमान बने रहने के लिए दुबारा कलमा पढ़ना जरुरुरी है !क्योँकि जब कोई अन्य धर्म का व्यक्ति इस्लाम धर्म स्वीकार करता है !तो उसको कलमा पढ़ना पढता है !कहीं रहमान को इस्लाम से खारिज तो नहीं कर दिया गया है ? इसीलिए उनसे कलमा पढ़ने के लिए फतवा जारी किया गया है ? जबकि उन्होंने यह कहा है कि उन्होंने सिर्फ फिल्म में संगीत दिया है !फिल्म नहीं बनायी है !और न ही बे इस्लाम के विद्वान है !शबाना आजमी का कथन है कि रहमान को चिंता नहीं करनी चाहिए !फतवा उनके खिलाफ भी जारी हो चुका है !सलमान खान आमिर खान आदि के विरुद्ध भी फतवा जारी हो चुके हैं !रहमान  को भी  परेशान और चिंतित  नही होना चाहिए
 इमाम बुखारी और सभी मुसलिम नेताओं को सेक्युलर शब्द का अर्थ खुद समझना चाहिए !फिर सेक्युलर शब्द का प्रयोग करना चाहिए सेक्युलर  अंग्रेजी शब्द है ! जिसका अर्थ होता है !  जो धर्म से सम्बन्ध नहीं रखता है ! जो धार्मिक दृष्टि से पवित्र नहीं है  !जो  नन या सन्यासी नहीं है !इस प्रकार के अनेक अर्थ ऑक्सफ़ोर्ड की डिक्सनरी में दिए हैं !क्या कोई मुसलमान कोरान या पैगम्बर साहब  को ना मानते हुए भी मुसलमान रह सकता है ?क्या पवित्र कोरान का कोमा भी बदला जा सकता है ?मुसलमान को इस्लाम में धार्मिक स्वतंत्रता या बिना इस्लाम मजहब  या कोरान या मोहम्मद साहब को अस्वीकार करने की इजाजत नहीं है !इसीलिए कोई भी मुसलमान सेक्युलर नहीं हो सकता है !हिन्दू ईसाई सेक्युलर हो सकते हैं !हिन्दू नास्तिक  रहता हुए भी हिन्दू बना रहता है !हिन्दू धर्म में हिन्दू को पूरी स्वतंर्ता है ! कि वह हिन्दू धर्म की ईश्वर पुनर्जन्म की अवधारणा को अस्वीकार  कर दे !ईसाई धर्म में भी आपको चर्च को ना मानने वाले बहुत से ईसाई मिल जाएंगे !लंदन में कई जगह लिखा हुआ कि ईश्वर नहीं है !इसीलिए उसकी चिंता मत करो ?बुखारी साहब  को सेक्युलर का अर्थ समझाना चाहिए!
गाय को हिन्दू मुसलिम ईसाई आदि धर्मों से जोड़कर इसकी रक्छा की बात नहीं होनी चाहिए !इसकी दूध घी माखन दही पनीर और सभी भारतीय पकवानो और इसके दूध आदि की पौष्टिकता को ध्यान में रख कर तथा ! इसके मूत्र और गोबर से उत्पन्न होने वाली खाद और इसके औषधीय गुणों को ध्यान में रख कर और मृत्यु के बाद भी इसकी उपयोगिता को ध्यान में रखकर इसके मांश को  ना खाने की बात करनी चाहिए !जो लोग गाय का माष खाते है !उनका कहना है कि इसका माष सस्ता होता है !इसीलिए गरीब लोगों को भी बीफ खाने का अवसर प्राप्त हो जाता है !किन्तु एक गाय के मास  से एकदिन में कुछ लोगों को ही फायदा होता है !किन्तु एक जीवित गाय कई सालों तक अपने दूध आदि से कई परिवारों का पोषण करती है !विज्ञानं ने भी यह सिद्ध किया है !कि गाय का दूध सभी दूध देने वाले जानबरों  से अधिक स्वास्थ्य प्रद होता है !यदि एक गाय का पालन एक परिवार करे तो उसको और उसके परिवार को दूध घी आदि पर्याप्त मात्र में प्राप्त हो सकता है !इसके गोबर और मूत्र तथा सूखे पत्तो आदि की जैविक खाद कृषि की उर्बरा शक्ति बढ़ादेती है !तथा अन्न दालें सब्जियां आदि भी अत्यंत स्वास्थ्यप्रद होती हैं !जो आज किसान राशायानिक खादों  का प्रयोग कर रहा है !उस से भूमि की उर्बराशक्ति नष्ट हो रही है !तथा दूध और सब्जियां और खाद्यान भी जहरीला हो रहा है !इसके अलावा भारी मात्रा में स्वदेशी धन विदेशों में रासायनिक खादें खरीदने में चला जाता है !तथा दुधाररु पशुओं के नाश होने से बाजारों में केमिकल से निर्मित दूध चर्बी से निर्मित घी बिक रहा  है !जिस से लोग भारी मात्रा में गंभीर रोगों से ग्रस्त हो रहे हैं !इन सब बातों को ध्यान में रख कर गाय की उपयोगिता को ध्यान में रखकर गाय की रक्छा पर विचार करना चाहिए !भारत में अनादि काल से निर्मित माबा और देशी घी से निर्मित मिठाईयां मिलाबटी घोषित की जा रही हैं !और विदेशी चॉकलेट आदि जो सुअर की चर्बी और गाय के मांश से निर्मित होती हैं !देश में बिकरही हैं !जिनको हिन्दू मुसलिम  बूढे बच्चे सभी खा रहे हैं !
पेटलाबाद कसा मुख्या आरोपी राजेन्द्र कास्वा राष्ट्रिय स्वयंसेवक संघ का स्वयं सेवक है कि नहीं ?इस मामले में भिन्न भिन्न राय हो सकती है ! क्योँकि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के स्वयं सेवक होने का कोई रिकॉर्ड नहीं होता है !इसीलिए यह सिद्धकरना संभव नहीं है कि कौन संघ का स्वयं सेवक है !और कौन नहीं है ?किन्तु वह निश्चित तौर पर भाजपा का सदस्य था ! और  प्रदेश की भाजपा सरकार  के संरक्छण में रहकर ही  यह अत्यंत अवैध प्राणघातक बिष्फोटक संग्रह बिना किसी वैध अनुज्ञापत्र के संग्रह किया हुए था !उस अवैध डेटोनेटर के संग्रह और अवैधानिक प्रयोग से आम जनता के प्राणो पर कभी भी गंभीर संकट उपस्थित हो सकता है !इसकी चेतावनी जिला प्रशासन और प्रदेश के मुख्य सचिव तक को दी जा चुकी थी !इसके बाद भी राजेंद्र कास्वा के विरुद्ध ना तो कोई कानूनी कार्यबाही की गयी और न इस खतरनाक बिष्फोटक को हटाया गया !परिणाम स्वरुप भयानक दुर्घटना घटी जिसमे १०० से भी अधिक नागरिकों की मृत्यु हुई !और बहुत से लोग घायल हुए !आज देश में जिस दल की सरकार होती है !उसी दल के नेताओं को बालू गिट्टी मोरम सड़क भवन निर्माण के ठेके दिए जाते हैं !सरकारी पूरी विकास योजनाएं इन्ही नेताओं के द्वारा क्रियान्बित होती है !इसमें इन्ही नेताओं के चहेते अधिकारी नियुक्त किये जाते हैं !जो नियमो और कानूनो का उल्लघन कर इन नेताओं को अवैधानिक लाभ पहुंचाते हैं !ये नेता और अधिकारी घोर भ्रष्टाचार के पर्याय बाची बन गए हैं !कुछ लोग राजनीति भी करते है और व्योपार भी करते हैं !किन्तु ऐसे लोग जिनकी पार्टी के प्रति प्रतिबद्धता  होती है !बे दलबदल नहीं करते हैं !किन्तु जो राजनीति से व्योपार करते हैं !बे सत्ताधारी दल के सदस्य बनकर अवैधानिक लाभ उठाते हैं !इस समय भाजपा में ऐसे अवसर परस्त स्वार्थी नेताओं का प्रभाव बढ़ गया है !उसी का परिणाम यह भयानक दुर्घटना है !राजेन्द्र कास्वा निश्चित ही प्रदेश की भाजपा सरकार में एक प्रभाव शाली नेता था !अब ये जो सरकारी छापामारी चल रही है !यह जले पर नमक छिड़कने जैसा है !इसकी जाँच का कोई सार्थक परिणाम आने वाला नहीं है !अपराधी  की जाँच जब  अपराधी को बचाव करने वाले अधिकारी ही करेंगे !इसका उत्तम उपाय तो यह है !निष्पक्छ कानून बिद इसकी जाँच करें !और जो जाँच के परिणाम स्वरुप अपराधी पाये जाएँ !उस रिपोर्ट को न्यायालय के माध्यम से अपराधियों को दण्डित कराने का प्रयत्न करें !

Tuesday, 15 September 2015

भारत विश्व का प्राचीनतम देश हैं !यह भूतकाल में विश्व गुरु कहलाता था !उसका कारण भी यही था कि आध्यात्मिक ज्ञान की जीवन पद्धति यहीं से विश्व को प्राप्त हुई थी !भगवान श्री कृष्ण ने गीता १७(२३)में कहा है कि परमात्मा का निर्देश ओम तत सत इन  तीन प्रकार के नामों से होता है !इन्ही  तीन नामों से परमा त्मा का संकेत किया गया है ! उसी परमात्मा ने श्रष्टि निर्माण के समय ही वेदों तथा ब्राह्मणो और यज्ञोँ की रचना की थी !अर्थात परमात्मा के ज्ञान और जीवन जीने की कला का ज्ञान वेदों में स्वयं दिया था !और वेद ज्ञान को समझ कर उस ज्ञान का स्वयं आचरण करने वाले ब्राह्मणो की रचना भी परमात्मा ने कीथी !और जीवन जीने की कला तथा बिभिन्न प्रकार की  आध्यात्मिक साधनाओ के द्वारा श्रष्टि के भौतिक पदार्थों अर्थात  संसार के निर्माण में प्रयुक्त होने वाले पृथ्वी जल अग्नि वायु और आकाश को बिना छति पहुंचाए आत्मशकि से ही प्राप्त शक्ति से सभी लौकिक पारलौकिक  स्वर्ग नर्क आदि की प्राप्ति और अंत में  मोक्छ प्राप्ति का विधान भी यज्ञोँ के माध्यम से संसार के सामने ब्राह्मणो ने यज्ञीय जीवन पद्धति को अपने आचरण में उतारकर संसार के सामने रखा था !वेदों ने ही लोक व्यबस्था में धर्मकी स्थिति का सही चित्रण प्रस्तुत करते हुए !काल को चार विभागों सतयुग त्रेता द्वापर और कलियुग में विभाजित कर दिया था !तथा युगानुसार धर्म  की स्थिति भी बतायी थी !यह कलियुग चल  रहा है !अभी इसको सिर्फ ५४०० बर्ष के लगभग  हुआ है !इसकी आयु ४३२००० बर्ष  बतायी गयी है !और इस युग के बारे में कहागया है !कि इस युग में सनातन धर्म नष्ट होजायेगा !और वेद द्वारा प्रतिपादित व्यबस्था का पालन कराने वाले लोग आचरण भ्रष्ट हो जाएंगे !और अनेक प्रकार के पंथ मजहब उत्पन हो जाएंगे !जो भारत की वैदिक संस्कृति का नाश करेंगे !कलियुग को घोर अधर्म युग कहा गया है !इसमें जीवन जीने की कला और इन कलियुगी मजहबीं और मतों से वैदिक संस्कृति के साधू संतो सन्यासियोँ द्वारा अपनी तपस्या से सनातन  धर्म को सुरक्छित और संरक्छित करने के लिए विधियां बतायी गयी है !रामायण ,गीता महाभारत  उपनिषद् आदि इसी सनातन धर्म की सुरक्छा के लिए आसान साधना के उपाय प्रस्तुत करते हैं !भारत की लगभग १३०० साल की गुलामी ने  भारत वासियों की वैदिक संस्कृति को नष्ट करके अपने अधूरे धर्मों को प्रवेश करा दिया है !और देश में कुछ लोगों ने लालच और लोभ से तथा कुछ ने भय से इन विदेशी धर्मों को स्वीकार कर लिया है !और कुछ विदेशी विद्वानो ने श्रष्टि के सृजन के अपने अधूरे  और कल्पित दृष्टि कौण इतिहास में प्रविष्ट करा दिए !तथा  इसी प्रकार के झूठे और मनगढंत इतिहास ने अकबर को महान और उसके समय में देश की आर्थिक सामाजिक स्थिति को स्वर्ण युग निरूपित कर दिया है !जबकि अकबर के समकालीन तुलसीदास जी ने उस समय की भारत की दीन दशा का बहुत ही मार्मिक और दर्द भरा चित्र प्रस्तुत किया है !अकबर के विरुद्ध युद्ध करने वाले महान योद्धा और देश की धर्म संस्कृति स्वाभि मान के लिए लाखोँ स्त्री पुरुषों के बलिदानो का कोई जिक्र नहीं है !अकबर अत्यंत अय्याश और वैदिक संस्कृति को नष्ट करने वाला और मुग़ल सल्तनत को भारत में विस्तार देने वाला साशक था ! !जिसने  वैदिक संस्कृति को नष्ट करने के लिए चंद स्वार्थी राजपूत  राजाओं के सहयोग से और कुछ चाटुकार हिन्दू दरबारियोँ के माध्यम से कुशल साशक  के रूप में मुगलिया सल्तनत को स्थापित किया !और सामजिक और धार्मिक रूप से वैदिक धर्म का नाश किया !उसी का उदाहरण ये ज्वाला मुखी देवी की ज्वाला नाश  करने का उसका कुत्सित प्रयत्न था जिसमे वह बिफल हुआ !ऐसे और भी अनेक वैदिक संस्कृति के नाशक अकबर के प्रसंग हो सकते हैं !जिनको उजागर किया जाना चाहिए !

Saturday, 12 September 2015

सिलिंडर फटने से इतना भयानक बिस्फोट और हादसा होना संभव नहीं है !यह हादसा तो किसी घर में संग्रहीत विस्फोटिक ज्वलनशील सामग्री से ही होना संभव है !इस तथ्य की जांच गहराई से और निष्पक्छता से होनी चाहिए !यह जाँच प्रसाशनिक अधिकारी नहीं कर पाएंगे !क्योँकि इसमें प्रसाशनिक लापरबाही मालूम पड़ रही है !कहीं ना कहीं इसमें बिस्फोटक सामग्री को अवैधानिक तरीके से रखने कीबात समझ में आती है !इसलिए इसमें किसी सामाजिक संगठन को आगे आकर जाँच करना चाहिए !अगर यह काम कोई कानून की जानकारी रखने वाले संगठन अपने हाथ में ले !और इसके परिणाम जाँच में अधिकारियों की लापरबाही के सही पाये जाएँ तो उनके विरुद्ध आपराधिक प्रकरण न्यायलय में प्रस्तुत किये जाएँ !राज्य सरकार तो इसमें लीपा पोतिकर अपने को बचाने की पूरी चेस्टा करेगी !जिस प्रकार भारत में ब्रिटिश हुकूमत के दौरान समाज सेवी लोग समितियां गठित कर सरकारी उपेक्छा और अन्याय की जांच कराती थी !उसी प्रकार की प्रक्रिया अब समाज सेवी संगठनो को अपनाना चाहिए !यह हादसा अत्यंत भयानक है ! इसमें अनगिनित नागरिकों बच्चों और महिलाओं की मृत्यु हुई है !इसिलए इसको सिर्फ प्रसाशनिक अधिकारियों की मनगढंत और फर्जी रिपोर्टों के आधार पर मानवीय जीवनो का आकलन कुछ रुपयों का मुआबजा देकर समाप्त नहीं किया जा सकता है !लोकतंत्र जागरूक स्वतंत्र नागरिकों की निष्पक्छ भागीदारी और जिम्मेदारी से ही सफल हो सकता है !लोकतंत्र सिर्फ शासन  करने की प्रणाली ही नहीं है !यह आम जनता की शक्ति को जाग्रत कर उसको जिम्मेदार बनाने की प्रक्रिया भी है ! इस प्रक्रिया का क्रियानबन  देश में लोकतांत्रिक सरकारों ने समाप्त कर दिया है !और बे अब प्राचीन काल के राजाओं और महराजाओं की तरह कार्य कर रहे हैं !आम जनता से निकले और मतदाताओं के समर्थन से लोकतांत्रिक सत्ता प्राप्त करने वाले ये आम आदमी अब विशिष्ट बन गए हैं !इनकी जीवन शैली राजाओं की हो गयी है !और ये लोकतंत्र के मूल सिद्धांत भूल गए हैं  !इनके शब्दों में लोकतंत्र और आचरण में राज तंत्र आ गया है !यही कारण है कि आमजन परेशान है ! और ये मौज मजा कर रहे हैं !और ऐसे भयानक हादसों को भी सिलिंडर फटने से होने वाली घटना निरुपत कर मामूली मुआबजा देकर अपनी जिम्मेदारी समाप्त मान रहे हैं !
अरहर और उड़द की दाल की पहली खेप देश में २३ सितम्बर तक आजायेगी !और बाजारों तक पहुँचने में इस आयातित दाल को काम से काम एकमाह का समय लगेगा !और इसकी सरकारी कीमत राज्य सरकारें करेंगी इसमें भी काफी समय लगेगा !तब तक बाजार में भारतीय फसलों में उत्पादित अरहर मूंग उरद  की डालें बाजारों में आचुकी होंगी !और भारत में उत्पादित दलों को किसानो को सस्ता बेचना पड़ेगा !और नुक्सान भारतीय किसानो को उठाना पड़ेगा !उरद की दाल तो लगभग तैयार हो चुकी है !और उसका तो बाजारों में आना शुरू भी हो चुका है !अब समझने की बात यह है !कि फसल पर मूंग उरद अरहर की दालें कृषकों से सस्ते में खरीदी गयी थी !और व्योपरियों ने महगी बेचकर भारी मुनाफा कमाया  !और अभीभी कमा रहे हैं !और अब  जब किसानो की दालों की फसल तैयार होके बाजार में आने वाली है !तब ये आयातित दालें आगयी हैं !इस से भी किसानो को ही नुक्सान होने वाला है !किसान फसल खराब होने से परेशान ! अकाल और सूखा पड़ने से परेशान !और कृषि में उत्पादित अनाज दालों की उचित कीमत प्राप्त ना होने से परेशान !अब किसानो को इन तमाम प्रकार की परेशानियों से मुक्ति कैसे मिले ?सरकार जो कदम किसानो के हित में उठाती है ! उनसे भी उसे नुक़सानहोता है !और जो नहीं उठाती है ! उनसे भी उसे नुकसान होता है !प्राचीन भारत कृषि गाय पालन और व्योपार को वार्ता धर्म कहा जाता था !और प्रत्येक राजा इस बार्ता धर्मकी पूरी रक्छा करता था !इस समय इस वार्ता धर्मकी रक्छा नहीं हो रही है !और निकट भविष्य में इसकी रक्छा कोई भी सरकार नहीं कर सकेगी !क्योंकि सारे तंत्र में रुपया कमाने और किसीभी प्रकार से सत्ता महत्ता प्राप्त करने की अवांछनीय आकांछा बढ़ गयी है !यह सुधार जनसहयोग से ही संभव हो पायेगा !और जन सहयोग का स्वरुप सर्व तंत्र रचनात्मक सहयोग से होगा !इसको रोकने में अकेलीसरकार या अकेली जनता सफल नहीं हो सकेगी !इसकी सफलता तो समाज शरीर के सभी भागों के सहयोग से ही होगी !किन्तु यह कब तक होगी ?कैसे होगी ?इसका रोड मैप कब बनेगा ? कौन बनाएगा ?ये प्रश्न सब समय के पास है !किसी व्यक्तिया संस्था के पास नहीं है. !

Friday, 11 September 2015

यह कथा की श्रीकृष्ण और द्रौपदी में विवाह की कोई बात चीत  चली थी !गीता प्रेस द्वारा प्रकाशित महाभारत में नहीं है ! महाभारत एक मात्र ऐसा ग्रन्थ है !जिसमे उस काल की सारी घटनाओं का सही विवरण प्रस्तुत किया गया है ! द्रौपदी का विवाह तो स्वयम्बर में एक शर्त को पूरा करने के बाद ही हुआ था !उस स्वयम्बर में देश देशान्तर के सभी विवाह के इक्छुक राजा  उपस्थित थे !पांडव ब्राह्मण बेश में थे !तथा सभी पांडव ब्राह्मण वेश में एक कुम्भकार (कुम्हार के घर में निवास कर रहे थे )और भिक्छा मांगकर अपना जीवन यापन करते थे !द्रौपदी के स्वयम्बर में किसी को भी यह जानकारी नहीं थी !कि ब्राह्मण के बेश में पांडव मौजूद हैं !जब सभी राजा स्वयम्बर की शर्त पूरी करने मै असफल हो गए !तब ब्राह्मण वेश धारी अर्जुन ने स्वयम्बर की शर्त पूर्ण की !उस काल में स्वयम्बर प्रथा सिर्फ छत्रियों में ही प्रिचलित थी !ब्राह्मण स्यम्बर में शामिल नहीं हो सकते थे !इसका स्वयम्बर में उपस्थित दुर्योधन कर्ण जरासंध शल्य शिशुपाल आदि राजाओं ने विरोध भी किया था !उस स्वयम्बर में श्री कृष्ण और बलराम भी उपस्थित थे !और इस स्वयम्बर के पहले पांडवों और श्रीकृष्ण की मुलाक़ात  का महाभारत में कोई कथानक नहीं है !भगवान श्री कृष्ण ने यह अनुमान लगाया कि ब्राह्मण वेश में अर्जुन ही हो सकते है ! इसके बाद कुम्भकार के घर में श्री कृष्ण और बलराम की प्रथम मुलाक़ात होती है !यह बात सभी ने स्वीकार कर ली थी कि पांडवों की मृत्यु लाक्छाग्रह  में हो चुकी है !धृतराष्ट्र सहित सभी कौरवों ने पांडवों और कुंती आदि का श्राद्ध भी कर दिया था !सखी शब्द गीता में १(२६)में आया है !और वह भी कुरुक्छेत्र में उपस्थित सभी योद्धाओं का वर्णन करते हुए !अर्जुन ने किया है !सखी शव्द का प्रयोग मित्र के लिए किया गया है !और यह संस्कृत में स्त्रीलिंग नहीं है !द्रौपदी भी श्रीकृष्ण से यह कहती है !की आपको मेरी मदद इसीलिए करनी चाहिए क्योँकि (१)में यज्ञ से उत्पन्न हुई हूँ १(२)में आपकी सखी हूँ!(३) आप मेरी मदद करने में समर्थ हैं !यह बात द्रौपदी भगवान श्री कृष्ण से जब कहती है !जब श्रीकृष्ण कौरवों और पांडवों के मध्य शांति स्थापित कराने के लिए हस्तिनापुर  को प्रस्थान कर रहे थे !द्रौपदी  कौरवों को उसके साथ राज दरबार में कौरवों और कर्ण द्वारा किये गए  अपमान का बदला लेना चाहती थी !इसीलिए वह कौरव पांडवों के मध्य युद्ध अवश्य हो इसकी प्रबल समर्थक थी !और उसने शांति प्रस्ताव  का यह कहकर प्रबल विरोध किया था !कि अगर पांडव कायरता बस कौरवों से संधि कर लेते हैं !तो मेरे पिता भाई और मेरे पुत्र मेरे अपमान का बदला कौरवोँ से युद्ध करके  अवश्य लेंगे ! यहाँ जो बताया गया है !कि श्री कृष्ण के साथ द्रुपद द्रौपदी का विवाह करना चाहते थे !किसी अन्य पुराण आदि में हो सकता है !किन्तु यह प्रसंग महाभारत में नहीं है !
गाय के बध को जम्मुकश्मीर उच्चन्यायालय ने प्रतिबंधित कर दिया है !जिसका तीब्र विरोध मुसलिम समाज द्वारा किया जारहा है !बहुत से मुस्लमान दूकानदार जो पचासों साल से गाय का मांश बेच कर अपना और अपने परिवार का पालन पोषण कर रहे थे !उनका कहना है की गाय के बध को प्रतिबंधित करने से हम भूंखो मर जाएंगे !मुसलिम धार्मिक नेताओं का कहना है !की हमारे धर्म में गाय का गोश्त खाना हलाल है !इसीलिए हम पीढ़ियों से गाय का गोश्त खाते चले आ रहे हैं !शादियों में भी गाय का गोश्त खाया जाता है !क्योँकि यह सस्ता होता है !अगर  ये मुसलमान अपने इतिहास को देखें और जाने समझें की येमुसलमान होने के पहले कौन से धर्म से सम्बंधित थे ?और इनको मुसलमान बने कितना समय हुआ है ?और मुसलमान बनने के पहले जिस धर्म को लाखोँ बर्षोँ से इनके पूर्बज मानते रहे !बे गाय का मांश खाते थे ?या गाय का दूध घी खाते थे ?और जिन लोगों ने अपना धर्म नहीं बदला है  !   बे क्या आज भी गाय का गोश्त खा रहे हैं? !या गाय का घी दूध खाते हैं ?अगर बे गाय का घी दूध खाते है !तो इन हिन्दू से धर्मपरिवर्तन कर  मुसलमान बने लोगों को भी गाय के गोश्त को खाने के बजाय अपने पूर्बजों की तरह गाय का घी दूध खाना शुरू कर देना चाहिए !और जो दुकानदार गाय का गोश्त बेचते थे !उन्हें भी गाय का घी दूध बेचना शुरू कर देना चाहिए !जब ये मुसलमान हिन्दू थे ! तब गाय को मारने के योग्य नहीं मानते थे ! और ना उसका गोश्त खाते थे अब ये मुसलमान हो गए हैं !तो गाय को काटना और खाना धर्म मान ने लगे हैं !गाय क्या गोश्त खाती है ?गाय घास और भूसा  खाती है !तो घास खाने वाली गाय का गोश्त इन मुसलमानो को क्यों खाना चाहिए ?ये लोग मांश खाने वाले शेर और अन्य मशाहारी जानबरों  का माष क्यों नहीं खाते है ?घास खाने वाली गाय का उपयोग इनको दूध घी मक्खन पनीर रबड़ी मलाई कलाकंद पेड़ा आदि के लिए करना चाहिए  !और मांश खाने वाले शेर आदि कामांश खाना चाहिए !अल्लाह करीम है ! रहीम है! और इन्साफ करने वाला है ! तो इन गायों के लिए भी तो अल्लाह रहीम और करीमहै ! तथा इनके साथ भी इन्साफ करने वाला है अब अल्लाह ने अपनी दया प्रेम और करुणा तथा रहमत की नजर सीधी साधी घास और हरी सुखी पत्ती खा कर घी दूध खाद आदि देने वाली गाय पर भी करदी है ! और अब अल्लाह इनके साथ भी इन्साफ कर रहा है ! इसीलिए उच्च न्यायालय ने गाय के बध को प्रितिबंधित कर दिया है !अब मुसलमानो को भी अल्लाह की गायों पर इस रहमत की नजर का स्वागत कर गाय के  बध  पर प्रितिबंध लगाने वाले  न्यायलय के आदेश का पालन करना चाहिए !और गाय को भी ज़िंदा रहने का हक़ प्रदान कर देना चाहिए !इसी में अल्लाह की रजा है और मुसलमानो का मजा है !
बिड़ला  परिवार भारत के श्रेष्ठतम धार्मिक परिवारों में रहा है !संपूर्ण भारत बर्ष के प्रमुख तीर्थ स्थानो में बिड़ला ने भव्य मंदिर ओरतीर्थ यात्रियों के लिए निशुल्क निवासों का निर्माण भी कराया है घनश्याम दस् बिड़ला जमुना लाल बजाज और जे आर डी टाटा गुलाम भारत में उद्द्योग पति होते हुए भी गांधी जी के सभी रचनात्मक कार्यों में सहयोगी रहे !जमना लाल बजाज तो गांधी जी का अपने आप को पांचवा पुत्र कहते थे !उन्होंने तो स्वतंत्रता आंदोलन  में सक्रिय भाग भी लिया  और जेल यात्राएं भी की !बे गांधी जी के अत्यंत आज्ञाकारी पुत्र थे !गांधी जी का सेवाग्राम उन्ही के द्वारा दी गयी जमीन पर बना है !गांधी जी जब १९३६ में उस आश्रम में रहने आये !तो इसके पहले उन्होंने जमनालाल बजाज को पात्र लिख कर कहा था !की मेरे लिए जो कुटी बनायी जाय उसका खर्च १०० रूपए से अधिक नहीं होना चाहिए !तथा उसमे किसी भी विदेशी सामान का उपयोग नहीं होना चाहिए !जमना लाल बजाज ने अपनी जमीदारी की बहुत अधिक कृषि भूमि भी गांधी आश्रम को दान में दी !और जो परमधाम आश्रम जहाँ आचार्य विनोबा भावे अंतिम समय तक रहे वह bhum भी जानकीदेवी बजाज ने दी हैं !बे विनोबा जी की परम भक्त जीवन पर्यन्त बानी रही !वर्धा जिले में जितनी भी गांधी जी की रचनात्मक संस्थाएं सैकड़ों एकड़ जमीन में फैली हुई हैं !बे सब बजाज परिवार के द्वारा ही दी गयी हैं !गीता और गाय के लिए अनुदान और प्रत्येक बर्ष जमना लाल बजाज शांति पुरुष्कार किसी श्रेष्ठ गांधी वादी को बजाज फाउंडेशन दवरा प्रदान किया जाता है !घनश्याम दस बिड़ला गांधी जी के परम अनुयायी थे !गांधी जी और बिड़ला के पत्राचारों में घनश्याम दास बिड़ला की गांधी जी के रचनात्मक कार्यों के प्रति भक्ति प्रगट होती है !बिड़ला जी ने एक बार गांधी जी को अपनी समस्त संपत्ति देश हित के कार्यों के लिए देने की पेश कश की थी !किन्तु गांधी जी ने कहा था कि देश को तम्हारी संपत्ति की नहीं तुम्हारे दिमाग की आवश्यकता है !गो सेवक संघ के बिड़ला जी प्रथम अध्यक्छ थे !बे जीवन भर सादगी और संयम का जीवन जीते रहे !बे नित्य १० मील लौटा बाट घूमते थे !उन्होंने अपनी बसीयत में लिखा था की जहां उनकी मृत्यु हो उनका अंतिम संस्कार वहीं कर दिया जाय !राजा बलदेवदास बिड़लाभी बहुत दान करते थे !बिड़ला परिवार ने उद्द्योग्पति के रूप में और घनश्याम दास बिड़ला ने देश के रचनात्मक कार्योँ में अभूत पूर्व योगदान दिया !और सनातन वैदिक धर्म को भी संरक्छित किया गांधी जी कि मृत्यु भी बिड़ला भवन परिषर् में ही हुई थी !जिसे बिड़ला परिवार ने देश को अर्पित कर दिया है !बे   गांधी जी कि आज्ञा पालन के लिए तत्पर रहते थे !
आज ऋषि परम्परा को सामाजिक जीवन में प्रवेश करा देने वाले महान ऋषि आचार्य विनोबा भावे का जन्मदिन है !उनकी जीवन साधना अपने नाम धाम को परम शक्ति में बिलीन कर देने की थी !यही ऋषि परंपरा भारत की आध्यात्मिक परंपरा रही है !जिसमे उपनिषद जैसे सूक्छम आध्यात्मिक ज्ञान को विश्व को देने वालों के नाम धाम का सही पता लगा पाना आज भी खोज और शोध का विषय बना हुआ है !भले ही विनोबा का प्रयत्न लोकदृष्टि से बचने का रहा हो !किन्तु गांधी जी जिन्हे राष्ट्र पिता कहा जाता है !और जिनकी पहचान विश्व पटल पर महापुरुषों के महा पुरुषों के रूप में जानी जाती है !उन गांधी जी ने विनोबा को पत्र लिख कर कहा था !कि विनोबा में नित्य प्रति सेकंडों लोगों से मिलता हूँ !किन्तु तुम्हारे जैसी पवित्र आत्मा का दर्शन नहीं होता है ! !लोकप्रतिस्ठा से दूर रहने वाले विनोबा ने इस पत्र को भी रद्दी की टोकरी में फेक दिया था !किन्तु विनोबा का जीवन लोकसेवा का अनूठा उदहारण पेश करता है !इसीलिए उसको कितना भी छिपाया जाय !उसको तो उजागर होना ही पड़ेगा !विनोबा को हम सर्वोदय के जनक के रूप में स्मरण कर सकते हैं !गांधी के निधन के समय सर्वोदय एक बीज रूप मन्त्र के रूप में विद्यमान था ! यह शव्द अभी बहुजन समाज के लिए अपरिचित था ! मार्च १९४८ में जब गांधी जन सेवाग्राम में मिले तब गांधी परिवार को सर्वोदय समाज नाम देने के लिए गांधीजन तैयार नहीं थे ! लोगों का कहना था कि अगर गांधी जनो सर्वोदय समाज नाम दिया जाएगा तो देश का बहु संख्यक समाज इसे समझ नहीं पायेगा ! तब विनोबा कहा अगर इसे गांधी जन अपनी कृति से लोगों के सामने उतारेंगे तो लोग इसे आसानी से समझ जाएंगे ! उन्होंने कहा इसके लिए तपस्या करनी होगी गांधी जी कि यही विरासत है अभी यह विचार बीज रूप में गांधी जी द्वारा बोया गया है ! और वह अंकुरित  होकर  फूलेगा  फलेगा और सारी दुनिया मै फैलेगा हम को अपने चिित के मेल धो डालने होंगे ! हम नए मनुष्य बनेगे ! अहिंसा का संशोधन करेंगे  !अपनी आत्मशक्ति का निरीक्छण करेंगे ! विनोबा अब इस मिसन के लिए पूर्ण रूप से समर्पित हो चुके थे  !इसिलए घोषणा कर दी की जब तक भूदान यज्ञ का कार्य सिद्ध नहीं होगा तब तक आश्रम का आश्रय भी छोड़ता हूँ ! यह अहिंसक क्रांति का यज्ञ है ! युग पुरुष की मांग है ! मुझे ५ करोड़ एकड़ जमीन चाहिए  !विद्वान चाहे मुझे पागल समझें ! मेरे हाथ में रत्न चिंतामणि आगया है ! मुझे एक जीवन कार्य मिल गया है ! अब तक बे अकेले ही थे ! शुरू में देशभर में उनकी अकेले ही यात्रा चलती रही ! परन्तु अद्भुत मस्ती में चलती थी ! बे कहते थे सूर्य अकेला ही चलता है ! बाद में हवा फैलती गयी साथी जुड़ते गए तो कहने लगे अब में शहस्त्रा बाहु बन रहा हूँ  !इस तरह गांधी जी के आश्रम का एक अपरिचित आश्रम बासी लोक ह्रदय में प्रेम और आदर का स्थान पाता गया ! विनोबा ने सर्वोदय के मन्त्र को समाज व्यापी बना दिया  !और सारे समाज का उत्थान हो ! समाज में नैतिक ताकत का विकास हो ! जनता का  सामूहिक गुण विकास हो ! ऐसा एक व्यापक आंदोलन चलाया ! सर्वोदय का दर्शन प्रत्यक्छ व्योहार में प्रितिस्ठित हुआ ! आंदोलन के कुछ साथी थके ! कुछ विचलित हुए ! सर्वोदय का सन्देश पहुंचाने में १२ साल लग गए ! समस्त देश की एक प्रदिक्छ्णा पूरीहुई  !तेरह साल तीन महीने तेरह दिन के बाद अपने आश्रम में बापिस  पहंचे ! बिनोबा ने कहा था कि विश्व आत्मा और मानव आत्मा जुड़े यह युक्ति ही मुक्ति है  !ऐसी खोज में विनोबा जी सारे जीवन लगे रहे !यह गांधी विनोबा की विरासत है !और गांधी जन को तदनुसार जीवन जी कर इसे लोकजीवन में उतारने का काम करना है !

बर्तमान भारत की  सबसे  महत्त्व  पूर्ण जरूरत कर्तव्य निष्ठ अधिकाइयों कर्मचारियों ,राज नेताओं आदि की है !देश में प्रतिभा  की योग्यता  की कमी नहीं है !यदि कोई कमी है तो कर्तव्य निष्ठा की !इस पुलिस अधिकारी का त्याग अनुकरणीय है !यह इसीलिए मात्र एक रुपया बेतन में लेते हैं !क्योँकि आर्थिक दृष्टि से परबारिक सम्पत्ति जो इन्हे विरासत  में प्राप्त हुई है !उस से इनके परिवार और इनके सामने आर्थिक संकट का अभाव है !किन्तु सबसे अधिक जो महत्त्व पूर्ण  बात यह है कि इनमे लोभ लालच और धन संग्रह की बृत्ति  का अभाव है !आर्थिक दृष्टि से संपन्न तो इनसे कई गुने पूंजीपति, राजनेता, ओरउद्द्योग पति, आदि  मौजूद है !किन्तु उनकी धन संग्रह की लालसा इसके बाद भी उनको कर्त्तव्य निष्ठ जीवन  जीने से बंचित किये रहती है ! और बे अनेक प्रकार के अनैतिक अवैधानिक धँधोँ में लिप्त रहकर धन के उपार्जन और संपत्ति संग्रह में लगे रहते हैं !ऐसे और भी कर्तव्य निष्ठ  अनेक राजनेता सरकारी अधिकारी उद्द्योग्पति अखवार और चैनल्स चलाने वाले देश में मौजूद होंगे !भास्कर को इस प्रकार के सभी छेत्रों के कर्तव्यनिष्ठ व्यक्तियोँ के बारे में इस प्रकार के प्रेरक प्रसंग खोजकर निष्पक्छ भाव से लोगों के सामने रखना चाहिए !ताकि लोगों को कर्तव्य पालन की प्रेरणा प्राप्त होती रहे !

Thursday, 10 September 2015

राजनीत से युक्त सम्मेलनों का यही हश्र  होता है !एक पुरानी घटना है !अमृतसर में विश्व हिंदी सम्मलेन का आयोजन हुआ !उसके उदघाटन के लिए तत्कालीन लोकसभा अध्यक्छ आयंगर को आयोजकों ने आमंत्रित किया था !दिल्ली से आयंगर  और प्रख्यात साहित्यकार आचार्य चतुरसेन शाश्त्री एक ही ट्रेन से सम्मलेन में शिरकत करने के लिए सबार हुए !अमृतसर स्टेशन पर आयंगर  का भव्य स्वागत हुआ !शाश्त्री जी रिक्शे पर बैठ कर सम्मलेन में पहुंचे !सम्मलेन में भी ज्यादातर समय आयंगर के स्वागत में बीता !जो वक्ता लोग आये उन्होंने भी हिंदी की चर्चा कम और आयंगर की प्रसंसा अधिक  की !जब शाश्त्री जी बोलने खड़े हुए !तो उन्होंने कहा आयंगर की शादी में आया !दूल्हे का बहुत स्वागत सत्कार हुआ !लेकिन इस स्वागत सत्कार की चमक दमक में हिंदी रूपी दुल्हन की खोज खबर किसी ने नहीं ली !और वह लाज शर्म से ऐसी सिकुड़ी रही कि उसकी चर्चा भी किसी ने नहीं की !यह प्रक्रिया राजनेताओं को महत्त्व प्रदान करने की  मुख्य विषय पर ध्यान नदेने की अब  गहरी हो गयी है !सम्मलेन की आयोजक सरकार ने शाश्त्री जैसे साहित्यकारों को आमंत्रित ही नहीं किया ! ब्यबस्था भ्रष्टाचार ने बिगाड़ दी
एक संस्कृत उक्ति का का भावानुबाद  करते हुए बिनोबा जी ने साहित्य की व्याख्या बतायी थी --- जो सत्य का यशोगान करे ,जीवन का अर्थ समझाए व्योहर की शिक्छा दे और चित्त की शुद्धि करे वो है  साहित्य!  समर्थ राम दास ने ऐसे प्रतिभा संपन्न साहित्य कारों को शव्द श्रृष्टि का ईश्वर कहा है !इस सम्मलेन में साहित्य की यह व्याख्या  सिद्ध होती नहीं दिखाई देती है ! यह राजनीति  प्रभावी हिंदी साहित्य सम्मलेन है  !इसीलिए इसके उदघाटन  कर्ता प्रधान मंत्री जी और आयोजन कर्ता मुख्य मंत्री और समापन कर्ता के रूप में  अमिताभ बच्चन को आमंत्रित किया गया है !इस आयोजन  में सम्मिलित होने वाले और इसकी प्रसंसा करने वाले साहित्यकार भी राजनैतिक दृष्टि से ही आमंत्रित किये गए हैं !और इस आयोजन के आलोचक भी इसकी आलोचना राजनैतिक दृष्टि से  ही कर रहे हैं !जिन आलोचकों के नाम यहां दिखाए गए है ! उसमे से अधिकाँश संघ और भाजपा के  विरोधी हैं !और जो आमंत्रित किये गए हैं ! उनमे से अधिकाँश भाजपा और संघ के  समर्थक हैं !इसके विरोध और समर्थन में शुद्ध साहित्य उपासक या साहित्यकार के दर्शन नहीं होते हैं !हिंदी  का गुण गान हो रहा है यह उपलब्धि है !
वैदिक संस्कृति में जीवों को अभयदान देना श्रेष्ठ दान माना गया है !जो लोग भारत में मशाहार  का समर्थन करते है !बे भारत की आत्मा का आत्मघात करते हैं !विश्व की अनेक माशाहारी कौमें माशाहार का त्याग कर शाकाहार को अपना रहीहै !मुसलिम राष्ट्र पाकिस्तान में भी सप्ताह में एक दिन अमिश भोजन का निषेध किया गया है !भारत में ऐसे अनेक राज ऋषि हुए है ! जिन्होंने माष भक्छण और जीव हत्या को पूर्ण रूप से प्रतिबंधित किया था  ! महाभारत में माष भक्छण में अनेक दोष बताये गए हैं !!भीष्मपितामह युधिस्ठर से कहते है ! जो दूसरे के मांश से अपना मांश बढ़ाना चाहता है  !उस से बढ़कर नीच और निर्दयी मनुष्य दूसरा कोई j मनुष्य नहीं है ! जगत में अपने प्राणो से अधिक प्रिय कोई दूसरी बस्तु नहीं है इसीलिए मनुष्य जैसे अपने ऊपर दया चाहता है ! उसी तरह जीवों पर भी दया करे ! इस लोक और परलोक में जीवों की रक्षा करने के समान दूसरा कोई  पुण्य कार्य नहीं है ! प्राण दान से बढ़कर दूसरा कोई दान न हुआ है ! और ना होगा ! अपने आत्मा से बढ़कर प्रियतर बस्तु दूसरी कोई नहीं है ! जो जीवित रहने की इक्छा रखे वाले  प्राणियों के मांस को खाते हैं ! बे दूसरे जन्म में उन्ही प्राणियों द्वारा खाए जाते  हैं ! इस विषय में मुझे संशय नहीं है !जिसका बध किया जाता है  ! वह कहता है !भले ही माष के लिए ह्त्या करने वाले को उसकी अव्वाज समझ में न आये कि  आज मुझे वह खाता है ! तो मै भी कभी उसे खाऊंगा ! अहिंसा परम धर्म है ! अहिंसा परम संयम है ! अहिंसा परम दान है ! और अहिंसा परम तपस्या है ! अहिंसा परम यज्ञ है ! अहिंसा परम फल है ! अहिंसा परम मित्र है ! और अहिंसा परम सुख है  !!जैन धर्म के इस पावन पवन ब्रत में सहयोग कर पुण्य प्राप्त करें ! और जीवमात्र को कम से कम हमेशा के लिए नहीं तो,कुछ काल अभय दान देकर !समस्त निरीह और मूक बेज़ुबान जीवों  पर जो  मनुष्योँ की दया और कृपा पर आश्रित हैं ! इन जीवों को जीवन दान प्रदान कर जीवों का आशीर्वाद प्राप्त कर जैन समाज द्वारा प्रदत्त इस अवसर से पुण्य लाभ प्राप्त करें !विरोध कर अक्छय पाप के भागी बनकर श्रमण  और वैदिक धर्म को कलंकित ना करें

Wednesday, 9 September 2015

लाहोर में इस वक्तव्य से अच्छा वक्तव्य दिया ही नहीं जा सकता था !यह वक्तव्य समस्ययोँ के आसान समाधान की बात तो करता है !किन्तु बिगत ७० बरसों की बिफलता के कारणों पर ईमानदारी से विचार प्रस्तुत नहीं करता है !और मणिशंकर अय्यर से यह आशा भी नहीं की जी सकती है !की बे पाकिस्तानी भूमि पर पाकिस्तान के एक राजनायिक की पुस्तक के लोकार्पण के समय ऐसी कोई बात कहेंगे !जो समयस्या का समाधान हो !हिन्दुस्तान पाकिस्तान के मध्य समस्याओं का समाधान राजनेताओं के द्वारा कभी संभव नहीं है !क्योँकि राजनेता हमेशा राजनैतिक लाभ हानि की दृष्टि से ही विचार व्यक्त करते हैं !हिन्दुस्तान और पाकिस्तान की समस्यायों का समाधान अभी निकट भविष्य में संभव नहीं दीखता है !यद्द्पि अनेक ऐसी समस्याएं हैं !जो स्वभावगत और सांस्कृतिक तथा धर्मगत है !बो तो कुत्ते  की पुंछ की तरह टेढ़ी हमेशा रहने वाली है !किन्तु सबसे अधिक दोनों देशों के मध्य विवाद पैदा हमेशा कायम रहने वाली कश्मीर समस्या है !इसको  इतना उलझा दिया है !कि इसको सुलझाना  असंभव है  !इसी से जुडी इस्लामिक चरमपंथ की समस्या भी है !जिसका समाधान पाकिस्तान के चरमपंथियों और सेना के पास है !
भारतीय साधु संतो सन्यासियों पर संपत्ति संग्रह के आरोप इस कारण से अधिक लगाए जा रहे है !क्योंकि वैदिक धर्म संतों के जीवन में सभी प्रकार के शारीरक कार्मिक और वाचिक भोगों को निषिद्ध करता है !जिस व्यक्ति का मन संसार के माया मोह धन बिलास काम सम्बन्धो से मुक्त नहीं है !उसे साधु संत या सन्यासी का वेश धारण नहीं करना चाहिए !किन्तु भारत में जन्मे जैन और बौद्ध धर्म को छोड़ दे जिनमे   संन्यास के वैदिक धर्म के समान ही कठोर नियम हैं !इस्लाम और ईशाई धर्मों में इमामों मुफ्तियों मौलानाओ पर इस तरह के प्रितिबंध लागू नहीं है !बे ४ विवाह कर सकते है !तलाक देकर फिर नया विवाह कर सकते हैं !और कितनी भी संपत्ति के मालिक भी हो सकते हैं !उनको माशाहारी भोजन करने की मनाई नहीं  है !ईसाई धर्म में कैथोलिक  धर्मगुरुओं पर विवाह करने पर प्रतिबन्ध है !वहां नन भी अविविहित जीवन जीती हैं !किन्तु प्रोटोस्टेंट आदि में ये प्रर्तिबन्ध नहीं है !उनके यहां एक नियम ईशा के सामने कन्फ़ेसन  का है !जिससे बे पापमुक्त हो जाते हैं ! हिन्दू धर्म में इस प्रकार के विधान नहीं है !साधु संतो सन्यासियों को वैदिक धर्म में पवित्र जीवन जीना पड़ता है!
;भारत में ईमानदार कर्तव्यनिष्ठ अधिकारिओं को उपेक्छा अपमान और जिम्मेदारी से मुक्त करके दिए जाने की परम्परा है !इसी परम्परा का निर्बहन महाराष्ट्र की सरकार भी कर रही है !जिस योग्य कर्तव्यनिष्ठ पुलिस अधिकारी के साथ गंभीर किस्म के प्रभाव शाली अपराधियों को सलाखों में पहुंचाने का श्रेय प्राप्त है !उसको होम गार्ड का डी जी पी  बनाकर पुरुष्कृत किया जा रहा है !उसे ऐसे पुलिस विभाग में प्रोन्नत करके भेजा जा रहा है !जहां उसकी योग्यता पत्रावलियों में सिमट कर रह जायेगी !और उसकी योग्यता से पुलिस बिभाग  बंचित हो जाएगा !मुझे पता नहीं है !कि यह बात सत्य है या असत्य !लेकिन ऐसा लोग कहते हैं !की राजनेताओं और अपराधियों में गठ बंधन  है !और सभी प्रकार के आर्थिक अपराधों का संरक्छण और पोषण राजनेताओं के सहयोग से ही होता है !आर्थिक अपराधी अनैतिक साधनो से धन संचय करते हैं !और उसमे भ्रष्ट अधिकारीयों और राजनेताओं को भी भाग प्राप्त होता है !इसीलिए जो ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी होते हैं !उन्हें जन कार्यों के मुख्य पदों से हटाकर !महत्त्व हीन पदों पर भेज दिया जाता है !मारिया भी इस समय एक महत्त्व पूर्ण जनता में चर्चित शीना मर्डर काण्ड की जांच में लगे हुए है !और जैसा की समाचार पत्रों से ज्ञात हो रहा है !की उन्होंने इस काण्ड की गुत्थी सुलझा भी ली है !इसीलिए फिलहाल वही इस प्रकरण की जांच जारी रखेंगे !
भारतीय  मुसमान विद्वानो ने काफी बिलम्ब के बाद इस्लामिक संगठन के विरुद्ध फतवा जारी किया है !फिर भी देर आयद दुरुस्त आयद !एक बात जो फतवे में कही गयी है ! कि इस्लाम  हिंसा से परहेज करता है  किन्तु इस्लामिक संगठन हिंसा को फैला रहा है !यदि परहेज के बजाय यह फतवा दिया जाता कि इस्लाम हिंसा का निषेध करता है !तो यह ज्यादा कारगर सिद्ध  होता है !क्योँकि विश्व में बोकोहराम जैसे कई खून बहाने वाले इस्लामिक संगठन है ! जो धर्म के नाम पर क़त्ल कर रहे हैं !जिस से इस्लाम अमन और शांति पसंद मजहब है !इस पर काला दाग लगरहा है !और हिन्दुस्तान के भी मुसलिम युवा इन इस्लामिक संगठन जैसे हिंसा करने वाले संगठनो में शामिल हो जाते है !भारत के बहु धर्म वाले देश को शान्ति और सद्भाव आपस में कायम करने के लिए !और अमनचैन सभी नागरिकों में कायम रहे !तथा हम सभी भारत बासी स्थायी शान्ति प्राप्त कर सकें !इसीलिए सभी धर्म गुरुओं को यह सामूहिक घोषणा करना चाहिए कि बे किसी भी परिश्थित में चाहे उनके धर्म के बारे में कितनी भी आपत्ति जनक टिप्पड़ी  की जाय !कानून नहीं तोड़ेंगे !दंगा फसाद नहीं करेंगे !दुकानो और कारों मोटर साइक्लोन  में आग नहीं लगाएंगे  ! और हत्याएं नहीं करँगे !यदि इस प्रकार की अपमानजनक टिप्पड़ी किसी भी धर्म के खिलाफ की जाती है !तो बो टिप्पड़ी कर साम्प्रदायिक सौहाद्र बिगाड़ने वालों के विरुद्ध कानूनी कार्यबाही अमल में लाएंगे !और खुद कानून अपने हाथ में नहीं लेंगे !भारत को यदि बास्तव में सर्वधर्म समभाव बाला देश बनना है !तो इसे धर्म को पूरी तरह से हिंसा मुक्त करना होगा !चूँकि इस्लामिक विद्वानो ने यह पहल की है !इसीलिए उन्ही को हिंसा मुक्त इस्लाम धर्म के लिए फतवा जारी करना चाहिए

Tuesday, 8 September 2015

आज दैनिक  जागरण में प्रथम पृष्ठपर और अमर उजाला में ११वेन पृष्ठ पर समाचार छपे हैं ! कि मुजफरनगर साम्प्रदायिक दंगा की चपेट में आगया !हैबत्पुर गाओं की छात्राएं चरथाबल के कॉलेज में पढ़ने जाती हैं ! आरोप है की एक सम्प्रदाय विशेष के छात्र भट्ठा स्थित बस स्टैंड पर छात्राओं से छेड़ छाड़ करते हैं !इसे लेकर कई बार विवाद हो चुका है ! गाओं वालों के अनुसार सोमबार की सुबह छात्राएं स्टैंड पर बस का इंतजार कर रही थी ! कुछ मनचलों ने छात्राओं  से छेड़ छाड़ की ! और जब छात्राओं  ने विरोध किया तो छेड़ छाड़ करने वालों ने उनकी पिटाई भी की !मार पीट से छात्राओं के कपडे तक फट गए ! सूचना पर छात्राओं के अभिभावक मौके पर पहुंचे तो युवकों ने उनको भी तथा कुछ छात्रों को भी पीटा ! जंगल में चारा लेने जा रही महिलाओं के साथ भी मार पीट की ! इसी बीच मारपीट करने वाले युवकों ने अपने परिजनों को भी बुला लिया ! थोड़ी देर बाद ही हिन्दू मुसलिम समुदाय की भीड़ जुटने लगी ! दोनों और से लाठी डंडे और तल्बारें चली ! बाजार बंद हो गए ! खूनी टकराव में एक दर्जन से अधिक लोग गंभीर रूप से जख्मी हो गए ! प्रशाशन ने लाठी फटकार कर भीड़ को तितर बितर किया ! बाद में गाओं में फ्लैग मार्च  भी किया गया !मौके से पुलिस ने आधा दर्जन से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया !अमर उजाला ने छापा है कि पुलिस से भी हाथा पायी की गयी गाओं को छावनी में तब्दील कर दिया गया है ! पुलिस की और से पूर्व ब्लॉक प्रमुख एवं प्रधान पति समेत १३ को नामजद करते हुए १०० अज्ञात लोगों के खिलाफ संगीन धाराओं में मुकदद्मा दर्ज किया गया है !उत्तरप्रदेश में हिन्दू मुसलिम सम्बन्धो का कितना बीभत्स और धार्मिक घृणा से भरा हुआ माहौल  है !उनके उदाहरण  आये दिन  होने  वाले हिन्दू मुसलिम दंगो  से मालुम पड़ता है !अब यह कहना मुश्किल है !कि पुलिस ने दंगे में लड़कियों की इज्जत पर डाका डालने वाले युवकों और उनकी मारपीट करनेवाले मनचले सम्प्रदाय विशेष के छात्रों और उनकी रक्छा तथा समर्थन में तलवार चलाने वाले सम्प्रदाय विशेष के लोगों को गिरफ्तार किया है? !और उनके विरुद्ध संगीन धाराओं में मामले दर्ज किये हैं ?!या उन लोगों के विरुद्ध मुकदद्मे कायम किये हैं जो अपनी बच्चियोँ की गुण्डों से इज्जत बचाने आये थे !और उनकी भी मनचलों ने पिटाई कर दी थी !तथा उनके समर्थन में आये लोगों के विरुद्ध भी मुकदद्मे दर्ज किये है !और उनको गिरफ्तार किया है ? अपनी आबरू बचाना और अपनी बच्चियो को गुण्डों से आबरू बचाने का प्रयत्न करना !और पीटे जाने पर अन्य लोगों का तलबार भांजने वालों और लाठी डंडा चलाने वालों से छात्राओं  और उनके अभिभावकों  की रक्षा करना प्रसंसनीय कार्य है !दंडनीय अपराध नहीं है !यदि इसके बाद भी पुलिस ने छात्राओं  के अभिभावकों  और उनको बचाने के लिए आये लिोगों के विरुद्ध आपराधिक प्रकरण दर्ज किये है !तो यह न्याय की उपेक्छा है !और अपराधियों को अपराध करने की छूट देना और उनका मनोबल बढ़ाना है !समाचार पत्रों को जनता के सामने सही तथ्य प्रस्तुत करने के लिए पुलिस द्वारा की गयी कार्यबाही का खुलासा करना चाहिए !

Monday, 7 September 2015

देश के सभी दलों के राजनेता अब राजनीति से लाभ प्राप्त करने वाले नेता होगये हैं !जो राजनीति के रथ में सवार होकर प्रधानमंत्री पद से लेकर ग्राम सभा तक के प्रधान चुने जाते हैं !उनपर महगाई या आरक्छन आदि का प्रभाव नहीं पड़ता है !और जो राजनीति के इन पदों से बंचित रह जाते हैं !बे बहुत से व्यापारिक, जातीय, और कर्मचारियोँ आदि के संगठन बनाकर अपनी सत्ता प्राप्ति की पिपासा पूरी करते हैं !और साथ में नैतिक अनैतिक साधनो से इतना धन संचय कर लेते हैं ! और सामाजिक प्रभाव में बृद्धि कर लेते हैं कि उन पर जिन कठिनायायिओं को समाज का सामान्य वर्ग इन अन्याय पूर्ण व्यबस्थाओं को झेल रहा है !उसका  ना तो दर्द होता है और न अनुभव ही !युवाओं द्वारा अन्याय का पोषक और वर्द्धक इस जाति और धर्म आधारित आरक्छण को न्यायाय युक्त बनाने का कार्य देश के युवा ही करेंगे !और जातिय आरक्छण से आरक्छति जातियोँ का खून चूसने वाले इन चंद लोगों और जातियोँ को यही लोग जनता के सामने लाएंगे !और आरक्छण को न्याय युक्त बनाएंगे
इनफिल्मी कलाकारोँ का तो जीवन ही विलासिता  के बैभव से भरपूर होता है !आजकल भारत में फ़िल्मी कलाकार और क्रिकेट के खिलाडी मीडिया के आकरषण के केंद्र बने हुए हैं !इनके प्रेमप्रसंग, शादी व्याह,  आपसी मतभेद,  जन्म मृत्यु और अनेक प्रकार के प्रसंग श्रव्य और दृश्य अर्थात प्रेस और एलेक्ट्रोनॉक मीडिया पर नित प्रति प्रमुखता से प्रकाशित होते रहते हैं !ये बड़े भाग्यशाली लोग हैं कि इनके सभी प्रकार के  अवगुण महान गुणों में गिने जाते हैं !फिल्म जगत ही ऐसी जगह है जहां बिना किसी डिग्री के फिल्म अभिनेता युग का महानायक बन जाता है !और बल्ले से गेंद पर प्रहार करने वाला खिलाड़ी भारत रत्न  बन जाता है  ! अंग्रेजी का वेनिटी शव्द का अर्थ ही शिष्टता का द्योतक नहीं है !उस वैनिटी वेन  का गुणगान यहाँ किया जा रहा है !प्रेस का काम सिर्फ समाचार प्रकाशित करना ही नहीं है !और ना ही पाठकोँ की रूचि के अनुसार समाचार प्रकाशित करना है !एक बहुत गंभीर उत्तर दायित्त्व मीडिया का युवाओं और पाठकोँ में परिष्कृत सुसंस्कारित सदाचारी दृष्टि उत्पन्न करने का भी है !इसीलिए इस प्रकार के सामजिक सांस्कृतिक नैतिक उत्थान  में समर्पित   सेवा भावी महापुरुषोँ को गाओं, गली और नगरों से खोज कर उनको भी समाचारों में प्रमुखता देनी चाहिए !क्योँकि सदाचार और संस्कृति का इतिहास उनके जीवन चर्या से निर्मित होता है ! ४ करोड़ की वैनिटी वेन  रखने वाले और अमेरिका के सारे होटल बुक कराने वाले. और कुली की एक्टिंग करके करोङो रुपया अभिनय का लेने वाले, ठुमके लगाकर राजनीति से लेकर समाज में अग्रगण्य स्थान बनाने वाले देश के युवाओं को मांसल   सौंदर्य का गुलाम बनाने  वाले और बल्ले से गेंद उचकाने वालों से नहीं होता है !

Sunday, 6 September 2015

मोदी जी की विदेश यात्राएं मात्र भ्रमण के लिए नहीं !बल्कि भारत की विकास यात्रा को अपनी पार्टी के एजेंडे के अनुसार क्रियान्वित करने की है !किन्तु इन यात्राओं पर जो खर्च बताया गया है !वह भारत के प्रधान मंत्री के रूप में गरीबों का प्रतिनिधि बताने वाले मोदी जी की सादगी पसंद जीवन चर्या से मेल खाता  मालुम नहीं देता है !भारत के राजनेताओं को भारत के लोगों के आर्थिक स्तर के अनुरूप अपने आपकोदेश में और विदेश में भी प्रस्तुत करना चाहिए !गांधी जी इस मामले  में राजनेताओं के लिए अनुकरणीय हो सकते हैं !आज भले ही गांधी जी के आलोचक राजनीति या अज्ञान  के कारण उनकी मनगढंत आधारों पर आलोचना करें !लेकिन उनके जीवन के और गतिविधियोँ के सभी कार्यक्रम सरकारी रिकॉर्डों में उपलब्ध हैं !बे यद्द्पि अपने काल खंड के सर्वाधिक स्वीकृत नेता थे !फिर भी उनका जीवन भारत की आर्थिक और सामाजिक धार्मिक दशा का बोध कराता था !जब बे इंग्लैंड में १९३१ में गोल मेज परिषद में शामिल होने गए थे !तब बे ब्रिटिश हुकूमत द्वारा दी गयी शुविधाओं का त्याग करके लंदन के  सबसे गरीब इलाके में रुके थे !भारत में भी सेवाग्राम में बे एक झोपड़ी में निवास करते थे !जिसके दर्शन के लिए आज भी देशी विदेशी सेकंडों की संख्या में आते हैं !बे अपने कपडे खुद ढोते थे !१९४७ में जो कांग्रेसी सरकारें बनी उनके भी बहुत से मंत्री और राष्ट्रपति गांधी जी के आदर्श सादगी पसंद जीवन का अनुकरण करते रहे है !इसीलिए मोदी जी को भी इन्ही आदर्शोँ का भी अनुसरण करना चाहिए !किन्तु अगर गांधी जी उन्हें पसंद ना आते हों !तो जिस संघ के स्वयं सेवक हैं और जिसके बे प्रचारक भी रहे हैं !और अभी उन्होंने संघ और सरकार की सम्मिलित मीटिंग के बाद उन्होंने कहा था कि संघ का स्वयं सेवक होने पर उनको गर्व है !उस संघ में भी त्यागी तपस्वी और हिन्दू राष्ट्र भक्तों का विशाल समूह मौजूद है !संघ की नीतियोँ और कार्यक्रमों का घोर विरोध करने वालों और उसको फासिस्ट संगठन कहने वालों को भी गुरूगोलवल्कर एकनाथ रानाडे पंडित दीन दयाल और सेकंडो अनेक संघ के समर्पित देश सेवा और हिन्दू राष्ट्र के निर्माण के लिए कृत संकल्पित तन मन धन और सर्वस्व त्याग करने की बृत्ति की प्रसंसा करनी होगी !इसिलए सरदार पटेल संघ को देश द्रोही ना कहकर भटका हुआ कहते थे !इसीलिए कुछ भी हो  मोदी जी की सादगी और राष्ट्रभक्ति का दर्शन और प्रदर्शन उनके वस्त्रोँ में और देश विदेश की यात्राओं में अवश्य होना चाहिए !
आपने बहुत उत्तम गीता के श्लोकों का चयन किया है !यद्द्पि यह कहना कठिन है ! कि गीता का कौनसा श्लोक जीवन के लिए उपयोगी नहीं है !सभी महापुरुषोँ और गीता के भाष्यकारों ने अपनी रूचि विश्वास और जन हित को ध्यान में रख कर गीता के श्लोकों का चयन किया है !महान ग्यानी अद्वैत  मत के स्थापक शंकराचार्य ने गीताके  भक्ति परक श्लोक को गीता सार कहा है ११(५५)आचार्य विनोबा भावे ने ४(१०)को कहा है कि भगवान को कर्म ज्ञान उपासना और मोक्ष के सम्बन्ध में जो कुछ कहना था वह इस श्लोक में कह दिया है !स्वामी रामसुख दास ने कहा है कि ४(२३ )कर्मयोग का मुख्य श्लोक है !गांधी जी गीता के २(५४से७२)के समस्त श्लोकों को कर्म कोष कहते थे !गांधी आश्रम की दैनिक प्राथनाओं में इन श्लोकों का दैनिक सुबह शाम पाठ किया जाता है !रामनुजा चार्य के गुरु यामुनाचार्य ने ७ श्लोकों को छांट कर सप्त श्लोकी गीता लिखी है !इस प्रकार गीता ग्रन्थ से सभी मनुष्योँ की लौकिक पारलौकिक और आध्यात्मिक समस्यायों का जैसा  समाधान होता  है !वेशा किसी भी धर्म के अन्यग्रंथों से नहीं होता है !यह धर्मग्रन्थ विश्व के सभी आध्यात्मिक व्यक्तियों का नूरे चश्म  रहा है !किन्तु हम भारत बासी इतने दुर्भाग्यी है कि इस ग्रन्थ रत्न को विद्यालयोँ में पढ़ाने में गुरेज करते हैं !
गांधी जी केस्वप्नो का भारत था !भारत के स्वाबलंबी गाओं !भारत में बिभाजन के बाद ५५० लाख गाओं रह गए थे !प्राचीन भारत में विशेष तौर महाभारत में स्वर्णिम स्वाबलंबी गाओं का दर्शन प्रचुरता  से होता है !गाओं फलदार ब्रक्छोँ और दुधारू पशुओं और निर्मल जल से भरे हुए सरोवरों के केंद्र होते हैं !उस काल के भारत के गाओं का स्वाबलंबी स्वरुप चित्त को चुराकर स्वप्न लोक में पहुंचा देता है !किन्तु आज के भारत की गाओं की दुर्दशा देख कर किसी का भी ह्रदय जिसने प्राचीन भारत के गाओं के बारे में पढ़ा होगा दर्द से कराह उठेगा ! गांधी जी कहते थे ! भारत का प्रत्येक गाओं एक गड़तन्त्र होगा !और वह अपनी जरुरत की आवश्यकताओं के लिए किसी पर आश्रित नहीं होगा !भयानक बेरोजगारी के इस समय में और कागजी नोटों के आकरषण से ऊपर उठकर अब बहुत से शिक्छित प्रसिक्छित युवा अब कृषि कार्य में दिलचस्पी लेकर धनोपार्जन के नए छेत्र विकसित कर रहे हैं !युवाओं का अब शहरी जीवन से मोह भंग हो रहा है !कुरुक्छेत्र के इस छोटे से गाओं का अप्रत्यासित विकास देख कर देश के अन्य युवा भी प्रोत्साहित होंगे  !और कृषि में नयी लाभकारी उपजों को उपजा कर कृषि कार्य को अधिक उपयोगी और युवाओं तथा कृषकों को कृषि की और आकर्षित करेंगे !गाओं के विकास से ही शहरों का विकास होगा !गाओं से शहरों की और पलायन रुकेगा !और देश भी पिरामिड की तरह धन धान्य से उसी प्रकार परिपूर्ण होगा जैसा प्राचीन भारत था !गुलाम भारत नहीं !गुलामी के पहले का भारत !
स्वाबलंबी ग्रामविकास की कल्पना गांधी जी ने प्रस्तुत की थी !वह कहते थे  स्वतंत्र भारत ७५० लाख गाओं का गड्तंत्र होगा !गाओं पूरी तरह से स्वाबलंबी होगा !वह अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए सरकार पर अबलम्बित नहीं होगा !किन्तु स्वतंत्र भारत ने उनको नोटों पर तो छाप दिया उनकी मूर्तियां भी खड़ी करदी किन्तु गांधी जी की  पोषित और भविष्य की ग्राम विकास योजनाओ को तिलांजलि दे देदी !आज भारत स्वाबलंबी भारत और ग्राम विकास से  इतना दूर चला गया है कि अब ग्रामविकास के स्थान पर स्मार्ट सिटी निर्माण योजना को अमली जामा पहनाने का जोर शोर से प्रयत्न किया जा रहा है !उनके दो अन्य प्रिय कार्यक्रम साम्प्रदायिक सद्भाव और मद्दीनिषेध भी राजनैतिक स्वार्थ की भेंट चढ़ गए हैं !मद्द्यपान सरकारी आय का साधन बन गया है !और साम्प्रदायिक सद्भाव मतदाताओं को अपने पक्छ में करने का साधन बन गया है !हिन्दू मुसलिम तनाव बढ़ता जा रहा है !

1 !कोई भी राजनेता या धार्मिक नेता इस समस्या पर अपनी राय देश के हित को देखते हुए नहीं रखता है !सभी इस समस्या को और बिगाड़ने में लगे हुए हैं !छत्तीसगढ़ के गाओं के  इस दृष्टांत से नेताओं को सबक लेना चाहिए!

Saturday, 5 September 2015

खबर की खबर में एक आर्टिकल में बताया गया है ! कि सोमनाथ मंदिर का विध्वंश भगवान शंकर ने स्वयं तांडव कर तुड़वाया था !उसका कारण यह था कि वहां स्वर्ण बहुत अधिक मात्रा में इकठ्ठा हो गया था !और महाराज परिच्छित के शाशनकाल में जब कलियुग ने प्रवेश किया !तो परिच्छित ने जिन ५ स्थानो  में कलियुग को रहने का स्थान दिया था !उसमे एक स्थान स्वर्ण भी था !और वह स्वयं स्वर्ण का मुकुट धारण किये हुए थे !इसीलिए कलियुग उनके स्वर्ण मुकुट में प्रवेश कर गया !जिस से उनकी बुद्धि भ्रष्ट हो गयी ! और उन्होंने ऋषि शमीक के गले में मरा हुआ सांप  डाल दिया !परिणाम स्वरुप ऋषि ने उन्हें सांप  द्वारा काटे जाने का श्राप दे दिया !और श्री मदभग्वद की कथा सुनकर उनको मोक्छ की प्राप्त हुई !लोग कथा सुनते हैं किन्तु उसके तत्वव का पालन नहीं करते हैं !इसिलिये



1 उनकी समझ में यह नहीं आ पाता है ! कि सोमनाथ मंदिर को शिवजी ने स्वर्ण भण्डार के कारण खुद ही तुड़वा दिया था !इसमें मंदिर तोड़ने वाले महमूद गजनवी की कोई भूमिकानही थी !इसके लेखक हिन्दू है !इस पर उन्होंने धार्मिक भावनाओं से ऊपर उठकर विचार व्यक्त करने के लिए कहा है !ताकि दूसरे पक्छ की भाव नाओं का अनादर नाहो !वैदिक धर्म के गूढ़ और गहन तत्त्वों को आत्मसात करने के लिए तदनुसार साधनाएं और अध्ययन  मनन चिंतन करना पड़ता है !इसीलिए मुख्य प्रश्न किसी कथानक का नहीं है !क्योँकि कथानक वैदिक धर्म अनादि होने के कारण भिन्न भिन्न पुराणो में अनेक प्रकार से वर्णित है !किन्तु मूल तत्त्व उन सभी घटनाओं में विद्यमान है !इसिलए जो लोग वैदिक धर्मग्रन्थोँ को उपन्यास या इतिहास के तौर पर पढ़कर उसको दूसरे धर्मो से विशेषकर इस्लाम और ईशाई धर्म से कमतर और दोषयुक्त मानकर प्रस्तुत  करते हैं !बे उसी प्रकार के हिन्दू या वैदिक धर्माबलम्बी है !जो सिर्फ नाम मात्र के हिन्दू हैं !और उनकी भूमिका उस लकड़ी की तरह है  जो ब्रक्छ से उतपन्न होती है और कुल्हाड़ी का बेंट बनकर उसी ब्रक्छ को काट ती है !पारिक्छित को शमीक द्वारा शाप देने की कथा महाभारत के प्रथम खंड में भी है !किन्तु जिस तरह से इसका विवरण श्री मद्भागवत में दिया गया है !उस तरह से नहीं है !ऋषि शमीक ध्यानस्थ  थे तथा उनका न बोलने का ब्रत था !परिच्छित बन में शिकार खेलते हुए अत्यंत थक गए थे !और प्यास से पीड़ित थे !इसीलिए उन्होंने जल के लिए मुनि से याचना की किन्तु मुनि ने ध्यानस्थ होने के कारण न तो राजा को जल प्रदान किया !और ना ही उनका सम्मान किया !इसलिए परिच्छित ने ऋषि के गले में मरा हुआ सांप  डाल दिया !जब ऋषि पुत्र श्रृंगी को इस घटना का पता चला तो उसने राजा को सांप  द्वारा (तक्छक )काटे जाने का श्राप दे दिया !जब ऋषि को इस श्राप का पता लगा तो उन्होंने पुत्र को फटकार लगाई !और उस से कहा की तुमने प्रजापालक राजा को गलत श्राप दे दिया है !राजा थका हुआ और प्यास था !तथा अपनी प्रजा से आदर प्राप्त करने का अधिकारी था !इसलिए क्रोधबस उस ने मेरे गले में मरा हुआ सांप  डाल दिया !इसमें दोष मेरा है !राजा का नहीं है !श्रंगी ने कहा कि जो श्राप हमने दिया है !वह अवश्य पूर्ण होगा !तब ऋषि ने राजा के पास अपने शिष्य भेजकर श्राप के सम्बन्ध में अवगत कराया !तत्पश्चात परिच्छित ने सर्प के काटने से उसका जहर नष्ट करने वाले जानकारों को बुलवाया !और अपनी रक्छा के लिए कांच का महल निर्माण कराया !तथा चारों और सैनिकों को सुरक्छा के लिए लगा दिया !सांप काटे का इलाज करने वाला एक व्यक्ति राजा का सर्प काटने के बाद जहर को उतारने के लिए चला !उसकी मुलाक़ात रस्ते में बरगद के ब्रक्छ के नीचे तक्छक से हो गयी !उसने बात चीत  में तक्छक को बताया की राजा को सर्प काटेगा और मै मंत्रबल से जहर को नष्ट कर दूंगा !तक्छक ने कहा कि जिस समय सर्प राजा को काटेगा !उसी समय उसकी मृत्यु भी परमात्मा ने निर्धारित की है !इसलिए तुम राजा का जहर नष्ट तो कर दोगे किन्तु राजा को जीवित नहीं कर सकोगे !यह सुनकर मंत्र सिद्ध व्यक्ति लौट गया !और सर्प के काटने से राजा की मृत्यु हो गयी !महाभारत में परिच्छित को किसी प्रकार की मृत्यु पूर्व सुकदेव  द्वारा उपदेश देने या  श्रीमद्भागवद सुनाने का जिक्र नहीं है !किन्तु प्रश्न इस बात का नहीं है कि श्री मद्भाग्वद् की कथा परिच्छित को सुनाई गयी या नहीं ?प्रश्न इस बात का है की ५००० साल पूर्व घटित इस घटना का तालमेल मूर्ति भंजक वैदिक धर्म नाशक क्रूर महमूद गजनवी को सोमनाथ मंदिर और अन्य मंदिरों का विध्वंशक ना बताकर !भगवान शंकर को ही मंदिर तोड़ने वाला बता दिया गया है?!उसका एक कारण यह है !कि वैदिक धर्म संस्कृति पर हमला करना चाय पीने के समान स्फूर्ति और ताजगी प्रदान करता है !किन्तु इस्लाम के खिलाफ एक शब्द भी बोलने पर मौत के घाट उतार दिया जाता है !आज सारे विश्व में आतंकवादी इस्लामिक संगठन सक्रिय हैं !और हजारों निरीह स्त्रीपुरुष और महिलाओं जिनमे मुसलिम भी शामिल है !इस्लामिक संगठन और बोको हराम जैसे संगठनो द्वारा क़त्ल किये जा रहे हैं !ये इस्लामिक संगठन विश्व मानवता और विश्व शांति के लिए ख़तरा  बने हुए हैं !और इनके विनाश के लिए विश्व के मुसलिम राष्ट्र भी अमेरिका आदि के साथ जुड़ कर सक्रिय हैं !अभी देश में भी कौंच और मेरठ तथा  आगरा में सिर्फ थोड़ी सी आलोचना करने पर दंगे भड़क गए हैं !और बहुत सी गड़ियोँ और दुकानो को आग के हवाले कर दिया गया गया है !आज मुसलिम पर्सनल बोर्ड का व्यान आया है कि हिन्दुस्तान में ब्राह्मणी और वैदिक संस्कृति स्थापित करने की कोशिश सरकार कर रही है !जिसका विरोध सारे देश में किया जा रहा है !इन प्रश्नो पर विचार किया जाना चाहिए कि वैदिक संस्कृति को देश में दफ़न करके इस्लामिक जीवन चर्या को स्वीकार किया जाना चाहिए ?