Saturday, 5 September 2015

खबर की खबर में एक आर्टिकल में बताया गया है ! कि सोमनाथ मंदिर का विध्वंश भगवान शंकर ने स्वयं तांडव कर तुड़वाया था !उसका कारण यह था कि वहां स्वर्ण बहुत अधिक मात्रा में इकठ्ठा हो गया था !और महाराज परिच्छित के शाशनकाल में जब कलियुग ने प्रवेश किया !तो परिच्छित ने जिन ५ स्थानो  में कलियुग को रहने का स्थान दिया था !उसमे एक स्थान स्वर्ण भी था !और वह स्वयं स्वर्ण का मुकुट धारण किये हुए थे !इसीलिए कलियुग उनके स्वर्ण मुकुट में प्रवेश कर गया !जिस से उनकी बुद्धि भ्रष्ट हो गयी ! और उन्होंने ऋषि शमीक के गले में मरा हुआ सांप  डाल दिया !परिणाम स्वरुप ऋषि ने उन्हें सांप  द्वारा काटे जाने का श्राप दे दिया !और श्री मदभग्वद की कथा सुनकर उनको मोक्छ की प्राप्त हुई !लोग कथा सुनते हैं किन्तु उसके तत्वव का पालन नहीं करते हैं !इसिलिये



1 उनकी समझ में यह नहीं आ पाता है ! कि सोमनाथ मंदिर को शिवजी ने स्वर्ण भण्डार के कारण खुद ही तुड़वा दिया था !इसमें मंदिर तोड़ने वाले महमूद गजनवी की कोई भूमिकानही थी !इसके लेखक हिन्दू है !इस पर उन्होंने धार्मिक भावनाओं से ऊपर उठकर विचार व्यक्त करने के लिए कहा है !ताकि दूसरे पक्छ की भाव नाओं का अनादर नाहो !वैदिक धर्म के गूढ़ और गहन तत्त्वों को आत्मसात करने के लिए तदनुसार साधनाएं और अध्ययन  मनन चिंतन करना पड़ता है !इसीलिए मुख्य प्रश्न किसी कथानक का नहीं है !क्योँकि कथानक वैदिक धर्म अनादि होने के कारण भिन्न भिन्न पुराणो में अनेक प्रकार से वर्णित है !किन्तु मूल तत्त्व उन सभी घटनाओं में विद्यमान है !इसिलए जो लोग वैदिक धर्मग्रन्थोँ को उपन्यास या इतिहास के तौर पर पढ़कर उसको दूसरे धर्मो से विशेषकर इस्लाम और ईशाई धर्म से कमतर और दोषयुक्त मानकर प्रस्तुत  करते हैं !बे उसी प्रकार के हिन्दू या वैदिक धर्माबलम्बी है !जो सिर्फ नाम मात्र के हिन्दू हैं !और उनकी भूमिका उस लकड़ी की तरह है  जो ब्रक्छ से उतपन्न होती है और कुल्हाड़ी का बेंट बनकर उसी ब्रक्छ को काट ती है !पारिक्छित को शमीक द्वारा शाप देने की कथा महाभारत के प्रथम खंड में भी है !किन्तु जिस तरह से इसका विवरण श्री मद्भागवत में दिया गया है !उस तरह से नहीं है !ऋषि शमीक ध्यानस्थ  थे तथा उनका न बोलने का ब्रत था !परिच्छित बन में शिकार खेलते हुए अत्यंत थक गए थे !और प्यास से पीड़ित थे !इसीलिए उन्होंने जल के लिए मुनि से याचना की किन्तु मुनि ने ध्यानस्थ होने के कारण न तो राजा को जल प्रदान किया !और ना ही उनका सम्मान किया !इसलिए परिच्छित ने ऋषि के गले में मरा हुआ सांप  डाल दिया !जब ऋषि पुत्र श्रृंगी को इस घटना का पता चला तो उसने राजा को सांप  द्वारा (तक्छक )काटे जाने का श्राप दे दिया !जब ऋषि को इस श्राप का पता लगा तो उन्होंने पुत्र को फटकार लगाई !और उस से कहा की तुमने प्रजापालक राजा को गलत श्राप दे दिया है !राजा थका हुआ और प्यास था !तथा अपनी प्रजा से आदर प्राप्त करने का अधिकारी था !इसलिए क्रोधबस उस ने मेरे गले में मरा हुआ सांप  डाल दिया !इसमें दोष मेरा है !राजा का नहीं है !श्रंगी ने कहा कि जो श्राप हमने दिया है !वह अवश्य पूर्ण होगा !तब ऋषि ने राजा के पास अपने शिष्य भेजकर श्राप के सम्बन्ध में अवगत कराया !तत्पश्चात परिच्छित ने सर्प के काटने से उसका जहर नष्ट करने वाले जानकारों को बुलवाया !और अपनी रक्छा के लिए कांच का महल निर्माण कराया !तथा चारों और सैनिकों को सुरक्छा के लिए लगा दिया !सांप काटे का इलाज करने वाला एक व्यक्ति राजा का सर्प काटने के बाद जहर को उतारने के लिए चला !उसकी मुलाक़ात रस्ते में बरगद के ब्रक्छ के नीचे तक्छक से हो गयी !उसने बात चीत  में तक्छक को बताया की राजा को सर्प काटेगा और मै मंत्रबल से जहर को नष्ट कर दूंगा !तक्छक ने कहा कि जिस समय सर्प राजा को काटेगा !उसी समय उसकी मृत्यु भी परमात्मा ने निर्धारित की है !इसलिए तुम राजा का जहर नष्ट तो कर दोगे किन्तु राजा को जीवित नहीं कर सकोगे !यह सुनकर मंत्र सिद्ध व्यक्ति लौट गया !और सर्प के काटने से राजा की मृत्यु हो गयी !महाभारत में परिच्छित को किसी प्रकार की मृत्यु पूर्व सुकदेव  द्वारा उपदेश देने या  श्रीमद्भागवद सुनाने का जिक्र नहीं है !किन्तु प्रश्न इस बात का नहीं है कि श्री मद्भाग्वद् की कथा परिच्छित को सुनाई गयी या नहीं ?प्रश्न इस बात का है की ५००० साल पूर्व घटित इस घटना का तालमेल मूर्ति भंजक वैदिक धर्म नाशक क्रूर महमूद गजनवी को सोमनाथ मंदिर और अन्य मंदिरों का विध्वंशक ना बताकर !भगवान शंकर को ही मंदिर तोड़ने वाला बता दिया गया है?!उसका एक कारण यह है !कि वैदिक धर्म संस्कृति पर हमला करना चाय पीने के समान स्फूर्ति और ताजगी प्रदान करता है !किन्तु इस्लाम के खिलाफ एक शब्द भी बोलने पर मौत के घाट उतार दिया जाता है !आज सारे विश्व में आतंकवादी इस्लामिक संगठन सक्रिय हैं !और हजारों निरीह स्त्रीपुरुष और महिलाओं जिनमे मुसलिम भी शामिल है !इस्लामिक संगठन और बोको हराम जैसे संगठनो द्वारा क़त्ल किये जा रहे हैं !ये इस्लामिक संगठन विश्व मानवता और विश्व शांति के लिए ख़तरा  बने हुए हैं !और इनके विनाश के लिए विश्व के मुसलिम राष्ट्र भी अमेरिका आदि के साथ जुड़ कर सक्रिय हैं !अभी देश में भी कौंच और मेरठ तथा  आगरा में सिर्फ थोड़ी सी आलोचना करने पर दंगे भड़क गए हैं !और बहुत सी गड़ियोँ और दुकानो को आग के हवाले कर दिया गया गया है !आज मुसलिम पर्सनल बोर्ड का व्यान आया है कि हिन्दुस्तान में ब्राह्मणी और वैदिक संस्कृति स्थापित करने की कोशिश सरकार कर रही है !जिसका विरोध सारे देश में किया जा रहा है !इन प्रश्नो पर विचार किया जाना चाहिए कि वैदिक संस्कृति को देश में दफ़न करके इस्लामिक जीवन चर्या को स्वीकार किया जाना चाहिए ?

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