Thursday, 17 September 2015

गांधीजी ने कहा था कायरता से अच्छी तो कोई भी पद्धति हो सकती है !सुनील पाण्डेय ने अहिंसा और गांधीवाद पर डॉक्टरेट की है !इस से यह मतलब नहीं निकाला जा सकता है !कि यह व्यक्ति वास्तव में अहिंसा की आत्मिक शक्ति प्राप्त कर चुका है !अहिंसा की प्राप्ति आत्मविजय के अधीन है !और आत्मविजय के लिए !जैसा की भगवान श्रीकृष्ण ने ६(२९,३०,३१, ३२)में कहा है  ! जो सबजगह अपने निज स्वरुप को देखने वाला है ! और ध्यान योग से युक्त अन्तःकरणवाला है !तथा  अपने आप को सम्पूर्ण प्राणियों में स्थित देखता है ! और सम्पूर्ण प्राणियों को अपने में स्थित देखता है !ऐसा अहिंसक व्यक्ति कभी भी हिंसा नहीं कर सकता है ! जवह सभी प्राणियों में एक ही आत्मा का दर्शन करता है ! सब में परमात्मा को देखता है  !और परमात्मा मय सम्पूर्ण संसार को देखता है ! उसकी दृष्टि से प्रेम करुणा और प्राणिमात्र के हित चिंतन का भाव  कभी ओझल नहीं होता है !और वह प्राणिमात्र के प्रेम और सद्भाव से कभी भी बंचित नहीं होता है !और  परमात्मा की दृष्टि से भी ओझल नहीं होता है ! आत्मा के एकी भाव  में   स्थित हुआ ही यह अहिंसा का साधक संपूर्ण प्राणियों के कल्याण की भावना से भवित प्रभावित होता है  !और वह अपने शरीर की उपमा से ही सब को सामान दृष्टि से देखता है !सब प्राणियों के शरीरों का रक्छण पोषण अपने ही शरीर के समान करता है वह अपने सुख और दुःख की तरह ही  संपूर्ण प्राणियों के दुखनिबृत्ति और सुख प्राप्त कराने के लिए प्रयत्नशील होता है !उसी को वास्तव में अहिंसक कहा जाता है !यह तो उसीप्रकार के अहिंसक गांधीवादीहै !जैसे राजनीति शाश्त्र के डिग्रीधारी राजनीति नहीं जानते है !और नागरिक शाश्त्र के डिग्रीधारी नागरिकता केसभी गुणों से बंचित होते हैं !कृषि विज्ञान का स्नातक गाय का दूध दुहना नहीं जानता है !सुनील पण्डे को परिस्थिति ने हिंसक और अपराधी बना दिया !अगर उन्होंने वास्तव में अहिंसा को अपने जीवन में उतारा होता !तो बे बिहार को हिंसा मुक्त बनाने की चेस्टा करते !किन्तु शाब्दिक अहिंसा के ज्ञान ने उनको अहिंसक बनने कीसाधना में दीक्छित नहीं किय !यह भी बिहार की बहुत ही विचित्र स्थिति है !की जिस पवित्र भूमि पर महावीर बौद्ध और अशोक जैसे महान अहिंसक रहे हों !जहां नालंदा जैसा संसार प्रसिद्ध शिक्छा का महान केंद्र और अशोक जैसा सम्राट रहा हो !वहां की राजनीति में आज संगीन अपराधों  में लिप्त राजनेताओं का वर्चस्व और महत्त्व होगया है  !समय का उलटफेर और विधि का विधान बड़ा विचित्र होता है !

No comments:

Post a Comment