Thursday, 3 September 2015

साधु संत कहते हैं कि दिव्य बिंद्राबन धाम चर्म चक्छुओं से दिखाई नहीं देता है !भगवान श्रीकृष्ण की लीलाएं और लीला धाम का दर्शन सिर्फ ज्ञान दृष्टि संपन्न साधू संतों को भगवान की कृपा से ही होता है !भगवान श्री कृष्ण ने स्वयं ही गीता में इस रहस्य का उदघाटन करते हुए ७(२५)में कहा है यह जो मूढ मनुष्य समुदाय मुझे अजन्मा और अविनाशी ठीक तरह से नहीं जानता उन सबके सामने योगमाया से अच्छी तरह ढका हुआ में प्रगट नहीं होता हूँ ! भगवान अवतार काल में में सबके सामने प्रगट होते हुए भी मूढ मनुष्योँ को भगवद रूप से न दिखकर मनुष्य रूपमे ही दीखते हैं ! मनुष्य अपने भावों के अनुसार ही योग माया से आब्रत्त भगवान को देखते हैं ! भगवान अलौकिक और अजन्मा तथा  अविनाशी होते हुए भी योग माया से ढके रहने के कारण लौकिक और सामान्य  मनुष्योँ की तरह लौकिक प्रतीत होते हैं !किन्तु उनके दिव्य जन्म और कर्मोँ का ज्ञान तो उनके भक्तोँ को ही उनकी कृपा और अनुकम्पा से होता है !दिव्य बृन्दावन के आध्यात्मिक रहस्य का साक्छात अनुभव करने वाले सिद्ध साधू महात्मा आज भी बिंद्राबन और ब्रिज छेत्र में भगवान कृष्णा की दिव्य लीलाओं का दर्शन और अनुभव करते हुए साधना रत है !निधि बन की रास लीला भी ऐसे ही श्री राधा कृष्णा प्रेम में अनुरक्त संत महात्माओं को ज्ञान चक्छुओं से ज्ञात होती है !

No comments:

Post a Comment