पुलिस अभीतक अपना सामंत वादी रबैया नहीं बदलपाई है !यद्द्पि अब पुलिस में सिपाही से लेकर थानेदार तक कभी पड़े लिखे लोग भर्ती होते हैं !बहुत से सिपाही भी क़ानून की एल एल बी डिग्री धारक भी हैं !इसके बाद भी इनका गरीबों के प्रति व्योहार बहुत क्रूरता पूर्ण और अमानवीय होता है !इस प्रकरण में भी दरोगा का ब्योहार अत्यंत अशोभनीय अमानवीय और क्रूर है !जिस प्रकार से इस थाने दार ने बुजुर्ग का टाइप राईटर उठाकर लात से तोडा है !और बुजुर्ग आरजू मिन्नत करता रहा कि उसकी जीविका का साधन यह टाइप राईटर इसको ना तोड़ें किन्तु थानेदार ने उसकी बुजुर्गी और गरीबी का ध्यान ना देकर उसको तोड़ दिया !इसमें थानेदार ने मानवता की सारी हदें पार कर दी !मुख्य मंत्री जी ने इस घटना का संज्ञान लेकर जो कार्यबाही की और बुजुर्ग के अपमान और टाइप राइटर को देने के लिए जिलाधिकारी और सुपेरिन्डेन्ट को बुजुर्ग के घर भेजा और उसको टूटे हुए टाइप राइटर के स्थान पर नया टाइप राइटर प्रदान किया !और पुलिस सुपेरिन्डेन्ट ने थाने दार की गलती मानकर उसको तत्काल निलम्वित कर दिया !यह सराहनीय कदम है !किन्तु इस प्रकार की घटनाओं की पुनराब्रती ना हो ! इसका स्थायी समाधान भी खोजा जाना चाहिए !पुलिस के ऊपर यह जिम्मेदारी है कि वह फुटपाथों को चाय बेचने वाले ठेला लगाने वाले या अन्य प्रकार से फुट पाथों पर कब्ज़ा करने वालों के विरुद्ध कार्यबाही करे !और फुट पाथों से अनाधिकृत कब्जा करने वालों को हटाये !यहाँ इस थानेदार का इतना ही अपराध है !कि इसने फूटपाथ पर कब्ज़ा करने वालों के साथ अमानवीय व्योहार किया !जो सुपेरिन्डेन्ट जिलाधिकारी !आदि कार्यालयों में बैठकर अधीनस्थ पुलिस अधिकारायिओं विशेषकर थानेदारों के कान ऐंठते रहते है !कि तुम लोग फुट पाथों से कब्ज़ा करने वालों को हटाते नहीं हो ?उसीका यह परिणाम है कि थानेदार इतनी सख्ती करता दिखाई दे रहा है !हो सकता है !इसने पहले कभी इस फुट पाथ पर कब्जा करने वालों को पहले समझाया हो !और इसके बाद भी ये लोग ना माने हों !और गुस्से में इस अधिकारी ने यह अमानवीय कृत्य कर दिया हो ? एक समस्या और है !कि जो बड़े दुकानदार फुट पाथों पर अवैध कब्जा किये रहते है !उनके साथ ये पुलिस वाले ऐसा व्योहार नहीं करपाते हैं !क्योँकि बे बड़े दुकानदार होते हैं !और रसूखदार होते हैं !इसीलिए पुलिस वालों को इन गरीब लोगों के साथ भी मानवीय व्योहार करना चाहिए !
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