किसी भी लोकतांत्रिक सरकार को संवैधानिक प्रावधानों के अतिरिक्त अन्य किसी धार्मिक या साम्प्रदायिक तथ्योँ पर विचार ना कर निर्णय लेना चाहिए !संविधान ही लोकतंत्र की सर्वमान्य किताब होती है !उसके अतिरक्त सरकारी राज काज के निर्बहन में किसी अन्य धर्म या सम्प्रदाय को महत्त्व नहीं दिया जाना चाहिए !भारत में संवैधानिक प्राबधानो की पूरी निष्ठा और ईमानदारी से पालन नहीं किया जा रहा है !सत्ता संपत्ति मान आदि के भूखे भेड़िये सभी छेत्रों में कुछ धर्म का चोला ओढ़कर कुछ राजनीति में सक्रिय होकर और कुछ समाज और सरकारी सेवा आदि में सक्रिय होकर भारत के लोकतंत्र के स्वरुप को नष्ट करने में लगे हुए हैं !भारत अनादि काल से धर्म प्रधान देश रहा है !और यहां सभी धर्मों का प्रवेश निर्बाध गति से होता रहा है !किन्तु यहां प्रतिष्ठा और वर्चस्व भूत काल में सनातन धर्म के सनातन मूल तत्त्वों का सत्य अहिंसा अस्तेय ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह का रहा है !इसलिए मूल सिधान्तो के अंतर्गत ही धार्मिक स्वतंत्रता और सर्वधर्मसम्भाव की स्थापना भारतीय संविधान में रची गयी है !किन्तु संविधान के इन प्रावधानों का कभी भी पालन ईमानदारी से शासन में बैठे लोगों ने कही किया !परिणाम स्वरुप देश में अधर्म ही धर्म के रूप में विसत्तार पा रहा है !और इसमें मुसलिम सबसे आगे दिखाई दे रहे हैं !बे आज भी किसी भी देश में रहते होँ अपना मुसलिम एजेंडा लागू करते हैं !जहां भी जिस देश में उनकी आबादी में बढ़ोत्तरी होती है !बे अपने धार्मिक कानूनो को क्रियांबित करने की चेस्टा करते हैं !पश्चिमी देशों फ्रांस इंग्लैंड अमेरिका रूस आदि देशों में मुसलिम अपनी इन्ही गतिविधियोँ के कारण अलग थलग पड़ते दिखाई दे रहे है !मुसलिम देशों में तो इस्लामिक कटटरता का स्वरुप पूरी तरह स्पष्ट दिखाई देता है !भारत तो सन्सार के सभी मुसलिम देशों से बड़ी आबादी बाला देश है !यहां तो कई जिले मुसलिम बहुल है ! और हिन्दू अल्प संख्यक हैं !धर्म के आधार पर पाकिस्तान के निर्माण के बाद भी हिन्दू धर्म के विरुद्ध घृणा का भाव ना तो पाकिस्तान में समाप्त हुआ है ! और ना ही पाकिस्तान जैसी घृणा बुद्धि रखने वाले भारतीय मुसलमानो में हुआ है !इसीका परिणाम है कि कश्मीर में भारत सरकार अरबों रुपया कश्मीर मुसलिम बहुल घाटी में जम्मू लद्दाख के हिन्दू बहुल इलाकों की उपेक्छा करने के बाद भी घाटी के मुसलमानो का दिल नहीं जीत पायी है !और अभी भी वहां पाकिस्तान समर्थक अलगाओबादियोँ का वर्चस्व है !देश की केंद्रीय सरकारों ने भारत की जनता के साथ विश्वासघात किया है !और वहां पाकिस्तान समर्थकों को हिन्दुस्तान के विरुद्ध तत्ववों को महत्ता प्रदान की और उनका पोषण किया !जिसका परिणाम है !कि अब पाकिस्तानी झंडे लहराना तो आम बात है !अब इस्लामिक संगठन के झंडे भी फेराए जाने लगे हैं !और यह जहर बहुत तेजी से सारे देश में फैल रहा है !और कुछ लोग तो अब यह भी कहने लगे हैं कि देश में गृह युद्ध की संभावनाएं विकसित होने लगी हैं !यदि इन दुष्प्रवृतियोँ को ईमानदारी से धार्मिक भेद भाव से ऊपर उठकर कानून के अनुसार सख्ती से दबाया नहीं गया तो भारत में यह समस्या और गंभीर हो सकती है
Monday, 31 August 2015
महाभारत में सत्य धर्म लज्जा और सरलता के अनेक बदले हुए युग केअनुसार कथानक उदाहरण सहित प्रस्तुत किये हैं ऋषियोँ ने काल को सतयुग त्रेता द्वापर और कलियुग ४ भागों में बिभक्त किया है !और काल क्रम से ही सत्य धर्म सरलता और लज्जा के क्रियांबन का स्वरुप भी प्रस्तुत किया है !धर्म के चार पैर होते हैं !सतयुग में धर्म के चारों पैर होते है और क्रमशः युग के अनुसार पैरों की संख्या घटती चली जाती है !कलियुग जो वर्तमान समय में है उसकी आयु शाश्त्रों में ४लाख ३२ हजार बर्ष बतायी गयी है !अभी कलियुग का कुल ५३०० वृष ही लगभग समाप्त हुए है !महाभारत का युद्ध द्वापर और कलियुग की संधि बेला में हुआ था !भगवान श्री कृष्णा के बैकुंठ धाम में जाते ही कलियुग आ गया था ! इसिलिये धर्म की मूल भावना और तत्त्व की रक्छा के लिए नीति का निर्माण करना पड़ता है !गीता में कहा है !नीतिरश्मि जिगिस्ताम १०(३८)विजय की कामना करनेवालों की नीति में ही हूँ !जिस समय द्रौपदी का चीर हरण हो रहा था !उस समय वह कौरब सभा में मौजूद सभी धर्मज्ञ सभासदों से द्रौपदी चिल्ला चिल्ला के कह रही थी ! कि क्या में हारी गयी हूँ ?तब भीष्म ने कहा था धर्म की गति अत्यंत सूक्छम है !इसीलिए काल और परिश्थिति के अनुसार कभी कभी धर्म अधर्म होजाता है !और अधर्म धर्म हो जाता है !इसके कई कथानक महाभारत में है !इसीप्रकार सत्य भी काल और परिश्थिति के अनुसार असत्य सत्य और सत्य असत्य हो जाता है !द्रोणाचार्य की मृत्यु के लिए धर्म राज युधिस्ठर को झूठ बोलना पड़ा था !क्यूोंकि दिव्य शक्तियोँ से युक्त द्रोणा चार्य को युद्ध में परास्त नहीं किया जा सकता था !इसी प्रकार लज्जा का त्याग भी भोजन इत्यादि में करना पड़ता है !दुस्ट समूहों से निर्लज्जता पूर्वक ही ब्योहार करना पड़ता है !आचरण भ्रष्ट दम्भी पाखंडी कपटी लोग भी सरलता को पाखण्ड ही समझते हैं !इसीलिए गीता में १८(७८)कहा है कि जहां योगेश्वर श्री कृष्णा है और जहां गांडीव धनुषधारी अर्जुन हैं वहां ही श्री ,विजय विभूति और अचल नीति है ऐसा मेरा मत है !अर्थात जहां शक्ति है धर्म है और नीति है और युक्ति हैं !वहीं धर्म सत्य लज्जा ओरसरलता का पालन संभव है भीष्म पर्व में कहा गया है यतः कृष्णः ततो जयः ततो धर्मः
यह तुलना कि औरंगजेब अधिक धर्म निर्पेक्छ था या अकबर? ये तुलना ही मूल रूप से इस्लामिक दृष्टिकोण से गलत हैं !इस्लाम सिर्फ पवित्र पुस्तक कोरान पर आधारित है !जिसे मुसलमान अल्लाह की किताब मानते हैं !और उसमे कौमा या पूर्णविराम को भी हटाया नहीं जा सकता है !इसीलिए कोई भी मुसलमान धर्म निर्पेक्छ मुसलिम रहते हुए नहीं हो सकता है !अकबर ने जो दीनेइलाही धर्म चलाया था !वह शाशक के रूप में बहुसंख्यक हिन्दू प्रजा की विविध उपासनाओं को दृष्टिगत रख कर चलाया गया था !किन्तु उसके इस धर्म को दरबारी मुसलमान भी स्वीकार नहीं करते थे !और वह धर्म अकबर की शाशन काल में भी मुल्ला मौल्वियोँ ने स्वीकार नहीं किया था !और यह दीने इलाही के शब्द में ही अल्लाह का धर्म का ही उद्घोष था !उसका नामकरण ही इस्लाम की उदारता प्रगट और व्यापक करने के लिए किया गया था !किन्तु इसको भी मुसलमानो ने स्वीकार नहीं किया था !अकबर एक अत्यंत अय्यास और भोग विलास में अनुरक्त रहने वाला शाषक था !उसके राज्य में प्रजा ना तो सुखी थी और ना ही इस्लामिक कट्टर पंथियोँ की कटटरता से मुक्त थी !अकबर के समकालीन संत तुलसीदास ने उसके शाशन काल में प्रजा के दुखोँ का वर्णन कविताबली में किया है !अकबर को महान कहना इतिहास का सबसे बड़ा झूठ है !अकबर के साथ कुछ गद्दार जैसिंघ मानसिंघ आदि राजपूत जुड़ गए थे !महान तो महाराणा प्रताप थे !जो वीरता और शौर्य की मिशाल थे !जिन्होंने राज्य से बंचित होना स्वीकार किया घास की रोटियां खायीं अकबर के सभी लालचोँ को ठुकराया लेकिन उसकी अधीनता स्वीकार नहीं की !महाराणा प्रताप की बीरता को देख कर अकबर की आँखोँ में भी आंसू आगये थे !अगर राजस्थान के गद्दार राजपूत राजाओं ने राणा प्रताप का साथ दिया होता t तो हिंदुस्तान में विदेशी मुगलिया सल्तनत का अंत हो गया होता !इसीलिए जिसने भारतमाता की बलिवेदी पर अपने राज्य सुख भोग को कुर्बान किया बासतव में वह महाराणा प्रताप महान था !औरंगजेब की कटटरता और हिन्दुओं पर जोर जुल्म और हिन्दू मंदिरों के विध्वंश का काला इतिहास इतना भयानक और बीभत्स है ! कि उसकी कल्पना करके रूह काँप जाती है !सिखोँ के गुरु तेगबहादुर को जिस निर्दयता से खोलते तेल में खुलाया गया !और कई दिनों तक उनकी लहाश चांदनी चौक में पड़ी रही !उस से अधिक क्रूरता की मिसालें इतिहास में मुश्किल से मिलेंगी !वह कट्टर सुन्नी मुसलमान था !और और उसने सिया मुसलमानो पर भी कहर बरपा किया था !समर्थ रामदास जो शिवाजी के गुरु थे दास बोध में उस समय हिन्दुओं पर होने वाले अत्याचारों का सजीव चित्रण किया है !और उन्होंने ही औरंगजेब की क्रूरता के विरुद्ध शिवाजी को दिव्य शक्ति प्रदान की थी !इसीलिए अकबर और औरंगजेब की प्रसनसा करना उनको महान बताना और महाराणा प्रताप और शिवाजी की मात्र भूमि के लिए किये गए बलिदान को कम करके आंकना ठीक नहीं है !शिवजी की मृत्यु पर मुसलिम इतिहासकारों ने लिखा था की काफ़िर दोजख में चलागया !
Sunday, 30 August 2015
देश में हिन्दूमुस्लिम समस्या का समाधान होता नहीं दिख रहा है !राजनेताओं को यह सत्ता में काबिज होने या काबिज बने रहने के रूप में लाभ हानि का विषय हो सकता है ! किन्तु सांस्कृतिक और धार्मिक दृष्टि से यह बहुसंख्यक हिन्दू समुदाय जो हिन्दुस्तान में भी कुछ राज्योँ और जिलों में अल्पसंख्यक हो गया है !सांस्कृतिक दृष्टि से चिंता का विषय हो सकता है !हिन्दू धर्म ने कभी दूसरे धर्मों के लोगों को धर्मांतरण कराने का प्रयत्न नहीं किया !जो धर्म कभी अफगानिस्तान ईरान श्रीलंका वर्मा मलेसिया इंडोनेसिया थाईलैंड आदि अनेक देशों में फैला हुआ था !वह आज भारी संख्या में धर्मांतरण के कारण हिन्दुस्तान में ही सिकुड़ता जा रहा है !राजनेताओं को सत्ता ने अंधा बना दिया है !इसीलिए हिन्दू होते हुए भी उन्हें हिन्दू धर्म पर होने वाला आसन्न संकट नहीं दिख रहा है !और जो अपने आप को हिन्दुओं का हित चिंतक घोषित कर रहे हैं !उन्हें भी श्रेष्ठ हिन्दू महात्मा गांधी गद्दार दिखाई देते हैं !और बे गांधीजी के हत्यारे को महिमा मंडित करते राहत हैं !हिन्दू धर्म की श्रेष्ठता पर जो प्रहार किया जाता है उसमे प्रमुख रूप से शूद्रों का मुद्दा बड़ी जोर शोर से उठाया जाता है !और आजकल जो नए जिन्ना मुसलमानो में पैदा हुए हैं बे भी इस पुराने फॉर्मूले को जिसका प्रयोग जिन्ना ने भी किया था मुसलिम दलित एकता की बात पैरवी करते दिखाई देते हैं !किन्तु शूद्र किसे कहते हैं ! इस सम्बन्ध हिन्दूओं के श्रेष्ठ ग्रन्थ महाभारत और गीता का अध्ययन नहीं करते हैं !उन कल्पित और गुलामी के काल में दूषित हुए धर्म ग्रंथों के उदाहरण पेश करते हैं जिनमे षड्यंत्र पूर्वक बहुत सी अपमानजनक बातें शूद्रों के अपमान की जोड़ दी गयी हैं !महत्तर नाम की कोई कौम भारत में नहीं थी !क्योँकि राजमहलों से लेकर सामान्य प्रजा के लोग भी शौच के लिए जंगल में जाते थे !आज भी भारत में अधिकाँश घरों में शौचालय नहीं है !इन सफाई कर्मचारियोँ का इतिहास अमृत लाल नागर के उपन्यास नाच्यौ बहुत गुपाल में देखा जा सकता है !संसार में इस्लाम को छोड़कर सभी धर्म परिवार नियोजन का पालन करते हैं !ईसाई देशों की जनसँख्या में बृद्धि होती ही नहीं है !यद्द्पि उनकी आबादी कम है ! किन्तु बुद्धिबल और वैज्ञानिक सोच के आधार पर सारे विश्व में बे शिरमौर बने हुए हैं !बिभाजन के बाद भारत में मुसलिम आबादी सिर्फ ४ करोड़ थी !आबादी मुसलमानो की बढे या हिन्दुओं की वह देश हित में नहीं है !जिस देश में भुखमरी हो बीमारों का इलाज ना हो पाता हो बेरोजगारी हो मतदाता लोभ लालच और सत्ता लोलुप हिन्दू मुसलिम नेताओं के बह्काबे में आकर अपने मत का सही उपयोग ना करता हो !जहाँ हररोज देश के किसीने किसी स्थान से हिन्दू मुसलिम तनाव और झगड़ों की खबर आती रहती है !जहां नए नए जिन्ना पैदा होकर हिन्दू मुसलिम के मध्य खायी पैदा करने में लगे हुए हों ! और सत्ता पाने के लिए बिघटनकारी प्रवृत्तियोँ को जन्म दे रहे हों ! जिस देश में ६७ साल आरक्छण के बाद भी उपेक्छित बंचित पिछड़े कहलाने वाले लोगों पर आरकच्छित समाज के लोग ही उनके हितों पर डांका डाल रहे हों !जहां न्याय को जाति और बर्गों के हित साधन में लगाकर न्याय दृष्टि को ही दूषित और कलंकित कर दिया हो !जहां चोर बाजारी और रिश्वत खोरी का बोल बाला हो ! जहाँ कर्तव्यनिष्ठ लोगों पर भ्रष्ट लोग शासन करते हों !वहां विष्फोटक होती हुओ जनसँख्या बृद्धि पर नियंत्रण साम्प्रदायिक दबाव के चलते संभव न हो सके तो संपूर्ण समस्यायों के मूल में इस विकट समस्या का समाधान भी संभव नहीं हो पायेगा
मध्यप्रदेश के राजकीय अभिलेखागार (भोपाल) में 1857 के संग्राम से संबंधित
कुछ पत्र संग्रहीत है। ये पत्र महारानी लक्ष्मीबाई, रानी लड़ई दुलैया,
राजा बखतबली सिंह, राजा मर्दन सिंह, राजा रतन सिंह और उस क्रांति के महान
योद्धा, संगठक एवं अप्रतिम सेनानायक तात्या टोपे द्वारा लिखे गए थे। इनमें
कई पत्र ऐसे हैं, जो आम आदमी, किसानों और सैनिकों द्वारा लिखे गए है। इन
पत्रों की भावना से यह स्पष्ट होता है कि प्रथम स्वतंत्रता संग्राम का
विस्तार दूर-दराज के ग्रामीण अंचलों तक हो रहा था और केवल स्वतंत्रता की
इच्छा से आम व्यक्ति क्रांति के इस महायज्ञ में अपने अस्तित्व की समिधा
डालने को तत्पर हो रहा था।
1857 के स्वतंत्रता संग्राम से संबंधित इन पत्रों की प्राप्ति का इतिहास
भी रोचक है। आजादी की पहली लड़ाई जब चरमोत्कर्ष पर थी, तब तात्या टोपे
अपनी फौज के साथ ओरछा रियासत के गांव आष्ठौन में अंग्रेजों से मोर्चा लेने
की तैयारी में जुटे हुए थे। तात्या टोपे के आष्ठौन में होने की खबर
मुखबिरों से अंग्रेजों को लग गई और अंग्रेजी फौज ने यकायक तात्या के डेरे
पर हमला बोल दिया। उस समय तात्या टोपे मोर्चा लेने की स्थिति में नहीं
थे। लिहाजा, ऊहापोह में तात्या अपना कुछ बहुमूल्य सामान यथास्थान छोड़कर
सुरक्षित भाग निकले।
उस दौरान ओरछा के दीवान नत्थे खां थे। तात्या द्वारा जल्दबाजी में छोड़े
गए सामान की पोटली नत्थे खां के एक विश्वसनीय सिपाही ने उन्हें लाकर
दी। इस सामान में एक बस्ता था, जिसमें जरूरी कागजात और चिट्ठी-पत्री थीं।
इसी सामान में एक तलवार और एक उच्चकोटि की गुप्ती भी थी। नत्थे खां के
यहां कोई पुत्र नहीं था, इसलिए यह धरोहर उनके दामाद को मिली। दामाद के भी
कोई पुत्र नहीं था, लिहाजा तात्या टोपे के सामान के वारिस उनके दामाद
अब्दुल मजीद फौजदार बने, जो टीकमगढ़ के निवासी थे।
स्वतंत्र भारत में 1976 में टीकमगढ़ के राजा नरेन्द्र सिंह जूदेव को इन
पत्रों की खबर अब्दुल मजीद के पास होने की लगी। नरेन्द्र सिंह उस समय
मध्यप्रदेश सरकार में मंत्री भी थे। उन्होंने इन पत्रों के ऐतिहासिक
महत्व को समझते हुए तात्या की धरोहर को राष्ट्रीय धरोहर बनाने की दिशा
में कदम उठाया। उन्होंने इन पत्रों की वास्तविकता की पुष्टि इतिहासकार
दत्तात्रेय वामन पोद्दार से भी कराई। उन्होंने इन पत्रों के मूल होने का
सत्यापन किया। प्रसिद्व ऐतिहासिक उपन्यास लेखक डावृन्दावनलाल वर्मा ने
भी इन पत्रों को मौलिक बताते हुए तय किया कि सामान में प्राप्त तलवार तथा
गुप्ती भी तात्या टोपे की ही हैं। डॉ वर्मा ने यह भी तय किया कि जिस
स्थान और जिस समय इस साम्र्रगी का मिलना बताया जा रहा है, उस समय वहां
तात्या टोपे के अलावा किसी अन्य सेनानायक ने पड़ाव नहीं डाला था।
तात्या के बस्ते से कुल 255 पत्र प्राप्त हुए थे, जो देवनागरी (हिन्दी)
एवं फारसी लिपि में थे। हिन्दी पत्रों की भाषा ठेठ बुंदेली है। इन पत्रों
में 125 हिन्दी में और 130 उर्दू में लिखे हुए हैं। पत्रों के साथ एक
रोजनामचा भी है।
तात्या की तलवार और गुप्ती भी अनूठी है। तलवार सुनहरी नक्काशी के मूठ
वाली है, जो मोती बंदर किस्म की बताई गई। इस तलवार की म्यान पर दो कुंदों
में चार अंगुल लंबे बाण के अग्रभाग जैसे पैने हथियार हैं। इन हथियारों पर
हाथी दांत के बने शेर के मुंह की आकृतियां लगी हुई हैं। इसी तरह जो गुप्ती
प्राप्त हुई, वह भी विचित्र है। गुप्ती की मूठ सोने की है। इसके सिरे पर
एक चूड़ीदार डिबिया लगी हुई है, जिसमें इत्र-फुलेल रखने की व्यवस्था है।
तात्या टोपे की यह अमूल्य धरोहर अब राजकीय अभिलेखागार, भोपाल का गौरव
बढ़ा रही है।
TAGS :
SHARE :
Popular Posts
follow us on facebook
पाकिस्तान ने १९६५ में भारतीय शक्ति का गलत अनुमान लगाया था !तत्कालीन प्रधान मंत्री एक सौम्य और सरल व्यक्ति थे !किन्तु वह फौलादी इरादे वाले अत्यंत ईमानदार राष्ट्र भक्त भी थे !इसीलिए भारत ने पाकिस्तानी आक्रमण का उचित जबाब दिया था !और प्रधानमन्त्री के दृढ इरादों और शशक्त नेतृत्त्व और फौज की ताकत ने पाकिस्तान को धूल चटा दी थी !पाकिस्तान सभी मुहानो पर बुरी तरह पराजित हो रहा था !भारतीय फौजों ने अपने भू भाग से तो पाकिस्तान को हटने पर मजबूर कर ही दिया था !पाकिस्तान के बड़े भू भाग पर भारतीय सेना ने कब्ज़ा कर लिया था !अगर भारत संयुक्त राष्ट्र संघ की युद्ध विराम की अपील पर अमल नहीं करता !तो भारतीय तिरगा लाहोर पर लहरा रहा होता !और भारतीय कश्मीर पर भी भारत का अधिपत्य होजाता जिसे पाकिस्तान अपने कब्जे में किये हुए है !भारत हर बार मित्रता का हाथ पाकिस्तान की गुस्ताखी को माफ़ कर पाकिस्तान की और बढ़ाता है !किन्तु पाकिस्तान भारत के प्रति दुश्मनी का नजरिया नहीं बदलता है !रूस में ताशकंद में पाकिस्तान हिन्दुस्तान का राजीनामा रूस के प्रधान मंत्री की मध्यस्था में हुआ था !ताशकंद समझौते में भारत ने पाकिस्तान के जीते हुए भू भाग को वापिस कर दिया था !किन्तु भारत पाकिस्तान को कश्मीर पर अपना दाबा छोड़ने को तैयार नहीं कर पाया था !ताशकंद समझौते के विरोध में शाश्त्री मंत्रिमंडल के महान राष्ट्रभक्त महाबीर त्यागी ने त्याग पात्र दे दिया था !जो विजय भारतीय सेना ने युद्ध में प्राप्त की थी उस विजय को पाकिस्तान के प्रति मित्रता और सद्भाव के लिए भारत ने पाकिस्तान को अर्पित कर दी थी ! किन्तु पाकिस्तान ने कभी भी भारत की मैत्री ओरसद्भाव का बदला मैत्री से नहीं दिया !आज भी पाकिस्तान भारत को अपना दुश्मन नंबर एक मानता है !और अणुबम से लेकर संपूर्ण सैनिक सज्जा भारत से लड़ने के लिए ही कर रहा है !जबकि भारत ने बांग्लादेश के युद्ध में पराजित पाकिस्तानी सेना के ९५००० सैनिको को भारतीय सेना के समक्छ आत्मसमपर्ण के बाद भी ससम्मान बापिस कर दिया था !
Saturday, 29 August 2015
भारत में परतंत्र भारत के गुलामी के काल में भारतीयता को नष्ट करने का भरसक प्रयत्न किया गया !बड़े पैमाने पर धर्म परिवर्तन तलबार और लोभ लालच के बल पर कराया गया !हिन्दुओं के मन्दिरोंको तोडा गया !वैदिक धर्मग्रन्थोँ में भी बहुत से कल्पित कथानक जोड़ दिए गए !वर्णव्यबस्था का विकृत रूप प्रस्तुत कियागया !कुछ लालची हिन्दू विद्वानो को भी लालच से हिन्दू धर्म के बिकृत करने वाले ग्रन्थ लिखाये गए !किन्तुइस सबकेबाद भी हिन्दू धर्म की रक्छा साधु संत सन्यासी और महात्मा लोग तथा गंभीर निडर निश्वार्थ समाज सेवक हिन्दू धर्म को इन आघातों से बचाते रहे है !आजादी के बाद भी इसी विकृत मानसिकता के कुछ लोग आज भी हैं !जो औरंगजेब ऐसे क्रूर धर्मांध मूर्तिभंजक हिन्दू धर्म केघोर बिरोधी कट्टर सुन्नी मुसलमान औरंगजेब के पक्छ में खड़े दिखाई दे रहे हैं !हिन्दू धर्म उदारता प्रधान धर्म है !जिस बीजेपी पर कट्टर हिन्दू होने का आरोप लगाया जाता है !और शायद यह सही भी है !उसी भाजपा ने अब्दुल कलाम को राष्ट्रपति बनाया था !और अब उसी के शाशन काल में औरंगजेब रोड का नाम इस राष्ट्रभक्त मुसलिम के नाम से किया जा रहा है !इस से यह अर्थ निकलता है कि कट्टर से कट्टर हिन्दू भी यदि किसी भी धर्म के व्यक्ति में राष्ट्र भक्ति देखता है !तो उसको सर माथे पर बिठा लेता है इसिलिये क्रूर औरंगजेब के स्थान पर किसी महान हिन्दू का नाम ना रख कर उदार राष्ट्रभक्त कलाम के नाम का नामकरण सड़क का किया गया है
भारत में परतंत्र भारत के गुलामी के काल में भारतीयता को नष्ट करने का भरसक प्रयत्न किया गया !बड़े पैमाने पर धर्म परिवर्तन तलबार और लोभ लालच के बल पर कराया गया !हिन्दुओं के मन्दिरोंको तोडा गया !वैदिक धर्मग्रन्थोँ में भी बहुत से कल्पित कथानक जोड़ दिए गए !वर्णव्यबस्था का विकृत रूप प्रस्तुत कियागया !कुछ लालची हिन्दू विद्वानो को भी लालच से हिन्दू धर्म के बिकृत करने वाले ग्रन्थ लिखाये गए !किन्तुइस सबकेबाद भी हिन्दू धर्म की रक्छा साधु संत सन्यासी और महात्मा लोग तथा गंभीर निडर निश्वार्थ समाज सेवक हिन्दू धर्म को इन आघातों से बचाते रहे है !आजादी के बाद भी इसी विकृत मानसिकता के कुछ लोग आज भी हैं !जो औरंगजेब ऐसे क्रूर धर्मांध मूर्तिभंजक हिन्दू धर्म केघोर बिरोधी कट्टर सुन्नी मुसलमान औरंगजेब के पक्छ में खड़े दिखाई दे रहे हैं !हिन्दू धर्म उदारता प्रधान धर्म है !जिस बीजेपी पर कट्टर हिन्दू होने का आरोप लगाया जाता है !और शायद यह सही भी है !उसी भाजपा ने अब्दुल कलाम को राष्ट्रपति बनाया था !और अब उसी के शाशन काल में औरंगजेब रोड का नाम इस राष्ट्रभक्त मुसलिम के नाम से किया जा रहा है !इस से यह अर्थ निकलता है कि कट्टर से कट्टर हिन्दू भी यदि किसी भी धर्म के व्यक्ति में राष्ट्र भक्ति देखता है !तो उसको सर माथे पर बिठा लेता है इसिलिये क्रूर औरंगजेब के स्थान पर किसी महान हिन्दू का नाम ना रख कर उदार राष्ट्रभक्त कलाम के नाम का नामकरण सड़क का किया गया है
Friday, 28 August 2015
मुम्बई ब्लास्ट प्रकरण में कानून ने अपना काम उसी प्रकार से किया जैसा अन्य अपराधिक प्रकरणो में होता है !संजय कादुर्भाग्य रहा की उन्होंने कानूनी सलाह पर यह स्वीकार कर लिया कि ये के ५६ रायफल उनसे बरामद हुई थी !जाँच करने वाली एजेंसी ने एक भी सबूत न्यायालय में सिर्फ संजय केस्वयं की स्वीकारोक्ति के अलावा न्यायालय में पेश नहीं किया जिस से यह सिद्ध हो सकता था कि ये के ५६ रायफल उनसे बरामद हुई है !अगर संजय पर मुकद्म्मा टाडा के अंतर्गत ना चलाया गया होता तो आर्म्स एक्ट में अवैध हथ्यार रखने के जुर्म में अधिकतम २ साल की सजा हो सकती थी !और उसमे एक दिन भी संजय को जेल में नहीं रहना पड़ता !न्यायालय में अभियुक्त को कानूनी सलाह के अनुसार ही व्यान आदि देना पड़ते हैं !इसीलिए मामले केसही तथ्य सामने नहीं आ पाते हैं !किन्तु अनुमान से यह कहा जा सकता है की ये के ५६ राफेल रखने में संजय की लापरबाही और बड़े नेता और औरप्रख्यात अभिनेत्री का पुत्र होने के कारण अहंकार ही दिखाई देता है !मुम्बई ब्लास्ट में किसी भी प्रकार की सहभागिता का तो प्रश्न ही नहीं उठता है !
पाकिस्तान के बनजाने के बाद भी बहुत से मुसलमान भारत में ही रह गए ! जबकि उनके सगे सम्बन्धी रिश्तेदार आदि पाकिस्तान में चले गए !भोपाल के नबाब तो भोपाल रियासत पाकिस्तान में विलय करने के लिए प्रयत्न शील थे !किन्तु रियासत के बहुमत के विरोध के कारण बे पाकिस्तान में भोपाल रियासत का विलय नहीं कर पाये थे !भोपाल रियासत का विलय भी भारत में १९४९ में हुआ था !इसीलिए नबाब की बेटी आबिदा अपने पुत्र के साथ पाकिस्तान चली गयी थी !दुर्भाग्य से पाकिस्तान और भारत में आज तक सामान्य मित्रता पूर्ण सम्बन्ध स्थापित नहीं हो पाये हैं !तीन बार युद्ध भी हो चूका है !हिन्दुस्तान की सरकारों के भरसक प्रयासों के बाद भी दोनों देश अभी भी मित्रता और मधुर सम्बंधोँ से बहुत दूर हैं !किन्तु जो सगे सम्बन्धी भारतीय मुसलमानो के पाकिस्तान में रह रहे हैं बो सम्बन्ध तो हमेशा कायम रहने वाले हैं !करीना कपूर जो सैफ अली खान की बेगम हैं !उनका रिश्ता भी शहरयार से ससुर बहु का यथाबत रहेगा !अभी भी शादी व्याह पाकिस्तान और हिन्दुस्तान के मुसलमानो में हो रहे हैं !अगर दोनों देशों के सम्बन्ध भी सुधर जाएँ तो भारत और पाकिस्तान के लोगों में और भी शादी सम्बन्ध हो सकते हैं !और दोनों देशों के मुसलमान आराम से हिन्दुस्तान से पाकिस्तान और पाकिस्तान से हिन्दुस्तान में आ जा सकते हैं !
पाकिस्तान में भारत के विरुद्ध आत्तंकवादी तैयार किये जाते हैं !और पाकिस्तान भारत को अपना दुश्मन नंबर एक मानता है !तथा जितनी भी सैनिक साज सामग्री अणु बम सहित पाकिस्तान में तैयार की जा रही है !वह सब भारत पर हमला करने की दृष्टि से ही तैयार की जाती है !पाकिस्तान के स्कूलों विद्यालयों और विश्व विद्यालयोँ में भी भरता के खिलाफ मनगढ़ंत और झूठा इतिहास पढ़ाया जाता है !पाकिस्तान में जितने भी चरम पंथी गट सक्रीय हैं वे सभी हर समय भारत के खिलाफ भड़काऊ व्यान देते रहते हैं !इस सबके बाद भी भारत का व्योहार पाकिस्तान के प्रति हमेशा मित्रता का रहा है !१९६५ में पाकिस्तान ने भारत पर हमला किया था !भारतीय फौज ने पाकिस्तान को खदेड़ दिया था !तथा पाकिस्तान की कुछ भूमि पर भी कब्ज़ा कर लिया था !अगर सरकार युद्ध बिराम की घोषणा नहीं करती तो तिरगा लाहोर पर लहराता !किन्तु जो विजय फौज ने युद्ध में पायी थी !उसको भारत ने ताशकंद समझौते से पराजय में तब्दील कर दिया था !लालबहादुर शाश्त्री के मंत्री मंडल के मंत्री महाबीर त्यागी ने ताशकंद समझौते के विरोध में मंत्री मंडल से इस्तीफ़ा दे दिया था ! शाश्त्रीजी भी जीवित भारत नहीं लौटे थे
Thursday, 27 August 2015
आबादी के जो आंकड़े धार्मिक आधार पर प्रकाशित हुए है !उनकी गड़ना का प्रारम्भ मेरी समझ में मोदी जी की सरकार के समय नहीं हुआ !इसीलिए इसके ये अर्थ निकालने की चेस्टा नहीं करनी चाहिए कि ये सरकार की चाल है !और सरकार हिन्दुओं का ध्रुवीकरण करना चाहती है !सभी राजनैतिक विश्लेष्शकों को जमीनी हकीकत पर भी ध्यान देना चाहिए !हिन्दू मुसलमानो के मध्य मधुर सम्बन्ध है यह भी सही है !किन्तु जब हिन्दू मुसलिम का सबाल खड़ा हो जाता है !तो हिन्दू मुसलमान अलग अलग हिन्दू मुसलिम खेमों में बटा दिखाई देता है ! यही कारण है कि अलग पाकिस्तान बन जाने के बाद भी छोटी सी घटना भी हिन्दू मुसलमानो में दंगो के रूप में बदल जाती है !हिन्दुस्तान में सभी धर्मों के लोग रहते हैं !फिर ये दंगे ज्यादातर हिन्दुओं और मुसलमानो में ही क्योँ होते है ? मुसलमान परिवारनियोजन को स्वीकार नहीं करता है !और यह कोई भी किसी शहर या कसबे में जाकर खुली आँख से देख सकता है !कि
मुसलमानो के अन्य धर्मवालों के अनुपात में अधिक बच्चे होते हैं !किन्तु इस समय यह प्रश्न अत्यंत महत्त्व पूर्ण नहीं है !महत्त्व पूर्ण प्रश्न आबादी बृद्धि का है !आबादी में बढ़त्तरी किसी भी धर्म की हो उसको नियंत्रण में करना देश हित में आवशयक है !इस धार्मिक जन गड़ना के परिणाम को इसी दृष्टि से देखने की जरुरत है !सरकार कोकड़े कानून बनाकर आबादी बृद्धि को रोकना चाहिए !इसको राजनैतिक रंग देने की आवश्यकता नहीं है !
मुसलमानो के अन्य धर्मवालों के अनुपात में अधिक बच्चे होते हैं !किन्तु इस समय यह प्रश्न अत्यंत महत्त्व पूर्ण नहीं है !महत्त्व पूर्ण प्रश्न आबादी बृद्धि का है !आबादी में बढ़त्तरी किसी भी धर्म की हो उसको नियंत्रण में करना देश हित में आवशयक है !इस धार्मिक जन गड़ना के परिणाम को इसी दृष्टि से देखने की जरुरत है !सरकार कोकड़े कानून बनाकर आबादी बृद्धि को रोकना चाहिए !इसको राजनैतिक रंग देने की आवश्यकता नहीं है !
आरक्छण मात्र दस बर्ष के लिए किया गया था !किन्तु अब यह राजनेताओं के स्वार्थों के कारण स्थायी स्वरुप ग्रहण कर चुका है !आरक्छण की संबिधान में व्यबस्था डॉ अम्बेडकर ने की थी !किन्तु बे भी आरक्छण के लगातार विस्तार को देखने के लिए जीवित नहीं रहे !अगर डॉ अम्बेडकर आरक्छण को स्थायी बनाना चाहते तो उन्हें ऐसा करने से कौन रोक सकता था !जिस प्रकार से दलितों के लिए आरक्छण का क्रियांबन किया जा रहा है !इस प्रकार से तो एक लाख बर्ष में भी आरक्छण अंतिम दलित तक नहीं पहुँच पायेगा !सरकारों ने कभी इस बात का जानने का प्रयत्न नहीं किया कि आरक्छण सभी आरकच्छित जातियोँ तक पहुँच रहा है !या नहीं ?आरक्छण दलित नेताओं के लिए बरदान बन गया है !और इसका लाभ कुछ दलित जातियां ही उठा रही हैं !और अब दलित भी अत्यंत धनी और निर्धन में बिभाजित हो गए हैं !इसलिए अब आरक्छण के स्वरुप को बदलने की आवश्यकता है !इसको जातिगत आधार पर ना देकर आर्थिक आधार पर दिया जाना चाहिए !जो स्थिति आरक्छण की सुविधा की दलितों की है वही पिछड़ों की भी है !उसमे भी कुछ पिछ्डिजातियां ही लाभान्वित हुई है !हार्दिक पटेल केसाथ जन समूह किसी राजनैतिक नीति के कारण नहीं खड़ा हुआ है !हार्दिक की आवाज जनता की आवाज है !उसमे राजनैतिक हित अनहित की शोध करना व्यर्थ है !यह बात दूसरी है की इस आंदोलन के कारण किसी राजनैतिक दल को लाभ हो जाय और किसी की राजनीति की दूकान बंद हो जाय !
Wednesday, 26 August 2015
इस्लाम में किसी मूर्ति के बिग्रह में भगवान की विधि विधान सहित पूजा अर्चाकरना बुत परस्ती माना जाता है !और जिन मंदिरों में मूर्तियोँ की स्थापना होती है !उनको नष्ट करना इस्लाम में धर्म माना जाता है !इसलिए जहां इस्लामिक हुकूमत होती हैं !वहां दूसरे धर्म के मानने वालों का रहना मुश्किल हो जाता है !इसलिए जैसे ही पाकिस्तान का निर्माण हुआ और वहां पाकिस्तान की इस्लामिक राष्ट्र के रूप में घोषणा हुई वही हिन्दुओं के अधिकाँश मंदिर जमी दोज कर दिए गए !जो थोड़े बहुत मंदिर बचे हैं !उन पर भी संकट के बादल मड़रा रहे हैं !सीरिया में जो इस्लामिक संगठन पुराने स्मारकों को तोड़ रहा है !और २०००साल पुराना जो मंदिर उन्होंने तोड़ दिया है !उसके पीछे उनका यही तर्क है कि ये प्राचीन स्मारक और मंदिर बुत परस्ती को बढ़ाबा देते हैं !ये इस्लाम के खिलाफ है !इसलिए इनका तोडा जाना धर्म है ! लेकिन इस्लामिक संगठन मस्जिद को अल्लाह का घर मानते है !और उसकी रक्छा पूरी शक्ति से करते हैं !इस्लामिक संगठन तलबार के बल पर इस्लामिक सत्ता स्थापित करने का प्रयत्न कर रहा है !उसके समर्थक भारत में भी मौजूद है !और कश्मीर में तो इस्लामिक संगठन के झंडे लहराए जाते हैं !कुछ प्लेकार्डस में लिखा होता है !इस्लामिक संगठन जल्दी आवो !इन लोगों को भारत अच्छा नहीं लगता है !इनको गला काटने वाला इस्लामिक संगठन पसंद आता है !लेकिन इस्लामिक संगठन तो अन्य धर्म के लोगों के अलावा उन मुसलमानो के भी गले काट रहा है !जो उसके मुताबिक इस्लामिक धार्मिक कानूनो को स्वीकार नहीं करते हैं !इसलिए अगर इस्लामिक संगठन भारत में प्रवेश कर गया तो इस्लामिक संगठन को ख़ुशी ख़ुशी बुलाने वालों के गले भी कट सकते हैं !
Tuesday, 25 August 2015
आबादी बृद्धि चाहे हिन्दुओं की हो या मुसलमानो की इसको कठोर कानून बनाकर रोका जाना चाहिए !जो लोग धर्म के आधार पर आबादी की बृद्धि मानते हैं !और इसे भगवान की कृपा मानते हैं !उन्हें यह समझना चाहिए कि भगवान अगर आबादी बढ़ाने का काम करते हैं !तो आबादी के साथ ही पृथ्वी का आकार क्योँ नहीं बढ़ा देते हैं !तथा जल आदि की सुविधा में बृद्धि क्योँ नहीं कर देते हैं ?यह घोर अन्धविस्वाश है !और बच्चों के साथ अन्याय है !देश में बड़ी मात्रा में बच्चे कुपोषण के शिकार है !उनका शिक्छण और लालन पालन भी ठीक से नहीं हो पा रहा है !सरकार की जन कल्याण की सारी योजनाएं भ्रष्टाचार और बढ़ती हुई आबादी के कारण जन कल्याण नहीं कर पा रही हैं !स्वस्थ और उत्तम संतान के लिए आबादी पर नियंत्रण नितांत आवश्यक है !यह विज्ञान का युग है !इसमें शक्ति और सम्पन्नता तथा प्रभुता संतान बृद्धि से नहीं योग्यता और बुद्धि कौशल से प्राप्त होगी !ईसाई राष्ट्रों की आबादी कम है किन्तु बे अपनी वैज्ञानिक दृष्टि और कुशल प्रबंधन से सारे विश्व पर शासन कर रहे हैं बड़ी आबादी वाला भारत भीख का कटोरा लेकर उन देशों से जल सड़क स्वास्थ्य, शिक्छा के लिए मदद मांगता है
आरक्छण जिसका जन्म वंचितों उपेक्छितों और दलितों को तथाकथित सवर्ण जातियोँ के समकछ लाने के लिए हुआ था !अब घोर अन्याय का पोषक बन गया है !और दलितों पिछड़ों आदि जातियोँ के नेताओं को बरदान बन गया है !अब इन जातियोँ के कुछ नेता तो राजाओं महाराजाओं जैसा जीवन जी रहे है !और कुछ दलित और पिछड़े लोग इन नेताओं के स्वार्थ के कारण आरक्छण का लाभ अभी भी नहीं ले पा रहे हैं ! एक दो दलित जातियोँ और पिछड़ों को ही आरक्छण और कुछ ख़ास दलित परिवारों को ही इसका लाभ प्राप्त हो पाया है !जिन तथाकथित सवर्ण जातियोँ की उपेक्छा की गयी है !उनमे भी भयानक गरीबी और पिछड़ापन है !उनमे कुछ लोग जो धन धान्य से संपन्न है !बे ही उच्च पदों पर आसीन है और उन्ही के हाथों में व्योपार आदि है !शेष सवर्ण तो गरीबी और भुखमरी के शिकार है !नेता लोग आकंठ स्वार्थ में डूबे हुए हैं !और अपने घर परिवार और अपनी उन्नति में ही अपने राजनैतिक पद का इस्तेमाल कर रहे हैं !किन्तु अब इस अन्याय पूर्ण आरक्छण के विरुद्ध युवा जागरूक हो कर विरोध में उतर आया है !इसीलिए या तो नौकरियोँ में आरक्छण समाप्त किया जाना चाहिए या इसे न्याय युक्त बनाकर आर्थिक आधार पर होना चाहिए !
Monday, 24 August 2015
नेपाल का राजतन्त्र भले ही जनभावनाओं के अनुकूल न रहा हो !किन्तु लोकतंत्र का जिस तरह का विकृत स्वरुप घोर स्वार्थ निष्ठ नेता प्रस्तुत कर रहे हैं !उसका परिणाम यह मधेशीयों का खूनी आंदोलन है !ये जनप्रितिनिधि कितने स्वार्थ निष्ठ हैं कि अब तक सर्वसम्मत संविधान भी नेपाल के लोकतंत्र को नहीं दे पाये हैं !राजतंत्र में तो जनता एक ही राजा के अत्याचार और अनीति से पीड़ित होती है !किन्तु लोकतंत्र में तो जनता के द्वारा चुन कर आये ये तथाकथित नेताओं के घोर स्वार्थ के कारण जनता को कष्ट उठाने पड़ते हैं !अब विश्व में सभी लोकतांत्रिक सरकारों में इन भ्रष्ट नेताओं के बिरुद्ध बगावत के स्वर फूटने लगे हैं !मुश्किल से अनेक बलिदानो के प्राप्त लोकतान्त्रिक व्यबश्था का इन स्वार्थ निष्ठ नेताओं ने सर्व नाश कर दिया है ! और अब लोग लोकतंत्र का विकल्प तलाशने लगे हैं !नेपाल के मधेशी जिनका नेपाल की अर्थ व्यबस्था में महत्त्व पूर्ण योग दान है !उनको उनके संवेधानिक अधिकारों से उनको बंचित करने का प्रयत्न नेपाल के लोकतंत्र की जड़ें हिला देगा !मधेशियोँ को उनके वैधानिक अधिकार नए संविधान में सुरक्छित और संरक्छित किये जाने चाहिए
विज्ञान अभी सौरमंडल में स्थित बहुत से रहस्योँ के प्रारम्भ तक नहीं पहुंच पाया है !अन्तरिक्छ इतना विशाल और विस्तृृत है कि उसकी खोज आत्मज्ञान भी नहीं कर पाया है !जबकि पृथ्वी पर आत्मज्ञान से युक्त ऋषिओं और महर्षियोँ की एक बढ़ी श्रंखला रही है !भौतिक ज्ञान से जो अन्तरिक्छ की शोध बर्त मान काल में हो रही है वह बहुत खर्चीली और खतरों से भरी है !जबकि आत्मज्ञान से संयुक्त ऋषि मुनि अन्तरिक्छ की शैर पृथ्वी पर टहलने जैसी गति से कर लेते थे !और उसमे व्यय और खतरा भी नहीं था !आकाश में जो एक पतली लकीर की तरह आकाश गंगा दिखाई देती है !उसमे २५०० करोड़ पृथ्वियां है !सतयुग में ययाति नाम का राजा अहंकार के कारण स्वर्ग लोक से पतित होकरपृथ्वी पर गिरादिया गया था !जब उसके पुत्र अष्टक ने उस से जानना चाहा था की अंतरिक्छ में कितने लोक हैं !तब ययाति ने कहा था कि पृथ्वी पर जितने धूल के कण है !उतने लोक अन्तरिक्छ में विद्यमान है !वैदिक धर्म ग्रंथोँ और ज्योतिष शास्त्र के ग्रंथोँ में अन्तरिक्छ के रहस्योँ को उजागर किया गया है !जिनको भौतिक जगत के लोग कल्पना या गप्प मानते थे ! अब बे रहस्य विज्ञान से उजागर होने लगे
Sunday, 23 August 2015
श्रष्टि के विनाश का रहस्य इस गुफा में छिपा हुआ है !किन्तु श्रिष्टि के विनाश का काल गीता के अध्याय ८ (१७ ,१८ )में बताया गया है !गीता में बताया गया है की ब्रह्मा का एक दिन १००० चतुर युगी का (सतयुग ,त्रेता ,द्वापर ,कलियुग ) होता है !और इतने ही समय की रात्रि होती है !ब्रह्मा के दिन के साथ ही अव्यक्त ब्रह्मा के सूक्छम शरीर से संपूर्ण उद्भिज जरायज अण्डज और स्वेदज शरीर उत्पन्न होते हैं ! और ब्रह्मा की रात्रि के आरम्भ काल में उस अव्यक्त नाम वाले ब्रह्मा के शुक्छम शरीर में ही संपूर्ण शरीर कर्मों सहित लीन हो जाते हैं ! वही यह प्राणी समुदाय उत्पन्न हो हो कर प्रकृति स्वभाव के परवश होकर ब्रह्मा के दिन के समय उत्पन्न होता है ! और ब्रह्मा की रात्रि में ब्रह्मा के शूक्छम शरीर में लीन हो जाता है ! तथा यह जन्म मरण का सिलसिला सभी शरीरों का तब तक जारी रहता है जब तक आत्मा मोक्ष को प्राप्त नहीं हो जाती है !ब्रह्मा का एक दिन ४२५ करोड़ वर्ष का होता है !और इतने ही समय की रात्रि होती है !ब्रह्मा के एक दिन में १४ मन्वन्तर होते है !इस समय ७ वां मन्वन्तर चल रहा है !इसका अर्थ यह हुआ की अभी ब्रह्मा का आधादिन ही व्यतीत हुआ है !अभी श्रष्टि के विनाश काल के लिए २१२ करोड़ बरष का समय शेष है !इसलिए इस गुफा में जो श्रष्टि के विनाश का रहस्य छिपा हुआ है !उस विनाश काल की गड़ना गीता ८ (१७,१८,१९) के अनुसार करनी चाहिए !
मुसलमानो के शासन काल में उर्दू फ़ारसी राज काज की भाषा थी !तथा स्कूलों में भी उर्दू फ़ारसी पढ़ाई जाती थी !इसलिए उस काल खंड में उर्दू भाषा में हिन्दू धर्मग्रंथो का लेखन भी विद्वानो द्वारा किया गया था !यह उर्दू में लिखी गयी रामायण इसी तथ्य को सिद्ध करती है !कुछ मुसलिम शासक ऐसे भी हुए जिन्होंने हिन्दू जनता की धार्मिक भावनाओं का आदर किया !और गो बध पर प्रितबंध लगाया !और कुछ मुसलिम शासक ऐसे भी हुए जिन्होंने हिन्दुओं पर जजिया कर लगाया और हिन्दुओं पर अत्याचार भी किये !और कुछ मुसलिम शासक एसे भी हुए जिन्होंने हिन्दू धर्मग्रन्थोँ का गंभीर अध्ययन किया और हिन्दू मंदिरों को राज्य से जागीरें भी प्रदान की थी !अब देश आजाद है इसलिए हमें भयमुक्त होकर सत्य को सत्य और झूठ को झूठ कहना चाहिए !किसी भी धर्म पर अनर्गल असत्य आरोपण नहीं करना चाहिए !हम सबका यही प्रयत्न होना चाहिए की देश में सभी धर्मों का आदर हो !और देश विश्व में सर्वधर्म समभाव का ज्वलंत उदाहरण विश्व के सामने प्रस्तुत करे !
राजस्थान राजपूत वीरों की कर्मस्थली रहा है !यहाँ पर राजपूतों की शौर्य गाथाएं इस बीर भूमि के कण कण में व्याप्त हैं !यहाँ की वीरांगनाओं ने अपने शील और सतीत्त्व की रक्छा के लिए अपने जीवन को अग्नि के अर्पित कर दिया था !किन्तु विदेशी आक्रान्ताओं के हाथ में पड़कर अपने शील और सतीत्त्व को दूषित नहीं होने दिया !कालांतर में इस भूमि में मानसिंघ आदि ऐसे राजपूत भी हुए जिन्होंने मुग़लों की शरण में जाकर इस वीर भूमि के स्वर्णिम इतिहास को कलंकित किया ! किन्तु राणा रतनसिंघ उदयसिंघ और राणा प्रताप ऐसे वीरों ने मुग़लों की अधीनता स्वीकार नहीं की और अंतिम स्वांश तक अपनी आजादी और धर्म संस्कृति के लिए संघर्ष किया और अपने जीवन की आहुति मातृभूमि और धर्म संस्कृति की रक्छा के लिए कुर्बान कर दी थी ! हांडा रानी और पद्मावती ने सह्स्त्रौं छत्राणियोँ के साथ जौहर कर अपने शरीरों को अग्नि के सम्पर्पतित कर दिया !यह रणथम्बौर का अभेद्द्य दुर्ग भी राजपूतों और राज्पुतानियोँ के शौर्य और बलिदान की अमर गाथा प्रस्तुत करता है !इस इतिहास को संरक्छित कर इसको विद्यार्थियोँ के कोर्स में शामिल कर उनको पढ़ाया जाना चाहिए !
भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकाँश युवा अधिकारी बिलक्छन् प्रतिभा के धनी होते हैं !और बे प्रितिस्पर्धा में अपनी योग्यता और परिश्रम के आधार पर भारतीय प्रशासनिक सेवा में चयनित होते हैं !उनमे देश भक्ति और कर्तव्य निष्ठा का जज्बा होता है !और बे इसी जज्बे के साथ कर्त्तव्य का निर्बहन करना चाहते हैं !किन्तु उनको जिलाधिकारी या पुलिस अधीक्छक के रूप में राजनेताओं का हस्तछेप प्रशासनिक कार्योँ में झेलना पड़ता है !जो अधिकाँश राजनेता प्रतिस्पर्धा में क्लेर्क की भी नौकरी नहीं पा सकते हैं ! बे ही जनता के द्वारा निर्बाचित होकर इन आला अधिकारियोँ पर शासन करते हैं !इनमे अधिकाँश राजनेता गंभीर अपराधों के आरोपी अपराधी भी होते हैं !जिनको अधिकारियोँ को सलूट करना पड़ता है !और उनके अवैधानिक आदेशों का पालन भी करना पड़ता है !परिणाम स्वरुप अच्छे अधिकारी या तो जनता से जुड़े हुए महकमों के अधिकारी बनाये ही नहीं जाते हैं !और जो अधिकारी नेताओं के आशीर्वाद और संरक्छण से जिलाधीश पुलिस अधिक्छक या इनसे अधिक महत्त्व पूर्ण पदो पर बैठते हैं !बे भी समय के साथ नेताओं की हाँ में हाँ मिलाने वाले हो जाते हैं !और खुद भी भ्रष्टाचार में आकंठ डूब जाते हैं !सभी प्रशासनिक अधिकारियोँ के अधिकार समान होते हैं !किन्तु जब इस प्रकार के अधिकारी कर्त्तव्य निष्ठा से अपने कर्तव्योँ का निर्बहन करते हैं !तब अधीनस्थ पुलिस वालों में भी कर्त्तव्य निष्ठा जाग्रत हो जाती है !इस कर्त्तव्य निष्ठ पुलिस अधिकारी से अन्य अधिकारियों को भी प्रेरणा ग्रहण करना चाहिए !और सत्ताधारी राजनेताओं को भी अपने स्वार्थों को त्याग कर ऐसे ही कर्तव्य निष्ठ अधिकारियों के हाथ में प्रशासन की बाग़ डोर सौपना चाहिए !
Saturday, 22 August 2015
किन्ही मंदिरों की व्यबस्था बंशानुसार चलती है !कुछ मंदिर ट्रस्टों या समितियोँ द्वारा संचालित है !तथा कुछ मंदिर राज्य की सरकारों के नियंत्रण में सरकारी अधिकारियों के संरक्छण में चलतेहैं !इसी प्रकार कुछ आश्रम मठ मंदिरों का भी संचालन होता है !इन सभी मंदिरों मठों आश्रमों में थोड़ा बहुत भ्रष्टाचार और दान के धन का दुरपयोग होता है !किन्तु सर्वाधिक दान के धन का दुरपयोग उन मंदिरों मठों आश्रमों में होता है जो सरकारी नियंत्रण में संचालित होते हैं !जो पुजारी मंदिरों में पूजा आदि का कार्य करते हैं ! और जो मंदिर की संपत्ति और दान आदि की व्यबस्था करते हैं !उनमे थोड़ा बहुत भगवान में आस्था होती है !इसलिए बे दान और पद आदि का प्रयोग अपने हित में करते तो है !किन्तु भगवान की पूजा अर्चा पर भी ध्यान देते हैं !किन्तु सरकारी अधिकारी और कर्मचारियोँ की गीध दृष्टि सिर्फ धन प्राप्त करने की ही होती है !दान के धन का दुरपयोग सिर्फ हिन्दू मठ मंदिरों में ही नहीं होता है !यह दुरपयोग और बेईमानी सभी धर्मों में होती है !और यह तथ्य दान दाताओं की दृष्टि में भी होता है !फिर भी बे स्वेक्छा से दान देते हैं !भले ही दानदाता धन का उपार्जन बेईमानी से करते हैं !किन्तु उनकी आस्था भगवान में होती है !और बे बेईमानी से उपार्जित धन की शुद्धि और अपने अपराधों की मुक्ति मंदिर को दान देने में मानते है !उनको दान देने से आत्मिक शांति प्राप्त होती है !जो लोग मंदिरों को दान देने का विरोध कर रहे हैं उनमे से अधिकाँश बे लोग हैं जिनकी धर्म और मंदिरों में आस्था नहीं है !और जो तथाकथित आचार्य मंदिरों को दान देने का विरोध करते हैं !बे स्वयं बेईमानी से उपार्जित धनवानों के गुरु बनकर बड़ी कारों में घूमते है !और धर्म का व्योपार कर रहे हैं !तथा आदर्श का मुखौटा ओढ़ कर अधर्म युक्त वैदिक धर्म विरोधी जीवन जी रहे हैं !इन लोगों को वह आस्था का स्थान बताना चाहिए जहाँ धन का दुरपयोग या गबन न होरहा हो !सरकारी गैर सरकारी सामाजिक शैक्छणिक स्वाास्थ्य और न्याय तथा गरीबों बंचितों के लाभ के लिए निर्मित संगठनो में घोर भ्रष्टाचार व्याप्त है !इस्लिये मंदिरों में दान देना बंद करने के बजाय मंदिर की व्यबस्था करने वाले लोगों का और पजारियों के चित्त शुद्धि की आवश्यकता है !भगवान श्री कृष्णा ने गीता १८ (५)में कहा है कि यज्ञ दान और तप रूप कर्मों का त्याग नहीं करना चाहिए ! प्रत्युत उनको तो करना ही चाहिए क्योँकि यज्ञ दान और तप ---ये तीनो ही कर्म मनीषियोँ को पवित्र करने वाले हैं ! मनीषी का अर्थ है विचारशील जो कार्य अपनी कोई कामना न रख कर दूसरों के हित के लिए किये जाते है ! बे कर्म पवित्र करनेवाले हो जाते हैं ! अर्थात दुर्गुण दुराचार पाप आदि दोषों को दूर करके आनंद देने वाले हो जाते हैं ! परन्तु बे ही कर्म यदि अपनी स्वार्थ कामना की तुष्टि के लिए दूसरों का अहित करने के लिए किये जाएँ तो बे अपवित्र करने वाले महान दुःख दायक हो जाते हैं !इसलिए इन यज्ञ दान तप रूप कर्मों को तथा दूसरे भी कर्मों को आसक्ति और फलों की इक्छा का त्याग करके करना चाहिए ----यह मेरा निश्चित किया हुआ उत्तम मत है १८(६) इसलिए मंदिरों को दान देना बंद करने के बजाय दान दाताओं और दान ग्रहीताओं की बुद्धि को परिमार्जित और हृदय को शुद्ध और पवित्र करने की आवश्यकता है !और इसकी जरुरत जीवन के सभी छेत्रों में है
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने अपनी स्थापना के बाद भारत और भारत से बाहर रहने वाले हिन्दुओं में अपनी गहरी पैठ बना ली है !इसके समर्थक सभी महत्त्व पूर्ण छेत्रों में है !इसका एक प्रमुख कारण भारत में हिन्दू धर्म की उपेक्छा और मुसलमानो और ईसाईओं को प्राथमिकता देना है !इस संगठन में बहुत से सेवाभावी निष्पृह गृहत्यागी व्यक्ति भी कार्य रत है !जो राष्ट्रभक्ति से प्रेरित होकर इस संगठन में अपनी सेवायें अर्पित करते हैं !कन्याकुमारी में विवेकानंद केंद्र के संस्थापक एक नाथ रानाडे ऐसे ही एक विरक्त कर्मयोगी थे !ये संगठन हिन्दू धर्म के पुनरत्थान के लिए शिवाजी महाराज की औरंगजेब के खिलाफ रची गयी कूटनीति और नीति का सहारा लेते हैं !इनकी निष्ठा राष्ट्र भक्ति में है ! सत्य अहिंसा आदि में नहीं है !ये राष्ट्र हित के लिए सत्य अहिंसा का प्रयोग नीति के रूप में करते है आदर्श के रूप में नहीं करते हैं !इसी से गांधीजी के ये घोर विरोधी हैं !गांधी जी सत्य अहिंसा को जीवन मंत्र मान कर आदर्श के रूप में स्वीकार करते थे !बे अहिंसा और सत्य के मार्ग से भारत की आजादी और नए समाज निर्माण के पक्छ में थे !इसीलिए हिन्दू हो या मुसलमान या ईसाई सब की ओर बे न्याय पूर्ण दृष्टि से देखते थे !जिसका संघ विरोध करता था !इसलिए संघ के समर्थक गांधी जी पर मनमाने उल जलूल झूठे मनगढंत आरोप लगाते रहते हैं !यद्द्पि संघ की मुख्य प्रार्थना में महापुरुषों की श्रंखला में गांधी जी का नाम भी है !आज केंद्र में संघ की सरकार है !और एक और संघ है दूसरी और भाजपा विरोधी लगभग सभीराजनैतिक दल हैं !अब देखना है की आगामी समय में देश संघ की नीतियों का अनुमोदन करता है !जिसमे सर्व धर्म समभाव हिन्दू धर्म को श्रेष्ठ मान कर है !या कांग्रेस के सर्वधर्म समभाव को स्वीकार करता है जिसमे देश में विद्यमान सभी धर्मों को समानता प्रदान की गयी है !और हिन्दू मुसलिम सिख ईसाई का नारा बुलंद किया गया है !
Friday, 21 August 2015
सबसे अहम बात यह है !कि हिन्दुस्तान की सरकारों ने अलगाव बादी शक्तियों को क्योँ बढ़ने दिया ! और उनको बढ़ने का मौका भी प्रदान किया ! औरउनको हिंदुस्तान पाकिस्तान के मध्य होने वाली बार्ताओं में शामिल होने दिया !यह फोड़ा अब कैंसर का रूप ले चुका है !अब इसका इलाज बातचीत रूपी दबा से होना संभव नहीं है !इसका इलाज तो ओपरेसन से ही संभव है !अगर भारत सरकार कश्मीर को भारत का अविभाजा अंग स्वीकार करती है !तो इसे आज नहीं तो कल इन अलगाव बादियों से निजात पानी ही होगी !और देश में होनेवाली बिघटनकारी शक्तियों से दृढ़ता पूर्वक निबटना होगा !अन्यथा कश्मीर समस्या ला इलाज होती चली जायेगी !सरकार अलगाव बादियों को नष्ट करने के लिए और साथ ही इनके रक्छक संरक्छक पाकिस्तान से निबटने के लिए !कोई ठोस योजना तैयार कर संसद में प्रस्तुत करे !फिर सर्वसम्मत जो निर्णय संसद का हो !उसको क्रियान्बित करे !लेकिन इसमें अब अधिक बिलम्ब करने की आवश्यकता नहीं है !
भारत सरकार को तस्लीमा नसरीन को स्थायी बीजा प्रदान कर देना चाहिए !भारत को धर्म निर्पेक्छ्ता का सबूत पेश करना चाहिए !तसलीमा की पुस्तकों पर से भी प्रितिबंध हटा लेना चाहिए !कट्टरपंथी तसलीमा का विरोध करके उनको अनावशयक महत्ता दे रहे हैं !और इस्लाम में मत भिन्नता के लिए स्थान नहीं है !इसको सिद्ध कर रहे हैं !इस्लाम कोई कांच का गिलास नहीं है !जो तसलीमा आदि की मतभिन्नता के कारण टूट कर बिखर जाएगा !जो कुछ तस्लीमा कह रही है !उसका खंडन इस्लामिक विद्वानो को करना चाहिए !और यदि उसके लेखन से इस्लाम धर्म का अनादर होता है !तो उसके बिरुद्ध सक्छम न्यायालय में कार्यबाही भी की जा सकती है !किन्तु किसी भी स्थिति में कानून अपने हाथ में लेकर उसकी हत्या नहीं की जानी चाहिए !
धरम छेत्रे कुरुच्छेत्रे -----धर्म के ८मर्ग हैं ---यज्ञ दान शाश्त्रों का अध्ययन और तप इन चारों का तो कोई दम्भी पुरुष भी आचरण कर सकता है ! किन्तु इन्द्रिय निग्रह सत्य सरलता तथा कोमलता का इन चार का तो संत लोग ही अनुसरण करते हैं !जो महात्मा नहीं है ! उनमे सत्य छमा दया और निर्लोभता तो रह ही नहीं सकते हैं !धृतराष्ट्र और दुर्योधन करण शकुनि आदि सभी कौरव वेद पाठी थे ! नित्य अग्निहोत्र करते थे !किन्तु उनमे धर्म के अंग सत्य छमा दया और निर्लोभता के गुण नहीं थे !बे शब्द ग्यानी थे !उनमे धर्म का श्रेष्ठ आचरण प्रधान आचरण नहीं था !धर्म छेत्रे कुरु छेत्रे का अर्थ है की गीता केवल विद्वत्ता प्रदर्शन के लिए नहीं है प्रत्यक्छ आचरण में उतारने के लिए है ! पांडव युद्ध के पक्छ में नहीं थे ! बे चाहते थे की १२ वर्ष का बनवास और १बर्श का अज्ञात वास बिताने के बाद उनको उनका राज्य बापिस मिल जाना चाहिए था !राजा विराट की सभा में देश के तमाम राजाओं और श्री कृष्ण की उपस्थिति में यह निर्णय हुआ की विराट का राज पुरोहित हस्तिनापुर जाकर धर्म और नीतियुक्त सन्देश दुर्योधन आदि को दे ! और पांडवों को उनका राज्य देने की बात कहे धर्म राज युधिस्ठर धर्म के विरुद्ध इंद्रासन भी स्वीकार नहीं करेंगे ! राज पुरोहित ने पुष्य नक्छत्र से युक्त जय नामक महूर्त में हस्तिनापुर के लिए प्रस्थान किया ! उन्होंने नीति और धर्म से युक्त बातों का कथन कौरव सभा में कहा ! भीष्म पितामह ने राज पुरोहित के कथन का समर्थन किया ! किन्तु करण ने विरोध किया ! धृतराष्ट्र ने राजदूत को यह कहकर बापिस कर दिया कि वह सोच विचार कर संजय को पांडवों के पास भेजेंगे ! संजय जब धृतराष्ट्र का सन्देश लेकर पांडवों के पास गया ! तब युधिस्ठर ने संजय से कहा की दुर्योधन से बार बार अनुनय बिनय करके कहना की पांडव शांति चाहते हैं ! हम सब में परस्पर प्रीति बनी रहे ! इसलिए हम पांच भाई सिर्फ पांच गाओं पाकर ही संतुष्ट हो जाएंगे ! और इसी पर युद्ध की सम्भावना समाप्त हो जायेगी ! संजय ने कौरव सभा में संधि की बात कही भीष्म पितामह ने भी दुर्योधन को संधि के लिए समझाया किन्तु दुर्योधन ने युधिस्ठर के शांति विषयक प्रस्ताव को यह कहकर अस्वीकार कर दिया कि पांडव मेरी सेना और मेरे प्रभाव के कारण इतने भयभीत हो गए हैं ! कि बे राजधानी या नगर लेने की बात छोड़ कर अब पांच गाओं मांगने लगे हैं ! धृतराष्ट्र वेदव्यास परशुराम गांधारी आदि ने भी दुर्योधन को युद्ध न करने की सलाह दी ! किन्तु दुर्योधन करण आदि ने अहंकार पूर्वक पांडवों से युद्ध करने का ही निश्चय व्यक्त किया ! पांडवों ने युद्ध न हो इसके लिए भगवान श्री कृष्णा को दूत के रूप में कौरवों के पास भेजा युधिस्ठर ने श्री कृष्ण से कहा कि युद्ध में प्रायः लज्जाशील श्रेष्ठ धीर वीर ही मारे जाते हैं ! और अधम श्रेणी के व्यक्ति जीवित बच जाते हैं ! युद्ध रूप कर्म तो पाप ही है ! युधिस्ठर ने कहा आप ही समस्त कौरवों के सुहृद तथा दोनों पक्च्छोँ के नित्य प्रिय सम्बन्धी है ! पांडवों सहित धृतराष्ट्र पुत्रों का मंगल सम्पादन करना आपका कर्तव्य है ! आप उभय पक्छ में संधि कराने की शक्ति भी रखते हैं !आप यहाँ से जा कर दुर्योधन से ऐसी बातेंकहें जो शान्ति स्थापना में सहायक हों ! भगवान श्री कृष्ण ने कहा कि मै वही कहूँगा जो धर्म संगत तथा हम लोगों के लिए हितकर तथा कौरवों के लिए भी मंगल कारक हो ! कार्तिक मॉस रेवती नक्छत्र में मैत्री नामक महूर्त में श्रीकृष्ण ने यात्रा प्रारम्भ की !श्री कृष्णा ने कोरब सभा में धृतराष्ट्र से कहा इस समय दोनों पक्छों में संधि कराना आपके और मेरे अधीन है ! आप अपने पुत्रों को मर्यादा में रखिये और में पांडवों को नियंत्रण में रखूँगा ! युद्ध छिड़ने पर तो महान संघार ही दिखाई देता है इस प्रकार दोनों पक्छों का विनाश कराने में आप कौन सा धर्म देखते हैं आपके पुत्र लोभ में अत्यंत आसक्त हो गए हैं ! उन्हें काबू में लाईये ! शत्रुओं का दमन करने वाले कुन्तीपुत्र आपकी सेवा के लिए भी तैयार हैं ! और युद्ध के लिए भी तैयार हैं ! जो आपके लिए विशेष हितकर जान पड़े उसी मार्ग का अनुशरण कीजिये !किन्तु कौरवों ने श्री कृष्णा की सलाह ना मान कर उलटे उनको ही बंदी बनाने की चेस्टा की !परिणाम स्वरुप युद्ध अवश्यमभाभी हो गया था !
सभी सरकारों का बाजार पर नियंत्रण समाप्त हो गया है !और व्यपारियों ने नैतिकता खो दी है !कीमतों में उछाल का फायदा उत्पादक को प्राप्त नहीं होता है !जब कीमते कम हो जाती है तो नुक्सान सिर्फ उत्पादक को ही होता है !यह बड़ी विचित्र स्थिति भारत के किसानो की है !भाव चढ़े तो फायदा व्योपारी का होता है और घटे तो नुक्सान उत्पादक का होता है !इस बिगड़ी हुई स्थिति का सुधार कानून से नहीं हो सकता है !इसका सुधार तो सिर्फ नैतिकता के विकास से ही हो सकता है !जमाखोरी छोटे दुकानदार तो लगभग नहीं के बराबर करते हैं !जमाखोरी तो वही व्योपारी करते हैं जो या तो राजनेता होते हैं !या जिनको राजनेताओं का संरक्छण प्राप्त होता है !और इस प्रकार के व्योपारियों पर सरकारी अधिकारी भी छपा डालने का साहस नहीं करते हैं !और रिश्वत लेकर उनको खुली छूट दे देते हैं !अगर प्याज का आयात होगा तो उसमे भी बड़ी मात्रा में कमीसन खोरी होती है !और जबतक आयातित प्याज बाजार में आता है !तब तक व्योपारी बेशुमार फायदा उठा लेते हैं !जमाखोर व्योपारी और संरक्छण देने वाले राजनेता और रिश्वत खोर अधिकारी की तिकड़ी कायम रहेगी तब तक आम जनता को राहत प्राप्त नहीं होगी
This is absolutely true that even before formation of RSS pro Hindu forces opposed Gandhiji .Dr Munje a strong pro Hindu brought condemnation proposal against Gandhi ji in Nagpur congress but only one vote of Dr munje was cast in favour of proposal and that too was of Dr munje Who had tabled the propodal of condemnation against Gandhi ji, No other member had supported it.Gandhi ji stood for communal harmony.He worked all his life to establish communal harmony. He went on fast unto death on13january 1948 to save the lives and their religious shrines after partition.He broke his fast on 18january only when all the political parties along with pro hindu organisations assured him to protect the lives of Musalims.And ultimately he was assassinated by a mad Hindu.But one thing which all Hindu musalims must note and bear in their mind that even after this greatest sacrifice of Gandhi ji still to day we have bitterly failed to establish communal harmony between Hindu musalims .Both of them are prone to fight with each other even on trifling matters and they not only attack each other but also burn shops and houses ,loot wealth and even attack passers by.This trend has given power and support to pro Hindu forces like RSS in the country. If this trend continues it will be difficult to divest RSS and pro Hindu forces from poloitical support and pwer.
Thursday, 20 August 2015
स्नान का बहुत महत्त्व वैदिक धर्मग्रन्थोँ में बताया गया है !प्राचीन भारत में त्रिकाल संध्या और विधिपूर्वक तीन बार लोग स्नान करते थे !इसलिए स्नान ध्यान यह उक्ति समाज में प्रचिलित थी !समय परिवर्तन शील होता है !इसलिए समय के साथ सुचिता के नियम तो बदल जाते हैं किन्तु सुचिता का मूल तत्त्व विद्यमान रहता है !इस युग में पवित्र नदियों का जल प्रदूषित होगया है !शहरोँ में शुद्ध जल का अभाव हो गया है !भौतिकता ने मनुष्योँ का सुख चैन शांति और शरीरगत शुचिता का अपहरण कर लिया है !असत्य अनैतिकता अशुद्ध आचरण आदि इस समय अधिकाँश लोगों में दिखाई देते हैं !इसलिए आचार्यों ने अंगशुचिता के साथ अब बाणी सुचिता को भी स्नान के साथ जोड़ दिया है !और स्थूल तीर्थ स्थलों में स्नान के साथ मानसिक सुचिता को भी जोड़ दिया है !महाभारत में धर्म व्याध और कौशिक ब्राह्मण सम्बाद में धर्मव्याध कहता है !की तीर्थ स्थानो में भटकने के बजाय मानसिक सुचिता को ही जीवन का ध्येय बनाओ !पवित्रतता जीवन का अंग बन जाए और सदाचरण में हमारी रूचि स्वाभाविक और सहज बन जाए !उसके लिए नित्य प्रिति पवित्र ब्यक्तियों और पवित्र वस्तुओं का स्मरण आवश्यक है !इसीलिए सनातन धर्मावलम्बी अपनी संतानो का नाम राम कृष्णा गणेश शंकर सरस्वती लक्ष्मी आदि रखते हैं ! जीवात्मा पवित्र लोगों का संग करके पवित्र बनती है ! और दुष्ट लोगों का संग करके दुष्ट बन जाती है !इसलिए धर्मग्रंथों में श्रेष्ठ सदाचारी पुरुषों की संगत का विशेष महत्त्व बतलाया गया है !एक श्लोक में कहा गया है !की सत्संग बुद्धि की जड़ता को समाप्त करता है !बाणी में सत्य का प्रवेश करा देता है !व्यक्ति की ख्याति बढ़ जाती है !उसको मान सम्मान की प्राप्ति सभी ओर से होती है !भला सत्संग से मनुष्य को कौन सा लाभ प्राप्त नहीं होता है ?अर्थात मनुष्य को सबकुछ सत्संग से प्राप्तहो जाता है
Wednesday, 19 August 2015
हिन्दू धर्म का सही नाम सनातन धर्म है !जसके ज्ञान विज्ञान की शाब्दिक और अनुभव जन्य जानकारी वेदों में दी गयी है !इसलिए इसे वैदिक धर्म भी कहा जाता है !सनातन धर्म की व्याख्या करते हुए यास्क ऋषि ने कहा है !सनातनो नित्य नूतनः ! सनातन धर्म चिर स्थायी है !इस धर्म का आधार सत्य अहिंसा अस्तेय अपरिग्रह और ब्रह्म चर्य है !प्राचीन भारत में यहां सभी धर्मों के लोग निवास करते थे !किन्तु बे प्रेरणा और आदर्श सत्य सनातन धर्म से ही प्राप्त करते थे !सनातन धर्म से उपकृत होकर धर्म की उच्चतम उचाई अध्यात्म को प्राप्त करते थे !सम्पूर्ण विश्व में सनातन धर्म आदर्श और प्रेरणा के रूप में पूजा जाता था !इन देशों में विद्यमान ये पूजास्थल इस बात को पुष्ट करता है !कि इन देशों में वैदिक संस्कृति विद्यमान थी !इंडोनेसिया कम्बोडिया मलेसिया थाईलैंड अफगानिस्तान आदि देश तो सनातन धर्म को ही मान ने वाले थे !जिन्होंने समय के उलट फेर के कारण इस्लाम धर्म स्वीकार कर लिया !भारत में जन्मे बौद्ध धर्म जो सनातन धर्म ही है !इसका व्यापक असर और इस धर्म के मानने वाले विश्व के बड़े देश चीन जापान विएतनाम सिंगापुर तिब्बत श्री लंका वर्मा आदि पूरी तरह से बौद्ध धर्म के ही अनुयायी है ! ईशाई देशों विशेष कर अमेरिका इंग्लैंड जर्मनी फ्रांस बेल्जियम आदि में काफी बड़ी संख्या में हिन्दू रहते हैं !विश्व के १४७ देशों में हिन्दू रहते हैं !अमेरिका में हिन्दुओं के सर्वाधिक मंदिर है ! विश्व का सबसे बड़ा स्वामी नाथ सम्प्रदाय का मंदिर अभी अमेरिका में बन रहा है !मलेसिया थाईलैंड श्री लंका वर्मा इंडोनेसिया कम्बोडिया आदि में प्राचीन हिन्दू मंदिर बड़ी संख्या में बने हुए हैं !पाकिस्तान और बांग्ला देश में भारी मात्र में हिन्दू मंदिर थे !जिनमे से अधिकाँश मंदिर तोड़ दिए गए हैं !किन्तु अभी भी पाकिस्तान और बांग्लादेश में पौराणिक महत्त्व के कुछ मंदिर बचे हुए हैं !!
भारतीय राजनीति में महत्त्व पूर्ण मुद्दों को झूठ का आवरण चढ़ाकर, जब तक कांग्रेस सत्ता में रही उसके बिरुद्ध विरोध का अहम मुद्दा बनाकर पेश किया जाता रहा है !सुभाष बॉस की मृत्यु को भी राजनैतिक दलों ने मुद्दा बनाकर राजनैतिक स्वार्थ की सिद्धि की !और आज भी सत्ता में आने के बाद भी कांग्रेस को कई प्रकार से सुभास बॉस की मृत्यु का जिम्मेदार ठहराने का प्रयत्न किया जारहा है !जब कांग्रेस सत्ता में थी तो बड़े जोर शोर से यह मुद्दा उठाया जाता था की सुभाष की मृत्यु के लिए कांग्रेस जिम्मेदार है !अब तक गैर कांग्रेसी सरकार के अटलबिहारी बाजपेयी देवे गोंडा इन्द्र कुमार गुजराल विश्वनाथ प्रताप सिंह चौधरी चरण सिंह चंद्रशेखर प्रधान मंत्री हो चुके हैं !और अब मोदी जी देश के प्रधान मंत्री है !इन सबको किसने रोका है कि सुभाष बॉस की मृत्यु को जनता के सामने उजागर नहीं कर रहे हैं !भारत सर्वशक्ति संपन्न देश है !इसको कोई देश कैसे रोक सकता है ! नेता जी कि मृत्यु उजागर करने से ! इनका उदेश्य सिर्फ सनसनी पैदा कर कांग्रेस के खिलाफ जनमानस करने का ही है ! नेताजी की मृत्यु दुर्घटना में हुई या नहीं यह बताने में नहीं है
Tuesday, 18 August 2015
महात्मा गांधी के जीवन का लक्छ्य था अहिंसा और उसके लिए संयम था उनके जीवन की पद्धति और सेवा था जीवन का कार्य !इसी त्रिभुज पर उन्होंने जीवन भर कार्य किया !१९०५ का बंगाल का आंदोलन अंग्रेजों के सामान के बहिष्कार का था !इसलिए उस आंदोलन में सिर्फ ब्रिटेन में निर्मित बस्तुओं का बहिस्कार किया गया था !अन्य देशों जापान आदि में निर्मित बस्तुओं का बहिस्कार शामिल नहीं था !गांधी जी का आंदोलन स्वदेश में निर्मित बस्तों के उपयोग का था !अंग्रेजो के आने के पूर्व भारत में भारत के कारीगरों द्वारा निर्मित बस्तुओं का ही उपयोग होता था !भारत में कृषिके साथ कुटीर उद्योग धंधे भी बड़ी मात्रा में प्रचिलित थे !भारत बस्त्र स्वाबलंबन में पूरी तरह आत्म निर्भर था !ढाके की मलमल की धूम सारे विश्व में थी !इसलिए गांधी जी ने चरखा को आजादी प्राप्त करने का सशक्त माध्यम बनाया !उन्होंने कहा जो काते सो पहने और जो अन्न उत्पादन करे सो खाए !गांधी जी खुद शरीर श्रम करते थे !उनकेआश्रमबासी राजकुमारी अमृत कौर सरोजनी नायडू कस्तूरवा गांधी आदि सभी शारीरिक श्रम करती थी !नेहरू मंत्रिमंडल के सभी सदस्य सूत कातते थे ! गांधी जी ने स्वतंत्रता प्राप्ति के साथ रचनात्मक कार्यक्रम जनता के सामने रखा था !जिस से जनता गरीबी से मुक्त होकर स्वाबलम्बी और आत्मनिर्भर बनजाय !स्वदेशी आंदोलन इस स्वाबलंबी जीवन की एक महत्त्वपूर्ण कड़ी थी !परतंत्रता में स्वाधीनता की अनुभूति की यह एक अभिनव योजना थी !स्वदेशी आंदोलन ने देश की जनता को आत्मनिर्भर बनाया और अंग्रेजो के आर्थिक तंत्र को भी भारत में ध्वस्त किया था !
भारतीय राजनीति में और प्रशासन में लगभग ८०%से अधिक बे लोग है !जो अत्यंत साधारण परिवारों से उठकर प्रधान मंत्री मंत्री मुख्यमंत्री सांसद विधायक ग्रामप्रधान मेयर और नगरपालिकाओं आदि में जनता के द्वारा भेजे गए प्रितिनिधि के रूप में आसीन है !सरकारी सेवाओं में भी प्रशानिकाधिकारी से लेकर सामान्य चपरासी तक की नौकरी में अधिकाँश आरक्छण के माध्यम से निम्न माध्यम श्रेणी के लोग अधिकाँश पदों पर पदासीन है !किन्तु पदाशीन होते ही इन लोगों के जीवन स्तर में गगन चुम्बी विकास होता है !और धन ऐश्वर्य भोग विलास में राजे महाराजे भी इनका मुकाबला नहीं कर पाते हैं !आरक्छण अब न्याय का पोषक और दलितों पिछड़ों के उत्थान और विकास का माध्यम ना होकर दलित और पिछड़ी जातियों के कुछ नेताओं के स्वार्थ का पोषक और उनकी तथा उनके परिवार की उन्नत्ति का साधन बन गया है !कोई भी सवर्ण जाति की गरीबी और लाचारी पर ध्यान नहीं दे रहा है !बे अन्याय और उपेक्छा की जिंदगी जी रहे हैं !लालू प्रसाद ,रामविलास शरद यादव नितीश कुमार मुलायम सिंह आदि सभी नेता जयप्रकाश नारायण के आंदोलन से ही निकल कर राजनीति में आये हैं !इन सबकी आर्थिक स्थिति अत्यंत सामान्य थी !और ये सभी नेता प्रारम्भ में त्यागी और आदर्शवादी रहे हैं !किन्तु अब ये कहाँ पहुँच गए है !ये आमजनता के सामने है ! एक और दलित नेत्री कांशीरामजी के बहुजन समाज के आंदोलन से निकली है !वह भी कैसा जीवन जी रही हैं !यह भी सबके सामने है !अभी भी इन नेताओं के पास समय है !और ये राजनीति में महत्त्व पूर्ण पदों पर आसीन है !इनको अपनी पूर्व स्थिति का ध्यान करके राजनैतिक दृष्टि का त्याग कर और हार बा जीत की परवाह ना कर बिना किसी पक्छपात के न्याय पूर्ण दृष्टि से देश का सभी निर्धन पिछड़े लोगों को अभाव मुक्त करने के लिए काम करना चाहिए !तभी ये सच्चे अर्थों में नेता सिद्ध होंगे !और इनकी यह चर्चा करने की सार्थकता सिद्ध होगी ! की ये प्रधान मंत्री मुख्यमंत्री सांसद विधायक बन ने के पूर्व चाय बेचते थे या ढोर चराते थे
इस्लामिक संगठन यद्द्पि विश्व का सबसे बड़ा और सबसे अधिक निर्दोष स्त्री पुरुषों युवकों युवतियोँ का खून बहाने वाला है !और उसकी योजना भी सारी दुनिया को फतह करने की है !किन्तु यह संगठन ईश्वर को नकारता नहीं है !यह तो सारे संसार में इस्लामी हुकूमत स्थापित करना चाहता है !इसलिए इसके सम्बन्ध में यह कहा जा सकता है !की यह इस्लाम और अल्लाह का गलत अर्थ लोगों के सामने रख रहा है !इस्लामिक संगठन जिस उद्देश्य को लेकर चल रहा है !और इस्लाम तथा अल्लाह और कुरान को जिस रूप में प्रस्तुत कर रहा है !उसको अधिकाँश मुसलमान स्वीकार नहीं करते हैं !इस्लामिक संगठन की क्रूरता पर अब विराम लगता जा रहा है !और कुछ समय बाद यह संगठन नेस्त नाबूद हो जाएगा ! इसके लक्छण वहीं दिखने लगे हैं ! जहां इसके अत्तंकवाद ने कहर ढा दिया था ! जिन लोगों की यह संगठन हत्या बलात्कार आदि करता था !अब बे भी इसके खिलाफ संगठित होकर खड़े हो गए हैं इसलिए नेस्त्रेदम की अब तक की भविष्य बाणिया सही सिद्ध हुई हों ~किन्तु अभी ऐसे ईश्वर विरोधी संगठन का उदय नहीं हुआ है !जो विश्व की तमाम सरकारों के एकत्रतित शक्ति का मुकाबला और प्रतिकार कर विश्व में तबाही मचा दे !
भगवान श्री कृष्ण ने गीता ३(२१)में कहाहै श्रेष्ठ मनुष्य जो जो आचरण करता है ! दूसरे मनुष्य वैसा वैसा ही आचरण करते हैं ! वह जो कुछ प्रमाण अपने आचरण से सिद्ध कर देता है ! दूसरे मनुष्य भी उसको प्रमाण मानकर वैसा ही आचरण करते है ! समाज में जिस मनुष्य को लोग श्रेष्ठ मानते हैं उस पर विशेष जिम्मेवारी रहती है ! कि वह ऐसा कोई आचरण ना करे तथा ऐसी कोई बात ना कहे जो लोक मर्यादा या शास्त्र मर्यादा के विरुद्ध हो !इस समय समाज की दृष्टि में समझे जाने वाले राजनेता अभिनेता और धनवान व्यक्ति तथा खेल जगत में क्रिकेट आदि खेलों से जुड़े बड़े क्रिकेट खिलाड़ी और सरकारी ओहदेदार बड़े अधिकारी तथा भूतपूर्व राजा महाराजा और बड़े ठेकेदार भू व्यबसाई आदि शादियोँ में बेशुमार खर्चे करते हैं !जिसके कारण उनकी होड़ करने वाले साधारण गृहस्थ भी अपनी आर्थिक स्थिति से अधिक ऋण लेकर शादियों में अधिक खर्च करते दिखाई !देते हैं !और साधारण आदर्शवादी गृहस्थोँ की इन खर्चीली भड़कीली शादियों के कारण अपमान और शर्मिंदगी झेलनी पड़ती है !इन तथाकथित समाज के श्रेष्ठ व्यक्तियोँ की कथनी और करनी में जमीन आसमान का अंतर होता है !ये जवान से राग अलापते है कि खर्चीली शादी बंद करो ! किन्तु अपनी पुत्र पुत्रियोँ की शादी में बेशुमार रूपया खर्च करते हैं !इस भारतीय प्रशासनिक अधिकारी ने यह शादी बिना तड़क भड़क के और दहेज़ न लेकर बिना गाजे बाजे और मामूली सामान्य भोजन बरातियों को कराकर संपन्न करायी है !इसका समाज में अच्छा सन्देश जाएगा !और लोग बिना फिजूल खर्ची वाली शादी की और उन्मुख होकर सादा शादियां करने कराने की और अग्रसर होंगे !
Saturday, 15 August 2015
गीता का मुख्य उद्देश्य मोह से मुक्त कराना है !और इसके लिए गीता में भक्ति युक्त ज्ञान प्रधान कर्मयोग का निरूपण किया गया है !इस महान ग्रन्थ के अनुशीलन चिंतन मनन और स्वाध्याय से अलौकिक ग्यानी शंकराचार्य भक्ति के आचार्य रामानुजाचार्य आदि और कर्मयोगी लोकमान्य तिलक आदि और अहिंसक महात्मा गांधी आदि अशख्यं महापुरुषों को प्रेरणा प्राप्त हुई !इस ग्रन्थ रत्न ने भारत की सीमा पारकर विश्व के अनेक महांभाव एडविन आर्नोल्ड एनी विसेंट आदि ऐसी महान आत्माओं का भी मार्गदर्शन किया है !और आज भी विश्व के महान लोग इस से मार्ग दर्शन प्राप्त कर रहे हैं !जितने भाष्य और टीकाएँ इस ग्रन्थ पर लिखी गयी हैं ! और आज भी लिखी जा रही हैं उतनी टीकाएँ और भाष्य और किसी धर्म ग्रन्थ पर नहीं लिखी गयी हैं !इसलिए इस धर्मग्रन्थ पर विचार भिन्नता भी बहुत है !किन्तु यह ग्रन्थ का दोष नहीं है !इसकी विशेषता है !जो ग्रन्थ लाखों महापुरुषों और सामान्य मनुष्योँ की दृष्टि में महत्त्व प्राप्त करेगा !उसमे मत भिन्नता होना आश्चर्य की बात नहीं है !कुछ लोग मानते है कि गीता को जो कुछ भी कहना था ! वह दूसरे अध्याय में कह दिया है !कुछ लोग मानते हैं !११(!)में अर्जुन ने यह कह दिया कि उसका मोह नष्ट हो गया है !इसलिए गीता का उपदेश मोहनाश का यही समाप्त हो गया है !अर्जुन का मोह सिर्फ युद्ध में अपने परिजन गुरुजन के विरुद्ध युद्ध ना करने तक ही सीमित नहीं था !गीता महाभारत के सम्मिलित अध्यन से उसके मोह की कई शाखाओं का ज्ञान होता है !जिसका निरसन भगवान लगातार करते दिखाई देते हैं !जब भगवान ने ४(१)में कहा की मेने इस कर्म योग का ज्ञान सर्व प्रर्थम सूर्य को दिया था !तब अर्जुन के मोह का निरसन अपने अवतार के रहस्य का उदघाटन कर भगवान ने किया !फिर अर्जुन को अपनी विभूतियां दिखा कर उसको भगवान ने अपने विभूति योग को बताकर किया !इसलिए अर्जुन कहता है कि आपने जो हमें यह बताया है कि संपूर्ण विभूतियों के मूल में भगवान ही हैं ! और संपूर्ण बिभूतियां भगवान की सामर्थ्य से ही प्रगट होती हैं ! तथा अंत में भगवान में ही लीन हो जाती हैं ! वह अविचल भक्ति योग से युक्त हो जाता है इसको अर्जुन अध्यात्म संगित मान रहे हैं ! संपूर्ण जगत भगवान के एक अंश में है ! इस तथ्य पर पहले अर्जुन की दृष्टि नहीं थी और बे स्वयं इस बात को जानते भी नहीं थे यही उनका मोह था ! परन्तु जब भगवान ने कहा कि संपूर्ण जगत को अपने एक अंश में व्याप्त करके में तेरे सामने बैठा हूँ !तब अर्जुन की दृष्टि इस तरफ गयी ! इसलिए अर्जुन यहां अपनी दृष्टि से कहते हैं कि मेरा मोह नष्ट हो गया है ! किन्तु भगवान इसे स्वीकार नहीं करते हैं ! क्योँकि आगे ११(४९)में भगवान ने कहा है ! कि तेरे को व्यथा और मूढ़ भाव (मोह )नहीं होना चाहिए !सारी गीता को ध्यान पूर्वक पढ़ने से यह बात समझ में आएगी कि अर्जुन के विविध प्रकार से मोह ग्रस्त चित को भगवान ने गीता के अंत तक किया है !और अर्जुन अंत में फिर कहता है कि मेरा मोह नष्ट हो गया है !किन्तु महाभारत में वह कई प्रसंगो में मोह ग्रस्त होता है !जिसका निरसन सारथि कृष्ण करते हैं !और अंत में वह कहता है !कि में गीता के ज्ञान भूल गया हूँ !तब भगवान उसे अनुगीता का उपदेश करते हैं !इस से यह बात स्पष्ट समझ आती है !कि कोई भी व्यक्ति पूर्ण रूप से हमेशा के लिए मोह से मुक्त नहीं हो सकता है !इसलिए उसे मोह के हमले से सुरक्छित रहने के लिए आत्मा या परमात्मा को अपने जीवन का सारथी बनाये रखना चाहिए !
जिस देश में अयोग्य व्यक्तियों का सम्मान और योग्य व्यक्तियोँ की उपेक्छा और अपमान किया जाता है !वह देश और समाज पतन के गर्त में डूब जाता है !यह नीति वाक्य है !किन्तु छोटों द्वारा बड़ों का अपमान करने से श्रेष्ठता की हानि और अपने आप आप अपनी प्रसंशा करने से पुण्य की हानि होती है ! अपनी प्रसंशा करने वाला व्यक्ति मृतक समान हो जाता है !इसका एक उदाहरण महाभारत में है !अर्जुन की यह गुप्त प्रतिज्ञा थी कि जो भी उनके गांडीव धनुष का अपमान करेगा उसका वह शीश काट लेंगे !एक बार युधिस्ठर ने क्रोध के आवेश में गांडीव की निंदा कर दी थी !अर्जुन ने एक दम म्यान से तलबार निकाल ली !भगवान कृष्णा ने देखा की कमरे में सिर्फ वह अर्जुन और युधिस्ठर ही हैं !फिर अर्जुन ने क्रोधबस किसको मारने के लिए तलबार उठा ली है !भगवान ने अर्जुन से पूंछा की यह तलबबार तुमने क्योँ उठा ली है !अर्जुन ने कहा मेरी यह गुप्त प्रतिज्ञा थी ! कि जो भी गांडीव की निंदा करेगा उसका में शीश काट लूंगा !युधिस्ठर ने गांडीव की निंदा की है इसीलिए इनका शीश काटने के लिए तलबार निकाल ली है !भगवान ने कहा कि तुमने बृद्ध पुरुषों की सेवा नहीं की है !इसीलिए तुम धर्म के मर्म को नहीं जानते हो !इसीलिए तुम यह जघन्य और अत्यंत निंदनीय काम करने के लिए तैयार हो गए हो !अपने से बड़े और पद में श्रेष्ठ पुरुषों की मृत्यु तो उनके अपमान करने से ही हो जाती है !तुम युधिस्ठर को तू कहकर इनका अपमान करदो तो इनकी मृत्युहो जायेगी !क्योँकि अपने से श्रेष्ठ पुरुषों की मृत्यु उनको तुम या तू कहने मात्र से ही हो जाती है !अर्जुन ने तदनुसार तू कहकर युधिस्ठर को अपमान जनक शब्द कह दिए !इसके बाद अर्जुन को अपने बड़े भाई का अपमान करने से बड़ी आत्मग्लानि हुई !और बे अपना गला काटने के लिए तैयार हो गए !तब भगवान ने कहा !अब तुम अपने मुह से अपनी तारीफ़ करो तो तुम्हारी भी मृत्यु हो जायेगी !सतोगुणी रजोगुणी और तमोगुणी भोजन के सम्बन्ध में गीता में भगवान ने १७(८,९,१० )में कहा है !कि श्रेष्ठ भोजन के पदार्थों का ही सेवन सुख समृद्धि प्राप्त कि कामना करने वालों को करना चाहिए जिस से उत्तम स्वास्थय और श्रेष्ठ बुद्धि की प्राप्तिहोती है !जिस घर में पति पत्नी प्रीति पूर्वक रहते हैं !उसी घर में सुख संपत्ति और लक्ष्मी का वास होता है !जिस घर में दूसरे दिन के लिए भोजन की व्यबस्था ना हो उस गृहस्थ से अधिक भाग्य हीन और कोई नहीं होता है !निष्क्रिय निकम्मा औरदूसरे के भोजनालय में भोजन के लिए आश्रित व्यक्ति और प्रपंच में फसा हुआ सन्यासी दोनों ही नरकगामी होते हैं !शाश्त्रों में गृहस्थ धर्म के पालन के के लिए इस प्रकार के अनमोल शब्द बिखरे पड़े हैं !इनका पालन कर गृहस्थों को अपना जीवन सुखी स्वस्थ और समृद्ध बनाना चाहिए !
भारत के अधिकाँश राजे रजवाड़े ब्रिटिश हुकूमत के समर्थक थे !और उनकी कृपा प्राप्त करने के लिए उत्सुक रहते थे !अधिकाँश राजा लोग प्रजा के हितों के बारे कम और अपने निजी स्वार्थोँ के पोषण में लगे रहते थे !जैसे जैसे देश में आजादी की लड़ाई तेज होती गयी !ब्रिटिश हुकूमत ने देश के इन आतंरिक मतभेदों के आधार पर देश की आजादी के मार्ग में सुनियोजित योजाबद्ध तरीके से बाधा उत्पन्न करना शुरू कर दिया था १९३१ में लंदन में द्वतीय गोल मेज परिषद का आयोजन ब्रिटिश हुकूमत ने किया था !गोलमेज परिषद में आजादी की पूर्व भूमिका में सर्व सम्मत संविधान के मसौदे का निर्माण करना था !ब्रिटिश सरकार ने उसमे ५१२ प्रितिनिधियों को आमंत्रित किया !ये सभी प्रितिनिधि ब्रिटिश सरकार ने ही नामजद किये थे !भारत में ६०० से अधिक छोटी बड़ी रियासतें थी !मुसलमानो के प्रितिनिधि दलितों के प्रितिनिधि आदिवासियों ,ईसाइयों सिखों हिन्दू संगठनो और ब्रिटिश सरकार के प्रितिनिधि भी थे !गांधी जी जानते थे कि इस गोलमेज परिषद से कोई समाधान नहीं निकलेगा !इसीलिए कांग्रेस ने अपना कोई भी प्रितिनिधि परिषद में भाग लेने के लिए नामजद नहीं किया था !ब्रिटेन के प्रधान मंत्री मैकडोनाल्ड ने वाईसरॉय इरविन के माध्यम से परिषद में सम्मिलित होने के लिए विशेष निमंत्रण गांधी जी को भेजा था !तथा वाईसराय पर गांधीजी को मनाकर परिषद में शामिल होने के लिए विशेष आग्रह करने के लिए कहा था! !तब कांग्रेस ने गांधी जी को अपना एकमात्र प्रितिनिधि नियुक्त कर गोल मेज कॉन्फरेंस में भेजा था !जैसी कि पूर्व में ही संभावना थी देश में आतंरिक मतभेदन के कारण गोलमेज बिना किसी परिणाम के समाप्त होगयी थी !वहां भी राजाओं ने ब्रिटिश हुकूमत का ही अपने निजी स्वार्थों के कारण समर्थन किया था !जोधपुरोर जैसलमेर नरेश लालच में आकर अपने राज्यों का विलय पाकिस्तान में करने को तैयार हो गए थे !हैदराबाद का निजाम और भोपाल का तथा जूनागढ़ का नबाब मुसलिम होने के कारण पाकिस्तान में विलय होना चाहते थे !किन्तु इन राज्यों में हिन्दू जनता बहुमत में थी इसीलिए जनता के उग्र विरोध और सरदार पटेल कि कड़ाई और दृढ निश्चय के कारण इन राजाओं को घुटने टेकने पड़े !और अंततोगत्वा भारत में विलय होना पड़ा !यद्द्पि जम्मू कश्मीर के विलय के बारे में जो ववाद है !उसके बारे में लोगों का कहना है कि सरदार पटेल कि बात अगर मानी गयी होती तो संपूर्ण काश्मीर भारत का निर्विवाद हिस्सा होता !
गांधी जी ने १३ जनबरी १९४८ में आमरण अनशन दिल्ली में शुरू कर दिया था !यह अनशन मुख्य रूप से मुसलमानो को न्याय दिलाने और विभाजित भारत में उनकी जान माल की रक्छा के लिए किया गया था !उसी अनशन में पाकिस्तान को उसकी बकाया राशि की अदायगी भी शामिल थी !केंद्रीय मंत्रिमंडल यह निर्णय ले चुका था !कि पाकिस्तान को उसकी बकाया राशि नहीं दी जायेगी !गांधी जी का स्वास्थ्य पहले से ही ठीक नहीं था !डॉकटरों का कहना था कि अगर उनका अनशन जारी रहता है !तो उनकी मृत्यु किसी भी समय हो सकती थी !इसीलिए केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में सर्व सम्मत निर्णय हुआ कि पाकिस्तान को उसकी बकाया राशि तुरत भुगतान कर दी जाएगी !इसकी घोषणा अनशनस्थल पर ही की गयी !सरदार पटेल ने भी बेमन से अपनी सहमति गांधी जी का जीवन बचाने के लिए दे दी थी !डॉ राजेन्द्र प्रसाद के अध्यक्छता में शान्ति समिति गठित की गयी थी !जिसमे सभी राजनैतिक दल और गांधी जी के प्रमुख विरोधी हिन्दू महासभा के लोग भी शामिल थे !इन सबने एक मत से गांधीजी की सभी १३ मांगे जो विभाजन के कारण भारत में मुस्लिमों की रक्छा सुरक्छा के लिए थी !मान ली गयी थी ! और गांधीजी ने अपना अनशन १८ जनबरी को समाप्त कर दिया था !मौलाना अब्दुलकलाम आजाद के हाथों नारंगी का जूस लेकर गांधी जी ने अपना अनशन समाप्त कर दिया था !अनशन समाप्त करने के पूर्व उन्होंने समिति के सदस्योँ से कहा था !की आप लोग मुझे मर जाने दें !मेरा जीवन बचाने के लिए आप अपना मत ना बदलें !अगर आप समझते हैं !की जिन प्रश्नो के समाधान के लिए मेने यह अनशन किया है !अगर आप उसको सही मानते हैं !तभी आप मुझ से अनशन तोड़ने की बात कहें !आप लोग हमको धोखा न देना !गांधी जी पर मुस्लिमों के हिमायती होने का और हिन्दू विरोधी होने का आरोप लगाया जाता है !किन्तु गांधीजी ना मुसलमानो के हिमायती थे !ना हिन्दुओं के विरोधी थे !गांधी जी सनातनी हिन्दू थे !और राम नाम उनके जीवन का आधार था ! और गीता उनकी मार्ग दर्शिका थी !गीता को बे दिव्य माता मानते थे !और दूसरे अध्याय के स्थित प्रज्ञा के श्लोक उनकी दैनिक प्रार्थना में नित्य पढ़े जाते थे !और आज भी पढ़े जाते है !इन श्लोकों को बे कर्म का कोष मानते थे !और कहते थे की मेरे जीवन का लक्छ्य स्थित प्रज्ञा बनना है !वह एक शुद्ध वैष्णव धर्म का पालन करने वाले थे !और उनका प्रिय भजन था वैष्णव जान तो तेने कहिये जो पीर परायी जाने रहे !सत्य की प्राप्ति जिसे बे ईश्वर कहते थे !उसके लिए अहिंसा ब्रत का बो पालन करते थे ! संयम उनके जीवन की पद्धति थी और सेवा जीवन का कार्य था !उनको मुसलमान काफ़िर कहता था !और हिन्दू उनको मुसलिम समर्थक मानता था !उनको जीवन में अनेकों बार मुसलमानो की कटटरता का शिकार होना पड़ा था !उनका बड़ा बेटा हरलाल जो चरित्र से गिर गया था ! ने इस्लाम धर्म कबूल कर लिया था !इस पर बहुत से मौलवियों ने गांधी जी से कहा था की इस्लाम धर्म सबसे अच्छा धर्म है !गांधी जी को भी इस्लाम धर्म कबूल कर लेना चाहिए !इस पर गांधी जी ने दुखी होकर मौलवियों को पत्र लिख कर तथा अखबार में लेख लिख कर कहा था ! कि एक युवक जो वैश्या गमन करता है !और जो अनेक बार धर्म परिवर्तन कर चुका है !क्या मुसलमान होते ही पवित्र हो जाता है !गांधी जी के परम प्रशंशक मौलाना मुहम्मद अली ने लेख लिखा था !की गांधी जी कितने भी अच्छे हों !किन्तु बे एक गंदे से गंदे मुसलमान से खराब हैं !अक्टूबर १९४६ में नोआखाली में हिन्दू मुसलिम दंगे भड़क उठे थे !नोआखाली की २२ लाख की आबादी में ८२ %मुस्लमान थे ! और १८% हिन्दू थे !वहां पर हिन्दुओं का व्यापक कत्ले आम हुआ था !उस समय बंगाल में मुसलिम लीग की सरकार थी !सुहरावर्दी मुख्य मंत्री थे !कलकत्ता में २२ पुलिस स्टेसन थे जिसमे से २१ पर मुसलमान तैनात थे !और एक पर ईसाई थाने दार था !सुहराबर्दी खुद हिन्दुओं का क़त्ल करा रहा था !जब गांधी जी नोआखाली पहुंचे तो मुसलमान उनके रास्ते में मैला फैला दे देते थे !उनको राम धुन नहीं करने देते थे !और उनसे कहते थे बुड्ढे यहां से भाग जा नहीं तो तेरे टुकड़े टुकड़े कर देंगे !गांधी जी वहां ११६ मील नंगे पैर ७७ साल की आयु में १०४ डिग्री बुखार में पैदल चले और अंत में उन्होंने वहां शांति स्थापित करने में कामयाबी प्राप्त की थी !गांधी जी ने कहा था कि मेने जीवन भर हिन्दू मुसलिम एकता के लिए काम किया और मुसलमानो का विश्वास जीतने की कोशिश की किन्तु में सफल नहीं हो सका !इसके बाद भी उन्होंने पाकिस्तान को रूपया दिलाये और मुसलमानो की सुरक्छा भारत में सुनिश्चित करने के लिए अपना जीवन दाव पर लगा दिया उसके दो प्रमुख कारण थे !(१)जब मौन्टबेटन ने गांधी जी से कहा की यह न्याय पूर्ण नहीं है ! कि भारत की सरकार पाकिस्तान का बाकी रुपया चुकता ना करे !यह भारत सरकार की बेईमानी होगी !गांधी जी नहीं चाहते थे कि सरकार बेईमानी की मिशाल आजाद भारत में पेश करे !(२) जो मुसलमान भारत में रह गए थे !और भारत को अपनी मातृ भूमि समझ कर छोड़ के नहीं जाना चाहते थे !जब बिभाजित भारत के विस्थापित लोग दिल्ली में आते थे !और जिस तरह का कत्ले आम हिन्दुओं का हुआ था !उनकी बहिन बेटियों की इज्जत लूटी गयी थी !उनको अपना घर बार छोड़ना पड़ा था !इस कारण से मुसलमानो के खिलाफ उन के दिलों में हिंसा घृणा और नफरत का आग लगी हुई थी !और बे जैसे को तैसा व्योहार मुसलमानो के साथ करना चाहते थे !मुसलमान गांधी जी के पास आकर कहते थे कि हमारा जीवन सुरक्छित नहीं है !हमारी मस्जिदों और घरों पर विस्थापितों ने कब्ज़ा कर लिया है !गांधी जी पाकिस्तान में होने वाले हिन्दुओं के अत्याचार के विरुद्ध ९ फरबरी को पाकिस्तान जाने वाले थे !जहां जिन्ना भी उनके साथ मुसलमानो द्वारा हिन्दुओं पर होने वाले अत्याचारों के विरुद्ध गांधी जी के साथ सम्बोधन करने वाला था !इसीलिए गांधी जी चाहते थे कि पहले हम दिल्ली में और अन्य शहरों में शांति स्थापित कर लें ! फिर पाकिस्तान जाएँ !इसिलए आत्मा की आवाज पर सत्यनिष्ठ अहिंसक गांधी ने आमरण अनशन किया और पाकिस्तान को उसकी बकाया राशि बापिस करायी थी ! किन्तु इसका सन्देश ना समझी के कारन ठीक नहीं गया था !
Friday, 14 August 2015
पाकिस्तान की बुनियाद ही मारकाट और हिंसा से प्रारम्भ हुई थी ! पाकिस्तान के निर्माता मुहम्मद अली जिन्ना ने पाकिस्तान के निर्माण के लिए १६ अगस्त १९४६ को सीधी कार्यवाही घोषित कर दी थी ! इसका अर्थ पत्रकार बार्ता में घोषित करते हुए जिन्ना ने कहा था ! की जब कांग्रेस और ब्रिटिश हुकूमत के पास अपने हत्यार हैं! एक के पास कानूनी बन्दूक है ! और दूसरे के पास सामूहिक संग्राम की धमकी है ! तब मुसलिम लीग को लगता है कि उसके लिए भी अपना बल तैयार करने का और पाकिस्तान की अपनी मांग मनवाने के लिए युद्ध की तैयारी करने का समय आगया है ! जब पत्रकारों ने पूंछा कि यह हिंसक होगी या अहिंसक ? तो जिन्ना ने उत्तर दिया में नीतिशास्त्र की चर्चा नहीं करूँगा ! जिन्ना के दाहिने हाथ नाबाबजादा लियाकत अली खान ने एसोसिएटेड प्रेस ऑफ़ अमेरिका को समझायकि सीधी कार्यबाही का अर्थ है ! अवैधानिक कार्य पद्धयतियोँ का आश्रय लेना !सीधी कार्यबाही का अर्थ है कानून के विरुद्ध कारबाई करना सीधी कार्बाई की चरम सीमा १६ ,१७ ,१८ अगस्त को कलकत्ता में भीषण नरसंघार के रूप में हुई ! १५ अगस्त को आधी रात से मुसलमानो की संगठित टोलियां तरह तरह के हथयार लिए कलकत्ता के मार्गों में घूमती दिखाई दी ! १६ अगस्त की सुबह होते ही मुसलिम लीगी अपने काम में लग गए दोपहर तक शहर के अनेक भागों में साधारण काम काज ठप्प हो गया ! लाठियां भाले और छुरे लिए हुए मुसलिम लीग का एक बड़ा जुलुस हावड़ा से कलकत्ता के लिए रबाना हुआ ! हावड़ा पुल पर एक यूरोपियन सार्जेंट ने जुलूस को रोक दिया ! उनके हथियार छीन लिए !जो घातक अश्त्र और आग लगाने की सामग्री उनसे छीनी गयी थी ! उस से दो ट्रकें भर गयी थी !शाम तक यह दाबानाल सब जगह फेल गया ! अगले दो दिनों में भयानक मारकाट हुई ! कुछ मुहल्लों में लगातार ४० घंटे तक लूट पाट और मारकाट होती रही ! हिंसा की जिस बुनियाद पर पाकिस्तान के भवन का निर्माण हुआ !उस हिंसा की आग से पाकिस्तान अभी भी धूधू जल रहा है !पाकिस्ताम में चरम पंथियों के कारण सिया अहमदिया बोहरा मुसलमान भी सुरक्छित नहीं है !हिन्दू सिख ईसाई तो लगभह नष्ट नाबूद हो गए हैं !जिन १० भूलों की चर्चा पत्रकार नाजिम सेठी ने की है !बे पाकिस्तान की सबसे बड़ी भूल को कैसे छोड़ गए ?!
Thursday, 13 August 2015
धर्म से दो धाराएं प्रवाहित होती है (१)अधर्म की (२) अध्यात्म की !धर्म अध्यात्म की धारा प्रवाहित कर रहा है !या अध्यात्म की इसका पता भी धर्म से चलता है !धर्म ही अधर्म और अध्यात्म की बुनियाद में है !आजकल दान का दुरपयोग सिर्फ मंदिरों में ही नहीं हो रहा है !अगर मंदिर दान का दुरपयोग कर रहे हैं !तो जिन श्रद्धालुओं की मंदिर में विराजमान भगवान के बिग्रहों में आस्था और विस्वास सेकंडों साल से है !उनको अपनी आस्था और विस्वास क्या इन बाबाओं के आश्रमों में केंद्रित कर इनकी पूजा उपासना शुरू कर देनी चाहिए !जो वैदिक सन्यास को कलकिंत कर रहे हैं !और स्वयं आकंठ सभी प्रकार के भोग भोग रहे हैं !धर्म का सम्बन्ध सीधा अध्यात्म से है !जो इसका प्रयोग निजी स्वार्थों के पोषण के लिए कर रहे हैं !उनके दंड का विधान धर्म में ही दिया गया है !वैदिक धर्म पुनर्जन्म को मानता है !और इसके साथ यह भी स्वीकार करता है !की प्रत्येक मनुष्य को अपने कर्मों का फल अवश्य भोगना पड़ता है !इस सम्बन्ध में एक घटना कल्याण में प्रकाशित हुई थी !एक कुए में एक मेढक रहता था !संयोगबस उसका अकार इतना बढ़ गया की कुँए से पानी लेना बंद हो गया !एक व्यक्ति जानबूझ कर उसकी पीठ अपनी बाल्टी मारकर तोड़ देता था !उसने भगवान से प्रार्थना की भगवान ने प्रगट होकर बाल्टी से चोट पहुंचाने वाले के लिए !दंड के लिए मेढक से पूंछा !मेढक ने कहा की भगवान उसको आप किसी मठ का महंत बना दीजिये !भगवान ने कहा की तुम उसे दंड दे रहे हो या पुरुष्कार !मेढक ने कहा भगवान में पहले जन्म में एक बहुत बढे मठ का महंत था !किन्तु मेने धर्म का चोला पहन कर अधर्म किया इसीलिए मुझे इस जन्म में मेढक होना पड़ा है !यह मुझे अनावश्यक पीड़ित कर रहा है !इसीलिए मै चाहता हूँ की इसे भी आप किसी मठ का महंत बना दीजिये !यह व्यबस्था पाखंडियों के लिए धर्म में ही मौजूद है !अगर मंदिरों की व्यबस्था पुजारियों और देवस्थानों से छीन कर सरकार को सौंप दी जाए !तो आप कल्पना कर सकते हैं !की मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए दान का क्या होगा ?व्यबस्थापक मंदिर के दान का दुरपयोग ना कर सकें !,भगवान को बेचें नहीं आदि में सुधार अवश्य होना चाहिए !किन्तु वह सुधार मंदिरों को सरकारी नियंत्रण में देकर नहीं होना चाहिए !कृपया विरोध करने वाले सन्यासियों संतों के जीवन पर दृष्टि पात करिये !और वैदिक धर्म के संन्यास संत और साधु परम्परा को मालूम कीजिये !तो आपको पता चलेगा !ये सभी संत संन्यास परम्परा का पालन नहीं कर रहे हैं !फिर धर्म में अधर्म देवस्थानों के दान का दुरपयोग सिर्फ हिन्दू मंदिरों में ही नहीं हो रहा हैं !विश्व के छोटे बड़े सभी धर्म अधर्म से व्याप्त हैं !कुछ धर्म तो स्वभाव से ही अधर्म पोषक हैं !वैदिक धर्म से ही अनेक ईश्वर कोटि के महापुरुष निकले हैं !और आज भी निकल रहे हैं !
आजादी का ६८ बा स्वतंत्रता दिवस १५ अगस्त को देश और देश के बाहर भी उल्लास और उत्साह के साथ मनाया जाएगा !देश ने अन्य स्वतंत्र राष्ट्रों की अपेक्छा काफी तरक्की की है !कुछ देश तो भारत के बाद आजाद हुए किन्तु बे विकास में भारत से आगे निकल गए !किन्तु भारत के साथ ही आजाद होने वाला पाकिस्तान ना तो लोकतंत्र स्थापित कर पाया !और ना ही अपने देश को एक रख पाया ! परिणाम स्वरुप वह दो देशों में बिभाजित हो गया !उसके और बिभाजित होने की प्रवल संभावना है !लोकतंत्र को भारत कायम रख सका यह भारत की सबसे बड़ी सफलता है !अभी लोकतंत्र को और अधिक विकसित होने की आवश्यकता है !!लोकतंत्र के सही स्वरुप के प्राप्त होने में कई बाधाएं हैं (१)भारत में चुनाव कराने के लिए निर्वाचन आयोग है !और उसकी देख रेख में संसद और विधान सभाओं के चुनाव निष्पक्छता से होते हैं !किन्तु कही कही नेताओं की दबंगई के कारण बूथ कैप्चरिंग भी होता है !मतदाताओं को जातिबाद अगड़ा पिछड़ा दलित अल्पसंख्यक आदि के नाम पर लामबंद करना और मतदाताओं को लोभ लालच शराब पिलाकर और धन देकर अपने पक्छ में मतदान कराना ये आम बात है !!यह रोग गाओं तक में और सामजिक शैक्छणिक अधिवक्ताओं आदि के संगठनो में भी प्रवेश कर गाय है !इसतरह लोकतंत्र की बुनियाद में ही भ्रष्ट आचरण प्रवेश कर गाय है (२) इस बीमारी के कारण प्रितिनिधि अपने सामजिक हित के उद्देश्य से कर्त्तव्य करने के लक्छ्य से भटक गए हैं !और प्रतिनिधि के रूप में चुने जाने के बाद बे बेईमानी से धन संग्रह करते हैं !परिवार बाद को बढ़ाते हैं !इस बेईमानी में सरकारी तंत्र भी शामिल हो जाता है !इन लोगों की आपसी गठजोड़ से जनहित की योजनाओं के लिए आवंटित धन का मात्र चौथा हिसा ही विकास के कार्य में लगता है !बाकी इन लोगों के पेट में समा जाता है !सभी ठेके राजनैतिक दलों के नेता प्राप्त कर लेते हैं !और निर्माण कार्य हो या, उत्खनन का कार्य हो ,या खनिज और ब्रक्छों की रक्छा का कार्य हो !इन सबका उपयोग और दुरपयोग इन लोगों द्वारा अपने हित में दबंगई से किया जाता है !जल जंगल और जमीन अपना स्वाभाविक स्वरुप लगभग खो चके हैं !एक सबसे बड़ी समस्या सामाजिक इन्साफ की भी है !संबिधान में दलितों के लिए आरक्छण की व्यबस्था १० साल के लिए की गयी थी !किन्तु यह अभी भी कायम है !और अब आरक्छण की मांग लगातार बढ़ती जा रही है !अगड़े पिछड़े अल्पसंख्यक सवर्ण सभी आरक्छण की मांग कर रहे हैं !जिस आरक्छण का जन्म न्याय के लिए हुआ था ! वह अब अन्याय का पोषक हो गया है !आरक्छण में जो दलित जातियां शामिल हैं !उनमे से सिर्फ एक दो जातियों को ही आरक्छण का भरपूर लाभ मिला है !जिन जातियों को आरक्छण का भरपूर लाभ प्राप्त हुआ है !उनमे भी आरक्छण से सिर्फ कुछ राजनैतिक परिवार ही अधिकाँश में लाभान्वित हुए है !यही स्थिति पिछड़ों के आरक्छण की है !आरक्छण में न्याय की दृष्टि का पालन होना चाहिए !साम्प्रदायिक समस्या भी विशेष कर हिन्दू मुसलमानो के मध्य विकराल रूप धारण किये हुए है !शायद ही कोई ऐसा दिन जाता होगा !जिस दिन हिन्दू मुसलिम विवाद तनाव या दंगा न हो !लोकतंत्र के विकास और इसको जनता की आकांछाओं के अनुरूप बनाने के लिए इन समस्यायों का समाधान होना आवश्यक है !साम्रदायिक सद्भाव की प्राप्ति भ्रष्टाचार से मुक्ति सामाजिक न्याय आदि की प्राप्ति अब देशवाशियों का प्रथम लक्छ्य होना चाहिए !
Wednesday, 12 August 2015
|
|
|
|
|
राहुल के इस जवाब पर झुक गईं सुषमा की आंखे!
|
जितनी भी फोटो दिखाए गए हैं !उनमे से एक भी फोटो किसी भी महिला के साथ चाहे वह स्वदेशी हो या विदेशी एकांत का नहीं है !एडविना मौन्टबेटान के फोटो उनके पति की मौजदूगी के हैं !भारतीय संस्कृति और पाश्चात्य संस्कृति में बुनियादी फर्क हैं !वहां स्त्री पुरुषों के मध्य व्योहार में खुलापन है !स्त्री पुरुष के मध्य चुमबन या आलिंगन सार्वजानिक रूप से होता है !और इसे अश्लील नहीं माना जाता है !किन्तु स्त्री पुरुष के मध्य काम जनित सम्बन्ध अश्लील और वर्जित माने जातेहैं !आलिंगन और चुम्बन स्त्री पुरुष के मध्य शारीरिक संबंधों की पूर्व भूमिका नहीं समझे जाते थे !इसिलए ये सारे फोटो नेहरू जी के चरित्र पर हमला करने के लिए राजनैतिक लाभ की दृष्टि से किये जा रहे हैं !और इसी क्रम में और भी अफ्बाहों को फैलाया जा रहा है ! सिर्फ नेहरू जी ही सिगरेट नहीं पीते थे ! मौलाना अब्दुल कलाम आजाद आदि भी सिगरेट पीते थे ! जवाहर लालनेहरु आदि गांधी जी के सामने सिगरेट नहीं पीते थे !सिर्फ आजाद ही गांधी जी के सामने सिगरेट पीते थे !इंग्लैंड से शिक्छा प्राप्त सभी लोग धूम्रा पान करने के आदी होते थे !जवाहर लाल नेहरू के पिता पंडित मोतीलाल का जीवन अत्यंत बैभव पूर्ण था !किन्तु नेहरू जी का जीवन गांधी जी के संपर्क में आने के बाद सादगी से रहने का हो गया था !बे अपने हाथ से काती हुई खादी से बने हुए ही खादी के कपडे पहनते थे !उनके औरउनके पिता के कपडे पेरिस में धुलने जाते थे ~!इसका खंडन नेहरू जी ने खुद अपनी आत्मकथा में किया है !नेहरूजी जब देश के प्रधान मंत्री थे !तब इलाहाबाद नगर निगम के प्रशासक ने आनंद भवन की कुड़की हाउस टैक्स ना जमा होने का कारण करा ले थी !ऐसी अनेक घटनाएं नेहरूजी के सम्बन्ध में है !जो उनको अपने समकालीन नेताओं से महान सिद्ध करती हैं !नेहरू प्रधान मंत्री पद से बहुत अधिक महान थे !राजनैतिक लाभ के लिए इस महान नेता की छबि बिगाड़ने का प्रयत्न नहीं किया जाना चाहिए !लोकतंत्र में सत्ता स्थिर नहीं रहती है !वह नदी की तरह प्रबाहित होती रहती है !इसिलए आज जो सत्ता में नहीं है !उनके चरित्र हनन करने में समय बर्बाद करने के बजाये लोक हित के कार्य करना चाहिए !
भारत भूमि धार्मिक आस्था का केंद्र अनादिकाल से रही है !इस भूमि की धर्मकी गंगा को सन्यासियों साधुओं संतो और राजऋषियों ने तपस्या त्याग से सींचा है! यहाँ की राजा प्रजा सभी चौथे पन यानी ७५ साल की आयु होने पर राज और गृह को त्याग कर तपस्या के द्वारा शरीर त्यागने और मोक्ष की प्राप्ति के लिए जंगल में तपस्वी जीवन जीते हुए निवास करते थे !किन्तु समय के उलट फेर के कारण राजा प्रजा सभी का जीवन भोग प्रधान हो गया ! और यह परम्परा लग भाग लुप्त हो गयी !किन्तु धर्म में श्रद्धा विस्वाश और आस्था आज भी विद्यमान है !उसी आस्था का परिणाम है कि आज भी मंदिरों के पास अकूत संपत्ति है !जो मंदिरों के व्यबस्थापक , पुजारी मंदिरों में दिए गए दान का अपने लिए प्रयोग करते हैं !बे इसके गंभीर परिणाम भोगते है !शस्त्रों मेबताया गया है ! की ऐसे धर्म का चोला ओढ़कर अधर्म करने वालों को घोर नर्कबास की प्राप्ति होती है !और इनका अगला जन्म कुत्ते सूअर आदि की योनि में होता है !मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था विश्वाश के केंद्र है !इसिलए मंदिरों को दान में प्राप्त धनराशि को मंदिरों के पास ही रहने देना चाहिए !भले ही आय व्यय की निगरानी सरकार करती रहे !धर्म के मामले में सरकारी हस्तछेप से जो अधर्म पाखण्ड इत्यादि धर्म का चोला ओढ़कर पंडों पुजारियों व्यबस्थापको द्वारा छिपे रूप में किया जा रहा है ! वह सरकारी नियंत्रण में रिश्वतखोरी ,कर्त्तव्य भ्रष्टता आदि के कारण खुले आम किया जाने लगेगा !अभी देश के जो मंदिर सरकारी नियंत्रण में है !उनकी हालत इन मंदिरों से भी बुरी है !अभी पुजारी कम से कम विधिविधान से पूजा अर्चा तो करते हैं !सरकारी नियंत्रण में मंदिरों के जाने से दान तो रिश्वतखोर अधिकारिओयों की जेब में चला जाएगा ! और मंदिरों की विधि बिधान से होने वाली परंपरागत पूजा अर्चा भी समाप्त हो जायेगी !
Tuesday, 11 August 2015
युधिस्ठर का यह शाप सही सन्दर्भों मेसमझा जाना चाहिए !पांडव जब महाभारत में वीर गति प्राप्त करने वाले महारथियों आदि को जलांजलि अर्पित कर रहे थे !तब उनकी माता कुंतीने युधिस्ठर से करण को भी जलांजलि देनेकोकहा !और इस रहस्य का उद्घाटन किया कि उसका जन्म मेरे ही गर्भ से जब में अविवाहित थी तब हुआ था !और करण मेरा सहोड़ पुत्र है (सहोड़ पुत्र विवाह के पूर्व होने वाले पुत्र को कहा जाता है !और विवाह के बाद जिस व्यक्ति से कन्या का विवाह होता है ! वह !उसी का पुत्र माना जाता है ) जब युधिस्ठर को जानकारी माँ ने दी !तब युधिस्ठर मोह ग्रस्त हो गए और क्रोध के आवेश में उन्होंने यह श्राप दे दिया !जो श्राप मोहग्रस्त व्यक्ति द्वारा आवेश में दिया जाता है !उस श्राप का तदनुसार फल नहीं होता है !युधिस्ठर सत्यवादी थे ! और धर्मनिष्ठ थे !किन्तु आवेशऔर मोह के कारण श्राप देते समय बे सत्य और धर्म का त्याग कर श्राप देने की समयावधि में में इन निष्ठाओं से हट गए थे !युधिस्ठर के मोहग्रस्त और आवेश युक्त होने का एकओरउदाहरण महाभारत में करण को लेकर है !करण पांडवों का प्रमुख शत्रु था !करण ने अपनी माँ कुंती की प्रार्थना पर माँ को यह बचन दिया था की वह युद्ध में अर्जुन के अलावा और किसी पांडवा का बध नहीं करेगा !एक बार युधिस्ठर और करण का युद्ध हुआ जिसमे युधिस्ठर बुरी तरह युद्ध में करण के वाणो के प्रहार से घायल हो गया और मूर्छित होगया !उनका सारथि उनको मूर्छित अवस्था में लेकर उनके केम्प में ले गया !अर्जुन को जब युधिस्ठर के घायल होने का समाचार मिला तो वह युद्ध भूमि छोड़ कर युधिस्ठर को देखने के लिए तम्बू में गया !तब तक युधिस्ठर होश में आगये थे !युधिस्ठर यह समझे की अर्जुन करण को मार कर आये हैं !जब अर्जुन ने बताया की करण अभी जिन्दा है !तो युधिस्ठर एक दम आवेश में आगये और उन्होंने अर्जुन की औरउनके गांडीव धनुष की कटु निंदा कर दी !अर्जुन की यह गुप्त प्रतिज्ञा थी !की जो उनके गांडीव धनुष की निंदा करेगा बे उसका शीश काट लेंगे !अर्जुन ने म्यान से अपनी तलबार युधिस्ठर की गर्दन काटने के लिए निकाल ली थी !बड़ी मुश्किल से श्री कृष्णा ने अर्जुन को समझा कर तलबार म्यान के अंदर करायी !इस घटना से यह सिद्ध होता है !कि जैसे क्रोध में की हुई गांडीव और अर्जुनकी निंदा और श्राप का कोई भी असर अर्जुन और गांडीव पर नहींपड़ा !उनकी निंदा से ने गांडीव की शक्ति नष्ट हुई थी ! ओरना ही अर्जुन की शक्ति पर विपरीत असर पड़ा था !उसी प्रकार से युधिस्ठर के इस श्राप का भी महिलाओं पर कोई असर नहीं पड़ा !जितने गुप्त रहस्य महिलाएं अपने अंदर लेकर जीती हैं !उनके मुकाबले रहस्य छुपाने में तो कोई भी पुरुष मुकाबला नहीं कर सकता है !स्त्री चरित्रं पुरुषश्य भाग्यम देवो ना जानाति कुतो मनुष्यः !
1 of 229
आजाद
भारत की प्रारम्भिक सरकारों ने तो सरकारी धन का आवश्यकता से अधिक सावधानी
से मितव्यता पूर्ण ढंग से खर्च किया !प्रारम्भ में तो सांसदों को बेतन भी
नहीं मिलता था !सिर्फ संसद के सत्र के दौरान भत्ता मिलता था !सांसद और
विधयक को जो वेतन और सुविधाएं प्राप्त थी !बे अत्यंत अल्प थी !राष्ट्रपति
और प्रधान मंत्री ही वायुयान का प्रयोग यात्राओं में करते थे !बाकी सभी
केंद्रीय मंत्री और मुख्य मंत्री ट्रैन और कार का प्रयोग करते थे !किन्तु
धीरे धीरे राष्ट्रपति से लेकर प्रधानमन्त्री केंद्रीय मंत्रियों मुख्य
मंत्रियों और मंत्रियों सांसदों और विधायकों के बेतन और सुबिधाओं में
गगनचुम्बी बृद्धि हुई !और उनका दर्जा और रहन सहन राजाओं महाराजाओं से भी
अधिक आरामदायक वैभव और विलास पूर्ण होगया !और अब बे आमजनता के प्रितिनिधि
नहीं मालुम पड़ते हैं !राजनेता मतदाताओं को लुभाने के लिए राजकोष से धन
लुटाते हैं ! जितनी भी योजनाये जनता के लाभ के लिए बनती है !उनके बड़े बड़े
बजट बनते हैं !और उनके लिए बड़ी भारी धनराशि आवंटित की जाती है ! किन्तु
उसका ९०%राजनेताओं भष्ट अधिकारियों के उदर में समा जाता है !आवागमन
स्वास्थय शिक्छा गरीबी निबारण के लिए आवंटित पैसे का इतना अधिक दुरपयोग
होता है !कि सड़कें बनती नहीं है ! और उनका पैसा ठेकेदारों की जेब में
नेताओं के सहयोग और अधिकारियों के भ्रष्टाचार से चला जाता है !और जिन सड़कों
और पुलों आदि का निर्माण होता भी है !बे शीघ्र टूट जाते हैं !यही हाल
शिक्छा और स्वास्थय ऐसे महत्त्वपूर्ण विभागों का और अन्य बिभागों का है !
देश में खनिज बालू गिट्टी मिटटी आदि का दोहन होरहा है !जंगलों कि अंधाधुंध
विनाश हो रहा है ! पर्यावरण खतरनाक स्थिति तक बिगड़ गया है !वित्त मंत्री का
यह कथन सही है !कि सरकारों को सरकारी धन ठीक से खर्च करना चाहिए !अगर
सरकारें सरकारी धन का अपव्यय करेंगी तो ग्रीस कैसे हालत देश में उत्पन्न हो
जायेंगे !मंत्री की यह भविष्य बाणी अवश्य सही होने वाली है !किन्तु देश के
हालात ग्रीस से भी ज्यादा खराब होंगे !लेकिन इस सब के बाद भी ना तो
राजनेता इस सीख पर ध्यान देंगे ! और ना ही सरकारी अधिकारी और कर्मचारी के
आचरण में सुधार होगा !इसीलिए देश को इस संकट से जिसको देश में पैदा करने
वाले राजनेता और राजनेताओं से संरक्छण ,प्राप्त भ्रष्ट अधिकारी हैं देश को
इस भयाबह स्थिति से सिर्फ भगवान ही उबार सकते हैं !अन्यथा आमजनता तो बहुत
बड़ी विपत्ति की और धकेली जाती दिखाई दे रही है ! नरोत्तम स्वामी गांधीवादी
विचारक झाँसी मोब 9451937919
| x | ||||
![]() | ||||
| ||||
Subscribe to:
Comments (Atom)


0 comments:
Post a Comment