Monday, 29 June 2015

 आत्माओं के ह्रदयों पर आक्रमण करने लगतातदात्मानं सृज्यामहम्------जब एक प्रकार का सर्वब्यापी  भौतिकबाद मानवीय है तब श्रष्टि में संतुलन कायम करने के लिए परमसत्ता मनुष्य के रूप में प्रगट होती है ! परमात्मा यद्द्पि अजर अमर है और उसका ना जन्म होता है और ना मरण होता है ! फिर भी वह दुष्ट शक्तियों को परास्त करने के लिए प्रगट होता है ! परमात्मा इस विश्व का आधार है ! शाश्वत धर्म का रक्षक भी है ! और सनातन पुरुष भी है ! अच्छाई और बुराई से पर ऐसा परमात्मा नहीं है ! जो बहुत दूर से संसार को देखता रहे ! और अधर्म के साथ चल रहे मनुष्यों के संघर्ष की परवाह ना करे ! अगर कुछ व्यक्ति अधार्मिक हो जाएँ तो उनको सुधारा जा सकता है  !परन्तु जब पूरा का पूरा समाज बिगड़ता है और निम्नस्तरीय स्वार्थनिष्ठ जीवन पद्धति को अपना लेता है ! तथा समाज को दिशा देने वाले ऐसा नेतृत्त्व प्रदान करने लगते हैं की सज्जन और साधु पुरुषों का जीवन कष्टमय हो जाता है ! और उनके असित्तत्व पर खतरा उत्पन्न हो जाता है ! तब परमसत्ता स्वयं प्रगट होकर धर्म की स्थापना के लिए कार्य करती है और अधर्म में प्रवृत्त दुष्ट व्यक्तियों का विनाश करती है !अभी अधर्म का और दुष्ट पुरुषों का इतना विस्तार नहीं हुआ है की सज्जन और साधु पुरुषों के असित्तत्व पर ही  खतरा  उत्पन्न हो जाय !धीरे धीरे समाज अधर्म की और गति कर रहा है !चरित्र निर्माण के केंद्र शिक्छा और धर्म इन दोनों पर ही स्वार्थनिष्ठ लोगों का प्रभुत्त्व स्थापित हो रहा दिखाई देता है !फिर भी कुछ शिक्छण संस्थान और आध्यात्मिक पुरुष अपने जीवन सेचरित्र शुद्धि का उदाहरण प्रस्तुत कर रहे हैं !जहाँ धर्म आश्रमों में कैद हो गया है वहां जरूर धर्म स्वार्थों का पोषक हो गया है ! किन्तु जहाँ धर्म आश्रमों से मुक्त होकर आध्यात्मिक पुरुषों द्वारा सेवित है वहां धर्म के आध्यात्मिक स्वरुप का दर्शन अभी भी होता है !इसी प्रकार कुछ शिक्छण संस्थान पैसे के प्रभाव से मुक्त होकर अपने निजी सदाचरण से उत्तम चरित्र का आदर्श प्रस्तुत कर रहे हैं !व्यबस्था अभी भी पूरी तरह से बिगड़ी नहीं है !व्यबस्था में अच्छी बुरे का सम्मिश्रण है !देश में लोकतांत्रिक शासन  व्यबस्था है !किन्तु लोकतंत्र के बुनियादी स्वरुप की स्थापना अभी तक नहीं हो पायी है ! !सिर्फ लोकतंत्र में  मतदान के द्ववारा राज सत्ता प्रदान करने की स्थूल प्रक्रिया का ही टूटे फूटे तरीके से ही पालन होता देखा जाता है ! भारत की आतंरिक और बाह्य समस्याओं के समाधान के लिए चरित्रवान निष्पक्छ राजनैतिक  नेतृत्त्व का निर्माण  अभी नहीं हो पाया है !चारों और ग्रामसभा से लेकर संसद तक और सभी सामाजिक धार्मिक, व्योपारिक, शैक्छणिक,  कर्मचारियों, अधिकारियों, जातीय संगठनो, और समाज सुधार तथा गैरसरकारी संगठनो आदि में भी स्वार्थनिष्ठा ही प्रभावी दिखाई देती है ! फिर भी ऐसा नहीं कहा जा सकता है की ये सभी संगठन कोई समाज हित का काम नहीं करते हैं !इन संगठनो  की समाजनिष्ठा और सेवा भाव सिमट कर इनके संचालकों के स्वार्थ पोषण में  केंद्रित हो गयी है ! जिसके कारण संस्थाओ  के लोककल्याण के मूल उद्देश्य लुप्त हो गए हैं ! लोकतंत्र का मूल आधार ही संस्थाओं का न्यायुक्त ,निष्पक्छ, निष्काम  संचालन से होता है !संस्थाओं का निर्माण तो होगया है ! अब निष्पक्छता और न्याय निष्ठा तथा निष्कामता  का निर्माण होना बाकी है !जिस तरह देश को आजाद कराने के लिए अनेक महापुरुष देश में पैदा हो गए थे 1 उसी प्रकार से लोकतंत्र के सफल संचालन के लिए भी निष्पक्छ निश्वार्थ लोकसेवकों का जन्म भी देश में हो जाएगा ! और फिर संसद से लेकर ग्रामसभा तक तथा सभी शिक्छणिक धार्मिक आदि संस्थाएं लोकहित में काम करेंगी यही परमशक्ति का अवतरण होगा जो समाज व्यबस्था को स्वार्थनिष्ठ लोगों से मुक्त करेगा !
भीष्म पितामह ने युधिस्ठर के प्रश्नो के उत्तर में  महिलाओं के आदर सत्कार और गृहस्थ धर्म का पालन करते हुए मोक्ष की प्राप्ति में महिलाओं के योग दान के सम्बन्ध में भी विस्तार से कई आख्यानों में  बताया है !युधिस्ठर ने पूंछा कोई ऐसी पुरुष   हो जो गृहस्थ आश्रम में पत्नी  सहित संयम नियम के साथ रहता   हो और समस्त सांसारिक बंधनो को जीत चूका  हो और संपूर्ण द्वन्दोसे दूर रह कर उन्हें धैर्य पूर्वक सहन करता   हो ! तो उसका मुझे परिचय दीजिये !क्योँकि ऐसा   गृहस्थ   दुर्लभ होता   है  ! भीष्म ने कहा की महर्षि देवल की सुवर्चला नाम की एक पुत्री थी जो प्रकांड विद्वान थी ! जब वह विवाह योग्य हो गयी तब उसके पिता को उसके विवाह की चिंता हुई ! सुवर्चला ने अपने पिता से कहा कि मेँ उसी युवक से विवाह करुँगी जो मेरे प्रश्नो का उत्तर देगा और मेरे अनरूप होगा ! इसीलिए आप ऋषि पुत्रों को आमंत्रित कीजिये में अपने लिए बर का चयन स्वयं करुँगी ! देवल ने ऋषि  पुत्रों को आमंत्रित किया सुबर्चला ने उनसे कहा की मेरा पति वही हो सकता है जो अँधा भी  हो और आँखवाला भी हो यह प्रश्न सुनकर सभी ऋषि कुमार सुबरचला को भला बुरा कहते हुए चले गए ! इसके बाद श्वेत केतु नाम के एक ऋषि पुत्र  ने सुबरचला के प्रश्न का उत्तर देते हुए कहा कि में अँधा हूँ यह यथार्थ है ! जिस परमात्मा की शक्ति से जीवात्मा सदा यह सबकुछ देखता है ! ग्रहण करता है ! स्पर्श करता है ! सूँघता है बोलता है  !निरंतर बिभिन्न वस्तुओं का स्वाद ग्रहण करता है ! तत्त्व का मनन करता है और बुद्धि द्वारा निश्चय करता है  ! वह परमात्मा ही आँख कहलाता है  !जो इस आँख से रहित है वह प्राणियों में अँधा कहलाता है ! अर्थात वह आँखवाला भी होकर अज्ञान के कारण कुछ नहीं देखता है ! जिस परमात्मा के भीतर ही यह संपूर्ण जगत व्योहार में प्रवृत्त होता है ! यह जगत जिस आँख से देखता है, कान से सुनता है, त्वचा से स्पर्श करता है, नासिका से सूँघता है, रसना से रस लेता है एवम जिस भौतिक आँख से यह देख कर सब वर्ताव करता है ! उस से मेरा कोई सम्बन्ध नहीं है इसीलिए में अंध हूँ ! कार्य कारण रूप परमात्मा का चिंतन करता हुआ में सदा शांत भाव से उन्ही पर निर्भर रहता हूँ !सुबरचला ने अपने प्रश्न का यथार्थ उत्तर सुनकर स्वेत केतु का वरण किया और अध्यात्म दृष्टि से गृहस्थ जीवन जीते हुए अंत में मोक्ष की प्राप्ति की ! !इसीलिए प्राचीन भारत में महिलायें पुरष की कृपा और दया से नहीं अपने गुणों ,विद्वात्ता और शील से आदर और प्रतिष्ठा की पात्र थी !ऐसी अनेक महिलाओं की श्रेष्ठता के आख्यान महाभारत ग्रन्थ में हैं !
गीता में उत्तम मध्यम और अधम दान को सात्त्विक राजस और तामस बताया गया है !  १७(२०,२१,२२ )में इन तीनो प्रकार के दानो का विवरण सूत्र रूप में प्रस्तुत किया गया है ! दान देना कर्त्तव्य है --ऐसे आतंरिक भाव से जो दान देश काल और दान के लिए योग्य व्यक्ति के प्राप्त होने पर निष्काम भाव से दिया जाता है वह दान सात्त्विक दान होता है ! यह उस प्रकार का दान नहीं है ! जिसमे कहा जाता है की एक गुना दान शहस्त्र गुना पुण्य लाभ ! गीता का यह दान त्याग की महिमा को मंडित करनेबाला है ! गीता के अनुसार दूसरों के हित केलिए कर्म करना यज्ञ है ! सदा प्रसन्न रहना तप है  !और उसी की वस्तु उसी की मानकर उसी को दे देना दान है ! स्वार्थ बुद्धि पूर्वक अपने लाभ के लिए यज्ञ तप दान करना आसुरी अथवा राक्छ्सी स्वभाव है ! जो दान क्लेश पूर्वक और बदले में लाभ यश कीर्ति पुण्य प्राप्ति के लिए दिया जाता है ! वह राजस दान कहलाता है  ! जो दान बिना आदर सत्कार के तथा दानलेने वाले का सम्मान ना कर अपमान पूर्वक और बिना देश काल का विचार किये कुपात्र को दिया जाता है ! वह तामस दान कहलाता है !  शास्त्रों में कहा गया है की कलयुग में दान देना ही श्रेष्ठ धर्म है ! अतः जिस किसी प्रकार से भी दान दिया जाय वह कल्याण ही करता है ! प्रगट चारि पद धर्म के कलि महुँ एक प्रधान ! जेन केन विधि दीन्हे दान करे कल्याण ! इसका तात्पर्य है कि कलयुग में यज्ञ तप दान ब्रत आदि शुभकर्म विधिपूर्वक करना कठिन है  !अतः किसी तरह देने की त्याग करने की आदत पड़ जाय  ! गीता का सात्विक दान वास्तव में त्याग है ! गीता में जहाँ कहीं सात्त्विक राजसिक और तामस भेद किये गए हैं ! वहां जो सात्त्विक बिभाग है ! वह ग्रहण करने के लिए है ! क्योँकि वह  आनंद और मुक्ति प्रदान करने वाला है ! और जो राजस तामस बिभाग है बे दुःख शोक और बंधन प्रदान करने वाले हैं !

Sunday, 28 June 2015

अभ्युथानम्धर्मस्य -----धर्म का पतन होता है ! तब अधर्म का जन्म और उसका विकास होता है !अधर्म से ही मनुष्यों में मोह ,मूढता और मूर्खता विकसित होती है ! मोह से ग्रस्त व्यक्ति का विवेक लुप्त हो जाता है ! और वह अधर्म को ही धर्म मानने लगता है !उसे व्योहार और परमार्थ में सबकुछ उल्टा ही समझ में आने लगता है  ! जैसे गाय और अन्य पशुओं की निर्मम हत्या में उसे माश का उत्पादन दिखाई देता है ! गाय के बध को कानून के  माध्यम से रोकने को वह मनुष्य के खाने पीने के अधिकार पर हमला मानता है ! बहुत से गाय को माता मानने  वाले और गाय के बध का  बिरोध करने वाले तथा कथित गो भक्त गो माता की जय का नारा बुलंद करने वाले गोशालाएं चलाते है ! और गायों के चारा और पालन पोषण के लिए प्राप्त होने वाले पैसे को खुद खा लेते हैं ! !गोचर भूमि पर कब्ज़ा कर लेते हैं !और गायों को कसाईओं के लिए खुला छोड़ देते हैं !मोह ग्रस्त लोग समाज और देश की तमाम संस्थाओं शिक्छा ,स्वास्थ्य, जनकल्याण, मीडिया, राजनैतिक संस्थाओं, धार्मिक आश्रमों  ,आदि में प्रवेश कर उनके चरित्र निर्माण और लोकहित के कार्यों को नष्ट कर उनको अपने छुद्र स्वार्थों की पूर्ति का साधन  बनाकर देश और समाज का अहित करते हैं !इसी मोह से मूढता का जन्म और विकास होता है ! मूढ़ ब्यक्ति की बुद्धि यह समझने में असमर्थ और अयोग्य हो जाती है कि धर्म का पालन श्रेष्ठ आचरण से होता है  और उसके लिए कर्त्तव्य निष्ठां आवश्यक होती है !    वह अपने कर्तव्य का पालन तो करता नहीं है !किन्तु धार्मिक पूजा पाठ प्रवचन धार्मिक आयोजन आदि अवश्य करता कराता रहता है !प्रवचन कराने वाले लोग सड़क और पुल बनाने आदि के कार्यों में अत्यंत घटिया सामग्री के इस्तेमाल कर लोग आम  जन जीवन को खतरे में डाल देंगे देते हैं  !नेता लोग अपने पद से सम्बंधित उत्तयदायित्वा का निर्बाह नहीं करते हैं !अधिकारी कर्मचारी आदि निर्लज्ज हो कर रिश्बत खोरी करते हैं  !व्योपारी नकली घटिया माल बेचते हैं  !प्रवचन करने वाले प्रवचनों को  अपनी भोग सामग्री  और आय का साधन बना लेते हैं लोग धार्मिक आश्रमों और संस्थाओं का निर्माण कर अपने आप को गुरु महात्मा ऋषि और अवतार के रूप में स्थापित करते हैं और ईश्वर को लुप्त कर देते हैं और खुद ही ईश्वर के रूप में अपनी पूजा कराने लगते हैं  !यही मूढता है !और इसी मूढता कि परिणति मूर्खता में होती है ! जब व्यक्ति अपनी कर्त्तव्य निष्ठा को भुलाकर धार्मिक आयोजनो से ही पुण्यप्राप्ति और ऐश्वर्या की कामना करने लगता है !तब उसे कभी कभी ऐश्वर्या धन संपत्ति पद प्रतिष्ठा आदिकी पप्ति तो हो जाती है !किन्तु यह जड़ मूल से नष्ट हो जाती है ! स्थायी नहीं होती है ! इस तरह के कथानक धार्मिक ग्रंथों में भरे पड़े हैं !किन्तु मोह मूढता से ग्रस्त इन मूर्खों का ध्यान उन बिनाशकारी धर्म के नाम पर की जाने बाली अधार्मिक क्रियायों पर नहीं जाता है !और ये लोग अपनी इन अधार्मिक क्रियायों  से लोगों के मन मष्तिष्क में गहरी घृणा और अविश्वास को जन्म दे देता है !और ऐसे लोग भी  भी अधर्म को ही धर्म समझने लगते हैं और धर्म का तिरिष्कार करने लगते हैं ! तथा धर्म के आध्यात्मिक शुद्ध स्वरुप को ना समझ कर धर्म कि आलोचना करने लगते हैं !आज  कल जो धर्म के नाम पर जो  कार्यक्रम आदि होते दिखाई देते हैं उनमे अधिकाँश में  धर्म नहीं हैं होता है  ! धर्म परिवर्तन करना कराना ! धर्म के नाम पर क्रूर हिंसा करना लोगों के गले काटना पशु हत्या करना उनका मांश खाकर अपने शरीर को पुष्ट करना  !धार्मिक कर्मकांड को ही धर्म मानना और धर्म समझनाआदि अधर्म ही है !इस से ही समाज में मोह मूढता और मूर्खता का विकास हो रहा है !यह धर्म की अधार्मिक धारा है ! जिस से धर्म के वास्तविक स्वरुप अध्यात्म का उदय नहीं हो पा रहा है !और अधर्म की प्रचंड और व्यापक काली धुंद में अध्यात्म दिखाई नहीं दे रहा है

Saturday, 27 June 2015

यदा यदा  हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत ४(७)--जब जब धर्म का पतन होता है -- धर्म से अधर्म और अध्यात्म  की   दो धारायें निकलती हैं !जो आचार व्योहार धर्म को दूषित प्रदूषित और बिक्रत करता है ! उसको अधर्म कहते हैं ! धर्म का नाम धर्म इसीलिए  पड़ा है ! क्योंकि धर्म प्राणिमात्र को धारण करता है ! धर्म केसिद्धान्तो को आचरण में उतारने से व्यक्ति समाज देश और विश्व की भौतिक उन्नत्ति और आत्मशांति की प्राप्ति होती है ! धर्म मानव स्वभाव से पशुता निकृष्ट स्वार्थ निष्ठां आदि को निकालकर मनुष्यों में सत्य अहिंसा अस्तेय ब्रह्मचर्य असंग्रह शरीर श्रम सर्वत्र भयबर्जन अस्वाद सर्वधर्मसमानत्वव स्वदेशी स्पर्शभावना को अहंकार रहित होका नम्रता से पालन करने का शिक्छण प्रस्क्छण  देता है !और धर्म का यह मूल स्वरुप सभी धर्मों के धर्मग्रंथों में दिखाई देता है !किन्तु इन सिद्धांतों का पालन करने और कराने की जिम्मेदारी जिन धर्माचार्यों की होती है !जब ये धर्माचार्य इन मूल सिधान्तो का पालन नहीं करते हैं ! तब धर्म अधर्म में परिणित होने लगता है !वैदिक धर्म में इन धर्माचार्यों को साधु संत सन्यासी कथाबचक प्रवचन कर्ता आदि कहा जाता है !इन धर्माचार्यों के वेश और शव्द तो धार्मिक होते हैं ! किन्तु आचरण में धर्म नहीं होता है !व्यासदेव ने महाभारत में कहा है धर्म की आड़ में कितने ही अधर्म चल रहे हैं ! धर्मात्मा के वेश में रहने वाले इन अधार्मिक मनुष्यों के सिर्फ शव्दों में ही इन्द्रिय संयम, पवित्रता और धर्म सम्बन्धी चर्चा आदि सभी गुण तो होते हैं किन्तु इनके आचरणों में धार्मिक पुरुषों का आचार व्योहार प्रायः अधिकाँश धर्म चर्चा करने वालों में नहीं पाया जाता है !जैन धर्म में धर्म को उत्कृष्ट मंगल कहा गया है ! इस धर्म के सत्य अहिंसा संयम लक्छण है ! जिसका मन इस धर्म पालन में लगा रहता है वही सच्चा जैन है !किन्तु धर्म के यह लक्छण जैन मुनियों में तो दिखाई देते हैं ! किन्तु श्रावकों में इनका दर्शन अधिकाँश जैनो में नहीं होता है !बौद्धधर्म में बुद्ध धर्म के मूल्य तत्त्वों की स्थापना करने वाले भिक्छु आदि होते हैं ! धम्म पद में कहा है कि जिसके हाथ पैर और वाणी में संयम है ! जिसके उठने बैठने में बोलने में और सभी क्रिया कलापों में में संयम है ! उसी को भिक्छु कहते हैं ! किन्तु जिसमे ये लक्छण नहीं है और जिसकी आकांछायें समाप्त नहीं हुई हैं ! उस मनुष्य की शुद्धि ना उसके दिगंबर रहने से, ना जटाधारण से, ना शरीर में कीचड लपेटने से, ना अनशन से, ना पृथ्वी पर सोने से, ना धूल स्नान , से और ना ही उकड़ू बैठने से हो सकती है ! ईशा मसीह ने भी कहा है कि यह संभव है की सुई के छेद से हाथी निकल जाय किन्तु धनबान का स्वर्ग में प्रवेश असंभव है ! इस्लाम का  अलफातिहा इस्लाम की सार्वभौम प्रार्थना है ! प्रारम्भ करता हूँ अल्लाह के नाम से जो परम कृपालु अतीव करुणाबान है ! हे अल्लाह तू मुझे सीधी राह दिखा !इस तरह इन धर्मों के प्राणी मात्र को धारण करने के जो सार्वभौम नियम है ! उनका अभाव इन धर्मप्रचारकों में  से अधिकांश में दिखाई देता है !इसिलए धर्म छल कपट पाखंड और क्रूर हिंसा का माध्यम और साधन बन गया है !और बहुत से लोग धर्म को आतंक और क्रूर हत्या आदि केरूप में प्रस्तुत  कर रहे हैं !यह धर्म की एक धारा है जो अधर्म के रूप में प्रबाहित  हो रही है ! यह धर्म का पतन है इसको धर्म की दूसरी धारा अध्यात्म से समाप्त किया जा सकता है !धर्म का कोई विकल्प नहीं है !इसलिए संसार को धर्मविहीन नहीं किया जा सकता है !क्योंकि मनुष्य को पशुता और निम्न स्वभाव  से मुक्त कराने की शक्ति धर्म में ही है !और इस श्रेष्ठ जीवन की उपलब्धि धर्म की दूसरी धारा अध्यात्म से होती है !

Friday, 26 June 2015

भीष्म ने युधष्ठिर  के प्रश्न करने पर उनको  जीवन सम्बन्धी  विविध प्रश्नो के उत्तर दिए हैं !युधिस्ठर ने महिलाओं और पुरुषों के सम्बन्ध के अतरिक्त महिलाओं की विद्वत्ता, आध्यात्मिक उपलब्धियों और अध्यत्मिकज्ञान के सम्बन्ध में भी अनेक प्रश्न भीष्म पितामह से पूंछे थे !इस सम्बन्ध में एक प्रसंग महायोगिनी सुलभा और जनक सम्बाद का है ! मिथिलापुरी में प्राचीनकाल में कोई धर्मध्वज  जनक नाम के राजा थे ! उन्हें गृहस्थ आश्रम में रहते हुए ही संन्यास का सम्यग ज्ञान रूप फल प्राप्त हो गया था ! बे इन्द्रियों का निग्रह करके शासन करते थे ! सुलभा नाम की  एक योगिनी योग धर्म के अनुष्ठान द्वारा सिद्धि प्राप्त करके अकेली ही पृथ्वी पर विचरण करती थी  !उसने अनेक त्रिदंडी सन्यासियों से  मोक्ष तत्त्व की जानकारी के विषय में राजा जनक की प्रसंशा सुनी ! ये बातें सत्य है या नहीं ? उसके हृदय में जनक के दर्शन का संकल्प उदय हुआ ! उसने योग शक्ति से अपना पुराना शरीर त्याग कर परम सुन्दर रूप धारण कर लिया और पल भर में ही जनक की राजधानी मिथिला पहुँच गयी ! उसने भिक्छा लेने के बहाने जनक का दर्शन किया ! राजा जनक जीवन मुक्त हैं या नहीं इसका परीक्छण करने के लिए वह अपनी योग शक्ति से राजा की बुद्धि में प्रविष्ट हो गयी ! और योग बल से उनके चित्त को बांध कर अपने बश में कर लिया ! फिर एक ही शरीर में सुलभा और जनक का संवाद हुआ ! जनक ने अपने गुरु पंचशिख का परिचय देते हुए कहा कि मुझे  सांख्य ज्ञान, योग ,विद्या ,तथा राजधर्म  इन तीन प्रकार के मोक्ष धर्म में गंतव्य मार्ग गुरु से प्राप्त हुआ है ! उन्होंने मुझे त्रिविध मोक्ष धर्म श्रवण कराया है  !,पर राज्य त्यागने की आज्ञा नहीं दी है ! इस प्रकार विषय भोगों की आसक्ति से रहित हो मेँ परमपद में स्थित हूँ ! मेरा मोह दूर हो गया है ! में समस्त संसर्गों  का मानसिक रूप से त्याग कर चुका हूँ  !इसलिए मेने गृहस्थ धर्म में रहते हुए ही बुद्धि की निर्द्वन्द्ता प्राप्त कर ली है ! यम नियम आदि का अभ्यास करने ,काम दोष ,परिग्रह, मान, दम्भ आदि का त्याग करके गृहस्थ भी मोक्ष लाभ प्राप्त  कर सकता है ! तथा कामना दोष होने पर सन्यासी भी मुक्ति से बंचित हो सकते हैं ! मेरी तो यह धारणा है की गेरुआ वस्त्र पहनना, मस्तक मुड़ा लेना , तथा कमंडल और त्रिदण्ड धारण करना ये सब उत्कृष्ट संन्यास मार्ग का परिचय देने वाले चिन्ह मात्र है ! इनके द्वारा मोक्ष की सिद्धि नहीं होती है ! ना निर्धनता में मोक्ष है ! और ना सम्पन्नता में मोक्ष है ! सम्पन्नता और निर्धनता दोनों ही अवस्थाओं में ज्ञान से ही जीव को मोक्ष की प्राप्ति होती है ! इस लिए धर्म अर्थ काम तथा राज्य आदि परिग्रह के इन स्थानो में रहते हुए भी मुझे आप बंधन रहित पद पर प्रतिष्ठित समझें ! सुलभा ने कहा मेने सुना था की आपकी बुद्धि मोक्ष धर्म में लगी हुई है ! अतः आपकी मंगल कांक्छणी हो कर आपके इस मोक्ष ज्ञान का मर्म जान ने के लिए मेँ  यहां आई हूँ  !जैसे नगर के सूने घर में सन्यासी एक रात निवास करता है ! इसी तरह आपके इस शरीर में, मेँ आज की रात रहूंगी ! आपने मुझे बड़ा सम्मान दिया ! अपनी वाणी रूप आतिथ्य के द्वारा मेरा  भली भांति सत्कार किया  !अब मै आपके शरीर रूपी सुन्दर गृह में विश्राम कर  कल सुबह यहां से चली जाउंगी ! सुलभा के युक्ति युक्त वचन सुनकर राजा जनक इसके बाद कुछ भी नहीं बोले !संस्कृत में महिला का अर्थ महान होता है प्राचीन भारत में महिलएं मात्र ग्रहणी ही नहीं उच्च कोटि को विदुषी और योगनी भी थी !बे सिर्फ  पुरुषों द्वारा ही  रक्छित नहीं थी स्वमेव रक्छित थी !महिलाओं की महानता के ऐसे अनेक प्रसंग महाभारत में हैं !

Thursday, 25 June 2015

महाबीर त्यागी जो नेहरूजी के मंत्रिमंडल तथा शाश्त्रीजी के मंत्रिमंडल में भी कैबिनेट मंत्री रहे , ने एक पुस्तक लिखी है -''-मेरी कौन सुनेगा  !''उसमे जिस प्रकार से इस घटना का जिक्र किया गया है !उसमे इस घटना का विवरण भिन्न प्रकार से दिया गया है !राजगोपालाचारी भारत के प्रथम गवर्नर जनरल थे !वह अत्यंत उच्चकोटि के विद्द्वान और देशभक्त थे !तथा स्वतंत्र और निर्भीक व्यक्ति थे !उनकी पुत्री लक्ष्मी गांधी जी के पुत्र देवदास गांधी को व्याही थी !इसके बाद भी जब बे तमिलनाडु के मुख्यमंत्री थे उन्होंने गांधीजी के जन्मदिन २ अक्टूबर को सार्वजानिक अवकाश घोसित करने से मना कर दिया था ! इतना ही नहीं उन्होंने १९४२ में गांधीजी के भारत छोडो आंदोलन को भी समयानुकूल न मानकर कांग्रेस से  त्याग पत्र दे दिया था !बे नेहरूजी के बुलाने पर भी प्रथम पंचवर्षीय योजना पर नेहरूजी द्वारा सलाह मांगे जाने पर भी ना तो दिल्ली गए थे ! और ना ही उन्होंने नेहरूजी को  इस काम के लिए चेन्नई आने की जरुरत समझी थी !भारत  का राष्ट्रपति बनने की लालसा ना तो डॉ राजेन्द्र प्रसाद कि  थी और ना ही राजगोपाल चारी की थी !क्योँकि गोपालाचारी भारत के प्रथम गवर्नर जनरल थे !इसलिए यह उचित नहीं था की उनके स्थान पर किसी और को राष्ट्रपति बनाया जाय !जब यह प्रस्ताव नेहरूजी की तरफ से  आया कि राजगोपालाचारी को भारत का प्रथम राष्ट्रपति घोषित किया जाय !  तो महाबीर त्यागी ने इसकाविरोध किया !परिणाम स्वरुप मतदान हुआ जिसमे राजा जी केविरोध में सिर्फ त्यागी जी का ही मत पड़ा !बाद में नेहरूजी को राजेन्द्रप्रसाद ने स्वयं राजा जी के पक्ष में अपना समर्थन लिख कर दे दिया !जब सत्येंद्रनारायण सिन्हा जोकि नेहरू मंत्रिमंडल मेमंत्री और बाद में मध्यप्रदेशके राज्यपाल भी रहे ने यह बात सरदार पटेल को बतायी !तब पटेल ने राजेन्द्र बाबू से पूछा की क्या अपने यह लिख कर दिया है ?राजेंद्र बाबू ने कहा राजा जी मुझसे भी अधिक योग्य व्यक्ति हैं !और हम नहीं चाहते कि देश के लोगों में यह सन्देश जाय की हमलोग पद के भूखे हैं !हाई कमांड की मीटिंग में नेहरूजी ने राजेन्द्र बाबू के समर्थन का हवाला देकर पटेल से राजा जी के नाम की घोसणा के सम्बन्ध में बात की !इस पर पटेल ने कहा की आपके प्रभाव के कारण सदस्य राजा जी के नाम पर सहमति व्यक्त कर रहे हैं ! वैसे सभी की इक्छा राजेंद्र प्रसाद  के पक्छ में है !नेहरूजी एक मिनट मौन रहे और फिर  उन्होंने राजेंद्र प्रसाद के नाम की घोसणा   कर दी !नेहरू जी झूठ नहीं बोलते थे इसका जिक्र मोरारजी भाई और आचार्य विनोवा भावे ने भी किया है ! !नेहरूजी के मंत्रिमंडल में लगभग सभी मंत्री अपने पद से बहुत महान थे !इसी प्रकार राजेंद्रप्रसादे डॉ राधा कृष्णनके लिए तष्ट्रपति पद बहुत छोटा था !राजेन्द्रप्रसाद डॉ राधाकृष्णन की महत्ता इसलिए नहीं थी कि बे राष्ट्रपति थे ! बल्कि राष्ट्रपति के पद का गौरव  इसलिए  था  की बे राष्ट्रपति पद पर आसीन थे !इसीप्रकार नेहरू जी की महानता के सामने प्रधानमंत्री पद बहुत छोटा था !नेहरूजी के जीवनकाल में भी यह प्रशन  पूंछा जाता था  कि नेहरू के बाद कौन ?उनके प्रखर विरोधी भी नेहरू के विकल्प के रूप में उनके जीवन काल में अपने आपको प्रस्तुत नहीं करते थे !

Wednesday, 24 June 2015

भाई बलराम के परमधाम पधारने के पश्चात संपूर्ण गतियों के जानने वाले दिव्यदर्शी भगवान श्रीकृष्ण कुछ सोचते विचारते हुए उस सूने बन में विचरने लगे ! फिर बे श्रेष्ठ तेजबाले भगवान पृथ्वी पर बैठ गए ! सबसे पहले उन्होंने वहां उस समय  गंधारी के श्राप का स्मरण किया ! जूठी खीर को शरीर में लगाने के समय दुर्वासा ने जो बात कही थी उसका भी स्मरण उनको हो आया ! फिर उन महानुभाव श्रीकृष्ण  को अन्धक, वृष्णि, यादवों   और कुरुकुल के विनाश का भी स्मरण हुआ ! तत्पश्चात उन्होंने तीनो लोकों  के कल्याण को ध्यान में रख और दुर्बासा के बचन का पालन करने के लिए अपने परमधाम पधारने का उपयुक्त समय जानकार अपनी संपूर्ण इन्द्रियों का निरोध कर आत्मलीन हो गए ! भगवान श्रीकृष्ण संपूर्ण ज्ञानो के तत्त्वबेत्ता और अजर, अमर और अविनाशी हैं ! तो भी उन्होंने दैहिक लीला का संवरण करने के लिए किसी निमित्त को प्राप्त होने की इक्छाकी ! फिर बे मन वाणी और इन्द्रियों का निरोध करके महायोग का आश्रय ले लेट गए ! उसी समय ज़रा नाम का व्याध मृंगो को मार कर ले जाने की इक्छा से उस स्थान पर आया ! उस समय श्रीकृष्ण महायोग में स्थित थे ! उस व्याध ने श्रीकृष्ण को ही मृग समझकर उनके पैर के तलवे में में बाण मार कर घायल कर दिया ! फिर मृग को पकड़ने के लिए जब वह निकट आया तब योग में स्थित चार भुजा बाले पीताम्बर धारी भगवान श्री कृष्णा पर उसकी दृष्टि पड़ी ! व्याध अपने कोअपराधी जान कर मन ही मन बहुत भयभीत होगया ! उसने भगवान श्री कृष्णा के दोनों पैर पकड़ लिए तब भगवान श्रीकृष्ण  ने उसे आश्वासन और अभयदान देते हुए कहा की उसने कोई अपराध नहीं किया है बल्कि इस कार्य से उसे उत्तम यश कीर्ति की प्राप्ति हुई है !  फिर बे  अपनी कान्ति से पृथ्वी एवं आकाश को व्याप्त करते हुए अपने परमधाम को चले गए !भगवान श्री कृष्णा को मात्र मानव शरीर धारी मानकर उनके जन्म कर्म और मरण का आकलन नहीं करना चाहिए !भगवान ने ७(२४)कहा है बुद्धि हीन मनुष्य मेरे परम अविनाशी और सर्वश्रेष्ठ भाव को न जानते हुए मन इन्द्रियों से समझ में न आने वाले मुझ सच्चिदानंद घन परमात्मा को मनुष्य की तरह शरीर धारण करने वाला मानते हैं ! भगवान व्यक्त भी हैं , और अव्यक्त भी हैं, और अव्यक्त तथा व्यक्त दोनों से पर निर्पेक्छ प्रकाशक भी हैं ! बे अजन्मा और अविनाशी स्वरुप होते हुए भी तथा संपूर्ण प्राणियों का ईश्वर होते हुए भी अपनी प्रकृति को अधीन करके अपनी योगमाया से प्रगट होते हैं ४(६) ! उनके जन्म और कर्म दिव्य हैं ४ (९)  !जब जब धर्म की हानि होती है ! और अधर्म की बृद्धि होती है ! तब तब बे साकार रूप में प्रगट होकर धर्म की स्थापना करते हैं सज्जन पुरुषों की रक्षा करते हैं, और यह कार्य पूर्ण होने पर देह त्याग कर निज धाम को चले जाते हैं !
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Tuesday, 23 June 2015

कर्मफलभोग ------कर्मफल भोग के सम्बन्ध में कई प्रकार के आख्यान महाभारत में दिए गए हैं !उन्ही आख्यानों में  युधिस्ठर और मार्कण्डेय ऋषि का भी कर्मभोग फल के विषय में आख्यान  है !सभी पांडव बड़े कष्ट में अपना बनबास काल काम्यक बन में बिता रहे थे !वहां पर भगवान श्री कृष्णा नारद जी और मार्कंड़य ऋषि पांडवों से भेंट करने पहुंचे !युधिस्ठर ने मार्कंड़य ऋषि से कहा कि हमारे मन में दीघर्काल से यह इक्छा थी कि हमें आपकी सेवा और सत्संग का सुअवसर मिले ! ब्रह्मन हम सब अपने सुख और वैभव से वंचित होकर सब प्रकार के कष्ट जंगल में भोग रहे हैं  !और दुराचारी धृतराष्ट्र पुत्रों को सब प्रकार के सुख ऐशबर्यऔर समृद्धि प्राप्त है ! इसलिए हमारे मन में यह विचार उठता है कि शुभ और अशुभ कर्म करने वाले जो मनुष्य हैं बे अपने कर्मों के फल किस प्रकार भोगते हैं ?कर्मों का फल मनुष्य इसी लोक में इसी शरीर से भोगता है या मृत्यु के बाद परलोक में भोगता है  ?मार्कंड़य ने कहा विवेकी मनुष्य कर्मों का कुछ फल प्रारब्ध बस प्राप्त करते हैं ! और कुछ कर्मो का फल उन्हें उनके उद्द्योग और पुरुषार्थ से प्राप्त होता है ! कुछ कर्मो का फल अकस्मात् प्राप्त होता है ! कोई मनुष्य संसार में ही परम सुख पाता है परलोक में नहीं प्राप्त करता है ! किसी को परलोक में ही परम कल्याण की पाप्ति होती है ! संसार में नहीं प्राप्त होती है ! किसी को संसार में और परलोक में भी दोनों स्थानो में भी परम सुख की प्राप्ति होती है ! और किन्ही लोगों को ना तो परलोक में उत्तमसुख मिलता है और ना संसार में भी सुख कि प्राप्ति होती है ! जिनके पास बहुत संपत्ति समृद्धि पद प्रतिष्ठा आदि होती है ! बे अपने शरीर को ही बैभव  कीर्ति और प्रतिष्ठा प्रदान कराने में तथा प्रकार प्रकार के इन्द्रियजन्य भोगों की तृप्ति में ही जीवन पर्यन्त लगे रहते हैं ! इसलिए ऐसे मनुष्यों को सिर्फ संसार में ही सुख मिलता है ! परलोक में उनको सुख की पप्ति नहीं होती है ! जो लोग संसार में कामनाओ को त्याग कर योग साधना करते हैं ! तपस्या में संलग्न रहते हैं ! और निष्काम भाव से स्वाध्याय करते हैं ! तथा प्राणियों की हिंसा से दूर रहकर इन्द्रियों को संयम में रखते हुए अपना जीवन जीते हैं ! उन्हें संसार में सुख की प्राप्ति नहीं होती है ! बे परलोक में ही परमकल्याण के भागी होते हैं ! जो लोग कर्त्तव्य बुद्धि से स्वधर्म का पालन करते हैं  !और न्याय से ही धन संपत्ति का उपार्जन करते हैं ! और यथा समय विवाह बंधन में बंधकर याग यज्ञ ईश्वर भक्ति तथा सत्कर्मो के आचरण करते हैं ! उन्हें संसार में भी परम सुख की प्राप्ति होती है  ! और परलोक में भी उन्हें उत्तम सुख प्राप्त होते हैं ! जो मूर्ख मनुष्य ना ज्ञान के लिए ना तप के लिए और ना दान के लिए ही प्रयत्न करते हैं ! और ना धर्म पूर्वक गृहस्थ धर्म का ही पालन करते हैं ! बे ना तो सुख पाते हैं और ना ही उत्तम धर्म युक्त भोग ही भोगते हैं ! उनके लिए ना तो संसार में सुख है और ना परलोक में ही सुख है ! युधिस्ठर तुम सभी पांडव पराक्रमी और धैर्यं बान  हो ! तुम में अलौकिक ओज भरा है ! तुम सभी शूरवीर तथा तपस्या और इन्द्रिय संयम और उत्तम आचार व्योहार में सदा तत्पर रहने वाले हो ! इन सत्कर्मों के फलस्वरूप तुम इस लोक में भी कुछ समय पश्चात राजलक्ष्मी को प्राप्त करोगे और मृत्यु के बाद तुम सभी को परलोक में भी परम गति की प्राप्ति होगी ! इसलिए तुम अपने मन में किसीभी प्रकार की शंका को स्थान ना दो ! तुम्हारा वर्तमान कष्ट तुम्हारे भविष्य के सुख का सूचक है !कभी कभी अनीति और अधर्म से भी मनुष्यों को ऐशबर्य धन संपत्ति बैभव की प्राप्ति होती है ! किन्तु वह स्थायी नहीं होती है !और अंत में जड़ मूल से नष्ट हो जाती है !यही परिणाम अधर्मी धृतराष्ट्र पुत्रों का अंत में होगा ! और तुमको स्थिर राजलक्ष्मी की प्राप्ति होगी और तुम्हारी कीर्ति  इसलोक और परलोक दोनों स्थान में स्थिर और स्थायी रहेगी !महाभारत युद्ध के बाद यही परिणाम आया !इसलिए कल्याणकामी मनुष्यों को अधर्म और अनीति से प्राप्त सम्पती वैभव आदि की प्राप्ति से बचना   चाहिए और सदा स्वधर्मनिष्ठा का पालन करते हुए सत्कर्मो का अनुष्ठान  करते रहना चाहिए !

Monday, 22 June 2015

सभी मनुष्यों के कर्मो का निश्चय  बुद्धि करती है !इसिलए बुद्धि ठीक रहे ! इसकेलिए कछ नियमों का निर्माण हुआ ! जिनमे कुछ नियम कानून कहलाये जिनके पालन  करवाने के लिए राज्य व्यबस्था का जन्म हुआ! और कुछ नियमो का पालन स्वेक्छिक था उनको पालन कराने के लिए जिस व्यबस्था का जन्म हुआ उसको धर्म नाम दे दिया गया ! उन्ही नियमों को धर्म नाम दे दिया  इन्ही दो व्यबस्थाओं के द्वारा प्राणिमात्र की व्यबस्था आज भी हो रही है ! !सभी मनुष्यों की कर्म करने की रूचि और प्रवृत्ति समान नहीं होती है !किन्तु कर्म करने के साधन हाथ पैर दिल दिमाग और कार्य करने की सामग्री समान होती है ! उस सामग्री का कुछ लोग उतना ही संग्रह और उपयोग करते है जितनी आवश्यकता होती है !और  उस पर भी बे अपना  अधिकार नहीं मानते है !!जो प्राणिमात्र के  जीवन धारण करने के नैसर्गिक संसाधन जल जमीन और जंगल आदि है !उनपर बे प्राणिमात्र का अधिकार मानते हैं !!इन सबको बे सब के लिए और सबकी मानते हैं !प्राणियों के उपभोग और उपयोग आने वाले इन पदार्थों का जन्मदाता कुछ लोग ईश्वर को कुछ लोग प्रकृति को और कुछ लोग इसे अपने आप उत्पन्न होने वाली मानते हैं !जब तक इन पदार्थों को सिर्फ उपयोग और उपभोग बस्तु के रूप में ग्रहण करने की ही बृत्ति रहती है !तब तक इनके उपयोग के लिए किसी भी प्रकार की व्यबस्था के निर्माण का आवश्यकता नहीं होती है ! किन्तु जब कुछ लोगों के दिल दिमाग में इन पदार्थों पर कब्ज़ा करने की नियत  पैदा होती है !तब उसको नियंत्रित करने के लिए उनका दिलदिमाग शुद्ध रहे इसको समझाने के लिए ऐसी विधियां नियम बनाये जाते हैं जिन को समझ कर धारण कर बे प्राणिमात्र के उपयोग में आने वाले इन नैसर्गिक संसाधनो को सबके उपयोग में आने वाला मान कर  पर सिर्फ अपने ही उपभोग के लिए ही  इनका इस्तेमाल न करें !लोगो की बुद्धि में निकृष्ट स्वार्थ के स्थान पर शुद्ध सभी प्राणियों के शरीर भिन्न भिन्न है और आत्मा एक ही है इसका संचरण हो इसके लिए गांधीजी ने गीता और उपनिषदों के ज्ञान को माध्यम में बनाया और स्वयं भी पूर्ण निष्ठां से इसका पालन किया और प्रार्थना को ही अपनी आत्मशुद्धि और आत्मिक शक्ति का साधन माना और मृत्यु पर्यन्त कभी इस नियम का उल्लंघन नहीं किया !बे राम नाम को सभी आधियों व्याधियों के निवारण की अचूक औषधि   मानते रहे  !उन्होंने गीता के स्थितप्रज्ञ दर्शन के १८ श्लोकों को दैनिक प्रार्थना में शामिल किया !विनोबाजी कहते थे की अगर मेरे जीवन से ईश्वर को निकाल दो तो बाबा मिटटी का सिर्फ  लौन्दा है !उन्होंने कहा की बाबा ने जी सर्वोदय का काम हाथ में लिया है वह भी ईश्वर की प्रेरणा और आज्ञा से लिया है !और बाबा जो सर्वोदय  का कार्य कर रहा ऊह भी गीता माता की ही सेवा है !सभी लोग गांधी विनोबा की यह बात माने यह जरुरी  नहीं है !किन्तु जो अपने आप को गांधी बादी मानते है और गांधी आश्रमों में रहते हैं या सर्वोदय में हैं उनकेलिएयह बात मानना  जरुरी है !गांधी और विनोबा जिस गीता को अपनी माता कहते थे !और ईश्वर को अपना एक मात्र रक्षक मानते थे उस गीता और ईश्वर की उपेक्छा करने वाले और उसके असित्तवा पर शंका प्रकट करने वालों को ज्ञान के अनेक छेत्र खुले हुए हैं किन्तु गांधी मार्ग ऐसे सभी महान भावों के लिए उपयोगी नहीं है !
भौतिक वैज्ञानिकों का यह कथन कि मानव श्रष्टि  का विनाश निकट भविष्य में होने वाला है ! वैदिक धर्म की श्रष्टि संघार की तथ्यपूर्ण प्रस्तुति करण के पूर्णतया विपरीत है !गीता में कहा गया है कि श्रष्टि के निर्माता प्रजापति का एकदिन एक हजार चतुर्युगी का होता है !जो काल गड़ना के अनुसार ४२५ करोड़  साल का होता है !ब्रह्मा का एकदिन एक कल्प कहलाता है !और एक कल्प में १४ मन्वंतर होते है !इस समय ७ वां मन्वन्तर चल रहा है !इसका अर्थ हुआ की अभी ब्रह्मा का आधादिन ही समाप्त हुआ है !श्रष्टि की समाप्ति के लिए वैदिक काल गड़ना के अनुसार अभी २१२ करोड़ से भी अधिक का समय बाकी है !यह काल गड़ना सही सिद्ध होगी और वैज्ञानिको का श्रष्टि के विनाश का अनुमान गलत सिद्ध होगा !

Sunday, 21 June 2015

योग का विरोध नहीं किया जाना चाहिए !किन्तु जिस तरह से राजनैतिक  आर्थिक आदि लाभ प्राप्ति की दृष्टि से योग का उपयोग किया जा रहा है उसका अंधा और विवेकहीन समर्थन भी नहीं करना चाहिए !भारत गुलाम मानसिकता से ग्रस्त स्वतंत्र देश है !इसीलिए यहाँ सत्ता पिपासु लोग सत्य का ना तो अनुशीलन  करते हैं ! और ना ही निर्भयता से सत्य का समर्थन करते हैं !ऐसे लोगों के जीवन के सभी कर्म सिर्फ भोग वैभव सत्ता महत्ता आदि की प्राप्ति के साधन बन जाते हैं !इसीलिए विवेकवान साहसी सत्यनिष्ठ लोगों को इस विश्व कल्याण कारी योग विज्ञान को भोगी स्वार्थी अवसर वादी और योग का व्योपार करने वाले योग गुरुओं से मुक्त कराना  होगा !योग की महत्ता विश्व स्तर पर २१ जून के अंतर राष्ट्रिय योग दिवस ने सिद्ध कर दी है !अब हमें योग के विशुद्ध चित्त बृत्ति निरोध को विश्व के सामने प्रस्तुत करने का काम करना है !भगवान श्री कृष्णा ने ६(१,२)में कहा है कि कर्मफल का आश्रय ना लेकर जो कर्तव्य कर्म करता है वही सन्यासी और योगी है ! जिसने कर्मफल की इक्छा और आश्रय  का त्याग कर दिया है वही सच्चा सन्यासी या योगी है ! कर्म फल की आसक्ति का त्याग करने से ही परमशान्ति की प्राप्ति होती है ! जिसको सन्यास कहते हैं वही योग  है  ! जब तक मनुष्य के ह्रदय में संसार की सत्ता महत्ता और भौतिक  भोगों  की प्राप्ति की इक्छा और आकांछा है, और जब तक वह इन कामना प्राप्ति के संकल्पों का त्याग नहीं कर देता तब तक वह न तो भक्ति योगी ,ज्ञान योगी ,हठयोगी ध्यान योगी कर्मयोगी आदि किसी भी प्रकार का योगि८ नहीं है ! बल्कि भौतिक सुखों का भोगी है !योग इन भौतिक सुखो के  भोगिओं के मध्य समर्थन और विरोध का मुद्दा बन गया है !ये बो सत्ता महत्ता और भौतिक सुखों की प्राप्ति के लिए लालायित लोग हैं !जिनके कारण देश की अस्मिता, ईमानदारी त्याग और तपस्या और कर्तव्यनिष्ठा आज तक स्वार्थ के घने अन्धकार में रो रही है !इस स्वार्थ के घने अन्धकार से देश को मुक्ति योग दिला सकता है  !इन स्वार्थनिष्ठ व्यक्तियों के जीवन में तो त्याग की गंध भी नहीं मिलेगी ! सिबा भोग की बदबू   के अतिरिक्त और कुछ भी दिन के उजाले में भी १००० पावर के बल्ब की रोशनी में भी दिखाई नहीं देगी  !अगर हम योग के महान कल्याण कारी स्वरूपको देखना, जानना  और समझना चाहते हैं !तो हमें बुद्ध ,महाबीर ईशा मुहम्मद नानक कबीर सिखधर्म के बहुत से गुरुओं अरविंदो महर्शि रमण दयानंद तिलक  महात्मा गांधी आचार्य विनोबा भावे  समर्थ रामदास आदि महान आत्मनिष्ठ कर्मयोगिओं और महाराणा प्रताप शिवाजी आदि राष्ट्र के लिए जीवन उत्सर्ग करने वाले योद्धाओं  और राजस्थान की भूमि में हजारों अपने शील कि रक्षा के लिए जीवन कि आहुति देने बाली महान महिलाओं और देश सेवा के लिए समर्पित  सुभाष टैगोर आदि आत्मनिष्ठ लोगों के जिए गए जीवनो को अपने आचरणों में उतारने का प्रयत्न करना होगा !और वर्तमान भारत में भी ईमानदारी से देश हित में आत्मनिष्ठा से कर्तव्य पालन करने बाले सभी लोगों को जानना और समझना होगा !किसी भी व्यक्ति राजनैतिक दल या नेता या गेरुवावस्त्र धारी या दाढ़ी मुसलमानी टोपी लगाए मुला मौलवी के शब्द जाल से मुक्त होकर उसके कथनी पर ध्यान ना देकर उनकी करनी पर ध्यान देना होगा !सत्य ही हमारे आकलन की कसौटी होनी चाहिए !राजनीति हमारे जीवन की सभी गतिविधियों को नियंत्रित और संचालित कराती है !इसीलिए जिन राजनेताओं में कर्त्तव्य निष्ठा राष्ट्रभक्ति और राष्ट्र प्रेम के दर्शन होते हों उनके इन गुणों की भी हमें मुक्त कंठ से बिना भेद भाव के प्रसंशा  करनी चाहिए !भौतिक भोगों के द्वारा सुख  प्राप्ति की अवांछनीय आकांछाओ से मुक्ति ही योग है !और योग को इसी रूप में स्थापित किया जाना चाहिए !
महर्षि पतंजलि के जन्मस्थान और जन्म तिथि के बारे में निश्चित तौर पर कुछ नहीं कहा जा सकता है !और यह सिर्फ महर्षि पतंजलि के सन्दर्भ में ही नहीं अन्य बहुत से वैदिक धर्मग्रंथो  और उनमे बर्णित पौराणिक घटनाओ के सम्बन्ध में भी काल और समय के बारे में भिन्न भिन्न मत और विचार हैं !किन्तु इतना निश्चित तौर पर कहा जा सकता है की योग विद्या भारत में महर्षि पतंजलि के जन्म के बहुत समय पूर्व जन्म ले चुकी थी !और भारत में योग सिद्ध बहुत से महात्मा सतयुग से लेकर द्वापर तक दिखाई देते है !योग के जन्मदाता हिरण्यगर्भ माने जाते हैं !सतयुग में महर्षि अगस्त महायोगी थे !त्रेता में विश्वामित्र आदि ऋषि योग सिद्ध ऋषि थे !द्वापर में महर्षि व्यास सुखदेव असित देवल आदि बहुत से योगिओं की चर्चा है !गीता में भी योग के रूप में भक्तियोग कर्मयोग ज्ञानयोग ध्यान योग समता योग आदि का विस्तृत ज्ञान निरूपित है !कहते हैं हठ योग के जन्मदाता भगवान शंकर है !और ये सभी आचार्य महर्षि पतंजलि से पहले के हैं !अष्टांग योग का जन्मदाता पतंजलि को कहा जाता है !इसीलिए उनको फादर ऑफ़ योग कहा जाता है !
समय का उलटफेर बहुत ही आश्चर्य जनक होता है ! पश्चिमी देशों में यह फादर डे मदर डे  मनाने का सिलसिला शुरू हुआ !अब वहां से चलकर यह भारत में भी आ पहुंचा है !और यहाँ भी मनाया जाने लगा है !तथा यहाँ का मीडिया भी इसकी प्रसंसा  में बिभिन्न  प्रकार के लेख और आलेख प्रकाशित करने लगा है !जिस से प्रभावित होकर अब आम आदमी भी अपने पिता के प्रति आदरसूचक शब्दों से संस्मरण सुनाने लगा है !पश्चिमी संस्कृति में ये फादर मदर डे इसीलिए मनाये जाते हैं क्योँकि वहां संतान का जन्म बिना विवाह के भी लज्जास्पद नहीं माना जाता है !विवाह भी वहां प्रायः टूटते रहते हैं ! इसीलिए संतानो की माता कोई और होती है और पिता कोई और होते हैं !इसीलिए बच्चे अपने माता पिता को आदर इन फादर मदर डे मनाकर देते हैं !किन्तु भारत में कम ही ऐसा होता है की संतान की माता कोई और हो और पिता कोई और हो !यह पश्चिमी और भारतीय संस्कृति में मूल भेद है !अब भारत में भी तलाक के मुकदम्मे बड़ी मात्रा में दायर होने लगे हैं !भविष्य में यहाँ भी यह स्थिति बन सकती है की संतान के माता पिता अलग अलग हों !किन्तु ऐसी स्थिति अगर बनेगी तो यह भारतीय संस्कृति का नाश करने बाली होगी !और पाश्चात्य संस्कृति में शादियां टूटने के कारण जो अवसाद और अपराध करने की प्रवृत्ति युवाओ में   बढ़ रही है ! भारत के  युवा भी इस रोग से ग्रस्त हो जाएंगे !यद्द्पि भारत में भी अब  माता पिता की उपेक्छा और अपमान की घटनाएं बड़ी तेजी से बढ़ रही हैं  !और ओल्ड एज  होम खोले जा रहे है तथा माता पिता की उपेक्छा करने वाली संतान के प्रति सजा का विधान भी कानून में किया गया है !इसीलिए देशबासियों को तथा मीडिया को भी भारत की उस प्राचीन संस्कृति को युवाओं के सामने रखना चाहिए जिसमे कहा गया है जिन पुत्र पुत्रियों के द्वारा पिता माता अग्नि गुरु और आत्मा इन पांचो आदर  किया जाता है वह संसार में भीसुख पाते है ! और मृत्यु के बाद स्वर्गलोक में जाते हैं !भारतीय संस्कृति में माता पिता को जीवित भगवान माना गया है !इसीलिए भारत में मीडिया को पाश्चात्य और भारतीय संस्कृति का अंतर बता कर  फादर डे की व्यर्थता बताते हुए भारतीय संस्कृति की पिता में भगवान के तरह पूज्य भाव की स्थापना का प्रयत्न करना चाहिए ! और विवाह बंधन अटूट रहें जिस से पृथक पृथक फादर डे मदर डे मनाने की आवश्यकता न पड़े इस तथ्य को भी समाज के सामने पूरी शक्ति से रखना चाहिए  !

Saturday, 20 June 2015

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर आज देश में बहुत उत्साह के साथ योग कार्यक्रम आयोजित किये जा रहे हैं ! योग के  कार्यक्रम सरकारी संरक्छण में चलरहे हैं !इसीलिए इन योग कार्यक्रमों का विशेष उत्साह केंद्र में और उन राज्यों में विशेष तौर पर दिखाई दे रहा है !जहां भाजपा की सरकारें हैं !और इन कार्यक्रमों में जो योगिक क्रियाएँ करायी जाए रही है !बे क्रियाएँ रामदेव द्वारा प्रचारित योग की क्रियाएँ हैं !इन योग कार्यक्रमों में विशेष तौर पर गायत्री परिवार श्री श्री रविशंकर रामदेव और भाजपा के लोग विशेष तौर पर सक्रिय हैं ! योग की मूल अवधारणा को जीवन में उतारने के लिए और योग का वास्तविक लाभ प्राप्त करने के लिए ये मात्र योग की शारीरिक आसान प्राणायाम आदि की क्रियाएँ ही पर्याप्त नहीं हैं !योग क्रियाएँ करने वाले साधक को कुछ आतंरिक परिवर्तन और पवित्र स्थान और शरीर को विशेष स्थिति में रखने का अभ्यास भी करना पड़ता है गीता में ६(१० से १५ )में इस पूर्व योग की विधि बतायी गयी है फिर श्लोक १६, १७ में नियमित जीवन जीने की युक्ति बतायी गयी है इस तरह योग के दो भाग है आसन प्राणायाम आदि पूर्व योग और नियमित जीवन जीना उत्तर योग और यह है जीवन जीने के लिए संपूर्ण योग इसी से दुखों का नाश होता है ! और जीवन में स्वस्थ  सात्विक विचारों का निर्माण होता है ! यह दुःख का नाश करने वाला योग नियमित जीवन जीने बालों को ही सधता है और प्राप्त होता है ! नियमित जीबन नहीं रहा तो योग की प्राप्ति नहीं होगी !  यह योग उस व्यक्ति को सिद्ध होता है जो ईमानदारी से कमाए हुए परिमित भोजन को अस्वाद बृत्ति से ग्रहण करता है ! नियत समय पर भोजन करता है जो भोजन हम खाएं वह अन्याय अधर्म से प्राप्त किया हुआ ना हो !

Friday, 19 June 2015

आसान प्राणायाम आदि योग नहीं है !योग की वास्तविक उपलब्धि कराने के लिए बहिरंग योग है !!लेकिन लोग इसी को योग समझ बैठे हैं !और इसी का प्रचार प्रशक्छिण तथा कथित योग गुरुओं और योग केन्द्रों द्वारा दिया जा रहा है !योग परमशक्ति से जोड़ने का साधन है !जिसके लिए चित्त बृत्ति का निरोध आवश्यक है ! इसीलिए महर्षि पातंजलि ने चित्तबृत्ति निरोध को योग कहा है ! और योग का परिणाम परमात्मा में चित्त की स्थिरता बताया है !इसीलिए गीता में  पातंजल योग दर्शन में योग का जो परिणाम बताया गया है उसी को योग कहा है ! गीता चित्तबृत्तियों से सर्वथा सम्बन्ध विच्छेद पूर्वक स्वतः सिद्ध सम स्वरुप परमात्मा  में स्वाभाविक स्थिति को योग कहती है  !आत्मा का परमात्मा  के साथ योग नित्य है जिसका कभी भी किसी भी अवस्था में किसी भी परिस्थिति में वियोग नहीं होता है ! शरीर संसार के साथ माने हुए संयोग का वियोग होते ही उस नित्य योग का अनुभव हो जाता है जिस से सम्पूर्ण सांसारिक दुखों की निबृत्ति हो जाती है ! गीता ने दुखों के साथ संयोग के वियोग को ही योग कहा है ६(२३) !और योग की इस स्थति को प्राप्त करने के लिए गीता में निष्काम कर्म योग को जीवन में धारण करने की शिक्छा दी है !आज जो विश्व और भारत में योग केंद्र चल रहे हैं वे ऋषि परम्परा के योग केंद्र नहीं है !भौतिक भोग सामग्री से युक्त भोग केंद्र है !और उन केन्द्रों में भौतिक सुख सुविधा उपार्जन और अतिशय काम भोग और भोजन आदि में अनियमतता बरतने वाले पैंसा बालों का बड़ी बड़ी लाखों रूपया की फीस लेकर उपचार बहिरंग योग की विधि आसान प्राणायाम आदि से किया जाता है !जो योग आश्रम चलाने बाले योग गुरु हैं बे स्वयं भी भौतिक सुखों की प्राप्ति में आकंठ डूबे हुए लोग हैं !और योग शिक्छण के नाम से अकूत धन संपत्ति कमा रहे हैं !कभी कभी समाचार पत्रों में इन योग गुरुओं के बिरुद्ध बलात्कार धोखा धडी के मुकदद्मे भी दर्ज होते रहते हैं !इस सबके बाद भी भारत की इस आदि योग परम्परा का शिक्छण दिया जाना  लोकहित में बहुत  आवश्यक है !इसका जितना अधिक प्रचार और प्रसार होगा उतना ही ज्यादा लोक कल्याण होगा !अतिशय भोग बाद से ग्रस्त और सत्ता संपत्ति बटोरने के कारण असाध्य बीमारियों से युक्त धनपतियों राजनेताओं अधिकारियों के लिए रोग मुक्ति के साथ यह चित्तबृत्ति सुधार का भी माध्यम बनेगा और धीरे धीरे यह अपने वास्तविक स्वरुप में भी स्थापित हो जाएगा !
कांग्रेस का संगठन कांग्रेस के लम्बे समय तक सत्ता में रहने के  कारण जी हजूरिओं की जमात बनकर रह गया है !और इसका लोकतान्त्रिक ढांचा लगभग नष्ट हो गया है !देश को कांग्रेस की जरुरत है इसीलिए कांग्रेस को अपना संगठन का ढांचा चुस्त दुरश्त और मजबूत करना चाहिए !कांग्रेस संगठन का निर्माण लोकतान्त्रिक पद्धति से ग्राम से लेकर केंद्र तक होना चाहिए !चुने हुए संगठन के पदाधिकारिओं के द्वारा ही कांग्रेस के विधान सभा लोकसभा के उम्मीड़बार घोषित किये जाने चाहिए !दलबदलुओं को कम से कम ५ साल टिकट नहीं देना चाहिए !किसी भी सूरत में ग्राम समिति से लेकर अखिल भारतीय स्तर तक किसी भी पदाधिकारी को मनोनीत नहीं किया जाना चाहिए !कांग्रेस को कार्यकर्ता प्रधान संगठन बनाया जाना चाहिए !आज की कांग्रेस की रीढ़ नहीं है !किन्तु शीर्ष के रूप में सोनिया गांधी जी और राहुल गांधी जी मौजूद हैं !इन दोनों नेताओं के अलावा कांग्रेस में ऐसा कोई नेता नहीं है !जिसको सारे देश का समर्थन प्राप्त हो !इसीलिए राहुल गांधी को कांग्रेस को सही दिशा देने के लिए संगठन को कार्यकर्त्ता प्रधान बनाना चाहिए !इसके अलावा कांग्रेस को देश की विरासत वेद उपनिषद गीता आदि को भी यथोचित स्थान देना चाहिए !तथा जिन शूरबीरों ने देश को मुग़लों से देश की मुक्ति के लिए अपने जीवन को होम दिया उन राणाप्रताप शिवाजी आदि को गौरव पूर्ण स्थान प्रदान करना चाहिए !धर्मनिरपेक्छ्ता का अर्थ भारत की आदि संस्कृति और धर्म का नाश करना नहीं है !राहुल गांधी जी में त्याग और कर्मठता तथा गहरी देश भक्ति मौजूद है !वह देश में व्याप्त परिवार बाद और जातिबाद से सर्वथा मुक्त है !धन संग्रह और भोग प्रधान जीवन से भी दूर हैं !और सत्ता लोलुप तो बिक्कुल ही नहीं है !ऐसे राहुल गांधी के जन्म दिन पर मेरी हार्दिक शुभ कामनाएं !जिस कांग्रेस  का ३० साल से भी ज्यादा नेतृत्वव गांधी जी ने किया और जिसके संबिधान का निर्माण भी गांधी जी ने किया था ! और जिस कांग्रेस ने देश को आजादी दिलाई !तथा जिसकी बिरासत हजारों महा पुरुषों के त्याग और तपस्या की है !उस कांग्रेस का नेतृत्त्व सबल स्वक्छ त्यागी तपस्वी व्यक्तियों के हाथों में हो !ऐसे कांग्रेस के स्वरुप का निर्माण राहुल गांधी के द्वारा हो ऐसी शक्ति सामर्थ्य ईश्वर राहुल गांधी को प्रदान करें !

Thursday, 18 June 2015

जब तक मनुष्यों के दिल दिमाग और दिनचर्या  में भौतिक सुखों की प्राप्ति की इक्छा आकांछा महत्ता  प्रभावी  रहेगी  तब तक बे वास्तविक योगी नहीं हो सकते हैं !फिर भी भारत भूमि में जन्म लेने बाली विश्व कल्याण कारी योग  विद्या को सामान्य मनुष्यों तक पहुंचाने का प्रयत्न किया जा रहा है ! यह अत्यंत प्रसंसनीय कार्य है !यह सरकार द्वारा किया जा रहा है इसीलिए इसमें राजनैतिक लाभ लेने का प्रयत्न भी छिपा हुआ है ! !भौतिक सुखों की प्राप्ति की आकच्छओं ने मनुष्य को दानव बना दिया है !बाजार नकली मिलाबटी खाद्द्य पदार्थों से भरे पड़े हैं !डॉक्टर वकील अध्यापक अधिकारी कर्मचारी सभी भौतिक सुखों की प्राप्ति के लिए सामाजिक सेवा का स्वरुप समाप्त करने में लगे हुए हैं !धर्म से भगवान गायब हो गए हैं !और भगवान  के स्थान पर गुरु कथावाचक साधु तथाकथित सन्यासी और मठा धीस  ही भगवान बनकर अपनी पूजा अर्चा करा रहे हैं!  ! कुछ लोग  योग का पुरजोर विरोध भी  कर रहे हैं !इसमें बो राजनेता भी शामिल हैं जो स्वयं योग को करते हैं और योग की प्रसंसा भी करते हैं किन्तु योग को सामान्य जनता तक नहीं पहुँचने देना चाहते हैं !!अवांछनीय कामनाओं की तृप्ति के लिए  भोग प्राप्ति का यह दृश्य दिल्ली से देहात तक दिखाई देता है !इस भोग प्रधान जीवन ने लोगों की जिंदगी से सुख चैन कर्तव्य निष्ठा ईमानदारी देशभक्ति आदि के कीमती जीवन में उतारने  वाली जीवन चर्या के मूल्य सिधान्तो को ही  छीन लिया है !सामाजिक और पारिवारिक जीवन नर्क बन गया है  !भाई को भाई के साथ धोखा देने  और बेईमानी करने में कोई हिचक नहीं होती है !परिवार बिखर गए हैं !और परिवारों में बेईमानी और धोखा धडी का तांडव दिखाई देता है !भारत की यह पवित्र भूमि अपने स्वाभाविक करुणा स्नेह अहिंसा तप त्याग और निष्काम सेवा के मार्ग से बिचलित होकर स्वार्थ के घटाटोप अन्धकार से ग्रस्त होकर दुःख और कष्ट भोग रही है !मनुष्य के दिल दिमाग और जीवन चर्या से भौतिक सुख प्राप्ति की अवांछनीय कामवासनाओं को निकालकर दिल दिमाग और जीवन चर्या को शुद्ध पवित्र काने का काम योग साधना करेगी !यह योग साधना स्वस्थ  शरीर में स्वस्थ दिल दिमाग का निर्माण करेगी !
झाँसी की रानी की पुण्यतिथि युवाओं को कुछ कर्त्तव्य करने की प्रेरणा भी प्रदान कराती है !सिर्फ खूब लड़ी मर्दानी थी वह झांसी वाली रानी थी !और उसके त्याग और बलिदान को हम शत शत नमन करते  हैं !रानी की प्रसंसा में दिए गए ये वक्तव्य और गाये गए वीरता के गीत रानी को प्रसन्न नहीं कर सकते हैं !और न ही उनके त्याग और शौर्य प्रधान जीवन के बलिदान को कोई सार्थकता प्रदान कर सकते हैं !पुण्यतिथि पर हमें कुछ सार्थक निर्णय लेने होंगे ---(१)सिर्फ अखबार में फोटो छपवाने में बक्त बर्बाद करने के बजाय कुछ रचनात्मक काम बिना किसी प्रचार के उद्देश्य से प्रारम्भ करो की अखबार खुद तुम्हारी तलाश करने लगें !अखबार  उनको ज्यादा महत्त्व देते हैं जिनसे अखबार चलता है ! और बिकता है !अभी क्रिकेट के कार्यक्रम में कुछ फ़िल्मी लड़के लड़कियां आये थे  जो छोटी मोटी फिल्मों में दिखाई देते हैं !और लड़कियां जो अंगप्रदर्शन और अभिनय करती  हैं !सभी अखबारों ने उनके इंटरव्यू प्रकाशित किये और उनके फोटो प्रमुखता से छपे क्योंकि उनसे ये अखबार चलते हैं !और कुछ लोग अपने समाचार और फोटो अखवारों में छपवाने के लिए अपना कीमतीसमय बर्बाद करते हैं !फिर भी अखवार ऐसे लोगों को कोई ख़ास महत्त्व नहीं देते हैं !इसीलिए जिले में ऐसे बहुत से जो  जनविरोधी कार्य हो रहे हैं उनका  अगर युवा विरोध करें तो बे खुद समाचार बनेगे और अखबार भी  उनको तलाशेंगे और छापेंगे भी !(२)किसी भी राजनैतिक दल या राजनेता का अनुचित समर्थन ना करें और ना ही अपना समय राजनेताओं की चमचागीरी में बर्बाद करें !क्योंकि राजनेताओं का प्रभाव कपूर की तरह होता है जो देखते देखते ही उड़ जाता है !ये नेता तो उस सूखे  पत्ते की तरह हैं जो सत्ता की हबा से कुर्सी  पा जाते हैं और कुर्सी के जाते ही हबा हो जाते हैं !इसीलिए अगर रानी से प्रेरणा लेना हो तो ऐसे  रचनात्मक काम करो की रानी की तरह लोगों की याद में बस जाओ और समाज में गुलाब की सुगंध की तरह महकते रहो !और समाज को भी  महकाते रहो
करिया मुंडा की तरह राजनीति करने बालों के सम्बन्ध में मीडिया को प्रमिखता से समाचार दिखाना और प्रकाशित करना चाहिए ! ताकि देश में और विशेष तौर पर कर्तव्य निष्ठ अधिकारियों अध्यापकों और युवाओं में यह सन्देश पहुंचे की आज भी देश में सच्चे और ईमानदार राजनेता मौजूद हैं !आज देश में राजनीति और प्रशासन में ७५ %बो लोग है जो सामान्य अत्यंत सामान्य दलित और पिछड़े घरों से आये हैं !किन्तु आज जितना वैभव और विलास मय जीवन ये जी रहे हैं !ऐसा विलासमय जीवन तो राजाओं और महाराजाओं तथा धनपतियों का भी नहीं था !इन नेताओं के विवाह संस्कारों में लाखों लोग स्वादिष्ट भोजन ग्रहण  करते हैं !करोड़ों रूपए साज सज्जा में खर्च किये जाते हैं !हवाई जहाज और हेलीकॉप्टर से बाराती और बर तथा बधू आते हैं !इंदिरा गांधी की भी शादी हुई थी !जिसमे मात्र कुछ लोग ही आमंत्रित थे !और विवाह का खर्चा भी नाम मात्र का था !जबकि बे भी देश के प्रधान मंत्री की पुत्री  थी और देश के प्रख्यात वकील मोतीलाल की नातिन थी !जिनका जीवन अपने समय के सभी रहीसों से ज्यादा वैभव युक्त था !जिस आनंद भवन में जवाहर लाल  नेहरू का जन्म हुआ था वैसा भवन आज भी मुश्किल से दूसरों के पास होगा !इसी आनंद भवन को इंदिराजी ने राष्ट्र को दान कर दिया था !यद्द्पि उनके पास रहने के लिए उनका निजी मकान नहीं था !गांधी जी के ४ पुत्रों के विवाह में किसी को भी पक्का भोजन नहीं परोसा गया था !और भी इस तरह के राजनेताओं के त्याग पूर्ण उदाहरण देश में हैं जिन्हे मीडिया प्रकाशित  नहीं करता है !अमिताभ बच्चन सलमान माधुरी  धोनी  आदि लोगों के समाचार या क़त्ल डकैती और नेताओं के समाचारों से ही समाचार पत्र भरे रहते हैं !जिस से देश का युवा बर्ग इन्ही को अपना आदर्श और प्रेरणा स्रोत मान कर इनके जीवन चरया की नक़ल करता है !जिस से देश में त्याग तपस्या ईमानदारी हबा में उड़ती दिखाई देती है !मीडिया को चरित्रवान राजनेताओं देशभक्त  कर्तव्यनिष्ठ लोगों की जीवन चर्या खोज कर लोकहित में  नित्य प्रति प्रतिदिन प्रकाशित  करनी चाहिए !

Tuesday, 16 June 2015

देश के विकास में सबसे बड़ी बाधा है स्वार्थ बुद्धि!आजकल इसका विशेष प्रभाव राजनीति में और धर्म में विशेष रूप में दिखाई दे रहा है !राजनीति की तरह धर्म भी स्वार्थों की निकृष्ट पूर्ति का अखाड़ा बन गया है !धर्म मनुष्य की बुद्धि को शुद्ध  करने के बजाय अशुद्ध कर रहा है !धर्म की परिपक्वता अध्यात्म में होती है !किन्तु देश में धर्म सिर्फ बाह्य कर्मकांडों प्रवचनों  और प्रत्येक धर्म अपनी श्रेष्ठता दूसरे धर्मों से श्रेष्ठ बताने में लगा हुआ है !इसिलए धर्म का मूल अध्यात्म निष्ठ स्वरुप स्वार्थ के घने अन्धकार में लुप्त हो गया है !आचार्य विनोबा ने धर्म को अध्यात्म निष्ठ बनाने के लिए आध्यात्मिक पंच निष्ठा प्रस्तुत की है ! (!)निरपेक्छ नैतििक  मूल्यों में श्रद्धा ---सम्पूर्ण जीवन के लिए शाश्वत मूल्यों को आचरण में उतारने के लिए प्रयत्न करना सत्य प्रेम करुणा आदि का तिरस्कार मानव विकास और मानव धर्म की पाप्ति में सबसे बड़ी बाधा है ! इसिलए मानव धर्म मानव विकास और स्वार्थ बुद्धि के विनाश  के लिए इन नैतिक मूल्यों पर आधारित जीवन जीने की आवश्यकता है !(२}प्राणिमात्र की एकता और पवित्रता ---जीवन के लिए जंतुओं पशुओं आदि  का संघार किया जाता है ! प्रत्यक्छ आचरण में उंच नीच श्रेष्ठ कनिष्ठ धनबान गरीब का भेद होता है इसीलिए हमारे जीवन में इसके स्थान पर आचरण में यह आना चाहिए की प्राणी मात्र एक है और पवित्र है ! लोगों को यह समझना चाहिए कि हमारे शरीर भिन्न भिन्न है किन्तु सभी शरीरों में आत्मा एक ही है  !हम सभी परमात्मा के अंश है ! इसीलिए कर्त्तव्य छेत्र में भले ही कार्य व्योहार के कारण प्राणिमात्र में एकता का दर्शन ना हो किन्तु मूल रूप में तो हमारा सम्बन्ध आत्म दृष्टि से समानता का होना चाहिए  (३)--- मृत्यु के बाद भी जीवन की अखंडता ----मृत्यु के बाद भी जीवन है इस से कर्म करने में पवित्रता रहेगी !सभी धर्म किसी न किसी रूप में इसको स्वीकार करते हैं !कि मृत्यु के बाद भी जीवन किसी ना किसी रूप में रहता है !(३)साक्छात अनुभव ---कुछ लोग जन्म से ही संसारिक भोगों आदि से बिरक्त जन्म लेते हैं !बुद्ध महावीर चैतन्य महाप्रभु शंकराचार्य आदि संतो और महापुरुषों के साक्छात अनुभव से यह बातसमझ में आती है कि !इन महापुरुषों के जीवन में जन्म से ही जिस त्याग वैराग्य का दर्शन हुआ हुआ है !उस से इस बात का अनुभव होता है !की मृत्यु के साथ जीवन का अंत नहीं हुआ !(४)कर्म विकापम---- कर्म का फल अवश्य भोगना पड़ता  है !(५)विश्व में व्यबस्था है ---सूर्य समय से निकलता है आदि यह संपूर्ण व्यबस्था ठीक से चल रही है इस से अनुभव आता है की कोई रचनाकार या व्यबश्थापक है जिस से श्रष्टि संचालित हो रही है !इस आध्यात्मिक पंच निष्ठा को आचरण में उतारने से स्वार्थ बुद्धि के स्थान पर आत्मनिष्ठ बुद्धि का निर्माण हो सकता है !और आम जन को धर्मांध स्वार्थ पोषक धर्म के नाम अधर्म और हिंसा का विस्तार करने वाले लोगों से मुक्ति मिल सकती है !और धर्म का लोकनिष्ठ पका हुआ अध्यात्म निष्ठ  मानव धर्म प्राप्त हो सकता है

Monday, 15 June 2015

आजमखान ने एक व्यान में कहा है कि राम पैगम्बर हो भी सकते है !या नहीं भी हो सकते हैं ?यह कथन  धर्मों के मूलस्वरूप में विद्यमान फर्क को दर्शाता है !इस्लाम ईश्वर के अवतार को नहीं मानता है ! , पुनर्जन्म को भी नहीं स्वीकार करता है  !,और भी  इस्लाम में धार्मिक आचार व्योहार और कर्मकांड की बहुत सी विधियां  हैं जो हिन्दू धर्म के विपरीत हैं !इस प्रकार के धार्मिक मतभेद हिन्दू धर्म में भी है !और हिन्दुधर्म तथा अन्य धर्मों में भी हैं !धर्मों की इस विविधता  को देखते हुए ही देश ने धर्मनिरपेक्छ संविधान का निर्माण किया था !  किन्तु इस धर्मनिरपेक्छ्ता के कारणदेश में हिन्दू धर्म की मौलिक मान्यताओं और आधारों का बहुत नुक्सान हुआ है  !और धर्मनिरपेक्छ्ता हिन्दू धर्म के अतिरक्त अन्य धर्मों की पोषक हो गयी !और हिन्दू धर्म कि मूल मान्यताओं और आधारों तथा धार्मिक अवधारणाओं कि विनाशक हो गयी ! बहुत से हिन्दू मानव धर्म की बात करते हैं  !किन्तु जिस आचरण से मानव धर्म पैदा होता है ! और उसका पालन होता है !और मनुष्यों के मन मष्तिष्क  बुद्धि और आचरण में मानवता मैत्री करुणा आदि प्रवेश करती है ! उन हिन्दू धर्म की विधियों और उनको आचरण में उतारने वालों ऋषियों तथा मानव धर्म को स्थापित करने के लिए मनुष्य के रूप में अवतार लेने वाली परम ईश्वरी शक्ति के अवतरित होने आदि की बातों के ज्ञान  को ना तो स्वीकार करते हैं ! और ना ही उनको अपने जीवन में उतारते हैं !इस ज्ञान और मानव धर्म को  विद्यालयों के माध्यम से बच्चों तक पहुँचाने के मार्ग को  भी अवरुद्ध कर दिया है  !परिणाम स्वरुप मानवता का संस्कार ही बच्चो में पैदा नहीं हो पाया है  !इसिलए १९४७ के बाद जिस पीढ़ी के पास देश की व्यबस्था संभालने की जिम्मेदारी आई उन  तपे  हुए लोगों ने कुछ समय तक तो मनसा वाचा कर्मणा धर्मनिरपेक्छ्ता के सिद्धांत को जीने की कोशिश की  !किन्तु समय के साथ यह धर्मनिरपेक्छ्ता हिन्दू धर्म का नाश और ईसाई और मुसलिम धर्म की पोषक बन गयी !आज देश में हिन्दू धर्म सहित जितने भी धर्म हैं !उनमे मानवता लग भग व्योहार के रूप में नहीं के बराबर दिखाई देती है !स्वार्थ के घनी भूत अंधकार ने धर्म के मूल तत्त्वों को धर्म से  निकाल कर बाहर फेंक दिया हैं !और आजमखान जैसे  लोग हिन्दू धर्म की व्याख्या इस्लाम की दृष्टि से करने लगे हैं !इस सदी में इस्लाम का जितना खौफनाक हिंसात्मक स्वरुप विश्व के सामने आरहा है ! उस से विश्वशांति को भी खतरा उत्पन्न हो गया है !ईशाई मुल्कों में आप ईशाई धर्म की आलोचना और निंदाकर सकते हैं !यहां तक की आप ईशा हुए थे या नहीं इस पर भी प्रश्न चिन्ह खड़े कर सकते हैं? !ईशाई देशों में आप मस्जिद मंदिर गुरुद्वारों का निर्माण कर सकते हैं !अकेले अमेरिका में ही २५०० मस्जिदें हैं और १००० से अधिक मंदिर हैं !विश्व का सबसे बड़ा स्वामी नाथ सम्प्रदाय का मंदिर अमेरिका में बन रहा है !किन्तु इस्लामिक राष्ट्रों में अन्यधर्मो के पूजा घर देखने को नहीं मिलेंगे !ईशनिंदा कानून के कारण कोई मुहम्मद साहिब या कुरान  के विरुद्ध एक शब्द भी नहीं बोल सकता है !किन्तु भारत में भगवान राम पैगम्बर थे या नहीं यह कहा जा सकता है !वह ईश्वर नहीं थे इसकी घोषणा तो बाजे बजा कर की जा सकती है !मानवता का मूल अहिंसा माँ विद्यमान है !इसीलिए जब तक देश में गाय का बध बंद नहीं होगा जीवहत्या समाप्त नहीं होगी !हिंसा का आचरण पोषण करने वाले धर्मों का समर्थन बंद नहीं होगा तब तक धर्मनिरपेक्छ्ता सिद्ध नहीं होगी !हिंसा का समूल विनाश ही मानव धर्म की जननी है !और इसका आश्रय स्थल भारत भूमि में जन्म लेने वाले धर्मों में विद्यमान है !जैन धर्म आचार व्योहार और विचार में हिंसा का पूर्ण निषेध करता है !और मैत्री करुणा अहिंसा का पोषक है !इसीलिए बर्तमान युग में इन आधारों को स्वीकार कर मानवधर्म की स्थापना की जा सकती है !

Sunday, 14 June 2015

प्रत्येक मनुष्य के पास चलने के लिए पैर और काम करने के लिए हाथ है !सोचने समझने और निर्णय करने के लिए मन बुद्धि और अहंकार है !इन सभी साधनो से मनुष्य संसार में  प्राप्त पदार्थों का उपभोग करता है !मनुष्यों में जन्म से ही कुछ कमजोर कुछ मंद बुद्धि तथा कुछ तेज दिमाग और स्वस्थ  व्यक्ति जन्म लेते हैं !कुछ बहुत सुन्दर कुछ सामान्य और कुछ बदसूरत  व्यक्ति भी जन्म लेते है !मनुष्यों में  विविधता जन्म जात होती है !मनुष्यों के अलावा भी ब्रक्छ पशु पक्छी आदि बहुत से जीव जंतु भी पृथ्वी पर जन्म लेते हैं !मनुष्य को ही श्रष्टि के इन सभी जीव जंतुओं और मानव समूहों को व्यबस्था करनी पड़ती है !इसलिए मनुष्य की बुद्धि प्राकृतिक पदार्थों का उपभोग करते समय इस बात का ध्यान रखे की सब पदार्थ संसार में जन्मे सभी लोगों के उपभोग के लिए हैं !और उसकी बुद्धि मोहग्रस्त होकर सारे पदार्थों को अपने ही उपभोग में इस्तेमाल न करने लगे !इसीलिए ५ सनातन आधारों --- सत्य अहिंसा अपरि गृह ब्रह्मचर्य और अस्तेय का जन्म हुआ !सत्य का अर्थ है कि जैसा देखा सुना और समझा हो उसको उसी प्रकार से कहाजाय !अहिंसा का मतलब है की जैसे हमें अपना जीवन प्रिय है और हम किसी भी प्रकार का  शारीरिक मानसिक कष्ट नहीं चाहते हैं !इसी प्रकारसे हम भी किसी को  मारें नहीं ! न ही जुबान से और कर्म से किसी को कष्ट दें !अपरिग्रह का मतलब है की हम जरुरत से ज्यादा बस्तुओं का संग्रह न करें ! और यह ध्यान में रखें की संसार की सभी वस्तुओं पर सभी का समान अधिकार है !ब्रह्मचर्य का अर्थ है की समाज में दुराचार न फैले और स्त्री पुरुष सम्बन्ध से जो संतान उत्पन्न हो उसका सही लालन पालन हो इसको लिए स्त्री पुरुष अपनी कामेन्द्रिय पर नियंत्रण रखे !और काम सम्बन्ध सिर्फ विवाहित स्त्री पुरुष के मध्य ही हों ! !अस्तेय का मतलब है कि दूसरे की वस्तु की चोरी ना करें और अपने शारीरिक श्रम से उपार्जित धन से ही अपना पालन पोषण करें !इन्ही ५ सनातन आधारों का व्यक्ति की बुद्धि पर प्रभावी नियंत्रण रहे  !संसार में विविध संस्थाओं का जन्म हुआ !धर्म भी उन्ही संस्थाओं में से एक है !यद्द्पि धर्म में बहुत सी बुराइयां है !फिर भी धर्म का कोई विकल्प नहीं है !मनुष्य जीवन के इन ५ सनातन आधारों को धार्मिक साधनाओ भगवान के डर और जन्नत जहन्नम आदि के भय से नियंत्रित किया जाताहै !विभिन्न युगों में  धर्म के बिभिन्न रूप प्रगट होते रहे हैं !किन्तु आज के युग के लिए सभी प्रकार की हिंसा और क्रूरता मुक्त धर्म की आवश्यकता है !

Saturday, 13 June 2015

सूर्य की उपासना अग्नि की उपासना और चन्द्रमा की उपासना अनादिकाल से भारत भमि में की जाती रही है!एक समय था जब संपूर्ण विश्व का एक ही धर्म सनातन धर्म था !सनातन धर्म की बुनियाद सत्य अहिंसा ब्रह्मचर्य अपरिग्रह और अस्तेय है !इन्ही ५ धर्म के आधारों पर ही प्राणिमात्र  की रक्षा सुरक्षा और सभी प्रकार की लौकिक और पारलौकिक व्यबस्थाएं की जाती रही हैं !और इन्ही के क्रियान्वन के लिए विश्व में भिन्न भिन्न धर्म जन्म लेते रहे हैं !श्रष्टि का निर्माण करने वाली ईश्वरीय शक्ति की या ईश्वर की उपासना भिन्न भिन्न धर्म बाले अनेक प्रकार से करते हैं !जो लोग ईश्वर को नहीं मानते है बे सिर्फ प्रकृति को ही श्रष्टि का कर्ता धर्ता मानते हैं !कुछ धर्म ईश्वर को निराकार कुछ साकार और निर्गुण निराकार और कुछ सगुण साकार मानते हैं !वैदिक धर्म जिसका मूल सनातन धर्म है !ईश्वर की उपासना सभी रूपों में करता है !उसमे प्रकृति की उपासना भी ईश्वर की एक शक्ति के रूप में होती है !इसीलिए सूर्य आदि की उपासना  परमात्मा के प्रकाश को प्रकाशित यंत्र के रूप में की जाती है !आँखों से दिखने  वाले गोल चक्र की नहीं !भगवान श्री कृष्ण ने गीता १५(१२)कहा है सूर्य में प्रकाशित जो तेज सम्पूर्ण जगत को प्रकाशित करता है और जो तेज चद्रमा में है ! तथा जो तेज अग्नि में है  !उस तेज को तू ईश्वर का ही जान !मनुष्य प्रभाव और महत्त्व से प्रभावित हो जाता है ! अतः मनुष्य पर प्राकृत पदार्थों के प्रभाव और महत्त्व को हटाने के लिए ही यह रहस्य प्रगट किया गया है ! कि सूर्य की उपासना नमस्कार बंदगी आदि सूर्य के प्रकृति निर्मित गोले की नहीं बल्कि उसके अंदर प्रकाशित परमात्मा के तेज की है !सूर्य की उपासना के लिए अनेक मंत्र और विधियां हैं !पांडव  जब साधन हीन अवस्था में बनबास में थे तब सूर्य की उपासना से ही उनको ऐसी बटलोई प्राप्त हुई थी ! जिसमे बने भोजन के पदार्थ हजारों आदमियों के भोजन करने के बाद भी समाप्त नहीं होते थे !सूर्य उपासना  का श्रेष्ठ मन्त्र गायत्री मन्त्र है जिसकी विधि सहित उपासना भगवान राम कृष्णा आदि भी करते थे !ऋषि विश्वामित्र वशिष्ठ आदि भी गायत्री मन्त्र की उपासना से ही परम सिद्धि को प्राप्त हुए थे !आधुनिक काल में भी महर्षि दयानंद आचार्य श्रीराम शर्मा आदि ने गायत्री उपासना से ही परम सिद्धि प्राप्त की और जनसामान्य में इस साधना को पहुचाने का भी प्रयत्न किया !गांधीजी विनोबा  मालवीय टैगोर अरविंदो आदि और लाखों मनुष्यों ने गायत्री साधना से सुख  संपत्ति वैभव विद्द्या बुद्धि ज्ञान आदि कीप्राप्ति की और संसार में अनेक लोकहित के कार्य किये ! और आज भी संसार में सूर्य की तरह प्रकाशित हो रहे हैं !वैदिक धर्म परमात्मा की शक्ति को सीमित नहीं करता है ! बल्कि सभी प्राकृतिक पदार्थों में एक परमात्मा की शक्ति का ही दर्शन कर पेड़ों पौधों समस्त जीव धरियोँ  में नित्य परमात्मा के प्रकाश का  अनुभव करता है !इसीलिए ईश्वर की उपासना पूजा अर्चा के रूप में ईश्वर की असीम विलक्छण शक्ति का अवाधित दर्शन वैदिक धर्म में ही होता है !धार्मिक उदारता जैसी वैदिक धर्म में है वैसी उदारता का दर्शन अन्य धर्मो की उपासना  पद्धति में दिखाई नहीं देता है !  
भाजपा भी अन्य राजनैतिक दलों की तरह राजनैतिक पार्टी है !सभी राजनैतिक दाल सत्ता प्राप्त करने का प्रयत्न करते हैं !कोई यादव मुसलिम के गठ जोड़ से सत्ता हथियाना चाहता है ! या सत्ता में बना रहना चाहता है !कोई दलित मुसलिम ब्राह्मण की  तिकड़ी से सत्ता प्राप्त करता है !कुछ दल ४,६ मिलकर संयुक मोर्चा बनाकर चुनाव में उतरते हैं !भाजपा हिन्दू धर्म संस्कृति आचार विचार व्योहार राममंदिर निर्माण सूर्यनमस्कार गीता आदि को आधार बनाकर  सत्ता प्राप्ति या सत्ता में बने रहने की कोशिश करती है !भाजपा के समर्थन में बहुत से साधु संत और हिन्दू संगठन है !विशेष रूप से इसको राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का समर्थन प्राप्त है !और संघ  समर्थक देश में सरकारी सेवाओं में व्यपारियों में बुद्धिजीवियों में यहाँ तक की थोड़े बहुत सभी राजनैतिक दलों में हैं !इसीलिए जो योग का प्रश्न भाजपा ने उठाया है उस से उसका दोहरा उद्देश्य है ! (१)राजनैतिक लाभ उठाना (२)भारत की अत्यंत प्राचीन योगिक परम्परा को सामान्य जन तक पहुचाना !इस प्रकार से भाजपा की जीतनी भी धर्म सम्बन्धी गतिविधियाँ है उन सब में राजनैतिक लाभ लेने का भी उद्देश्य है !कांग्रेस देश में मात्र ऐसा दल है जिसके पास देश के धर्मनिरपेक्छ स्वरुप की संरचना का कार्य क्रम है !किन्तु बिगत  १०० सालों में समाज में बदलाव के लिए जिन दवे कुचले लोगों को उठाने का कांग्रेस ने प्रयत्न किया बे कांग्रेस को छोड़ कर चले गए !और बिभाजन के बाद और आज भी अल्पसंख्यकों के हित की लगातार बात करने वाली कांग्रेस उनके समर्थन से भी बंचित हो गयी !कांग्रेस की नीतियां कभी भी जातिबाद की पोषक नहीं रही किन्तु कांग्रेस का झुकाव हमेशा मुसलमानो और दलितों की तरफ रहा !पिछड़े और सवर्ण का समर्थन कांग्रेस को इधर कुछ सालों से लगभग नहीं के बराबर प्राप्त रहा !इसके बाद भी कांग्रेस राष्ट्रिय दल है और इसकी सुनिश्चित देश विकास की नीतियां हैं
पाकिस्तान भारतीय प्रधानमन्त्री के वक्तव्य से !इतना अधिक उत्तेजित हो गया है !जबकि भारतीय प्रधान मंत्री का वक्तव्य अत्यंत शालीन और तथ्यपूर्ण था !जबकि पाकिस्तान के हाफिज सईद ऐसे लोग कितने बेहूदे अपमानजनक वक्तव्य देते रहते हैं !मुसर्रफ के व्यान अत्यंत उत्तेजनापूर्ण और अपमान जनक होते हैं !भारत पर आत्तंकवादी हमला करने वाले आत्तंकी खुले आम पाकिस्तान में घूमते है !भारत का आतंकी दाऊद पाकिस्तान में है !इन सब बातों की तरफ पाकिस्तान ने कभी ध्यान नहीं दिया !पाकिस्तान शक्तिशाली देश है !इस पर संदेह प्रधान मंत्री ने व्यक्त नहीं किया है !लेकिन पाकिस्तान जितनी बार भारत पर हमलाबर हुआ उसका क्या परिणाम हुआ ? इसका पता भी पाकिस्तान को है !भारत को अपनी रक्षा सुरक्षा का अधिकार है की नहीं ?कि भारत का काम सिर्फ पाकिस्तान के द्वारा प्रायोजित आतंकबादी गतिविधियों पर चुप  रहने का ही है ?आखिर भारत सरकार का उत्तरदायित्त्व भारतीय जनता के प्रति है कि नहीं ?और प्रधानमंत्री को भारत की जनभावनाओं को व्यक्त करने का अधिकार है कि नहीं ? इस सबके बाद भी पाकिस्तान में भारत के प्रधान मंत्री का पुतला फूंका जारहा है ? तो क्या करें ?

Friday, 12 June 2015

बालश्रम कलंक है !बालकों के हाथ में चाय के प्याले के बजाय किताबें होनी चाहियें !ऐसे ही अनेक वाक्यों के साथ बाल श्रम निषेध दिवस मनाने की ओपचारिकता पूरी कर दी गयीं  !बाल  श्रम निषेध कानून  के बाद भी लोग  अपने बच्चों से जीविकापार्जन के लिए  काम कराने के लिए मजबूर हैं !कुछ गिने चुने लोग हैं जो हरप्रकार की विचार गोष्ठियों में अपनी उपस्थिति दर्ज करा कर गीत और गजलें पढ़कर अपने भासण देने के शौक को पूरा करते हैं !कुछ संचालन विशेषज्ञ भी हैं !जो इसी काम के करने में लगे रहते हैं !बाल श्रम निषेध के सफलता पूर्वक क्रियांबन में कई वधाएं है किन्तु प्रमुख रूप से प्राथमिक शिक्छा का पूर्ण रूप से ध्वस्त होना हैं !सरकार ने प्राथमिक शिक्छा के अच्छे क्रियांबन के लिए कई महत्व पूर्ण कार्य किये है !प्राथमिक शिक्छ्कों की तन्ख्वोहों में असाधारण बृद्धि की है !बच्चों को मुफ्त भोजन ड्रेस और पुस्तकों की व्यबस्था की गयी है !बच्चे अधिक से अधिक संख्या में पढ़ने आएं इसके लिए सर्व शिक्छा अभियान और कई गैर सरकारी संगठन और स्वयं शिक्छक और शिक्छा बिभाग के अधिकारी  भी इसके लिए प्रयत्न करते हैं !किन्तु सारे प्रयत्नो के बाबजूद भी बच्चे प्राथमिक पाठशालाओं में पढ़ने नहीं आते है !इसका क्या कारण है ?इसका कारण है कि यह सब सिर्फ कागजों में होता है ! अगर यह व्यबस्था सुधर जाय तो फिर गरीबों के अधिकाँश बच्चे  बालश्रम करने से बच सकते हैं !यद्द्पि इसके साथ दूसरी समस्यायों पर भी ध्यान देना होगा !किन्तु इस व्यबस्था में सुधार से कुछ फर्क पड़ सकता है !बच्चों को प्राप्त होने वाली सुविधाएं उनको प्राप्त हों !यह कार्य इन सुविधाओं का स्वयं उपयोग और उपभोग  करने वाले शिक्छक ग्राम प्रधान शिक्छा अधिकारी कभी नहीं करेंगे !यह कार्य युवाओं को करना होगा! भासण देने वाले लोग भासण देकर   अपना उत्तरदायित्व पूरा करते हैं  !किन्तु यह क्योँ हो रहा है ?इसे रोकने के लिए जो कानून बने हैं उनका पालन हो रहा है ? या नहीं इस पर कोई विचार नहीं हुआ ?कानून का पालन न करने वालों पर कठोर कार्यबाही की बात तो अधिकारीयों ने की !किन्तु कानून का पालन ना कराने वाले अधिकारियों कर्मचारियों को दण्डित कराने की बात पर कोई विचार नहीं हुआ !जबकि कानून का पालन ना करापाने  लिए ये भासण देने वाले लोग ही मुख्य रूप से जिम्मेदार है !विचार गोष्ठियों में समस्या के निराकरण के लिए विचार प्रस्तुत नहीं किये जाते हैं !और नाही उन लोगों की सहभागिता होती है जो वास्तव में इस बालश्रम निषेध कानून के बाद भी अपने बच्चों से जीविकोपार्जन के लिए काम कराने के लिए मजबूर होते हैं !कुछ गिने चुने भासण देने में रूचि रखने वाले लोग ही जिन्हे न तो समस्या का ज्ञान होता है और न ही उनके पास कोई समाधान होता सिर्फ गीतों गजलों के माध्यम से अपनी भासण देने कि इक्छा पूरी करते हैं !बाल श्रम न हो इसके मार्ग में कई बाधाएं है जिनमे से एक बाधा प्राथमिक शिक्छा का पूरी तरह से ध्वस्त होना है !गरीबों के बालकों को मुफ्त शिक्छा प्राप्तहो इसके लिए सरकार ने बच्चों के लिए मुफ्त भोजन किताबें और ड्रेस आदि की व्यबस्था की है !शिक्छक बच्चों को ठीक से पढ़ाएं इसके लिए उनको बहुत अच्छा बेतन दिया जा रहा है !इसके अलावा बच्चे ज्यादा से ज्यादा पढ़ने आएं इसके लिए सर्वशिक्छा अभियान आदि कार्यक्रम भी चलाये जाते है ! जिनमे गैर राजनैतिक संगठन शिक्छक और शिक्छा अधिकारी भी शामिल होते हैं !इसके बाद भी प्राथमिक विद्यालयों में विद्यार्थियों कि संख्या नहीं बढ़ती है ?इसका कारण है कि बच्चो को ये सुबिधायें प्राप्त नहीं होती हैं !शिक्छक भी पढ़ाने नहीं जाते हैं !और सुविधाओं को शिक्छक ग्राम प्रधान मिलकर खा जाते हैं !शिक्छा अधिकारी भी इन सब में शामिल रहते हैं !यदि प्राथमिक शिक्छा सही रूप से काम करे तो अधिकाँश गरीबों के बच्चों के हाथों में चाय के प्यालों के स्थान पर किताबें दिखने लगेंगी !प्राथमिक शिक्छा में सुधार ये शिक्छक प्रधान आदि नहीं करेंगे क्योंकि इन्हे बच्चो को प्राप्त होने वाली सुविधाओं को अपने उपभोग में लेने कि आदत पड़ गयी है !यह काम तो ग्रामीण छेत्र की जनता  युवकों और बच्चों के अभिभावकों को ही करना होगा !
आमआदमी के पूर्व शिक्छा मंत्री तोमर की फर्जी डिग्री प्रकरण में गिरफ्तारी के बाद स्मृति ईरानी और कठेरिया केंद्रीय मंत्रियों की फर्जी डिग्री की कार्यवाही की मांग जोर से उठने लगी है !अगर इस सम्बन्ध में आवाज उठाने वालों के पास कोई ठोस सबूत है ! तो बे खुद भी न्यायालय में बाद पात्र प्रस्तुत कर सकते है !स्मृति ईरानी की डिग्री फर्जी हो या न हो ! किन्तु उनकी योग्यता केंद्र की मानव विकास संसाधन मंत्री बन ने की बिलकुल नहीं है !भाजपा के पास डॉ मुरली मनोहर जोशी जैसा शिक्छा छेत्र का उत्कृष्ट अनुभवी विद्वान मौजूद है !जो पूर्व बाजपेयीजी की सरकार में मानव विकास संसाधन मंत्री रह चुके हैं !तथा जोशी जी देश की शिक्छा व्यबस्था के सुधार के लिए भी आवश्यक ज्ञान रखते  हैं उनके पास शिक्छण का लम्बा अनुभव भी है ! और बे भाजपा की नीति निर्धारण के आवश्यक अंग भी रहे हैं ! जब मोदी जी कुछ भी नहीं थे तब बे भाजपा के राष्ट्रिय अध्यक्छ थे  !कहाजाता है कि भाजपा में जो ७५ साल के हो गए हैं उन्हें मंत्री पद नहीं दिया जा सकता है !किन्तु नजमाहेप्तुल्ला तो  ७५ साल की आयु की होने के बाद भी मंत्री हैं ! अगर जोशी जी  को मंत्री नहीं भी बनाया जा सकता था तो भी उन्हें आवश्यकता से कम पढ़ी लिखी शिक्छा के छेत्र में पूरी तरह अनुभव हीन छोटे परदे कि अदाकारा  शिक्छा मंत्री पद के लिए पूर्ण रूप से अयोग्य  स्मृति ईरानी की सहायता के लिए तथा देश की शिक्छा व्यबस्था को उचित गति देने के लिए कैबिनेट स्तर का कोई दर्ज देकर डॉ जोशी की सलाह पर समिति गठित कर डॉ जोशी को  उसका चेयरमैन बनाया जा सकता था !आज जबकि भाजपा को पूर्ण बहुमत संसद में प्राप्त है !डॉ जोशी जैसे महान शिक्छाविद की उपेक्छा कर उनका देश की शिक्छा के लिए उपयोग न किया जाना आश्चर्य जनक है !अभी भी भाजपा के पास समय है ! उसे जोशी  जी का उपयोग शिक्छा छेत्र में करना चाहिए !अगर कहीं ख़ुदा ना खस्ता स्मृति की डिग्री फर्जी पायी गयी तब तो मोदी जी की सरकार की छवि पर गहरा काला दाग लग जाएगा !

Thursday, 11 June 2015

स्वतंत्रता के बाद भारत में बहुत से लोकहितकारी कानूनो का निर्माण हुआ !उन्ही कानूनो में से एक बालश्रम निषेध कानून भी है !कानून बनने के बाद उसके सही क्रियांबन पर ही कानून की सार्थकता सिद्ध होती है !भारत में लोगों के आर्थिक स्तर में बहुत अंतर और भिन्नता है !बहुत से ऐसे स्त्री पुरुष हैं ! जो जीवन भर श्रम करते ही नहीं हैं !उनका श्रम सिर्फ खाने पीने ,सोने ,समय व्यतीत करने के लिए गप्पें लड़ाने ताशपत्ता खेलने क्लब और डॉकटरों से इलाज कराने तक ही सिमित होता है !इन परिवार के बच्चों को भी कोई श्रम नहीं करना पड़ता है ! किन्तु बड़ी संख्या में ऐसे भी लोग हैं जो स्त्री पुरुष और बच्चों के साथ निर्धारित समय से अधिक श्रम  करने के बाद भी अपनी साधारण जीबन की आवश्यकताओं की भी पूर्ति नहीं कर पाते हैं !ऐसे ही लोगों के बच्चे श्रम करते पाये जाते हैं !ये बालक भीख मांगते ,पन्नी बटोरते होटलों आदि में काम करते देखे जाते हैं !इनकी शिक्छा आदि की मुफ्त व्यबस्था के भी कानून बने हैं !किन्तु उनका क्रियांबन ठीक से नहीं होता है !जिस प्रकार अन्य विभागों का बजट भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाता  है उसीप्रकार इन बालको को बाल श्रम से मुक्त करने के लिए जो पैसा आवंटित होता है उसको भी लोग खा जाते हैं !दूसरा कर्तव्य निष्ठा का आभाव भी अधिकारियों में व्याप्त है !इसीलिए बालश्रम निषेध कानूनो  की सफलता के लिए जो सुविधाएं उन्हें कानून में दी गयी हैं ! उनको  तत्परता और ईमानदारी से पालन कराया जाय ! ताकि उदर पोषण के लिए उन्हें श्रम करने की आवश्यकता ही ना पढ़े  !बालश्रम निषेध की सफलता के लिए यह प्रथम सीढ़ी है !कोई भी माता पिता अपने बालकों को शिक्छा और सभी आवश्यकताओं की पूर्ति के स्थान पर काम करने के लिए भेजना नहीं चाहेंगे !किन्तु जीवन निर्वाह के लिए मजबूरी में उन्हें बालकों को काम करने के लिए भेजना पड़ता है !जो अवैधानिक है ! और अमानवीय भी है
जो मुसलमान मुल्ला मौलवी इमाम मुफ़्ती आदि गीता और सूर्य नमस्कार का विरोध कर रहे हैं !बे गीता को माता मानने वाले गांधीजी के साथ भी विश्वास घात कर रहे हैं !गांधी जी ने मुसलमानो के हित संरक्छण और सुरक्षा के लिए अपने जीवन की बलि दे दी थी ! और आज भी बे हिन्दू युवाओं और हिन्दुबादी संगठनो के कोप भाजन बन कर नित्य अनेक अपमान जनक असत्य मनगढंत शव्दों से नबाजे जाते हैं !मुल्ला मौलवियों आदि को मुसलिम युवाओं को उस समय की विभाजन के बाद की विषम परिस्थिति से अवगत कराना चाहिए ! कि अगर गांधीजी ने और नेहरूजी ने उस समय मुसलमानो की मदद न की होती तो पंजाब से आये  हिन्दू सिख शरणार्थियों ने उनका सफाया कर दिया होता !बटवारे के बाद भारत में लगभग ४ करोड़ मुसलमान रह गए थे मुसलिम लीग के प्रचार के प्रभाव में आकर उनमे से अधिकाँश ने भारत के बटवारे की सक्रिय अथवा निष्क्रिय हिमायत की थी उसके बाद मुसलिम लीग के चोटी के नेता देश छोड़ कर पाकिस्तान चले गए थे ! और अपने साधारण सहधर्मियों को मझधार में छोड़ गए थे ! जैंसे भारतीय संघ में मुसलमानो की सुरक्षा नेहरूजी और गांधी जी कर रहे थे वैसा हिन्दुओं का पक्छ लेने वाला पाकिस्तान में कोई नहीं था ! मौलाना बार बार गांधी जी से मुसलमानों की रक्षा सुरक्षा के लिए प्रार्थना करते थे !परिणामस्वरूप गांधी जी ने १३ जनबरी १९४८ में मुसमानों की सुरक्षा और अधिकारों के लिए आमरण अनशन शुरू कर दिया था ! गांधी जी की हालत मरणासन्न हो गयी परिणाम स्वरुप डॉ राजेन्द्र प्रसाद की अध्यक्छता में शांति समिति गठित की गयी थी ! जिसमे सभी समुदायों के १३० प्रतिनिधि थे १८ जनबरी को गांधी जी की सभी मांगे मान ली गयी  थी ! समिति ने सर्वसम्मत घोषणा की थी ! हमारी हार्दिक इक्छा है कि हिन्दू मुसलमान सिख और सभी धर्मों के लोग आपस में मिलकर भाई भाई की तरह रहें ! (२)हम यह प्रतिज्ञा करते हैं की हम मुसलमानो की जान माल और धर्म की रक्षा करेंगे और जिस तरह की घटनाएं पहले हुई हैं उनको नहीं होने देंगे ! (३)हम गांधी जी को यह विस्वास दिलाना चाहते हैं की ख्वाजा कुतुबुद्दीन के उर्स का मेला जिस तरह पहले हुआ करता था बैसे ही अब भी होगा (३ ) जिस तरह मुसलमान दिल्ली के सभी मुहल्लों और ख़ास करके सब्जीमंडी .करौल बाग़ और पहाड़गंज में पहले जैसे आया जाय करते थे बैसे ही फिर से बेखटके और बेखतरे आजा सकेंगे (४)जिन मस्जिदों को मुसलमान छोड़ गए हैं और जो अब हिन्दुओं और सिखों के कब्जे में हैं बे मुसलमानो को लौटा दी जाएंगी ! जो स्थान सरकार ने मुसलमानो के लिए छोड़े हैं उन पर कब्ज़ा नहीं किया जाएगा ! (५)जो मुसलमान दिल्ली से बाहर चले गए हैं ! बे अगर बापिस आना चाहें तो हमारी और से उनका विरोध नहीं होगा ! बे पहले ही की तरह अपना कारोबार कर सकेंगे !इस के बाद गांधी जी का अनशन समाप्त हो गया था गांधी जी ने अनशन समाप्ति के बाद कहा था ! कि में चाहूंगा कि मुसलिम भाई बहन गीता और  ग्रन्थ साहिब भी पढ़े और उसका अर्थ समझें ! जैसे बे अपने धर्म को मानते हैं बैसे ही दूसरे धर्मों को भी माने  !अगर पत्थर में ईश्वर को मानना गलत है तो उसे गीता ग्रंथसाहिब कुरान में मानना सही कैसे हो सकता है ? क्या यह भी बुत परस्ती नहीं है ? आदर और सर्वधर्म समभाव की भावना को बढाकर हम सब धर्मों से सीख ले सकते हैं ! अब मुसलमानो को भी हिन्दू धर्म की मान्यताओं का आदर करते हुए सूर्यनमस्कार और गीता का विरोध नहीं करना चाहिए !और भाजपा की सरकार को भी  सूर्य नमस्कार में से अपना राजनैतिक तुच्छ स्वार्थ सिद्ध करने के लिए सूर्य की उपासना के मन्त्र उच्चारण को निकालकर हिन्दू धर्म के साथ धोखा धडी नहीं करना चाहिए

Wednesday, 10 June 2015

पंडित रामप्रसाद बिस्मल का गीत सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में हैं !युवाओं में जोश भर देता था !और युवा देश के लिए अपना सर्वस्व कुर्वान करने के लिए तैयार हो जाते थे !आज भी युवाओं को इस गीत से प्रेरणा लेकर देश में व्याप्त गरीबी विषमता भ्रष्टाचार युवाओं में अनुशासन हीनता और छात्रों में  नक़ल टीपने  कीप्रवृत्ति छात्र संघ के अध्यक्छ पदाधिकारी चुने जाने के बाद जमीनो आदि पर कब्ज़ा करने की प्रवृत्ति  बेरोजगारी आदि के विरुद्ध संघर्श करने के लिए खड़ा हो जाना चाहिए !आज युवाओं को यह सब करने के लिए सर काटने या कटाने  की आवश्यकता नहीं है !सिर्फ इतनी ही आवश्यकता है कि युवा अपने आप को अनुशाषित और संयम में रखें शराब आदि ना पीयें ! छात्र ध्यान पूर्वक अध्ययन करें नक़ल ना टीपें !और अध्यापकों को भी पढ़ाने के लिए वाद्य कर दे !जो लोग बालू गट्टी मोरम का अवैधानिक ढंग से व्योपार कर रहे हैं !उनकी इन गतिविधियों को शासन तक पहुंचाएं और सार्वजानिक निर्माण कार्योँ में जो घपले हो रहे हैं उनके भी विरुद्ध आवाज बुलंद करें !जो भी देश और समाज के निर्माण के  लिएरचनात्मक काम हैं उन सब कार्यों को उसी प्रकार के समर्पित भाव से करें जैसे रामप्रसाद बिस्मल आदि ने अपने जीवन को देश हित में हँसते हँसते कुर्वान कर दिया था !बिस्मल के त्याग पूर्ण जीबन की सिर्फ शव्दिक प्रसंसा से काम नहीं चलेगा !उनके त्याग की मूल भावना को देश हित में रचनात्मक कार्य करके पूरी करना होगी !
धर्मनिरपेक्छ्ता को भाजपा हमेशा मुसलिम तुष्टिकरण की नीति के रूप में देखती रही है !और केंद्र में पूर्ण रूप से सत्ता में आने के पहले तक भाजपा ने प्रमुख रूप से कांग्रेस तथा अन्य विरोधी दलों के विरुद्ध यह मुद्दा जोर शोर से उठाया था ! कि देश के सभी राजनैतिक दल  मुसलमानो के वोट पाने के लिए मुसलिम तुष्टिकरण की नीति का पालन करते हैं ! अब जबकि भाजपा केंद्र में सत्ता में हैं !तब से गांधीजी और नेहरूजी पर तमाम प्रकार के मन गढंत अत्यंत झूठे और गंदे आरोपों को लगाने का सिलसिला बहुत तेजी से चल रहा है !गांधी जी को हिंदूवादी  संगठनो के समर्थक युवा बुद्धिजीवी आदि मुसलमानो का घोर पक्छपाती मानते हैं !!और यह कहते हैं कि अगर गांधी जी की हत्या गोडसे ना करता तो गांधी पाकिस्तान को देश का बहुत बड़ा हिस्सा दे देते !गांधीजी की हत्या राष्ट्र हित में आवश्यक थी  !और गोडसे एक महान देशभक्त था !गांधी बहुत दुराचारी व्यक्ति था !महिलाओं  के साथ नंगा सोता था !उसके बहुत सी महिलाओं के साथ शारीरिक सम्बन्ध थे आदि आदि !देश को आजाद गांधी जी ने नहीं कराया सुभाष बोस  चन्द्र शेखर भगत सिंह आदि क्रांतिकारियों ने कराया !गांधी अंग्रेजो का एजेंट था !उसने भगत सिंह को फांसी से नहीं बचाया क्योंकि वह भगत सिंह की लोकप्रियता से जलता था !डॉ आंबेडकर के समर्थक गांधीजी को दलित विरोधी और ड्रामा बाज कहते हैं !मुस्लमान गांधी को काफ़िर मानते थे !जिन्ना उनको हिन्दू नेता मानता था !और हिन्दू गांधी जी को मुसलमानो का पक्छ्धर मानते थे !भारत के नवनिर्मण और विकास का आधार गांधी जी ग्राम स्वराज्य मानते थे ! जबकि नेहरू जी औद्यौगिक विकास को प्राथमिकता देते थे !गांधी नेहरू में इस मामले में गंभीर मतभेद थे !गांधीजी स्वतंत्र भारत में मात्र ५,६ माह ही जीवित रहे !गांधी जी पूर्ण रूप से व्योहार में आचरण में  सत्य अहिंसा की निष्ठां का  पालन करते थे ! सत्य अहिंसा का आचरण निष्ठा पूर्वक आज अधिकाँश गाँधीबादियों में भी नहीं दिखाई देते हैं !गांधी जी कहीं चर्चा में प्रसनसा  के रूप में दिखाई देते हैं ! तो कहीं निकृष्ट आलोचना के रूप में किन्तु आचरण के रूप में गांधी जी का दर्शन कहीं भी दिखाई नहीं देता है !गांधी जी ने कहा था की आलोचना से मेरा बचाव मत करना !मेरा तो जन्म ही इसीलिए हुआ हैं !उन्होंने लिखा था की अच्छा यह होगा की मेने जो कुछ भी कहा है और लिखा है उसको मेरी लहाश के साथ ही जल दिया जाय क्योंकि कायम वह रहेगा जो मेने किया है वह नहीं जो मेने लिखा है !गांधी जी ने सत्य अहिंसा का पालन किया !उसके लिए संयम उनके जीवन की पद्धति थी सेवा उनके जीवन का ध्येय था और सत्य की प्राप्ति उनके जीवन का लक्छ्य था !इस समय इन तीनो चीज़ों की आवश्यकता राजनेताओं हिन्दू मुसलमानो सार्वजनिक कार्य  कर्ताओं में और जीवन को संचालित करने वाले विविध छेत्रों में नहीं दिखाई देती हैं !इसीलिए गांधी आज सिर्फ आलोचना और प्रसंसा के लिए ही काम के हैं !भारतीय संस्कृति में मृत व्यक्ति की निंदा करना अच्छा नहीं माना गया है !जिस गांधी को देश ने शरीर  से मार दिया आचरण में मार दिया उस  गांधी को शव्दों में भी जीवित रखने का क्या फायदा है ?सत्य अहिंसा गांधी ने ईजाद नहीं किये थे !उन्होंने सिर्फ इनका आचरण भर किया था !इसीलिए अगर आचरण में सत्य अहिंसा नहीं है !तो गांधी जी कैसे रह सकते हैं !देश के राजनेता और उनके समर्थक सत्य अहिंसा से रहित आचरण जारी रखें और जब परिणाम देश के सामने आये तो श्मशान से भी गांधीजी की आवाज सुनाई देगी !
सूर्य नमस्कार  मुसलिम धर्म में हराम और हिन्दू धर्म में स्वीकृत और पूज्यनीय  है !तो क्या इस्लाम में जो हराम है उसे अन्य धर्मों को भी वैसा ही मानकर स्वीकार कर लेना चाहिए ? योग सनातन धर्म की परमात्मा से जुड़ने की पद्धति है !योग की क्रियायों से  चित्त मन बुद्धि की शुद्धि होती है ! जिससे शरीर स्वस्थ तो होता ही है चित्त बुद्धि और मन भी शुद्ध होता है !योग साधना अनादि काल से भारतीय जीवन पद्धति का अंग रही है !सनातन धर्म को पूरी आजादी के साथ यदि भारत में ही अपनी साधनाओं को क्रियान्बित करने की स्वतंत्रता प्राप्त नहीं होगी !तो फिर और किसी देश में तो हो ही नहीं सकती है !हिन्दू विद्यर्थियों को गीता महाभारत आदि ग्रन्थ नहीं पड़ा सकते योग नहीं सीखा सकते !तो फिर क्या सिखा सकते हैं ?मुसलमान इस मामले में अधिक भाग्यशाली हैं !संसार में करीब ६० या ६५ मुसलिम  मुल्क हैं !जहाँ इस्लामिक कानून लागू हैं !और दूसरे धर्मों के लोगों को अपने धर्म के आचरण करने की आजादी नहीं है !किन्तु भारत ऐसे देश में फिलहाल मुसलमान बड़ी संख्या में तो हैं किन्तु बहुमत में नहीं हैं !वहां भी बे बहुसंख्यक हिन्दुओं को योग विद्यालयों में सिखाने  का विरोध कर रहे हैं !बे वन्दे मातरम का भी विरोध करते हैं !तो क्या किया जाय इनके विरोध के कारण सूर्य नमस्कार ९०%विद्यार्थियों को न सिखाया जाय !हिन्दू धर्म सूर्य में परमात्म के नूर की ही  उपासना करता है !भगवान श्री कृष्णा ने गीता में कहा है १५ (१२)सूर्य को प्राप्त हुआ जो तेज संपूर्ण संसार को प्रकाशित करता है वह प्रकाश परमात्मा (अल्लाह ) का ही है ! सूर्य का नहीं है !अब हिन्दू लोग परमात्मा की आज्ञा माने या मुल्ला मौलविओं की ?
मणिपुर में सेना के जवानो का घात लगाकर उग्रबादियों ने जैसे हत्या की थी !उसका उचित जबाब सेना ने उग्रबादियों का सफाया कर दे दिया है !अब उग्रबादी चाहे असम के हों या मणिपुर के या पाकिस्तान के आतंकबादी हों देश में उग्रबादी हिंसक कार्यवाही करने में डरेंगे !और यदि करेंगे भी तो यही अंजाम पाएंगे जो मणिपुर के उग्रबादियों का हुआ है !कश्मीर के मामले में बहुत गंभीर भूलें भारत की सरकारों से हुई हैं!जिसके कारण कश्मीर एक गंभीर समस्या बन गया है !और इस समस्या का समाधान बातचीत से होना संभव नहीं दीखता है !क्योँकि पाकिस्तान या हिन्दुस्तान दोनों ही कश्मीर पर अपना दाबा नहीं छोड़ सकते हैं !इसिलए इस समस्या का समाधान या तो शक्ति से होगा या फिर यह समस्या ऐसी ही बनी रहेगी !किन्तु इस बार अगर पाकिस्तान हमलाबर हुआ या उसने अपनी आतंकबादी गतिविधियों को सीमा पर या कश्मीर के अंदर जारी रखने का प्रयत्न किया तो उसको इसके गंभीर परिणाम भुगतना पड़ेंगे !मुझे लगता है ! की केंद्रीय सरकार कश्मीर में रहने वाले पाकिस्तान जिंदाबाद और पाकिस्तान का झंडा फहराने वाले अलगाव   बादियों के खिलाफ भी कड़ी कार्यबाही कर सकती है !म्यांमार में उग्रबादियों के सफाये के बाद एक आवाज युवाओं की उठ रही है ! कि ऐसी कार्य वाही पाक अधिकृत कश्मीर को मुक्त कराने के लिए होनी चाहिए !और पाकिस्तान में रह रहे दाऊद  को भी भारत में लाने के लिए ऐसी ही सैनिक कार्यबाही की जानी चाहिए जैसी अमेरिका ने लादेन को मारने में की थी !अमेरिका की बात और थी ! !हिन्दुस्तान पाकिस्तान के बिरुद्ध अमेरिका जैसी कार्यबाही कर सकता है या नहीं !? यह सामान्य व्यक्ति के अधिकार छेत्र के बाहर  की बात है

Tuesday, 9 June 2015


मनु स्मृति भारत में सामजिक व्यबस्था  को नियंत्रित करने वाली प्रथम कानून की पुष्तक है !कानून समय और परिश्थिति के अनुसार हमेशा बदलता रहता है !इसिलए मनु स्मृति के बाद भी अनेकों स्मृतियों को लिखा गया ! जिनमे याजबल्क्य स्मृति प्रमुख है !और इसमें मनु के समय के बहुत से कानून बदल दिए गए हैं !अब तो सारे विश्व में शाशन ब्यबस्था बदल गयी है !इसीलिए कानून का निर्माण देशों की सरकारें करती हैं !कोई धार्मिक किताब नहीं करती है !सिर्फ इस्लामिक राष्ट्रों में जरूर इस्लामिक कानून लागू है !बुरी आदतों का निर्माण कैंसे होता है ?क्यों होता है ?और उनके निराकरण के लिए क्या उपाय किये जाने चाहिए ? !इसका मूल कारण गीता में बताया गया है !अर्जुन भगवान श्री कृष्णा से पूँछता है मनुष्य ना चाहता हुआ भी जबरदस्ती लगाए हुए की तरह किस से  प्रेरित होकर पाप का आचरण करता है ?३(३६) भगवान श्री कृष्णा उत्तर देते हुए कहते हैं !कामनाएं ही पाप का कारण है ! और कामनाओ की पूर्ति में जब बाधा उत्पन्न होती है  ! तब क्रोध का जन्म होता है  ! किसी भी मनुष्य की सभी कामनाएं कभी भी पूरी ना हुई हैं ! और ना हो सकती हैं ! और ना होंगी !  कामनाएं ही जब अवांछित और अनियंत्रित  हो जाती हैं तब  मनुष्यों को  पाप अर्थात गलत कार्य करने को प्रेरित करती हैं !अवांछित और अनियंत्रत अतृप्त कामनाएं ही मनुष्यों की शत्रु हैं ! जैसा में चाहूँ उसकी प्राप्ति हो जाय इसी को कामना कहते हैं ! इन्ही कामनाओ में अनंत पाप भरे हुए हैं ! जब तक मनुष्य के अंदर अवांछनीय कामनाओ की तृप्ति के लिए गलत पाप पूर्ण कर्म करने की प्रवृत्ति का नाश नहीं हो जाता है ! तब तक मनुष्य सर्वथा निर्दोष नहीं हो सकता है ! कामनाओ के सिवाय पाप और क्रोध का कोई अन्य कारण नहीं है ! मनुष्य से ना तो ईश्वर पाप कराता है ! न परिस्थिति पाप कराती है  और ना धर्म ही  पाप कराता है ! प्रत्युत मनुष्य स्वयं ही कामनाओ के बसी  भूत हो कर पाप और क्रोध करता है !
पत्रकार जगेंद्र की आग लगाकर हत्या के मामले में राजयमंत्री राम मूर्ति वर्मा और उसके भतीजे के विरुद्ध प्रथम सुचना दर्ज कर ली गयी है !किन्तु पुलिस इंस्पेक्टर जो व्यान दे रहा है उसमे वह कह रहे हैं की पत्रकार ने पुलिस दबिश के कारण डर कर खुद तेल डालकर आग लगा ली थी !उत्तर प्रदेश की पुलिस की तो कार्य शैली ही ऐसी है ! कि इसकी किसी बात पर यकीन किया ही नहीं जा सकता हैं !अगर कोई सामान्य व्यक्ति होता तो खुद आग लगाकर पुलिस की दविश से डरकर आत्महत्या की बात मानी भी जा सकती थी !किन्तु एक पत्रकार जो लगातार मंत्री के खिलाफ लिख रहा था  !और जैसा की पत्रकार  की पत्नी का कथन हैं ! कि मंत्री के कहने से ही उसके विरुद्ध एफ आई आर लिखाई गयी थी ! भले ही पत्रकार की पत्नी का यह कथन सही ना भी हो ! तो भी  पत्रकार पुलिस की दबिश के भय से आत्महत्या नहीं कर सकता है !ऍफ़ आई आर के बाद भी मृतक पत्रकार को न्याय मिलना संभव नहीं है !उत्तर प्रदेश की पुलिस  की पुलिस भी अब दबंगो द्वारा  पिटती है !इसीलिए पत्रकार को न्याय या तो सी बी आई जाँच से मिलेगा या फिर न्यायालय से मिल पायेगा !और कहीं से भी न्याय नहीं मिलेगा तो फिर हारे को हरि नाम तो है ही !
महाभारत में भी रात के दही खाने को नुक्सान के साथ ही पाप की श्रेणी में रखा गया है !महाभारत में रात में दही खाने वाले को, अपने मुह अपनी प्रसंसा करने वाले को, और दूसरे की धरोहर हड़पने वाले को पापी बताया गया है !पांडवों की माता कुंती देवी कहती थी की मेरे पुत्र कभी युद्ध में पराजित नहीं हो सकते हैं !क्योंकि ये भगवान श्री कृष्णा से रक्छित  हैं ! तथा इन्होने   कभी रात में दही नहीं खाया  हैं ! और ना ही अपनी प्रसंसा खुद करते हैं ! और ना ही इन्होने किसी की धरोहर हड़प कर किसी के साथ विस्वास घात किया है !
यदि किसी व्यक्ति के विरुद्ध कॉग्निजेबल धाराओं के अंतर्गत अपराध पंजीकृत हुआ है !तो पुलिस उसको बिना वारंट के गिरफ्तार कर सकती है !चूँकि इस मंत्री के विरुद्ध धोखा धडी करने का अपराध पंजी क्रत है जो कॉग्निजेबल अपराध है !इसीलिए पुलिस के द्वारा इस मंत्री की गिरफ्तारी गैरकानूनी नहीं है !फिर भी इस गिरफ्तारी को अनुचित जरूर कहा जा सकता है !मंत्री को गिरफ्तार करने के पहले इसकी सुचना मुख्य मंत्री और विधान सभा के स्पीकर को देना उचित होता !पुलिस कमिशनर भी झूठा व्यान दे रहे हैं  कि उनको मंत्री की गिरफ्तारी का पता नहीं है !और आप पार्टी के नेता भी गलत और गैर कानूनी व्यान दे रहे हैं !कि जब मामला हाई कोर्ट में है तो पुलिस को गिरफ्तार नहीं करना चाहिए था !अगर हाई कोर्ट ने मंत्री की गिरफ्तारी के विरुद्ध स्टे दिया है तो पुलिस पर न्यायालय की अवमानना का मुकदद्मा चल सकता है !केजरीवाल दिल्ली के उपराजयपाल पुलिस और अधिकारियों के विरुद्ध जंग लड़ रहे हैं !बे भाजपा और मोदीजी पर भी हमला कर रहे हैं !दिल्ली की जनता इन घटनाओ को किस रूप में ले रही है ! यह तो समय बताएगा !किन्तु जनता ने केजरीवाल को लड़ने के लिए वोट नहीं दियाथा

Monday, 8 June 2015

महाभारत में अग्नि, ,अंगिरा, गार्ग्य, धौम्य, तथा जमदग्नि, द्वारा धर्म के व्योहारिक क्रियान्वन का वर्णन किया गया है !लक्ष्मी जी कहतीहैं!  जिस घर में सब पात्र इधर उधर बिखरे पड़े हैं ! वर्तन फूटे और बैठने के आसन फटे हों ! तथा जहाँ महिलाओं पर अत्याचार किये जाते हों उनका सम्मान न किया जाता हो वह घर अधर्म के कारण दूषित होता है ! पाप से दूषित हुए उस घर से उत्सव और पर्व के अवसरों पर देवता और पितर निराश लौट जाते हैं ! तथा उस घर की पूजा स्वीकार नहीं करते हैं !धौम्य ऋषि ने कहा घर में फूटे वर्तन टूटी खाट, मुर्गा, कुत्ता ,और पीपल आदि  बड़े  ब्रक्छ  का होना अच्छा नहीं माना गया है ! फूटे बर्तनो में कलियुग का बास कहा गया है ! जिस से गृह में अशांति और कलह होती है !टूटी खाट रहने से धन की हानि होती है ! मुर्गे और कुत्ते के रहने पर देवता उस घर में पूजा अर्चा हवन आदि का प्रसाद ग्रहण नहीं करते हैं  ! तथा मकान के अंदर कोई बड़ा ब्रक्छ होने पर उसकी जड़ के अंदर सांप बिच्छु आदि जंतुओं का रहना अनिवार्य हो जाता है इसीलिए घर के भीतर बड़े  ब्रक्छ ना लगाए
इस्लाम धर्म भले ही बहुत अच्छा हो उसमें इंसानियत का पैगाम हो !और हजार साल से अधिक के शाशन काल में बड़ी मात्रा में हिन्दुओं ने इस्लाम धर्म को कबूल कर लिया हो !किन्तु इस सबके बाद भी इस तथ्य को नजरंदाज नहीं किया जाना चाहिए कि इस्लाम का जन्म भारत भूमि में नहीं हुआ !इसिलए इस धर्म का धार्मिक आचार पक्छ सनातन धर्म के बिलकुल विपरीत है !इसिलए इस्लामिक देशों में इस्लामिक कायदे कानून बहुत कठोरता से लागू किये जाते हैं  !किन्तु मुसलमान दूसरे देशों में जन्मे और व्योहार द्वारा जन हितकारी धार्मिक पद्धतियों के क्रियानबन पर भी अपना कड़ा विरोध दर्ज कराते हैं !मुसलमान मौलवी मुफ़्ती और उम्र अबदुल्ला ऐसे नेता भी स्कूलों में योग को अनिवार्य बनाये जाने का विरोध कर रहे हैं !ये चाहते हैं की हिन्दुस्तान से सनातन धर्म की समाप्ति हो जाए !और हिन्दुओं को अपनी आधार भूत धर्म और संस्कृति का भी ज्ञान न कराया जाय !ये लोग स्वयं योग की लोक कल्याणकारी चित्तशुद्धि और स्वास्थ्य वर्धक शक्ति से तो अपने बच्चों को बंचित कर ही रहे हैं !जहाँ हिन्दू मुसलिम सभी बच्चे शिक्छा ग्रहण कर रहे है वहां भी धार्मिक कटटरता, अलगाओबाद पैदा कर  रहे है
महाराष्ट्र में ही शिवाजी महाराज ने हिन्दू पद पाद शाही की स्थापना का प्रारम्भ किया था ! !महाराष्ट्र में ही लोकमान्य तिलक जैसे महान हिन्दू नेताओं का जन्म हुआ !और महाराष्ट्र में ही राष्ट्रिय स्वयं सेवक संघ के संस्थापक हेडगेवार का जन्म हुआ ! और महाराष्ट्र में ही प्रखर राष्ट्रभक्त त्यागी तपस्वी विचारक और हिन्दू धर्म को नवजीवन प्रदान करने वाले गुरु गोलवलकर का जन्म हुआ !जो अपनी हिन्दू निष्ठा के कारण उनके भी आदर और श्रद्धा के पात्र थे ! जो संघ के विचारों के घोर विरोधी थे !वीरसावरकर भाईओं की जन्मस्थली भी महाराष्ट्र ही है !और महात्मा गांधी की हत्या करने के लिए दो बार हमले महाराष्ट्र में ही हुए !और अंत में उनकी हत्या भी महाराष्ट्रियन गोडसे ने ही की थी !महाराष्ट्र में ही शिवसेना के जन्म दाता बालासाहेब ठाकरे का जन्म हुआ ! और उन्होंने ही शिवसेना को जन्म दिया !जो इस समय भाजपा  के साथ सत्ता में हैं !अब उसी महाराष्ट्र में एम आई एम का प्रवेश मुसलमानो में जिन्ना का नया अवतार ओवेसी का भी प्रवेश हो गया है !जो मुसलमानो को संगठित कर उनमे मुसलिम कटटरता और अलगाव बाद का बीजा रोपण कर रहा है !इसिलए शिवसेना में और इनमे संघर्श होना निश्चित है !किन्तु भारत की संबैधानिक धर्मनिरपेक्छ्ता की दृस्टि से ये दोनों ही संगठन देश के व्यापक हितों के विरुद्ध हैं !शिवसेना का हिन्दू कटटरवाद और एम आई एम का मुसलमानो का अलगाॅव बाद दोनों कोही देश में प्रश्रय नहीं मिलना चाहिए !
महिलाएं भी पुरुषों जैसी भिन्न भिन्न स्वाभाव की हैं !इसिलीए कुछ अलसी कुछ कम क्रियाशील और कुछ आवश्यकता से अधिक क्रियाशील होती हैं !भारत में अभी भी भयानक गरीबी और एक बहुत बढ़ा ग्रामीण छेत्र भी हैं ! !जहाँ महिलाओं को आवश्यकता से अधिक काम करना पढता है !बच्चो का जन्म, उनका लालन पालन घर के भोजन पकाने से लेकर घर की साफ़ सफाई के सभी काम महिलाओं को ही तो करने पड़ते हैं !एक बर्ग महिलाओं का जरूर ऐसा है !जो ग्रहश्थी के भोजन बनाने आदि के  काम लगभग नहीं के बराबर करता है !या करता ही नहीं है !वह वर्ग है !राजनीति में सक्रिय महिलायें ,उद्द्योग पतियों ,बड़े व्योपरियों की पत्नियां  ,सर्विस करने वाली महिलाएं,  वकील, डॉक्टर , और अन्य सामाजिक सरोकारों से जुडी महिलायें !ये महिलायें अब शहरों से लेकर कस्बों तक पहुँच गयी हैं !बड़े सरकारी अधिकारीयों की पत्नियां नेताओं की पत्निया तथा सरकारी कर्मचारियों की पत्निया को भी लगभग नहीं के बराबर काम करना पड़ता है !इसीलिए ऐसे घरों में जंक फ़ूड की पहुँच हो गयी है !और भोजन के पदार्थ भी पूरी तरह से मिलाबटी i और अशुद्ध पहुचने लगे हैं !उन्हीपरिवारों में मेगी आदि का प्रवेश हो गया है

Sunday, 7 June 2015

विश्व में सिर्फ अधिकाँश मुसलिम राष्ट्रों में ही  इस्लाम के कानून लागू है !इसीलिए इन देशों में दूसरे धर्म के लोगों को अपने धर्म का आचरण या पूजा स्थल आदि निर्माण करने की आजादी नहीं है!  पाकिस्तान अफगानिस्तान आदि मुसलिम देशो में तो मंदिर तोड़ने और चर्च जलाने आदि के समाचार तो प्रायः समाचारों में आते ही रहते हैं ! इन देशों में ईशनिंदा जैसे कानून भी हैं !जिनका अन्य कानूनो की तरह दुरपयोग भी होता है !किन्तु मुसलिम देशों में भी मुस्लमान इन मुसलिम कानूनो की बौद्धिक व्याख्या करने लगे हैं !और इस्लामिक कानूनो पर प्रश्न चिन्ह भी  खड़े करने लगे हैं !परिणाम स्वरुप ऐसे मुसलमान चरम पंथियों द्वारा मार दिए जाते हैं!या फिर बे अपनी जान बचाने के लिए अन्य देशों की शरण ले लेते हैं !धार्मिक उदारता पश्चिमी राष्ट्रों में बहुत अधिक है !इसीलिए अधिकाँश इस्लाम के विरुद्ध लिखने या बोलने वाले इन्ही देशों में जा कर शरण लेते हैं !और ये देश उनको पूरा सुरक्षा कवच भी प्रदान करते हैं !भारत भी धर्मनिरपेक्छ देश हैं !किन्तु यहाँ मुसलमानो की धार्मिक भावनाओ को ठेश पहुचाने वालों को शरण नहीं दी जाती है !अभी हाल ही में सऊदी अरब में ३१ वर्षीय ब्लॉगर तथा एक्टिविस्ट रेफ बदावी को सऊदी अरब के सुप्रीम कोर्ट ने १००० कोड़े मारने की और १० साल की सजा सुनाई है ! रेफ ने २००८ में एक ऑनलाइन फोरम लिबरल सऊदी नेटवर्क बनाया था इसमें बो सऊदी अरब की धार्मिक और राजनैतिक नीतियों पर आलोचनात्मक लेख लिखते थे और बहस भी कराते थे !इस प्रकार की जो आवाज धार्मिक कट्टरता के विरुद्ध अब मुसलिम बुद्धिजीवियों द्वारा उठाई जा रही है !इसके सकारात्मक परिणाम भविष्य में देखने को मिलेंगे !
भू सीमा समझौते का तत्कालीन विपक्छ की नेता और वर्तमान विदेशमंत्री सुषमा स्वराज ने जब केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी !तब इसका विरोध किया था !किन्तु मोदी जी की सरकार ने इसे स्वीकार कर लिया है !इस समझौते में भारत ने दिया अधिक है और पाया कम है !इसीलिए स्वाभाविक है कि बांग्लादेश के समाचार पात्र मोदी जी का गुण गान करें !बांग्लादेश के लोग इस समझौते को शेख हसीना सरकार की सफलता के रूपमे देख रहे हैं !प्रधान मंत्री के दौरे में बंगाल की मुख्य मंत्री ममता बनर्जी भी साथ थी !इस से पता लगता है की वह भी इस समझौते के समर्थन में हैं !देश की किसी भी पार्टी ने इस समझौते का विरोध नहीं किया है !इस से लगता है की यह समझौता दोनों देशों के हित में हैं !बैसे भी शेख हसीना की सरकार भारत की स्वाभाविक मित्र है !और पड़ोसी देशों से मित्रता पूर्ण व्योहार बनाना और कायम रखना यह भारत की विदेशनीति का प्रमुख हिस्सा है !
वैदिक धर्म और संस्कृति की रक्षा के लिए गुरु गोविन्द सिंह जी ने स्वयं अखंड तपस्या हिमालय की पवित्र तलहटी में की थी !और धर्म की रक्षा के लिए ही धर्म की रक्षा के लिए समर्पित पंथ खालसा को जन्म  दिया था !समय का उलटफेर बड़ा भयानक होता है !आज सिख ही आपस में एक दूसरे पर तलवारों सेप्रहार कर रहे हैं !आज का समय हिंसा का नहीं है !सद्भाव और शांति का है !आज की मांग हिंसक नहीं अहंसिक धर्म की है !धर्म का काम दंड देने का नहीं है !दंड देने और व्यबस्था करने की शक्ति लोकतंत्र में सविंधान के अनुसार शासन  में सन्निहित है !धर्म का काम सिर्फ सद्गुणों और सदाचार तथा सभी धर्मों में सद्भाव स्थापित करने का है !सिखों ने धर्म की रक्षा के लिए तलवार उठाई थी !और अद्वतीय वीरता का प्रदर्शन किया था !आज उसी वीरता का प्रदर्शन सिखों को हिंसा मुक्त धर्म की स्थापना के लिए करना चाहिए !!लेकिन अहिंसा का मतलब कायरता नहीं है !बल्कि अहिंसा का अर्थ श्रेष्ठतम आत्मशक्ति का प्रदर्शन करना है !जिसका दर्शन पूर्व काल में नानकदेव और बुद्ध और  महावीर में होता है  !और आधुनिक काल में गांधीजी और आचार्य विनोभा भावे में दिखाई देता है

Saturday, 6 June 2015

लक्ष्मीजी का वाहन उल्लू क्योँ हैं ?!इस पर अनेक प्रकार के शाश्त्र सम्मत और समय के अनुसार व्याख्यएं प्रस्तुत की जाती हैं !लक्ष्मी चंचल है !यह बात भी अनुभव सिद्ध है !किन्तु लक्ष्मी शीलबान के पास स्थिर रहती है और उसकी प्राप्ति भी होती है !इसका एक प्रसंग महाभारत में है !धृतराष्ट्र ने अपने पुत्र दुर्योधन से कहा कि जैसी युद्धष्ठर   के पास लक्ष्मी है ! वैसी या उस से भी अधिक यदि लक्ष्मी की प्राप्ति तुम करना चाहते हो तो शीलबान बनो ! शीलबानो के लिए संसार में कुछ भी असंभव नहीं है !दुर्योधन ने पूंछा वह शील कैसे प्राप्त होता है ? धृतराष्ट्र ने कहा कि मन वाणी क्रिया द्वारा किसी भी प्राणी का द्रोह ना करना ,सब पर दया करना और यथा शक्ति दान देना यह शील कहलाता है अपना जो भी पुरुषार्थ और कर्म दूसरों के लिए हितकर ना हो अथवा जिसे करने में संकोच अनुभव होता हो उसे कभी भी नहीं करना चाहिए ! !नरेश्वर यद्द्पि कहीं कहीं शीलहीन मनुष्य भी लक्ष्मी को प्राप्त कर लेते हैं तथापि बे चिरकाल तक उसका उपभोग नहीं कर पाते हैं और जड़मूल सहित नष्ट हो जाते हैं  ! इसीलिए इस उपदेश को यथार्थ रूप से जानकार और समझ कर शीलवान बनो
भारतीय राजनीति  में जो नेता सफलता और लोकप्रियता प्राप्त कर लेता है ! उसके आस पा जी हुजुरिओं का समूह इकठ्ठा हो जाता है !और वह नेता की हाँ में हाँ और नेता की पसंद और रुख देख कर बात करता है !ऐसे लोग अपनी जी हजूरी से सही और निष्पक्छ सल्लाह देने वालों को नेता से दूर कर देते हैं !लम्बी गुलामी के कारण अभी भी और आज भी राजनैतिक नेताओं का ऐसा  स्वाभाव बना हुआ है !एक बार गांधीजी से तत्कालीन वाइसराय इरविन ने कहा था कि भारत के लोग सत्ता से  प्रभावित हो जाते हैं !और सत्ताधारी के सामने असहमति नहीं दिखाते हैं !ये जी हजुरिये नेहरूजी के समय में भी थे  !और शाश्त्री जी के समय में भी  थे ! और इंदिरा जी के समय भी थे !इन्ही इंदिराजी के समर्थक जी हुजूरियों  ने इंदिराजी को गुमराह कर ऑपरेशन ब्लू स्टार करवा दिया !इंदिराजी को किंचित मात्र भी संदेह नहीं था !कि सिख लोगों के पवित्र स्थल पर यह परिणाम आएगा !और उन्होंने यह स्वप्न में भी नहीं सोचा था कि उनका सिख  अंगरक्षाक उनको गोलिओं से भून देगा !एक अत्यंत उच्च कोटि कि  महान देश भक्त साहसी नेता का जिसने अपने प्रधान मंत्री के काल में असाधारण  देश में विकास के कार्य किये !और जिनको भारत के विपक्छ के नेता अटलबिहारी बाजपेयी ने दुर्गा कहा हो !उस महान महिला का इतना दुखपूर्ण निधन होगा और उनकी यश कीर्ति में ये काला धब्बा लग जाएगा