Sunday, 21 June 2015

समय का उलटफेर बहुत ही आश्चर्य जनक होता है ! पश्चिमी देशों में यह फादर डे मदर डे  मनाने का सिलसिला शुरू हुआ !अब वहां से चलकर यह भारत में भी आ पहुंचा है !और यहाँ भी मनाया जाने लगा है !तथा यहाँ का मीडिया भी इसकी प्रसंसा  में बिभिन्न  प्रकार के लेख और आलेख प्रकाशित करने लगा है !जिस से प्रभावित होकर अब आम आदमी भी अपने पिता के प्रति आदरसूचक शब्दों से संस्मरण सुनाने लगा है !पश्चिमी संस्कृति में ये फादर मदर डे इसीलिए मनाये जाते हैं क्योँकि वहां संतान का जन्म बिना विवाह के भी लज्जास्पद नहीं माना जाता है !विवाह भी वहां प्रायः टूटते रहते हैं ! इसीलिए संतानो की माता कोई और होती है और पिता कोई और होते हैं !इसीलिए बच्चे अपने माता पिता को आदर इन फादर मदर डे मनाकर देते हैं !किन्तु भारत में कम ही ऐसा होता है की संतान की माता कोई और हो और पिता कोई और हो !यह पश्चिमी और भारतीय संस्कृति में मूल भेद है !अब भारत में भी तलाक के मुकदम्मे बड़ी मात्रा में दायर होने लगे हैं !भविष्य में यहाँ भी यह स्थिति बन सकती है की संतान के माता पिता अलग अलग हों !किन्तु ऐसी स्थिति अगर बनेगी तो यह भारतीय संस्कृति का नाश करने बाली होगी !और पाश्चात्य संस्कृति में शादियां टूटने के कारण जो अवसाद और अपराध करने की प्रवृत्ति युवाओ में   बढ़ रही है ! भारत के  युवा भी इस रोग से ग्रस्त हो जाएंगे !यद्द्पि भारत में भी अब  माता पिता की उपेक्छा और अपमान की घटनाएं बड़ी तेजी से बढ़ रही हैं  !और ओल्ड एज  होम खोले जा रहे है तथा माता पिता की उपेक्छा करने वाली संतान के प्रति सजा का विधान भी कानून में किया गया है !इसीलिए देशबासियों को तथा मीडिया को भी भारत की उस प्राचीन संस्कृति को युवाओं के सामने रखना चाहिए जिसमे कहा गया है जिन पुत्र पुत्रियों के द्वारा पिता माता अग्नि गुरु और आत्मा इन पांचो आदर  किया जाता है वह संसार में भीसुख पाते है ! और मृत्यु के बाद स्वर्गलोक में जाते हैं !भारतीय संस्कृति में माता पिता को जीवित भगवान माना गया है !इसीलिए भारत में मीडिया को पाश्चात्य और भारतीय संस्कृति का अंतर बता कर  फादर डे की व्यर्थता बताते हुए भारतीय संस्कृति की पिता में भगवान के तरह पूज्य भाव की स्थापना का प्रयत्न करना चाहिए ! और विवाह बंधन अटूट रहें जिस से पृथक पृथक फादर डे मदर डे मनाने की आवश्यकता न पड़े इस तथ्य को भी समाज के सामने पूरी शक्ति से रखना चाहिए  !

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