Tuesday, 9 June 2015

मनु स्मृति भारत में सामजिक व्यबस्था  को नियंत्रित करने वाली प्रथम कानून की पुष्तक है !कानून समय और परिश्थिति के अनुसार हमेशा बदलता रहता है !इसिलए मनु स्मृति के बाद भी अनेकों स्मृतियों को लिखा गया ! जिनमे याजबल्क्य स्मृति प्रमुख है !और इसमें मनु के समय के बहुत से कानून बदल दिए गए हैं !अब तो सारे विश्व में शाशन ब्यबस्था बदल गयी है !इसीलिए कानून का निर्माण देशों की सरकारें करती हैं !कोई धार्मिक किताब नहीं करती है !सिर्फ इस्लामिक राष्ट्रों में जरूर इस्लामिक कानून लागू है !बुरी आदतों का निर्माण कैंसे होता है ?क्यों होता है ?और उनके निराकरण के लिए क्या उपाय किये जाने चाहिए ? !इसका मूल कारण गीता में बताया गया है !अर्जुन भगवान श्री कृष्णा से पूँछता है मनुष्य ना चाहता हुआ भी जबरदस्ती लगाए हुए की तरह किस से  प्रेरित होकर पाप का आचरण करता है ?३(३६) भगवान श्री कृष्णा उत्तर देते हुए कहते हैं !कामनाएं ही पाप का कारण है ! और कामनाओ की पूर्ति में जब बाधा उत्पन्न होती है  ! तब क्रोध का जन्म होता है  ! किसी भी मनुष्य की सभी कामनाएं कभी भी पूरी ना हुई हैं ! और ना हो सकती हैं ! और ना होंगी !  कामनाएं ही जब अवांछित और अनियंत्रित  हो जाती हैं तब  मनुष्यों को  पाप अर्थात गलत कार्य करने को प्रेरित करती हैं !अवांछित और अनियंत्रत अतृप्त कामनाएं ही मनुष्यों की शत्रु हैं ! जैसा में चाहूँ उसकी प्राप्ति हो जाय इसी को कामना कहते हैं ! इन्ही कामनाओ में अनंत पाप भरे हुए हैं ! जब तक मनुष्य के अंदर अवांछनीय कामनाओ की तृप्ति के लिए गलत पाप पूर्ण कर्म करने की प्रवृत्ति का नाश नहीं हो जाता है ! तब तक मनुष्य सर्वथा निर्दोष नहीं हो सकता है ! कामनाओ के सिवाय पाप और क्रोध का कोई अन्य कारण नहीं है ! मनुष्य से ना तो ईश्वर पाप कराता है ! न परिस्थिति पाप कराती है  और ना धर्म ही  पाप कराता है ! प्रत्युत मनुष्य स्वयं ही कामनाओ के बसी  भूत हो कर पाप और क्रोध करता है !

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