सूर्य नमस्कार मुसलिम धर्म में हराम और हिन्दू धर्म में स्वीकृत और पूज्यनीय है !तो क्या इस्लाम में जो हराम है उसे अन्य धर्मों को भी वैसा ही मानकर स्वीकार कर लेना चाहिए ? योग सनातन धर्म की परमात्मा से जुड़ने की पद्धति है !योग की क्रियायों से चित्त मन बुद्धि की शुद्धि होती है ! जिससे शरीर स्वस्थ तो होता ही है चित्त बुद्धि और मन भी शुद्ध होता है !योग साधना अनादि काल से भारतीय जीवन पद्धति का अंग रही है !सनातन धर्म को पूरी आजादी के साथ यदि भारत में ही अपनी साधनाओं को क्रियान्बित करने की स्वतंत्रता प्राप्त नहीं होगी !तो फिर और किसी देश में तो हो ही नहीं सकती है !हिन्दू विद्यर्थियों को गीता महाभारत आदि ग्रन्थ नहीं पड़ा सकते योग नहीं सीखा सकते !तो फिर क्या सिखा सकते हैं ?मुसलमान इस मामले में अधिक भाग्यशाली हैं !संसार में करीब ६० या ६५ मुसलिम मुल्क हैं !जहाँ इस्लामिक कानून लागू हैं !और दूसरे धर्मों के लोगों को अपने धर्म के आचरण करने की आजादी नहीं है !किन्तु भारत ऐसे देश में फिलहाल मुसलमान बड़ी संख्या में तो हैं किन्तु बहुमत में नहीं हैं !वहां भी बे बहुसंख्यक हिन्दुओं को योग विद्यालयों में सिखाने का विरोध कर रहे हैं !बे वन्दे मातरम का भी विरोध करते हैं !तो क्या किया जाय इनके विरोध के कारण सूर्य नमस्कार ९०%विद्यार्थियों को न सिखाया जाय !हिन्दू धर्म सूर्य में परमात्म के नूर की ही उपासना करता है !भगवान श्री कृष्णा ने गीता में कहा है १५ (१२)सूर्य को प्राप्त हुआ जो तेज संपूर्ण संसार को प्रकाशित करता है वह प्रकाश परमात्मा (अल्लाह ) का ही है ! सूर्य का नहीं है !अब हिन्दू लोग परमात्मा की आज्ञा माने या मुल्ला मौलविओं की ?
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