Thursday, 25 June 2015

महाबीर त्यागी जो नेहरूजी के मंत्रिमंडल तथा शाश्त्रीजी के मंत्रिमंडल में भी कैबिनेट मंत्री रहे , ने एक पुस्तक लिखी है -''-मेरी कौन सुनेगा  !''उसमे जिस प्रकार से इस घटना का जिक्र किया गया है !उसमे इस घटना का विवरण भिन्न प्रकार से दिया गया है !राजगोपालाचारी भारत के प्रथम गवर्नर जनरल थे !वह अत्यंत उच्चकोटि के विद्द्वान और देशभक्त थे !तथा स्वतंत्र और निर्भीक व्यक्ति थे !उनकी पुत्री लक्ष्मी गांधी जी के पुत्र देवदास गांधी को व्याही थी !इसके बाद भी जब बे तमिलनाडु के मुख्यमंत्री थे उन्होंने गांधीजी के जन्मदिन २ अक्टूबर को सार्वजानिक अवकाश घोसित करने से मना कर दिया था ! इतना ही नहीं उन्होंने १९४२ में गांधीजी के भारत छोडो आंदोलन को भी समयानुकूल न मानकर कांग्रेस से  त्याग पत्र दे दिया था !बे नेहरूजी के बुलाने पर भी प्रथम पंचवर्षीय योजना पर नेहरूजी द्वारा सलाह मांगे जाने पर भी ना तो दिल्ली गए थे ! और ना ही उन्होंने नेहरूजी को  इस काम के लिए चेन्नई आने की जरुरत समझी थी !भारत  का राष्ट्रपति बनने की लालसा ना तो डॉ राजेन्द्र प्रसाद कि  थी और ना ही राजगोपाल चारी की थी !क्योँकि गोपालाचारी भारत के प्रथम गवर्नर जनरल थे !इसलिए यह उचित नहीं था की उनके स्थान पर किसी और को राष्ट्रपति बनाया जाय !जब यह प्रस्ताव नेहरूजी की तरफ से  आया कि राजगोपालाचारी को भारत का प्रथम राष्ट्रपति घोषित किया जाय !  तो महाबीर त्यागी ने इसकाविरोध किया !परिणाम स्वरुप मतदान हुआ जिसमे राजा जी केविरोध में सिर्फ त्यागी जी का ही मत पड़ा !बाद में नेहरूजी को राजेन्द्रप्रसाद ने स्वयं राजा जी के पक्ष में अपना समर्थन लिख कर दे दिया !जब सत्येंद्रनारायण सिन्हा जोकि नेहरू मंत्रिमंडल मेमंत्री और बाद में मध्यप्रदेशके राज्यपाल भी रहे ने यह बात सरदार पटेल को बतायी !तब पटेल ने राजेन्द्र बाबू से पूछा की क्या अपने यह लिख कर दिया है ?राजेंद्र बाबू ने कहा राजा जी मुझसे भी अधिक योग्य व्यक्ति हैं !और हम नहीं चाहते कि देश के लोगों में यह सन्देश जाय की हमलोग पद के भूखे हैं !हाई कमांड की मीटिंग में नेहरूजी ने राजेन्द्र बाबू के समर्थन का हवाला देकर पटेल से राजा जी के नाम की घोसणा के सम्बन्ध में बात की !इस पर पटेल ने कहा की आपके प्रभाव के कारण सदस्य राजा जी के नाम पर सहमति व्यक्त कर रहे हैं ! वैसे सभी की इक्छा राजेंद्र प्रसाद  के पक्छ में है !नेहरूजी एक मिनट मौन रहे और फिर  उन्होंने राजेंद्र प्रसाद के नाम की घोसणा   कर दी !नेहरू जी झूठ नहीं बोलते थे इसका जिक्र मोरारजी भाई और आचार्य विनोवा भावे ने भी किया है ! !नेहरूजी के मंत्रिमंडल में लगभग सभी मंत्री अपने पद से बहुत महान थे !इसी प्रकार राजेंद्रप्रसादे डॉ राधा कृष्णनके लिए तष्ट्रपति पद बहुत छोटा था !राजेन्द्रप्रसाद डॉ राधाकृष्णन की महत्ता इसलिए नहीं थी कि बे राष्ट्रपति थे ! बल्कि राष्ट्रपति के पद का गौरव  इसलिए  था  की बे राष्ट्रपति पद पर आसीन थे !इसीप्रकार नेहरू जी की महानता के सामने प्रधानमंत्री पद बहुत छोटा था !नेहरूजी के जीवनकाल में भी यह प्रशन  पूंछा जाता था  कि नेहरू के बाद कौन ?उनके प्रखर विरोधी भी नेहरू के विकल्प के रूप में उनके जीवन काल में अपने आपको प्रस्तुत नहीं करते थे !

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