Saturday, 31 October 2015

आचरण योग्य नीति -----(१)दूसरों में फूट डालने का जिनका स्वाभाव है ! जो कामी ,निर्लज्ज शठ और प्रिसिद्ध पापी हैं बे साथ रखने के अयोग्य और निन्दित माने गए हैं ! इन दोषों के अतिरिक्त और भी जो महान दोष हैं उनसे युक्त मनुष्यों का जहाँ तक संभव हो साथ नहीं करना चाहिए ! ऐसे व्यक्तियों से जब सौहाद्र भाव किसी भी कारण से समाप्त हो जाता है ! तब उस सौहाद्रसे होने वाली सिद्धि का फल और प्रेम तथा सुख का भी नाश हो जाता है ! फिर बे व्यक्ति निंदा करने लगते हैं ! और विनाश करने का उद्द्योग भी करने लगते हैं ! इस प्रकार के नीच और अधम क्रूर पुरुषों से होने वाले संग पर अपनी बुद्धि से पूर्ण विचार करके विद्वान पुरुष उन्हें दूर से ही त्याग दे  !
(२)जो बुद्धिमान पुरुष अपने पोषण योग्य कुटुम्बियों ,दरिद्र ,दीन तथा रोगी पर अनुग्रह   करता है ! वह सभी प्रकार की समृद्धि से युक्त हो कर अनंत कल्याण का अनुभव करता है !
(३)जो लोग अपने भले की कामना करते हैं ! उन्हें अपने देश बासियों को उन्नति शील बनाना चाहिए ! जो अपने देश बशियों से प्रेम करता है ! ,उनका आदर और सत्कार  करता है ! उसकी इस भावना और कृत्य से उसके  हित के साथ राष्ट्रहित की भी बृद्धि होती है ! जो अपने राष्ट्र बासियों को उन्नतिशील बनाता है ! उसकी उन्नति भी अपने अप्प ही हो जाती है !
(४)जो मनुष्य धीर और राष्ट्र प्रेम से युक्त पुरुषों के वचनो के परिणाम पर विचार करके उन्हें कार्य रूप में परिणित करता है ! वह चिरकाल तक यश का भागी बना रहता है  !
(५)अत्यंत योग्य एवं कुशल विद्वानो द्वारा  भी किया गया ज्ञान व्यर्थ ही है  ! यदि उस से कर्तव्य का ज्ञान न हुआ अथवा ज्ञान होने पर भी उसको कर्तव्य रूप में धारण नहीं किया !

Friday, 30 October 2015

व्योहारिक ज्ञान ----(१) मुर्ख मनुष्य विद्या ,शील ,अवस्था ,बुद्धि, धन में बढे सम्मानीय पुरुषों का सदा विरोध और अनादर किया करते हैं !
(२)जिसका आचरण और चरित्र निंदनीय है ! जो मुर्ख और गुणों में दोष देखने का आदी है ! अधार्मिक और गंदे वचन बोलने वाला है ! और अनावश्यक क्रोध करता है ! वह हमेशा संकटों से घिरा रहता है !
(३)जो राजनेता ठगी नहीं करता है ! अपने कर्तव्य का पालन करता है ! जनता के सामने दिए गए आश्वासनों को पूर्ण करने का प्रयत्न करता है ! और अपनी बात कुशलता पूर्वक रखता है !वह हमेशा लोकतंत्र में जनता के आदर का पात्र बना रहता है !
(४)किसी को भी धोखा न देने वाला ,चतुर ,कृतज्ञ ,बुद्धिमान और कोमल स्वाभाव वाला राजनेता यदि धन के अभाव से ग्रस्त हो तब भी उसके सहायक उसका साथ नहीं छोड़ते है !
(५) कुछ लोग गुणों के कारण समृद्ध होते हैं ! और कुछ लोग धन संपत्ति से ! जो संपत्ति बान होने के बाद भी गुणों से हीन हैं, उन्हें सर्वथा त्याग देना चाहिए !
(६)जो अधिक गुणों से संपन्न और विनयी तथा अहिंसक स्वभाव का है  !वह प्राणियों का तनिक भी संघार होते नहीं देख सकता है ! और इसकी उपेक्छा भी नहीं कर सकता है !
(७)जो मनुष्य दूसरों की निंदा करने में ही लगे रहते हैं ! दूसरों को दुःख देने और आपस में फूट डालने के लिए सदा उत्साह के साथ प्रयत्न करते हैं ! ,जिनका विचार ,आचरण दोष युक्त है ! तथा जिनका साथ करने में भी बड़ा खतरा है ऐसे लोगों से कभी भी किसी प्रकार की आर्थिक या अन्य प्रकार की मदद लेने से बुद्धिमान मनुष्य को बचना चाहिए ! ऐसे लोगों की सहायता करने में भी बड़ा दोष है !और उनसे सहायता लेने में भी दोष है !
(८)जो बृद्धि  भविष्य में नाश का कारण बने उसे अधिक महत्त्व नहीं देना चाहिए ! और उस नुक्सान का भी बहुत आदर करना चाहिए जो आगे चलकर भविष्य में उन्नति का कारण हो !
(९)बास्तव में नुक्सान ही बृद्धि का कारण होता है  !वह नुक्सान नहीं है किन्तु उस नुक्सान को लाभ ही मानना चाहिए ! और उस लाभ को नुक्सान ही मानना चाहिए ! जिसे प्राप्त करने से भविष्य के बहुत से लाभ प्राप्त करने का नाश हो जाय !
जगद गुरु शंकराचार्य का सांई की पूजा भगवान के रूप में निषेध करने के वक्तव्यों को विवादास्पद ना मानकर सनातन धर्म की रक्छार्थ मानना चाहिए !आदि शंकराचार्य ने भारत में सनातन धर्म के प्रचार ,प्रसार और रक्छा के लिए चार पीठों की स्थापना की थी !इसलिए जो भी शंकराचार्य की पीठ पर विराजमान होता है !उसका यह कर्तव्य हो जाता है !कि वह सनातन धर्म का प्रचार ,प्रसार करे और उसकी रक्छा करे !भारत में सांई को भगवान के रूप में पूजा जा रहा है !और उनके मंदिर स्थापित किये जा रहे हैं !तथा उनके भजन ओम साईं ,साईं राम ,साईं कृष्ण के नाम से गाये जाते हैं !उनके मंदिरों में सनातन धर्म के पुजयनीय शंकर भगवान राम कृष्ण देवी देवताओं आदि की मुर्तिया छोटी और साईं  की बड़ी मूर्ति के नीचे स्थापित की जाती है !वैदिक गायत्री मन्त्र को तोड़ मरोड़ कर साईं के साथ जोड़ दिया गया है !इसलिए जगद्गुरु शंकराचार्य का साईं की पूजा का सनातन धर्म के मानने वाले लोगों से ना करने का आग्रह विवादास्पद नहीं कहा जा सकता है !

Thursday, 29 October 2015

ये जो सम्मान प्राप्त सभी छेत्रों के सम्मानित विचारवान विद्वान सम्मान लौटा रहे हैं !इसको गंभीरता से लिया जाना चाहिए !ये सभी विद्वान भाजपा से राजनैतिक विरोध के कारण सम्मान नहीं लौटा रहे हैं !इसका कारण उनकी अबतक की निर्मित धर्मनिरपेक्छ्ता की सोच है !जिसका विकास भारत में आजादी के बाद बहुत विस्तार से हुआ है !विभाजन के बाद भारत में मुस्लिमो की आबादी मात्र ४ करोड़ रह गयी थी जो अब बढ़कर १७ करोड़ जनगड़ना के मुताबिक हो गयी है !देश में कांग्रेसी शाशन के दौरान मुसलमानो और हरिजनों के विकास और सम्मान पर बहुत जोर दिया गया !इस दौड़ में पिछड़ी जातियों और सवर्णो की उपेक्छा की गयी !भारत की तत्कालीन दलितों की दयनीय दशा देख कर यह उचित भी था !मुसलमानो के प्रिति भी विभाजन के बाद सहानीभूति पूर्ण रबईआ  अपनाना भी ठीक था !किन्तु हिन्दुओं की उपेक्छा करना उचित नहीं था !दूसरी और पाकिस्तान में जो अन्याय और अत्याचार हिन्दुओं पर हुआ ! और उनकी आबादी घट कर २४% से १%तक आगयी !उसका खराब असर भारत में बहु संख्यक हिन्दू समाज पर हुआ !जिसके परिणाम स्वरुप !राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ लगातार मजबूत होता गया !और विश्व हिन्दू परिषद आदि संघ के सहकारी संगठन भारतसे बाहर के देशों में भी रहने वाले हिन्दुओं में लोकप्रिय हो गए !और आज यह हिन्दू विचार विकसित होते होते केंद्र में निष्ठाबान स्वयं सेवक मोदी के नेत्रत्तवा में सत्ता पर आसीन हो गया ! और अब सभी हिन्दू संस्कृति को पोषण देने वाले लोग मुसलमानो को देश के दुश्मन के रूप में देखने लगे हैं !और गाय आदि को मुद्दा बनाकर अबतक देश में जो वातावरण निर्मित हुआ था !जिसे धर्मनिरपेक्छ्ता वादी तत्त्व साम्प्रदायिक सद्भाव कहते हैं !उसको नष्ट कर रहे हैं !इसी के विरोध में ये गण्यमान पुरुष्कार प्राप्त लोग सम्मान लौटा रहे हैं !हिन्दू संस्कृति के पोषक तत्त्वों को भी यह समझना चाहिए कि हिन्दू धर्म कभी भी कट्टरता और धार्मिक संकीर्णता का पोषक नहीं रहा है !इसलिए धर्मनिरपेक्छ भारत को पाकिस्तान या मुसलिम राष्ट्रों की तरह संकीर्णता और कट्टरता का पोषक नहीं बनाना चाहिए ! इन विद्वानो को भी अपनी सोच को सर्वसामान्य सोच की अभिव्यक्ति बनाकर सम्मान लौटने के बजाय अपने विचारों के प्रवाह को जनता तक पहुंचाना चाहिए ! समाज में न्याय  हो और न्याय के आधार पर ही सभी धर्मों का विकास हो !यह प्रयत्न सभी को करना चाहिए !और वैदिक संस्कृति को धारण करने वाले भारत भू भाग में जन्मी उदार और सर्व समावेशी संस्कृति भी सुरक्छित रहे इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए !गाय भारत की अर्थव्यबस्था और आदर की अनादि काल से पात्र रही है !उसका भी पालन पोषण और संरक्छण होना चाहिए ! गाय के मॉस का निर्यात और देश में भक्छण बंद होना चाहिए !गाय के दूध घी आदि को बढ़ाबा देना चाहिए !गाय एक अत्यंत  उपयोगी पशु है !और उसे वेदों में विश्व की माता कहा गया है !इसलिए उसका बध बंद होना चाहिए !किन्तु गाय को माता मानने वाले लोगों को भी उसे सड़कों पर अबारा और भूखा छोड़ कर पॉलिथीन और गंदगी खाने के लिए नहीं छोड़ना चाहिए !
व्योहारिक ज्ञान -----(१)जिसको बुद्धि के वाण से मारा गया है  !उस मनुष्य का उपचार ना कोई वैद्य ,न कोई दबा ,ना होम ,ना मन्त्र ,जप ,ना कोई मांगलिक कार्य ,ना तांन्त्रिक प्रयोग और ना ही भली भांति सिद्ध जड़ी बूटी ही कर सकती है अतः निर्बल और सीधा समझकर कभी भी बुद्धिमानो का अनादर या उनसे झगड़ा नहीं करना चाहिए ! उनसे सदा सावधानी पूर्वक आदर सहित व्योहार करना चाहिए !
(२)अग्नि एक महान तेज है ! वह अग्नि काठ  में छिपी रहती है ! जब तक कोई उसे प्रज्वलित नहीं करता है ! तब तक वह उस काठ को नहीं जलाती है ! वही अग्नि यदि काठ से मथकर उद्दीपत कर दी जाती है ! तो वह अपने तेज से उस काठ को जंगल को तथा दूसरी सभी नजदीकी  वस्तुओं को जलाकर खाक कर देती है ! इसलिए अपने विश्वासपात्र और विश्वसनीय व्यक्तियों को अनावश्यक संदिग्ध दृष्टि से अप्रमाणित तथ्यों के आधार पर अपमानित कर उनका साथ नहीं छोड़ना चाहिए ! अन्यथा बे काठ में छिपी हुई अग्नि के समान अपने आश्रय दाता का सर्वनाश कर देते हैं !
(३)स्त्रियां घर की लक्छमी कही गयी है ! बे अत्यंत सौभाग्य  शालिनी ,आदर के योग्य ,पवित्र तथा घर की शोभा होती हैं अतः उनका विशेष तौर पर सम्मान करना चाहिए !
(४)अनुभवी ग्यानी विज्ञानी अध्यात्मनिष्ठ  विद्वान अग्नि के सामान तेजस्वी ,छमाशील और विकार शून्य संत पुरुष सदा काष्ठ में अग्नि की भांति शांत भाव से स्थित रहते हैं  !
(५)धैर्य ,मनो निग्रह ,इन्द्रिय संयम पवित्रता ,दया ,कोमलता ,मधुर वाणी और मित्र से द्रोह न करना ये सात बातें सज्जन पुरुषों में स्वाभाव गत होती हैं !
(६)समय और अवसर के विपरीत बोलने वाला मनुष्य सदैव अपमान का पात्र बनता है !
(७)जिस से द्वेष हो जाता है ! वह ना साधु ,ना सज्जन ,न ही विद्वान और ना बुद्धिमान ही जान पड़ता है ! प्रिय व्यक्ति के तो सभी कर्म शुभ और श्रेष्ठ ही प्रतीत होते हैं ! और जिस से द्वेष हो जाता है उसके सभी कर्म पापमय मालुम पड़ते हैं !
महापुरुषों के जन्म दिवसों पर अवकाश घोसित करने  के बजाय विद्यायोँ और अन्य सामाजिक संस्थाओं में उनके जीवन के कार्यों के बारे  में बताया जाना चाहिए !विद्यार्थियों तथा आमलोगों को तो यह भी ज्ञान नहीं होता है !कि अवकाश किस लिए दिया गया है !जब उन्हें अवकाश से सम्बद्ध महापुरुष के बारे में कहा जाता है !तब बे यह भी नहीं जानते हैं !कि वह महापुरुष कौन थे ?इसके अलावा छुट्टियां घोषित होने के कारण विद्यालयों में शिक्छण कार्य तथा सरकारी कार्यालयों में सरकारी कार्य बाधित होता है ! बेसे भी सरकारी विद्यालयों के अध्यापक और सरकारी अधिकारी काम कम ही करते हैं !जिन महापुरुषों के नाम पर अवकाश घोसित किया जाता है !उनका जीवन कर्म की कर्मठता का ज्वलंत उदाहरण होता है !उन्होंने कर्तव्य कर्म से  अवकाश जब लिया जब बे चिरनिद्रा में  लीन हो गए !अन्यथा कर्तव्य का पालन ही उनके जीवन का विश्राम और अवकाश था !जिस देश का नारा रहा है !आराम हराम है !आज उस देश का नारा हो गया  है कर्तव्य कर्म हराम है !हमारा तो सिर्फ अवकाश ही काम है !सरकार जो गलत परम्परा अवकाशों की डाल रही है !यह उचित नहीं है !परतंत्र भारत में देश भक्ति चरम पर थी !आज देश भक्ति के स्थान पर स्वार्थ भक्ति चरम पर है !गांधी जी भी अपने जन्मदिन पर अवकाश घोषित किये जाने के विरुद्ध थे !जब लोगों ने उनके जन्म दिन को मनाने का आग्रह किया तब उन्होंने कहा था कि मेने अपना जन्म दिन स्वयं कभी नहीं मनाया और न ही मेरे माता पिता ही मेरा जन्म दिन मनाते थे !फिर आप लोग जन्म दिन मनाने का आग्रह क्यों करते हैं ? !जब लोग गांधी जी की बात मानने को तैयार नहीं हुए !तो उन्होंने कहा था कि आप मेरे जन्म दिन पर उपबास कीजिये !चरखा चला कर सूत कातिये और सूत बेचने सो पैसा प्राप्त हो और उपबास से जो बचत हो उसको हरिजन फण्ड में जमा करा दीजिये !राजा गोपाल चारी जो गांधीजी के समधि थे ! और मद्रास प्रान्त  के मुख्य मंत्री थे !उन्होंने गांधी जी के जन्म दिवस पर अवकाश घोसित नहीं किया था !इसी प्रकार की राष्ट्र भक्ति का प्रदर्शन आज के राजनेताओं को करना चाहिए !और देश में कार्य संस्कृति  का निर्माण और विकास करना चाहिए !महापुरुषों के जन्म दिन पर अवकाश घोसित कर गलत परंपरा का निर्माण कर ठलुओं और कामचोरों को काम न करने का माध्यम नहीं बनने देना चाहिए !

Wednesday, 28 October 2015

व्योहारिक ज्ञान ----(१)जिनका मन पाप कर्मों में लगा रहता है  !बे लोग दूसरों के कल्याण मय
 गुणों को जानने की वैसी इक्छा नहीं रखते जैसी की उनके अवगुणो की जानने की रखते हैं !
(२)जो अर्थ की पूर्ण सिद्धि चाहता हो उसे धन के उपार्जन में लोकहित का ध्यान प्रमुखता से रखना चाहिए !जो जनहित को  छति पहुंचा कर धन का उपार्जन और संपत्ति का संग्रह करता है !वह मुर्दे में उत्पन्न कीड़ों के समान नष्ट हो जाता है !
(३)जिसकी बुद्धि पाप कर्मों से हटकर लोक कल्याण के कार्यों में लग जाती है !वही मनुष्य संसार के सृजनात्मक और विध्वंसक स्वरुप को समझ कर नव निर्माण की परम्परा और प्रक्रिया को जन्म देने मे सफल होता है !
(४) जो मनुष्य समयानुसार धर्म, धन और काम का नियमानुसार सेवन करता है ! वही इस लोक में और परलोक में भी धर्म अर्थ और काम को प्राप्त करता है !
(५)जो मनुष्य क्रोध और हर्ष के उठे हुए बेग को नियंत्रण करना जानता है ! और आपत्ति काल  में भी घबड़ाता नहीं है वही मनुष्य सफलता पूर्वक जीवन जीने की कला जानता  है !
(६)मनुष्यों में सदा पांच प्रकार का बल होता है ! जो बाहुबल नामक प्रथम बल है ,वह निकृष्ट बल कहलाता है ! अच्छे सलाह कार से मिलने वाली सलाह दूसरा बल है ! मनीषी लोग धन के लाभ को तीसरा बल बताते हैं ! तथा जो बाप दादों से प्राप्तहुआ मनुष्य का स्वाभाविक बल है ! वह अभिजात नामक चौथा बल है ! जिससे इन सभी बलों का संग्रह होता है तथा जो सभी बलों में श्रेष्ठ बल है ! वह पांचवां बुद्धि का बल कहलाता है !
(७)बुद्धिमान मनुष्य राजनेता ,सांप ,पढ़े हुए पाठ, सामर्थ्यशाली व्यक्ति, शत्रु , भोग सामग्री और आयु पर पूर्ण विश्वास नहीं करते हैं !इन सभी का सावधानी पूर्वक अनासक्ति भाव से सेवन करते हैं !इनका स्वभाव स्वरुप कभी स्थायी और एकसा नही रहता है !
नारद जी भगवद गुणगान करते हुए !सभी लोकों में निरंतर घूमते रहते हैं !जब बे भ्रमण करते हुए संसार में आते हैं !तो सज्जन पुरुषों के लिए उत्तम मार्ग ग्रहण करने का उपदेश भी देते है !महाभारत में बहुत से आध्यात्मिक गूढ़ रहस्योँ को भी प्रस्तुत किया गया है !जिनको तर्क और बुद्धि से सिद्ध नहीं किया जा सकता है !द्रौपदी के जिन पांच पांडव पतियों का जिक्र किया जाता है !बे मूल रूप से एक ही दिव्य शक्ति के पांच रूप थे !व्यास ने इस तथ्य का खुलासा  द्रुपद के सामने किया था !क्योँकि द्रुपद इस बात से सहमत नहीं थे कि उनकी पुत्री का विवाह पांच पांडवों के साथ हो !द्रौपदी का वरण स्वयम्बर में अर्जुन ने किया था !इस के अलावा एक पुरुष की कई पत्निया तो होती थी !किन्तु एक पत्नी के कई पति नहीं हो सकते थे !यह धर्म और मर्यादा तथा नीति के विरुद्ध था !व्यास अपने समय के अलौकिक महात्मा थे !बे दिव्य ज्ञान और दिव्या शक्तियों से संपन्न थे !उन्होंने द्रुपद को दिव्य दृष्टि दे कर पांडवों के पूर्व शरीरों का दर्शन कराया था !और द्रौपदी का भी पूर्व शरीर दिखाया था !द्रौपदी स्वर्गलोक की लक्छमी थी !और पांचों पांडव इन्द्र शक्ति के अंश थे !इसलिए भूतल पर पांच शरीर धारी होने के बाद भी बे तत्त्व रूप से एक थे !द्रौपदी और पांडवों के इस कथानक को व्यास जी ने महाभारत में बताया है !महाभारत मनोरंजन प्रदान करने वाला उपन्यास नहीं है !इसमें अध्यात्म के गूढ़ रहस्यों को प्रस्तुत किया गया है !महाभारत में ८८०० श्लोक ऐसे हैं ! जिनका अर्थ सिर्फ व्यास जानते है !और सुखदेव जानते हैं !आध्यत्म के गूढ़  रहस्य सिर्फ साधना से ही खुलते हैं !नारदजी ने लोकदृष्टि से ही इस नियम का निर्माण किया था !पांडव लोग सभी धर्मानुरागी और धर्म का पालन करने वाले थे !धर्मपालन के लिए ही अर्जुन को यह नियम भंग करना पड़ा था !एक ब्राह्मण की अरणिमन्थन सहित गाय डाकुओं  ने अपहृत कर ली थी !जब उसने अपनी गायों को छुड़ाने के लिए कहा तब !अर्जुन को नियम भंग कर अपना गांडीव धनुष लेने के लिए द्रौपदी के महल में जाना पड़ा था !उस समय युधिस्ठर द्रौपदी के  महल मेँ एक बरष के लिए निवास कर रहे थे !किन्तु जिस समय अर्जुन गए उस समय युधिस्ठर राज दरबार में थे !ब्राह्मण की गायें बापिस दिलाने के बाद अर्जुन नियम भंग की शर्त के अनुसार १२ साल के बनवास को जाने के लिए तैयार हो गए !जब युधिस्ठर को इस बात की जानकारी हुई !तो उन्होंने अर्जुन को समझाया कि बे बनवास को ना जाएँ क्योंकि उन्होंने नियम भंग नहीं किया है !यधिस्ठर ने तर्क दिया कि पहली बात तो जिस समय अर्जुन महल में गए !उस समय बे वहां उपस्थित नहीं थे !(२)आर्य पुरुष दिन में पत्नी के साथ सहवास नहीं करते हैं (३)अर्जुन ने छात्र धर्म का पालन कर लुटेरों से ब्राह्मण की गाय वापिस करायी !(४ )अगर कोई अपराध अर्जुन ने किया भी है !तो उस अपराध को छमा करने का अधिकार मुझे हैं !और मेँ अर्जुन का अपराध छमा करता हूँ !किन्तु अर्जुन ने इन दलीलों को अस्वीकार करते हुए !कहा कि किसी भी तर्क के आधार पर नियम भंग को माफ़ नहीं  किया जा सकता है !अगर मेँ नियम का पालन नहीं करूँगा !तो लोग भविष्य में नियम भांग करेंगे और दंड ना भुगतने  के लिए मेरा उदाहरण प्रस्तुत  करेंगे !इसलिए अर्जुन ने सभी के आग्रह ठुकराते हुए !१२ साल बनवास में बिताये थे !

Tuesday, 27 October 2015

व्योहारिक ज्ञान ------(१)अकर्मण्य ,बहुत खाने वाले ,सबलोगों से बैर करने वाले ,अधिक मायाबी ,क्रूर ,देशकाल का ज्ञान ना रखने वाले और निन्दित वेश रखने वाले मनुष्य से कभी व्योहार नहीं रखना चाहिए !
(२)बहुत कष्ट में होने पर भी कृपण, गाली बकने वाले ,मुर्ख ,धूर्त ,नीच सेवी ,निर्दयी, वैर बांधने वाले और कृतघ्न से कभी भी सहायता की याचना नहीं करनी चाहिए !
(३)क्लेश प्रद कर्म करने वाले ,अत्यंत प्रमादी ,सदा असत्य भासण करने वाले अस्थिर भक्ति भाव रखने वाले ,स्नेह से रहित ,अपने को बहुत अधिक चतुर समझने वाले ,---- इन ६ प्रकार के मनुष्यों की सेवा करने से बचता रहे ! प्रयत्न ये करे की इनकी सेवा और संग कभी करना ही ना पड़े !
(४)धन की प्राप्ति हमेशा सहायकों से ही होती है  !सहायक भी धन प्राप्ति की अपेक्छा रखते हैं ! ये धन प्राप्ति एक  दूसरे पर आश्रित है ! इसलिए परस्पर के सहयोग के बिना इसकी सिद्धि नहीं होती है !
(५)पुत्रों को ऋण के भार से मुक्त कर दे ,उनके लिए उचित जीविका का प्रबंध कर दे ,अपनी पुत्री या पुत्रियों का योग्य बर  के साथ विवाह कर दे ! तत्पश्चात मुनि बृत्ति से समस्त इक्छाओं ,आकांछाओं को त्याग कर मुनि बृत्ति से राग द्वेष रहित होकर लोकहित के लिए मनसा वाचा ,कर्मणा से सम्पर्पित जीवन जिए !
(६)जो सम्पूर्ण प्राणियों के लिए हितकर और अपने लिए भी सुखद हो ! ,उसे ईश्वरपर्ण बुद्धि से करे ! सम्पूर्ण सिद्धियों का यही मूल मन्त्र है !
(७)जिसमे बढ़ने की शक्ति ,प्रभाव ,तेज , पराक्रम ,उद्द्योग ,और अपने कर्तव्य पालन का दृढ निश्चय है ! उसे अपनी जीविका के नाश का भय कैसे हो सकता है?
बालू  गिट्टी मुरम माफिया और बिल्डर्स इतने शक्तिशालिहो गए हैं !कि बे पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों को भी ट्रक और ट्रेक्टर से  कुचलने की कोशिश करते हैं !और ऐसी कुछ घटनाएँ भी घट चुकी हैं जिसमे अधिकारियों की मौतें हो चुकी हैं !ये माफिया छोटे मोटे राजनेता होते हैं !और इन्हे मंत्रियों सांसदों और विधायकों क संरक्छण प्राप्त होता है !अन्यथा यह पुलिस की मार पीटकर थाने से ट्रेक्टर छुड़ाने की हिम्मत नहीं कर सकते थे !राजनेताओं को यह समझना चाहिए कि बे अंगारों पर खेल रहे हैं !यदि पुलिस का भय समाप्त हो जायेगा !तो गुंडे लफंगे स्वतंत्र होकर  अपराध करेंगे !वैसे भी पुलिस को इतना कमजोर राजनेताओं ने कर दिया है !कि आमजन का विश्वास पुलिस से उठगया है !और छोटी बड़ी सभी घटनाओं के लिए लोग सी बी आई जाँच की मांग करने लगे हैं !नेताओं को पुलिस पर भी नियंत्रण करना चाहिए कि वह रिश्वत ना ले और कानून के अनुसार काम करे किन्तु गुंडों  और लफंगों पर जब पुलिस कार्यबाही करे तो उसमे नेताओं का हस्तछेप न हो !

Monday, 26 October 2015

व्योहारिक ज्ञान -----(१)अत्यंत अभिमान ,अधिकबोलना ,त्याग का अभाव ,क्रोध ,अपना ही पेट पालने की चिंता ,और मित्र द्रोह ये ६  तीखी तलवारें जब इकठी हो जाती हैं ! तो मनुष्य को तनावग्रस्त कर उसके शरीर को रोग ग्रस्त कर उसके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को नष्ट करने वाली हो जाती हैं !
(२)बुजुर्गों की आज्ञा पालन करने वाला ,नीति परायण ,कुटुम्बी और आश्रित जानो के  भोजन की व्यबस्था  करके फिर स्वयं भोजन करने वाला,हिंसा रहित ,अनर्थ पूर्ण कार्यों से दूर रहने वाला, कृतज्ञ ,सत्य आचरण करने वाला और कोमल स्वभाव बाला व्यक्ति मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य का सुख प्राप्त करता है!
(३)सदा प्रिय वचन बोलने वाले व्यक्ति तो सहज में ही  मिल सकते हैं ! किन्तु जो अप्रिय होता हुआ हितकारी हो ,ऐसे वचन का वक्ता और श्रोता दोनों ही दुर्लभ हैं !
(४)परिवार की रक्छा के लिए एक मनुष्य का, ग्राम की रक्छा के लिए परिवार का ,देश की रक्छा के लिए गाओं का ,और आत्मा के कल्याण के लिए सारी पृथ्वी का मानसिक त्याग कर देना चाहिए !
(५)ये आठ गुण पुरुष की शोभा बढ़ाते हैं ---- उत्तम बुद्धि ,सुसंकृत परिवार ,उत्तमग्रन्थों का ज्ञान ,इन्द्रयों पर नियंत्रण ,पराक्रम ,अधिक ना बोलना का स्वभाव ,यथा शक्ति दान ,और उपकार करने वाले के प्रीति कृतज्ञता का भाव !
(६)संतुलित आहार का सेवन करने वाले को निम्नलिखित ६ गुण प्राप्त होते हैं --- आरोग्य ,आयु ,बल और सुख तो मिलते ही हैं उसकी संतान उत्तम होती है  !तथा यह बहुत खाने वाला है ऐसा कहकर लोग उस पर आक्छेप नहीं करते हैं

Sunday, 25 October 2015

व्योहारिक ज्ञान ------(१)धर्यधारण करना ,मनोनिग्रह ,तथा कलियुगी अनेक धर्मों की भीड़ में से सिर्फ सत्य धर्मों का ही अनुसरण करना ,जीवन के सभी कर्तव्यों का मनो निग्रह पूर्वक पालन करना ही वास्तविक कर्तव्य है ! मनुष्य को अपने हृदय में स्थित अज्ञान की समस्त गांठें खोलकर प्रिय और  अप्रिय को अपने आत्मा के समान सहर्ष स्वीकार कर आनंद से जो कुछ जीवन में प्राप्त हो उसे स्वीकार करना चाहिए !
(२)जैसे वस्त्र जिस रंग में रंगा जाए वैसा ही हो जाता है ! उसी प्रकार यदि कोई सज्जन ,असज्जन ,तपस्वी अथवा चोर की सेवा करता है ! तो वह उन्ही के बस में हो जाता है ! -- उस पर उन्ही का रंग चढ़ जाता है !  इसीलिए कल्याण प्राप्ति के लिए प्रयत्नशील पुरुषों को सदैव श्रेष्ठ और सज्जन पुरुषों का ही संग करना चाहिए !
(३)अधिक बोलने से आवश्यक बोलना अच्छा कहा गया है ! यह वाणी की प्रथम विशेषता है ! यदि बोलना ही पढ़े तो सत्य और  तर्क संगत  ढंग से तथ्यों के साथ  दिए गए विषय के सम्बन्ध में ही बोलना और व्यर्थ बकवाद से बचना   यह बानी की दूसरी विशेषता है! सत्य और प्रिय बोलना वाणी की तीसरी विशेषता है ! यदि सत्य और प्रिय के साथ ही न्याय सम्मत भी कहा जाय यह वाणी की चौथी विशेषता है ! मौन रहना यह वाणी की श्रेष्ठतम विशेषता है !
(४)मनुष्य जैसे लोगों के साथ रहता है जैसे लोगों की सेवा करता है और जैसा होना चाहता है वैसा ही हो जाता है !
(५)जो ना तो किसी से जीता जाता है  !,ना दूसरों को जीतने की इक्च्छा करता है ! ना किसी के साथ वैर करता है ! और ना दूसरों को चोट पहुंचाना चाहता है ! जो निंदा और प्रसंशा में समान भाव रखता है ! वह सुख दुःख और हर्ष शोक से परे हो जाता है !
(५)जो सबका कल्याण चाहता है ! किसी के अकल्याण की बात जिसके मन में भी नहीं आती ! जो सत्यबादी ,कोमल स्वभाव बाला है और जिसने अपने मन बुद्धि इन्द्रियों को जीत लिया है ! वही उत्तम पुरुष माना जाता है !
(६)जो झूठी सांत्वना नहीं देता ! देने की प्रतिज्ञा करके दे ही देता है ! दूसरों के दोषों को जानता है ! वह मध्यम श्रेणी का पुरुष है  !
(७)जो व्योहार में अत्यंत कठोर और निर्दयी है ! जो अनेक दोषों से दूषित और कलंकित हो ! जो क्रोध बस दूसरों की बुराई और छाति पहुंचाने वाला है ! दूसरों के किये हुए उपकारों को नहीं मानता है ! जिसकी किसी के साथ मित्रता नहीं है तथा जो दुरात्मा है ! ----- वह अधम पुरुष है !

Saturday, 24 October 2015

व्योहारिक ज्ञान ----- (१)संसार में ये ८ गुण स्वर्गलोक का दर्शन कराने वाले हैं ! इनमे से ४ तो संतों में ही पाये जाते हैं ---- जो वास्तव में संत हैं ! उनमे ये सदा विद्यमान रहते हैं ! और ४ सज्जन पुरुषों के आचरण में दिखाई देते हैं लोकहित के लिए समर्पित जीवन का प्रत्येक कार्य ,दान ,स्वाध्याय ,और कर्तव्यपालन ---ये ४ सज्जनो के साथ हमेशा रहते हैं ! और इन्द्रियनिग्रह ,सत्य ,सरलता ,और कोमलता -----इन चारों का संत लोग अनुसरण करते हैं !
(२)सम्पूर्ण प्राणियों में एक ही आत्मा का दर्शन ,स्वाध्याय ,दान ,तप ,सत्य छमा ,दया और निर्लोभता ---- ये धर्म के ८ प्रकार के मार्ग बताये गए है ! इनमे से सम्पूर्ण प्राणियों में एक ही आत्मा का दर्शन ,स्वाध्याय ,दान और तप तो कोई दिखाबटी  और दम्भी भी कर सकता है ! परन्तु सत्य ,छमा ,दया और निर्लोभता तो जो महात्मा या वास्तविक संत नहीं है उनमे रह ही नहीं सकते हैं !
(३)जिस सभा में बड़े बूढे नहीं हैं ! वह सभा नहीं है ! जिन्होंने जीवन में कर्तव्य का पालन निष्ठा पूर्वक ईमानदारी से नहीं किया ! बे आयु से बृद्ध होने के बाद भी बृद्ध नहीं है ! जिन बृद्धों के आचरण में धर्म तो दिखाई देता है ! किन्तु सत्य के दर्शन नहीं होते है ! उनका वह आचरण धार्मिक नहीं है !और जो सत्य कपट मिश्रित हो वह सत्य नहीं है !
(४)पाप से कीर्ति प्राप्त करने वाले मनुष्य पाप का आचरण करते हुए पाप के फलों को ही प्राप्त करते हैं ! और समाज में दम्भ ,पाखंड की निन्दित परम्पराओं को जन्म देते हैं ! और पुण्य तथा स्वार्थ रहित कर्मों से प्राप्त पुण्यकीर्ति वाले मनुष्य पुण्यफल का ही उपभोग करते हैं !
(५)कीर्ति प्राप्त करने के लिए मनुष्यों को पाप से कीर्ति नहीं उपार्जित करनी चाहिए ! क्योँकि लगातार पाप कर्मों में लिप्त रहने से बुद्धि का नाश हो जाता है ! जिसकी बुद्धि नष्ट हो जाती है ! वह मनुष्य फिर पाप परायण जीवन ही जीने लगता है ! और वह सामाजिक जीवन में पाप की ही बृद्धि करता रहता है !
(६)जिन मनुष्यों की बुद्धि और विवेक का नाश नहीं होता है ! वे मनुष्य सदा पुण्यकार्यों में ही संलग्न रहते हैं ! इस प्रकार के  मनुष्य पुण्य कार्य करते हुए संसार में कर्तव्य पालन की परम्परा का सृजन और पोषण करते हुए समाज को रचनात्मक दिशा देकर अंत में शांति पूर्वक देह त्याग कर पुण्यलोकों में जाते हैं !
(७)गुणों में दोष देखने वाले ,दुष्ट वचनो और कार्यों से मनुष्यों के मर्म पर आघात करने वाले ,निर्दयी ,अनावश्यक शत्रुता करने वाले ,और शठ पाप का आचरण करते हैं ! और बे शीघ्र ही महान कष्ट को प्राप्त होतेहैं!
(८)दोष दृष्टि से रहित शुद्ध बुद्धि वाले मनुष्य हमेशा शुभ कर्मों का अनुष्ठान करते हुए महान सुख को प्राप्त होते हैं ! और सर्वत्र उनका ह्रदय से सम्मान होता है !
(९)जो बुद्धिमान विवेक बुद्धि से युक्त पुरुषों से सद्बुद्धि प्राप्त करते हैं ! वे ही वास्तव में पंडित है !  क्योँकि विवेकबान पुरुष ही धर्म से प्राप्त अध्यात्म और अर्थ को प्राप्त कर अनायास ही अपनी उन्नति करने में समर्थ होते हैं !
(१०)युवाबस्था में ऐसे कर्म करे जिस से बृद्धअवस्था में सुख पूर्वक रह सके !  और जीवन भर ऐसे कर्म करे जिस से मृत्यु के बाद भी परलोक में सुख से रह सके !
(११)अधर्म से प्राप्त हुए धन के द्वारा जो दोष छिपाए जाते हैं ! बे तो छिपते नहीं हैं ! परन्तु दोष छिपाने के कारण नए दोष प्रगट हो जाते हैं!
करण    को परशुराम के श्राप के कारण ब्रह्मस्त्र का बिस्मरण हो गया था ! भगवांन परशुराम ने श्राप देते हुए कहा था ! कि तूने छल करके यह ब्रह्मास्त्र प्राप्त किया है ! इसलिए काम पड़ने पर तेरा यह अस्त्र तुझे याद नहीं रहेगा ! तेरी मृत्यु के समय को छोड़कर अन्य अवसरों पर ही यह अस्त्र तेरे काम आसकता है ! इस श्राप के अतिरिक्त एक और श्राप उसको प्राप्त हुआ था !करण ने इन दोनों श्रापों की बात स्वयं महाभारत के युद्ध में शल्य को बतायी थी !  करण ने कहा एक समय की बात है ! मेँ शस्त्रों के अभ्यास के लिए विजय नामक एक ब्राह्मण के आश्रम के आस पास विचरण कर रहा था ! उस समय घोर एवम भयंकर वाण चलाते हुए मेने अनजान में ही असाबधानी  के कारण एक ब्राह्मण की गाय के बछड़े को एक बाण से मार दिया ! उस ब्राह्मण ने मुझ से आकर कहा तू,ने  मेरे गाय के बछड़े को मार दिया है ! इसलिए तुम जिस समय युद्ध भूमि में युद्ध करते करते अत्यंत संकट को प्राप्त होगे ! उसी तुम्हारे रथ का पहिया जमीन में धस जाएगा ! मेने ब्राह्मण को १०००गायेन और ६०० बैल लेने के लिए प्रार्थना की ! किन्तु उसकी कृपा नहीं पा सका ! मेने उस से अपने अपराध के लिए छमा भी मांगी ! तब ब्राह्मण ने कहा करण मेने जो कह दिया है ! वह बैसा ही होकर रहेगा वह पलट नहीं सकता है ! असत्य भासण प्रजा का नाश कर देता है ! अतः मै झूठ बोलने से पाप का भागी नहीं बनूगा इसलीए धर्म की रक्छा के उद्देश्य सेमें मिथ्या भासण नहीं कर सकता हूँ  !तुम लोभ देकर ब्राह्मण की उत्तमगति का विनाश ना करो ! तुमने पश्चाताप और दान द्वारा उस बछड़े के बध का प्रायश्चित कर लिया ! जगत में कोई भी मेरे कहे हुए वचन को मिथ्या नहीं कर सकता है ! इसीलिए मेरा श्राप तुझे प्राप्त अवश्यही होगा !परिणाम स्वरुप मृत्यु का अवसर आने पर भगवान परशराम के श्राप के कारण उसे ब्रह्मास्त्र का विस्मरण हो गया था !और ब्राह्मण के श्राप के कारण उसके रथ का पहिया जमीन में धस गया था !

Friday, 23 October 2015

व्योहारिक ज्ञान -----(१)जो दूसरों के धन ,रूप ,पराक्रम ,कुलीनता , सुख ,सौभाग्य ,और सम्मान पर डाह करता है !उसका यह रोग असाध्य है !
(२)विद्या का मद ,धन का मद और ऊँचे कुल का मद ये घमंडी पुरुषों के लिए तो मद हैं !किन्तु सज्जन पुरुषों के लिए ये लोकहित के साधन है !
(३)संसार में धनियों में प्रायः भोजन को पचाने की शक्ति नहीं होती है ! किन्तु दरिद्रों के पेट में काठ भी पच जाता है !
(४)पतन की ओर उन्मुख मनुष्य की बुद्धि का नाश हो जाता है  !और उसका ध्यान नीच कर्मों के करने में लग जाता है !विनाश काल उपस्थित होने पर बुद्धि मलिन हो जाती है !फिर न्याय के समान मालुम होने वाला अन्याय उसके ह्रदय से बाहर नहीं निकलता है !
(५) देवतालोग  चरबाहे की तरह डंडा लेकर किसी का पहरा नहीं देते  हैं ! बे जिसकी रक्छा करना चाहते हैं ! उसे उत्तम बुद्धि से युक्त कर देते हैं ! मनुष्य जैसे जैसे लोकहित के कामों में मन लगाता है  !वैसे वैसे ही उसके सारे अभीष्ठ  सिद्ध होना शुरू हो जाते हैं !इसमें जरा भी संदेह नहीं है !
(६)कपट पूर्ण कार्य करने वाले मायाबी पाखंडी व्यक्ति को धर्म पापों से मुक्त नहीं करता है !जैसे पंख निकल आने पर चिड़ियों के बच्चे घौंसला छोड़ देते हैं ! उसी प्रकार धर्म भी उस मायाबी का त्याग कर देता है !
(७)घरों में आग लगाने वाला ,बिष देने वाला ,प्रसाद बेचने वाला ,हथ्यार बनाने वाला ,नाजायज संतान की कमाई खाने वाला ,चुगली करने वाला ,मित्र द्रोही ,परस्त्री लम्पट ,गर्भ की भ्रूण हत्या करने वाला ,गुरु की पत्नी से समागमकरने वाला ब्राह्मण होकर शराब पीने वाला ,अधिक तीखे स्वाभाव बाला ,कौवे की तरह काओं  काओं करने वाला ,नास्तिक ,वेदों की निंदा करने वाला ,ग्राम पुरोहित ,यजोपवीत बिहीन पिता  का पुत्र क्रूर तथा शक्तिबान होते हुए भी --मेरी रक्छा करो, इस प्रकार कहने वाले का वध करने वाले शरणागत का जो बध करता है ---- प्राचीन काल में भारत में ये सब के सब ब्रह्म हत्यारों के समान माने जाते थे !
(८)आग में तपाने से स्वर्ण की पहचान होती है ! सदाचार से सत्पुरुष की, व्योहार से श्रेष्ठ पुरुष की ,भय प्राप्त होने पर शूरवीर की ,आर्थिक कठिनाई में धीर पुरुष की ,और कठिन आपत्ति में शत्रु एवं मित्र की परीक्छा होती है !
(९)बुढ़ापा सुन्दर रूप को ,आशा धैर्य को ,मृत्यु प्राणो को ,गुणों में दोष देखने का स्वभाव धर्माचरण को ,क्रोध लक्छमी को ,नीच पुरुषों की सेवा सत स्वभाव को कामवासना लज्जा को और अभिमान सम्पूर्ण गुणों को नष्ट कर दता है !
(१०)शुभ कर्मों से लक्छमी  उत्पन्न होती है ,प्रगल्भता से वह बढ़ती है ,चतुरता से जड़ जमा लेती है ,और संयम से सुरक्छित रहती है !
(११)आठ गुण पुरुष की शोभा बढ़ाते हैं ---बुद्धि ,श्रेष्ठ आचरण ,शास्त्र ज्ञान ,पराक्रम , बहुत ना बोलना ,यथाशक्ति दान देना ,और कृतज्ञ होना !
किसान की हालत बद से बदतर हो रही है ! उसके कई कारण है !(१)फसल अच्छी होती है !तब उसे फसल का उचित मूल नहीं मिलता है !जब वस्तु का उत्पादन अधिक होता है !तो दाम सस्ता मिलता है !किसान उत्पादित खाद्यान को रोकने की स्थिति में नहीं होता है !इसलिए उसको मजबूरन कर्ज चुकाने शादी व्याह तिथि त्यौहार  मनाने के लिए लिए अपने उत्पादित खाद्यान को बेचना पड़ता है !व्योपारी किसान का माल औने पौने दामों में खरीद कर स्टॉक कर लेता है !फिर बाजार भाव अच्छा आने पर महगा बेचदेता है !(२)जब फसल ख़राब होती है !तब भी किसान को बढे हुए दाम फसल के नहीं मिलपाते हैं !व्योपारी उसको जमा कर लेता है !फिर खाद्यान की कमी का लाभ उठाकर  उसको अत्यंत मह्गे भाव में बेचता है !अभी अरहर की दाल और अन्य दालों में जमाखोर व्योपारी असीमित लाभ उठारहे हैं !इसकोपहले प्याज में भी व्योपारियों ने कुछ ही दिनों में हजारों करोड़ रूपया कमा लिए थे !(३)रासायनिक खादों और केमिकल्स के दाम बेहद बढ़ गए हैं !कृषि मजदूरी में भी बेहद बृद्धि हुई है !उस मात्रा में कृषि उपज के दाम नहीं बढे हैं !खेती घाटे  का सौदा हो गया है ! किसानो को अपनी हालत सुधारने के लिए निम्नलिखित प्रयत्न करने होंगे !(१)सस्ती खाद के लिए जैविक खाद का प्रयोगकरना पड़ेगा !जैविक खाद कूड़ा करकट सूखे पत्ते गोबर आदि से तैयार हो जाती है !इसके लिए उसे पशुपालन करना होगा !इस से उसको मुफ्त की खाद, रसोई के लिए सस्ती गैस विजली और घी दूध की उपलब्धि होगी !(२)किसानो को पंचायत और ब्लॉक स्तर पर अन्न बैंक की स्थापना करनी चाहिए !जहाँ पर किसानो को अपनी उपज रख देनी चाहिए !और खर्चे के लिए बिना व्याज का पैसा सरकार को देना चाहिए !ताकि किसान को औने पौने दामों पर अपना खाद्यान व्योपारियों को ना बेचना पड़े !(३)किसानो को कृषि के साथ गृह उद्द्योग प्रारम्भ करना चाहिए जिससे कृषि से उत्पादित माल को उद्योग के द्वारा अधिक लाभप्रद बनाया जा सके !(४)सरकारयद्द्पि पर्याप्त मात्रा में राहत की राशि किसानो के लिए आवंटित करती है !किन्तु रिश्वत खोरी के कारण उन तक राहत राशि पहुँच नहीं पाती है !माल विभाग के लेखपाल से लेकर बरिष्ठ अधिकारी भी किसानो की राहत की राशि में साझे दार होते हैं !लेखपाल करोड़ों की संपत्ति के मालिक हो गए हैं !किसान पर कुदरत की मार व्योपारी की मुनाफाखोरी अधिकारियों की रिश्बत और आसमान छूती महगाई  पड़ रही है !वह हताश और निराश है !उसके आय के साधन नष्ट हो गए हैं !सरकार उदासीन है !किसान ग़मगीन है !इसलिए आत्महत्या ही कर्ज में डूबे और भुखमरी से त्रस्त किसान को एकमात्र मार्ग दिखाई देता है !बुंदेलखंड के किसान पर तो कई बर्ष से सूखे की मार पड़ रही है !इस बार फिर सूखे के आसार दिखाई दे रहे हैं !अगर सरकार समय से पूर्व उचित कदम किसानो के रक्छण के लिए नहीं उठाती है !तो किसानो की आत्महत्या में और बृद्धि हो सकती है !

Thursday, 22 October 2015

व्योहारिक ज्ञान ---- (१)दस प्रकाार के लोग धर्म को तत्त्व से नहीं जानते हैं ----- नशेसे मतवाला ,असावधान ,पागल ,थका हुआ ,क्रोधी ,भूखा ,जल्दबाज ,लोभी ,भयभीत ,और कामी !अतः विद्वान पुरुष को इनको धर्म का उपदेश नहीं करना चाहिए
(२)जो पुरुष घर छोड़कर निरथर्क बाहर निबास,पापियों से मेलजोल ,पर स्त्रीगमन ,पाखंड ,चोरी ,चुगलखोरी और मदिरापान--- इन सबका सेवन नहीं करता है !वह हमेशा सुखी रहता है !
(३)जो मनुष्य सम्पूर्ण भूतों को शांति प्रदान करने में तत्पर ,कोमल, सत्यबादी ,दूसरों को आदर देने वाला ,तथा पवित्र विचारवाला होता है ! वह अच्छी खान से निकले और चमकते हुए श्रेष्ठ रत्न की भांति सभी लोगों के मध्य अधिक प्रसिद्धि पाता है !
(४)उन्नति चाहने वाले पुरुष को वही वस्तु खानी या ग्रहण करनी चाहिए जो परिणाम में अनिष्टकर ना हो अर्थात जो खाने योग्य हो तथा खायी जा सके ! तथा खाने या ग्रहण करने पर पचा  सके और पच जाने के बाद हितकारी हो !
(५)मनुष्य का शरीर रथ है ,बुद्धि सारथि है ,और इन्द्रियां घोड़े है ! ,इनको बस में करके सावधान रहने वाला चतुर एवं धीर  मनुष्य काबू में किये हुए घोड़ों से रथी की भांति सुखपूर्वक अपनी जीवन यात्रा करता है !
(६) शिक्छा न पाये हुए तथा काबू में ना रहने वाले घोड़े जैसे रथ पर सबार को मार्ग में गिरा देते हैं वैसे ही इन्द्रियों को बस में ना रखने वाले पुरुष भी भोगों में फसकर उत्तम मार्ग से पतित हो जाता है !
(७) इन्द्रियों को बस में ना रखने का कारण मनुष्य बुरे को अच्छा और अच्छे को बुरा समझ कर बहुत बड़े दुःख को भी सुख मान लेता है! जो धर्म और अर्थ को त्यागकर इन्द्रियों के वस में हो जाता है ! वह शीघ्र ही एशबर्या .प्राण ,धन ,तथा पत्नी से भी हाँथ धो बैठता है !मन बुद्धि और इन्द्रियों को अपने बस में रखकर अपने से ही  अपनी  आत्मा को जानने की इक्छा करे ! क्योँकि मनुष्य आप ही अपना शत्रु और मित्र है !जिसने स्वयं ही अपने मन बुद्धि सहित शरीर को जीत लिया है  !उसका शरीर ही उसका मित्र है और न जीता हुआ शरीर ही शत्रु है !
राजनीति में अवकाशप्राप्त सैन्य अधिकारी ,न्यायाधीश  ,,  प्रसाशनिक अधिकारी फिल्मस्टार्स क्रिकेट खिलाडी आदि का प्रवेश उनकी जनता में लोकप्रियता के कारण देश में हो जाता है !इसीलिए उनको राजनीति का न तो कोई अनभव होता है !और ना जनता से जुड़कर उनकी समस्यायों का कभी अध्ययन मनन और समाधान उन्होंने किया होता है !कुर्सी  पर बैठ कर सरकारी अधिकारी या सैन्य अधिकारी के रूप में अधिकार संपन्न होकर आदेश पारित करने में और जनता के बीच रहकर जन समस्यायों को सुन समझ कर निबारण  करना  बिलकुल भिन्न बात है !फिल्म में अभिनय करना और क्रिकेट खेलने से जो लोकप्रियता प्राप्त होती है !उसमे और जनता के बीच काम करके लोकप्रियता प्राप्त करना अलग बात है !बी के सिंह भी अवकाश प्राप्त जनरल हैं !उन्हें इस बात का बिलकुल ज्ञान नहीं है !कि जनता से किस प्रकार से बात करनी चाहिए !इसलिए बो एक बाद  एक उटपटांग बेमतलब व्यान देते रहते हैं !और मोदी सरकार के लिए अनावश्यक परेशानी खड़ी कर देते हैं ! ऐसे और भी मंत्री है ! जो भड़काऊ और देश की समरसता बिगाड़ने वाले वक्तव्य देते रहते हैं !मोदी जी के पास भाजपा के टिकट पर चुनकर आये कई योग्य और लम्बे समय से  राजनीति में जनता के साथ रह कर काम करने वाले सांसद है !मोदी जी को उनको मंत्रिमंडल में शामिल कर ऐसे सभी मंत्रियों की आदर के साथ विदाई कर देनी चाहिए जो मोदी सरकार के लिए अनावश्यक समस्याएं उत्पन्न करते हैं !बी के सिंह ने जो यह वाक्य बोला है !कि अगर कोई कुत्ते कोलाठी मार दे तो सरकार की उसमे क्या जिम्मेदारी है ? ! यह व्यान अत्यंत  आपत्ति जनक और कानून के विरुद्ध है !  इस वक्तव्य के कारण उन के विरुद्ध आपराधिक प्रकरण भी दायर किया जासकता है ! सन्दर्भ दलित समाज के दो मासूम बच्चों की हत्या का था !इसलिए बी के  सिंह को सिर्फ सम्बेदना के शब्द ही बोलना चाहिए थे !घटना के पीछे के कारणों ओरसत्यता का पता तो पुलिस लगाएगी ! और फैसला न्यायालय करेगा !कोई भी राजनेता इस जघन्य घटना पर बी के सिंह जैसा भड़काने वाला व्यान नहीं देता !
सभी सम्मानीय मित्रों ,बंधुओं को दसहरा की राम ,राम .!बहुत से सज्जन आज के दिन रावण .कुम्भकरण और मेघनाथ के गगनचुम्बी पुतले बनाके राजनेताओं अधिकारियों के द्वारा इन पुतलों का दहन कराते हैं !इन पुतलों के निर्माण तथा भव्य समारोहों के व्यय की व्यबस्था करने वाले बड़े व्योपारी होते हैं !और ये सब कहते हैं कि दसहरा पर्व असत्य पर सत्य की विजय का प्रतीक है !रावण असत्य के पोषक और भगवान श्री राम सत्य स्वरुप हैं !किन्तु क्या ये आयोजक ,पुतलों  का दहन करने वाले सत्य धारी ,सत्य का पोषण करने वाले और सत्य के आग्रही हैं ?यह विचार खोज  और शोध का विषय है !अगर आध्यात्मिक दृष्टि से सत और असत का विवेचन कर उसको धारण करने की इक्छा हो !तो भगवानश्री कृष्ण ने गीता २(१६)में सत ,असत को समझाया है !असत की तो कोई सत्ता नहीं होती है !और सत का अभाव अर्थात कभी विनाश नहीं होता है !रावण अपने समय का महान विद्वान और शक्तिशाली राजा था !जिसने मनुष्य गंधर्व यक्छ और देवताओं को भी पराजित कर अपने अधिकार में कर लिया था !उसके पास मानवी राक्छ्सी और देव सभी प्रकार की शक्तियां थी !उसने यह सभी शक्तियां भगवान शिव की आराधना तपस्या और आत्मबलिदान कर प्राप्त की थी !उसने अपने दस शीश काट कर भगवान शिव को अर्पित कर दिये थे !भगवान शिव ने प्रसन्न होकर उसे बरदान में ये सभी शक्तियां प्रदान की थी !किन्तु भगवान शिव से  प्राप्त इन शक्तियों का प्रयोग उसने अशिव कार्यों में करना शुरू कर दिया था !तात्पर्य यह है की जिस बरदान से उसे आत्मराज्य स्थापित करना चाहिए था !जिस से प्रजा में अहिंसा ,शांति ,सद्भाव, सौहाद्र स्थापित होना चाहिए था !उस शक्ति से उसने अवांछित भोग सामग्री और धन संपत्ति पृथिस्टा आदि प्राप्त कर लंका सोने की बना दी थी !और उसमे राक्छ्सों का निवास कर दिया था !मात्र उसी का भाई बिभीषण ही अकेला देव संस्कृति का मान  ने वाला था !उसको भी उसने लात मार कर लंका से निकल दिया था !उसकी शक्ति प्राप्त करने की आकांछा इतनी प्रवल थी !की उसने सूर्य चन्द्रमा कुबेर बरुण इंद्र आदि देवशक्तियों को भी अपने अधीन कर लिया  था !उसकी भोगेक्छा इतनी प्रवल थी !की उसके रनिवास में देव कन्याएं ,राक्छ्सों दैत्यों गन्धर्वों और मनुष्यों की हजारों कन्याएं उसकी भोग विलास के लिए थी !इसके बाद भी उसने माता सीता का अपहरण किया था !रावण अध्यात्म तत्त्व का ज्ञाता था !वह जनता था कि संसार के सभी पदार्थ नश्वर और विनाशी है !सभी शरीर भी एकदिन मृत्यु को प्राप्त होंगे !शरीर भी बृद्धावस्था को प्राप्त होगा ! और इसका रूप रंग भी नष्ट हो जाएगा !फिर भी उसने शिव यानि अविनाशी अजर अमर परमात्मा की उपासना से प्राप्त शक्ति का प्रयोग असत यानि विनासी भोगों के लिए किया !भगवान श्री राम ने इसी विनाशी यानि असत का विनाश रावण का बध कर सत यानी अविनाशी तत्त्व की स्थापना की !उन्होंने ११००० हजार वृष तक पृथ्वी का शाशन किया !और आत्मसत्ता यानि सत तत्व की स्थापना की !उनके राज्य में चोरी डकैती रिश्वत खोरी दुराचार अकाल मृत्यु आदि नहीं होते थे !समय पर पानी बरसता था !अन्न प्रचुर मात्रा में उत्पन्न होता था !कोई किसी का भी बिना मेहनत के धन नहीं लेता था !सभी अपने कर्तव्यों का पालन करते थे !उनका राज्य नैतिकता और आत्मनिष्ठा पर आधारित राज्य था !जिसे रामराज्य कहा जाता है !इसी राम राज्य की स्थापना का स्वप्न गांधी जी ने भारत में स्थापित करने के लिए देखा था !किन्तु जिस प्रकार आज राम के विरोधी असत यानि भोग पद संपत्ति अर्जन के आकांछी और सभी प्रयत्नो साधनो से विनाशी पदार्थों के संग्रह में लगे हुए महानभाव रावण आदि के पुतले दहन कर सत यानी  रामभाव का नाश करते हैं !उन्ही राम विरोधियों ने राम भक्त गांधी जी की हत्या कर !राम राज्य की स्थापना को समाप्त कर दिया था !आज के भारत में यही लोग रावण राज्य की स्थापना राम राज्य के नाम से स्थापित करने में लगे हुए है  !रावण इन अपने चाहने वालों के प्रति मुक्त मन से अपने पुतलों का दहन कराकर प्रसन्न हो रहा है !और इनकी प्रसंसा कर इनकी  पीठ थपथपा रहा है और आशीर्वाद दे  रहा है !और इनकी सफलता की कामना कर रहा है !इन आधुनिक रावणो से उसकी यह आशा बंधी है !कि वह राम से पराजित हो गया था  !किन्तु उसका दर्शन आज भी जीवित है !और आजकल उसके समर्थक असत्य पर सत्य की विजय के नाम पर असत्य की सत्य पर विजय करा रहे है !

Wednesday, 21 October 2015

व्योहारिक ज्ञान ----(१)प्रत्येक गृहस्थ के घर में यदि संभव हो तो घर में चार प्रकार के मनुष्यों को रहना चाहिए --अपने कुटुंब का बृद्ध पुरुष ,संकट ग्रस्त विद्वान ,धनहीन मित्र ,और बिना संतान की बहन!
(२)चार कर्म अनिष्ट निवारण करने वाले विद्वानो ने बताये हैं ---किन्तु यदि भी आदर के साथ ना किये जाएँ तो अनिष्ट कर सकते हैं --बे कर्म हैं --आदर के साथ अग्नि होत्र ,आदर पूर्वक मौन का पालन .आदरपूर्वक स्वाध्याय और विधि विधान के साथ श्रद्धा पूर्वक यज्ञ का अनुष्ठान !
(३)पिता माता अग्नि ,आत्मा और गुरु ----कल्याण के इक्छुक सभी मनुष्यों को यत्न से इनकी सेवा करनी चाहिए !
(४)देवता , पितर, मनुष्य , सन्यासी और अतिथि ---इन पांचों का यथायोग्य सत्कार करने वाले मनुष्य को यश की प्राप्ति होती है !
(५)संसार में मनुष्य कहीं भी जाकर निवास करे ! उसको सभी जगह पांच प्रकार के सह्बासी मनुष्य मिलेंगे ----मित्र ,शत्रु ,उदासीन ,आश्रय देने वाले और आश्रय मांगने वाले
(६)एशबर्या या उन्नति चाहने वाले मनुष्य को अधिक सोना ,तन्द्रा भय ,क्रोध प्रमाद ,तथा दीर्घ सूत्रता (जल्दी हो जाने वाले कार्य में अधिक देर लगाने का स्वभाव )इन ६ दुर्गुणों को त्याग देना चाहिए !
(७)मनुष्य को कभी भी सत्य का तत्त्व समझ कर सत्य बोलना  ,दान कर्मण्यता अनसूया (गुणों में दोष देखने की प्रवृत्ति का अभाव )छमा तथा धैर्य ----इन ६ गुणों का त्याग नहीं करना चाहिए !
(८)धन की प्राप्ति ,निरोगी शरीर ,प्रियवादिनी अनुकूल रहने वाली धर्मपत्नी ,आज्ञाकारी पुत्र ,पुत्री तथा धन उपार्जन करने वाली विद्या का ज्ञान ---ये छे बातें संसार में मनुष्यों को सुख पहुचाने वाली होती हैं !
(९)शरीर के अंदर रहने वाले ६ शत्रुओं --- काम ,क्रोध ,लोभ ,मोह ,मद ,तथा मात्सर्य को जो मनुष्य नियंत्रित कर लेता है वह जितेन्द्रिय पुरुष कभी भी पापों में लिप्त नहीं होता है !और उस से कभी भी सामाजिक जीवन में अनर्थ की उत्पत्ति नहीं होती है १
(१०) ६ प्रकार के मनुष्य ६ प्रकार के लोगों से अपनी  जीविका चलाते हैं ! !चोर असावधान पुरुष से ,डॉक्टर रोगी से ,कामोन्मत्त स्त्रियां कामग्रस्त मनुष्यों से ,पंडित ,पुरोहित ,कथाबाचक यजमानो से ,अधिकारी झगड़ाकरने वालों से तथा विद्वान पुरुष मूर्खों से अपनी जीविका चलाते हैं !
(११) निरोग रहना ,ऋणी ना होना ,परदेश में ना रहना अच्छे लोगों के साथ मित्रता होना ,अपनी बृत्ति से ईमानदारी से जीविका चलाना और निर्भय होकर रहना ---ये ६ मनुष्य लोक के सुख हैं !ईर्ष्या करने वाला ,घृणा करने वाला ,असंतोषी ,क्रोधी ,सदा शंकित रहने वाला और दूसरे के भाग्य पर जीवन निर्वाह करने वाला ----ये ६ सदा दुखी रहते हैं !
ऐसे हिन्दू और मुसलमान भारत में सेकंडो साल से रहे हैं ! और आज भी है ! जो एक दूसरे के धर्मों का सम्मान करते रहे हैं !उसका सबसे बड़ा कारण यह है कि अधिकांश भारत के मुसलमान इस्लाम कबूल करने के पहले हिन्दू ही थे !मुसलमानो के रीति रिवाजों में बहुत से हिन्दुओं के आचार देखे जा सकते हैं !झगडे की शुरुआत जब होती है !जब मुसलमानो के ऊपर प्रभाव  रखने वाले मुल्ला मौलवी उनको मुसलमान के रूप में स्थापित करना शुरू कर देते हैं !फिर इसका लाभ राजनैतिक नेता भी उठाते हैं !आम हिन्दू और आम मुस्लमान अपनी दैनिक जीविका की समस्यायों से ही जूझता रहता है !हिन्दू और मुस्लमान जब अलग ढंग से सोचना और बर्ताव करना शुरू कर देते हैं !जब हिन्दू हिन्दू हो जाता है और मुसलिम मुसलिम  हो जाता है ! तभी इन दो धर्मों में मक्का मदीना और कशी मथुरा प्रभावी हो जाते हैं !और मंदिर मस्जिद फिर दर्शन और उपासना के केंद्र नहीं रह जाता हैं !मस्जिदें आतंकवादियों कि शरणस्थली बन जाती हैं !मुअलिम उनके पैरोकार और संरक्छक बन जाते हैं !और इस्लाम के नाम पर दूसरे धर्म के लोगों को काफ़िर कह कर मौत के घात उतारने वाले ये क्रूर आतंकवादी जेहादी और मुसलिम योद्धा बन जाते हैं !गंगा जमुनी संस्कृति शव्द भी हिन्दू मुसलिम को भारत राष्ट्र का नागरिक होने के बाद भी उनको गंगा जमुना की तरह हमेशा हिन्दू और मुस्लमान के रूप में बने रहना देखना चाहता है !जबकि होना यह चाहिए और शव्द भी ऐसा निर्मित होना चाहिए कि भारत के अंदर रहने वाले देशी विदेशी सभी धर्मों के लोगों की पहचान भारतीय संस्कृति के रूप में होनी चाहिए !अगर हिन्दू मुसलमानो की संस्कृत गंगा जमनी संस्कृति है !तो हिन्दू बौद्ध सिख ईसाई पारसी यहूदी आदि धर्मों की संस्कृति को क्या नाम देना चाहिए ?इसलिए कहा यह जाना चाहिए की जैसे समुद्र में मिलने के पहले सभी नदियों नालों चाहे बे बड़े हों या छोटे रंग रूप आकार प्रकार में भिन्न हो !उनके  उद्गम स्थान अलग अलग हों  !किन्तु ये सब जब समुद्र में मिले तो इनका आकार प्रकार रंग रूप लम्बाई चौड़ाई  सभी समुद्र में विलीन होकर सिर्फ समुद्र बन गयी !समुद्र में खोजने परभी ना गंगा मिलेगी और ना नर्बदा और युमना !उसी प्रकार से अगर देश बासी एक दूसरे के धर्मों का आदर करते हैं ! उनके तीज त्योहारों और उत्सवों में शामिल होते हैं !तो यह गंगा जमुनी संस्कृति नहीं हैं !भारतीय सनातन संस्कृति है !इस संस्कृति के उदाहरण महाभारत में मिलते हैं !जहाँ व्यास कहते हैं !कि जो सभी धर्मों का आदर करते हैं !सभी देवताओं को प्रणाम करते हैं !और सभी धर्मों की साधनाओ में श्रद्धा करते हैं !बे सुख पूर्वक परमात्मा को प्राप्त कर लेते हैं !एक और जगह वेद व्यास लिखते हैं कि जो धर्म दूसरों के धर्म का अनादर करते हैं वह धर्म नहीं है  !अधर्म हैं !भारत में धर्म आम जन के लिए विवाद और विरोध का विषय नहीं है !यह विवाद और बिरोध तथा दंगे कौन कराता है ? क्योँ कराता है ?इसमें कौन मारा जाता है ?यह शोध और बोध का विषय है !सभी धर्माबलम्बीयों को जिनका धार्मिक विद्वेष फ़ैलाने में कोई दिलचस्पी या लाभ नहीं है !उनको इस पर विचार करना चाहिए !और इस राष्ट्रीय सनातन परम्परा को जो अनादि काल से प्रिचलित है !जिसका दर्शन मुसलमांनो द्वारा देवी की आरती में देखा जा रहा है !और हिन्दुओं द्वारा पीर की मजार  पर चादर चढाने के रूप में दृष्टिगत हो रहा है !

Tuesday, 20 October 2015

व्योहारिक ज्ञान ------(१) काम क्रोध और लोभ ---- ये तीन आत्मा का नाश करने वाले नरक के द्वार हैं अतः इन तीनो का विवेक पूर्ण उपयोग करना चाहिए !धतूरा जहर होता है !किन्तु वैद्यों द्वारा उसका शोधन होने के बाद उसमे औषधीय गुण प्रगटहो जाते हैं !और घातक ना होकर जीवन रक्छक हो जाता है ! काम के दो स्वरुप होते हैं !कामना और वासना !कामनाएं भौतिक सुख प्राप्ति का साधन होती हैं !ये पद प्रितिस्था धन संपत्ति ऐश्वर्य की प्राप्ति के रूप में मनुष्यों में प्रगट होती हैं !जब इनकी प्राप्ति के लिए  प्रयत्न बिधि विधान और नैतिक साधनो से लोक हित को ध्यान में रख कर किया जाता है !और इनका उपभोग अनासक्ति भाव से विवेक पूर्ण ढंग से कर्तव्य पालन के लिए  किया जाता है !तब ये स्वयं के लिए और समाज के लिए उपयोगी होती हैं !किन्तु जब ये स्वार्थ निष्ठा से व्यक्ति के अहंकार की तुष्टि के लिए उपयोग में प्रयुक्त होती हैं !तब ये आत्मनाश कर मनुष्य को पशु से भी अधिक पतित कर देती हैं !ऐसे मनष्यों का जीवन और आचरण समाज को दूषित कर स्वार्थ निष्ठा को वेग प्रदान करता है !और समाज से नैतिकता परोपकार  और देश हित के भावों का नाश कर देती  है !वासनाएं  स्त्री पुरुष संसर्ग के लिए उत्पन्न होती हैं !ये कभी भी तृप्त नहीं हो सकती हैं !इसलिए इन स्त्री जनित सुख को भी विधि विधान और नैतिक नियमों से नियंत्रित किया गया है !काम के वासना स्वरुप की तृप्ति में मनुष्यों और स्त्रियों की ऊर्जा का विनाश होता है !इसीलिए इसका सीमित और अनुशासित उपयोग सिर्फ संतति के जन्म के लिए ही किया जय !वैदिक संस्कृति में ब्रह्मचर्य की महत्ता  को पहचान कर इसके पालन पर बड़ा जोर दिया गया है !इसीलिए जो गृहस्थ इसका विवेक पूर्ण ढंग से सिर्फ संतति प्रजनन के लिए ही करते हैं !बे उत्तम संतानो को जन्म देते हैं !किन्तु जब वासना बाढ़ की तरह समाज में प्रबाहित होने लगाती है !तब वैश्या बृत्ति बलात्कार जैसे जघन्य अपराध समाज में प्रिचलित और प्रवृत्त होजाते हैं !मनुष्य फिर पशु बन जाता है !क्रोध का भी उचित उपयोग सामजिक दृष्टि से किया जाने पर लाभ दायक होता है !ना अधिक छमा उपयोगी है !और ना अधिक क्रोध !दुष्टों पर क्रोध और सज्जनो और विद्वानो तथा भरणीय और पालनीय कुटुम्बी जनो आदि की त्रुटियों के प्रिति स्नेह पूर्ण दृष्टि क्रोधी व्यक्ति को भी आत्मनाश से बचाती है !लोभ भी गृहस्थ के लिए उचित मात्रा में उपयोगीहै !किन्तु सत्कर्मों में उपार्जित द्रव्य का उपयोग ना करना और उसको आसक्ति पूर्ण बृत्ति से संग्रहीत रखना श्रेय का नाशक है !उपार्जित द्रव्य के दो ही परिणाम होते हैं ! भोग या नाश !इसलिए द्रव्य का भोग लोकहित के कार्यों के लिए करना चाहिए !
क्या आपको यह भी ज्ञान नहीं है !कि महापुरुषों के सम्बन्धी परिवार के  रिश्ते से नहीं जाँचे जाते हैं !उनके सम्बन्धी बो होते हैं ! जो उनके आदर्शों और कार्यक्रमों को अपनाते हैं !अगर गांधी जी ने जीवन में पत्नी पुत्र आदि को ही अपना सगा सम्बन्धी माना होता तो बे राष्ट्रपिता न होते !और अब तो बे विश्व पुरुष हैं !संयुक्त राष्ट्र संघ ने एक राय से उनके जन्म दिन को विश्व अहिंसा दिवस के रूप में मनाने की घोसणा की है !यह सम्मान संपूर्ण विश्व में सिर्फ गांधी जी को ही प्राप्त हुआ है !गांधी जी को किसी की बेईमानी से जोड़कर समाचार प्रकाशित करने में क्या आपके चैनल की लोकप्रियता बढ़ जाती है ?  ईसा लोगों को उपदेश दे रहे थे ! कि उनके माता और भाई आये किसी ने यीशु से कहा आपकी माता और भाई बाहर हैं बे आपसे मिलना चाहते हैं ! यीशु ने  अपने शिष्यों की ओर संकेत करते हुए कहा कि देखो ये हैं मेरी माता और भाई जो मेरे स्वर्गीय पिता की इक्छा के अनुसार कार्य करता है ! वही है मेरा भाई मेरी बहन और मेरी माता !इसलिए गांधी जी के ऊपर इस तरह के परिवार क़ी गलती का आरोपण  कर उनके चरित्र  को  गन्दा  करने का प्रयत्न ना करें!यह उचित नहीं है

Monday, 19 October 2015

व्योहारिक ज्ञान ------(१)छमाशील पुरुषों पर एक ही दोष का आरोप लगाया जाता है ! वह दोष यह है कि छमाशील मनुष्य को लोग असमर्थ समझ लेते हैं ! किन्तु छमाशील पुरुष का वह दोष नहीं मानना चाहिए ! क्योँकि छमा बहुत बड़ा बल है ! छमा असमर्थ पुरुषों का गुण और समर्थों का भूसण है !  इस जगत में छमा वशीकरण रूप है ! भला छमा से क्या सिद्ध नहीं होता  है ! जिसके हाथ में छमा रूपी तलबार है ! उसका दुष्ट  पुरुष क्या कर लेंगे ? केवल धर्म ही परम कल्याण कारक है ! छमा धर्म की ही संतान है ! इसलिए छमा ही एक मात्र शांति का सर्व श्रेष्ठ उपाय है ! आत्म  विद्या ही परम संतोष प्रदान करती है ! और अहिंसा से ही जीवों का पोषण संरक्छण और समस्त सुखों की प्राप्ति होती है !जीव हत्या निषेध से परम सुख की प्राप्ति होती है ! और प्राणियों में सद्भाव होता है !सुख शांति और कल्याण प्राप्ति का अन्य कोई उपाय आज तक खोजा नहीं जा सका है !जो धर्म किसी भी रूप स्वरुप में हिंसा का समर्थन करता है पोषण और संरक्छण देता है ! वह धर्म नहीं अधर्म है ! धर्म का जन्म प्राणियों को धारण करने के लिए हुआ है ! उनके विनाश के लिए नहीं !
(२)समुद्र पर्यन्त इस सारी पृथ्वी में ये दो प्रकार के अधम पुरुष हैं ---अकर्मण्य गृहस्थ और प्रपंच कर्मो में लगा हुआ सन्यासी !
(३)जरा भी कठोर ना बोलना और दुष्ट पुरुषों का सम्मान न करना ----इन दो कामों का करने वाला मनुष्य संसार में विशेष शोभा पता है  !
(४)दो प्रकार के पुरुष सूर्य मंडल को भेद कर ऊर्धव गति को प्राप्त होते हैं ----योग युक्त सन्यासी और युद्ध में शत्रुओं के सम्मुख युद्ध करके मारा गया सैनिक योद्धा !
(५)मनुष्यों के कार्यों की सिद्धि केलिए उत्तम ,मध्यम ,अधम ----- ये तीन प्रकार के न्यायकूल  उपाय सुने जाते हैं उत्तम मध्यम और अधम तीन ही प्रकार के मनुष्य भी होते हैं ! इनको यथा योग्य तीन ही प्रकार के कार्यों में लगाना चाहिए  !
(६)दूसरे के धन का हरण  !,दूसरे की स्त्री से संसर्ग ! तथा सुहृद मित्र का परित्याग ----ये तीनो ही दोष मनुष्य के आयु धर्म तथा कीर्ति का नाश करने वाले होते हैं !
व्यबस्था चाहे अच्छी हो या बुरी उसकी समाप्ति यथा समय ही होती है !समय के पहले कुछ भी नहीं होता है !अगर कोई पत्थर १०० चोटों में टूटता है ! तो वह १०० चोटों से ही टूटेगा !जिन्हे आज हम मेहतर भंगी या सफाई कर्मचारी के रूप में जानते हैं !और जिन्हे अश्प्रस्यता  की सबसे निम्न श्रेणी में रखा जाता है !ये सब  अपने स्वाभिमान के कारण इस अत्यंत हीन अवस्था पर पहुंचे है !ये दलित नहीं हैं !और वैदिक धर्मग्रंथों में पाखाना  साफ़ करने या कराने  वालों का कोई जिक्र भी नहीं  है !अमृत लाल नागर ने नाच्यो बहुत गोपाल  नामक उपन्यास में इनकी उत्पत्ति के बारे में बताया है !ये सभी ब्राह्मण और अधिकांश छत्री हैं !जब राजा पराजित हो जाता था !तो सारी प्रजा जीतने वाले राजा की प्रभु सत्ता स्वीकार कर लेती थी !किन्तु इन लोगों ने अपने स्वाभिमान को नहीं खोया  !और विजयी राजा की अधीनता स्वीकार नहीं की !इसीलिए इनको दंड स्वरुप राज्य से निष्काशित कर दिया गया !और इनको सभी प्रकार के नागरिक अधिकारों से वंचित कर दिया गया ! ये सामान्य समाज से बहिष्कृत हो !अलग एकाकी जीवन जीने को विबस हुए !और धीरे इनमे इनके जातीय गुणों का विनाश हो गया ! कालांतर में जब पख़ानो का निर्माण होने लगा तो इन्हे इस अत्यंत घृणित कार्य में लगा दिया गया  !सबसे पहले गांधीजी ने इनके कार्य की महत्ता को समझा ! और उन्होंने खुद अपने अनुयायिओं के साथ पाखाना सफाईका काम शुरू किया !गांधी जी के आश्रम में सभी को पाखाना साफ़ करना पड़ता था !आचार्य विनोबा भावे जो की ब्राह्मण थे ! पबनार आश्रम के पास स्थित सुरगाओं में कई बर्ष तक पाखाना साफ़ करते रहे थे !लंदन से आई मिस स्लेड जो बात में मीरा बहन के नाम से प्रिशिद्ध हुई !बो सेगाओं में पाखाने साफ़ करती थी !अब समय ने करबट ली है !शहरों में अधिकाँश घरों में झड़ने वाले पाखाने समाप्त हो गए है !और गाओं में पहले पाखाने नहीं होते थे !सभी लोग शौच हेतु जंगल में जाते थे !इसीलिए सरकारी मदद से और स्वयं के प्रयत्न से जो पाखाने बनाये जा रहे हैं !बे आधुनिक प्रकार के पाखाने है !सरकारें भी पूरी तरह से झाड़ू पाखाने समाप्त करने में लगी हुई है !ट्रेनों बसों आदि ने छुआ छूत भी कम कर दी है !अब अश्प्रस्यता मृत्यु की ओर जा रही है !और भंगी काम भी जो थोड़ा बहुत दिखाई देता है !वह भी समाप्ति की ओऱ है !
गो बध को साम्प्रदायिक स्वरुप देकर जिस तरह देश का माहौल खराब  किया जारहा है !यह भारत के संविधान के  प्रावधानों के प्रितिकूल  है !सिर्फ गाय के तथाकथित समर्थक ही साम्प्रदायिक नहीं हैं !जो राजनेता इन लोगों को साम्प्रदायिक कह रहे हैं !बे भी एक प्रकार से सम्प्रदाय विशेष के पक्छ्धर होकर देश का माहौल बिगाड़ रहे हैं !कानून की परवाह किसीको नहीं है !सभी लोग कानून अपने हाथ में लेकर कानून और संविधान की अवहेलना और अनादर कर रहे हैं !दादरी में अखलाख की हत्या जिस प्रकार हुई थी !वह अत्यंत शर्मनाक घटना है !किन्तु हत्या किसी भी कारण से हुई हो !उसके लिए दंड का विधान भारतीय दंड कानून में है !और इसके अंतर्गत आरोपित व्यक्ति गिरफ्तार भी कर लिए गए हैं !और उनको कानून के अंतर्गत दोषी पाये जाने पर सजा भी होगी !किन्तु जिस प्रकार अखलाख के परिवार की मदद के लिए उत्तरप्रदेश की सरकार ने ४५ लाख रूपए की आर्थिक मदद ४ नॉएडा में फ्लैट और उसके परिवार केतीन लोगों को सरकारी नौकरी !आदि प्रदान किया गया है  !इनको किस दृष्टि से देखना चाहिए ?क्या इसी प्रकार की मदद दंगो में मृत और जिनकी संपत्ति का अकूत नुकसान हुआ था ! उन सहारनपुर के सिखों  को दी गयी थी ?ये विचारणीय प्रश्न है !साम्प्रदायिकता  का समाधान  सम्प्रदायकिता  से नहीं किया जासकता है !किसी भी सरकार को सरकारी धन अपनी मन मर्जी से बितरण करने का अधिकार नहीं दिया जा सकता है !साहित्यकार भी अवार्ड लौटा रहे हैं !लोग कह रहे हैं की हिंदुस्तान में निजता पर हमला हो रहा है !यह निजता संबिधान द्वारा सुरक्छित है !इसका समाधान  सुप्रीम कोर्ट से कराया जाना चाहिए !पुरुष्कार लौटा कर नहीं !सभी लोग अपनी मनमर्जी से साम्प्रदायिकता का  समाधान करने में लगे हुए हैं !और अराजकता को जन्म देने की चेस्टा कर रहे हैं !भारत लोकतांत्रिक देश है !और एक स्वतंत्र निष्पक्छ न्यायपालिका देश में कार्यरत है !और देश के सभी नागरिक संविधान को मानने के लिए बाध्य हैं !किन्तु मुस्लमान और हिन्दू इनको मानने के लिए तैयार नहीं दिख रहे हैं !गाय के बध पर  प्रितिबंध लगाने की बातएक बार अलग रख दीजिये !किन्तु क्या दूसरे तमाम मसलों पर हिन्दू मुसलिम दंगे नहीं होते हैं ?इसलिए जो लोग देश में साम्प्रदायिक सद्भाव चाहते हैं !उन्हें अपने निजी स्वार्थों से उठकर इन दो धर्मों के मध्य होने वाले दंगो और विवादों के मूल कारणों को खोज कर उनका समाधान निकालना चाहिए !देश में सिया मुस्लमान भी रहते है ! ईसाई भी रहते हैं !फिर इनसे दंगे क्यों नहीं होते हैं ? हिन्दू मुसलिम दंगो पर देश के फिर से टूटने की बात लोग कहने लगते हैं !किन्तु इस पर विचार क्यों नहीं करते हैं!कि हिन्दुस्तान का विभाजन होने के बाद भी पाकिस्तान दो हिस्सों में विभाजित हो गया !और अभी और कितना बिभाजन होंगे ?इस बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता है !इस सबके बाद भी हिन्दुओं को कट्टरपंथ नहीं अपनाना चाहिए !कट्टरपंथ हिन्दुओं का कभी स्वरुप नहीं रहा है !जिस धर्म में कट्टरपंथ प्रवेश कर गया है !उसकेभयानक परिणाम आज सारा संसार देख रहा है !

Sunday, 18 October 2015

प्रेरक विचार -----(१)सर्दी ,गर्मी ,भय ,अनुराग ,संपत्ति अथवा दरिद्रता ----ये जिस के कार्य में बिघ्न उत्पन्न नहीं कर पाते हैं ! वही पंडित कहलाता है !
(२)जिसकी लौकिक बुद्धि धर्म और अर्थ का ही अनुसरण कराती है ! और जो भोग को छोड़कर पुरुषार्थ का ही  वरण करता है ! वही पंडित कहलाता है !
(३)विवेक बुद्धि वाले पुरुष शक्ति के अनुसार कार्य करने की इक्छा रखते हैं ! और करते भी हैं 1 तथा किसी वस्तु या व्यक्ति को तुच्छ समझ कर उसकी अवहेलना या अवमानना नहीं करते हैं  !
(४)विद्वान पुरुष किसी बात को देर तक सुनता है  !किन्तु शीघ्र ही समझ लेता है ! समझ कर कर्तव्य बुद्धि से पुरुषार्थ में प्रवृत्त होता है --- कामनाओं से नहीं ! बिना पूंछे दूसरे के विषय में व्यर्थ कोई बात नहीं कहता है  !
(५)पंडितों कैसी बुद्धि रखने वाले मनुष्य दुर्लभ वस्तु की कामना नहीं करते हैं  !खोयी हुई वास्तु के विषय में शोक नहीं करते हैं ! और विपत्ति में घबराते नहीं हैं  !
(६)जो पहले निश्चय करके फिर कार्य का आरम्भ करता है ! कार्य के बीच में नहीं रुकता है ! समय को व्यर्थ नहीं जाने देता ! और मन बुद्धि को वश में रखता है ! वही पंडित कहलाने योग्य है !
(७)जो आदर होने पर हर्ष के मारे  फूल नहीं उठता ! और अनादर से सन्तप्त नहीं होता है ! तथा समुद्र जैसी गहराई के समान जिसका चित्त व्यथित नहीं होता है ! उसी को पंडित कहना चाहिए  !
(८)जिसकी विद्या बुद्धि का अनुसरण करती है ! और बुद्धि विद्या की तथा जो शिष्ट पुरुषों की मर्यादा का उल्लंघन नहीं करता है ! वही पंडित कहलाने का अधिकारी है !
(९)बिना अध्ययन के ही गर्व करने वाले ! दरिद्र होकर भी बड़े बड़े मनोरथ करने वाले ! और बिना काम किये हुए ही धन प्राप्त करने की इक्छा रखने वाले मनुष्य को पंडित लोग मूर्ख कहते हैं !
(१०)जो अपना कर्तव्य छोड़ कर दूसरे के कर्तव्य का पालन करता है  !तथा मित्र के साथ धोखा धडी करता है ! वह मूर्ख कहलाता है  !
(११)जो ना चाहने वाले को चाहता है ! और चाहने वालों को त्याग देता है ! तथा जो अपने से अधिक बलवान के साथ बैर बंधता है ! वह मूढ विचार का मनुष्य कहा जाता है !
त्योहारों पर मिठाई की मांग  बढ़ जाती है !इसके साथ ही नकली खोबा ,चर्बी और सिंथेटिक पाउडर आदि से निर्मित दूध और चर्बी से बना घी  मक्खन पनीर आदि बाजारों में प्रचरता से मिलाना शुरू होजाता है !यद्द्पि यह नकली माल की सप्लाई सारे बर्ष भर होती रहती है !भारत बर्ष में  अनादि काल से निर्मित होने वाली मिठाइयों का निर्माण घी दूध खोबा आदि से होता आरहा है !दशहरा दीपावली त्योहारों पर लक्छमी गणेश पूजन इन्ही नकली सामान से निर्मित मिठायोँ से ही होता है !हवन आदि भी घी से ही किया जाता है !इस प्रकार बाजारों में उपलब्ध इन मिलाबटी मिठाइयों   से लोक और परलोक दोनों का नाश हो जाता है !जो लोग परलोक और पुनर्जन्म को नहीं मानते हैं !और जो मास आदि अभ्कछय पदार्थों का सेवन करते हैं !और जो दीपावली और दसहरा का त्यौहार धार्मिक दृष्टि से सनातन परम्परा के अनुसार नहीं मनाते  हैं !उनको इन नकली मिठाईयों से कोई असर नहीं पड़ता है !उनमे से कुछ लोगों के त्योहारों में खजूर आदि का प्रयोग होता है !और ईसाई समुदाय के लोग केक और चॉकलेट आदि का प्रयोग करते हैं !अब अधिकांश हिन्दू लोग भी त्योहारों में केक चॉकलेट आदि का प्रयोग करने लगे हैं !और उपहार में ड्राई फ्रूट देने लगे हैं !किन्तु लक्छमी पूजन और गणेश पूजन तो बिना मोदक हो ही नहीं सकता है ?आखिर इस नकली खोबा आदि से निजात पाने का उपाय क्या है ?मेरी समझ में बड़े पैमाने पर गो पालन होना चाहिए !और गाय भेंस आदि का क़त्ल करने वालों को मृत्युदंड और इनका ठीक से पालन पोषण ना करने वाले कृषको की  जमीन  सरकार को  जब्त कर लेनी चाहिए ! यदि ऐसा नहीं होता है !ओर बीफ खाने वालों के दबाव में सरकारें इन पशुओं की सुरक्छा नहीं करती है !तो एक दिन इस देश से अनादिकाल से प्रयोग में आने वाली मिठाइयां लुप्त होजाएंगी ! और उनके स्थान पर भारत के बाजारों में सूअर और गाय की चर्बी से बने चॉकलेट और केक प्राप्तहोने लगेंगे !इस से भारतीय संस्कृति को नष्ट करने वाले अपने प्रयत्न में सफल हो जाएंगे !और त्योहारों पर गणेश और लक्छमी पूजन और हवन आदि सब समाप्त हो जायेंगे !जिस गति से खाद्यान में मिलबाट हो रहा है !और इस मिलबाट ने अब ड्राई फ्रूट  वेजिटेबल को भी अपनी गिरफ्त में ले लिया है !इसका नियंत्रण खाद्य विभाग नहीं कर सकता है !इसका नियंत्रण तो गाय की रक्छा  और व्योपरियों के  नैतिक बल से ही हो सकेगा !

Saturday, 17 October 2015

प्रेणादायक विचार ----(१)अपने वास्तविक स्वरुप का ज्ञान .उद्द्योग दुःख सहने की शक्ति ,और धर्म में स्थिरता --- ये गुण जिस मनुष्य को पुरुषार्थ से च्युत नहीं करते हैं ! वही पंडित कहलाता है !

(२)जो अच्छे कर्मों का सेवन करता है ! और बुरे कर्मों से दूर रहता है ! साथ ही जो आस्तिक और श्रद्धालु है ! ये उसके सद्गुण पंडित होने के लक्छण है !
(३)क्रोध ,हर्ष ,गर्व , लज्जा उद्दण्ता तथा अपने को पूज्य समझना --ये भाव जिसको पुरुषार्थ से भ्रष्ट नहीं करते हैं वही पंडित कहलाता है !
चमार शब्द राशन कार्ड पर लिखा होने के कारण  राशन नहीं मिल रहा है ------ झाँसी जनपद के एक गाओं का यह मामला ब्लॉग के माध्यम से जीशान अख्तर ने प्रस्तुत किया है !इसके अतिरिक्त दलितों के साथ छुआछूत आदि की घटनाओं के सम्बन्ध में भी बताया गया है !पहली बात तो यह है कि राशन कार्ड में जाति सूचक शब्द लिखा ही नहीं जाना चाहिए था !देश में अश्प्रस्यता  को समाप्त करने के लिए जो कानून बना है !उसमे जाति सूचक शब्दों से किसी दलित को पुकारना दंडनीय अपराध है !फिर यह भूल कैसे हुई ?इसको सुधारने के लिए जिला प्रशासन से शिकायत की जा सकती थी !दलितों को हैंडपंपों  से पानी नहीं भरने दिया जाता है !या उनको कोटेदार इसीलिए राशन नहीं देता है कि वह सवर्ण है !ये सब बातें बहुत चौंका देने वाली है !देश में आरक्छण के कारण बहुत से दलित केंद्रीय मंत्री देश के राष्ट्रपति और मुख्य मंत्री तथा आई ये एस और आई पी एस  तथा सभी छेत्रों में महत्त्व पूर्ण पदों पर  बड़ी संख्या में पदासीन हैं !ग्रामसभाओं से लेकर जनपद तक और नगर पालिकाओं और नगरनिगमों के अध्यक्छ और मेयर के पद पर भी दलित पदासीन है !उत्तरप्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती ४बार प्रदेश की मुख्यमंत्री रह चुकी हैं !उनके बहुत से ब्राह्मण ठाकुर आदि मंत्री उनके पैर छूते हैं !उनका बहुत शानशौकत का जीवन है !जो राजाओं के विलास पूर्ण  जीवन को भी मात  कर देता है !उन पर आय से अधिक संपत्ति के उपार्जन की सी बी आई जाँच भी चल रही है !हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने उनके बंगले की मरम्मत और सजाबट के लिए खर्च होने वाले  सरकारी खजानेसे  ८६ करोड़ रूपया खर्च करने पर आपत्ति भी उठाई है !आरक्छण  से सर्वाधिक लाभ चमार जाति को ही हुआ है !इसलिए अब सर्वसमावेशिक  विकास और महादलित के विकास की बात चुनावी मुद्दे बन गए हैं !ऐसी स्थिति में चमार जाति पर होने वाले ये अत्याचार कानूनो के बाद और इस जाति के गगन चुम्बी विकास के बाद भी इस बात को सिद्ध करते हैं !कि आरक्छण की गंगा में जिन लोगों को स्नान करने का अवसर प्राप्त हुआ है !बे अब उसको अपने और अपने परिवार  तक ही सीमित रखना चाहते हैं !और इसमें बे सफल भी हो रहे हैं !इसलिए आरक्छण की समीक्छा होनी चाहिए !और इसको दलित विनाशक होने से बचाना चाहिए !और दलितों को अपनी इन परेशानियों को जनप्रीतनिधियों के माध्यम से प्रसाशन और मुख्य मंत्री तक पहुचाना चाहिए !मऊ रानी पर के जिस गाओं की ये घटना  है !वहां की विधान  सभा सीट आरकच्छित है !जिस पर इस समय अत्यंत संपन्न दलित महिला पदासीन है !इस अरक्छित सीट से दो दलित राज्य में मंत्री भी रह चुके हैं !और बे भी काफी संपन्न है !वर्तमान विधायक के परिबार का मऊ नगर पालिका का चेयरमैन भी है !और इस परिवार के सदस्योँ को सवर्ण ब्राह्मण ठाकुर बानिया आदि अत्यंत आदर के साथ अपने शादी आदि समारोहों में आमंत्रित करते हैं !और सबसे अधिक इज्जतदार स्थानो पर बैठाते हैं !इनसे भी ग्रामबासियों को अपने साथ होने वाले भेद भाव की बात  करनी चाहिए !
तस्लीमा नसरीन के व्यान को न तो पूरी तरह स्वीकार किया जा सकता है  !और न अस्वीकार ही किया सकता है !वह एक बहादुर महिला है !जिन्होंने इस्लामिक कटटरता के विरुद्ध जंग छेड़ी और अपने जीवन को खतरे में डाला और उनको बंगला देश  भी छोड़ना पड़ा !उनकी भारत में रहने की प्रथम इक्छा कोलकत्ता में रहने की थी !किन्तु न तो वहां की बामपंथी सरकार और न ही ममता बनर्जी की सरकार उनको बंगाल में रहने की इजाजत मुसलमानो के वोट काट जाने के कारण दे सकी !भारत का सेकुलरिज्म और हिन्दू प्रेम दोनों ही राजनैतिक अवसरवादिता से ग्रस्त है !इसलिए सभी राजनैतिक दल राजनैतिक लाभ हानि को ध्यान में रखकर ही सेक्युलर या हिन्दू प्रेम की बात करते हैं !यहां यही बहुत प्रशंसनीय है  !कि जैसा भी है !लोकतंत्र कायम है !लोकतंत्र की आत्मा राजनेताओं के सत्ता लोभ के कारण दबी हुई है !लोभी व्यक्ति कभी भी लोकतान्त्रिक नहीं हो सकता है !सत्ता समुद्र में उठती हुई तरंगो के समान होती है !कुछ तरंगे कुछ ज्यादा ऊपर उठती हैं और कुछ सतह से कुछ ही ऊपर उठ पाती  हैं !किन्तु लहर चाहे ऊँची हो या नीची हो गिरती समुद्र में ही है !कांग्रेस की लहर काफी ऊँची उठकर राजनीति के समुद्र में गिरी है !भाजपा की लहर ४७ के बाद अभी पूरी तरह उठपायी है !किन्तु यह भी एकना एक  दिन बापिस समुद्र में गिरेगी !कांग्रेस को सहज स्वाभाविक रूप से सत्ता प्राप्त हुई थी !जब तक उसमे त्यागी तपस्वी  लोग रहे सत्ता कायम रही ! किन्तु ज्यों ज्यों सत्ता को पकड़ने की कोशिश बढ़ती गयी सत्ता फिसलती गयी !और आज पूरी तरह फिसल गयी है !भाजपा कांग्रेस का नामो निशान मिटाने का प्रयत्न कर रही है !इसमें सफलता मिलेगी या नहीं ? भाजपा को संवैधानिक मर्यादा में सत्ता जाने का खतरा उठाकर भी अपना चिरपोषित राज नैतिक एजेंडा पूरा करने का प्रयत्न करना चाहिए !और संविधान की मर्यादा में पक्छपात रहित सेक्युलर सोच को क्रियान्बित करना चाहिए !पाकिस्तान की मानव अधिकारों के लिए लड़ने वाली अस्मा जहांगीर का भी यह कहना है कि भारत मुसलिम कट्टरबाद को बढ़ाबा देता है !
भाजपा की केंद्र सरकार में व्योपारी निरंकुश हो गए हैं !दाल हो या अन्य खाद्यान  इनकी महगाई की बृद्धि में भूमिका व्योपरियों की ही होती है !उत्पादक किसान को तो उसकी उपज का उचित मूल्य भी प्राप्त नहीं होता है !राजनेताओं ने और व्योपरियों ने नैतिकता का त्याग कर दिया है !नेता सत्ता सुख भोग रहे हैं !और व्योपारी आम आदमी का खून पी रहा है !उत्पादक किसान आत्महत्या कर रहे हैं !किसानो की समस्यायों के उठाने वाले भी  नेता ही है !जो किसानो की समस्याएं उठाकर अपनी राजनीति चमकाते हैं !और अवैधानिक लाभ उठाते हैं !जब तक उत्पादक  किसान गाओं में खाद्यान  बैंक नहीं खोलते हैं !आपस में सौहाद्र  कायम नहीं करते हैं !गाओं को राजनीति से मुक्त नहीं करते हैं !और ग्रामोद्योगों का विकास नहीं करते हैं !तबतक किसान शासन और नेताओं के शोषण से मुक्त नहीं हो सकते हैं !जब फसल अच्छी पैदा होती है !तब भी लाभ व्योपारी को ही होता है !और जब फसल कम पैदा होती है !लाभ तब भी व्योपारी को ही होता है !राजनेता हर हाल में उद्योगपतियों और व्योपरियों के हित में ही क्रिया शील रहते हैं !क्योंकि चुनाव के चंदे इन्ही लोगों से प्राप्त होते हैं  !

Friday, 16 October 2015

टकराव बाला फैसला ----न्यायिक नियुक्ति आयोग को सुप्रीम कोर्ट ने यह कहते हुए असंवैधानिक करार दिया है ! कि यह संविधान के बुनियादी ढांचे का उल्लंघन करता है ! जिसके अंतर्गत न्यायपालिका में किसी भी तरह का हस्तछेप नहीं किया जाना चाहिए !सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी कहा है !कि हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में जो हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की नियुक्ति और उनके स्थानांतरण के लिए j कॉलेजियम सिस्टम है !उसमे भी खामियां है !और इस सिस्टम के सम्बन्ध में नियुक्ति में पक्छपात आदि के जो आरोप लगाए जाते हैं !बे पूरी तरह निराधार नहीं है !इसलिए कॉलेजियम सिस्टम को भी दोषमुक्त करने के लिए और इसको अधिक पारदर्शी बनाने के लिए सुप्रीम कोर्ट  तीन नवंबर से विचार करेगा ! संविधान में संसद सर्वोच्च है !यही देश की न्यायिक और प्रशासनिक व्यबस्था के लिए कानूनो का निर्माण करती है !किन्तु न्यायपालिका को संसद द्वारा पारित कानूनो की समीक्छा और उनको निरस्त करने का अधिकार है !विश्व के किसी भी देश में इतनी अधिक स्वतंत्र अधिकार प्राप्त न्यायपालिका नहीं है ! देश में जिस तरह से प्रधान मंत्री से लेकर राज्य के मुख्यमंत्रियों तक और भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों पर गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए जाते हैं !और बे आरोप न्यायालय में सिद्ध भी होते हैं !और कई प्रदेश के मुख्य मंत्रियों केंद्रीय मंत्रियों और प्रसाशनिक अधिकारीयों को सजा भी दी गयी है !ऐसी स्थिति में राजनेताओं को सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के न्यायाधीशों की नियुक्ति में दखलंदाजी करने का अधिकार देना उचित नहीं  नहीं है !सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला न्यायिक दृष्टि से और  संविधान निर्माताओं और संविधान के प्रावधानों के अंतर गत लोकहित में उचित है !कॉलेजियम सिस्टम में जो दोष है !उनको हटाने के लिए भी  सुप्रीम कोर्ट ने  सुनबाई करने का निर्णय लिया है !उस से सुनबाई और न्यायिक समीक्छा  के बाद दोषमुक्त कॉलेजियम सिस्टम का स्वरुप देश के सामने आएगा !और न्यायपालिका न्यायाधीशों की नियुक्ति और ट्रांसफर प्रमोशन आदि में और अधिक पारदर्शी बनेगी !  और भाई भतीजा बाद से मुक्त हो जायेगी ! नरोत्तम स्वामी सीनियर अधिवक्ता सिविल लाइन्स झाँसी
सेक्युलर कबीले के लोग ------ यह अध्यात्म से अनभिज्ञ लोगों को अजीब लगसकता है !  !कि महर्षि दयानंद रामकृष्ण परम हंस विवेकानंद रवीन्द्र नाथ टैगोर गांधी जी वनोबा भावे आदि सेक्युलर थे !यद्द्पि बाह्य दृष्टि से बे सभी धार्मिक लोग थे !किन्तु उन्होंने धर्म के द्वारा अध्यात्म ज्ञान की प्राप्ति कर ली थी !जैसा की भगवान श्रीकृष्ण ने गीता १८(२०)में कहा है ! जिस ज्ञान के द्ववारा अध्यात्मनिष्ठ व्यक्ति सम्पूर्ण भिन्न भिन्न शरीर धारी प्राणियों में एक ही अविनाशी परमात्मा की सत्ता देखता है ! वह श्रेष्ठ ज्ञान है ! १३(२८)में कहा है सब प्राणियों में सम रूप से स्थित ईश्वर को समरूप से देखने वाला मनुष्य अपने आपसे अपनी हिंसा नहीं करता है क्योँकि वह स्थाबर जंगम चर अचर आदि सम्पूर्ण प्राणियों में समानरूप से परिपूर्ण परमात्मतत्त्व के साथ अपनी अभिन्नता का अनुभव करता है ! वह अपने द्वारा अपनी हत्या नहीं करता है !क्योँकि जब एक ही परमात्मसत्ता को सभी रूपों स्वरूपों में देखेगा तो उसके द्ववारा किसी की भी हिंसा संभव नहीं हो सकती है !इसीलिए सेक्युलर वही व्यक्ति हो सकता है !जो शरीर भाव से ऊपर उठकर आत्मभाव में स्थापित हो गया हो !इस दृष्टि से भारत में कोई भी राजनेता सेक्युलर नहीं है  ! सभी का लक्छ्य  सत्ता और राजनीति में सफलता प्राप्त करने का है !इनके आचरण से यह बात सिद्ध होती है !ये बाते सर्वधर्म समभाव की करते हैं !किन्तु सत्ता प्राप्त करने के लिए बातें कुछ और कर्म कुछ और होते हैं !हिन्दू राजनेता खास तौर से वैदिक धर्म के विनाश के लिए राजनैतिक लाभ प्राप्ति करने की दृष्टि से कृत संकल्पित दिखाई देते हैं !ममता बनर्जी तस्लीमा नसरीन को बंगाल में रहने की इजाजत नहीं देती हैं !रुश्दी को जयपुर के साहित्य सम्मलेन में मुसलमानो के विरोध के कारण शामिल नहीं होने दिया जाता है !तस्लीमा नसरीन और रुसदी की पुस्तकें बेन कर दी जाती हैं !बटाला कांड के आरोपी और दिल्ली ब्लास्ट के अभियुक्त शहजाद के घर पर परिजनों को सांत्वना देने इमाम बोखारी जाते हैं और केंद्र सरकार को कातिल कहता हैं ! तत्कालीन गृह मंत्री चिदमबरम और बंगाल के उस समय के मुख्य  मंत्री बुध देव के पुतले जलाते हैं !जो राजनेता वास्तव में सेक्युलर हैं ! उनकी बात पर ध्यान नहीं दिया जाता है ! रामजन्म भूमि पर हाई कोर्ट के फैसले के बाद राज्य सभा सदस्य राशिद अल्वी ने एक लेख लिखा था ! मस्जिद की जिद छोड़ें मुसलमान उस लेख में अल्वी ने लिखा था ! इस देश को सेक्युलर बनाने का श्रेय हिन्दुओं को है मुसलमानो को नहीं ! १४ अगस्त को बटवारे के बाद पाकिस्तान ने अपने आपको इस्लामिक राष्ट्र घोषित कर दिया था ! जबकि हिन्दुस्तान ने इस राष्ट्र को सेक्युलर माना ! मौलाना बहीउद्दीन ने कहा विवाद पर  अब पूर्ण विराम लगा दें  !फैसले से यह साबित हो गया कि भारत सही मायने में सेक्युलर देश है ! आरिफ मुहम्मद खान ने कहा देश की परम्परा पुष्ट हुई ! अदालत का यह फैसला अनोखा और स्वर्ग से गंगा उतारने जैसा है ! यह दौर मजहबी उन्माद पैदा करने का नहीं है ! इसके बजाय हमें देश के उन ४०%गरीबों की चिंता करनी चाहिए जिन्हे दो बख्त की रोटी नसीब नहीं है !किन्तु इस प्रकार केसेक्युलर सोच के लोगों की आबाज नक्कार खाने में तूती की अबाज की तरह है !देश में सर्व धर्म समभाव जभी रह सकता है !जब सभी धर्म एक दूसरे की उन्नति में सहभागी हों !किन्तु वैदिक धर्मब्लाम्बियों का धर्म परिवर्तन होता  रहे !और वैदिक धर्म के सनातन आस्था के आधार गाय का बध जारी रहे !गीता को विद्यालयों में इसलिए न पढ़ाया जाय की वह हिन्दुओं का धर्म ग्रन्थ है !तो वैदिकधर्म की जानकारी के अभाव और धर्म परिवर्तन के कारण और गाय के मास भक्छण के कारण जब वैदिक धर्म का ही नाश हो जाएगा फिर सर्व धर्म समभाव कैसे और कहाँ से सिद्ध होगा ? नरोत्तम स्वामी अधिवक्ता सिविल लाइन्स झाँसी

Thursday, 15 October 2015

संस्कृति की मानहानि ----- गाय के बध को प्रतिबंधित करने के कानून निर्माण को लोग भाजपा का कार्यक्रम मान रहे हैं !आचार्य विनोबा भावे ने भी गाय का बध बंद करने के लिए आमरण उपबास  किया था  !२९-५-७६ को बाबा ने घोषित किया था की यदि सुप्रीम कोर्ट के निर्णय की मर्यादा में सारे देश में गो हत्या कानून नहीं बनता तो  बाबा आमरण उपबास करेगा ! प्रधान मंत्री का पद संभालने के बाद मोरारजी भाई विनोबा से मिलने पवनार आश्रम पहुंचे थे !  बाबा ने कहा आज तो आपसे गो हत्या विषय में चर्चा करनी है !  मोरारजी भाई ने बाबा से कहा इस विषय में उपवास नहीं होना चाहिए ! इस पर विनोबा जी ने  पूंछा यदि इस विषय पर उपवास नहीं होना चाहिए तो किस विषय पर होना चाहिए ?जैसे ही बाबा के उपबास के निर्णय की जानकारी समाचार माध्यमों  से प्रकाशित हुई ! तो सम्पूर्ण देश में हिन्दुओ मुसलमानो ईसाइयों और राजनेताओं ने गो बध बंद करने के समर्थन की बाढ़ आगयी !अलेप्पी के बिशप ने पत्र लिख कर कहा कि यदि गो हत्याबंदी देश का आम कल्याण  करने में सहभागी होती है ! तो ईसाई चर्च को भारत में जिसमे केरल भी शामिल है ! गो हत्या बंदी करने में कोई एतराज नहीं है ! मथुरा में चल रहे गो हत्या बंदी सत्याग्रह के कुछ साथी विनोबा जी से मिलने आश्रम में आये थे ! उनमे गुजरात के भी कुछ साथी थे ! उनसे बाबा ने कहा गुजरात यानी क,ख ,ग ,क यानी कातना ख यानी खादी और ग यानी गांधी और गाय को बचाना ! गाय मर गयी तो गांधी मर गए  !गांधी जी ने खुद यह कहा था ! की ! एक गाय कटती है ! तो मुझे लगता है मेरा सर काट रहा है ! तिलक ने कहा था हमको स्वराज्य मिलेगा तो हम पांच मिनट में पहला काम करेंगे गो हत्या बंदी  !केंद्रीय गृह मंत्री ह. एम . पटेल के नेतृत्वा में  आये शिष्ट  मंडल ने भी बाबा से निबेदन  किया कि आप अपने उपबास के निर्णय को फिलहाल स्थगित कर दें ! बहुत से साम्यबादी नेता तथा बंगाल के मुख्य मंत्री ज्योति बसु केरल के मुख्य मंत्री वासुदेवन नायर और नागपुर से आये अब्दुल बहाव आदि सभी ने गो हत्या बंदी का समर्थन किया ! किन्तु कानून बनाने के लिए समय माँगा ! बाबा ने निश्चित तिथि से उपबास शुरू कर दिया ! उपबास के पांचबे दिन २६-४--७९ को सांसद श्री चंद्रशेखर बाबा से मिलाने पवनार आये ! चन्द्र शेखर ने मोरारजी भाई का संसद में दिया गया वक्तव्य बाबा को दिखाया ! गो हत्या बंदी के लिए जो मांग थी वह पूर्ण होने के निश्चित आश्वासन मिलने के कारण शाम को करीब ३--५० पर बाबा का उपबास समाप्त हो गया था !इसीलिए गो हत्या बंदी के प्रश्न को भाजपा का प्रश्न नहीं मानना चाहिए !जो लोग इसका विरोध कर रहे हैं ! और बीफ पार्टियों का आयोजन कर रहे हैं ! बे भारत की आत्मा और मूल वैदिक संस्कृति पर प्रहार कर रहे हैं !और कुछ लोग वेद आदि धार्मिक गर्न्थो से उद्धहरण पेश कर गाय के मास के भक्छण को सिद्ध करने  का प्रयत्न कर रहे हैं !विदेशियों के द्वारा अन्वादित और व्याख्यायित वैदिक धर्मग्रंथो की व्याख्या दोष पूर्ण है !बहुत अधिक शास्त्रों के अध्ययन की आवश्यकता नहीं है !गाय के महत्त्व को समझने के लिए महाभारत और गीता का अध्ययन तथा भगवान श्री कृष्णा की गो भक्ति और गाय के दूध घी और उसके मूत्र गोबर आदि की उपयोगिता ही गाय के बध को निषिद्ध घोसित करने के लिए पर्याप्त है !गाय के संरक्छण पालन पोषण की व्यबस्था सरकार को करनी चाहिए !जो लोग गाय को माता मानते हैं !उन्हें भी अपनी माता को कचड़ा मैला और पन्नी खाने के लिए खुला नहीं छोड़ना चाहिए !

Wednesday, 14 October 2015

प्रजातंत्र को सामान्यजन तक पहुचाने के लिए !राजीव गांधी की सरकार ने १८ साल की आयु के युवकों को मताधिकार तथा  पंचायत एक्ट सम्पूर्ण देश में लागू कराने  के लिए कानून पारित कराया था ! स्वतन्त्रता  प्राप्ति के बाद ही संसद में यह मांग जोर से उठती थी ! कि देश में लोकतंत्र  को जन सामान्य की भागीदारी के लिए ग्रामस्वाराज्य व्यबस्था लागू की जाय !परिणामस्वरूप पंचायत राज के माध्यम से ग्रामसभाओं छेत्र समतियों  और जिला पंचायतों को असीमित अधिकार प्रदान किये गए !और ग्रामीण विकास के लिए सरकारी धन भी प्रचुर मात्रा  में आवंटित किया गया !छेत्र  पंचायतों को भी असीमित अधिकार दिये गए !और जिलापंचायत को भी शक्ति प्रदान की गयी !किन्तु इस का बांछित परिणाम प्राप्त नहीं हुआ !बल्कि जो विकास के काम सरकारी अभियंताओं के संरक्छण में ठेकेदारों द्वारा होते थे !और जिसमे अधिकारिओं को कमीशन की प्राप्ति और ठेकेदारों को लाभ होता था !इसके बाद भी निर्माण कार्य पूर्ण होते थे  !और उनमे मर्यादित बेईमानी होती थी !किन्तु जबसे अधिकार ग्रामसभा और जिला पंचायत के पास आये हैं! !तब से धांधली पराकाष्ठा पर पहुँच गयी है !अब तो कभी कभी निर्माण होते ही नहीं है !और पूरा पैसा ग्रामप्रधान की जेबों में चला जाता है !और अगर निर्माण कार्य होता भी है !तो वह इतना घटिया होता है ! कि वह कुछ दिन ही मुश्किल से चल पाता है !ग्राम प्रधान बनते ही उसके पास १० लाख की गाड़ी आजाती है !और उसकी आर्थिक स्थिति हिरण की तरह तेज दौडने लगती  है !उसकी हुलिया और मकान तक बदल जाता है !इस से ज्यादा आर्थिक लाभ ब्लॉक प्रमुख और जिला पंचायत अध्यक्छ को होता है !इसीलिए जिला पंचायत का अध्यक्छ बनने के लिए सदस्यों की खरीद फरोख्त होती है !और कीमत प्रति सदस्य ५० लाख तक हो सकती है !ब्लॉक प्रमुख के लिए भी छेत्र समिति केसदस्य खरीदे जाते हैं !इस समय जो जिला पंचायत सदस्यों का निर्वाचनहो रहा है !उसमे उम्मीदवार लाखों रुपया खर्च कर रहे हैं !कहीं कहीं तो यह खर्च करोड़ों में जा सकता है !इस से भी बहुत से उम्मीदबार ऐसे हैं ! जो समझते हैं कि बे चुनाव रुपया खर्च करके भी नहीं जीत सकते हैं !इसीलिए बे दबंगई दिखाकर बूथ कैपचर करा रहे हैं !और अधिकारीयों के सहयोग से फर्जी मतदान भी करा रहे हैं !मतदाता इतने आतंकित और भयग्रस्त हैं !कि जैसे कसाई के हाथों बेजुबान गायें कट जाती हैं !बे भी इन दबंग  नेताओं के कारण बिना किसी विरोध के चुप चाप अपने घर लौट जाते हैं !लोकतंत्र की रक्छा केलिए जागरूक मतदाताओं को इन दबंग बूथ कब्ज़ा करने वाले और फर्जी मतदान कराने वालों का सामूहिक विरोध करना चाहिए !अभी निर्वाचन के सिर्फ दो चक्र ही पूर्ण हुए हैं !और इन चक्रों में दबंगो ने बूथों पर कब्जे भी किये हैं !और फर्जी मतदान भी कराया है !अगर यह रोका नहीं गया तो फिर जिलापंचायत इन्ही दबंगो की बनेगी !और लोकतंत्र की हत्या होगी !

Tuesday, 13 October 2015

ठीक बात है !कि किसी के खाने पीने पर प्रितिबंध  नहीं होना चाहिए !किन्तु खाना भी देश काल और संस्कृति के अनुकूल होना चाहिए !और खाने से विधि विधान का उल्लंघन भी नहीं होना चाहिए !अमेरिका आदि में जो गायें होती हैं ! बे वास्तव में गायें नहीं गवय होते है !  बे गाय की आकृति के समान एक प्रकार का जंगली पशु होता है! जिसको पाल पोश कर पालतू बना लिया गया है ! उस कि आकृति गाय के समान होती है ! किन्तु उसमे  गाल कम्बल नहीं होता है ! भारत में भी  यह गवय प्राचीन काल में हिमालय के आस पास पाया जाता था !  हो सकता है आज भी हो  !महाभारत में इसका वर्णन किया गया है ! गंध मदन पर्वत के पास मोर चामरी गायें बन्दर रुरु मृग सूअर गवय और भेंस आदि पशु विचार रहे थे (१५) १३५० ! इसीलिए अमेरिका में जो बीफ खाया जाता है !उसमे भारतीय गाय का मास शामिल नहीं किया जा सकता है !मास का आहार करने वालों के लिए पशु पक्छी सूअर आदि बहुत प्रकार के जीव जंतु हैं ! इसीलिए मासा हारी गाय की उपयोगिता को ध्यान में रखकर इसका मास खाना बंद कर सकते हैं !गाय केमास से कछ लोगों का ही पेट एक दिन भर सकता है !जबकि  जीवित गाय स्वास्थ्यबर्द्धक दूध मक्खन घी दही पनीर आदि १५ साल तक दे सकती है !और बहुत से परिवारों कापोषण करती है !उसके गोबर और मूत्र में कीटाणु विनाश  करने की शक्ति है !इसीलिए ध्यान आदि करने के पहले आध्यात्मिक पुरुष ध्यान के लिए निश्चित किये हुए स्थान को गाय के गोबर से लीप कर पवित्र करते हैं !उस से कृषि के लिए सस्ती उर्बरक खाद की भी प्राप्ति होती है !और स्वाभाविक मृत्यु के बाद गाय की चमड़ी और हड्डी भी काम आती है !गाय के मूत्र से कैंसर ऐसे संघातक रोग भी ठीक होते हैं !इसलिए  भारत में जो लोग गाय के मास को खाने की जिद पर अड़े हुए है !और गाय के मास के खाने पर रोक लगाने का यह कहकर विरोध कर रहे हैं !की यह उनके खाने पीने की आजादी पर हमला है !बे बहुसंख्यक गाय का दूध माखन आदि खानेवालों के हित का ध्यान रखते हुए ! और गाय से प्राप्त होने वाले  अन्य अनेक लाभों को दृष्टिगत रख गाय के मास को खाने की जिद छोड़ कर अन्य जीव जंतुओं का मास खाकर अपनी खाने पीने की आजादी को कायम रख सकते हैं !अगर ये लोग चाहें तो इंग्लैंड अमेरिका आदि देशों से गवय का निर्यात कर उसका मास भक्छण कर सकते हैं !

Monday, 12 October 2015

किसानो की हालत तो बदहाल होनी ही थी !क्योँकि नेताओं अधिकारियों को खुशहाली   प्राप्त करनी थी !अगर ईमानदारी के साथ इस बदहाली को पैदा करने वाले और इस बदहाली के कारण खुशहाली  प्राप्त करने वाले नेताओं ,अधिकारियों और कर्मचारियों की समस्त सम्पत्तियों का पता लगाया जाय  !तो मालूम पड़ेगा की किसान अपनी जमीन खोकर भीख मांग रहे  हैं  !खून बेचरहे हैं ! इसके बाद भी दो जून की रोटी नहीं जुटा पारहे हैं !और नेता आदि माला माल हो गए हैं !बहुत से लेखपाल अरब पति हो गए हैं !नेताओं के पास कितनी दौलत इकट्ठी हो गयी है !इसका अंदाज उनके गले में पड़ीहुई ५ तोले की सोनेकी  जंजीर २० लाख से लेकर ३० लाख कीमत की कई कारें ! और शादी में अनाप शनाप खर्चे जो राजाओं को भी मात करदें ! और अभी हो रहे ग्रामसभा और जिलापंचायत के चुनाओं में लाखों रूपया खर्च करने के रूप में देखा जा सकता है !विकास का  ऐसा कहर किसानो और आम जन पर कभी नहीं टूटा जो आज टूट पड़ा है !इसका इलाज आमजन के पास नहींहै !क्योकि बदहाली पैदा करने वाले लोग इतने शक्तिशाली हैं ! कि इनका मुकाबला भौतिक शक्ति के साधनो से नहीं किया जा सकता है !इसका एक ही उपाय है !की तिल  तिल तंगहाली और बदहाली में मरने और अपमानित जीवन जीने के बजाय अगर पीड़ित किसान अन्न जल  त्याग कर आमरण अनसन पर बैठें ! और यह संकलप करलें की चाहे प्राण भले ही चले जाएँ किन्तु जब तक समस्या का समाधान नहीं होगा ! तब तक प्राणो की आहुति देने का यह सिलसिला जारी रहेगा !हो सकता है की इसमें एकाध किसान के प्राण बलि बेदी पर चढ़ जाएँ !किन्तु इस आत्मत्याग का असर विजली की तरह होगा और फिर किसानो को उनके अधिकार अवश्य प्राप्तहो जायेंगे !आत्मत्याग और आत्मबलिदान से बड़ी कोई और कुर्बानी नहीं हो सकती है !गांधी जी ने इसी आत्मत्याग के अहिंसक अस्त्र का उपयोग आजादी के लिए अंग्रेजों के विरुद्ध किया था !और आजादी प्राप्त की थी !
धर्मयुग में राजमाता विजय राजे सिंधिया और उनके पुत्र माधव रो सिंदिया का इन्टर व्यू राजमाता के जीवन काल में  प्रकाशित हुआ था  !j !ऐसा कहाजाता था ! कि माता और पुत्र में विवाद और मतभेद पैदा कराने वाले सरदार आंग्रे थे !इन्टर व्यू में राजमाता ने कहा था कि मेरी बहु ने मेरे पुत्र को बिगाड़ दिया है  !अन्यथा मेरा पुत्र इतना आज्ञाकारी था ! कि मेरा पुत्र मेरी चप्पलें भी उठा लाता था !अब तो मेरी बहु मेरे पोते (ज्योतिरादित्य सिंदिया )को भी मेरे पास नहीं आने देती हैं !इसी इंटरव्यू के नीचे माधव राओ सिंदिया का भी इंटरव्यू छपा था जिसमे उन्होंने अपनी माता जी के आरोपों का खंडन किया था !एक समाचार १९६७ में अखबारों में प्रकाशित हुआ था !कि पंडित  द्वारिका प्रसाद मिश्र ने ग्वालियर राज्य के कांग्रेसी प्रत्यासिओं के चयन में राजमातासे न तो सलाह ली थी ! और ना ही उनके पसंद के प्रत्यासिओं को टिकेट दिए थे !परिणामस्वरूप उन्होंने कांग्रेस से त्यागपत्र देकर जनसंघ की सदस्य्ता स्वीकार कर ली थी !और ग्वालियर राज्य के प्रभाव छेत्र बाले ५४ विधान सभा और आठ संसदीय सीटों पर कांग्रेस को हरा दिया था !राजमाता ने प्रथम बार चुनाव में हेलीकॉप्टर से प्रचार किया था !बाद में उन्होंने कांग्रेस के विधायकों को तोड़कर मिश्र मंत्रिमंडल के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव पारित कराया था !और बे विधान मंडल दल की नेता भी चुनी गयी थी !किन्तु  उन्होंने कांग्रेस से त्यागपत्र देकर आये गोविन्द नारायण सिंह को मुख्य मंत्री  बनायाथा !आपातकाल में विजया राजे सिंदिया राजमाता गायत्री देवी को भी बंदी बनाया गया था !उनके साथ पुलिस ने केसा  व्योहार किया था ?यह तो पता नहीं है !किन्तु आपातकाल क बाद राजमाता इंदिरा जी के खिलाफ आंध्र की मेढक सीट से चुनाव लड़ी थी ! और पराजित हुई थी !उस समय माधव राओ सिंदिया कांग्रेस में थे ! किन्तु बे इंदिरा जी के चुनाव प्रचार में नहीं गए थे !राजमाता ने भले हीअपनी बसीयत में यह लिखा हो की मेरा पुत्र मेरा अंतिम संस्कार न करे ! किन्तुअंतिम संस्कार तो विधि विधान के साथ उनके एक मात्र पुत्र ने ही किया था !वैदिक धर्म के अनुसार अंतिम संस्कार तो पुत्र या पुत्री का पुत्र ही पुत्रिका धर्म के अनुसार कर सकता है !राजमाता महान धार्मिक महिला थी !यदि उनका अंतिम संस्कार उनका एक मात्र पुत्र न करता तो उनको सद्गति प्राप्त नहीं हो सकती थी !

Sunday, 11 October 2015

वैदिक धर्म में तो सन्यासियों के लिए जिस विधि विधान का निर्माण किया गया है !उसके अत्यंत प्रितिकूल आचरण इन बाबाजी लोगों का दिखाई दे रहा है !हम कलयुग में रह रहे हैं !यह युग धर्म की दृष्टि से अत्यंत निकृष्ट काल है  !इस  युग के सम्बन्ध में लगभग सभी वैदिक धर्म ग्रंथों में धर्म के पराभव और साधु सन्यासियों संतो आदि के आचरण में योग के स्थान पर भोग की प्रधानता की भविष्य वाणी बहुत पहले कर दी थी !इसीलिए साधु संतो और सन्यासियों के पास अकूत धनसम्पत्ति होने से कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए !इस समय समाज में खानपान और दूषित जीवन चर्या के कारण समाज का धनिक बर्ग  मानसिक और शारीरिक रोगों से ग्रस्त हो गया है !चिकित्सिक भी रोग ग्रस्त होते हैं !बे बीमारों का इलाज तो दबाओं से  करते हैं !किन्तु दबाओं के सेवन से होने वाले दुष्प्रभावों से अपने को मुक्त रखने के लिए योगिक क्रियाओं का आश्रय लेते हैं !योग जो प्राचीन भारत  में सिर्फ आत्मा को परमात्मा से जोड़ने का काम करता था !आज रोगों के निवारण का प्रमुख साधन बन गया है !और इसी का लाभ उठाकर बाबा रामदेव रविशंकर माता आनंद मई आशाराम राम रहीम  आदि सन्यासियों सन्यासिनो ने अकूत धन संपत्ति इकट्ठी कर ली है !बाबा राम देव ने योग की विक्री से अपना कारोवार प्रारम्भ किया था ! फिर उसको आयर्वेदिक औषधियों के निर्माण से जोड़ा !फिर अब उसको गृहस्थ जीवन में उपयोग में आने वाले सभी खाद्द्य पदार्थों और श्रृंगार साबुन आदि के निर्माण से भी जोड़ दिया है !और अब वह पूर्ण रूप से कारोबारी बाबा बन गए हैं !ये सभी बाबा  धन शौहरत प्रभाव आदि के बहुत नजदीक है !किन्तु भगवान से इनकी दूरी भगवा और स्वेतवस्त्र धारी होने के बाद भी निरंतर बढ़ती जा रही है !प्राचीन भारत में सन्यासी परम्परा से भोग मुक्त परमात्मा भक्त आत्मनिष्ठ सन्यासियों का प्रादुर्भाव होता था !इन बाबाओं के सान्निध्य और जीवनचर्या से समाज में भोगयुक्त और संन्यास के स्वरुप से मुक्त संतो सन्यासियों साधुओं का जन्म हो रहा है !और यह तो इस कलियुग में होना ही है !तुलसी दास जी ने रामायण में कहा है ! कि इस कल  युग कि महिमा क्या कहें ? जिसमे सन्यासी धनी और गृहस्थ निर्धन होंगे
वैदिक धर्म में प्रयोगों के उपरांत  जिन भोज्य पदार्थों का आविष्कार किया गया है !  उनमे अत्यंत उत्तम भोजन के पदार्थों का वर्णन श्रीकृष्ण ने गीता में १७ (८)में करते हुए कहा है ! आयु सत्त्वगुण बल आरोग्य सुख और प्रसन्नता बढ़ने वाले बहुत समय तक शक्ति वर्धन करने वाले ह्रदय को शक्ति देने वाले रसयुक्त तथा चिकने भोजन के पदार्थ सात्त्विक मनुष्य को प्रिय होते हैं! !इन भोजन के पदार्थों में घी दूध फल सूखे मेवे आदि को शामिल  किया गया है जिनसे शरीर में रोगों का प्रवेश ही नहीं हो पाता है !इसके विपरीत जो बीमारी और दूषित मानसिकता , मनोविकाारों को उत्पन्न करने वाले भोजन के पदार्थ हैं उनका वर्णन १७ (१०)में किया गया है ! जो भोजन सड़ा हुआ रस रहित दुर्गन्धित बासी और महान अपवित्र (अंडे मास आदि)है वह भोजन रोगों और दूषित मनोविकारों को उत्पन्न करने वाला होता है !ब्रेड इसी भोजन में शामिल है !भारत में अधिकांश भोजन ताजा  तथा घी दूध आदि पदार्थों से निर्मित होते थे !ताजी रोटी सब्जी मिठाईयों में रसगुल्ला कलाकंद मक्खन रबड़ी आदि खाए जाते रहे हैं !गाय भेंस बकरी के मास भक्छण नेगाय सूअर की चर्वी से बने   !चॉकलेट को ला दिया !
ये वैदिक संस्कृति का विकृत चित्रण है !यह उस मानसिकता और शिक्छण प्रसिक्छण की उपज है ! जिस काल में भारत में इस्लाम का प्रवेश हुआ ! और फिर बाद में ईसाई धर्म का प्रवेश हुआ !भारत के लोगों को मुसलमान और ईसाई धर्म अपनाने के लिए ये विकासवाद की थ्योरी विकसित की गयी !और वैदिक संस्कृति के केंद्र में स्थापित ब्राह्मणो  को निशाना बनाया गया !जैन धर्म वैदिक धर्म की ही तरह प्राचीन है !यह किसी व्यक्ति द्वारा स्थापित नहीं किया गया है !महाबीर इस धर्म के अंतिम २४ बे तीर्थंकर  थे !और इस प्रकार तीर्थंकरों की यह अनादि परम्परा चलती रहती है !भगवान बुद्ध का बौद्ध धर्म उनके निर्वाण के बाद प्रारम्भ हुआ !बुद्ध का निर्वाण उनकी तपस्या से और अंतिम संस्कार सनातन परम्परा से हुआ !जैन धर्म और बौद्ध धर्म में भी ब्राह्मणो की आलोचना नहीं की गयी है !उन्होंने ब्राह्मण की प्रितिस्ठा जन्म  के आधार पर नहीं कर्मोँ के आधार पर की है !वैदिक संस्कृति में वेदों को परमात्मा की बाणी बताया गया है !और वेद में गाय को विश्व की माता कहा गया है !गाय का या किसी भी पशु का मास का भक्छण यहाँ सामान्य तौर पर नहीं किया जाता था !गाय की महत्ता भारतीय बेदों पुराणो उपनिषदों आदि धर्मग्रंथों में की गयी है !महाभारत काल में यानी लगभग पांच हजार पांचसौ साल पूर्व   भगवान श्री कृष्णा ने गीता का उपदेश दिया है !उसमे उन्होंने १०(२८)में गाय को अपना स्वरुप बताया है  ओर१८(४४)में कहा है कि खेती करना और गाय का पालन औरउसकी रक्छा करना तथा व्योपार करना ये वैश्य का स्वाभाविक कर्म है !गीता में ही १७(२३)में श्रीकृष्ण ने कहा है कि ओम तत  सत इन तीन प्रकार के नामो से जिस परमात्मा का निर्देश किया गया है ! उसी परमात्मा से श्रष्टि के प्रारम्भ में ही वेदों तथा ब्राह्मणो और यज्ञों की रचना हुई !३(१०)में कहा है प्रजापति ब्रह्मा जी ने श्रष्टि के प्रारम्भ में कर्तव्य कर्मों के साथ मनुष्य आदि की रचना की !तथा श्रष्टि का निर्माण करने के बाद उन्होंने मनुष्यों से कहा कि तुमलोग अपने कर्तव्य कर्मो से सभी प्राणियों की उन्नति करो ! उनके प्राणो की रक्छा करो ! तथा इस  कर्तव्य पालन के लिए सामग्री तुमको  प्रकृति से हमेशा प्राप्त होती रहेगी !यह विकासवाद का सिद्धांत काल्पनिक मनगढंत और वैदिक सनकृति में वर्णित तथ्यों के विपरीत है !यदि मनुष्य जंगली अवस्था से आधुनिक सभ्य मनुष्य के रूप में परिवर्तित हुआ है !तो आज भी भारत में और बाहर भी ऐसे मनुष्य पाये जाते हैं ! जो नग्न अवस्था में रहते हैं  !और शिकार करके भोजन की प्राप्ति करते है !आज भी मनष्य का मास खाने वाले कबीले हैं !फिर इनका रूपांतरण  क्यों नहीं हुआ है ?वैदिक धर्म जैन और बौद्ध धर्म में बर्तमान काल सबसे खराब काल माना गया है !जिसे अन्य धर्माबलम्बी विकास काल मानते है !१४०० साल पुरानी पवित्र कुरान को अल्लाह की किताब मानते हैं ! !ईसा  को ईश्वर का पुत्र मानते हैं !ज्ञान के आदि  वेदों को मनुष्य कृत मानते हैं !और भगवान श्री कृष्ण और राम को मनुष्य कहते हैं !तथा ब्रह्मा शंकर देवी देवताओं और ब्रह्मा विष्णु को ब्राह्मणो के दिमाग की उपज बताते हैं !यह सब वैदिक संस्कृति को बदनाम करने और गाय के मास का भक्छण करने की सोची समझी नीति के तहत किया जाने वाला कुत्सित प्रयत्न है !वैदिक धर्म १५०० साल की गुलामी के बाद भी नष्ट नहीं हुआ !विकृत अवश्य हुआ है  !किन्तु यह फिर से खड़ा होगया है  ! वैदिक संस्कृति के ज्ञान की पुष्टि विज्ञान भी कर रहा है !और गाय के दूध की पौष्टिकता चिकित्सा शास्त्र सिद्ध कर रहा है !और गाय के मूत्र से कैंसर जैसी बीमारियां ठीक हो रही है ! उसके गोबर का उपयोग रसोई गैस और खाद के रूप में प्रयुक्त हो रहा है !

Saturday, 10 October 2015

देश में नरेंद्र मोदी राहुल गांधी ममता बनर्जी का मुकाबला परिश्रम करने में अन्य नेता नहीं कर सकते हैं !यद्द्पि देश में और भी बहुत से नेता हैं ! जो बहुत ईमानदार और देश भक्त हैं !किन्तु इन नेताओं में विशेष बात यह है !की ये पूर्ण ब्रह्मचारी हैं !और इनका परिवार के प्रिति कोई मोह या लगाव नहीं है !मोदीजी की भारतीय राजनीति में यह सबसे बड़ी विशेषता है !वह एक दम एकाकी जीवन जीते है !उनके सरकारी निवास में उनके परिवार के किसी भी व्यक्ति का प्रवेश नहीं है !यहाँ तक की उनकी परम पूज्यनीय  माता जी भी उनके साथ नहीं रहती हैं !वह विवाहित हैं !और उनकी पत्नी जसोदा बहन भी उनके साथ नहीं रहती हैं !इसकी बहुत आलोचना उनके विरोधी काम जनित व्याधियों और काम भोग विशेषज्ञ लोग करते हैं !किन्तु मोदी की यह शादी इनके जीवन की यह एक दुर्घटना मात्र है !ऐसा प्रतीत होता है की उनके चित्त और चरित्र में काम जनित भोगों का कोई स्थान कभी भी नहीं रहा है !इसीलिए विवाहित होने के बाद भीउनका उनकी पत्नी से कोई भी सम्बन्ध नहीं रहा !उनका आकर्षण  घर परिवार के प्रिति भी नहीं रहा !सिर्फ अपनी जन्मदात्री माँ  में रहा और आज भी है !किन्तु बे उस पूज्यभाव में भी मोह ग्रस्त नहीं दिखाई देता हैं !मोदी जी के जीवन प्रसंगो से प्रतीत होता है !कि उनका माता के प्रति भी पूज्य भाव माता से विकसित होकर राष्ट्र माता के प्रीति अर्पित हो गया !और उनके जीवन की समस्त कार्यविधोयोँ के केंद्र में प्रमुखता से राष्ट्र प्रेम समाहित हो गया !और सन्यासी बबन ने से प्रारम्भ हुई उनकी जीवन यात्रा संघ के स्वयं सेवक के रूप में ठहर गयी ! और उसी को लेकर बे अब पूरी तरह से गतिमान दिखाई देते हैं !उनकी राजनीति से क्या परिणाम आएंगे !यह भविष्य बताएगा !किन्तु उनकी राष्ट्रभक्ति और उसकेलिए समर्पित जीवन राजनेताओं अधिकारियों  कर्मचारियों और देश के सभी लोगों के लिए अनुकरणीय हो सकता है ऐसे अनेक उदाहरण देश में है! जबकि अपने लक्छ्य सिद्धि के मार्ग में उनका कोई भी रिश्ता बाधा नहीं बन सका !शंकराचार्य और महर्षि दयानंद ने अपने माता पिता कि आज्ञा पर ध्यान नहीं दिया! ओर संन्यास के पथ पर अग्रसित हो गए !भगवान बुद्ध ने विवाहित होते हुए और  एक पुत्र के पिता होने के बाद भी राज्य और पत्नी तथा पुत्र को त्याग दिया था !शिवाजी के गुरु समर्थ राम दस विवाह मंडप सेउठकर भाग गए थे !महर्षि अरविन्द ने भी पत्नी ओर  राजनीति का परित्याग कर दिया था !गांधी जी ने भी ३४ साल कि आयु में ही पत्नी के रहते हुए ब्रह्मचर्य  ब्रत धारण कर लिया था !जयप्रकाश नारायण विवाहित होने के बाद भी जीवन भर ब्रह्मचारी रहे !इस प्रकार के सैकड़ों जीवन प्रसंगो के उदाहरण हैं !किन्तु इनसे  प्रेरणा काम रोग से जनित लोग नहीं ले  सकते हैं  !राहुल गांधी भी ईमानदारी और राष्ट्र के लिए पूरी तरह समर्पित दिखाई देते हैं !उनका भी परिवार के प्रिति किसी भी प्रकार का मोह या लगाव नहीं है !बे अत्यंत सादगी पसंद अविबिवाहित प्रौढ़ता कीआयु  की ओर अग्रसर होते युवा हैं !उनका भी संपत्ति अर्जित करने के प्रति कोई आकर्षण  नहीं है !यदि बे कभी प्रधान मंत्री बने तो प्रधान मंत्री आवास उसी तरह से आबाद होगा जैसा आज है !उनका राष्ट्र प्रेम मोदी के राष्ट्र प्रेम से भिन्न है !मोदी के राष्ट्र प्रेम में वैदिक धर्म केंद्र में है !इसीलिए बो हिन्दू धर्म को आधार मानकर सर्व धर्म की बात करते हैं !जबकि राहुल गांधी के राष्ट्र प्रेम में सर्वधर्म समभाव के केंद्र में संकचित   हिन्दू धर्म नहीं है !इसी प्रकार बंगाल की मुख्य मंत्री ममता बनर्जी भी सादगी और ईमानदारी की मिशाल है !बंगाल केरल और त्रिपुरा का अधिकांश मुख्य मंत्री  ईमानदार और सादगी पसंद होते है !इसीलिए मोदी राहुल और ममता बनर्जी के मुकाबले परिश्रम करने में  राजनीति में सक्रिय अधिकांश नेता नहीं कर सकते हैं !

Friday, 9 October 2015

गांधी के देश में दादरी ----आज कल अधिकांश लेखक भारत में साम्प्रदायिक सद्भाव की मिसाल प्राचीन भारत की व्यबस्था के साथ जोड़कर प्रस्तुत करते हैं !प्राचीन भारत में न तो सम्प्रदाय शब्द था और न सम्प्रदाय थे !और न ही आजकैसी राजयव्यबस्था थी !धर्म था और शाशन बंशानुगत राज्य व्यबस्था से चलता था !उस समय के समाज की आवश्यकताएं और व्यबस्थाएं आज की तरह नहीं थी !आज कैसी समस्याएं भी नहीं थी !सम्प्रदाय शव्द अंग्रेजी शाशन व्यबस्था के कारण भारत में पृविष्ट हुआ !अंग्रेजो के पहले भारत में मुसलमानो की हुकूमत थी !इसीलिए भारत में हिन्दू धर्म  के अतिरिक्त  इस्लाम भी जुड़ गया !और मुसलिम काल में ही ईसाई धर्म का भी प्रवेश हुआ !ये दोनों धर्म शशक बर्ग के मान ने वालों के थे !इसिलए इनके संरक्छण में ये धर्म विकसित हुए हैं !परिणाम स्वरुप हिन्दू धर्म से परिवर्तित होकर ही अधिकाँश मुसलिम और ईसाई भारत में हैं !मुसलिम और ईसाई धर्म के धार्मिक  कर्मकांडों  में भी थोड़ा बहुत सनातन धर्म का अंश दिखाई देता हैं !किन्तु अधिकाँश भाग कर्मकांड का सनातन धर्म से उल्टा है !भोजन में इन दोनों धर्मो में मास खाने की स्वतंत्रता है !और मास भक्छण का निषेध नहीं है !इस्लाम में गाय के मास को खाना हलाल बताया गया है !किन्तु सूअर का मास हराम कहा गया है !किन्तु ईसाई धर्म में सूअर और गाय आदि दोनों और अन्य मास भी खाए जाते हैं !अंग्रेजी साहित्य से जिनका मानस शिक्छित और प्रशकिछित है वे वैदिक धर्म का विकृत चित्र प्रस्तुत करते हैं  !और इस्लामिक विद्वान भी वैदिक धर्म का विकृत चित्र प्रस्तुत करते हैं !चूँकि इनको इस्लाम को भारत में प्रभावी बनाना था !इसीलिए वैदिक संस्कृति को विकृत रूप में प्रस्तुत करना आवश्यक था !इसीलिए इन्होने पहले तो वैदिक धर्म के मूल स्वरुप को बिगाड़ा !फिर वर्णाश्रम का विकृत रूप प्रस्तुत किया !जैसा की प्राचीन भारत में नहीं था !और  अब गाय का मास प्राचीन भारत में ऋषि मुनि और ब्राह्मण तथा सभी लोग खाते थे !ये सिद्ध कर गाय के मॉस की बिक्री और हत्या पर प्रितिबंध न लगे !इसीलिए फिर गाय के सम्बन्ध में गलत और मनगढंत तथ्य प्रस्तुत कर रहे हैं !भारत अनादि काल से कृषि प्रधान देश रहा है !इसीलिए इस के निबासियों के खान पान में मॉस भक्छण प्रधान नहीं रहा है !और न ही सनातन धर्मी हमेशा और प्रितिदिन मॉस का भक्छण करते थे !शाकाहारी भोजन ही यहाँ के निबासियों का प्रधान भोजन रहा है !शाकाहारी भोजन के ५६ प्रकार के व्यंजनों का प्रादुर्भाव भारत भूमि में ही हुआ है !और इसी प्रकार का भोग भगवान को अर्पित किया जाता है !कुछ जातियां मास भक्छी रही हैं !किन्तु बे भी नित्य और अनिवार्य रूप से मॉस भक्छी नहीं थे !राजा लोग शिकार  में कभी कभी हिरन और हिंसक पशुओं का शिकार करते थे !और हिरन आदि का शिकार करते थे !किन्तु गाय का बध नहीं किया जाता था !गाय को अवध्य माना गया  था !तथा वेद में गाय को विश्व माता कहा गया था !महाभारत काल में राजाओं के पास भी लाखों गाये पली हुई थी !भगवान श्री कृष्णा ने गीता में भी दो स्थानो पर गाय का उल्लेख किया है !उन्होंने १०(२८)में तो कामधेनु (गाय )को अपना स्वरुप बताकर  उसको महत्ता प्रदान की है !और १८ (४४)में खेती गाय की रक्छा और वाणिज्य वैश्य का स्वाभाविक कर्म बताया है !भारत में यज्ञ में पशुबलि दी जाती थी !उसमे गाय और बेल की भी बलि दी जाती थी !इसीलिए इनका मास प्रसाद रूप में ग्रहण करने की पद्धति थी !किन्तु इस प्रकार के यज्ञ आम तौर पर नहीं होते थे !ये यज्ञ राजा लोग आयोजित कराते थे !और इन यज्ञों का विधि विधान से क्रियानबन ब्राह्मण करते थे !इसीलिए उसमे पशुबलि राजाओं को शक्ति प्रदान करने के लिए दी जाती थी !और प्रसाद रूपमे सभी इसको ग्रहण करते थे !किन्तु आज से लगभग ५००० बर्ष पूर्व इसको भी बंद करदिया गया था !भगवान बुद्ध ने पशुबलि के विरुद्ध आंदोलन चलाया था !इसके पूर्व भगवान श्री कृष्ण ने गायें चराकर यज्ञों में पशुबलि की प्रथा को समाप्त करा दिया था !इस्लाम और ईसाई धर्मो का उदय उस स्थान पर हुआ जहाँ मास भक्छण जीवन के लिए अनिवार्य था !उन छेत्रों में कृषि को प्रधानता नहीं थी !सभी लोग मासा हारी थे  !आज भी अधिकाँश मुसलिम देश कृषि प्रधान नहीं है !इसी प्रकार ईसाई देशों में भी कृषि कार्य बहुत कम लोग करते हैं !इन दोनों धर्मों के लोग मास भक्छी है !किन्तु भारत में ऐसा नहीं है !गांधी जी भी गाय भक्त थे !बे कहते थे कि जब गाय की गर्दन पर कुल्हाड़ी चलती है !तो मुझे ऐसा लगता है कि कुल्हाड़ी मेरी गर्दन पर चल रही है !हिन्द स्वराज्य में उन्होंने गाय के मास पर अपने विचार व्यक्त किये हैं !बे भी चाहते थे की गाय का बध न हो !किन्तु बे किसीभी प्रकार के गाय के नाम पर किसी भी धर्म पर दबाव डालने के पक्छ में नहीं थे !देवनार में बिगत ४० साल से सर्वोदयी गांधी जन गाय के बध के विरुद्ध धरना दे रहे हैं !इसीलिए गाय के बध को लेकर इस तरह की विकृत व्याख्या प्रस्तुत नहीं करनी चाहिए ! कि प्राचीन भारत में गाय का मास भक्छण आमतौर पर खाया जाता था !भले ही आज की परिस्थितियों में गाय का क़त्ल न रोका जा सके !किन्तु गाय के बध का औचित्य सिद्ध करने के लिए वैदिक धर्म को गाय का मास भक्छी के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जाना चाहिए !
युद्ध में नीति का प्रयोग करना पड़ता है !जो शत्रु सामने खड़ा है उसकी शक्ति और सामर्थ्य के अनुसार ही उसको पराजित करने की नीतिका निर्माण करना पड़ता है !इस प्रकार के युद्ध  बर्तमान समय में भी लड़े जाते हैं !किन्तु बर्तमान समय में युद्ध भौतिक संसाधनो से लड़ा जाता  है !महाभारत काल में सभी योद्धा दिव्य शक्तियों से युद्ध करते थे !इसीलिए भौतिक  शक्ति का अधिक महत्त्व नहीं था !कर्ण जन्म से कवच कुण्डल धारण कर जन्मा था !जब तक उसके पास कवच कुण्डल रहते तब तक उसको युद्ध में जीतना असंभव था !कर्ण सूर्य पुत्र था !जबकि अर्जुन इंद्र के अंश से उत्पन हुआ था !कर्ण महान दानी था उसका ब्रत था !कि जो याचक उस से कुछ मांगेगा उसको बो मांगी हुई बस्तु  अवश्य दे देगा !इसका लाभ इंद्र ने उठाया !और वह ब्राह्मण का बेश बनाकर कर्ण के पास गया !सूर्य  ने स्वप्न में कर्ण को समझाया कि वह ब्राह्मण वेश धारी इन्द्र को कवच कुण्डल न दे !क्योँकि कवच कुण्डल से हीउसका जीवन सुरक्छित था !किन्तु कर्ण ने सूर्य की बात नहीं मानी तब सूर्य ने कर्ण से कहा था कि वह कवच कुण्डल देने के बदले इंद्र से वैजन्ती शक्ति मांगले !जब तक उसके पास यह शक्ति थी !भगवान श्री कृष्ण युक्ति पूर्वक कर्ण से अर्जुन का युद्ध टालते रहे !अर्जुन को यह रहस्य ज्ञात नहीं था !जब घटोत्कच विजयन्ति शक्ति से मार दिया गया !तब श्री कृष्ण ने अपनी प्रसन्ता  व्यक्त की यह बात पांडवों को बुरी लगी !उन्होंने श्रीकृष्ण से  कहा की हमारा पुत्र मर गया है  !और आप प्रसन्नता व्यक्त कर रहे हैं ?तब श्री कृष्ण ने कहा की अगर घटोत्कच को कर्ण नहीं मारता तोइसको मुझे मारना पड़ता !जितने भी धर्म द्रोही है ! उनको मारने के लिए ही हमारा अवतरण हुआ है !इसको गीता में भगवान ने ४(७,८)में स्पष्ट कहा है ! कि जब जब धर्म की हानि और अधर्म की बृद्धि होती है ! तब तब ही में अपने आपको प्रगट करता हूँ ! साधुओं की रक्छा करने के लिए पाप कर्म करने वालों का विनाश करने के लिए और धर्म की भली भांति स्थापना करने के लिए में युग युग में प्रगट हुआ करता हूँ !श्री कृष्ण ने कहा कि तुम लोगों के हित में ही मेने एकलव्य का बध किया !शिशुपाल और जरासंध का बध हुआ !प्रागज्योतिषपुर के नरेश भगदत्त के वैष्णव  अस्त्र से अर्जुन की रक्छा की ! कर्ण को इन्द्र की दी हुई शक्ति का अर्जुन पर प्रयोग नहीं होने दिया !अगर ये सब जिन्दा रहकर दुर्योधन का साथ देते तो दुर्योधन कोपराजित करना संभव नहीं था !घटोत्कच राक्छस था  !और धर्मद्रोही था !इसीलिए उसका बध होना आवश्यक था ! इसी प्रकार कि युद्ध नीति का प्रयोग धर्म के लिए श्री कृष्ण ने भीष्म दुर्योधन द्रोणाचार्य आदि के बध  लिए भी  किया !ये सभी योद्धा दिव्य शक्तियों से युक्त थे !और इनको पराजित करना बिना नीति के संभव नहीं था श्रीकृष्ण गीता में १०(३८)में कहा है विजय चाहने वालों कि नीति में हूँ 
सूअर को गाय के मुकाबले नहीं खड़ा किया जा सकता है !सूअर मैला खता है !उसकी उपयोगिता सिर्फ स्त्री पुरुषों द्वारा बिसर्जित मैला खाने में ही है !वह सफाई का उत्तम काम करता है !किन कारणों से मास खाने वाले मुसलमानो को सूअर का मास खाने से मना किया गया है !मुझे यह जानकारी नहीं है !किन्तु ईसाई सूअर का मास खाते हैं !बहुत से हिन्दू भी पोर्क का सेवन करते हैं !किन्तु इस्लाम में इसे हराम बताया गया है ! मुसलिम प्रोफेसर जो पोर्क की पार्टी का आयोजन अपने निवास पर कर रहे हैं !उसको मुसलिम किस दृष्टि से लेते हैं !इसका पता पार्टी होने के बाद ही चलेगा !जिस तरह से मुसलिम पोर्क को निषिद्ध मानते हैं !उसी प्रकार बीफ खाना  भी वैदिक संस्कृति में निषिद्ध किया गया है !किन्तु हिन्दू धर्म अत्यंत उदार धर्म है !इसीलिए बहुत से हिन्दू बीफ खाते हैं !किन्तु उन पर जान लेवा हमला नहीं किया जाता है !किन्तु इस्लाम इस धार्मिक उदारता का परिचय नहीं देता है !इसीलिए सावधानी के तौर पर यह मुसलिम प्रोफेसर पहले ही वक्तव्य दे रहे हैं !कि बे धार्मिक और सांस्कृतिक तथा रूचि के अनुसार पोर्क नहीं खाते हैं !अगर बे स्वयं पोर्क खाकर सार्वजानिक घोसणा करें !फिर पता लगेगा कि इस्लाम में खाने पीने की कितनी स्वतंत्रता है ?सिर्फ बीफ खाने वालों को खुली छूट देने के लिए !और बीफ स्वतंत्रता पूर्वक खाएं और गो बध को प्रतिबंधित ना किया जाय इस खाने पीने की स्वतंत्रता को सिद्ध करने केलिए इस पोर्क पार्टी का आयोजन किया जा रहा है ! यह उचित नहीं है !जब मुसलमान इस पोर्क पार्टी में सम्मिलित होके पोर्क खाते तो यह समझ में आता कि इस पार्टी का आयोजन खाने पीने की स्वतंत्रता के लिए किया जा रहा है !गाय एक अत्यंत उपयोगी पशु है !इसे वेद में गावो विश्वस्य मातरः कहा गया है !इसका घी दूध दही मक्खन  स्वास्थ्य की दृष्टि से सभी दुधारू जानवरों से श्रेष्ठ है !इसका गोबर मूत्र उर्वरक खाद के लिए और औषधीय गुणों से भरपूर है !मृत्यु के बाद इसकी हड्डी चमड़ी सब उपयोगी है !वैदिक धर्म ग्रंथों में इस की महिमा का गान किया गया है !भगवान श्रीकृष्ण स्वयं गायें चराते थे !जब गाय का बध नहीं होता था !तब देश में दूध दही की नदियां बहती थी !अर्थात दूध दही मक्खन प्रचुर मात्र में प्राप्त होता था !आज गायों के क़त्ल केकारण बच्चों तक को शुद्ध गाय का दूध उपलब्ध नहीं होता है !बाजारों में केमिकल से बना दूध और चर्वी से बना घी माखन मिलता है !फिर भी में इस बात का समर्थक नहीं हूँ कि गाय के नाम पर लोगों की हत्या की जाय और देश में साम्प्रदायिक  तथा आपसी सद्भाव नष्ट किया जाय !गाय की सेवा उनको प्राथमिकता से करना चाहिए !जो गाय को माता मानते है !जबकि जो समाचार आरहे हैं ! उनसे जानकारी प्राप्त हो रही है! कि भाजपा विधायक स्वयं अलीगढ  में गाय का क़त्ल खाना चलाते थे !गाय के मॉस  की ४ सबसे बड़ी कम्पनिया हिन्दुओं की है !मोदी जी ने स्वयं एक साक्छात्कार  में कहा था ! की मेरे जैन मित्र बीफ के एक्सपोर्ट के बिज़नेस में हैं !इसीलिए किसी धर्म विशेष पर लांछन लगाना ठीक नहीं है !किन्तु सभी धर्मों  के लोगों को गाय की उपयोगिता को ध्यान में रख कर उसकी रक्छा का प्रयत्न करना चाहिए !

Thursday, 8 October 2015

भारत की राजनीति सत्ता की लालच में फंसे राजनैतिक दलों और राजनैतिक नेताओं की एक दूसरे पर अशोभनीय और असभ्य शब्दों के प्रयोग से कहाँ पहुँच गयी है !कि चुनाव आयोग को पूर्वमुख्यमंत्रिओं मंत्रिओं और वरिष्ठ सांसदों से लेकर प्रधान मंत्री के भासण की भी जाँच करानी पड़ रही है !मेने अपने छात्र जीवन में तत्कालीन प्रधान मंत्री नेहरू जी ,जनसंघ के नेता अटलबिहारी बाजपेयी समाजवादी डॉ लोहिया के चुनावी भासण सुने थे !श्री अटलबिहारी बाजपेयी का भासण अत्यंत शिष्ट और सभ्य शब्दों में कांग्रेसी सत्ता के विरुद्ध चुटीले व्यंगो से परिपूर्ण था !उनके भासण में कहीं भी किसी प्रकार की कटुता  और क्रोध का दर्शन नहीं होता था !बल्कि श्रोताओं का मनोरंजन और ज्ञान वर्धन होता था !विद्यार्थी अपनी पढ़ाई छोड़ कर उनका भासण सुनने जाते थे !डॉ लोहिया का भासण अत्यंत विदुत्त्वता से भरा हुआ !तथा युवाओं को सामाजिक बदलाव के प्रति जागरूक और सामाजिक बदलाव के लिए सहभागिता के लिए शामिल होने के लिए होता था !बे कांग्रेस पर कड़ा प्रहार करते थे !नेहरू जी ने अपने डेढ़ घंटे के भासण में देश विदेश  में होने वाली प्रगति की चर्चा करते हुए !डॉ लोहिया का स्मरण करते हुए कहा था कि में चाहता हूँ  !कि डॉ लोहिया संसद में पहुंचे ! किन्तु बे मुझे चुनाव में हराकर संसद में पहुंचना चाहते है ! डॉ लोहिया नेहरूजी के खिलाफ फूलपुर संसदीय सीट से नेहरूजी के खिलाफ चुनाव लड़ रहे थे !  अपने भासण के अंत में उन्होंने कांग्रेस के प्रत्यासी के बारे में सिर्फ इतना कहा था कि मुझे जानकारी नहीं है !कि यहाँ से जो कांग्रेसी प्रत्यासी है बो कैसा है ?अगर आप ठीक समझें तो उसको वोट दें !दुर्भाग्य से लोकतंत्र की इस आवश्यक बृत्ति और बुनियाद का राजनेताओं ने बिस्मरण कर दिया है! !और आज शब्दों के इस तीखे घमासान में लोकतंत्र की आत्मा नदारद हो गयी है !