व्यबस्था चाहे अच्छी हो या बुरी उसकी समाप्ति यथा समय ही होती है !समय के पहले कुछ भी नहीं होता है !अगर कोई पत्थर १०० चोटों में टूटता है ! तो वह १०० चोटों से ही टूटेगा !जिन्हे आज हम मेहतर भंगी या सफाई कर्मचारी के रूप में जानते हैं !और जिन्हे अश्प्रस्यता की सबसे निम्न श्रेणी में रखा जाता है !ये सब अपने स्वाभिमान के कारण इस अत्यंत हीन अवस्था पर पहुंचे है !ये दलित नहीं हैं !और वैदिक धर्मग्रंथों में पाखाना साफ़ करने या कराने वालों का कोई जिक्र भी नहीं है !अमृत लाल नागर ने नाच्यो बहुत गोपाल नामक उपन्यास में इनकी उत्पत्ति के बारे में बताया है !ये सभी ब्राह्मण और अधिकांश छत्री हैं !जब राजा पराजित हो जाता था !तो सारी प्रजा जीतने वाले राजा की प्रभु सत्ता स्वीकार कर लेती थी !किन्तु इन लोगों ने अपने स्वाभिमान को नहीं खोया !और विजयी राजा की अधीनता स्वीकार नहीं की !इसीलिए इनको दंड स्वरुप राज्य से निष्काशित कर दिया गया !और इनको सभी प्रकार के नागरिक अधिकारों से वंचित कर दिया गया ! ये सामान्य समाज से बहिष्कृत हो !अलग एकाकी जीवन जीने को विबस हुए !और धीरे इनमे इनके जातीय गुणों का विनाश हो गया ! कालांतर में जब पख़ानो का निर्माण होने लगा तो इन्हे इस अत्यंत घृणित कार्य में लगा दिया गया !सबसे पहले गांधीजी ने इनके कार्य की महत्ता को समझा ! और उन्होंने खुद अपने अनुयायिओं के साथ पाखाना सफाईका काम शुरू किया !गांधी जी के आश्रम में सभी को पाखाना साफ़ करना पड़ता था !आचार्य विनोबा भावे जो की ब्राह्मण थे ! पबनार आश्रम के पास स्थित सुरगाओं में कई बर्ष तक पाखाना साफ़ करते रहे थे !लंदन से आई मिस स्लेड जो बात में मीरा बहन के नाम से प्रिशिद्ध हुई !बो सेगाओं में पाखाने साफ़ करती थी !अब समय ने करबट ली है !शहरों में अधिकाँश घरों में झड़ने वाले पाखाने समाप्त हो गए है !और गाओं में पहले पाखाने नहीं होते थे !सभी लोग शौच हेतु जंगल में जाते थे !इसीलिए सरकारी मदद से और स्वयं के प्रयत्न से जो पाखाने बनाये जा रहे हैं !बे आधुनिक प्रकार के पाखाने है !सरकारें भी पूरी तरह से झाड़ू पाखाने समाप्त करने में लगी हुई है !ट्रेनों बसों आदि ने छुआ छूत भी कम कर दी है !अब अश्प्रस्यता मृत्यु की ओर जा रही है !और भंगी काम भी जो थोड़ा बहुत दिखाई देता है !वह भी समाप्ति की ओऱ है !
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