Thursday, 29 October 2015

ये जो सम्मान प्राप्त सभी छेत्रों के सम्मानित विचारवान विद्वान सम्मान लौटा रहे हैं !इसको गंभीरता से लिया जाना चाहिए !ये सभी विद्वान भाजपा से राजनैतिक विरोध के कारण सम्मान नहीं लौटा रहे हैं !इसका कारण उनकी अबतक की निर्मित धर्मनिरपेक्छ्ता की सोच है !जिसका विकास भारत में आजादी के बाद बहुत विस्तार से हुआ है !विभाजन के बाद भारत में मुस्लिमो की आबादी मात्र ४ करोड़ रह गयी थी जो अब बढ़कर १७ करोड़ जनगड़ना के मुताबिक हो गयी है !देश में कांग्रेसी शाशन के दौरान मुसलमानो और हरिजनों के विकास और सम्मान पर बहुत जोर दिया गया !इस दौड़ में पिछड़ी जातियों और सवर्णो की उपेक्छा की गयी !भारत की तत्कालीन दलितों की दयनीय दशा देख कर यह उचित भी था !मुसलमानो के प्रिति भी विभाजन के बाद सहानीभूति पूर्ण रबईआ  अपनाना भी ठीक था !किन्तु हिन्दुओं की उपेक्छा करना उचित नहीं था !दूसरी और पाकिस्तान में जो अन्याय और अत्याचार हिन्दुओं पर हुआ ! और उनकी आबादी घट कर २४% से १%तक आगयी !उसका खराब असर भारत में बहु संख्यक हिन्दू समाज पर हुआ !जिसके परिणाम स्वरुप !राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ लगातार मजबूत होता गया !और विश्व हिन्दू परिषद आदि संघ के सहकारी संगठन भारतसे बाहर के देशों में भी रहने वाले हिन्दुओं में लोकप्रिय हो गए !और आज यह हिन्दू विचार विकसित होते होते केंद्र में निष्ठाबान स्वयं सेवक मोदी के नेत्रत्तवा में सत्ता पर आसीन हो गया ! और अब सभी हिन्दू संस्कृति को पोषण देने वाले लोग मुसलमानो को देश के दुश्मन के रूप में देखने लगे हैं !और गाय आदि को मुद्दा बनाकर अबतक देश में जो वातावरण निर्मित हुआ था !जिसे धर्मनिरपेक्छ्ता वादी तत्त्व साम्प्रदायिक सद्भाव कहते हैं !उसको नष्ट कर रहे हैं !इसी के विरोध में ये गण्यमान पुरुष्कार प्राप्त लोग सम्मान लौटा रहे हैं !हिन्दू संस्कृति के पोषक तत्त्वों को भी यह समझना चाहिए कि हिन्दू धर्म कभी भी कट्टरता और धार्मिक संकीर्णता का पोषक नहीं रहा है !इसलिए धर्मनिरपेक्छ भारत को पाकिस्तान या मुसलिम राष्ट्रों की तरह संकीर्णता और कट्टरता का पोषक नहीं बनाना चाहिए ! इन विद्वानो को भी अपनी सोच को सर्वसामान्य सोच की अभिव्यक्ति बनाकर सम्मान लौटने के बजाय अपने विचारों के प्रवाह को जनता तक पहुंचाना चाहिए ! समाज में न्याय  हो और न्याय के आधार पर ही सभी धर्मों का विकास हो !यह प्रयत्न सभी को करना चाहिए !और वैदिक संस्कृति को धारण करने वाले भारत भू भाग में जन्मी उदार और सर्व समावेशी संस्कृति भी सुरक्छित रहे इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए !गाय भारत की अर्थव्यबस्था और आदर की अनादि काल से पात्र रही है !उसका भी पालन पोषण और संरक्छण होना चाहिए ! गाय के मॉस का निर्यात और देश में भक्छण बंद होना चाहिए !गाय के दूध घी आदि को बढ़ाबा देना चाहिए !गाय एक अत्यंत  उपयोगी पशु है !और उसे वेदों में विश्व की माता कहा गया है !इसलिए उसका बध बंद होना चाहिए !किन्तु गाय को माता मानने वाले लोगों को भी उसे सड़कों पर अबारा और भूखा छोड़ कर पॉलिथीन और गंदगी खाने के लिए नहीं छोड़ना चाहिए !

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