धर्मयुग में राजमाता विजय राजे सिंधिया और उनके पुत्र माधव रो सिंदिया का इन्टर व्यू राजमाता के जीवन काल में प्रकाशित हुआ था !j !ऐसा कहाजाता था ! कि माता और पुत्र में विवाद और मतभेद पैदा कराने वाले सरदार आंग्रे थे !इन्टर व्यू में राजमाता ने कहा था कि मेरी बहु ने मेरे पुत्र को बिगाड़ दिया है !अन्यथा मेरा पुत्र इतना आज्ञाकारी था ! कि मेरा पुत्र मेरी चप्पलें भी उठा लाता था !अब तो मेरी बहु मेरे पोते (ज्योतिरादित्य सिंदिया )को भी मेरे पास नहीं आने देती हैं !इसी इंटरव्यू के नीचे माधव राओ सिंदिया का भी इंटरव्यू छपा था जिसमे उन्होंने अपनी माता जी के आरोपों का खंडन किया था !एक समाचार १९६७ में अखबारों में प्रकाशित हुआ था !कि पंडित द्वारिका प्रसाद मिश्र ने ग्वालियर राज्य के कांग्रेसी प्रत्यासिओं के चयन में राजमातासे न तो सलाह ली थी ! और ना ही उनके पसंद के प्रत्यासिओं को टिकेट दिए थे !परिणामस्वरूप उन्होंने कांग्रेस से त्यागपत्र देकर जनसंघ की सदस्य्ता स्वीकार कर ली थी !और ग्वालियर राज्य के प्रभाव छेत्र बाले ५४ विधान सभा और आठ संसदीय सीटों पर कांग्रेस को हरा दिया था !राजमाता ने प्रथम बार चुनाव में हेलीकॉप्टर से प्रचार किया था !बाद में उन्होंने कांग्रेस के विधायकों को तोड़कर मिश्र मंत्रिमंडल के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव पारित कराया था !और बे विधान मंडल दल की नेता भी चुनी गयी थी !किन्तु उन्होंने कांग्रेस से त्यागपत्र देकर आये गोविन्द नारायण सिंह को मुख्य मंत्री बनायाथा !आपातकाल में विजया राजे सिंदिया राजमाता गायत्री देवी को भी बंदी बनाया गया था !उनके साथ पुलिस ने केसा व्योहार किया था ?यह तो पता नहीं है !किन्तु आपातकाल क बाद राजमाता इंदिरा जी के खिलाफ आंध्र की मेढक सीट से चुनाव लड़ी थी ! और पराजित हुई थी !उस समय माधव राओ सिंदिया कांग्रेस में थे ! किन्तु बे इंदिरा जी के चुनाव प्रचार में नहीं गए थे !राजमाता ने भले हीअपनी बसीयत में यह लिखा हो की मेरा पुत्र मेरा अंतिम संस्कार न करे ! किन्तुअंतिम संस्कार तो विधि विधान के साथ उनके एक मात्र पुत्र ने ही किया था !वैदिक धर्म के अनुसार अंतिम संस्कार तो पुत्र या पुत्री का पुत्र ही पुत्रिका धर्म के अनुसार कर सकता है !राजमाता महान धार्मिक महिला थी !यदि उनका अंतिम संस्कार उनका एक मात्र पुत्र न करता तो उनको सद्गति प्राप्त नहीं हो सकती थी !
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