प्रेरक विचार -----(१)सर्दी ,गर्मी ,भय ,अनुराग ,संपत्ति अथवा दरिद्रता ----ये जिस के कार्य में बिघ्न उत्पन्न नहीं कर पाते हैं ! वही पंडित कहलाता है !
(२)जिसकी लौकिक बुद्धि धर्म और अर्थ का ही अनुसरण कराती है ! और जो भोग को छोड़कर पुरुषार्थ का ही वरण करता है ! वही पंडित कहलाता है !
(३)विवेक बुद्धि वाले पुरुष शक्ति के अनुसार कार्य करने की इक्छा रखते हैं ! और करते भी हैं 1 तथा किसी वस्तु या व्यक्ति को तुच्छ समझ कर उसकी अवहेलना या अवमानना नहीं करते हैं !
(४)विद्वान पुरुष किसी बात को देर तक सुनता है !किन्तु शीघ्र ही समझ लेता है ! समझ कर कर्तव्य बुद्धि से पुरुषार्थ में प्रवृत्त होता है --- कामनाओं से नहीं ! बिना पूंछे दूसरे के विषय में व्यर्थ कोई बात नहीं कहता है !
(५)पंडितों कैसी बुद्धि रखने वाले मनुष्य दुर्लभ वस्तु की कामना नहीं करते हैं !खोयी हुई वास्तु के विषय में शोक नहीं करते हैं ! और विपत्ति में घबराते नहीं हैं !
(६)जो पहले निश्चय करके फिर कार्य का आरम्भ करता है ! कार्य के बीच में नहीं रुकता है ! समय को व्यर्थ नहीं जाने देता ! और मन बुद्धि को वश में रखता है ! वही पंडित कहलाने योग्य है !
(७)जो आदर होने पर हर्ष के मारे फूल नहीं उठता ! और अनादर से सन्तप्त नहीं होता है ! तथा समुद्र जैसी गहराई के समान जिसका चित्त व्यथित नहीं होता है ! उसी को पंडित कहना चाहिए !
(८)जिसकी विद्या बुद्धि का अनुसरण करती है ! और बुद्धि विद्या की तथा जो शिष्ट पुरुषों की मर्यादा का उल्लंघन नहीं करता है ! वही पंडित कहलाने का अधिकारी है !
(९)बिना अध्ययन के ही गर्व करने वाले ! दरिद्र होकर भी बड़े बड़े मनोरथ करने वाले ! और बिना काम किये हुए ही धन प्राप्त करने की इक्छा रखने वाले मनुष्य को पंडित लोग मूर्ख कहते हैं !
(१०)जो अपना कर्तव्य छोड़ कर दूसरे के कर्तव्य का पालन करता है !तथा मित्र के साथ धोखा धडी करता है ! वह मूर्ख कहलाता है !
(११)जो ना चाहने वाले को चाहता है ! और चाहने वालों को त्याग देता है ! तथा जो अपने से अधिक बलवान के साथ बैर बंधता है ! वह मूढ विचार का मनुष्य कहा जाता है !
(२)जिसकी लौकिक बुद्धि धर्म और अर्थ का ही अनुसरण कराती है ! और जो भोग को छोड़कर पुरुषार्थ का ही वरण करता है ! वही पंडित कहलाता है !
(३)विवेक बुद्धि वाले पुरुष शक्ति के अनुसार कार्य करने की इक्छा रखते हैं ! और करते भी हैं 1 तथा किसी वस्तु या व्यक्ति को तुच्छ समझ कर उसकी अवहेलना या अवमानना नहीं करते हैं !
(४)विद्वान पुरुष किसी बात को देर तक सुनता है !किन्तु शीघ्र ही समझ लेता है ! समझ कर कर्तव्य बुद्धि से पुरुषार्थ में प्रवृत्त होता है --- कामनाओं से नहीं ! बिना पूंछे दूसरे के विषय में व्यर्थ कोई बात नहीं कहता है !
(५)पंडितों कैसी बुद्धि रखने वाले मनुष्य दुर्लभ वस्तु की कामना नहीं करते हैं !खोयी हुई वास्तु के विषय में शोक नहीं करते हैं ! और विपत्ति में घबराते नहीं हैं !
(६)जो पहले निश्चय करके फिर कार्य का आरम्भ करता है ! कार्य के बीच में नहीं रुकता है ! समय को व्यर्थ नहीं जाने देता ! और मन बुद्धि को वश में रखता है ! वही पंडित कहलाने योग्य है !
(७)जो आदर होने पर हर्ष के मारे फूल नहीं उठता ! और अनादर से सन्तप्त नहीं होता है ! तथा समुद्र जैसी गहराई के समान जिसका चित्त व्यथित नहीं होता है ! उसी को पंडित कहना चाहिए !
(८)जिसकी विद्या बुद्धि का अनुसरण करती है ! और बुद्धि विद्या की तथा जो शिष्ट पुरुषों की मर्यादा का उल्लंघन नहीं करता है ! वही पंडित कहलाने का अधिकारी है !
(९)बिना अध्ययन के ही गर्व करने वाले ! दरिद्र होकर भी बड़े बड़े मनोरथ करने वाले ! और बिना काम किये हुए ही धन प्राप्त करने की इक्छा रखने वाले मनुष्य को पंडित लोग मूर्ख कहते हैं !
(१०)जो अपना कर्तव्य छोड़ कर दूसरे के कर्तव्य का पालन करता है !तथा मित्र के साथ धोखा धडी करता है ! वह मूर्ख कहलाता है !
(११)जो ना चाहने वाले को चाहता है ! और चाहने वालों को त्याग देता है ! तथा जो अपने से अधिक बलवान के साथ बैर बंधता है ! वह मूढ विचार का मनुष्य कहा जाता है !
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