संस्कृति की मानहानि ----- गाय के बध को प्रतिबंधित करने के कानून निर्माण को लोग भाजपा का कार्यक्रम मान रहे हैं !आचार्य विनोबा भावे ने भी गाय का बध बंद करने के लिए आमरण उपबास किया था !२९-५-७६ को बाबा ने घोषित किया था की यदि सुप्रीम कोर्ट के निर्णय की मर्यादा में सारे देश में गो हत्या कानून नहीं बनता तो बाबा आमरण उपबास करेगा ! प्रधान मंत्री का पद संभालने के बाद मोरारजी भाई विनोबा से मिलने पवनार आश्रम पहुंचे थे ! बाबा ने कहा आज तो आपसे गो हत्या विषय में चर्चा करनी है ! मोरारजी भाई ने बाबा से कहा इस विषय में उपवास नहीं होना चाहिए ! इस पर विनोबा जी ने पूंछा यदि इस विषय पर उपवास नहीं होना चाहिए तो किस विषय पर होना चाहिए ?जैसे ही बाबा के उपबास के निर्णय की जानकारी समाचार माध्यमों से प्रकाशित हुई ! तो सम्पूर्ण देश में हिन्दुओ मुसलमानो ईसाइयों और राजनेताओं ने गो बध बंद करने के समर्थन की बाढ़ आगयी !अलेप्पी के बिशप ने पत्र लिख कर कहा कि यदि गो हत्याबंदी देश का आम कल्याण करने में सहभागी होती है ! तो ईसाई चर्च को भारत में जिसमे केरल भी शामिल है ! गो हत्या बंदी करने में कोई एतराज नहीं है ! मथुरा में चल रहे गो हत्या बंदी सत्याग्रह के कुछ साथी विनोबा जी से मिलने आश्रम में आये थे ! उनमे गुजरात के भी कुछ साथी थे ! उनसे बाबा ने कहा गुजरात यानी क,ख ,ग ,क यानी कातना ख यानी खादी और ग यानी गांधी और गाय को बचाना ! गाय मर गयी तो गांधी मर गए !गांधी जी ने खुद यह कहा था ! की ! एक गाय कटती है ! तो मुझे लगता है मेरा सर काट रहा है ! तिलक ने कहा था हमको स्वराज्य मिलेगा तो हम पांच मिनट में पहला काम करेंगे गो हत्या बंदी !केंद्रीय गृह मंत्री ह. एम . पटेल के नेतृत्वा में आये शिष्ट मंडल ने भी बाबा से निबेदन किया कि आप अपने उपबास के निर्णय को फिलहाल स्थगित कर दें ! बहुत से साम्यबादी नेता तथा बंगाल के मुख्य मंत्री ज्योति बसु केरल के मुख्य मंत्री वासुदेवन नायर और नागपुर से आये अब्दुल बहाव आदि सभी ने गो हत्या बंदी का समर्थन किया ! किन्तु कानून बनाने के लिए समय माँगा ! बाबा ने निश्चित तिथि से उपबास शुरू कर दिया ! उपबास के पांचबे दिन २६-४--७९ को सांसद श्री चंद्रशेखर बाबा से मिलाने पवनार आये ! चन्द्र शेखर ने मोरारजी भाई का संसद में दिया गया वक्तव्य बाबा को दिखाया ! गो हत्या बंदी के लिए जो मांग थी वह पूर्ण होने के निश्चित आश्वासन मिलने के कारण शाम को करीब ३--५० पर बाबा का उपबास समाप्त हो गया था !इसीलिए गो हत्या बंदी के प्रश्न को भाजपा का प्रश्न नहीं मानना चाहिए !जो लोग इसका विरोध कर रहे हैं ! और बीफ पार्टियों का आयोजन कर रहे हैं ! बे भारत की आत्मा और मूल वैदिक संस्कृति पर प्रहार कर रहे हैं !और कुछ लोग वेद आदि धार्मिक गर्न्थो से उद्धहरण पेश कर गाय के मास के भक्छण को सिद्ध करने का प्रयत्न कर रहे हैं !विदेशियों के द्वारा अन्वादित और व्याख्यायित वैदिक धर्मग्रंथो की व्याख्या दोष पूर्ण है !बहुत अधिक शास्त्रों के अध्ययन की आवश्यकता नहीं है !गाय के महत्त्व को समझने के लिए महाभारत और गीता का अध्ययन तथा भगवान श्री कृष्णा की गो भक्ति और गाय के दूध घी और उसके मूत्र गोबर आदि की उपयोगिता ही गाय के बध को निषिद्ध घोसित करने के लिए पर्याप्त है !गाय के संरक्छण पालन पोषण की व्यबस्था सरकार को करनी चाहिए !जो लोग गाय को माता मानते हैं !उन्हें भी अपनी माता को कचड़ा मैला और पन्नी खाने के लिए खुला नहीं छोड़ना चाहिए !
No comments:
Post a Comment