Saturday, 17 October 2015

प्रेणादायक विचार ----(१)अपने वास्तविक स्वरुप का ज्ञान .उद्द्योग दुःख सहने की शक्ति ,और धर्म में स्थिरता --- ये गुण जिस मनुष्य को पुरुषार्थ से च्युत नहीं करते हैं ! वही पंडित कहलाता है !

(२)जो अच्छे कर्मों का सेवन करता है ! और बुरे कर्मों से दूर रहता है ! साथ ही जो आस्तिक और श्रद्धालु है ! ये उसके सद्गुण पंडित होने के लक्छण है !
(३)क्रोध ,हर्ष ,गर्व , लज्जा उद्दण्ता तथा अपने को पूज्य समझना --ये भाव जिसको पुरुषार्थ से भ्रष्ट नहीं करते हैं वही पंडित कहलाता है !

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