Thursday, 29 October 2015

महापुरुषों के जन्म दिवसों पर अवकाश घोसित करने  के बजाय विद्यायोँ और अन्य सामाजिक संस्थाओं में उनके जीवन के कार्यों के बारे  में बताया जाना चाहिए !विद्यार्थियों तथा आमलोगों को तो यह भी ज्ञान नहीं होता है !कि अवकाश किस लिए दिया गया है !जब उन्हें अवकाश से सम्बद्ध महापुरुष के बारे में कहा जाता है !तब बे यह भी नहीं जानते हैं !कि वह महापुरुष कौन थे ?इसके अलावा छुट्टियां घोषित होने के कारण विद्यालयों में शिक्छण कार्य तथा सरकारी कार्यालयों में सरकारी कार्य बाधित होता है ! बेसे भी सरकारी विद्यालयों के अध्यापक और सरकारी अधिकारी काम कम ही करते हैं !जिन महापुरुषों के नाम पर अवकाश घोसित किया जाता है !उनका जीवन कर्म की कर्मठता का ज्वलंत उदाहरण होता है !उन्होंने कर्तव्य कर्म से  अवकाश जब लिया जब बे चिरनिद्रा में  लीन हो गए !अन्यथा कर्तव्य का पालन ही उनके जीवन का विश्राम और अवकाश था !जिस देश का नारा रहा है !आराम हराम है !आज उस देश का नारा हो गया  है कर्तव्य कर्म हराम है !हमारा तो सिर्फ अवकाश ही काम है !सरकार जो गलत परम्परा अवकाशों की डाल रही है !यह उचित नहीं है !परतंत्र भारत में देश भक्ति चरम पर थी !आज देश भक्ति के स्थान पर स्वार्थ भक्ति चरम पर है !गांधी जी भी अपने जन्मदिन पर अवकाश घोषित किये जाने के विरुद्ध थे !जब लोगों ने उनके जन्म दिन को मनाने का आग्रह किया तब उन्होंने कहा था कि मेने अपना जन्म दिन स्वयं कभी नहीं मनाया और न ही मेरे माता पिता ही मेरा जन्म दिन मनाते थे !फिर आप लोग जन्म दिन मनाने का आग्रह क्यों करते हैं ? !जब लोग गांधी जी की बात मानने को तैयार नहीं हुए !तो उन्होंने कहा था कि आप मेरे जन्म दिन पर उपबास कीजिये !चरखा चला कर सूत कातिये और सूत बेचने सो पैसा प्राप्त हो और उपबास से जो बचत हो उसको हरिजन फण्ड में जमा करा दीजिये !राजा गोपाल चारी जो गांधीजी के समधि थे ! और मद्रास प्रान्त  के मुख्य मंत्री थे !उन्होंने गांधी जी के जन्म दिवस पर अवकाश घोसित नहीं किया था !इसी प्रकार की राष्ट्र भक्ति का प्रदर्शन आज के राजनेताओं को करना चाहिए !और देश में कार्य संस्कृति  का निर्माण और विकास करना चाहिए !महापुरुषों के जन्म दिन पर अवकाश घोसित कर गलत परंपरा का निर्माण कर ठलुओं और कामचोरों को काम न करने का माध्यम नहीं बनने देना चाहिए !

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