पुनर्जन्म के अनेकों उदहारण बर्तमान समय में सारे विश्व में देखने में आते हैं !अब तो वैज्ञानिक शोध भी पुनर्जन्म को सिद्ध कर रहे हैं !जो धर्म पुनर्जन्म को नहीं मानते हैं उनके धर्म में भी पुनर्जन्म की घटनाएं घटती हैं और व्यक्तिगत बात चीत में बे इस तथ्य को स्व्वीकार भी करते हैं किन्तु धार्मिक जड़ता के कारण बे सार्वजानिक घोसणा करने सेडरते हैं ! शरीर के साथ आत्मा की मृत्यु नहीं होती है ! यह शाश्वत सिद्धांत है ! इसका वर्णन गीता में कई श्लोकों में हुआ है ! २ (२०)में श्रीकृष्ण कहते हैं---- आत्मा न कभी मरता है ! और न जन्मता है ! इसको कर्मानुसार भिन्न भिन्न शरीर प्राप्त होते रहते हैं ! यह उत्पन्न होकर फिर होने वाला नहीं है ! यह जन्मरहित नित्य निरंतर रहने वाला शाश्वत और अनादि है ! शरीर के मर जाने पर भी यह मृत्यु को प्राप्त नहीं होता है! !२(२२)में कहा है ! कि मनुष्य जैसे पुराने बस्त्रों को छोड़ कर दूसरे नए वस्त्र धारण कर लेता है ! ऐसे ही आत्मा पुराने शरीर को छोड़ कर दूसरे नए शरीरों में चला जाता है ! किन्तु इसको वही जान और समझ पाते हैं ! जिनके ज्ञान नेत्र खुले हुए हैं १५ (१०)में श्री कृष्ण कहते हैं ! आत्मा को शरीर को छोड़कर जाते हुए या दूसरे शरीर में स्थित हुए अथवा विषयों को भोगते हुए भी सतोगुण रजो गुण और तमोगुण से युक्त आत्मा को और उसके स्वरुप को मुर्ख मनुष्य नहीं जानते हैं ज्ञान रूपी नेत्रों वाले ग्यानी मनुष्य ही जानते हैं !
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