व्योहारिक ज्ञान -----(१)जिसको बुद्धि के वाण से मारा गया है !उस मनुष्य का उपचार ना कोई वैद्य ,न कोई दबा ,ना होम ,ना मन्त्र ,जप ,ना कोई मांगलिक कार्य ,ना तांन्त्रिक प्रयोग और ना ही भली भांति सिद्ध जड़ी बूटी ही कर सकती है अतः निर्बल और सीधा समझकर कभी भी बुद्धिमानो का अनादर या उनसे झगड़ा नहीं करना चाहिए ! उनसे सदा सावधानी पूर्वक आदर सहित व्योहार करना चाहिए !
(२)अग्नि एक महान तेज है ! वह अग्नि काठ में छिपी रहती है ! जब तक कोई उसे प्रज्वलित नहीं करता है ! तब तक वह उस काठ को नहीं जलाती है ! वही अग्नि यदि काठ से मथकर उद्दीपत कर दी जाती है ! तो वह अपने तेज से उस काठ को जंगल को तथा दूसरी सभी नजदीकी वस्तुओं को जलाकर खाक कर देती है ! इसलिए अपने विश्वासपात्र और विश्वसनीय व्यक्तियों को अनावश्यक संदिग्ध दृष्टि से अप्रमाणित तथ्यों के आधार पर अपमानित कर उनका साथ नहीं छोड़ना चाहिए ! अन्यथा बे काठ में छिपी हुई अग्नि के समान अपने आश्रय दाता का सर्वनाश कर देते हैं !
(३)स्त्रियां घर की लक्छमी कही गयी है ! बे अत्यंत सौभाग्य शालिनी ,आदर के योग्य ,पवित्र तथा घर की शोभा होती हैं अतः उनका विशेष तौर पर सम्मान करना चाहिए !
(४)अनुभवी ग्यानी विज्ञानी अध्यात्मनिष्ठ विद्वान अग्नि के सामान तेजस्वी ,छमाशील और विकार शून्य संत पुरुष सदा काष्ठ में अग्नि की भांति शांत भाव से स्थित रहते हैं !
(५)धैर्य ,मनो निग्रह ,इन्द्रिय संयम पवित्रता ,दया ,कोमलता ,मधुर वाणी और मित्र से द्रोह न करना ये सात बातें सज्जन पुरुषों में स्वाभाव गत होती हैं !
(६)समय और अवसर के विपरीत बोलने वाला मनुष्य सदैव अपमान का पात्र बनता है !
(७)जिस से द्वेष हो जाता है ! वह ना साधु ,ना सज्जन ,न ही विद्वान और ना बुद्धिमान ही जान पड़ता है ! प्रिय व्यक्ति के तो सभी कर्म शुभ और श्रेष्ठ ही प्रतीत होते हैं ! और जिस से द्वेष हो जाता है उसके सभी कर्म पापमय मालुम पड़ते हैं !
(२)अग्नि एक महान तेज है ! वह अग्नि काठ में छिपी रहती है ! जब तक कोई उसे प्रज्वलित नहीं करता है ! तब तक वह उस काठ को नहीं जलाती है ! वही अग्नि यदि काठ से मथकर उद्दीपत कर दी जाती है ! तो वह अपने तेज से उस काठ को जंगल को तथा दूसरी सभी नजदीकी वस्तुओं को जलाकर खाक कर देती है ! इसलिए अपने विश्वासपात्र और विश्वसनीय व्यक्तियों को अनावश्यक संदिग्ध दृष्टि से अप्रमाणित तथ्यों के आधार पर अपमानित कर उनका साथ नहीं छोड़ना चाहिए ! अन्यथा बे काठ में छिपी हुई अग्नि के समान अपने आश्रय दाता का सर्वनाश कर देते हैं !
(३)स्त्रियां घर की लक्छमी कही गयी है ! बे अत्यंत सौभाग्य शालिनी ,आदर के योग्य ,पवित्र तथा घर की शोभा होती हैं अतः उनका विशेष तौर पर सम्मान करना चाहिए !
(४)अनुभवी ग्यानी विज्ञानी अध्यात्मनिष्ठ विद्वान अग्नि के सामान तेजस्वी ,छमाशील और विकार शून्य संत पुरुष सदा काष्ठ में अग्नि की भांति शांत भाव से स्थित रहते हैं !
(५)धैर्य ,मनो निग्रह ,इन्द्रिय संयम पवित्रता ,दया ,कोमलता ,मधुर वाणी और मित्र से द्रोह न करना ये सात बातें सज्जन पुरुषों में स्वाभाव गत होती हैं !
(६)समय और अवसर के विपरीत बोलने वाला मनुष्य सदैव अपमान का पात्र बनता है !
(७)जिस से द्वेष हो जाता है ! वह ना साधु ,ना सज्जन ,न ही विद्वान और ना बुद्धिमान ही जान पड़ता है ! प्रिय व्यक्ति के तो सभी कर्म शुभ और श्रेष्ठ ही प्रतीत होते हैं ! और जिस से द्वेष हो जाता है उसके सभी कर्म पापमय मालुम पड़ते हैं !
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