Wednesday, 7 October 2015

कंस भी गाय का मास नहीं खाता था !ना ही द्वापर युग में गाय के मास खाने वाले थे !यह वह समय था जब गृहस्थ से लेकर ऋषि मुनि  साधु संत राजे महाराजे सभी गाय पालते थे !भगवान श्री कृष्णा के पालक पिता नन्द के यहां लाखों गएँ पली हुई थी !गाय भारतीय अर्थ व्यबस्था की रीढ़ थी !गाय का पालन करने वाले वैश्य कहलाते थे !गाय पालना कृषि कार्य करना और वाणिज्य ये वैश्यों के स्वाभाविक कर्म थे ! भगवान श्री कृष्णा ने गीता १८(४४)में कहा है--- खेती करना गायों की रक्छा करना और व्यापार करना --- ये सब वैश्यों के स्वाभाविक कर्म हैं ! किन्तु इस युग में गाय अब अर्थ व्यबस्था की रीढ़ नहीं रह गयी है !कृषि कार्य में भी बैलों की जरुरत समाप्त हो गयी है !देश में इस प्रकार के मन मष्तिष्क और दिल वाला समाज उत्पान्न होगया है !जो गाय के मॉस को खाने वाले साहित्य से प्रभावित होकर गायके मास को खाना उचित समझते है !इसीलिए इस समय गाय के क़त्ल को बचाना बहुत मुश्किल हो गया है !मासा  हार भारत में रहने वाले कुछ धर्मों का स्वाभाविक स्वाभाव है !और बे गाय के मॉस को खाना धर्म संगत मानते है !और कुछ सनातन धर्मी भी यह मानते हैं !और वैदिक धर्मग्रंथो से यह सिद्ध भी करते हैं ! की प्राचीन भारत में साधु संत और ब्राह्मण भी गाय का मास खाते थे !और चूँकि बे उन्ही के बंशज है !है ! इसीलिए बे भी गाय का मास खाते हैं !यहां जो बाबा रामदेव ने लालू को कंस बंसी बताया है !वह गाय के क़त्ल के सम्बन्ध में ठीक नहीं है !लालू के यहाँ गायें पली हुई है !बे तो गाय का मास को खाने का समर्थन राजनैतिक दृष्टि से करते हैं !सभी राजनेता गाय के मास को खाने को उचित राजनैतिक लाभ के लिए करते दिखाई देते हैं !क्योँकि गाय के मास खाने का विरोध उनको राजनैतिक दृष्टि से नुक्सान पहुंचा सकता है ! देवनार जो देश का सबसे बड़ा कत्लखाना है !वहां पर गांधी जन सर्वोदयी पिछले ४० साल से धरना दे रहे हैं !किन्तु इस सबके बाद भी वहां हजारों पशु प्रितिदिन काटे जा रहे हैं !देश में लाखों कत्लखाने वैध अवैध चल रहे हैं !दूध देने वाले पशुओं की निरंतर कमी हो रही है !लोगों को केमिकल से बना हुआ दूध और चर्वी से निर्मित घी खाने को मिल रहा है !भारत की लाखों बर्षों से देश में बन ने वाली मिठाइयों में मिलबाट के कारण उनका  बनना बंद हो रहा है !देश में जैविक खाद के अभाव में विदेशों से खरबों रुपये की खाद आयात की जाती है !जिस से खेतों की उर्बरकता  नष्ट हो रही है !देश में बे हिसाब आवादी बढ़ रही है !विदेशी चॉकलेट जो गाय और सूअर की चर्वी से निर्मित होते हैं !उनको भारत के सभी धर्मों के लोग बड़े चाव से खाते हैं !जन्म दिनों में अंडे से बना हुआ केक भी सभी लोग खाते हैं !खान पान में शुद्धता  पौषिक्ता का अभाव होता जा रहा है !यदि इसी तरह से गाय का क़त्ल होता रहा !तो इसकी बहुत बड़ी कीमत भविष्य में आने वाली पीढ़ी को चुकानी पढ़ सकती है !बाबा राम देव यद्द्पि बहुत बड़ा व्योपार चला रहे हैं !किन्तु बे गाय का शुद्ध घी भी उपलब्ध करा रहे हैं !गाय की रक्छा पालन पोषण और उसकी उपयोगिता सिद्ध करने का प्रयत्न बाबा  रामदेव कर रहे हैं !

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