जगद गुरु शंकराचार्य का सांई की पूजा भगवान के रूप में निषेध करने के वक्तव्यों को विवादास्पद ना मानकर सनातन धर्म की रक्छार्थ मानना चाहिए !आदि शंकराचार्य ने भारत में सनातन धर्म के प्रचार ,प्रसार और रक्छा के लिए चार पीठों की स्थापना की थी !इसलिए जो भी शंकराचार्य की पीठ पर विराजमान होता है !उसका यह कर्तव्य हो जाता है !कि वह सनातन धर्म का प्रचार ,प्रसार करे और उसकी रक्छा करे !भारत में सांई को भगवान के रूप में पूजा जा रहा है !और उनके मंदिर स्थापित किये जा रहे हैं !तथा उनके भजन ओम साईं ,साईं राम ,साईं कृष्ण के नाम से गाये जाते हैं !उनके मंदिरों में सनातन धर्म के पुजयनीय शंकर भगवान राम कृष्ण देवी देवताओं आदि की मुर्तिया छोटी और साईं की बड़ी मूर्ति के नीचे स्थापित की जाती है !वैदिक गायत्री मन्त्र को तोड़ मरोड़ कर साईं के साथ जोड़ दिया गया है !इसलिए जगद्गुरु शंकराचार्य का साईं की पूजा का सनातन धर्म के मानने वाले लोगों से ना करने का आग्रह विवादास्पद नहीं कहा जा सकता है !
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