गाय के बध को वैदिक संस्कृति के द्वारा उचित सिद्ध करना ठीक नहीं है !तथाकथित इतिहासकार वेद उपनिषद् और पुराणो आदि के आध्यात्मिक अर्थों को नहीं समझ सकते हैं !उनके अर्थ को समझने के लिए आध्यात्मिक दृष्टि चाहिए !और अध्यात्म दृष्टि की उपलब्धि विधि विधान के अनुसार साधना करने से प्राप्त होती है !जिस प्रकार भौतिक वस्तुओं के ज्ञान के लिए भौतिक पदार्थों की आवश्यकता तथा उन वस्तुओं को उपयोगी मोटर यान बम आदि में निर्मित करने के लिए उस बिषय की तकनीक का ज्ञान होना चाहिए !उसी प्रकार से वैदिक धर्म ग्रंथोँ में अन्तर्निहित तत्त्व को जानने के लिए आध्यात्मिक दृष्टि चाहिए !गाय का महत्त्व भारत में शीर्ष पर रहा है !इसका विशद और व्यापक वर्णन धर्म ग्रंथों में है !भगवान श्रीकृष्ण ने गीता में कहा है !कृषि गौरक्छय वाणिज्यं वैश्य कर्म स्वभावजम१८ (४४)खेती करना गायों की रक्छा करना और व्योपार करना --ये सब वैश्य के स्वाभाविक कर्म हैं ! इसीलिए वैदिक धर्म में जिसे बहुत से लोग हिन्दू धर्म या सनातन धर्म भी कहते हैं !गाय का बध या मांश भक्छण का कभी भी समर्थन नहीं किया गया है !जब भारत में मुसलमानो की हुकूमत रही तबभी कुछ मुसलिम शाशकों के काल में गाय के बध पर प्रितिबंध रहा !किन्तु जिस तरह से गाय को धर्म का मुद्दा बनाकर राजनैतिक लाभ प्राप्त करने का प्रयत्न किया जा रहा है !गाय का इस तरह का उपयोग प्राचीन भारत में कभी भी नहीं किया गया !गाय के बध के लिए मुसलमानो से ज्यादा हिन्दू जिम्मेदार है !गाय का पालन कृषक को करना चाहिए !उसके लिए प्रत्येक गाओं में गोचर भूमि छोड़ी जाती है !किन्तु किसानो ने उस भूमि को जोतकर कृषि कार्य में उपयोग में लेलिया है !और गाय को भूखा मरने के लिए छोड़ दिया है !जो मुसलमान कसाई का काम करते हैं !उनकी जीविका का साधन ही पशु बध है !इसीलिए नियमानुसार उन्हें पशुबध करने से रोक नहीं जाना चाहिए !किन्तु गाय की रक्छा सुरक्छा तो गाय को माता मानने वाले लोगों को करना चाहिए !कोई भी कसाई किसी भी पशु को जोर जबरदस्ती से नहीं लाता है !उसको खरीदता है !अगर के बेचने वाले या उसको छुट्टा छोड़ने वाले न हों तो गायका क़त्ल बड़ी हद तक अपने आप बंद हो जाएगा !गांधीजी भी गाय को बहुत महत्त्व देते थे !जब उनसे एकबार गाय के बध पर पूर्ण प्रतिबन्ध लगाने के लिए आंदोलन के लिए कहा गया था !तब उन्होंने कहा था कि पहले आप राजा महाराजाओं पर प्रितबंध लगाईये जो अंग्रेजो को बीफ के साथ कीमती शराब परोसते हैं !इसलिए गाय के बध को प्रतिबंधित करने के लिए दुहरा प्रबंध करना पड़ेगा !कानून बना के और उसके उचित पालन पोषण से !इसके अलावा गाय के माश का निर्यात भी बंद करना पड़ेगा कहा जाता है! कि गाय माष की निर्यात करने वाल ४ सबसे बड़े कंपनिया जैनियों की है !जब मोदी जी गुजरात के मुख्य मंत्री थे तब उन्होंने यह स्वीकार किया था कि गाय के मांश के निर्यात करने वाले उनके जैन मित्र है !इसीलिए गाय के क़त्ल को हिन्दू मुसलिम का मुददा बनाकर आपसी सद्भाव बिगड़ना न्यायोचित नहीं है
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