भारत उत्सवप्रिय देश है !यहाँ लोग सहजता से सरल जीवन जीने के आदी हैं !किन्तु विकृत लोकतंत्र इस सहजता और सरलता को नष्ट कर रहा है !लोकतंत्र शाशन करने की ऐसी प्रक्रिया है ! जिसमे आमजन की भागीदारी आमजन को देश के सम्पूर्ण भौतिक संसाधनो को प्राप्त कराने के लिए किया जाता है !किन्तु आमजन से लोकतंत्र के बिभिन्न पदों पर आसीन राजनेता ,राज्य अधिकारी और कर्मचारी लोकहित में काम करने के बजाय अपने निम्न स्तरीय स्वार्थों की पूर्ति के लिए कर रहे है !और यह जहर बहुत तेजी से जीवन के सभी रचनात्मक कार्योँ में फैल रहा है आजकल राजनैतिक शाशकीय और सार्वजानिक जीवन में काम करने वाले लोग स्वार्थों की चलती फिरती प्रतिमा बन गए है ! ये लोग स्वार्थ का चश्मा लगाकर देश में जन्मे महापुरुषों के नाम से उनके त्यागनिष्ठ और राष्ट्र के प्रति समर्पित जीवन को भी अपने राजनैतिक स्वार्थ पूर्ति के लिए उपयोग कर रहे हैं !गांधी जी इस दुरपयोग के सबसे अधिक शिकार होने वाले महापुरुषों में है !गांधीज की स्वीकारोक्ति शब्दों में उनके जन्म दिन पर तथा अन्य बहुत से अवसरों पर की जाती है !किन्तु उनके द्वारा आचरित जीवन को अपनाने का प्रयत्न नहीं किया जाता है !गांधी जी ने कभी यह नहीं कहा था !कि जो गांधीजी को अपना आदर्श मानते हैं !बे हमेशा सड़कों और पाखानो और कार्यालयोँ की सफाई करते रहेंगे ! और घरों में रहने वाले लोग और सफाई के लिए नियुक्त सफाई कर्मचारी सफाई नहीं करेंगे !गांधी जी स्वयं अपना जन्मदिवस मनाने के पक्छ में नहीं थे !किन्तु जब लोगों ने जन्मदिन मनाने की जिद की !तब गांधीजी ने कहा था !कि मेरे जन्मदिन पर उपबास रखें ! और भोजन ना करने से जो पैसा बचे उसको हरिजन फण्ड में जमा करदें !और सूट कातें !सामान्य दिनों से अधिक श्रम करें !श्रम की प्रतिष्ठा बढ़ाएं और !सफाई करने वाले के श्रम की भी वही कीमत होनी चाहिए जो वकील या अन्य लोगों के श्रम की होती है !सभी को अपना कर्तव्य कर्म ईमानदारी से करना चाहिए !यह गांधी जी की सभी गतिविधियों के केंद्र में था !आज जिस प्रकार सफाई करने का ढौंग गांधीजी के जन्मदिन पर किया जा रहा है !उसका उदेश्य राजनैतिक लाभ उठाने का है !जो राजनेता चुनाव से लेकर और चुने जाने के बाद से लेकर अपना सारा समय अपने व्यक्तिगत और राजनैतिक लाभ की पूर्ति में लगाते हैं !और अपने कर्तव्यों का निर्बाह् ईमानदारी से नहीं करते हैं !बे ईमानदारी से झाड़ू लगाने का काम कैसे कर सकते हैं ?!इसीलिए मोदीजी का सफाई कार्यक्रम जिसे अनावश्यक रूप से गांधी जी से जोड़ दिया गया है !उनके राजनैतिक दल के मुख्यमंत्री, मंत्री, केंद्रीय मंत्री सांसद, विधायक और महापौर आदि सफाई का नाटक कर रहे हैं !और यह नाटक जनता देख रही है !कहीं इन नेताओं द्वारा झाड़ू हाथ में लेकर सफाई का नाटक करने के पहले सड़क की सफाई करा दी जाती है !और उस पर पानी का छिड़काओ करा दिया जाता है !और नेताजी के सफाई के नाटक के बाद मिनरल वाटर का प्रवन्ध किया जाता है !और हाथ साफ़ करने के लिए सुगंधित कीमती साबुन रखा जाता है !इस सफाई के नाटक को गांधीजी के जन्मदिवस से नहीं जोड़ना चाहिए !अगर गांधीजी को अपनाना है !तो कथनी और करनी के भेद को मिटाना होगा !और यह काम राजनेता कभी भी नहीं कर सकते हैं !
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