किसान की हालत बद से बदतर हो रही है ! उसके कई कारण है !(१)फसल अच्छी होती है !तब उसे फसल का उचित मूल नहीं मिलता है !जब वस्तु का उत्पादन अधिक होता है !तो दाम सस्ता मिलता है !किसान उत्पादित खाद्यान को रोकने की स्थिति में नहीं होता है !इसलिए उसको मजबूरन कर्ज चुकाने शादी व्याह तिथि त्यौहार मनाने के लिए लिए अपने उत्पादित खाद्यान को बेचना पड़ता है !व्योपारी किसान का माल औने पौने दामों में खरीद कर स्टॉक कर लेता है !फिर बाजार भाव अच्छा आने पर महगा बेचदेता है !(२)जब फसल ख़राब होती है !तब भी किसान को बढे हुए दाम फसल के नहीं मिलपाते हैं !व्योपारी उसको जमा कर लेता है !फिर खाद्यान की कमी का लाभ उठाकर उसको अत्यंत मह्गे भाव में बेचता है !अभी अरहर की दाल और अन्य दालों में जमाखोर व्योपारी असीमित लाभ उठारहे हैं !इसकोपहले प्याज में भी व्योपारियों ने कुछ ही दिनों में हजारों करोड़ रूपया कमा लिए थे !(३)रासायनिक खादों और केमिकल्स के दाम बेहद बढ़ गए हैं !कृषि मजदूरी में भी बेहद बृद्धि हुई है !उस मात्रा में कृषि उपज के दाम नहीं बढे हैं !खेती घाटे का सौदा हो गया है ! किसानो को अपनी हालत सुधारने के लिए निम्नलिखित प्रयत्न करने होंगे !(१)सस्ती खाद के लिए जैविक खाद का प्रयोगकरना पड़ेगा !जैविक खाद कूड़ा करकट सूखे पत्ते गोबर आदि से तैयार हो जाती है !इसके लिए उसे पशुपालन करना होगा !इस से उसको मुफ्त की खाद, रसोई के लिए सस्ती गैस विजली और घी दूध की उपलब्धि होगी !(२)किसानो को पंचायत और ब्लॉक स्तर पर अन्न बैंक की स्थापना करनी चाहिए !जहाँ पर किसानो को अपनी उपज रख देनी चाहिए !और खर्चे के लिए बिना व्याज का पैसा सरकार को देना चाहिए !ताकि किसान को औने पौने दामों पर अपना खाद्यान व्योपारियों को ना बेचना पड़े !(३)किसानो को कृषि के साथ गृह उद्द्योग प्रारम्भ करना चाहिए जिससे कृषि से उत्पादित माल को उद्योग के द्वारा अधिक लाभप्रद बनाया जा सके !(४)सरकारयद्द्पि पर्याप्त मात्रा में राहत की राशि किसानो के लिए आवंटित करती है !किन्तु रिश्वत खोरी के कारण उन तक राहत राशि पहुँच नहीं पाती है !माल विभाग के लेखपाल से लेकर बरिष्ठ अधिकारी भी किसानो की राहत की राशि में साझे दार होते हैं !लेखपाल करोड़ों की संपत्ति के मालिक हो गए हैं !किसान पर कुदरत की मार व्योपारी की मुनाफाखोरी अधिकारियों की रिश्बत और आसमान छूती महगाई पड़ रही है !वह हताश और निराश है !उसके आय के साधन नष्ट हो गए हैं !सरकार उदासीन है !किसान ग़मगीन है !इसलिए आत्महत्या ही कर्ज में डूबे और भुखमरी से त्रस्त किसान को एकमात्र मार्ग दिखाई देता है !बुंदेलखंड के किसान पर तो कई बर्ष से सूखे की मार पड़ रही है !इस बार फिर सूखे के आसार दिखाई दे रहे हैं !अगर सरकार समय से पूर्व उचित कदम किसानो के रक्छण के लिए नहीं उठाती है !तो किसानो की आत्महत्या में और बृद्धि हो सकती है !
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