भाजपा की केंद्र सरकार में व्योपारी निरंकुश हो गए हैं !दाल हो या अन्य खाद्यान इनकी महगाई की बृद्धि में भूमिका व्योपरियों की ही होती है !उत्पादक किसान को तो उसकी उपज का उचित मूल्य भी प्राप्त नहीं होता है !राजनेताओं ने और व्योपरियों ने नैतिकता का त्याग कर दिया है !नेता सत्ता सुख भोग रहे हैं !और व्योपारी आम आदमी का खून पी रहा है !उत्पादक किसान आत्महत्या कर रहे हैं !किसानो की समस्यायों के उठाने वाले भी नेता ही है !जो किसानो की समस्याएं उठाकर अपनी राजनीति चमकाते हैं !और अवैधानिक लाभ उठाते हैं !जब तक उत्पादक किसान गाओं में खाद्यान बैंक नहीं खोलते हैं !आपस में सौहाद्र कायम नहीं करते हैं !गाओं को राजनीति से मुक्त नहीं करते हैं !और ग्रामोद्योगों का विकास नहीं करते हैं !तबतक किसान शासन और नेताओं के शोषण से मुक्त नहीं हो सकते हैं !जब फसल अच्छी पैदा होती है !तब भी लाभ व्योपारी को ही होता है !और जब फसल कम पैदा होती है !लाभ तब भी व्योपारी को ही होता है !राजनेता हर हाल में उद्योगपतियों और व्योपरियों के हित में ही क्रिया शील रहते हैं !क्योंकि चुनाव के चंदे इन्ही लोगों से प्राप्त होते हैं !
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