Friday, 16 October 2015

टकराव बाला फैसला ----न्यायिक नियुक्ति आयोग को सुप्रीम कोर्ट ने यह कहते हुए असंवैधानिक करार दिया है ! कि यह संविधान के बुनियादी ढांचे का उल्लंघन करता है ! जिसके अंतर्गत न्यायपालिका में किसी भी तरह का हस्तछेप नहीं किया जाना चाहिए !सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी कहा है !कि हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में जो हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की नियुक्ति और उनके स्थानांतरण के लिए j कॉलेजियम सिस्टम है !उसमे भी खामियां है !और इस सिस्टम के सम्बन्ध में नियुक्ति में पक्छपात आदि के जो आरोप लगाए जाते हैं !बे पूरी तरह निराधार नहीं है !इसलिए कॉलेजियम सिस्टम को भी दोषमुक्त करने के लिए और इसको अधिक पारदर्शी बनाने के लिए सुप्रीम कोर्ट  तीन नवंबर से विचार करेगा ! संविधान में संसद सर्वोच्च है !यही देश की न्यायिक और प्रशासनिक व्यबस्था के लिए कानूनो का निर्माण करती है !किन्तु न्यायपालिका को संसद द्वारा पारित कानूनो की समीक्छा और उनको निरस्त करने का अधिकार है !विश्व के किसी भी देश में इतनी अधिक स्वतंत्र अधिकार प्राप्त न्यायपालिका नहीं है ! देश में जिस तरह से प्रधान मंत्री से लेकर राज्य के मुख्यमंत्रियों तक और भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों पर गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए जाते हैं !और बे आरोप न्यायालय में सिद्ध भी होते हैं !और कई प्रदेश के मुख्य मंत्रियों केंद्रीय मंत्रियों और प्रसाशनिक अधिकारीयों को सजा भी दी गयी है !ऐसी स्थिति में राजनेताओं को सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के न्यायाधीशों की नियुक्ति में दखलंदाजी करने का अधिकार देना उचित नहीं  नहीं है !सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला न्यायिक दृष्टि से और  संविधान निर्माताओं और संविधान के प्रावधानों के अंतर गत लोकहित में उचित है !कॉलेजियम सिस्टम में जो दोष है !उनको हटाने के लिए भी  सुप्रीम कोर्ट ने  सुनबाई करने का निर्णय लिया है !उस से सुनबाई और न्यायिक समीक्छा  के बाद दोषमुक्त कॉलेजियम सिस्टम का स्वरुप देश के सामने आएगा !और न्यायपालिका न्यायाधीशों की नियुक्ति और ट्रांसफर प्रमोशन आदि में और अधिक पारदर्शी बनेगी !  और भाई भतीजा बाद से मुक्त हो जायेगी ! नरोत्तम स्वामी सीनियर अधिवक्ता सिविल लाइन्स झाँसी

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