किसानो की हालत तो बदहाल होनी ही थी !क्योँकि नेताओं अधिकारियों को खुशहाली प्राप्त करनी थी !अगर ईमानदारी के साथ इस बदहाली को पैदा करने वाले और इस बदहाली के कारण खुशहाली प्राप्त करने वाले नेताओं ,अधिकारियों और कर्मचारियों की समस्त सम्पत्तियों का पता लगाया जाय !तो मालूम पड़ेगा की किसान अपनी जमीन खोकर भीख मांग रहे हैं !खून बेचरहे हैं ! इसके बाद भी दो जून की रोटी नहीं जुटा पारहे हैं !और नेता आदि माला माल हो गए हैं !बहुत से लेखपाल अरब पति हो गए हैं !नेताओं के पास कितनी दौलत इकट्ठी हो गयी है !इसका अंदाज उनके गले में पड़ीहुई ५ तोले की सोनेकी जंजीर २० लाख से लेकर ३० लाख कीमत की कई कारें ! और शादी में अनाप शनाप खर्चे जो राजाओं को भी मात करदें ! और अभी हो रहे ग्रामसभा और जिलापंचायत के चुनाओं में लाखों रूपया खर्च करने के रूप में देखा जा सकता है !विकास का ऐसा कहर किसानो और आम जन पर कभी नहीं टूटा जो आज टूट पड़ा है !इसका इलाज आमजन के पास नहींहै !क्योकि बदहाली पैदा करने वाले लोग इतने शक्तिशाली हैं ! कि इनका मुकाबला भौतिक शक्ति के साधनो से नहीं किया जा सकता है !इसका एक ही उपाय है !की तिल तिल तंगहाली और बदहाली में मरने और अपमानित जीवन जीने के बजाय अगर पीड़ित किसान अन्न जल त्याग कर आमरण अनसन पर बैठें ! और यह संकलप करलें की चाहे प्राण भले ही चले जाएँ किन्तु जब तक समस्या का समाधान नहीं होगा ! तब तक प्राणो की आहुति देने का यह सिलसिला जारी रहेगा !हो सकता है की इसमें एकाध किसान के प्राण बलि बेदी पर चढ़ जाएँ !किन्तु इस आत्मत्याग का असर विजली की तरह होगा और फिर किसानो को उनके अधिकार अवश्य प्राप्तहो जायेंगे !आत्मत्याग और आत्मबलिदान से बड़ी कोई और कुर्बानी नहीं हो सकती है !गांधी जी ने इसी आत्मत्याग के अहिंसक अस्त्र का उपयोग आजादी के लिए अंग्रेजों के विरुद्ध किया था !और आजादी प्राप्त की थी !
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