Sunday, 4 October 2015

धर्म के सत्य अहिंसा अस्तेय (चोरी न करना )ब्रह्मचर्य (वासनाओं पर अंकुश रखना )औरपरिग्रह (जरुरत से ज्यादा बस्तुओं का संग्रह ना करना ) ये मूल तत्त्व हैं !इन तत्त्वों को मनुष्य जीवन में प्रवेश करा कर व्यक्ति गत और समाजगत जीवन को सुखी और समृद्ध बनाने के लिए ही धर्म के इन मूल तत्वों की सिद्धि और उनके धारण करने  के लिए भिन्न भिन्न धार्मिक साधनाओ का जन्म हुआ !और वैदिक धर्म ने अर्थ सिद्धि के लिए गाय को बहुत अधिक उपयोगी पाया !भारत अनादि काल से कृषि प्रधान देश रहा है !और गाय कृषि कार्य के लिए अत्यंत उपयोगी पशु माना गया !कृषि के लिए बैलों की प्राप्ति और खेत को उर्बरा बनाने के लिए गाय के मूत्र और गोबर से प्राप्त खाद ,स्वास्थ्य बर्धक दूध घी मक्खन आदि की प्राप्ति और इसके गोबर और मूत्र में रोग निवारण आदि की शक्ति ने गाय की स्थापना वैदिक धर्म में लोकमाता के रूप में होगयी !ऋषियोँ ने समाधि में अंतर दर्शन किया की गाय ईश्वर ने विशेष रूप से मानव कल्याण के लिए उत्पन्न की है !इसिलए इसको अन्य पशुओं की तरह पशु योनिओ में नहीं रखा जा सकता है !एक गाय एक परिवार का पालन भूत काल में कर देती थी !प्रत्येक घर में अनेक गायों का पालन होता था !महाभारत काल में राजा विराट द्रुपद कौरवों पांडवों और यदयवंशियों के पास लाखों की संख्या में गायें थी !गाय भारत के सभी नगरों और गाओं  की शोभा थी !ऋषियों के आश्रमों में गायों का पालन प्रमुखता से होता था !भगवान कृष्णा स्वयं गायों को चराते थे !b वैदिक धर्म ग्रंथों में गाय को और स्त्रियों को तथा ब्राह्मणो को अवध्य बताया गया है !और गाय की महिमा का बर्णन महाभारत आदि ग्रंथों में प्रमुखता से किया गया है !और इसको लोकमाता कहा गया है !जब गाय का पालन होता था तब भारत में दूध दही की नदियां बहती थी !समय के उलटफेर ने गाय को ही मनुष्यों का भोज पदार्थ बना दिया है !और भारत में गाय का मांश खाने वालों की संख्या में बृद्धि हुई है !और गाय के क़त्ल को प्रतिबंधित ना किया जाय इसके पक्छ में मुसलमानो और ईसाइयों की अपेक्छा हिन्दू अधिक है !काटजू ऐसे लोग भी गाय बध के कट्टर समर्थक है !और खुद बो बहुत आनंद के साथ गाय के मांस को खाते हैं !इसी प्रकार से बहुत प्रतिष्ठित हिन्दू फ़िल्मी कलाकाार चिंतक  विचारक साहित्यकार भी गाय के बध को प्रतिबंधित करने के क़ानून को मनुष्यों के खाने पीने के अधिकार पर हमला मानते हैं !इस से ऐसा प्रतीत होता है की मुसलमानो से अधिक हिन्दू ही बीफ को खाते हैं !इसीलिए सरकार कानून बनाये अथवा ना बनाये जो गाय को माता के रूप में मान्यता देते हैं !उन्हें खुद गाय के पालन की उपयोगित सिद्ध करनी चाहिए !

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