Sunday, 25 October 2015

व्योहारिक ज्ञान ------(१)धर्यधारण करना ,मनोनिग्रह ,तथा कलियुगी अनेक धर्मों की भीड़ में से सिर्फ सत्य धर्मों का ही अनुसरण करना ,जीवन के सभी कर्तव्यों का मनो निग्रह पूर्वक पालन करना ही वास्तविक कर्तव्य है ! मनुष्य को अपने हृदय में स्थित अज्ञान की समस्त गांठें खोलकर प्रिय और  अप्रिय को अपने आत्मा के समान सहर्ष स्वीकार कर आनंद से जो कुछ जीवन में प्राप्त हो उसे स्वीकार करना चाहिए !
(२)जैसे वस्त्र जिस रंग में रंगा जाए वैसा ही हो जाता है ! उसी प्रकार यदि कोई सज्जन ,असज्जन ,तपस्वी अथवा चोर की सेवा करता है ! तो वह उन्ही के बस में हो जाता है ! -- उस पर उन्ही का रंग चढ़ जाता है !  इसीलिए कल्याण प्राप्ति के लिए प्रयत्नशील पुरुषों को सदैव श्रेष्ठ और सज्जन पुरुषों का ही संग करना चाहिए !
(३)अधिक बोलने से आवश्यक बोलना अच्छा कहा गया है ! यह वाणी की प्रथम विशेषता है ! यदि बोलना ही पढ़े तो सत्य और  तर्क संगत  ढंग से तथ्यों के साथ  दिए गए विषय के सम्बन्ध में ही बोलना और व्यर्थ बकवाद से बचना   यह बानी की दूसरी विशेषता है! सत्य और प्रिय बोलना वाणी की तीसरी विशेषता है ! यदि सत्य और प्रिय के साथ ही न्याय सम्मत भी कहा जाय यह वाणी की चौथी विशेषता है ! मौन रहना यह वाणी की श्रेष्ठतम विशेषता है !
(४)मनुष्य जैसे लोगों के साथ रहता है जैसे लोगों की सेवा करता है और जैसा होना चाहता है वैसा ही हो जाता है !
(५)जो ना तो किसी से जीता जाता है  !,ना दूसरों को जीतने की इक्च्छा करता है ! ना किसी के साथ वैर करता है ! और ना दूसरों को चोट पहुंचाना चाहता है ! जो निंदा और प्रसंशा में समान भाव रखता है ! वह सुख दुःख और हर्ष शोक से परे हो जाता है !
(५)जो सबका कल्याण चाहता है ! किसी के अकल्याण की बात जिसके मन में भी नहीं आती ! जो सत्यबादी ,कोमल स्वभाव बाला है और जिसने अपने मन बुद्धि इन्द्रियों को जीत लिया है ! वही उत्तम पुरुष माना जाता है !
(६)जो झूठी सांत्वना नहीं देता ! देने की प्रतिज्ञा करके दे ही देता है ! दूसरों के दोषों को जानता है ! वह मध्यम श्रेणी का पुरुष है  !
(७)जो व्योहार में अत्यंत कठोर और निर्दयी है ! जो अनेक दोषों से दूषित और कलंकित हो ! जो क्रोध बस दूसरों की बुराई और छाति पहुंचाने वाला है ! दूसरों के किये हुए उपकारों को नहीं मानता है ! जिसकी किसी के साथ मित्रता नहीं है तथा जो दुरात्मा है ! ----- वह अधम पुरुष है !

No comments:

Post a Comment