Thursday, 25 August 2016

अजन्मा का जन्म कैसे और क्यों ?-------- जब भगवान् श्री कृष्ण ने अर्जुन से कहा की मैने अविनाशी कर्मयोग को सूर्य से कहा था वही पुरातन कर्म योग मैने तुझ से कहा है !अर्जुन ने कहा आपका जन्म अभी हुआ है !और सूर्य अनंत काल से प्रकाशित है !तब मैं यह कैसे मानलूं की अपने सृष्टि के प्रारम्भ में सूर्य को ज्ञान योग का उपदेश किया था !भगवान् श्री कृष्ण ने कहा अर्जुन मेरे और तेरे अनेकों जन्म हो चुके हैं !मैं अपने सभी पूर्व जन्मो को जानता हूँ किन्तु तू नहीं जानता है !मेरे तेरे जन्म लेने की प्रिक्रिया में भी भेद है !तेरा जन्म पूर्व जन्मों में किये गए कर्मों के कारण होता है !किन्तु मेरा जन्म कर्माधीन नहीं है !मैं अजन्मा ,अविनाशी और अजर तथा अमर ,निर्गुण और निराकार होते हुए भी अपनी योग शक्ति से प्रगट होता हूँ !ना मेरा जन्म होता है और ना मरण होता है !मेरा शरीर चिन्मय और दिव्य है !मेरा जन्म और कर्म दिव्य हैं !मैं अपनी योग माया से ढका रहता हूँ इसीलिए जो मूढ़ और अज्ञानी मनुष्य मुझे अजन्मा और अविनाशी ठीक तरह से नहीं जानते और मानते हैं उन सबके सामने मेरा स्वरुप योग माया से ढका रहने के कारण प्रकाशित नहीं होता है ! बुद्धि हीन मनुष्य मेरे परम अविनाशी और सर्वश्रेष्ठ भाव को ना जानते हुए मन और इन्द्रियों से पर मुझ सच्चिदानंद घन परमात्मा को मनुष्य की तरह शरीर धारण करने वाला मानते हैं ! मूर्ख लोग मेरे सम्पूर्ण प्राणियों के महान  ईश्वर रूप श्रेष्ठ भाव को ना जानते हुए मुझे मनुष्य शरीर  के आश्रित मानकर अर्थात साधारण मनुष्य मानकर मेरी अवमानना करते हैं ! जो संसार में मोह ,राग ,द्वेष ,काम ,क्रोध ,लालच आदि से ग्रस्त लोग हैं ऐसे अविविवेकी मनुष्यों की सब  आशाएं ,व्यर्थ होती हैं उनके सब शुभ कर्म व्यर्थ होते हैं उनका ज्ञान भी निरर्थक होता है उनके सभी कर्म लोभ अदि से दूषित होने के कारण मुझ अविनाशी परमात्मा के स्वरुप को समझने के लिए पर्याप्त  नहीं होते हैं ! ऐसे सभी मोह ग्रस्त लोग आसुरी ,राक्छ्सी और मोहिनी प्रकृति के आश्रय में अपना जीवन जीते हैं ! ये शव्द ग्यानी आध्यात्मिक अनुभव से शून्य व्यक्ति मुझ परमात्मा के अविनाशी स्वरुप को नहीं समझ पाते हैं !
परमात्मा का अवतार क्यों होता है !? ------  साधुओं की रक्छा के लिए ----------  साधुओं के लक्छण -------१-----
 जो सब प्राणियों में द्वेष भाव से रहित और मित्र भाव बाला,तथा दयालु ,ममता रहित ,अहंकार रहित ,सुख ,दुःख की प्राप्ति में सम छमाशील निरंतर संतुष्ट ,योगी शरीर को अपने बस में रखने वाला अध्यात्म धारण का दृढनिश्चय वाला और परमात्मा को अपनी मन बुद्धि अर्पण करने वाला जो साधु है वह परमात्मा को प्रिय होता है !
२------जिस से कोई भी प्राणी छुब्ध नहीं होता और जो स्वयं भी किसी प्राणी से छुब्ध नहीं होता तथा जो हर्ष ,ईर्ष्या ,भय और उद्वेग से रहित है !ऐसा साधु भगवान् को प्रिय है !
३----------जिसने सम्पूर्ण आवश्यकताओं का मन से त्याग कर दिया है जो बाहर भीतर से पवित्र है, जिसके जीवन का लक्छ्य परमात्मा की प्राप्ति है! और इसके लिए वह चतुराई के साथ ईश आराधना में अपने चित्त को पिरोये रखता है ! सांसारिक भोगों के प्रति उदासीन है, व्यथा से रहित और सभी प्रकार के लौकिक कर्तव्यों का पालन निष्काम भाव से करता है ऐसा साधु भगवान् को प्रिय होता है 1
४----------जो न कभी हर्षित होता है और न द्वेष  करता है ना शोक करता है ना कामना करता है ,और जो शुभ अशुभ कर्मों से ऊँचा उठ गया है ऐसा साधु भगवान् को प्रिय होता है !
५-------जो शत्रु और मित्र में तथा मान अपमान में सम है और मौसम की अनुकूलता और प्रतिकूलता और सुख दुःख आदि में सम तथा आसक्ति रहित है और ईश्वर भक्ति में जिसकी बुद्धि स्थिर हो गयी है ऐसा भक्त साधु भगवान् को प्रिय है !
६-------जो प्रसंशा और निंदा को समान भाव से देखता है ! और जीवन निर्वाह की वस्तुओं के अनावश्यक संग्रह में संलग्न नहीं रहता है, जिसकी भौतिक सम्पति गृह आदि में असाक्ति नष्ट हो गयी है ऐसे भगवान् के भक्त साधु भगवान् की प्रिय हैं !
७------ इन उत्तम साधू लक्छणों की प्राप्ति में जो गृहस्थ संलग्न है ,भगवान् को बे विशेष रूप से प्रिय हैं !
                  जब ऐसे उपरोक्त साधुओं का समाज में अपमान होता है !भोगी  दुष्ट लोग उनकी जीवन पद्धति पर हमला करते हैं !उनके प्राणों का हरण करते हैं !उनके आश्रमों का नाश करते हैं !जब ऐसे साधु दुखी होकर भगवान् को पुकारते हैं !तब वह निराकार अजन्मा ईश्वर इन साधुओं की रक्छा और आततायी दुष्टों के विनाश के लिए योग माया से विविध रूपों में प्रगट होता है !
पापी मनुष्य कौन होते हैं ---------अपनी बहुत बढ़ाई करने वाले ,सत्ता ,महत्ता ,धन संपत्ति की लिए लोलुप तनिक से भी अपमान को सहन ना करने वाले ,क्रोधी ,चंचल और आश्रितों की रक्छा न करने वाले अत्यंत घमंडी ,सम्भोग में ही मगन रहने वाले ,विषमता बढ़ाने वाले दान देकर पश्चाताप करने वाले अत्यंत कृपण ,धन और काम भोगों की प्रसंशा करने वाले तथा स्त्रियों का अपमान करने वाले और उनको सिर्फ  काम दृष्टि से देखने वाले बलात्कारी अपने निम्न स्वार्थों के लिए सामाजिक ताना वाना छिन्न भिन्न करने वाले आदि ये सब महान पापी हैं !इनकी समाज में जब बृद्धि हो जाती है !और समाज की  शासन व्यबस्था जब इन नराधमों के हाथ में चली जाती है !और इनका विनाश जब शुद्ध साधु  प्रकृति के लोगों से संभव नहीं हो पाता है !तब इनके विनाश के लिए परमात्मा शरीर धारण करता है
अधर्म का नाश कर धर्म की पुनर स्थापना करते हैं ---------- पापी लोग धर्म को भी विकृत कर देते हैं !धर्म का नाम धर्म इसीलिए पड़ा क्योंकि यह सम्पूर्ण प्राणियों को धारण करने का शिक्छण  प्राणिमात्र को देता है !धर्म में हिंसा और क्रूरता को कोई स्थान नहीं है !जो धर्म ऐसे धर्म का विनाश करता है ! और धर्म को जीव हिंसा से युक्त करता है !ऐसा धर्म अधर्म होता है !जब हिंसा में बृद्धि होती है !तब इन निरीह जीवों का करुण चीत्कार परमात्मा को विचिलित  कर देता है !तब परमात्मा समस्त जीवों की रक्छा के लिए और साधुओं को कष्ट मुक्त करने के लिए इन धर्मध्वजी अधर्म परायण नृशंस  मनुष्य के रूप में राक्च्छसों का विनाश कर सर्व समावेशी सभी जीवों के धारण पोषण करने वाले शुद्ध धर्म की स्थापना करता है !यही भगवान् के देह धारण का हेतु है !भगवान् श्री कृष्ण ने  द्वापर के अंत में धर्म की स्थापना और अधर्म के विनाश के लिए देह धारण की थी !और गीता का अमर उपदेश देकर कर्मयोग का ज्ञान समाज को दिया था !निष्काम कर्मयोग की औषधि मनुष्यों के सभी प्रकार के  मानस रोगों  को समाप्त करने की  अचूक औसधि है !इसका सेवन सभी लोगों को करना चाहिए !

Saturday, 20 August 2016

धरम छेत्रे कुरुच्छेत्रे -----धर्म के ८मर्ग हैं ---यज्ञ दान शाश्त्रों का अध्ययन और तप इन चारों का तो कोई दम्भी पुरुष भी आचरण कर सकता है ! किन्तु इन्द्रिय निग्रह सत्य सरलता तथा कोमलता का इन चार का तो संत लोग ही अनुसरण करते हैं !जो महात्मा नहीं है ! उनमे सत्य छमा दया और निर्लोभता तो रह ही नहीं सकते हैं !धृतराष्ट्र और दुर्योधन करण शकुनि आदि सभी कौरव वेद पाठी थे ! नित्य अग्निहोत्र करते थे !किन्तु उनमे धर्म के अंग सत्य छमा दया और निर्लोभता के गुण नहीं थे !बे शब्द ग्यानी थे !उनमे धर्म का श्रेष्ठ आचरण प्रधान आचरण नहीं था !धर्म छेत्रे कुरु छेत्रे का अर्थ है की गीता केवल विद्वत्ता प्रदर्शन के लिए नहीं है प्रत्यक्छ आचरण में उतारने के लिए है ! पांडव युद्ध के पक्छ में नहीं थे ! बे चाहते थे की १२ वर्ष का बनवास और १बर्श का अज्ञात वास बिताने के बाद उनको उनका राज्य बापिस मिल जाना चाहिए था !राजा विराट की सभा में देश के तमाम राजाओं और श्री कृष्ण की उपस्थिति में यह निर्णय हुआ की विराट का राज पुरोहित हस्तिनापुर जाकर धर्म और नीतियुक्त सन्देश दुर्योधन आदि को दे ! और पांडवों को उनका राज्य देने की बात कहे धर्म राज युधिस्ठर धर्म के विरुद्ध इंद्रासन भी स्वीकार नहीं करेंगे ! राज पुरोहित ने पुष्य नक्छत्र से युक्त जय नामक महूर्त में हस्तिनापुर के लिए प्रस्थान किया ! उन्होंने नीति और धर्म से युक्त बातों का कथन कौरव सभा में कहा ! भीष्म पितामह ने राज पुरोहित के कथन का समर्थन किया ! किन्तु करण ने विरोध किया ! धृतराष्ट्र ने राजदूत को यह कहकर बापिस कर दिया कि वह सोच विचार कर संजय को पांडवों के पास भेजेंगे ! संजय जब धृतराष्ट्र का सन्देश लेकर पांडवों के पास गया ! तब युधिस्ठर ने संजय से कहा की दुर्योधन से बार बार अनुनय बिनय करके कहना की पांडव शांति चाहते हैं ! हम सब में परस्पर प्रीति बनी रहे ! इसलिए हम पांच भाई सिर्फ पांच गाओं पाकर ही संतुष्ट हो जाएंगे ! और इसी पर युद्ध की सम्भावना समाप्त हो जायेगी ! संजय ने कौरव सभा में संधि की बात कही भीष्म पितामह ने भी दुर्योधन को संधि के लिए समझाया किन्तु दुर्योधन ने युधिस्ठर के शांति विषयक प्रस्ताव को यह कहकर अस्वीकार कर दिया कि पांडव मेरी सेना और मेरे प्रभाव के कारण इतने भयभीत हो गए हैं ! कि बे राजधानी या नगर लेने की बात छोड़ कर अब पांच गाओं मांगने लगे हैं ! धृतराष्ट्र वेदव्यास परशुराम गांधारी आदि ने भी दुर्योधन को युद्ध न करने की सलाह दी ! किन्तु दुर्योधन करण आदि ने अहंकार पूर्वक पांडवों से युद्ध करने का ही निश्चय व्यक्त किया ! पांडवों ने युद्ध न हो इसके लिए भगवान श्री कृष्णा को दूत के रूप में कौरवों के पास भेजा युधिस्ठर ने श्री कृष्ण से कहा कि युद्ध में प्रायः लज्जाशील श्रेष्ठ धीर वीर ही मारे जाते हैं ! और अधम श्रेणी के व्यक्ति जीवित बच जाते हैं ! युद्ध रूप कर्म तो पाप ही है ! युधिस्ठर ने कहा आप ही समस्त कौरवों के सुहृद तथा दोनों पक्च्छोँ के नित्य प्रिय सम्बन्धी है ! पांडवों सहित धृतराष्ट्र पुत्रों का मंगल सम्पादन करना आपका कर्तव्य है ! आप उभय पक्छ में संधि कराने की शक्ति भी रखते हैं !आप यहाँ से जा कर दुर्योधन से ऐसी बातेंकहें जो शान्ति स्थापना में सहायक हों ! भगवान श्री कृष्ण ने कहा कि मै वही कहूँगा जो धर्म संगत तथा हम लोगों के लिए हितकर तथा कौरवों के लिए भी मंगल कारक हो ! कार्तिक मॉस रेवती नक्छत्र में मैत्री नामक महूर्त में श्रीकृष्ण ने यात्रा प्रारम्भ की !श्री कृष्णा ने कोरब सभा में धृतराष्ट्र से कहा इस समय दोनों पक्छों में संधि कराना आपके और मेरे अधीन है ! आप अपने पुत्रों को मर्यादा में रखिये और में पांडवों को नियंत्रण में रखूँगा ! युद्ध छिड़ने पर तो महान संघार ही दिखाई देता है इस प्रकार दोनों पक्छों का विनाश कराने में आप कौन सा धर्म देखते हैं आपके पुत्र लोभ में अत्यंत आसक्त हो गए हैं ! उन्हें काबू में लाईये ! शत्रुओं का दमन करने वाले कुन्तीपुत्र आपकी सेवा के लिए भी तैयार हैं ! और युद्ध के लिए भी तैयार हैं ! जो आपके लिए विशेष हितकर जान पड़े उसी मार्ग का अनुशरण कीजिये !किन्तु कौरवों ने श्री कृष्णा की सलाह ना मान कर उलटे उनको ही बंदी बनाने की चेस्टा की !परिणाम स्वरुप युद्ध अवश्यमभाभी हो गया था !

Thursday, 18 August 2016

  एक बहुत निरथर्क विवाद भारत के राजनीतिक नेताओं और उनके अंध भक्तों द्वारा चर्चा में छाया रहता है !कि  देश की आजादी अहिंसा से आयी या हिंसा से  आयी ? यह राजनेताओं  की वर्तमान समस्यों से पलायन करने और सत्ता को अपने दल या व्यक्तिगत स्वार्थों के लिए इस्तेमाल करने का लोकतंत्र विनाशक कदम है ! आजादी किसके लिए आयी ? उस दिशा में देश कितना बढ़ा है ?  आजादी अंतिम व्यक्ति के दरवाजे  तक पहुँची  या नहीं ? क्यों नहीं पहुँची ? !और प्रगति करते करते हम वहां तक पहुंचेंगे और कैसे पहुंचेंगे ? कि देश में अंतिम और प्रथम व्याक्ति नाम की श्रेणियां भी समाप्त हो जाए ! इस पर विचार होना चाहिए !जो बाधाएं आजाद भारत में निर्मित हो गेयें हैं !उनको कैसे समाप्त किया जाय , देश में सभी  देश वासियों को  जीवन धारण करने के लिए आवश्यक सामग्री पर्याप्त मात्रा में  प्राप्त हो ! इस प्रयत्न की और लोगों को लगाना चाहिए !राजनेता ऐसा प्रयत्न शायद ही करें ? क्योंकि राजनीति में सत्ता प्राप्त करने के लिए उनकी हालात उस वासना ग्रस्त व्यक्ति की तरह होती है !जिसका सारा प्रयत्न सत्ता सुख का होता है !किन्तु बातें लोक कल्याण  की होती है !ये लोग पब्लिक की   समस्यायों को उलझाते ज्यादा और सुलझाते कम हैं !इन्ही लोगों से सत्ता सुख के कुछ टुकड़े प्राप्त लोग इनके समर्थन में भौंकते रहते हैं !लोकतंत्र की जान बे स्वतंत्र विचारक होते हैं !जो अपनी वैचारिक स्वतंत्रता की कीमत सभी यंत्रणाओं ,और जीवन को दाव पर लगाके भी चुकाते हैं !इस प्रकार से दो प्रकार की शक्तिया स्वस्थ लोकतंत्र की स्थापना में बाधा बन कर  आजादी के यथार्थ उद्देश्य को सिद्ध नहीं होने दे रहें  हैं !ऐसे गपोड़िये देश में बहुत है जो भगत सिंह ,राजदेव ,आदि क्रांति कारियों की बात करेंगे !किन्तु जब साहस और शौर्य प्रदर्शन  का अवसर आयेग ,तो खोजने पर भी नहीं मिलेंगे !स्वतंत्रता संग्राम में जिन लोगों त्याग किया उनमें से बहुसंख्यक स्वतंत्रता के लिए जीवन समर्पित करने वाले    आज   भी स्वतंत्रता संग्राम   सेनानी  के रूप  में लुप्त हैं !उनमें से कुछ सही     लोगों के नाम उजागर  हैं ,बहुत से फर्जी   हैं !मैं निश्चित   तौर  पर नहीं कह  सकता  कि कितने  असली  और  कितने Yeseफर्जी  है ? किन्तु  आपात  काल  में बहुत से साथी  जो देश भक्ति  के गीत  गाते  थे  ,शस्त्र  क्रांति की बात करते थे  !बे ऐसे नदारद  हुए  की उनका  पता  भी नहीं चला  !जैसे  ही आपात  काल  समाप्त हुआ   बे फिर  देश भक्ति  का चोला  ओढ़कर  भगत सिंह और सुभाष  बोस आदि   के गीत  गाने  लगे  !और उनमे  से कुछ जेल  ही नहीं  गए  बे भी लोकतंत्र सेनानी  घोसित  होगये  !इसीलिए   लोकतंत्र को वास्तविक  बनांने  का काम  और देश के लिए सेवा भाव से समर्पित और राजनैतिक सत्ता ,महत्ता या पद प्रतिस्ठा की दौड़ से बाहर रहने वाले  अपने आचरणों से सद्भाव का सन्देश देने वाले   सिर्फ  अहिंसक   गाँधी  वादी  ही कर सकते  हैं !क्योंकि बे आज  भी समर्पित भाव  से अपनी शक्ति  और सामर्थ्य  के अनुसार  अहिन्सक   समाज  निर्माण  के कार्य  में संलग्न  हैं !ऐसे और भी बहुत से देश के लिए समर्पित भाव से कार्य करने वाले असंख्य देश भक्त स्त्री पुरुष हैं !जिनका नाम समाचार  पत्रों की सुर्ख़ियों मैं नहीं है !विनोबा जी    उनको jहरिसेवक कहते थे ! ऐसे हरि सेवकों का विशाल समुदाय गांधीजी ने और विनोबा जी ने  देश मैं खड़ा किया था !जिनका  विस्तार देश के बाहर भी हो गया हैं !उन्हें पहचानकर उनसे दिशा निर्देश प्राप्त कर सर्व समावेशी भारतीय समाज की रचना की आवश्यकता है !

Thursday, 11 August 2016

अंतर राष्ट्रीय युवा दिवस -------- शेक्छणिक गुणबत्ता और राजनैतिक स्वक्छ्ता का निर्माण करें -------
!---- नक़ल कर के परीक्छा पास होने के जहर का पान कर अपने भविष्य का सत्यानाश ना करें
२-- फर्जी  डिग्रीयां  प्राप्तकर डिग्री धारी महामूर्ख ना बने
३---- आरक्छण की बजाय जीवन में स्वाबलंबन को विकसित और धारण करें !अनारकच्छित छात्र  अपने जीवन का ध्येय सरकारी नॉकरी ना बनाकर जीवन यापन के लिए नए रचनात्मक छेत्रोका निर्माण करें ! और अपने भविष्य के निर्माता स्वयं बने !
४ वैदिक धर्म के उत्कृष्ण ग्रन्थ महाभारत गीता आदि का गहरा अध्यन ,चिंतन ,मनन करें !और सभी धर्मों का उत्कृष्ट करुणा और अहिंसा और प्रेम प्रगट करने वाले आचार्य विनोबा भावे के बाइबिल,कुरान ,गीता ,रामायण ,जपुजी , धम्म पद , जैन धर्म ,पारसी धर्म तुकाराम के अभंग ,ज्ञानेश्वरी ,तमिलनाडु ,दक्छिण के संत पूर्व पश्चिम और कश्मीर के संत  आदि के जीवन निर्माण के लिए हिंसा मुक्त सर्वधर्म समावेशिक ग्रंथों का अवश्य  अध्यन करें और कराएं  यह महान  संत इस युग के लिए प्रेरणा पुंज और भविष्य के अति उत्तम निर्माण की जीवन विधि का मार्ग प्रस्तुत करता है !आचार्य विनोवा भावे के कार्यों की संपूर्ण जानकारी उनके लोकोपकारी समस्त ग्रंथों के पठन पाठन की सामग्री पवनार महाराष्ट्र में स्थापित ब्रह्म विद्या मंदिर  से ही उपलब्ध हो सकती है !यह सब ग्रन्थ ब्रह्म विद्या मंदिर पवनार में उपलब्ध हैं ! इस आश्रम में तपोनिष्ठ साधिकाएं निवास कराती हैं !जो विनोबा के नव निर्माण का चित्र अपनी त्याग ,तपस्या युक्त जीवन से प्रस्तुत करती हैं !ये बहिनें आदर्श और सेवा कीप्रतिमुर्ति है !धर्म के आध्यात्मिक स्वरुप का दर्शन इस आश्रम में होता है !
५ विनोबा के ग्रन्थ स्वच्छ राजनीति उत्तम शेक्छणिक गुणबत्ता के विकास का मार्ग प्रस्तुत करते हैं
मोहनजोदड़ों के लोगों का भोजन और रहन सहन -------- लोगों के खान पान रहन सहन ,आचार अदि को ही संस्कृति कहते है !यह संस्कृति कृति से जब संस्कारित हो जाती है !तब संस्कृति कहलाती है !इस संस्कृति का मूल आधार धर्म होता है !और भारत में धर्म का मूल आधार वेदों को माना जाता है !भोजन को  तीन भागों उत्तम ,मध्यम और अधम में वेदों के सार गीता में निरूपित किया गया है !आयु ,सत्त्वगुण ,शक्ति ,आरोग्य सुख ,आनंद की बृद्धि करने वाले रस युक्त , घी ,मक्खन दूध ह्रदय की शक्ति बढ़ने वाले और लंबे समय तक शरीर को पुष्ट करने के लिए  स्थिर रहने वाले ऐसे भोज्य पदार्थ सात्त्विक मनो बृत्ति ,अहिंसक लोगों को प्रिय होते हैं! ऐसा भोजन श्रेष्ठ भोजन माना गया है !जो भोजन अति कडुए अति खट्टे ,अति नमकीन ,अति गरम अति तीखे (चटपटे )अति रूखे और ह्रदय में जलन पैदा करने वाले और दुःख शोक ,और रोगों को उत्पन्न करने वाले भोज्य पदार्थ सिर्फ स्वाद के लिए भोजन करने वाले और इस प्रकार की भोज्य सामग्री से बीमारी होती है , भोजन केपरिणाम विचार ना कर भोजन करने विषयानुरागी भोगी मध्यम श्रेणी के पुरुष होते हैं !इसीलिए यह भोजन मध्यम गुण वाला कहा गया है ! जो भोजन सड़ा हुआ है ,रसरहित है ,जूठा है ,दुर्गन्धित बासी तथा मास ,मछली ,अंडे आदि है !ऐसा भोजन अधम अर्थात अत्यंत निम्न कोटि का माना गया है !और यह भोजन हिंसक स्वभाव के लोगों को प्रिय होता है !समाज किसी भी काल में  एक जैसे विचार ,व्योहार के लोगों का नहीं होता है !उसमें भिन्न भिन्न रुचियों के स्त्री पुरुष हमेशा होते हैं !मोहन जोदड़ो  में भी उत्तम ,मध्यम ,और अधम भोजन के पदार्थ खाने वाले लोग थे !
दो प्रकार के पक्के मूर्ख ------- एक प्रकार के मूर्ख बे हैं जो सनातन धर्म को ना समझ कर उसकी निंदा करते हैं !दूसरे प्रकार के   मूर्ख बे हैं, जो  सनातनी गृहस्थ  होते हुए भी सनातन धर्म के सनातन तत्त्वों का अनुशीलन नहीं करते हैं !औरजिस सनातन धर्म में अगड़ा ,पिछड़ा  दलित आदि शव्द ही नहीं है !और जो धर्म सर्वे भवन्तु सुखिनः की उद्घोषणा करता है !उसमें छुआ छूत आदि का अधार्मिक प्रवेश कराकर लोगों को सार्वजानिक स्मशान पर शव दाह करने से रोकते हैं !मंदिरों में पूजा नहीं करने देते ,सार्वजानिक कुओं अदि से पानी नहीं भरने देते है !इन  सनातन धर्म के नासक लोगोंके कारण ही धर्म परिवर्तन हुआ !और इन्ही के कारण बहुत से ऐसे मूर्खों का जन्म हुआ जो सुबह से शाम तक !सिर्फ सनातन धर्म को गलियां देने का ही काम करते रहते हैं !सर्वाधिक पापी ,अधम ,पाखंडी बो लोग हैं, जिन्होंने सनातन धर्म के तत्त्व ज्ञान की चर्चा करने का ब्रत ले लिया है !  और तदनुसार वेश भी धारण कर लिया है !किन्तु सनातन धर्म में वर्णित तत्त्व ज्ञान को आचरण में नहीं उतारते हैं !
       आजकल योग कोबड़ी प्रधानता प्रदान की जा रही है !महर्षि पातंजलि के नाम पर एक बहुत बड़ा व्योपारिक प्रतिष्ठान  भी खड़ा हो गया !और विश्व योग दिवसभी मनाया जाने लगा है !पवित्र भूमि भारत में जन्मे और आचरित इस योग की सिद्धि और आचरण के विषय में क्या कहा गया है ? इसका कथन अनेक  आख्यानों में महाभारत में किया गया है !ऐसे ही एक आख्यान को में यहाँ प्रस्तुत कर रहा हूँ !
१-----छुरे की तीखी धार पर कोई सुख पूर्वक खड़ा रह सकता है ! किन्तु जिसका चित्त शुद्ध नहीं है ऐसे मनुष्यों का योग धारणाओं में स्थिर रहना अत्यंत कठिन है !
२------ जैसे समुद्र में बिना नाविक की नाव मनुष्यों को पार नहीं लगा सकती ,उसी प्रकार यदि योग की धारणाएं सिद्ध न हुई तो बे शुभ गति की प्राप्ति नहीं करा सकती हैं !
३-------- जो विधि पूर्वक योग की धारणाओं में स्थिर रहता है ,वह जन्म ,म्रत्यु ,दुःख और सुख के बंधनों से छुटकारा पा जाता है !
४------योग का मार्ग दुर्गम है कोई बिरला ही इस मार्ग को कुशलता पूर्वक तै कर सकता है !
५-------- काम ,क्रोध ,सर्दी ,गर्मी ,वर्षा ,भय ,शोक ,स्वांश ,सामान्य मनुष्यों के प्रिय लगने वाले विषय भोग, दुर्जय असंतोष घोर तृष्णा , स्पर्श ,निद्रा तथा दुर्जय आलस्य को जीत कर वीत राग महान एवं उत्तम बुद्धि से युक्त महात्मा योगी स्वाध्याय तथा ध्यान का संपादन करके बुद्धि के द्वारा सूक्छम आत्मा का साक्छात्कार लेते है !
       ये योगियों के संक्छेप में कुछ थोड़े से लक्छण यहाँ प्रस्तुत किये हैं !जिस प्रकार भौतिक ज्ञान का अध्यन विधिबत करने के लिए तदनुसार शिछण ग्रहण करना पड़ता है !उसी प्रकार समस्त धर्मों के मूल सनातन धर्म का शिछण भी बीत राग तपोनिष्ठ महात्माओं से प्राप्त किया जा सकता है !खोजने  पर ऐसे तत्त्वनिष्ठ तपस्वी महात्मा मिल जाएंगे !अगर भोग गुरु को योग गुरु समझ कर योग सीखोगे  तो  बहि रंग योग को ही योग  समझ कर भटक जाओगे !और गीदड़ को शेर समझ लोगे !

Tuesday, 9 August 2016

हिन्दू मुस्लिम एकता --------- साम्प्रदायिक सद्भाव की यह समस्या अनसुलझी आज भी है !यह समाचार प्रकाशित होते रहते हैं कि फलां स्कूल में राष्ट्रगान एक सम्प्रदाय विशेष के बच्चे नहीं गाएंगे  क्योंकि यह उनके मजहब के खिलाफ है  भारत माता की जय नहीं बोलेंगे ,वन्दे मातरम गीत नहीं गाएंगे  आदि ! गाँधी जी ने अपना संपूर्ण जीवन हिन्दू मुस्लिम एकता के लिए समर्पित कर दिया था ! किंतुबे इसमें सफल नहीं हो सके और इसी कारण  उनकी हत्या भी कर दी गयी देश का विभाजन भी हो गया ! फिर से नए बिभाजन  की बातें सुनने में आती है 1 देश टूट जायेगा ये बातें भी नेता लोग करते सुनायी देते है ! एक लेख गांधीजी ने ८-७-१९२० में यंग इंडिया में तीन राष्ट्रीय नारों के शीर्षक से प्रकाशित किया था ! जिस समस्या के समाधान के लिए यह लेख लिखा गया था वह आज और अधिक विकराल रूप में मौजूद है ----- उन्होंने लिखा था ---- मद्रास (चेन्नई )दौरे के सिलसिले में बेजवाड़ा में मेने राष्ट्रीय नारों के समबनध में कुछ बातें कही थी और लोगों को सुझाव दिया था कि व्यक्ति विशेष की अपेक्छा आदर्शों के जय के नारे लगाना ज्यादा अच्छा होगा ! मेने श्रोताओं से महात्मा गांधीकी जय और मुहम्मद अली शौकत अली की जय के बदले हिन्दू मुसलमानों की जय का नारा लगाने का सुझाव भी दिया था ! मेरे बाद शौकत अली भाई भी बोले थे ! उन्होंने तो इस सम्बन्ध में नियम ही निश्चित कर दिया है ! उन्होंने कहा कि हिन्दू मुस्लिम एकता के बाबजूद मैं देखता हूँ कि अगर हिन्दू वन्दे मातरम् का नारा लगाते हैं तो मुसलमान अल्लाह हू अकबर की आवाज बुलंद करते हैं ! भाई अली ने ठीक ही कहा है कि यह चीज कानों को बहुत कड़वी लगती है और लगता है कि लोग अब भी एकमन से काम नहीं कर रहे हैं ! इसीलिए केवल तीन ही नारे स्वीकार किये जाने चाहिए  !एक तो अल्लाहो अकबर का नारा हिन्दू और मुसलमान दोनों लगाएं इस से अपना यह विश्वास प्रगट करें कि ईश्वर ही महान हैंऔर कोई नहीं ! और दूसरा नारा होना चाहिए वन्दे मातरम् या भारत माता की जय और तीसरा नारा होना चाहिए हिन्दू मुस्लिम की जय ,जिसके बिना भारत को जय नहीं मिल सकती है ! बेसक में चाहता हूँ अखबारों और सामाजिक कार्य करने वाले लोग मौलाना साहब का सुझाव अपनाएँ और जनता को केवल ये तीन नारों को लगाने की प्रेरणा दें इन तीनों में बहुत अर्थ भरा हुआ है ! पहला नारा एक प्रार्थना है ! वन्दे मातरम् के साथ जिन अद्भुत बातों की स्मृति जुडी हुई है वह तो है ही इसके अलावा यह एक राष्ट्रीय आकांछा है अर्थात भारत पूरी उचाई तक उठे की अभिव्यक्ति है ! में भारत माता की अपेक्छा वन्दे मातरम् को ज्यादा पसंद करूँगा ! इन नारों के सम्बन्ध में कोई विवाद नहीं होना चाहिए ! गांधीजी की हत्या हो गयी !मौलाना शौकत अली और मुहमद अली भी अल्लाह को प्यारे होगये !विवाद अभी भी मौजद है !भारत भारत ना रहने पाए !इसकी चेस्टा पूरी ताकत से आज भी चल रही है ! 

Monday, 8 August 2016

करो या मरो--------------- जब अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने अंग्रेजो भारत छोडो का प्रस्ताव पारित कर दिया और इस सबसे महत्त्व पूर्ण   आंदोलन का नेतृत्त्व गाँधी जी को सौंप  दिया !इस अवसर पर गांधीजी ने अपने भाषण में कहा ---आपने अभी जो प्रस्ताव पास किया है उसके लिए में आपको बधाई देता हूँ ! में आपसे जो कुछ कह रहा हूँ वह स्वतंत्रता का सार है !गुलाम की बेड़ियाँ उसी समय टूट जाती है जब वह अपने आप को स्वतंत्र समझने लगता है !एक छोटा सा मन्त्र में आपको देता हूँ !आप इसे अपने ह्रदय पटल पर  अंकित कर लीजिये ---- वह मन्त्र है करो या मरो ! और आप इस मन्त्र का हर स्वांस के साथ जप कीजिये !या तो हम भारत को आजाद करेंगे या आजादी की कोशिश में प्राण  दे देंगे !हम अपनी आँखों से अपने देश को सदा गुलाम और परतंत्र बना रहना नहीं देखेंगे  ! प्रत्येक सच्चा कांग्रेसी चाहे वह स्त्री हो या पुरुष  इस दृढ निश्चय के साथ संघर्ष में शामिल होगा कि वह देश को  बन्धन और दासता में बने रहने को देखने के लिए जिन्दा नहीं रहेगा ऐसी आपकी प्रतिज्ञा होनी चाहिए ! अगर सरकार मुझ को गिरफ्तार नहीं करेगी तो में आपको जेल भरने का कष्ट नहीं दूंगा ! ईश्वर को और अपने अंतःकरण को साक्छी रखकर यह प्रण कीजिये कि जब तक आजादी नहीं मिलेगी तब तक हम दम नहीं लेंगे ओरजादी के लिए अपनी जान देने के लिए भी हम तैयार रहेंगे ! जो जान देगा उसे जीवन मिलेगा और जो जान बचाएगा वह जीवन से वंचित हो जाएगा ! स्वन्त्रता कभी कायर और डरपोक को नहीं मिलाती है !
             प्रस्ताव पारित होजाने का मतलब आंदोलन आरम्भ होना नहीं था  ! गांधीजी ने कहा वास्तविक संघर्ष तो इस छन शुरू नहीं हो रहा है  !आपने सारे अधिकार मुझे सौंप दिये हैं अब में वाइस राय से भेंट करने जॉऊँगा और उनसे कांग्रेस की मांग स्वीकार करने के लिए कहूंगा ! इस काम में दो तीन सप्ताह लग सकते हैं ! किन्तु अंग्रेजों का इरादा गांधीजी को जरा भी समय देने का नहीं था ! ९ अगस्त को प्रातः पांच बजे उन्हें तथा बम्बई में उपस्थित सभी शीर्षास्थ कांग्रेसी नेताओं को गिरफ्तार कर लियागया और गिरफ्तारकरके उनकी नजर बंदीके लिए पहले से ही तय स्थानों को ले जाया गया  !उसी दिन देश भर में इसी तरह की गिरफ्तारियां की गयीं ! और तब आरम्भ  हुआ आतंक का वह दौर जो देश के अबतक के इतिहास में अभूत पूर्व था ! इसके उत्तर में देश भर के विद्यार्थी ,कारखाना मजदूर ,किसान और बुद्धिजीबी उठ खड़े हुए ! यत्र तत्र कुछ हिंसक घटनाएं भी हुई संपत्ति का विनाश भीहुआ ! सरकारी प्रचार तंत्र ने इस सबका दोष गांधीजी के माथेमढ़ा ! इस दोषा रोपण का प्रतिबाद करते हुए गांधीजी ने कहा कि यदि सरकार ने महामहिम वाइस राय के साथ मेरे संकल्प पत्र और उसके परिणाम की प्रतीक्छा की होती तो देश पर कोई मुसीबत ना आयी होती ----- लगता है बड़ेपैमाने पर कांग्रेसी नेताओं की गिरफ्तारी से लोग गुस्से से इतने पागल हो गए हैं कि उन्होंने आत्मसंयम खो दिया है ! मेरा ख्याल है कि जो तबाही हुई है उसके लिए सरकार जिम्मेदार है न की कांग्रेस ! सरकार ने इस पत्र को जान बुझ कर दबा दिया था  !इसी जेल की अविधि में आगा खां पैलेस में गांधीजी के साथ नजर बंद उनकी पत्नी कस्तूरबा गांधी और सचिव महादेव देसाई की म्रत्यु भी हो गयी

Sunday, 7 August 2016

जितनी छति सनातन धर्म की गुलाम भारत में नहीं हुई !उस से ज्यादा छति आज हो रही है !देश में गुलाम भारत में  हिंदुओं का धर्म परिवर्तन हुआ इसके बाद भी हिन्दू जीवन के मूल तत्त्व कृषि ,स्वाबलंबन अदि और हिंदुओं के सत्य सद्भाव आधारित स्वभाव का नाश नहीं हो पाया ! किन्तु आज जिस तरह से सनातन धैम के आतंरिक स्वरुप को नष्ट किया जा रहा है !यह सनातन धर्म की मूल संस्कृति और आत्मा का ही नाश कर देगा !लोकतंत्र की शासन व्यबस्था का आधार शासन सत्ता में बने रहना नहीं है !बल्कि जनता को अधिक जागरूक ,जिम्मेदार और सशक्त तथा स्वाबलंबी बनाने का है !सत्ता पुरुष्कार और सम्मान के लिए नहीं .बल्कि जन कल्याण के लिए होती है !लोकतंत्र का यह ध्येय तो सत्ता लोलुप अंधे नेताओं ने लुप्त ही कर दिया है ! सत्ता प्राप्ति के और उसमें बने रहने के जितने भी जाति वादी ,अगड़े पिछड़े ,दलित ,आदिवासी ,महिला शसक्तीकरण ,समाजवाद ,समरसता अदि के जितने भी साधन हो सकते हैं !उनसबका उपयोग  राजनेता उपयोग करके अपनी आर्थिक और सामाजिक सत्ता और समृद्धि की बृद्धि  के लिए निर्लज्जता पूर्वक कर रहे हैं !प्राचीन सामंतवाद ,पूंजी बाद ,भेद भाव अदि के स्थान पर आज राजनैतिक सत्ता में प्रवेश करने वाले चाय बेचने वाले दलित ,पिछड़े ,आदिवासी ,अगड़े और  बहुत से  पूर्व राजे महाराजे ये सब मिलकर एक नया सामंत बाद बंश परंपरा बाद  और पूंजी बाद निर्मित कर रहे हैं !जिस के आगे प्राचीन राजाओं ,महाराजाओं की समृद्धि ,भोग .विलास और ऐश्वर्य भी फीका पड़ गया  हैं !देश में चारों तरफ कागजी  करेंसी के संग्रह में सभी लोग संलग्न दिखाई देते हैं !इस सामजिक कोढ़ में अब एक नया मुद्दा गाय की रक्छा का भी जुड़ गया है !गाय की रक्छा का प्रयत्न तो गांधीजी ने भी किया था !किन्तु जिस तरह से गाय की रक्छा को राजनैतिक लाभ  का मुद्दा बनाकर ये तथा कथित गो भक्त देश में असुरक्च्छा का माहौल उत्पन्न कर रहे हैं !उस से गाय के प्राणों की रक्छा कभी नहीं हो पायेगी !गाय के क़त्ल और माश खाने वालों से कहीं बहुत अधिक जिम्मेदार बे सरकारें हैं !जिन्होंने गोचर की भूमि को पटटों पर दे दिया है !और शहरों का विकास और नए नए शहरों का निर्माण करके  एक लाख गांव का नाम निशान ही मिटा दिया है !और कृषि की भूमि पर भवनों और अट्टालिकाओं का निर्माण  कर के किसानों को आत्महत्या करने के लिए विवश कर दिया है ! ये तथाकथित गो भक्त  दलितों की मार पीट करते हैं !किन्तु कभी ये आँखों के अंधे यह नहीं देखते हैं !क़ि आबारा गायों के झुण्ड के झुण्ड इस गांव से उस गांव में कृषि फसल को नुक्सान पहुंचा रहे है !और शहरों में आवागमन  में दिक्कत पैदा कर दुर्घटनाओं का कारण बन रहे हैं !देश में इन्ही धर्मध्वजी ,धर्मनाशक सत्ता धारियों के संरक्छण में हिन्दू व्योपारी गाय के मास का नित्यात कर रहे हैं ! अगर गो भक्तों को गाय के प्राणों की रक्छा करना ही है ! तो उनको गाय के प्राणों भक्छक इन असली कसाईयों के विरुद्ध आंदोलन करना चाहिए ! सर की बीमारी का इलाज हाथ काटने से नहीं हो सकता है !पहले से ही गरीबी और भूख से त्रस्त अन्याय पीड़ित भारत को धर्म के नाम से अधर्म के मार्ग पर मत चलाइये !
१९४२ भारत के स्वतंत्रता संग्राम का सबसे महत्त्व पूर्ण दौर है ! संगठन और मनोबल से सम्बंधित जैसी विकत समस्यायों का सामना राष्ट्रीय आंदोलन को इस अविधि में करना पड़ा बेसी समस्यायों से अपने लम्बे इतिहास में इसका वास्ता पहले कभी नहीं पड़ा था ! ८ अगस्त १९४२ को अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने भारत को पूर्ण स्वतंत्रता देने का प्रस्ताव पारित किया था ! भारत में ब्रिटिश शासन की अबिलम्ब समाप्ति भारत और संयुक्त राष्ट्र संघ के ध्येय की सफलता के लिए अत्यंत आवश्यक है ! ब्रिटिश शासन के जारी रहते भारत की अधोगति हो रही है 1 वह दुर्बल हो रहा है और अपनी रक्छा करने तथा विश्व स्वतंत्रता में योग देने की उसकी छमता उत्तरोत्तर कम होती जाए रही है !कांग्रेस कमेटी को यह देख कर बड़ी निराशा हुई है  !क़ि रुसी और चीनी मोर्चों पर स्थिति बिगड़ रही है ! रुसी और चीनी लोग अपनी स्वतंत्रता के रक्छा के लिए    जो वीरता दिखा रहे हैं कमेटी उसकी भूरि  भूरि प्रशंसा करती है ! आज के संकट के निवारण के लिए यह आवश्यक मांग है की क़ि भारत स्वाधीन हो और ब्रिटिश शासन समाप्त हो! भारत की स्वाधीनता की घोषणा के बाद एक अस्थायी सरकार बन जायेगी और स्वतंत्र भारत संयुक्त राष्ट्र का सहयोगी बन जाएगा ! तथा स्वन्त्रता संघर्ष के संयुक्त अभियान के कष्टों और दुखों में उसका साक्छी होगा ! अस्थायी सरकार केवल देश के मुख्य दलों और समुदायों के सहयोग से ही बन सकती है ! इस प्रकार वह भारत की  जनता के सभी महत्त्व पूर्ण बर्गों का प्रितिनिधिट्टव करने वाली एक मिली जुली सरकार होगी  !उसका मुख्य कार्य भारत की प्रतिरक्छा ,मित्र राष्ट्रों के साथ मिलकर सभी उपलब्ध सैनिकों एवं अहिंसक शक्तियों द्वारा आक्रमण का प्रति रोध तथा खेतों और कारखानों मैं क़ाम  करने वाले लोगों की खुश हाली और उन्नति को प्रोत्साहन देना होना चाहिए ! क्योंकि समस्त सत्ता और अधिकार  तो बुनियादी तौर पर आखिर उन्ही को होना चाहिए !अस्थायी  सरकार एक ऐसे  संविधान सभा की योजना  बनाएगी ,जो भारत के शासन के लिए एक ऐसा संविधान तैयार करेगी  जो जनता के सभी बर्गों को स्वीकार हो ! कांग्रेस की राय में यह संविधान संघीय होना चाहिए जिसमें संघ की इकाईयों को अधिकतम स्वायत्तता हो और उनको अधिकार प्राप्त हों  ! परंतु कमिटी यह महसूस करती है क़ि राष्ट्र को उस सामराज्य  बादी और निरंकुश सरकार के विरुद्ध ,जो भारत पर आधिपात्य जमाये हुए है और उसे अपने तथा मानवता के हित में कार्य करने से रोक रही है ,अपने संकल्प को पूरा करने के  प्रयत्नों से रोकना अब औरउचित नहीं है ! कमेटी इसीलिए स्वतंत्रता और स्वाधीनता के भारत के अनन्य अधिकार की स्थापना के लिए यथा सम्भव बड़े से बड़े पैमाने पर एक अहिंसक जन  आंदोलन छेदने की मंजूरी देने का निश्चय करती है ! ताकि देश पिछले २२ सालों के शांतिपूर्ण संघर्ष में संचित अपनी सम्पूर्ण अहिंसात्मक शक्ति को काम में ला सके ! इस तरह के संघर्ष का गाँधी जी के नेतृत्त्व में में चलना अनिवार्य है ! और कमेटी उनसे जो कदम उठाये जाने हैं उनमें राष्ट्र का नेत्रतत्त्व और पथ प्रदर्शन करने की प्रार्थना करती है  !





1 कमिटी भारत के लोगों से अपील करती है कि बे आने वाले खतरों और कठिनाईयों का साहस और धैर्य से मुकाबला करें और गांधीजी के नेतृत्वमें एक जुट हों ! और भारतीय स्वाधीनता संग्राम के अनुशासित सैनिकों की हैसियत से उनके आदेशों का पालन करें ! उन्हें यह याद रखना चाहिए कि अहिंसा इस आंदोलन का आधार है ! ऐसा मौका आ सकता है कि आदेश जारी करना या आदेशों का हमारे लोगों तक पहुँचाना असंभव हो जाय और कोई भी कांग्रेस कमेटी काम न कर सके ! ऐसी स्थिति होने पर इस आंदोलन में भाग लेने वाले प्रत्येक नर नारी को अपने लिए स्वयं कार्य करना होगा! स्वन्त्रता के इक्छुक और उसके लिए प्रयत्नशील हर भारतीय को अपना मार्गदर्शक स्वयं होना चाहिए ! और उस कठिन मार्ग पर जो अंत में हमें भारत की स्वाधीनता और मुक्ति तक ले जाएगा निरंतर बिना रुके आगे बढ़ते रहना चाहिए ! अंत में  कांग्रेस कमिटी स्वतंत्र  भारत के  भावी शासन के सम्बन्ध में अपना दृष्टिकोण व्यक्त करने के बाद सभी सम्बंधित लोगों के सामने यह चीज बिलकुल स्पष्ट कर देना चाहती है क़ि जन संघर्ष छेड़ने में उसका  इरादा  कांग्रेस के लिए सत्ताप्राप्त करना कतई नहीं है ! सत्ता जब प्राप्त होगी तो वह भारत की समस्त जनता की होगी !
यथार्थ ज्ञान -------- (१)जैसे पृथवी में बोये हुए बीज का फल तुरंत नहीं मिलता है  !उसी प्रकार किये हुए पाप का भी फल तुरंत नहीं मिलता है ! , परंतु जब वह फल प्राप्त होता है ,तब मूल और शाखा दोनों को जलाकर भष्म कर देता है !
२---पापी मनुष्य पाप कर्म के द्वारा धन पाकर हर्ष से खिल उठता है ! वह पापी अनीति और अधर्म से बढ़ता हुआ पाप कर्मों में आसक्त हो जाता है और यह समझ कर की धर्म है ही नहीं पवित्र आत्मा पुरुषों की हंसी उडाता है  !,धर्म में उसकी तनिक भी श्रद्धा नही रह जाती है  !और पाप के ही द्वारा वह सर्वनाश के मुख में जा गिरता है ! वह अपने को अजर  अमर मानता  है !परंतु उसे भी म्रत्यु पाश में जा पड़ना होता है !
३------ जैसे चमड़े की थैली हवा भरने से फूल जाती है ! बैसे ही  अधर्मी पापी पाप कर्मों से फूल उठता है ! वह पूण्य कार्यों में कभी भी प्रवृत्त नहीं होता है ! तदनंतर जैसे नदी के तट पर खड़े हुए ब्रक्छ वहां से जड़ सहित उखड कर नदी मेंबह जाते हैं उसी प्रकार ये अधर्म परायण पापी भी जड़ सहित नष्ट हो जाते हैं

Wednesday, 3 August 2016

भारत का समाज प्राचीन काल से ही स्वाबलम्बी समाज रहा है !यहाँ यह उक्ति प्रचिलित थी !उत्तम खेती ,मध्यम बान (बिज़नस ) अधम चाकरी ( नॉकरी को अत्यंत बुरा माना जाता था ) भीख निदान  ( भीख मांगना सर्वाधिक निंदनीय कर्म था )  भारत के लोग नौकरी  करने के लिए मुश्किल से तैयार होते थे !इसीलिए जो सेवा ( नॉकरी ) करते थे !बे शूद्र कहलाते थे ! आज प्रधान मंत्री से लेकर जो उत्पादन न कर सिर्फ नौकरी  से ही अपना उदर पोषण करते हैं !बे सब शूद्र हैं ! आचार्य विनोबा भावे ने एक सूत्र दिया है !श्रम संजात वारीणः अर्थात श्रम करके पशीना बहाकर अपनी जीविका चलाओ ! बे कहते थे !उत्पादन करो और मक्खन खाओ ! आज भारत में एक ओर भयानक बेरोजगारी और गरीबी है !और दूसरी और जो उत्तरदायित्त्व के शासकीय पदों पर आसीन है उनमे भयानक कर्तव्यहीनता  हराम खोरी और रिश्बत खोरी है !चपरासी से लेकर महत्त्व पूर्ण पदों तक पर नियुक्ति रिश्वत या सिफारिश से होती है !इस महिला का स्वाबलम्बन का उदाहरण अनुकरणीय और ग्रहण करने योग्य है !वह अपने श्रम ,कुशलता और कुशाग्र बुद्धि से ठेले पर कुलचे और छोले बेचते हुए निश्चित ही एक दिन भब्य रेस्टॉरेंट की मालिक बन जायेगी !

Tuesday, 2 August 2016

 आजकल मोदी जी लोकतंत्र में अधिनायक की तरह काम कर रहे हैं !भारत अभी भी अधिनायक वाद से मुक्त नहीं हो पाया है !घड़ा कुम्हार का निर्माण नहीं करता है !कुम्हार हे घड़े का निर्माण करता है !लोकतंत्र में कुम्हार जनता होती है और घड़ा सरकार !जबकि अधिनायक बाद में में ठीक इसके विपरीत होता है !देश में लोकतान्त्रिक अधिनायक बाद चल रहा है ! भाजपा राज्यों में सत्ता में आने के पहले कार्यकर्ताओं की पार्टी थी !यह राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के नेतृत्त्व में संचालित होती थी !राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ऐसे कर्मठ आत्मत्यागी और हिन्दू धर्म के पुनरुत्थान के लिए समर्पित व्यक्तियों का समूह था !जो मुसलमानो और ईसाईयों के द्वारा शाषित  भारत को इन धर्मों के संस्कृत स्वरुप से मुक्त करना चाहता था !इसीलिए इसको हिन्दू मुस्लिम एकता के लिए प्रयत्न शील गांधीजी घोर शत्रु मालुम पड़ते थे !राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ लक्छ्य प्राप्ति के लिए शिवाजी महाराज की नीतियों का समर्थक है !और वह अपने हिन्दू धर्म के पुनरुत्थान के लिए सभी अपवित्र ,कूटनैतिक साधनो का उपयोग करता है !साधन शुद्धि को यह संगठन लक्छ्य प्राप्ति के लिए गेर जरूरी मानता है ! गाँधी जी इसके उलट साधन शुद्धि को लक्छ्य प्राप्ति से भी अधिक जरूरी मानते थे !उनका यह दृढ विश्वास था कि अपवित्र साधनो से लोकहितकारी लक्छ्य प्राप्त नहीं किया जा सकता है ! मोदी जी संघ के समर्पित स्वयं सेवक रहे हैं ! इसीलिए बे संघ की नीतियों के अनुसार देश को नयी दिशा देने का प्रयत्न निम्न प्रकार से कर रहे हैं
१---- गांधीजी और नेहरूजी पर सभी प्रकार के मनगढंत ,झूठे आरोप लगाकर उनका चरित्र हनन मोदी भक्त कर रहे हैं
२----- सरदार बल्लभ भाई पटेल अगर देश के प्रथम प्रधान मंत्री होते ,!तो देश बहुत उचाई पर होता !उनको गांधीजी ने प्रधान मंत्री नहीं बनने दिया !इस बड़े झूठ को स्वयं मोदी जी अपने भाषणों में व्यक्त करते हैं !और मोदी के अंधभक्त तो गांधीजी पर इस प्रकरण कोलेकर गाँधी जी पर गालियों की बौछार करते रहते हैं !चूँकि झूठ बोलने में और मनगढंत आरोपों को लगाने में इन्हें कोई लज्जा या शर्म नहीं आती है !इसीलिए ये पटेल के सम्बन्ध में भी सही तथ्य प्रस्तुत नहीं करते हैं ! गाँधी जी की हत्या के बाद पटेल ने ही राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ को प्रितिबंधित किया था !और गांधीजी की हत्या के आरोप में सावरकर और गुरु गोलबलकर को गिरफ्तार किया गया था !संघ ने भारत सरकार को यह लिखकर दिया था कि वह सिर्फ सांस्कृतिक संगठन के रूप में कार्य करेगा ! सर्दार पटेल जुलाई १९४६  में नेहरू मंत्रिमंडल में गृहमंत्री के रूप में सम्मिलित हुए थे !उन्होने बहुत से राष्ट्र निर्माण के महत्त्व पूर्ण कार्य किये थे ! बे एक कुशल प्रशासक  थे !बे उच्चकोटि के देश भक्त थे !उनके नेहरू जी से मतभेद थे !किन्तु बे या नेहरूजी कभी भी किसी पद के दाबे दार नहीं थे !न  ही प्रधान मंत्री पद को लेकर कोई विवाद था !पटेल गृहमंत्रालय चलाने में पूर्ण स्वतंत्र थे !बे प्रधान मंत्री पद को कोई महत्त्व नहीं देते थे !बे यथार्थ बादी सख्त प्रशाशक थे ! बे मुसलमानो को विशेष दर्जा जिसे मुस्लिम तुष्टिकरण कहा जाता है !देने के पक्छ्धर नहीं थे !
 इस प्रश्न पर उनमें गांधीजी और नेहरू जी से मतभेद थे !जब गांधीजी ने १३ जनबरी १९४८ को मुसलमानो की सुरक्छा के लिए अनशन किया था !और उसी अनशन के कारण भारत सरकार को अपना निर्णय बदलकर पकिस्तान को ५५ करोड़ रुपया देना पड़ा था !उस से बे बहुत दुखी हो गए थे !मुसलमान लोग पटेल के विरुद्ध थे !और उनकी शिकायत गांधीजी से करते थे ! किन्तु  गाँधी जी हमेशा पटेल की राष्ट्र भक्ति के प्रशंसक रहे और बो कहते थे !कि मुसलमानो को  पटेल की ईमानदारी पर संदेह नही करना चाहिए !इन सब अच्छाईयों के बाद भी पटेल का स्वास्थय ठीक नहीं रहता था उन्होने अपना साढ़े चार साल का गृहमंत्री के कार्यकाल को ढाई साल  अस्पताल से चलाया था !उन्होंने अपनी म्रत्यु के  दो महीने पूर्व २ अकटूबर १९५० में इंदौर में अपने भाषण में कहा  था कि नेहरूजी हमारे नेता है !उनको गांधीजी ने अपना राजनैतिक उत्तराधिकारी घोषित किया है !हम कांग्रेस के बफादार सिपाही हैं !हम  जहाँ हैं !वहीं ठीक हैं !उनकी म्रत्यु दिसंबर १९५० में हो गयी थी !अब उनको देश का प्रधान मंत्री बनाने के लिए स्वर्गलोक से तो बापिस लाया नहीं जासकता था  !
३----- यह नहीं कहा जा सकता है कि कांग्रेस ने अपने शासन में सभी काम अच्छे किये !कांग्रेस ने कुछ गंभीर भूलें भी की है !इसीलिए जनता ने उसको सत्ता से बाहर कर दिया है !किन्तु कांग्रेस ने देश को एक सुदृढ़ आर्थिक और लोकतान्त्रिक ढांचा भी दिया है !यद्दपि कांग्रेस ने भी गांधीजी की आर्थिक नीतियों का जिसमें ग्रामों की संरचना और ग्रामीण कृषि आधारित अर्थ व्यबस्था को प्रधानता दी गयी थी उसको नजरन्दाज किया !इस भूल को नेहरूजी ने स्वीकार भी किया था !किन्तु इसके तत्काल बाद उनकी म्रत्यु होगयी !
4 ------- मोदीजी के हाथों में सत्ता और संगठन दोनों हैं ! देश की संरचना स्मार्टसिटी का निर्माण करके और सभी प्राकृतिक संसाधनों को पूंजीपतियों को सौंपदेने की नीति पर बे  चल रहे हैं !संछेप में वह १९४७ से लेकर अब तक सम्पूर्ण आर्थिक और सामाजिक ढांचा बदलने के लिए कृत संकल्पित दिखाई देते हैं !रेलों का प्राइवेट कंपनियों को सौपने का यह प्रयत्न उसी श्रृंखला का एक कदम है !

Monday, 1 August 2016

राजनेताओं को संवैधानिक मर्यादाओं का पालन करना चाहिए ------ लोकतंत्र का सफल सञ्चालन ,लोकतंत्र में स्थापित संवैधानिक संस्थाओं के संवैधानिक आचरण के विधिबत पालन से ही संभव होता है !जब सांसद और विधायक ही संवैधानिक मर्यादाओं का पालन नहीं करते हैं !तब देश की अन्य सरकारी ,गैर सरकारी संस्थाएं भी आचरण भ्रष्ट हो जाती हैं !यह समझ कर राजनेताओं को अपने आचरणों में लोकतान्त्रिक मूल्यों को धारण करना चाहिए कि देश को लगभग १००० साल की गुलामी के बाद स्वतंत्रता प्राप्त हुई है  ! आजादी के संघर्ष में ज्ञात स्वतंत्रता सेनानियों के साथ ही अज्ञात स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करने वालों की संख्या कही अधिक है !स्वतंत्र देश के अनुरूप जीवन जीने की कला का शिक्छ्ण जो अपने जीवन में उतारकर देते हैं ,बे ही सच्चे देशभक्त और स्वतंत्रता के रक्छक और सेनानी होते है !जब तक आमजनता तक  लोकतान्त्रिक मूल्यों  की आचरण पद्धति विकसित हीकर नहीं पहुंचती है !तब तक लोकतंत्र नुमायशी और कागजी ही बना रहता है !भारत में लोकतंत्र अभी कागजी ही दिखाई देता है! न्यायलय को बार बार राजनेताओं के अलोकतांत्रिक आचरणों को दण्डित करना पड़ता है !समाचार प्रकाशित हुआ है कि उच्चतम न्यायलय ने उत्तरप्रदेश के भूतपूर्व मुख्यमंत्रियों को बंगले खाली करने का निर्णय दिया है ! निर्णय में न्यायलय ने राजनेताओं की अपनी सुविधाओं के लिए सरकारी सुविधाओं की बन्दर वांट की मनो बृत्ति की निंदा की है  ! अलीगढ में एक हिन्दू युवती के साथ मुस्लिम लोगों ने बलात्कार किया है ! इस कारण से अलीगढ  साम्प्रदायिक माहौल के चपेट में आगया है !उन बलात्कारियों को समाजवादी पार्टी का विधायक जमीरउल्लाह अपने यहाँ रखे हुए है !और चुनॉती दे रहा है !क़ि अपराधी मेरे घर में है अगर पुलिस में हिम्मत हो तो उनको गिरफ्तार करे !यह धमकी समाचार पत्रों में दो तीन दिन पहले प्रकाशित हुई थी ! इस विधायक के यहाँ से बलात्कार के आरोपियों को तत्काल गिरफ्तार किया जाना चाहिए !और इसकी विधानसभा की मेम्बरशिप तत्काल समाप्त कर इसके विरुद्ध भी अपराधियों के संरक्छण देने के कारण दंडात्मिक कार्यबाही होनी चाहिए
१अगस्त १९२० को गांधीजी ने असहयोग आंदोलन प्रारम्भ किया था !और उसी दिन दुर्भाग्य से लोकमान तिलक का देहावसान हो गया !गांधीजी ने तिलक की देश भक्ति और देश सेवा का बखान करते हुए कहा था !लोकमान्य बालगंगाधर तिलक नहीं रहे उनकी म्रत्यु हो गयी यह विश्वास करना कठिन है !बे जनता के अभिन्न  अंग थे ! जनता पर जितना प्रभाव उनका था ! उतना हमारे युग के और किसी व्यक्ति का नहीं था !उनके हजारों देश भाई उन्हें जिस श्रद्धा की दृष्टि से देखते थे वह असाधारण थी ! निशन्देह बे जनता के आराध्य थे !हजारों लोगों के लिए उनके शव्द ही कानून थे !वास्तव में हमारे बीच से एक महामानव उठ गया है !सिंह की आवाज मौन हो गयी है !
               अपने देश भाईयों पर उनके इस जबरदस्त प्रभाव का कारण क्या था ?गाँधी जी की राय में इसका उत्तर बहुत सीधा सादा  था !उनकी देश भक्ति की भावना अत्यंत प्रवल थी ! स्वदेश प्रेम के अलावा बे और कोई धर्म नहीं जानते  थे !बे एक जन्मजात लोकतंत्र बादी थे !बहुमत के शासन में उनका विश्वास इतना उग्र था कि गांधीजी को डर लगनेलगता था !यह डर शारीरिक नहीं था !तिलक की स्वतंत्रता के प्रति कठोर और तीब्र राष्ट्र भक्ति और उनके अभूतपूर्व समुद्रवत अगाध ज्ञान के प्रति आदर के कारण था !तिलक की इक्छाशक्ति में  फौलाद की दृढ़ता थी !और उसका उपयोग उन्होंने देश के लिए किया !उनका जीवन पुस्तक के सामान था !----- जिसे जो चाहे पढ़ सकता था !उनकी रुचियाँ बहुत सादा थी !उनका व्यक्तिगत जीवन सर्वथा निष्कलंक और उज्जवल था !उन्होंने अपनी अद्भुत शक्तियां देश की सेवा को अर्पित कर दी थीं !जैसी लगन और धुन के साथ स्वराज्य के सिद्धान्त का प्रचार लोकमान्य ने किया था वह अनन्यतम था !इसीलिए देशबासी आंखमूंद कर उनका विश्वास करते थे !उनकी आशावादिता अदम्य थी !और बे बहुत साहसी  थे !उन्होंने अपने जीवन में ही स्वराज्य को पूर्ण रूप से प्राप्त होने की आशा की थी !अगर बे अपने जीवन में स्वराज्य प्राप्त करने में असफल रहे !तो इसमें उनका कोई दोष नहीं था !निश्चय ही उन्होंने स्वराज्य को बहुत निकट ला दिया था !गांधीजी ने कहा अब यह हमारा काम है कि हम कमसे कम समय में उनके उस स्वप्न को सत्य में परिवर्तित कर देने  के लिए दूने जोर से प्रयत्न करें !
                       तिलक नॉकरशाही के प्रबल शत्रु थे !लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि उन्हें अंग्रेजों और अंग्रेजी शासन से घृणा थी !गांधीजी नेकहा कि मेँ अंग्रेजों को आगाह कर देना चाहता हूँ कि बे तिलक ओ अपना शत्रु मानने की भूल न करें !
            गांधीजी ने कहा मुझे पिछली कलकत्ता कांग्रेस के अवसर पर उनसे हिंदी के राष्ट्र भाषा होने के सम्बन्ध में एक बहुत ही विद्वतापूर्ण वार्ता सुनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ था !और यह वार्ता उन्होंने पहले से कोई तयारी किये बिना प्रस्तुत की थी ! बे उसी समय कांग्रेस पंडाल से लौटे ही थे !हिंदी पर उनकी गंभीर वार्ता सुनना सचमुच एक बहुत ही आनंददायक अनुभव  था !अपनी वार्ता में उन्होंने देशी भाषाओँ के विकास की और ध्यान देने के लिए अंग्रेजों की बड़ी सराहना की थी !यद्दपि अंग्रेज जूरियों केसंबंध में उनका अनुभव बहुत बुरा था !फिर भी उनकी इंग्लैंड यात्रा ने उन्हें ब्रिटिश लोकतंत्र का पक्का हामी बना दिया था !और उन्होंने बहुत ही गंभीरता के साथ यह विचित्र सा सुझाव तक दे दिया कि भारत को चाहिए की वह देश को सिनेमा के सहारे पंजाब के अन्याय से परिचित कराये !गांधीजी ने कहा इस घटना का वर्णन मेँ इसीलिए नही कर रहा हूँ कि इस सम्बन्ध में मै उनसे सहमत हूँ ! बल्कि मेरा उद्देश्य यह दिखाना है की अंग्रेजों के प्रति उनमें घृणा का कोई भाव नहीं था ! लेकिन उनके लिए यह सहन करना असंभव था कि साम्राज्य के भीतर भारत का दर्जा  अन्य देशों से कम हो !बे तत्काल समानता चाहते थे !उनका विश्वास था कि यह समानता उनके देश का जन्मसिद्ध अधिकार है !और भारत कीस्वतंत्रता केलिए लड़ते हुए उन्होंने ब्रिटिश हुकूमत को बख्शा नहीं !इस लड़ाई में उन्होंने ना तो कोई किसी के साथ रियायत की और ना किसी से रियययत की मांग की !गांधीजी नेकहा मुझेयह विश्वास है की भारत के इस पूज्य पुरुष की योग्यता को अंग्रेज लोग भी स्वीकार  करेंगे !
     जहाँ  तक हम भारत बासियों की बात है !भावी पीढ़ियां  उन्हें आधुनिक  भारत केनिर्माता केरूप में याद करेंगी ! बेउन्हें एक ऐसे व्यक्ति के रूप में स्मरण करेंगी जो उनके लिए जिया और उनके लिए मरा !ऐसे व्यक्तिको मृत कहना ईश निंदा के समान है !उनके जीवन का जोस्थायी तत्त्व था ! वह तो हमेशा हमारे साथ रहेगा !आईये अब हम भारत के इस एक मात्र लोकमान्य की बहादुरी ,सादगी तथा अद्भुत कर्मठता औरदेश प्रेम के गुणों को अपने जीवन में उतारें और इस प्रकार उनका एक अमर स्मारक खड़ा करें ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दे !
गाँधी जी ने असयहोग आंदोलन का प्रारम्भ १ अगस्त १९२० में कैसरे हिन्द स्वर्णपदक लौटा कर कियाथा ---------  गांधीजी न १ अगस्त १९२० को वायसरॉय को पत्र लिखकर असह्ययोग आंदोलन का सूत्रपात किया था !
      प्रिय महोदय
                         साउथ अफ्रीका में मेरी मानवीय सेवाओं के लिए आपके पूर्वबर्ती वाइसराय द्वारा दिया  गया कैसरे हिन्द स्वर्ण पदक लौटाते हुए मुझे दुःख होता है !तथापि में इसे लौटा रहा हूँ !साथ ही जुलू युद्ध पदक जो १९०६ में भारतीय स्वयं सेवक सहायता दलकी अधिकारी की हैसियत से दक्छिन अफ्रीका में मेरी युद्ध सेवाओं के लिए प्रदान किया गया था और बोअर युद्ध पदक जो भारतीय डोली बाहक दल के सहायक निरीक्छक की हैसियत से १८९९ में बोअर युद्ध के दौरान मेरी सेवाओं के लिए दिया गया था बो  भी में लौटा रहा हूँ !खिलाफत आंदोलन के सिलसिले में आज से प्रारम्भ असहयोग की योजना पर अमल करने के संद्धर्भ में इन पदकों को बापिस कर रहा हूँ ! इन पदकों को मेने अपने सम्मान की तरह आँका है !परंतु फिर भी जबतक मेरे मुसलमान देश भाई अपनी धार्मिक भावनाओं के प्रिति किये गए अन्याय को झेल रहे हैं में इन पदकों को शांति पूर्वक  धारण नहीं कर सकता !पिछले महीने जो घटनाएं हुई हैं उनसे मेरी यह राय और भी दृढ हो गयी है कि साम्राज्य सरकार ने खिलाफत के मामले में अधर्म ,अनैतिकता और अन्याय से काम किया ! और फिर वह अपनी अनैतिकता की रक्छा के लिए एक के बाद  एकगलत काम करती ही चली गयी !में ऐसी सरकार के प्रति सम्मान और स्नेह नहीं बनाये रख सकता !साम्राज्य सरकार और आपकी सरकार का पंजाब के प्रश्न पर जो रुख रहा है उस से मुझे और भी गहरा असंतोष हुआ है !आप जानते ही हैं कि मुझे कांग्रेस द्वारा नियुक्त एक आयुक्त के रूप में अप्रेल १९१९ के दौरान पंजाब में हुए उपद्दरों    के कारणों की जाँच करने का सौभाग्य मिला था !उसके आधार पर मेरा सोचा समझा मन्तव्य यह बना है कि डायर पंजाब के लेफ्टिनेंट गवर्नर पद के लिए सर्वथा अयोग्य व्यक्तिहैं !और उनकी नीति ही अमृतसर भीड़ को उत्तेजित करने का मुख्य  कारण था !निसंदेह भीड़ द्वारा की गयी ज्यादतियां भी अक्छमय थी !!आगजनी, पांच बेगुनाह अंग्रेजों की हत्या और कुमारी शेरवुड पर कायरता पूर्ण हमला ,सभी बातें बहुत ही निंदनीय  और निष्कारण थी ! ,परंतु जनरल डायर,कर्नल फ्रेंक ,जॉनसन कर्नल ओ ब्रायन .श्री बासवर्थ, स्मिथ ,राय श्री राम सूद ,श्री मालिक खान ,और अन्य अफसरों ने सम्बंधित लोगों को दंड देने के इरादे से जो काम किये थे बे जरुरत से ज्यादा सख्त थे बे इस हद तक अमानवीयता और घोर निर्दयता से भरे हुए थे कि उनकी कोई मिशाल नहीं मिलती है !
         आपने सरकारी अधिकारियों के अपराधों को कोई महत्त्व नहीं दिया ! ,सर माइकेल डायर को सर्वथा दोष मुक्त कर दिया ! ,श्री मांटेग्यू ने जैसा सरकारी आदेश भेजा और सबसे अधिक लज्जा जनक कार्य  तो लार्ड सभा ने किया की उसने भी पंजाब की घटनाओं के बारे में  लज्जा जनक अज्ञान का प्रदर्शन किया और भारतीयों की  भावनाओं की जैसी निर्दयता पूर्ण अवहेलना की उसे देख कर मैं साम्राज्य के भविष्य के बारे में बहुत चिंतित हूँ ! में अब वर्तमान सरकार की ओर से बिलकुल ही विरक्त हो गया हूँ !और अब उसे पहले जैसा निष्ठापूर्ण सहयोग नहीं देसकता !भारत सरकार अपनी प्रजा के हितों की ओर से बिलकुल उदासीन साबित हुई है !मेरी नम्र राय में ऐसी किसी भी सरकार को पश्चाताप करने के लिए आवेदनों ,शिष्टमंडलों और ऐसे ही साधारण तरीके अपनाकर बाध्य नहीं किया जा सकता !
                 यूरोपीय देशों में पंजाब और खिलाफत के प्रति किये गए अपराधों जैसे गंभीर अपराधों को छमा करने का परिणाम जनता द्वारा हिंसा पूर्ण क्रांति होता !वहां की जनता राष्ट्र को अपांग बनाने की मन्शा से किये गए इस प्रकार के अन्यायों का हर कीमत पर मुकाबला करती !परंतु आधा भारत तो इतना अशक्त है कि उसमें हिंसात्मक विरोध करने की शक्ति नहीं है और शेष आधा ऐसा करना नहीं चाहता !अतएव मेने असहयोग का उपाय सुझाया है !इसके अनुसार जो लोग अपने को सरकार से अलग रखने के इक्छुक हैं बे सहयोग से हाथ खींच सकते हैं ! और यदि इस असहयोग को हिंसा से दूर रखकर व्यबस्थित ढंग से चलाया जाय तो सरकार को अपने पैर पीछे हटाने और गलतियां सुधारने को अवश्य ही वाद्य होना पड़ेगा !परंतु मैं जनता को जहाँ तक अपने  साथ लेकर चल सकता हूँ वहां तक असहयोग की नीति का पालन करते हुए भी आपसे यही आशा रखूँगा कि आप फिर न्याय के पथ पर चलने लगेंगे ! अतएव मैं आप से सादर निवेदन करता हूँ कि आप जनता के जाने माने नेताओं का एक सम्मलेन बुलाएं और उनके परामर्श से एक ऐसा रास्ता निकालें जो मुसलमानो को संतोष और दुखी पंजाबियों को राहत दे सके !
                                                                               आपका विश्वस्त
                                                                              मो क गाँधी