करो या मरो--------------- जब अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने अंग्रेजो भारत छोडो का प्रस्ताव पारित कर दिया और इस सबसे महत्त्व पूर्ण आंदोलन का नेतृत्त्व गाँधी जी को सौंप दिया !इस अवसर पर गांधीजी ने अपने भाषण में कहा ---आपने अभी जो प्रस्ताव पास किया है उसके लिए में आपको बधाई देता हूँ ! में आपसे जो कुछ कह रहा हूँ वह स्वतंत्रता का सार है !गुलाम की बेड़ियाँ उसी समय टूट जाती है जब वह अपने आप को स्वतंत्र समझने लगता है !एक छोटा सा मन्त्र में आपको देता हूँ !आप इसे अपने ह्रदय पटल पर अंकित कर लीजिये ---- वह मन्त्र है करो या मरो ! और आप इस मन्त्र का हर स्वांस के साथ जप कीजिये !या तो हम भारत को आजाद करेंगे या आजादी की कोशिश में प्राण दे देंगे !हम अपनी आँखों से अपने देश को सदा गुलाम और परतंत्र बना रहना नहीं देखेंगे ! प्रत्येक सच्चा कांग्रेसी चाहे वह स्त्री हो या पुरुष इस दृढ निश्चय के साथ संघर्ष में शामिल होगा कि वह देश को बन्धन और दासता में बने रहने को देखने के लिए जिन्दा नहीं रहेगा ऐसी आपकी प्रतिज्ञा होनी चाहिए ! अगर सरकार मुझ को गिरफ्तार नहीं करेगी तो में आपको जेल भरने का कष्ट नहीं दूंगा ! ईश्वर को और अपने अंतःकरण को साक्छी रखकर यह प्रण कीजिये कि जब तक आजादी नहीं मिलेगी तब तक हम दम नहीं लेंगे ओरजादी के लिए अपनी जान देने के लिए भी हम तैयार रहेंगे ! जो जान देगा उसे जीवन मिलेगा और जो जान बचाएगा वह जीवन से वंचित हो जाएगा ! स्वन्त्रता कभी कायर और डरपोक को नहीं मिलाती है !
प्रस्ताव पारित होजाने का मतलब आंदोलन आरम्भ होना नहीं था ! गांधीजी ने कहा वास्तविक संघर्ष तो इस छन शुरू नहीं हो रहा है !आपने सारे अधिकार मुझे सौंप दिये हैं अब में वाइस राय से भेंट करने जॉऊँगा और उनसे कांग्रेस की मांग स्वीकार करने के लिए कहूंगा ! इस काम में दो तीन सप्ताह लग सकते हैं ! किन्तु अंग्रेजों का इरादा गांधीजी को जरा भी समय देने का नहीं था ! ९ अगस्त को प्रातः पांच बजे उन्हें तथा बम्बई में उपस्थित सभी शीर्षास्थ कांग्रेसी नेताओं को गिरफ्तार कर लियागया और गिरफ्तारकरके उनकी नजर बंदीके लिए पहले से ही तय स्थानों को ले जाया गया !उसी दिन देश भर में इसी तरह की गिरफ्तारियां की गयीं ! और तब आरम्भ हुआ आतंक का वह दौर जो देश के अबतक के इतिहास में अभूत पूर्व था ! इसके उत्तर में देश भर के विद्यार्थी ,कारखाना मजदूर ,किसान और बुद्धिजीबी उठ खड़े हुए ! यत्र तत्र कुछ हिंसक घटनाएं भी हुई संपत्ति का विनाश भीहुआ ! सरकारी प्रचार तंत्र ने इस सबका दोष गांधीजी के माथेमढ़ा ! इस दोषा रोपण का प्रतिबाद करते हुए गांधीजी ने कहा कि यदि सरकार ने महामहिम वाइस राय के साथ मेरे संकल्प पत्र और उसके परिणाम की प्रतीक्छा की होती तो देश पर कोई मुसीबत ना आयी होती ----- लगता है बड़ेपैमाने पर कांग्रेसी नेताओं की गिरफ्तारी से लोग गुस्से से इतने पागल हो गए हैं कि उन्होंने आत्मसंयम खो दिया है ! मेरा ख्याल है कि जो तबाही हुई है उसके लिए सरकार जिम्मेदार है न की कांग्रेस ! सरकार ने इस पत्र को जान बुझ कर दबा दिया था !इसी जेल की अविधि में आगा खां पैलेस में गांधीजी के साथ नजर बंद उनकी पत्नी कस्तूरबा गांधी और सचिव महादेव देसाई की म्रत्यु भी हो गयी
प्रस्ताव पारित होजाने का मतलब आंदोलन आरम्भ होना नहीं था ! गांधीजी ने कहा वास्तविक संघर्ष तो इस छन शुरू नहीं हो रहा है !आपने सारे अधिकार मुझे सौंप दिये हैं अब में वाइस राय से भेंट करने जॉऊँगा और उनसे कांग्रेस की मांग स्वीकार करने के लिए कहूंगा ! इस काम में दो तीन सप्ताह लग सकते हैं ! किन्तु अंग्रेजों का इरादा गांधीजी को जरा भी समय देने का नहीं था ! ९ अगस्त को प्रातः पांच बजे उन्हें तथा बम्बई में उपस्थित सभी शीर्षास्थ कांग्रेसी नेताओं को गिरफ्तार कर लियागया और गिरफ्तारकरके उनकी नजर बंदीके लिए पहले से ही तय स्थानों को ले जाया गया !उसी दिन देश भर में इसी तरह की गिरफ्तारियां की गयीं ! और तब आरम्भ हुआ आतंक का वह दौर जो देश के अबतक के इतिहास में अभूत पूर्व था ! इसके उत्तर में देश भर के विद्यार्थी ,कारखाना मजदूर ,किसान और बुद्धिजीबी उठ खड़े हुए ! यत्र तत्र कुछ हिंसक घटनाएं भी हुई संपत्ति का विनाश भीहुआ ! सरकारी प्रचार तंत्र ने इस सबका दोष गांधीजी के माथेमढ़ा ! इस दोषा रोपण का प्रतिबाद करते हुए गांधीजी ने कहा कि यदि सरकार ने महामहिम वाइस राय के साथ मेरे संकल्प पत्र और उसके परिणाम की प्रतीक्छा की होती तो देश पर कोई मुसीबत ना आयी होती ----- लगता है बड़ेपैमाने पर कांग्रेसी नेताओं की गिरफ्तारी से लोग गुस्से से इतने पागल हो गए हैं कि उन्होंने आत्मसंयम खो दिया है ! मेरा ख्याल है कि जो तबाही हुई है उसके लिए सरकार जिम्मेदार है न की कांग्रेस ! सरकार ने इस पत्र को जान बुझ कर दबा दिया था !इसी जेल की अविधि में आगा खां पैलेस में गांधीजी के साथ नजर बंद उनकी पत्नी कस्तूरबा गांधी और सचिव महादेव देसाई की म्रत्यु भी हो गयी
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