Tuesday, 9 August 2016

हिन्दू मुस्लिम एकता --------- साम्प्रदायिक सद्भाव की यह समस्या अनसुलझी आज भी है !यह समाचार प्रकाशित होते रहते हैं कि फलां स्कूल में राष्ट्रगान एक सम्प्रदाय विशेष के बच्चे नहीं गाएंगे  क्योंकि यह उनके मजहब के खिलाफ है  भारत माता की जय नहीं बोलेंगे ,वन्दे मातरम गीत नहीं गाएंगे  आदि ! गाँधी जी ने अपना संपूर्ण जीवन हिन्दू मुस्लिम एकता के लिए समर्पित कर दिया था ! किंतुबे इसमें सफल नहीं हो सके और इसी कारण  उनकी हत्या भी कर दी गयी देश का विभाजन भी हो गया ! फिर से नए बिभाजन  की बातें सुनने में आती है 1 देश टूट जायेगा ये बातें भी नेता लोग करते सुनायी देते है ! एक लेख गांधीजी ने ८-७-१९२० में यंग इंडिया में तीन राष्ट्रीय नारों के शीर्षक से प्रकाशित किया था ! जिस समस्या के समाधान के लिए यह लेख लिखा गया था वह आज और अधिक विकराल रूप में मौजूद है ----- उन्होंने लिखा था ---- मद्रास (चेन्नई )दौरे के सिलसिले में बेजवाड़ा में मेने राष्ट्रीय नारों के समबनध में कुछ बातें कही थी और लोगों को सुझाव दिया था कि व्यक्ति विशेष की अपेक्छा आदर्शों के जय के नारे लगाना ज्यादा अच्छा होगा ! मेने श्रोताओं से महात्मा गांधीकी जय और मुहम्मद अली शौकत अली की जय के बदले हिन्दू मुसलमानों की जय का नारा लगाने का सुझाव भी दिया था ! मेरे बाद शौकत अली भाई भी बोले थे ! उन्होंने तो इस सम्बन्ध में नियम ही निश्चित कर दिया है ! उन्होंने कहा कि हिन्दू मुस्लिम एकता के बाबजूद मैं देखता हूँ कि अगर हिन्दू वन्दे मातरम् का नारा लगाते हैं तो मुसलमान अल्लाह हू अकबर की आवाज बुलंद करते हैं ! भाई अली ने ठीक ही कहा है कि यह चीज कानों को बहुत कड़वी लगती है और लगता है कि लोग अब भी एकमन से काम नहीं कर रहे हैं ! इसीलिए केवल तीन ही नारे स्वीकार किये जाने चाहिए  !एक तो अल्लाहो अकबर का नारा हिन्दू और मुसलमान दोनों लगाएं इस से अपना यह विश्वास प्रगट करें कि ईश्वर ही महान हैंऔर कोई नहीं ! और दूसरा नारा होना चाहिए वन्दे मातरम् या भारत माता की जय और तीसरा नारा होना चाहिए हिन्दू मुस्लिम की जय ,जिसके बिना भारत को जय नहीं मिल सकती है ! बेसक में चाहता हूँ अखबारों और सामाजिक कार्य करने वाले लोग मौलाना साहब का सुझाव अपनाएँ और जनता को केवल ये तीन नारों को लगाने की प्रेरणा दें इन तीनों में बहुत अर्थ भरा हुआ है ! पहला नारा एक प्रार्थना है ! वन्दे मातरम् के साथ जिन अद्भुत बातों की स्मृति जुडी हुई है वह तो है ही इसके अलावा यह एक राष्ट्रीय आकांछा है अर्थात भारत पूरी उचाई तक उठे की अभिव्यक्ति है ! में भारत माता की अपेक्छा वन्दे मातरम् को ज्यादा पसंद करूँगा ! इन नारों के सम्बन्ध में कोई विवाद नहीं होना चाहिए ! गांधीजी की हत्या हो गयी !मौलाना शौकत अली और मुहमद अली भी अल्लाह को प्यारे होगये !विवाद अभी भी मौजद है !भारत भारत ना रहने पाए !इसकी चेस्टा पूरी ताकत से आज भी चल रही है ! 

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