दो प्रकार के पक्के मूर्ख ------- एक प्रकार के मूर्ख बे हैं जो सनातन धर्म को ना समझ कर उसकी निंदा करते हैं !दूसरे प्रकार के मूर्ख बे हैं, जो सनातनी गृहस्थ होते हुए भी सनातन धर्म के सनातन तत्त्वों का अनुशीलन नहीं करते हैं !औरजिस सनातन धर्म में अगड़ा ,पिछड़ा दलित आदि शव्द ही नहीं है !और जो धर्म सर्वे भवन्तु सुखिनः की उद्घोषणा करता है !उसमें छुआ छूत आदि का अधार्मिक प्रवेश कराकर लोगों को सार्वजानिक स्मशान पर शव दाह करने से रोकते हैं !मंदिरों में पूजा नहीं करने देते ,सार्वजानिक कुओं अदि से पानी नहीं भरने देते है !इन सनातन धर्म के नासक लोगोंके कारण ही धर्म परिवर्तन हुआ !और इन्ही के कारण बहुत से ऐसे मूर्खों का जन्म हुआ जो सुबह से शाम तक !सिर्फ सनातन धर्म को गलियां देने का ही काम करते रहते हैं !सर्वाधिक पापी ,अधम ,पाखंडी बो लोग हैं, जिन्होंने सनातन धर्म के तत्त्व ज्ञान की चर्चा करने का ब्रत ले लिया है ! और तदनुसार वेश भी धारण कर लिया है !किन्तु सनातन धर्म में वर्णित तत्त्व ज्ञान को आचरण में नहीं उतारते हैं !
आजकल योग कोबड़ी प्रधानता प्रदान की जा रही है !महर्षि पातंजलि के नाम पर एक बहुत बड़ा व्योपारिक प्रतिष्ठान भी खड़ा हो गया !और विश्व योग दिवसभी मनाया जाने लगा है !पवित्र भूमि भारत में जन्मे और आचरित इस योग की सिद्धि और आचरण के विषय में क्या कहा गया है ? इसका कथन अनेक आख्यानों में महाभारत में किया गया है !ऐसे ही एक आख्यान को में यहाँ प्रस्तुत कर रहा हूँ !
१-----छुरे की तीखी धार पर कोई सुख पूर्वक खड़ा रह सकता है ! किन्तु जिसका चित्त शुद्ध नहीं है ऐसे मनुष्यों का योग धारणाओं में स्थिर रहना अत्यंत कठिन है !
२------ जैसे समुद्र में बिना नाविक की नाव मनुष्यों को पार नहीं लगा सकती ,उसी प्रकार यदि योग की धारणाएं सिद्ध न हुई तो बे शुभ गति की प्राप्ति नहीं करा सकती हैं !
३-------- जो विधि पूर्वक योग की धारणाओं में स्थिर रहता है ,वह जन्म ,म्रत्यु ,दुःख और सुख के बंधनों से छुटकारा पा जाता है !
४------योग का मार्ग दुर्गम है कोई बिरला ही इस मार्ग को कुशलता पूर्वक तै कर सकता है !
५-------- काम ,क्रोध ,सर्दी ,गर्मी ,वर्षा ,भय ,शोक ,स्वांश ,सामान्य मनुष्यों के प्रिय लगने वाले विषय भोग, दुर्जय असंतोष घोर तृष्णा , स्पर्श ,निद्रा तथा दुर्जय आलस्य को जीत कर वीत राग महान एवं उत्तम बुद्धि से युक्त महात्मा योगी स्वाध्याय तथा ध्यान का संपादन करके बुद्धि के द्वारा सूक्छम आत्मा का साक्छात्कार लेते है !
ये योगियों के संक्छेप में कुछ थोड़े से लक्छण यहाँ प्रस्तुत किये हैं !जिस प्रकार भौतिक ज्ञान का अध्यन विधिबत करने के लिए तदनुसार शिछण ग्रहण करना पड़ता है !उसी प्रकार समस्त धर्मों के मूल सनातन धर्म का शिछण भी बीत राग तपोनिष्ठ महात्माओं से प्राप्त किया जा सकता है !खोजने पर ऐसे तत्त्वनिष्ठ तपस्वी महात्मा मिल जाएंगे !अगर भोग गुरु को योग गुरु समझ कर योग सीखोगे तो बहि रंग योग को ही योग समझ कर भटक जाओगे !और गीदड़ को शेर समझ लोगे !
आजकल योग कोबड़ी प्रधानता प्रदान की जा रही है !महर्षि पातंजलि के नाम पर एक बहुत बड़ा व्योपारिक प्रतिष्ठान भी खड़ा हो गया !और विश्व योग दिवसभी मनाया जाने लगा है !पवित्र भूमि भारत में जन्मे और आचरित इस योग की सिद्धि और आचरण के विषय में क्या कहा गया है ? इसका कथन अनेक आख्यानों में महाभारत में किया गया है !ऐसे ही एक आख्यान को में यहाँ प्रस्तुत कर रहा हूँ !
१-----छुरे की तीखी धार पर कोई सुख पूर्वक खड़ा रह सकता है ! किन्तु जिसका चित्त शुद्ध नहीं है ऐसे मनुष्यों का योग धारणाओं में स्थिर रहना अत्यंत कठिन है !
२------ जैसे समुद्र में बिना नाविक की नाव मनुष्यों को पार नहीं लगा सकती ,उसी प्रकार यदि योग की धारणाएं सिद्ध न हुई तो बे शुभ गति की प्राप्ति नहीं करा सकती हैं !
३-------- जो विधि पूर्वक योग की धारणाओं में स्थिर रहता है ,वह जन्म ,म्रत्यु ,दुःख और सुख के बंधनों से छुटकारा पा जाता है !
४------योग का मार्ग दुर्गम है कोई बिरला ही इस मार्ग को कुशलता पूर्वक तै कर सकता है !
५-------- काम ,क्रोध ,सर्दी ,गर्मी ,वर्षा ,भय ,शोक ,स्वांश ,सामान्य मनुष्यों के प्रिय लगने वाले विषय भोग, दुर्जय असंतोष घोर तृष्णा , स्पर्श ,निद्रा तथा दुर्जय आलस्य को जीत कर वीत राग महान एवं उत्तम बुद्धि से युक्त महात्मा योगी स्वाध्याय तथा ध्यान का संपादन करके बुद्धि के द्वारा सूक्छम आत्मा का साक्छात्कार लेते है !
ये योगियों के संक्छेप में कुछ थोड़े से लक्छण यहाँ प्रस्तुत किये हैं !जिस प्रकार भौतिक ज्ञान का अध्यन विधिबत करने के लिए तदनुसार शिछण ग्रहण करना पड़ता है !उसी प्रकार समस्त धर्मों के मूल सनातन धर्म का शिछण भी बीत राग तपोनिष्ठ महात्माओं से प्राप्त किया जा सकता है !खोजने पर ऐसे तत्त्वनिष्ठ तपस्वी महात्मा मिल जाएंगे !अगर भोग गुरु को योग गुरु समझ कर योग सीखोगे तो बहि रंग योग को ही योग समझ कर भटक जाओगे !और गीदड़ को शेर समझ लोगे !
No comments:
Post a Comment