Thursday, 18 August 2016

  एक बहुत निरथर्क विवाद भारत के राजनीतिक नेताओं और उनके अंध भक्तों द्वारा चर्चा में छाया रहता है !कि  देश की आजादी अहिंसा से आयी या हिंसा से  आयी ? यह राजनेताओं  की वर्तमान समस्यों से पलायन करने और सत्ता को अपने दल या व्यक्तिगत स्वार्थों के लिए इस्तेमाल करने का लोकतंत्र विनाशक कदम है ! आजादी किसके लिए आयी ? उस दिशा में देश कितना बढ़ा है ?  आजादी अंतिम व्यक्ति के दरवाजे  तक पहुँची  या नहीं ? क्यों नहीं पहुँची ? !और प्रगति करते करते हम वहां तक पहुंचेंगे और कैसे पहुंचेंगे ? कि देश में अंतिम और प्रथम व्याक्ति नाम की श्रेणियां भी समाप्त हो जाए ! इस पर विचार होना चाहिए !जो बाधाएं आजाद भारत में निर्मित हो गेयें हैं !उनको कैसे समाप्त किया जाय , देश में सभी  देश वासियों को  जीवन धारण करने के लिए आवश्यक सामग्री पर्याप्त मात्रा में  प्राप्त हो ! इस प्रयत्न की और लोगों को लगाना चाहिए !राजनेता ऐसा प्रयत्न शायद ही करें ? क्योंकि राजनीति में सत्ता प्राप्त करने के लिए उनकी हालात उस वासना ग्रस्त व्यक्ति की तरह होती है !जिसका सारा प्रयत्न सत्ता सुख का होता है !किन्तु बातें लोक कल्याण  की होती है !ये लोग पब्लिक की   समस्यायों को उलझाते ज्यादा और सुलझाते कम हैं !इन्ही लोगों से सत्ता सुख के कुछ टुकड़े प्राप्त लोग इनके समर्थन में भौंकते रहते हैं !लोकतंत्र की जान बे स्वतंत्र विचारक होते हैं !जो अपनी वैचारिक स्वतंत्रता की कीमत सभी यंत्रणाओं ,और जीवन को दाव पर लगाके भी चुकाते हैं !इस प्रकार से दो प्रकार की शक्तिया स्वस्थ लोकतंत्र की स्थापना में बाधा बन कर  आजादी के यथार्थ उद्देश्य को सिद्ध नहीं होने दे रहें  हैं !ऐसे गपोड़िये देश में बहुत है जो भगत सिंह ,राजदेव ,आदि क्रांति कारियों की बात करेंगे !किन्तु जब साहस और शौर्य प्रदर्शन  का अवसर आयेग ,तो खोजने पर भी नहीं मिलेंगे !स्वतंत्रता संग्राम में जिन लोगों त्याग किया उनमें से बहुसंख्यक स्वतंत्रता के लिए जीवन समर्पित करने वाले    आज   भी स्वतंत्रता संग्राम   सेनानी  के रूप  में लुप्त हैं !उनमें से कुछ सही     लोगों के नाम उजागर  हैं ,बहुत से फर्जी   हैं !मैं निश्चित   तौर  पर नहीं कह  सकता  कि कितने  असली  और  कितने Yeseफर्जी  है ? किन्तु  आपात  काल  में बहुत से साथी  जो देश भक्ति  के गीत  गाते  थे  ,शस्त्र  क्रांति की बात करते थे  !बे ऐसे नदारद  हुए  की उनका  पता  भी नहीं चला  !जैसे  ही आपात  काल  समाप्त हुआ   बे फिर  देश भक्ति  का चोला  ओढ़कर  भगत सिंह और सुभाष  बोस आदि   के गीत  गाने  लगे  !और उनमे  से कुछ जेल  ही नहीं  गए  बे भी लोकतंत्र सेनानी  घोसित  होगये  !इसीलिए   लोकतंत्र को वास्तविक  बनांने  का काम  और देश के लिए सेवा भाव से समर्पित और राजनैतिक सत्ता ,महत्ता या पद प्रतिस्ठा की दौड़ से बाहर रहने वाले  अपने आचरणों से सद्भाव का सन्देश देने वाले   सिर्फ  अहिंसक   गाँधी  वादी  ही कर सकते  हैं !क्योंकि बे आज  भी समर्पित भाव  से अपनी शक्ति  और सामर्थ्य  के अनुसार  अहिन्सक   समाज  निर्माण  के कार्य  में संलग्न  हैं !ऐसे और भी बहुत से देश के लिए समर्पित भाव से कार्य करने वाले असंख्य देश भक्त स्त्री पुरुष हैं !जिनका नाम समाचार  पत्रों की सुर्ख़ियों मैं नहीं है !विनोबा जी    उनको jहरिसेवक कहते थे ! ऐसे हरि सेवकों का विशाल समुदाय गांधीजी ने और विनोबा जी ने  देश मैं खड़ा किया था !जिनका  विस्तार देश के बाहर भी हो गया हैं !उन्हें पहचानकर उनसे दिशा निर्देश प्राप्त कर सर्व समावेशी भारतीय समाज की रचना की आवश्यकता है !

No comments:

Post a Comment