Sunday, 7 August 2016

१९४२ भारत के स्वतंत्रता संग्राम का सबसे महत्त्व पूर्ण दौर है ! संगठन और मनोबल से सम्बंधित जैसी विकत समस्यायों का सामना राष्ट्रीय आंदोलन को इस अविधि में करना पड़ा बेसी समस्यायों से अपने लम्बे इतिहास में इसका वास्ता पहले कभी नहीं पड़ा था ! ८ अगस्त १९४२ को अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने भारत को पूर्ण स्वतंत्रता देने का प्रस्ताव पारित किया था ! भारत में ब्रिटिश शासन की अबिलम्ब समाप्ति भारत और संयुक्त राष्ट्र संघ के ध्येय की सफलता के लिए अत्यंत आवश्यक है ! ब्रिटिश शासन के जारी रहते भारत की अधोगति हो रही है 1 वह दुर्बल हो रहा है और अपनी रक्छा करने तथा विश्व स्वतंत्रता में योग देने की उसकी छमता उत्तरोत्तर कम होती जाए रही है !कांग्रेस कमेटी को यह देख कर बड़ी निराशा हुई है  !क़ि रुसी और चीनी मोर्चों पर स्थिति बिगड़ रही है ! रुसी और चीनी लोग अपनी स्वतंत्रता के रक्छा के लिए    जो वीरता दिखा रहे हैं कमेटी उसकी भूरि  भूरि प्रशंसा करती है ! आज के संकट के निवारण के लिए यह आवश्यक मांग है की क़ि भारत स्वाधीन हो और ब्रिटिश शासन समाप्त हो! भारत की स्वाधीनता की घोषणा के बाद एक अस्थायी सरकार बन जायेगी और स्वतंत्र भारत संयुक्त राष्ट्र का सहयोगी बन जाएगा ! तथा स्वन्त्रता संघर्ष के संयुक्त अभियान के कष्टों और दुखों में उसका साक्छी होगा ! अस्थायी सरकार केवल देश के मुख्य दलों और समुदायों के सहयोग से ही बन सकती है ! इस प्रकार वह भारत की  जनता के सभी महत्त्व पूर्ण बर्गों का प्रितिनिधिट्टव करने वाली एक मिली जुली सरकार होगी  !उसका मुख्य कार्य भारत की प्रतिरक्छा ,मित्र राष्ट्रों के साथ मिलकर सभी उपलब्ध सैनिकों एवं अहिंसक शक्तियों द्वारा आक्रमण का प्रति रोध तथा खेतों और कारखानों मैं क़ाम  करने वाले लोगों की खुश हाली और उन्नति को प्रोत्साहन देना होना चाहिए ! क्योंकि समस्त सत्ता और अधिकार  तो बुनियादी तौर पर आखिर उन्ही को होना चाहिए !अस्थायी  सरकार एक ऐसे  संविधान सभा की योजना  बनाएगी ,जो भारत के शासन के लिए एक ऐसा संविधान तैयार करेगी  जो जनता के सभी बर्गों को स्वीकार हो ! कांग्रेस की राय में यह संविधान संघीय होना चाहिए जिसमें संघ की इकाईयों को अधिकतम स्वायत्तता हो और उनको अधिकार प्राप्त हों  ! परंतु कमिटी यह महसूस करती है क़ि राष्ट्र को उस सामराज्य  बादी और निरंकुश सरकार के विरुद्ध ,जो भारत पर आधिपात्य जमाये हुए है और उसे अपने तथा मानवता के हित में कार्य करने से रोक रही है ,अपने संकल्प को पूरा करने के  प्रयत्नों से रोकना अब औरउचित नहीं है ! कमेटी इसीलिए स्वतंत्रता और स्वाधीनता के भारत के अनन्य अधिकार की स्थापना के लिए यथा सम्भव बड़े से बड़े पैमाने पर एक अहिंसक जन  आंदोलन छेदने की मंजूरी देने का निश्चय करती है ! ताकि देश पिछले २२ सालों के शांतिपूर्ण संघर्ष में संचित अपनी सम्पूर्ण अहिंसात्मक शक्ति को काम में ला सके ! इस तरह के संघर्ष का गाँधी जी के नेतृत्त्व में में चलना अनिवार्य है ! और कमेटी उनसे जो कदम उठाये जाने हैं उनमें राष्ट्र का नेत्रतत्त्व और पथ प्रदर्शन करने की प्रार्थना करती है  !





1 कमिटी भारत के लोगों से अपील करती है कि बे आने वाले खतरों और कठिनाईयों का साहस और धैर्य से मुकाबला करें और गांधीजी के नेतृत्वमें एक जुट हों ! और भारतीय स्वाधीनता संग्राम के अनुशासित सैनिकों की हैसियत से उनके आदेशों का पालन करें ! उन्हें यह याद रखना चाहिए कि अहिंसा इस आंदोलन का आधार है ! ऐसा मौका आ सकता है कि आदेश जारी करना या आदेशों का हमारे लोगों तक पहुँचाना असंभव हो जाय और कोई भी कांग्रेस कमेटी काम न कर सके ! ऐसी स्थिति होने पर इस आंदोलन में भाग लेने वाले प्रत्येक नर नारी को अपने लिए स्वयं कार्य करना होगा! स्वन्त्रता के इक्छुक और उसके लिए प्रयत्नशील हर भारतीय को अपना मार्गदर्शक स्वयं होना चाहिए ! और उस कठिन मार्ग पर जो अंत में हमें भारत की स्वाधीनता और मुक्ति तक ले जाएगा निरंतर बिना रुके आगे बढ़ते रहना चाहिए ! अंत में  कांग्रेस कमिटी स्वतंत्र  भारत के  भावी शासन के सम्बन्ध में अपना दृष्टिकोण व्यक्त करने के बाद सभी सम्बंधित लोगों के सामने यह चीज बिलकुल स्पष्ट कर देना चाहती है क़ि जन संघर्ष छेड़ने में उसका  इरादा  कांग्रेस के लिए सत्ताप्राप्त करना कतई नहीं है ! सत्ता जब प्राप्त होगी तो वह भारत की समस्त जनता की होगी !

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