५(६)परमपिता परमात्मा ने मनुष्य योनि में किये गए कर्मो का परिणाम कई
प्रकार से निर्धारित किया है उसमे मृत्यु के बाद स्वर्ग नरक की प्राप्ति
तथा ८४ लाख योनिओं की प्राप्ति है इस प्रकार आत्मा शुद्धा होने के लिए इन
प्रिकियों से गुजरता रहता है मनुष्य योनि कर्म योनि है तथा यह संसार कर्म
क्षेत्र है इसके अतिरिक्त देओतोन की योनि से लेकर पशु पक्षी ब्रिक्ष
सभी योनिया भोग योनिआ है मनुष्य अपने कर्म शिंघ जैसे कर सकता है किन्तु
सिंह के समस्त कर्म मनुष्य जैसे नहीं हो सकते है ८४ळख जन्मो की
यात्रा में कुछ आत्माएं इतनी परिशुद्ध हो जाती हैं की उन्हें कर्म बंधन से
मुक्त होने के लिए निष्काम कर्म नहीं करना पड़ते है बे उनसे स्वाभाविक रूप
से होते है और बे जन्म से ही कर्म बंधन से मुक्त होते है बुद्धा महाबीर
शंकराचार्य विनोबा भावे आदि ऐसे ही कर्म बंधन मुक्त सन्यासी थे किन्तु जो
सन्यास ग्रहण पर्याप्त आत्म ज्ञान के अभाव में करना चाहते है उनको सन्यास
की प्राप्ति बिना आत्म निष्ठ कर्मो के बिना होना कठिन है इसलिए उनके लिए
यह आवश्यक है की पूर्ण सन्यास की प्राप्ति के लये पहले परमात्मा को अपने
कर्मो को अर्पित करने की साधना करें
Monday, 30 November 2015
लालू प्रसाद यादव अर्द्ध शिक्छित अपने पुत्रों के स्थान पर इस विदुषी पुत्री के हाथ में सत्ता की बागडोर सौंपते तो !उनके परिवार विकास के ध्येय के साथ लोक हित भी सध जाता !डॉ मीसा भारती ने बहुत ही सार्थक पहल की है !लालू प्रसाद और रामविलास पासवान आदि तो संपूर्ण क्रांति को भूल गए !किन्तु डॉ मीसा ने गांधीजी के पूर्ण नशाबंदी के आग्रह को जीवित कर दिया !गांधीजी के रचनात्मक कार्यक्रमों में सर्वधर्म सम्भाव और मद्यनिषेध ये दो कार्यक्रम भी शामिल थे !अगर कभी लालू प्रसाद के समर्थन से केंद्र में उनकी मनमाफिक सरकार बनी तो डॉ मीसा भारती अवश्य केंद्र में मंत्री बनेगी !और संपूर्ण मद्यनिषेधका अपना संकल्प सिद्ध करेंगी !
Saturday, 28 November 2015
धर्म से बहुत से लाभ भी हैं ! और नुक्सान भी है !जब धर्म कटटरता और चरमपंथ का रूप ग्रहण कर लेता है तब वह धर्म नहीं रहजाता है !अधर्म जो जाता है !धर्म से दो धाराएं निकलती हैं !एक अधर्म की और दूसरी अध्यात्म की !भारत में जिस वैदिक धर्म का जन्म हुआ उसने धर्म से अध्यात्म की और गति करने को ही स्वीकार किया !यह एक ऐसा धर्म है जिसमे चरम पंथ को कोई स्थान नहीं है !वैदिक धर्म के आदि ग्रन्थ वेदों में विश्व मानव शव्द आया है !तथा यह कहा गया है !आनो भद्रा क्रतवो यन्तु विश्वतः (सारे विश्व से अच्छे विचार आएं )ऋषि कहते हैं !सर्वे भवन्तु सुखिनः ,!सर्वे सन्तु निरामह !माँ कश्चिद् दुःख भाव भवेद !(सारे प्राणी सुखी और रोग मुक्त हौं किसी को भी दुःख की प्राप्ति न हो ) गीता में कहा गया है अध्यात्म निष्ठ व्यक्ति सभी प्राणियों को अपने में देखता है और अपने ही तरह सबके दुःख निवारण का प्रयत्न करता है और सबको सुख प्रदान करता है !इस दृष्टि को समझ कर धारण करने वाले व्यक्ति किसी भी धर्म के मान ने वाले हौं !बे आध्यात्मिक ही होते हैं !और समाज ऐसे ही व्यक्तियों से प्रेरणा प्राप्तकर धार्मिक संकीर्णता से मुक्त होता है !शवाना आजमी और उनके पति जावेद अख्तर इसी कोटि के आध्यात्मिक पति पत्नी है ! उनकी पहचान भले ही मुसलिम के रूप में हो !किन्तु बे सभी प्रकार की धर्मगत और जातिगत संकीर्णताओं से पूरी तरह मुक्त है !वैदिक धर्म का प्रत्यक्छ आचरण उनके शव्दों में और कार्यव्योहार में स्पष्ट दिखाई देता है
अरुन्धिति राय ऐसे लोग भारत को भारत के रूप में नहीं स्वीकार करते हैं !भारत की आचरण पद्धति से एक संस्कृति का निर्माण हुआ है !यह संस्कृति समय और परिस्थिति के अनुसार परिवर्तित भी होती रहती है !किन्तु भारतीय धर्म संस्कृति का आधार सत्य अहिंसा करुणा ,प्रेम सर्वधर्म समभाव और सभी पंथों और धर्मों को आदर देने का रहा है !इसी धर्म संस्कृति को सनातन ,आर्य ,या हिन्दू धर्म आदि नामों से सम्बोधित किया जाता है !जब इस संस्कृति के अनुपालन में कोई व्यबधान आता है !तब तब इसमें संशोधन और सुधार के लिए महापुरुष प्रयत्न करते हैं !इसी स्वतंत्र प्रवाह में बौद्ध सिख धर्म आदि का जन्म हुआ और बे यहाँ पल्ल्वित हुए !इसी श्रंखला में देश में बाहर से आये दो धर्म इस्लाम और ईसाई धर्मों का भी प्रवेश हुआ !और एक बहुत बड़ी संख्या देश में ईसाई और मुसलमानो के रूपमे विद्यमान है !धर्म के नाम पर देश का विभाजन भी हो चूका है !ईसाई और मुसलमान सभी हिन्दू धर्म त्यागकर ही ईसाई या मुसलमान हुए हैं !इसी प्रकार बौद्ध और सिख भी हिन्दू ही है !किन्तु हिन्दुओं ने कभी भी किसी धर्म का रूपान्तरकरण नहीं कराया !उनकी संख्या लगातार कम हुई है !किन्तु धर्मांतरण कराने का प्रयत्न कभी नहीं किया !विश्व के अनेक देश जो भूतकाल में सनातन धर्मी थे आज मुसलिम राष्ट्र या बौद्ध धर्म के मान ने वाले हो गए हैं !हिन्दू सिर्फ भारत में ही बचे हैं !किन्तु भारत में भी उनके ग्रन्थ और आचरण पढ़ती को सर्वमान्य स्वीकृति प्रदान नहीं है !अरुंधति के विचार के बहुत से नाममात्र धारी हिन्दू भी देश में हैं ! ये भी हो सकता है की अरुंधती हिन्दू ही ना हौं !हिन्दुओं को दुहरा हमला झेलना पड़ता है !और धर्मपरिवर्तन तो हिन्दुओं का होता ही रहता है !इस नाम मात्र की हिन्दू अरुंधती ने अगर हिन्दू धर्म के अमूल्य ग्रन्थ गीता का अध्यन किया होता तो इसको इस बात का ज्ञान हो जाता की ब्राह्मणवाद क्या होता है !भगवान श्री कृष्ण ने १८(४२)में ब्राह्मण के लक्छण बताते हुए कहा है ! मन को अवांछनीय भोग कामनाओं से मुक्त करना ,इन्द्रियों को बस में करना ,सभी प्राणियों के जीवन की रक्छा के लिए अपने निजी स्वार्थों के त्याग की तपस्या करना ,और कष्ट सहना ,अंदर बाहर से शुद्ध पवित्र रहना ,दूसरों के अपराधों को छमा करना ,शरीर मन आदि को सरल और सहज बनाना वेद गीता महाभारत आदि का स्वाध्याय करना ,और लोकहित के कर्तव्य निष्ठा पूर्वक करना , ईश्वर है इसमें आस्था रखना ये सब के सब ब्राह्मण के स्वाभाविक कर्म है !यदि इन गुणों का विकास हो तो अरुन्धती राय ऐसे वासना के कीड़ों को तो स्वाभाविक परेशानी होगी ही !
पंचायती राज्य व्यबस्था के द्वारा लोकतंत्र में ग्रामीणो की सहभागिता
सुनिश्चित की गयी है किन्तु जिस रोग से संसद से लेकर विधान सभाओं और जिला
पंचायते पीड़ित है वह रोग ग्रामसभाओं में भी लगा हुआ है विकास के लिए जितना
पैसा आता है वह प्रधान की जेब में चला जाता है इसमें उसके सहकारी सहयोगी
सरकारी अधिकारी होते है प्रधान के चुनाओ में लाखों रुपये खर्च किये जाते है
और बाद में लाखो कमाए जाते है इसको रोकने का एक उपाय यह है ग्रामसभा के
छेत्र में रहने वाले युवा विरोध में खड़े हो तथा चुनाओ में भी
ईमानदार परित्याशी चुने यह काम देश के लिए दूसरी आजादी दिलाने का है इसमें
लोगों तथा युवाओं को ग्राम के समग्र विकास को ध्यान में रख कर आंदोलन अपने
ही लोगो के विरुद्ध करना होगा आज मेने समाचार पत्रो में तीसरी शक्ति
शीर्षक से समाचार पढ़ा किन्तु इस मूल समस्या के समाधान का कोई उपाय नहीं
बताया गया है हमलोगो के पास भासण देने के लिए बहुत समय है किन्तु भृष्ट
आचरण की कैद में बंद लोकहित की विकाश शील योजनाओ को मुक्त कराने की कोई
योजना नहीं है
ओम तत सत इति श्री मद्भगवत गीतासु उपनिषद सु ब्रह्म बिदयायाम् योगशास्त्रे
श्री कृष्णा अर्जुन सम्बादे ज्ञान कर्म सन्यास योगो नाम चतुर्थो अध्याय यह
पुष्पिका महाभारत में नहीं दी गयी है प्रित्येक अध्याय के अंत में इस
पुष्पिका का जोड़ा जाना कब शुरू हुआ इस सम्बन्ध में स्पष्ट जानकारी नहीं है
किन्तु यह पुष्पिका गीता का ध्येय गीता गायकऔर लेखक का उद्देश्य दर्शाती है
ओम परमात्मा का पवित्र नाम है और इसका उच्चारण करने से रचना के दोष नष्ट
हो जाते है इसलिए ओम शब्द से महर्षि व्यास कहते है की भगवान
श्री कृष्णा के द्वारा दिया गया गीता को जो उपदेश कुरुक्छेत्र के मैदान
में अर्जुन को दिया तथा जिसको मेने दिव्य चक्छुओं से देख कर लिपि बद्ध किया
यदि उामे कोई अंग वैगुण्य रह गया हो तो परमात्मा के पवित्र नाम ओम के
उच्चारण से दूर हो जाय यह गीता ज्ञान परमात्मा को अर्पित है इसका फल
अविनाशी है यही इस गीता शास्त्र का उद्देश्य है यह गीता उपनिषद है तथा
इसमें ब्रह्मविद्या की प्राप्ति कर्मयोग के माध्यम से बताई गयी अर्थात
ब्रह्मविद्या के अंतर्गत यह कर्म योग शास्त्र है तथा यह भगवान श्री कृष्णा
और भक्त अर्जुन का पवित्र सम्बाद है तथा इस अध्याय में ज्ञान कर्म सन्यास
योग प्रस्तुत किया गया है अर्थात कर्म का त्याग किये बिना कर्म सन्यास की
प्राप्ति होती है यह ज्ञान बताया गया है
४(४०)अज्ञानी श्रद्धारहित और संशय युक्त पुरुष नष्ट हो जाता है ऐसे पुरुष
के लिए ना यह लोक है ना परलोक नासुख ही है यहां जिन शब्दों का प्रयोग हुआ
है उनका ज्ञान प्राप्ति के मार्ग में अनुभव में आने वाली बाधाओं के निबारण
के अर्थ में लिया जाना चाहिए जिस प्रकार भौतिक बस्तुओं के निर्माण प्रयोग
अनुभव आधारित होते है उसी प्रकार ज्ञान प्राप्ति के लिए आवश्यक उपकरण मन
बुद्धि चित्त अहंकार तथा ५ कर्मेन्द्रियन और ५ग्यानेन्द्र्य है इनका प्रयोग
किस प्रकार ज्ञान के अनुभव के लिया किया जाय तथा इस मार्ग
की प्राप्ति के लिए जो शास्त्रीय मार्ग है उसकी सत्यता पर किसी प्रकार का
संशय मन में ना रख जय तथा श्रद्धा का सम्बल पकड़ कर इस मार्ग पर चलाजाय और
चलने की चेस्टा की जाय लक्ष्य की प्राप्ति प्राप्ति की तत्परत तथा उसके लिए
श्रद्धा युक्त समपर्ण यह त्रिविध मार्ग यदि अनुसरण कर आचरण में नहीं
उतरागया तो ऐसे शंकालु व्यक्ति को वर्तमान जीवन में ज्ञान की उपलब्धि नहीं
होगी तथा ज्ञान अप्राप्ति के कारण मोक्ष की प्राप्ति नहीं होगी और
ज्ञानानंद की भी प्राप्ति नहीं होगी
४(४२)मोक्ष प्राप्ति i का अधात्म शास्त्र के अनुसार ज्ञान ही एक सत्य मार्ग
है ज्ञान शब्द का अर्थ व्योबहार ज्ञान या संसार का ज्ञान नहीं है यहां
उसका अर्थ ब्रह्मात्म ज्ञान है इसी को विद्द्या भी कहते है जैसे आग में
जलेहुए बीज फिर नहीं उगते उसी प्रकार ज्ञान के द्वारा अविद्द्या आदि
क्लेशों के नष्ट हो जाने पर आत्मा का पुनः उनसे संयोग नहीं होता है
आत्मस्वरूप का ज्ञान तथा आत्मा की अलिप्तता का ज्ञान प्राप्त करके उसे जीवन
पर्यन्त स्थिर रखना ही कर्म बंधन से मुक्त होने का सच्चा मार्ग है यहां
भगवान श्री कृष्ण अर्जुन से कहते है तुम ह्रदय में स्थित अज्ञान से
उत्पन्न अपने संशय को विवेकज्ञान रूप तलवार से काटकर कर्म योग में स्थित हो
जा और युद्ध कर अधूरे ज्ञान में आसक्त अर्थात इन्द्रिय ज्ञान को ही ज्ञान
मैंने वाले मनुष्य सकाम कर्म करते हैं और शरीर में बंधे हुए जीवात्मा में
शरीर से मोक्ष के लिए आत्मनिष्ठा बुद्धि से कर्म करने की तथा आत्मज्ञान से
मोक्ष प्राप्त करने की जो यह स्वतंत्र शक्ति है इसकी और उनका ध्यान ही नहीं
जाता है इसकी ओर ध्यान देकर ही श्री कृष्णा ने अर्जुन से कहा है की
आत्मनिष्ठ बुद्धि से प्राप्त कर्त्तव्य कर यानि युद्ध कर
Friday, 27 November 2015
४(३९)जितेन्द्रिय
साधन परायण और श्रद्धावान मनुष्य ज्ञान को प्राप्त होता है और ज्ञान को
प्राप्त होकर वह बिना बिलम्ब के परम शांति को प्राप्त हो जाता है किसी भी
कर्म कि सफलता के लिए बाह्य उपकरण और अन्तः उपकरणों अर्थात मन बुद्धि चित्त
अहंकार श्रद्धा कि आवश्यकता होती है ज्ञान प्रति के संपूर्ण साधन आंतरिक
है जो स्वयं दिखाई नहीं देते है किन्तु उनका प्रकाश ज्ञान के आचरण में
दिखयी देता है ज्ञानी के संपूर्ण कर्म आत्म निष्ठां से युक्त होते है पृथक
पृथक सब प्राणियों वह एक ही अविनाशी आत्मभाव को बिभाग रहित सम्भाव से स्थित
देखता है और इस भाव को अपने आप में उत्पन्न करने के लिए इन्द्रियों पर
नियंत्रण करता है तथा इस बात का सतत ध्यान रखता है कि उसकी दृष्टि आत्म
निष्ठां रहे इस विधि से उसको अविनाशी आत्मा परमात्मा की परम शांति निश्चय
ही शीघ्र प्राप्त होगी यह त्रिविधि प्रयत्न शीघ्र ही ज्ञान को प्राप्त करा
कर अक्षय शांति प्रदान कराता है
४(३६)सबसे बड़ा पापी भी ज्ञान नौका पर बैठकर संपूर्ण पाप समुद्र से
निशन्देह भलीभांति तर जायेगा यह सामाजिक व्यबश्था तथा धर्म मर्यादा को
छिन्न भिन्न करने वाले अबांछित अवैधानिक अधार्मिक तरीके से भोग के लिए धन
संचय करने वाले या शाब्दिक ज्ञान के माध्यम से ज्ञान के नाम पर भोग भोगने
वाले अज्ञानिओं के लिए अनुज्ञा पत्र नहीं है यह ज्ञान उन ज्ञानिओं की जीवन
चर्या और आचरण पद्धति को लेकर दिया गया है जिन्होंने शरीर और आत्मा की
पृथकता का बोध प्राप्त कर लिया है जिसका वर्णन दूसरे अध्याय से प्रारम्भ
कर दिया गया है कर्म ज्ञान युक्त तथा भक्ति प्रधान होगा तो पाप हो ही नहीं
सकता है अर्जुन युद्ध छेत्र में स्वजनो पूज्य जनो आदि के बध से मोहग्रस्त
होकर धर्मस्थापना के निमित्त से होने वाले अधर्मिओं के संघार से उपराम होकर
भीख जैसे निकृष्ट कर्म को अपने स्वभाव और स्वधर्म के विपरीत कर्म करने की
बात करने लगता है और जो दिव्या शक्तियां उसे प्रदान करायी गयी है उनका
उद्देश्य भी विफल करता प्रतीत होता है इसलिए उसे ज्ञानं युक्त भक्ति प्रधान
कर्म करने की विधि बताकर यहां भी और आगे भी १८(१७)में यह कहा जायेगा की इस
विधि से कर्म करने पर मोक्ष प्राप्ति बाधित नहीं होगी
मुसलिम विरोधी भगुआ ब्रिगेड परतंत्र भारत में भी थी !जोगांधीजी के सर्वधर्म समभाव का विरोध करती थी !इसकाजन्म महाराष्ट्र में हुआ है !इसके शायद उचित कारण भी रहे हौं ? शिवाजी ने हिन्दू पद पादशाही की स्थापना के लिए प्रयत्न किया था !उसका शायद कारण महाराष्ट्र में मुसलिम शाशकों का हिन्दू जनता पर घोर अत्याचार था !उस समय देश में मुगलिया सल्तनत थी !और कट्टर मुसलमान औरंगजेब बादशाह था !शिवाजी की मृत्यु पर मुसलिम इतिहासकारों ने खुसी व्यक्त करते हुए कहा था कि काफिर दोजख में चला गया है ! महाराष्ट्र में जन्मे राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ और शिव सेना जैसे हिंदुत्तव को गरिमा प्रदान करने वाले येसंगठन अब बहुत शक्ति शाली हो गए हैं !राष्ट्रिय स्वयं सेवक संघ का बहुत अधिक विस्तार देश में तथा देश के बाहर भी हो गया है !और केंद्र में पहली बार शुद्ध संघ के विचार को पोषण और संरक्छण देने वाले मोदीजी प्रधान मंत्री बने हैं !इस पर भी विचार करने की आवश्यकता है !कि केंद्र में मोदीजी की सरकार क्योँ पदारूढ़ हुई !?गंधी जी के जीवन का बलिदान सिर्फ इसिलिये हुआ था ! क्योँकि उनकी हत्या करने वाला गोडसे उनको मुसलमानो का हितेषी और हिन्दुओं का दुश्मन समझता था !इस कीमती बलिदान की कीमत मुसलमानो ने नहीं की !पाकिस्तान में हिन्दुओं पर भयानक जुल्म ढाये गए !उनका जबरन धर्म परिवर्तन कराया गया !उनकी बहु बेटियों के साथ बलात्कार किये गए !और उनकी संख्या २४%जो बिभाजन के समय थी घट कर १% रह गयी !बांग्लादेश का निर्माण भारत के सैनिक सहयोग से संभव हुआ !किन्तु वहां भी हिन्दुओं पर अत्याचार होते हैं !कश्मीर में भी कश्मीरी पंडितों को चरम पंथियों ने कश्मीर से भगादिया !उनके मंदिर तोड़ दिए और उनकी जमीनो पर कब्ज़ा कर लिया !बांग्लादेशी बड़ी मात्रा में आसाम में प्रवेश कर गए हैं !और वहां के कुछ जिलों में असम के मूल निवासी अल्पमत में हो गए हैं !ये सब ऐसी घटनाएं हैं !जिनसे हिंदूवादी संगठनो को देश में ताकत मिली !देश में आज भी हिन्दू मुसलिम दंगे होते रहते हैं !इन सबका परिणाम है कि भाजपा ने पूर्ण बहुमत की सरकार केंद्र में आजादी के बाद पहली बार बनायीं है !भगवा ब्रिगेड इस से अधिक उत्साहित होकर !अपनी प्रकृति के अनुसार मुसलमानो के बिरुद्ध शव्दिक हमले कर रही है !और कांग्रेस तथा अन्य सभी धर्म निरपेक्छ दलों पर भी प्रहार कर रही है !दुर्भाग्य से हिन्दू हित की बात करने बाले ये लोग हिन्दू स्वभाव और हिन्दू संस्कृति को नहीं समझ रहे हैं !हिन्दू का मानस स्वभाव से ही सभी धर्मों के आदर करने का है !जिस प्रकार से आमिरखान पर आक्रमण किया जा रहा है !और जो भी धार्मिक समभाव की बात करता है !उसको गालियां दी जा रही हैं !और उनको पाकिस्तान जाने की बात कही जा रही है !उसका खामयाजा भाजपा को अति शीघ्र उठाना पड़ेगा !भारत का जन मानस इस प्रकार की धार्मिक काटटरता को स्वीकार नहीं करता है !भगुवा ब्रिगेड भारत को पाकिस्तान की प्रतिकृति बनाने में सफल नहीं हो पाएंगे !अगर ये भगुवा ब्रिगेड इसी तरह की धार्मिक असहनशीलता का प्रदर्शन करते रहे ! और अपने आचरण में सुधार नहीं किया !तो जो हश्र भाजपा का दिल्ली और बिहार में हुआ है !वही हश्र इनका देश के अन्य राज्यों में होगा !और यह सिसिला केंद्र की सरकार तक जाएगा !अभी तो ६५ साल बाद केंद्र की सत्ता प्राप्त करने में सफलता प्राप्त कर ली है !किन्तु अब चूकेंगे तो भारतीय राजनीति में फिर से सत्ता में आना कठिन होजायेगा !
Thursday, 26 November 2015
अगर देश में कृषि उत्पादकों को उनका सही मूल्य नहीं दिया गया !और कृषि भूमि का उपयोग आवासीय और व्यबसायिक उपयोग के लिए इसी प्रकार जारी रहा और ग्रामीण अर्थव्यबस्था को पूरी तरह से नष्ट भ्रष्ट कर दिया जाता है !और जिस तरह से राजनेताओं और सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के बेतन और सुविधाओं में लगातार बृद्धि की जा रही है !और बे अपने कर्तव्यों का निर्बहन नहीं कर रहे हैं !आवश्यक खाद्य बस्तुओं का अभाव हो रहा है !बाजारों में मिलावटी और प्रदूषित तथा जहरीले केमिकल्स और जानवरों की हड्डियों और चर्वी से निर्मित खाद्द्य पदार्थ बेचे जा रहे हैं !उस से यह स्पष्ट आभास हो रहा है !कि देश को भी मुद्रा स्फीति के भयानक परिणाम भोगना पड़ सकते हैं !उत्पादन के केंद्र गाओं होते हैं !शहरों में तो सिर्फ उनका भोग होता है !देश में स्मार्ट सिटीज का निर्माण और गाओं का विनाश हो रहा है !रूपया जो नासिक में छपता है !उसकी प्राप्ति को ही प्रधानता दी जा रही है !सरकार महगाई का मुकाबला रूपए छाप कर और बाँट कर कर रही है !चारों ओर रपया की मांग हो रही है !जबकि रूपया लक्छमी नहीं है !विनोबा जी कहते थे रूपया लफंगा है !वास्तविक लक्छमी वह है जो श्रम और भूमि के सहयोग से उत्पन्न होती है !किन्तु आराम तलबी और भोग विलास में लिप्त कर्तव्य हीं उत्पादन ना करने वाले लोग अपने चारित्रिक नैतिक पतन के इतिहास का निर्माण कर रहे हैं !और देश को गंभीर संकट की और ले जा रहे हैं !तथा मुद्रा स्फीति का मार्ग प्रस्तुत कर रहे हैं !
श्रेष्ठ पुरुषों ने धर्म का अच्छी प्रकार आचरण किया है ! किन्तु धर्म अर्थ और काम इन दो कारणों से संकुचित हो जाता है ! अत्यंत लोभी का लोभ से ग्रस्त होकर संपत्ति अर्जन करने के प्रयत्न और अत्यंत आसक्ति से सभी मर्यादाओं का उल्लंघन कर पद और प्रतिष्ठा प्राप्त करने की इक्छा --- ये दोनों ही धर्म को हानि पहुंचते हैं ! जो मनुष्य इक्छाओं के बशीभूत होकर संपत्ति अर्जित करने की चेस्टा नहीं करते हैं ! और पद तथा प्रतिष्ठा प्राप्ति के लिए मर्यादाओं का उल्लंघन नहीं करते हैं ! वे ही धर्म का वास्तविक पालन करते हैं !आधुनिक समय में धर्म की चर्चा बहुत होती है ! किन्तु धर्म का पालन कहीं कहीं ही होता है! !धर्म का पालन सिर्फ शब्दों से नहीं हो सकता है !धर्म आचरण से ही सधता है !इसिलए धर्म पर अनावश्यक बहस करने के स्थान पर उसको आचरण में उतारने का प्रयत्न करना चाहिए !इस पर बहस करने से कुछ भी प्राप्त नहीं होगा कि धर्मनिरपेक्छ कहा जाय या पंथ निर्पेक्छ !प्रत्येक व्यक्ति का धर्म उसके कर्तव्य निर्बहन में दर्शित होना चाहिए !धर्म का मूल स्वरुप धर्मनिरपेक्छ या पंथ निर्पेक्छ भारत में व्यक्तिगत जीवन में हिन्दू मुसलिम ,सिख ईसाई जैन बुद्ध आदि के रूप में हो सकता है !किन्तु सामाजिक जीवन में तो उसका पालन उसकी कर्तव्य निष्ठा से ही होगा !और कर्त्तव्य निष्ठा उसके द्वारा अंगीकृत कार्य से होगी !यदि कोई व्यक्ति न्यायाधीश के पद पर आसीन है ! तो वह किसी भी धर्म मजहब या विचार का क्योँ ना हो ! उसे अपने सभी निर्णय विधि ज्ञान के आधार पर ही देने होंगे ! संविधान ही सभी धर्मों का स्वीकृत स्वरुप है इसीलिए संवेधानिक व्यबस्था का पालन करना सभी लोगों के लिए वैधानिक बाध्यता है !भगवान श्री कृष्णा ने गीता में कहा है अपने अपने कर्तव्यकर्मों में लगा हुआ मनुष्य ही धर्म को प्राप्त होता है !जो कर्तव्य कर्मों का निर्बहन नहीं करता है और सिर्फ धर्म की शव्दिक चर्चा ही करता रहता है !वह धार्मिक नहीं है बल्कि अधार्मिक है !भारत के सभी लोगों को धर्मनिरपेक्छ्ता या पंथ निर्पेक्छ्ता को इसी अर्थ में समझकर अपने कर्तव्यों का निष्ठां पूर्वक पालन करना चाहिए !
४(३३)यज्ञ को गीता ने उसका वास्तविक रूप प्रदान किया है यज्ञ कार्य लोक
हित के लिए सम्पादित किया जाता था और उसमे धन की प्रधानता नहीं होती थी
प्राचीन काल में ब्राह्मण अपनी बुद्धि
इन्द्रिय समूह को आहुति के रूप में आत्मरूप अग्नि में सम्पर्पित करते थे
और तपस्या के द्वारा लोक कल्याण करते थे तथा स्वयं त्याग युक्त तपस्या मय
विरक्त जीवन जीते थे तथा अपनी देह की शक्ति को समाज को अर्पित करते थे राजा
और वैश्य धन सामग्री से यज्ञ करते थे चूँकि राजा प्रजा की शक्ति बृद्धि
तथा प्रजापालन के लिए युद्ध आदि करते थे इसलिए इस प्रकार से जो हिंसा होती
थी उसका परि मार्जिन यज्ञों से होता था कृषि गाय पालन कपडा चर्म शुद्धि भवन
निर्माण आदि का उत्पादिक श्रम वैश्य करते थे इसलिए धन के उपार्जन संग्रह
संचय का कार्य वैश्य करते थे तथा सभी प्रकार की आर्थिक गतिविधियाँ उन्ही
के द्वारा संचालित होती थी इसलिए वह भी दृव्य यज्ञ करते थे किन्तु कालांतर
में सभी समृद्धि शक्ति प्राप्त करने के लिए द्रव्य की प्रचुरता वाले यज्ञ
करने लगे तथा महाभारत काल में शक्ति समृद्धि की प्राप्ति तथा शत्रुओं के
नाश के लिए यज्ञ आदि किये गए तथा यज्ञ का लोक हित करने वाला स्वरुप नष्ट हो
गया इसलिए धन की प्राचुता वाले यज्ञों से ज्ञान यज्ञ श्रेष्ठ है क्योँकि
ज्ञानयज्ञ सिर्फ लोक हित की दृष्टि से अपनी आकांछाओं को बलिदान कर किया
जाता है जिस से सभी भोग प्रधान कार्यो की इति सृति हो जाती है और ज्ञान
यज्ञ करने वाला कर्म बंधन से मुक्त हो जाता है
प्राचीन
भारत में आश्रम व्यबस्था स्वाश्रित थी ग्रहश्था या सन्यस्त साधु संतो के
आश्रमों में बृह्मचर्य वृत पालन करने वाले साधक विद्यार्थी आदि रहते थे तथा
आश्रमों में फलदार ब्रिक्छों का रोपण किया जाता था जिस से फलों की
प्राप्ति होती थी कृषि के लिए जमीन होती थी जिस से भोजन की उपलब्धि होती थी
गाय पालन से घी दूध की प्राप्ति होती थी आश्रम किसी भी प्रकार से किसी से
दान आदि स्वीकार नहीं करते थे महात्मा गांधी आचार्य विनोबा भावे तथा अन्य
समर्पित गांधीवादिओं के भी आश्रम बने जिनमे संयम सादगी
सेवा सदाचार आदि का शिक्छण व्यबहारिक जीवन में आचरण से दिया जाता था
किन्तु आज बदले समय में कुछ आश्रमों में बिगाड़ आया है किन्तु कुछ आश्रम आज
भी निष्ठां बान है किन्तु जो आश्रम रिश्बत खोरों भृष्ट ठेकेदारों मुनाफाखोर
व्यापारिओं कमीशन खोर नेताओं आदि के दान से संचालित हो रहे हैं वहां
प्राचीन आश्रम पद्धति के दर्शन नहीं होते हैं बल्कि भारी मात्रा में आश्रम
निर्माण के लिए जंगलो का विनाश हो रहा है जिस से जंगली जीव जंतुओं और
पर्यावरण का नाश हो रहा है संयम सदाचार सेवा बृह्मचर्य का अभाव है आश्रम
योग प्रधान न रह कर भोग प्रधान हो गए है तपस्वी साधु संतो को इस मामले
विचार कर कोई उपाय सुझाना चाहिए किन्तु किसी भी स्थिति में सरकारी हस्तछेप
नहीं होना चाहिए क्योकि आश्रम तो सुद्ध पवित्र हो जायेंगे और मिल भी
जायेंगे किन्तु भृष्ट नौकर शाहों में सुधार होना नामुमकिन है धर्म के नाम
पर होने वाला अधर्म रोक जा सकता है किन्तु जो नौकर अपने कर्त्तव्य का पालन
नहीं करते है तथा जो धार्मिक विधिओं से अनभिज्ञ है बे धार्मिक व्यबस्था का
ही लोप कर देंगे
Wednesday, 25 November 2015
धर्मनिरपेक्छ्ता -------- प्रकृति में बहुत से खाद्द्य पदार्थों का ऊपरी छिलका बहुत कठोर होता है !किन्तु उस कठोर छिलके के अंदर अत्यंत कोमल और मीठा खाने योग्य पदार्थ होता है !जैसे नारियल ,बादाम ,अखरोट आदि ऐसे ही फल होते हैं ! इनको छिलकों सहित खाना संभव नहीं होता है !किन्तु जब इनके छिलके को फोड़ दिया जाता है !तो अत्यंत स्वास्थ्य वर्धक आसानी से खाने वाली गारी उपलब्ध होती है !इन फलों के बाहर के आवरण प्रकृति ने इनके अंदर के कोमल खाने योग्य पदार्थों के लिए ही निर्मित किये हैं !इन बाह्य छिलकों से ही इनकी पहचान भी होती है !इन छिलकों का बस इतना ही महत्त्व है !इसी प्रकार संसार के सम्पूर्ण छोटे बड़े धर्म हैं !इन सभी धर्मों के अंदर सर्व समावेशिक सनातन तत्त्व होता है !जिस से श्रृष्टि में जन्मे सभी जीव जंतुओं की रक्छा एवं सुरक्छा होती है !इन सभी धर्मों की पहचान इन धर्मों के अलग अलग नामो से होती है !इनकी बाह्य आचरण पद्धति भी काल ,परिश्थिति और देश के अनुसार भिन्न भिन्न होतइ है ! किन्तु इन सभी धर्मों में अंदर सद्भाव ,शांति ,करुणा ,प्रेम ,सहभागिता अहिंसा आदि तत्त्व कम और अधिक मात्रा में मौजूद होते है !और सभी धर्मों में आत्मशुद्धि और काम क्रोध लोभ क्रूरता आदि को नस्ट करने के लिए भिन्न भिन्न प्रकार की पूजा पद्धतियाँ होती है !धर्म निर्पेक्छ्ता के माध्यम से इन विविध धर्मों के बाह्य स्वरुप के घेरे से निकालकर शुद्ध आत्मस्वरूप को स्थापित करने की चेस्टा की जाती है !धर्म निर्पेक्छ्ता का अर्थ धर्महीनता नहीं है !इसका अर्थ सर्व धर्म सम्भाव है !सभी धर्म अपने ऊपरी छिलकों को उतारकर धर्म के आतंरिक स्वरुप सर्वधर्म समभाव .मैत्री ,करुणा ,प्रेम ,दया ,पारस्परिक मेल मिलाप के साथ रहें और राष्ट्र ,समाज और स्वयं की उन्नतिकरें !भारत के संविधान ने इसीलिए इस धर्म निर्पेक्छ्ता को स्वीकार किया है !भारत अनादिकाल से धर्मनिरपेक्छ रहा है !यहाँ सभी धर्म निर्बाध रूप से फले फुले और पुष्पित हुए हुए हैं !धर्मों की इसी श्रंखला में दो प्रमुख धर्म ईसाई और इस्लाम भी जुड़े !इन धर्मों के मानने वाले भारी संख्या में भारत में निवास करते हैं !इधर कुछ समय से देश में भी धार्मिक काटटरता का समावेश होता दिख रहा है !इसको रोका जाना चाहिए !आज संविधान दिवस है !२६ नबम्बर १९४९ के दिन हमने संविधान को अंगीकृत अधिनियमित और आत्मार्पित किया था !इसलिए हम सबको संविधान के इस धर्मनिरपेक्छ तत्त्व को भली प्रकार समझ कर धर्म के बाह्य स्वरुप के अंदर जो आत्त्म तत्त्व विद्यमान है !उसको अंगीकृत और आत्मार्पित करें !तथा धार्मिक काटटरता का मन वचन कर्म से त्याग करें !!आत्मोद्धार, ईश्वर की उपासना का मूल तत्त्व का दर्शन और उपलब्धि का खुला द्वार धर्मनिरपेक्छ्ता में ही है !
world abounds with scriptures sacred and profane with revelations and
half revelations with religions and philosophies sects and schools and
systems ,to these many minds of a half ripe knowledge or no knowledge at
all attach them selves with exclusiveness and passion and will have it
that this or that book is alone the eternal word of God and all others
are either impostures or at best imperfectly inspired.This attitude
creates intolerance fundamentalism frenzy and hatred and disregard to
other religions Religious intellectuals must give considered thought on
this and to bring forth the real purposeof religion and goal to attain
amity affinity affection attitude of tolerance and coexistence must be
sown in the minds of religious people and fundamentalism be driven out
as early as possible
क्या भारत तालिबान या इस्लामिक संगठन बन ने की और गति कर रहा है ? क्या आमिर को मुसलमान होने के नाते अगर कुछ उनकी समझ में ठीक नहीं लगता है ! तो उस पर विचार व्यक्त करने का अधिकार नहीं है? अगर आमिर ने अपनी पत्नी की कही हुई असुरक्छा की बात कह दी तो बहुत बढ़ा अपराध होगया !ये लोग .चैनल और समाचार पत्र इसको इतना तूल क्योँ दे रहे हैं !इस एक छोटे से व्यान ने आमिर की सारी राष्ट्रीयता और राष्ट्र भक्ति को भुला दिया है !अगर मुसलमानो के साथ इस तरह का वर्ताव किया जाएगा !तो फिर भारत की वैदिक धर्म की विचार स्वातंत्र्य की चिर पोषित संस्कृति का क्या होगा ?इस देश में विचार का विरोध हमेशा विचार से ही हुआ है !तलबार से नहीं !भगवान श्री कृष्ण को शिशुपाल ने भरी सभा में गालियां दी थी !और आज भी बहुत से कवि शिशुपाल की प्रससा में गीत गाते हैं !यहाँ महाभारत काल में चार्बाक नामक ऋषि था जो पुनर्जन्म और आत्मा को नहीं मानता था !महाभारत में वेद व्यास ने भी वेदों को संपूर्ण ज्ञान का आदि श्रोत ना मानने वालों का भी उदहारण दिया है !भारत में सभी प्रकार के आस्तिक और नास्तिक विचारों का बाहुल्य रहा है !यहाँ विरोध का समाधान शाश्त्रार्थ से होता था !किसी विराधी विचार को व्यक्त करने वाले का सर कलम नहीं किया जाता था !और न ही इस देश में कभी भी ईशनिंदा जैसा क्रूर कानून रहा है !वैदिक धर्म को इस रूप में प्रस्तुत करने का प्रयत्न करना जिसमे विरोधी विचार को सुनने और समझने का अवसर ही समाप्त हो जाए उचित नहीं है !जिस प्रकार के विचार आमिर के व्यान के विरुद्ध आये हैं !उस से तो आमिर के कथन की सत्यता की ही पुष्टि होती है !इसलिए मेहरबानी करके वैदिक धर्म को इस रूप में प्रस्तुत न करें जिस से उसका रूप विकृत हो जाय ! वैदिक धर्म संस्कृति पालन करें ! अपने आचरण में उसके मूल तत्त्व उतारें !किन्तु उसको कांच का गिलास ना बनायें कि वह विरोधी विचार के पत्थर से टूट कर बिखर जाए !विश्व के सामने क्रूर और हिंसक गतिविधियों के विरुद्ध अहिंसा प्रेम करुणा आदि को प्रस्तुत करने का यह सुनहरा अवसर सभी धर्मों को प्राप्त हुआ है !इन सनातन सिधान्तो को सिद्ध करने का ये उपयुक्त समय है !इन्ही सनातन सिधान्तो पर सनातन धर्म टिका हुआ है !और इन्ही को गांधीजी j और विनोबा भावे आदि ने अपने जीवन में उतारा था !और इन्ही को बढ़ाने का अवसर हम सबको प्राप्त है !
Tuesday, 24 November 2015
भाजपा के समर्थक और भाजपा के विरोधी दोनों ही प्रकार के लोग सहन शीलता के विरोध में आक्रामक शब्दों के गोले दागते हैं !शब्दों की मर्यादा नष्ट होती दिखाई देती है !यही इनटॉलेरेंस है !लोकतंत्र के लिए यह ठीक और उचित नहीं है !हमारा लोकतंत्र विचारों की अभिव्यक्ति में ठहरा हुआ सा दिख रहा है !विकसित लोकतंत्र में विचारों की अभिव्यक्ति की पूर्ण स्वतंत्रता होती है !सिर्फ वही विचार प्रतिबन्धितहोते है !जिनकी अभिव्यक्ति कानून द्वारा प्रति बंधितहोती है ! कुछ लोग भाजपा की सत्ता को घृणा की दृष्टि से देखते हैं !बे भी मतदाताओं का अपमान करते हैं !उनकी यह घृणा भी लोकतंत्र की दृष्टि से उचित नहीं है ! लोक्तन्त्र में मत दाता ही नेताओं को जनप्रितिनिधि बनाता है !इसलिए मतदाताओं के निर्णय को गलत बताकर अपने को बुद्धिमान सिद्ध करना ये भी लोकतंत्र के लिए घातक है ! मोदीजी के अंध भक्त मोदीजी की लोकतान्त्रिक दृष्टि से की गयी समालोचना को स्वीकार नहीं करते हैं !और मोदीजी के विरुद्ध थोड़ा सा भी बोलने पर उनको भद्दी भद्दी गलियों से नबाजते हैं !सोनिया गांधी ,राहुलगाँधी और कांग्रेस पर बहुत ऊल ज़लूल शब्दों से आक्रमण करते हैं !यह भी लोकतान्त्रिक भावना के प्रतिकूल है !लोकतंत्र के इस सिद्धांत को सभी राजनैतिक दलों को ध्यान में रखना चाहिए कि लोकतंत्र में सत्ता समुद्र की उठती गिरती तरंगों के समान है !कुछ तरंगे ज्यादा ऊँची उठती हैं !और कुछ कम उचाई तक उठ पाती हैं !कांग्रेस की तरंग काफी उचाई तक उठी रही !अब भाजपा की तरंग उठी है !किन्तु यह अभी मुकाम तक नहीं पहुंची है !तरंग चाहे ऊँची हो या नीची वापिस आकर समुद्र में ही गिरती है !इसीलिए विकसित लोकतंत्र में शव्दों का आक्रमण व्यक्तियों पर नहीं नीतियों पर होता है !भारत में चुनाव जीतने केलिए राजनेता जनता को सब्ज बाग़ दिखाते हैं !किन्तु सत्ता में आने के बाद बे जनता से किये हुए वायदे भूल जाते हैं !और सत्ता में बने रहने के प्रयत्न में जुट जाते हैं !इसलिए जन समस्यायों का निराकरण नहीं होता है !देश में भाजपा को अपनी सारी शक्ति महगाई कम करने में लगानी चाहिए !और देश में जो भ्रष्टाचार है ! उसको स्वयं के आचरण को शुद्ध कर समाप्त करने का प्रयत्न करना चाहिए !तथा देश में जो शाब्दिक इनटॉलेरेंस की बृद्धि हो रही है उसको भीसमाप्त करना चाहिए !
जो लोग ना तो सामान्य लोगों जैसा जीवन जीते हैं !और ना जिनका रहन सहन ही सामान्य लोगों की तरह है !ऐसे लोग ही उन समस्यायों को चर्चा का विषय बंनते हैं !जिनसे उनकी चर्च में रहने की आकांछा की पूर्ति होती है !और ख्याति भी बढ़ती है !देश में इनटॉलेरेंस की चर्चा बहुत तेजी से चल रही है !इसचरचा का जन्म भाजपा के नेताओं ने दिया !और उसको हबा साहित्यकारों और कलाकारों ने पुरुष्कार लौट कर तथा राजनैतिक दलों ने मोदी ,संघ और भाजपा को कटघरे में खड़ा कर दी !इसमें गाय को और अख्लाख़ की फट्या को भी मुद्दा बनाया गया !किन्तु आम जनता की जो समस्याएं हैं !उनके समाधान की तरफ इन लोगों का ध्यान नहीं जाता है !क्योँकि ये आम लोगों के जीवन जीते ही नहीं है !आमिर खान शाहरुख़ खान गरीब का अभिनय करने के लिए करोड़ों रूपया फीस मे लेता हैं ! राजा महाराजाओं की तरह रहते हैं !इसी प्रकार का जीवन लगभग सभी इंटॉलरेंस की बात कहने वाओं का है !अमीरखां कहते हैं कि उनकी पत्नी कहती है !की देश में असुरक्छा का बातावरण है !इसीलिए कहीं और बस जाम चाहिए !मौलाना मदनी कह रहे हैं !कि मुसलमानो के लिए भारत से अच्छा कोई भी देश नहीं है !भारत में रहकर ही स्वतंत्र विचारों को अभिव्यक्त किया जा सकता है !
Monday, 23 November 2015
संद · जवाब दें · 54 मिनट
Narottam Swami Public
is suffering from escalating high prices and rampant corruption and
mismanagement.even ordinary desease requires lot of money for treatment
in private run nursing Homes and Hospitals.Govt run hospitals and health
centres are of no usefor publicdereliction and total carelessness of
doctors towards patients and lack of adequate medicines have left
patients in the hands of fate and destiny.As they can not get most
expensive treatment of private Nursing homes.Similar is the condition in
schools,colleges and Universities.In courts rampant corruption and sky
high fees of good lawyers make legal help impossible to poor
litigants.Public is unable to manage frugal and simple diet and clothes
for his family.How can they have time to think of this intolerant
etc.?Persons like Amirkhan or these so called awardees who are agitating
tthis issue have no practical influence in public at large.They have
nothing in common with the grievances of generalmen.They feed fat
themselves with all possible facilites.It was in this respect and with
this view Ihad posted my views.I fully agree that BJP and Modis
favourites have generated this sense of intolerance in tolerant Bharant
आमिरखानऐसे फिल्म जगत के फिल्मों के कारण लोक प्रियता प्राप्तकलाकर और केजरीवाल जैसे भारतीय मूल स्वभाव पर विचार कर ना बोलने वाले स्वार्थनिष्ठ अधकचरे अकस्मात् राजनीति में महत्ता प्राप्त राजनेता भारत में इंटॉलरेंस में बृद्धि का कारण बनते हैं !इन अधकचरे राजनेताओं ,साहित्यकारों फ़िल्मी कलाकारों और सत्ताधारी भाजपा के नेताओं और धर्मनिरपेक्छ भारत की भावना का सही रूप में आदर ना कर धर्मनिरपेक्छ्ता का विकृत समाज तोड़क स्वरुप प्रस्तुत करने वाले सत्ता प्राप्तकर सत्ता में बने रहने का स्वप्न देखने वाले राजनेता आदि भारत की आमजनता में इनटॉलेरेंस को समाप्त करने के बजाय उसको विस्तार देने में लगे हुए हैं !मौलाना महमूद मदनी ने कुछ दिन पूर्व एक व्यान में कहा था कि मुसलमानो के लिए भारत से बेहतर कोई और देश नहीं है !यह इनटॉलेरेंस का विषय कुछ लोगों के लिए लाभ का विषय बन गया है ! मीडिया जो सनसनी खोज विध्वंसक समाचारों को खोजकर प्रकाशित करने की तलाश में रहती है ! इसके प्रकाशन का सुनहरा अवसर प्राप्त हो गया है ! यह मामला आकाश के फूल के समान ना होते हुए भी गंभीर चर्चा का विषय बन गया है !आमजनता को कुछ लेना देना नहीं है
आमिर को अपनी पत्नी से कह देना चाहिए की डरने की कोई बात नहीं है !यह भारत बर्ष है !सर्वधर्म समभाव ,अहिंसा और करुणा भारत के मूल स्वभाव में विद्यमान है !इसलिए इस देश में धार्मिक कटटरता का जन्म कमसे काम सनातन धर्म के मान ने वालों में कभी संभव नहीं है !यहाँ जो धार्मिक माहौल बिगाड़ा है !उसका कारण पाकिस्तान और बांग्लादेश है !पाकिस्तान में अगर अल्पसंख्यक हिन्दुओं को भारत की तरह समान अधिकार प्राप्त होते !और वहां पर अत्याचार आदि न होते और उनका जबरन धर्म परिवर्तन न किया गया होता !और वहां भारत पर आत्तंकवादी हमले के लिए आत्तंकवाद प्रायोजित ना किया जाता !और भारत पर पाकिस्तान के द्वारा प्रायोजित आत्तंकवादी हमले ना किये जाते !और हिन्दू वहां से भागकर भारत में ना आते !बांग्लादेश जिसका निर्माण भारत के सहयोग से हुआ था !भारत ने बहुत बड़ी धनराशि बांग्लादेश निर्माण के लिए खर्च करने के बाद भी आज वहांके चरमपंथी भारत को दुश्मन नंबर एक मानते हैं !और वहां पर भी हिन्दुओं पर अत्याचार होते हैं !ये सब कारण है जिस बजह से भारत में भाजपा की शक्ति में बराबर विकास हुआ !और अब भाजपा की केंद्र में सरकार बन गयी !आमिरखान को शायद गांधीजी और गणेश शंकर विद्यार्थी का मुसलमानो के लिए बलिदान देने की घटनाओं का स्मरण नहीं है !गांधीजी ने मुसलमानो की सुरक्छा के लिए १३जन्बर्य १९४८ में आमरण अनसन किया था !अनसन के समय उनका स्वास्थ्य ठीक नहीं था !डाक्टरों का कहना था कि गांधीजी की मृत्यु किसी भी समय हो सकती है !इसीलिए उनकी सम्पूर्ण मांगे मान ली गयी थी !औरउन्होंने १८ जनबरी को अपना अनसन समाप्त कर दिया था !अगर भारत केमुसलमानो ने गांधी के वलिदान को याद रखा होता ! और देश में हिन्दू मुसलिम दंगे खत्म हो गए होते !और मुसलिम नेताओं ने अगर भड़काऊ भाषण ना दिए होते !तो भारत में भाजपा कभी भी पावर प्राप्त नहीं कर सकती थी !बाजपेयी जी भी ४बार प्रधानमन्त्री रहे !किन्तु उनके समय में भड़काऊ व्यान बाजी भाजपा के लोगों ने कभी भी नहीं की !किन्तु मोदीजी केसत्ता में आने के बाद भाजपा अत्यधिक उत्साहित हो गयी !और मोदी समर्थकों की मुसलमानो के विरुद्ध भड़काऊ भाषण बाजी शुरू हो गयी !किन्त ना तो भाजपा के लोग इस्लामिक संगठन और मुसलिम चरम पंथियों की तरह क्रूर हैं !और ना ही उनका विश्वास इस्लामिक संगठन की तरह लोगों की गर्दन काटने में है !इसके अलावा कुछ हिन्दू वादी संगठनो को छोड़ कर देश को ७०%जनता मुसलमानो के साथ खड़ी हुई है !कांग्रेस ,साम्यवादी दल तृणमूल कांग्रेस डीएमके ,रेड्डी कांग्रेस तेदेपा,बीएसपी ,समाजवादी .लालू और नितीश आदि की की पार्टी के लोग सभी धर्म निर्पेक्छ्ता के पोषक है !और मुसलमानो के संरक्छक है !तथा मुसलमान भी अपने आप में शक्ति शाली है !अखलाख की हत्या पर जिस तरह प्रदेश की सरकार ने और राजनैतिक दलों के लोगों ने जिस तरह से अखलाख के परिवार के लिए आर्थिक सहायता आदि की झड़ी लगा दी !तथा साहित्यकारों ने अपने अवार्ड लौटा दिए !और देश में इनटॉलेरेंस का जैसा बातावरण बना और यह समाचार भारत से बाहर देशों में पहुँच गया !और आज आमिर और शाहरुख़ भी यही बात दुहरा रहे हैं !इस सबसे यह निष्कर्ष निकलता है !की इनटॉलेरेंस का माहौल भाजपा और हिंदूवादी संगठन के नेताओं के भड़काऊ भाषणो से निर्मित हो रहा है !और इनटॉलेरेंस की आग को साहित्यकार अवार्ड बापिस कर ,राजनैतिक दल राजनैतिक लाभ के लिए और आमिर ,शाहरुख़ जैसे कलाकार इस प्रकार की व्यान बाजी करके की उनको डर लगरहा है !पंखा झलकर तीब्र कर रहे हैं !कोई भी भारत के मूल अहिंसक और करुणा प्रधान स्वभाव कीओर ध्यान नहीं दे रहे हैं !आम भारतबासी कभी हिंसा का समर्थक नहीं हो सकता है !इसीलिए किसीको भी डरने की आवश्यकता नहीं है !इनटॉलेरेंस को बिना बजह भाषण बाजी से सुलगाते रहना भी ठीक नहीं है !इनटॉलेरेंस की बात को हबा देकर लोग भारत की अस्मिता और मूल स्वभाव का अपमान कर रहेहैं !
हनुमान जी जब सीता माता की खोज में लंका गए थे !तब उन्हें सारी लंका में एक घर दिखाई दिया जिस पर राम नाम लिखा हुआ था !उस गृह को देखकर हनुमान जी ने कहा ---लंका निश्चर निकर निबासा !यहाँ कहाँ सज्जन कर बासा ! वह घर बिभीषण का था !जब उसने रावण को सही सलाह दी थी !तो उसको रावण ने लात मार कर लंका से बाहर भगा दिया था !किन्तु बाद में उस त्याग के कारण उसे लंका का राज्य प्राप्त हुआ था !इस समय देश में ईमानदारी रूपी सीता का भ्रष्टाचार के रावणो द्वारा हरण कर लिया गया है !और जो भी भ्रष्टाचार का विरोध करेगा उसे भ्रष्टाचार केरावणो की लात खानी ही पड़ेगी !गुलाब सिंह भी फुट बाल की तरह लतियाये जा रहे हैं !भले ही उनको इस कारण तमाम परेशानियों का सामना करना पड़ रहा हो !यह भी संभव है कि परेशानियों का यह सिलसिला आगे भी जारी रहे !बे ईमानदारी की कीमत उसीप्रकार चुकारहे हैं !जैसे धर्मपत्नी गरीबी और कठिनाई में भी पति साथ नहीं छोड़ती है !गुलाब सिंह का नाम उन चन्द लोगों में आदरयुक्त चर्चा का विषय बना रहेगा !जो भ्रष्टाचार के विरोधी है !वैसे इस समय बहुत से कानूनी प्रावधान है !जिनका उपयोग कर बेतन ना मिलने आदि की समस्या से बे मुक्त हो सकते हैं !इसीलिए उनको वैधानिक प्रक्रिया से अपनी समस्यायों का हल खोजना चाहिए !
Sunday, 22 November 2015
भारत की १००० साल से अधिक की गुलामी ने देश में अनेक विकृतियों कोजन्म दिया है !इन विकृतियों से मुक्त हो पाने के लिए गुलाम भारत में भी अनेक प्रयत्न देश भक्तों ने किये !किन्तु अभी भी बहुत कछ करना बाकी है !भारत की मूल अवधारणा विचार से विचार को काटने की रही है !इस देश में कभी भी विचार को तलवार से काटने की परम्परा नहीं रही है !२५०० साल पहले वैदिक धर्म के अंग के रूप में बौद्ध धर्म का उदय हुआ है !भगवान बुद्ध ने वैदिक धर्म में सुधार के लिए जो अनेक आख्यान प्रस्तुत किये !और धार्मिक हिंसा का निषेध किया तथा बर्णाश्रम धर्म की जो कर्म पर आधारित व्याख्या की !वह उनके समाधिस्थ होने के बाद देश में बौद्ध धर्म के नाम से स्थापित हुई !उनके जीवन काल में अनेक राजाओं ने उनसे दीक्छा ली और हिंसा का परित्याग किया !इस बदलाव में कहीं भी तलवार का प्रयोग नहीं हुआ !सिर्फ विचार से ही विचार को काटा गया !आज बुध धर्म का प्रभाव भारत से अधिक अन्य देशों चीन विएतनाम थाईलैंड वर्मा ,श्री लंका आदि देशों में देखा जाता है !किन्तु बुद्ध की मूल अहिंसक प्रवृति का दर्शन भारत में तो होता है !किन्तु भारत से बहार के देशों में बौद्ध धर्म के अहिंसक स्वरुप का दर्शन नहीं होता है !इसका मुख्य कारण यह है !कि भारत स्वाभाव से ही अहिंसक और करुणा प्रधान देश रहा है !और आज भी है !सनातन धर्म ने कभी भी दूसरे धर्मो का अनादर नहीं किया !भारत में जो ईसाई धर्म और इस्लाम का प्रवेश हुआ !उसमे बहुत से सनातन धर्मियों का प्रवेश हुआ !भारत के मुसलमानो और ईसाइयों के रंग रूप कद और काठी सभी यहाँ के सनातन धर्म से मिलते जुलते हैं !अगर कोई ये ना बताये की वह हिन्दू या मुसलमान या ईसाई है !तो यह पहचान नहीं हो सकती है !की इन तीनो धर्मों के मान ने वाले अलग अलग है !चूँकि हिन्दू धर्म ने कभी भी धर्मांतरण किसी दूसरे धर्म से हिन्दू धर्म में नहीं किया और ना कराया !किन्तु भारत और पाकिस्तान ,बांग्लादेश आदि के सभी मुसलमान और ईसाई हिन्दू धर्म से धर्म परिवर्तन कर मुसलमान और ईसाई हुए हैं !इसीलिए सभी धर्मो को भारत के मूल अहिंसक और करुणा प्रधान सर्व धर्म सम्भाव की रक्छा करनी चाहिए !और यहाँ पर किसी भी कीमत पर विचार की हत्या तलवार से नहीं की जानी चाहिए !और न भारत के मूल सनातन धर्म कोलोभ लालच या जोर जबरदस्ती से धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर करना चाहिए !विश्व में भारत की इस मूल अवधारणा को सिद्ध करने की जिम्मेदारी सभी धर्मों पर है !
समाजवाद ,साम्यवाद आदि ये आयातित राजनैतिक दर्शन है !जो अपनी जन्मभूमि में ही असफल सिद्ध होगये हैं !और अगर भारत सहित कुछ देशों में दिखाई भी देता हैं !तो इनकी आकृति बड़ी भयंकर ,बदरंग और विकृत दिखाई देती है !जब कोई देश अपने मूल स्वभाव और प्रकृति को त्याग कर किसी अन्य प्रतिकूल धर्म या दर्शन का अनुकरण करने लगजाता है !तो ना तो उसको शांति प्राप्त होती है और ना ही वहां उत्तम व्यबस्था का जन्म हो पाता है !समाज के नेता और अगुवा रंगे हुए शियार हो जाते हैं !भारतीय समाजवाद का प्रस्तुतीकरण भगवान श्री कृष्ण न ३(९से १६) में किया है शरीर श्रम द्वारा श्रष्टि और समाज को विकसित करें ! श्रम के परिणामस्वरूप जो प्राप्त हो उसका यथायोग्य सभी का भाग उनको ईमानदारी से वितरण करें ! और जो अपने हिस्से में आये उसका उपभोग करें ! और फिर परिश्रम में जुट जाएँ ! इस प्रकार गीता में सार्वदेशिक और सर्वकालिक निष्पाप जीवन की योजना समाज के सामने प्रस्तुत की है !जो समाजवाद भारत में आचरित किया जा रहा है !वह समाजवाद नहीं समाज बर्बाद बाद है !यह जितनी जल्दी देश से विदा हो जाय उतना ही अच्छा है !सत्ता में बने रहने के लिए नेताओं को कई जोड़ तोड़ के आंकड़े फिट करना पड़ते हैं !और नेता लोग इस प्रयत्न में कभी कभी असंभव को संभव करने में भी लगे दिखाई देते हैं !इसीलिए बे इस लक्छ्य की प्राप्ति तो कर नहीं पाते हैं !किन्तु इस प्रयत्न में देश में जरूर कुछ समय के लिए अव्यबस्था उत्पन्न कर देते हैं !समाज में किसी का त्याग और पुण्य का भोग किसी और को प्राप्त हो जाता है !समाजवाद की स्थापना के लिए जो त्याग डॉ लोहिया ,आचार्य नरेंद्र देव आदि ने किया उसका फल मुलायम सिंह भोग रहे हैं !लोहिया अविवाहित रहे !समाजवाद की उत्कंठा ने उनको व्यक्तिगत सुखों का भोग करने का अवसर प्राप्त ही नहीं होने दिया !जब उनकी मृत्यु हुई तो उनके पास कुछ पुस्तकें और दो जोड़ी कपडे मात्र उनकी संपत्ति के रूप में थे !किन्तु उनके बाद समाजवाद की यात्रा जो सारे देश से सिकुड़ सिमट कर उत्तरप्रदेश में आकर रुकगयी है !और जो समाजवादी पार्टी के मुखिया के जोड़ तोड़ के गठबंधन से सिद्धांत बिहीन समाजवादी कार्यरत है !और अब अपने अंतिम दौर में है !उसके दो मजबूत पाये आजमखान और अमर सिंह रहे हैं !किन्तु समाजवादी गाडी के ये दो बाहक किसी करणबस अलग हो गए हैं !अमरसिंघ पार्टी से बाहर हो गए हैं !और आजमखान पार्टी पर हॉबी हो गए हैं !पार्टी प्रमुख इन दोनों बाहकों का उपयोग पार्टी के लिए करना चाहते हैं !इसीलिए जन्मदिन का केक भी दो बार काटा जा रहा है सपा प्रमुख की जोड़ तोड़ कला की परीक्छा हो रही है !देखते हैं सफलता प्राप्त होती है या नहीं ?
Saturday, 21 November 2015
काजल की कोठारी में कितनो ही सयानो जाय !एक बूँद काजल की लॉग है पे लॉग है !राजनीति काजल की कोठारी है !इसीलिए इसमे प्रवेश करने वाला कोई भी व्यक्ति काजल की कालिमा से नहीं बच सकता है !केजरीवाल को भी राजनीति के सामूहिक भ्रष्टाचार से मुक्त नहीं कहा जासकता है !भारतीय राजनीति में धन संपत्ति अर्जित करने के सुनहरे अवसर बड़ी मात्रा में उपलब्ध हैं !राजनीति के पोखरे में डुबकी लगाकर सभी राजनेता कुछ लोगों को अपवाद रूप में छोड़ कर अरब पति हो गए हैं !फिर रूपया के बल पर ही बे चुनाव में विजय प्राप्त करते हैं !बिहार के चुनाव में लालू प्रसाद ने जीत का झंडा गाड़ दिया है !और पुरुष्कार में अपने दोनों पुत्रो को मंत्री बना दिया है !छोटा पुत्र उप मुख्यमंत्री है !इसके पूर्व लालू ने अपनी पत्नी को राज्य का मुख्य मंत्री बना दिया था !लालू यादव और केजरीवाल का गले मिलना दोस्ती का प्रतीक नहीं है !यह गले मिलना मोदीजी के विरुद्ध गठबंधन है !अब देश की राजनीति मोदी विरुद्ध सभी विपक्छी राजनैतिक दल हैं !और यह महागठबंधन मोदी के विरुद्ध राज्यों में काम करेगा और केंद्र में भी काम करेगा !जहाँ तक राजनैतिक आदर्श पालन की बात है ! उसकी तो चर्चा करना ही व्यर्थ है !जो लोग शुद्ध राजनैतिक आदर्श में विस्वास रखते हैं !उनके लिए देश में ग्राम पंचायत से लेकर लोकसभा तक फाटक बंद हो गए हैं !
Friday, 20 November 2015
सोशल मीडिया पर मोदीजी के समर्थंको द्वारा राजनैतिक विरोधियों विशेष कर नेहरूजी और उनके परिवार पर तथा कांग्रेस पर आरोपों की बौछार ------
-------- जब से भाजपा की केंद्र में मोदीजी के नेतृत्त्व में भाजपा की सरकार बनी है !तब से महात्मा गांधी ,जवाहरलाल नेहरू तथा उनके परिवार और धर्म निर्पेक्छ्ता आदि पर शव्दिक हमले तीब्र हो गए हैं !इन हमलों में शव्दों की मर्यादा समाप्त हो गयी है ! आरोपण भद्दी गलियों से किया जा रहा है !मोदी समर्थक अपने इस व्योहार से भाजपा को बहुत नुकसान पहुंचा रहे हैं !और भाजपा को सत्ता में बने रहने के सभी दरबाजे बंद कर रहे हैं !अगर ये लोग अपने आचरण से इसी प्रकार के व्योहार करते रहे तो केंद्र में भाजपा की सरकार ५ साल भी नहीं चल पाएगी !मोदीजी के नेतृत्त्व में भाजपा की सरकार का गठन उनके द्वारा लोक लुभावने वायदों के आधार पर हुआ है !इसमें जनता को परेशान करने वाले दो मुद्दे महत्त्व पूर्ण हैं !(१) भ्रष्टाचार (२) महगाई ! केंद्र में भ्रष्टाचार नियंत्रित हुआ है !किन्तु भाजपा की राज्य सरकारें भ्रष्टाचार में आकंठ डूबी हुई हैं !भाजपा के मुख्यमंत्री, मंत्री ,पदाधिकारी सभी पर भ्रष्टाचारों के गंभीर आरोप हैं !महगाई में बहुत अधिक बृद्धि हुई है !भाजपा हिन्दू धर्म की बात करती है !इसीलिए इसको हिन्दू धर्म के आदर्शों का पालन करना चाहिए !धर्म के पालन के लिए आचरण की पवित्रता और शुचिता की बहुत आवश्यकता होती है !कोई भी व्यक्ति जिसका आचरण लोभ लालच और भौतिक संपत्ति और साधनो के अवैधानिक संग्रह में लगा हुआ है धार्मिक नहीं हो सकता है !कर्त्तव्य निष्ठा धार्मिक व्यक्ति की प्रथम पहचान है !और दूसरों की निंदा करने वाला व्यक्ति तो स्वप्न में भी धार्मिक नहीं हो सकता है !अगर मोदीजी के समर्थक धर्मनिरपेक्छ्ता के विरोधी हैं !तो कम से कम उन्हें महाभारत में व्यक्त किये गए व्यास जी के इन वचनो का अवश्य पालन करने का प्रयत्न करना चाहिए !
(१)जैसे फूलों के संसर्ग में रहने पर उनकी सुगंध वस्त्र ,जल ,तिल और भूमि को भी सुभासित कर देती है उसी पर प्रकार श्रेष्ठ धार्मिक पुरुषों के संसर्ग से ये गुण भी प्राप्त हो जाते हैं
(२)मूढ़, ,गाली गलौज और मनगढंत झूठे आरोप लगाने वाले लोगों से मिलंने जुलने से मोह जाल की उत्पत्ति होती है ! और साधु पुरुषों के संग से धर्म की प्राप्ति होती है इसीलिए विद्वानो ज्ञान बृद्ध पुरुषों तथा उत्तम स्वभाव वाले शांतिपरायण तपस्वी सत्पुरुषों का हमेशा संग करना चाहिए जिन पुरुषों का ज्ञान विद्या ,और आचरण ये तीनो उज्जवल हों उनका संग करना चाहिए क्योंकि उन महापुरुषों का साथ शाश्त्रों से भी बढ़कर है
(३)दुष्ट मनुष्यों के दर्शन ,स्पर्श ,उनके साथ वार्तालाप अथवा उठने बैठने से धार्मिक आचरणों की हानि होती है ! इसीलिए ऐसे मनुष्यों को कभी भी धर्म की प्राप्ति नहीं होती है ! और न ही बे धार्मिक होते हैं
(४)नीच पुरुषों का साथ करने से मनुष्यों की बुद्धि नष्ट होती है ! मध्यम श्रेणी के मनुष्यों का साथ करने से मध्यम होती है ! और उत्तम पुरुषों का संग करने से उत्तरोत्तर श्रेष्ठ होती है !
(५)ये सभी गुण पृथक पृथक और एक साथ सभी श्रेष्ठ धर्म परायण लोगों में विद्यमान होते हैं !
-----इसीलिए भाजपा सत्तासे बाहर हो जायेगी इसकी चिंता नहीं है !किन्तु आपके आचरण से हिन्दू धर्म की हानि होगी इसकी चिंता है !आप पर दोहरी जिम्मेदारी है !(१)सत्ता की (२)और धार्मिक आचरण की !इसीलिए अपने आचरण को शुद्ध पवित्र करो और इसको अपने विरोधियों की निंदा से मुक्त करके रचनात्मक कार्यों में लगाओ !
-------- जब से भाजपा की केंद्र में मोदीजी के नेतृत्त्व में भाजपा की सरकार बनी है !तब से महात्मा गांधी ,जवाहरलाल नेहरू तथा उनके परिवार और धर्म निर्पेक्छ्ता आदि पर शव्दिक हमले तीब्र हो गए हैं !इन हमलों में शव्दों की मर्यादा समाप्त हो गयी है ! आरोपण भद्दी गलियों से किया जा रहा है !मोदी समर्थक अपने इस व्योहार से भाजपा को बहुत नुकसान पहुंचा रहे हैं !और भाजपा को सत्ता में बने रहने के सभी दरबाजे बंद कर रहे हैं !अगर ये लोग अपने आचरण से इसी प्रकार के व्योहार करते रहे तो केंद्र में भाजपा की सरकार ५ साल भी नहीं चल पाएगी !मोदीजी के नेतृत्त्व में भाजपा की सरकार का गठन उनके द्वारा लोक लुभावने वायदों के आधार पर हुआ है !इसमें जनता को परेशान करने वाले दो मुद्दे महत्त्व पूर्ण हैं !(१) भ्रष्टाचार (२) महगाई ! केंद्र में भ्रष्टाचार नियंत्रित हुआ है !किन्तु भाजपा की राज्य सरकारें भ्रष्टाचार में आकंठ डूबी हुई हैं !भाजपा के मुख्यमंत्री, मंत्री ,पदाधिकारी सभी पर भ्रष्टाचारों के गंभीर आरोप हैं !महगाई में बहुत अधिक बृद्धि हुई है !भाजपा हिन्दू धर्म की बात करती है !इसीलिए इसको हिन्दू धर्म के आदर्शों का पालन करना चाहिए !धर्म के पालन के लिए आचरण की पवित्रता और शुचिता की बहुत आवश्यकता होती है !कोई भी व्यक्ति जिसका आचरण लोभ लालच और भौतिक संपत्ति और साधनो के अवैधानिक संग्रह में लगा हुआ है धार्मिक नहीं हो सकता है !कर्त्तव्य निष्ठा धार्मिक व्यक्ति की प्रथम पहचान है !और दूसरों की निंदा करने वाला व्यक्ति तो स्वप्न में भी धार्मिक नहीं हो सकता है !अगर मोदीजी के समर्थक धर्मनिरपेक्छ्ता के विरोधी हैं !तो कम से कम उन्हें महाभारत में व्यक्त किये गए व्यास जी के इन वचनो का अवश्य पालन करने का प्रयत्न करना चाहिए !
(१)जैसे फूलों के संसर्ग में रहने पर उनकी सुगंध वस्त्र ,जल ,तिल और भूमि को भी सुभासित कर देती है उसी पर प्रकार श्रेष्ठ धार्मिक पुरुषों के संसर्ग से ये गुण भी प्राप्त हो जाते हैं
(२)मूढ़, ,गाली गलौज और मनगढंत झूठे आरोप लगाने वाले लोगों से मिलंने जुलने से मोह जाल की उत्पत्ति होती है ! और साधु पुरुषों के संग से धर्म की प्राप्ति होती है इसीलिए विद्वानो ज्ञान बृद्ध पुरुषों तथा उत्तम स्वभाव वाले शांतिपरायण तपस्वी सत्पुरुषों का हमेशा संग करना चाहिए जिन पुरुषों का ज्ञान विद्या ,और आचरण ये तीनो उज्जवल हों उनका संग करना चाहिए क्योंकि उन महापुरुषों का साथ शाश्त्रों से भी बढ़कर है
(३)दुष्ट मनुष्यों के दर्शन ,स्पर्श ,उनके साथ वार्तालाप अथवा उठने बैठने से धार्मिक आचरणों की हानि होती है ! इसीलिए ऐसे मनुष्यों को कभी भी धर्म की प्राप्ति नहीं होती है ! और न ही बे धार्मिक होते हैं
(४)नीच पुरुषों का साथ करने से मनुष्यों की बुद्धि नष्ट होती है ! मध्यम श्रेणी के मनुष्यों का साथ करने से मध्यम होती है ! और उत्तम पुरुषों का संग करने से उत्तरोत्तर श्रेष्ठ होती है !
(५)ये सभी गुण पृथक पृथक और एक साथ सभी श्रेष्ठ धर्म परायण लोगों में विद्यमान होते हैं !
-----इसीलिए भाजपा सत्तासे बाहर हो जायेगी इसकी चिंता नहीं है !किन्तु आपके आचरण से हिन्दू धर्म की हानि होगी इसकी चिंता है !आप पर दोहरी जिम्मेदारी है !(१)सत्ता की (२)और धार्मिक आचरण की !इसीलिए अपने आचरण को शुद्ध पवित्र करो और इसको अपने विरोधियों की निंदा से मुक्त करके रचनात्मक कार्यों में लगाओ !
Tuesday, 17 November 2015
सर्वमान्य सिद्धांत है !कि जिस भूमि पर हमारा जन्म होता है ! और जहाँ का अन्न जल हम ग्रहण करते हैं और जिस भूमि में ही जीवन के अंत में सुपुर्दे खाक किये जाते हैं !वह भूमि माता पिता के सामान पूजयनीय होती है !जिस प्रकार संतान माता पिता का क़त्ल नहीं करते हैं !उसी प्रकार मातृभूमि में जन्मे मानवों का क़त्ल भी नहीं करना चाहिए !किन्तु ये आत्तंकवादी इसके विपरीत मत को मानते हैं !बे कहते हैं कि अगर अल्लाह की सजा से बचना है !तो जो अल्लाह को नहीं मानते हैं ! उनको उनकी जमीन में रहकर ही उनका क़त्ल कर दो !इसिलीए फ्रांस में जन्मे पले बढे और उसी भूमि का अन्न जल ग्रहण करने और वहीं पर शिक्छा प्राप्त कर जीविका चलाने वाले इन कट्टर चरम पंथियों को अपनी ही मात्र भूमि फ्रांस में निर्दोष लोगों की हत्या करने में कोई शर्म नहीं आई ! और ना ही उन्हें कोई अपराध बोध हुआ !और अभी भी उनके हौसले इतने बुलंद है कि बे फ्रांस पर और आत्तंकवादी हमले करने की धमकी दे रहे हैं !जो चरमपंथी मानवता के सारे मानदंडो को ताक में रख कर कत्ले आम कर रहे हैं !येसेइस्लामिक संगठन को नष्ट करने का जो संकल्प फ्रांस की सरकार ने लिया है !उसके अलावा सरकार के पास दूसरा कोई विकल्पनही था !भारत सरकार के राज्य गृह मंत्री ने भी एक वक्तव्य में कहा है !कि फ्रांस के इस संकट के समय में भारत सरकार फ्रांस के साथ है !और अगर आवश्यकता हुई तो भारत भी इस्लामिक संगठन को समाप्त करने में फ्रांस के साथ युद्ध में हिस्सा लेगा
स्वामी भी अभी यही कह रहे हैं !कि अगर राहुल गांधी ने ब्रिटेन की कंपनी में यह व्योरा दिया है ! कि वह ब्रिटिश नागरिक हैं !तो इसकी जाँच करायी जाय ! जाँच का परिणाम आने के पहले प्रेस कांफ्रेंस कर यह घोसणा करने की क्या आवश्यकता थी ? !कि राहुल गांधी ब्रिटिश नागरिक है और उनकी संसद सदस्य्ता समाप्त की जानी चाहिए !मीडिया भी स्वामी के इन सनसनी मचाने वाले किसी भी राजनेता या विख्यात व्यक्ति के विरुद्ध आरोपों को इतनी प्रमुखता से उछालता है !जैसे स्वामी ने आकाश में भी जीवन है इसकी खोज कर ली हो !स्वामी के अधिकांश आरोप सही सिद्ध नहीं हो पाते हैं !न्यायालय ने भी उनके अनेक रिट पिटिसोनो और याचिकाओं को निरस्त किया हैं !स्वामी की दृष्टि कभी भी निष्पक्छ नहीं रहती है !या तो बे प्रशंसा करेंगे या आरोप लगाएंगे !उनकी इस आदत के शिकार भाजपा के शीर्ष पुरुष भारत रत्न श्री बाजपेयी जी भी हो चुके हैं !और भारत के पूर्व राष्ट्रपति वेंकट रमन पर भी बे आरोप लगा चुके हैं !इस समय गांधी परिवार उनके निशाने पर है !इसलिए जितने भी आरोप उनकी जेब में होंगे बे सभी एक एक कर सामने आते जायेंगे !किन्तु स्वामी हों या जेठमलानी !मोदी जी इनको कोई महत्त्व पूर्ण जिम्मेदारी देने वाले नहीं हैं !क्योँकि वह भी भलीभांति जानते हैं !इनकी नजर का शिकार कोई भी कभी भी हो सकता है !
Monday, 16 November 2015
लाला लाजपत राय उन देश भक्तों में थे !जिनके दिल दिमाग में देश की आजादी के साथ भारत के भविष्य के नव निर्माण की भी कल्पना और योजनाएं थी ! ब्रिटिश पार्लियामेंट में भारतीय सांसद दादा भाई नौरोजी और स्वंत्रता संग्राम सेनानी लाला जी ने भारत का आर्थिक सर्वे कर ब्रिटिश शाशन में हुई भारत की आर्थिक अवनति का यथार्थ चित्रण प्रस्तुत किया था ! लालाजी ऐसे देश भक्तों का पुण्य स्मरण तो देशबासी करते हैं !किन्तु उन्होंने जो आदर्श अपनी सुख सुविधाओं और जीवन को बलिदान कर प्रस्तुत किया है !उसका अनुपालन देश में न तो राजनैतिक जीवन में और ना सामाजिक, शैक्छिक ,न्याय और मीडिया आदि के छेत्रों में भी नहीं दिखाई देता है !परतंत्र भारत में स्वतंत्रता के संवाहकों में त्याग की हबा तीब्र गति से बाह रही थी !स्वतंत्रता प्राप्ति के लिए समर्पित सभी गांधीवादी अहिंसक और भगत सिंह आदि के क्रांतिकारी मार्ग का अनुसरण करने वाले सभी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी अपने जीवन को और सभी सुख सुविधाओं को बलिदान करने के लिए उत्साहित रहते थे !और उनकी सम्पूर्ण प्रितस्पर्धा देश के लिए सर्वस्व त्याग की थी !किन्तु आजाद भारत में अब प्रति स्पर्धा का स्वरुप त्याग और बलिदान की बजाय भोग का हो गया है !आज की प्रतिस्पर्धा सभी साधनो से धन संपत्ति ,एवं पद प्रतिष्ठा प्राप्ति की है !और इसके लिए हम लोग लोकतान्त्रिक व्यबस्था की भी बलि देने को तैयार दिखाई देते हैं !अब लोग त्याग तपस्या राष्ट्र प्रेम आदि की प्रशंशा शव्दों में तो करते हैं !लाला लाजपत राय ऐसे देश भक्तों का स्मरण भी करते हैं !उनकी स्मृति में श्रद्धा सुमन भी अर्पित करते हैं !किन्तु उनकी त्याग तपस्या और देश भक्ति की विरासत को थोड़ा सा भी अपने जीवन में उतारने का प्रयत्न नहीं करते हैं ! आजाद भारत में देश वासियों को लाला लाजपत राय जैसा जीवन बलिदान न ही करना है !अब उनकी स्मृति को सामाजिक जीवन में उतारने के लिए !सिर्फ हम जहाँ भी है !और जिस छेत्र में भी कर्मरत हैं !वहां रहकर अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से निर्वहन करने से ही इन देशभक्तों की विरासत की पूर्णता की प्राप्ति हो जायेगी
इस्लामिक संगठन इस शदी का क्रूरतम संगठन है !इसका विनाश सुनश्चित है !किन्तु इसकी इन बेहद अमानवीय क्रूर निर्दोष नागरिकों की हत्या करने के कारण पश्चिमी देशों में जो विश्व के किसी भी देश जाति धर्म के स्त्री पुरुषों को जो स्थायी और अस्थायी तौर पर स्वतंत्रता पूर्वक रहने की जो व्यबस्था है !उस पर प्रितिबंध लगने का खतरा बढ़ गया है !यद्द्पि अभी भी इन क्रूर हत्याओं के बाद भी पश्चिमी देशों में इस तरह के लोग हैं !जो इन देशों में किसी भी देश औरधर्म के लोगों को निवास की स्वतन्त्रता बरकरार रखने के पक्छ में हैं !किन्तु इन देशों का बहुमत अब बहुलताबाद के सिद्धांत के खिलाफ खड़ा हुआ दिख रहा है !और वह जोर देकर कहने लगे हैं कि मुसलमानो का प्रवेश निषेध होना चाहिए !अमेरिका में २५०० मस्जिदें हैं !फ्रांस में सबसे ज्यादा ५० लाख मुसलमान रहते हैं !किन्तु आश्चर्य की बात यह है !कि फ्रांस में ही पैदा हुए और पले बढे तथा फ्रांस के निवासियीओं के साथ ही शिक्छा ग्रहण की !किन्तु इनमे फ्रांस की धार्मिक स्वतंत्रता के संस्कार पैदा नहीं हुए !और इस्लामिक संगठन में शामिल हो गए !तथा जिस देश का अन्न ,जल खाया पिया उसी देश के नागरिकों को मौत के घाट उतार दिया ! ये इस्लामिक संगठन अब पूरी तरह विश्व के तमाम शक्ति शाली देशों की निगाहों में विश्व शांति के लिए गंभीर खतरा बन गया है !अब दो धार्मिक विचार धाराओं में अंतिम और परिणाम परक युद्ध होगा !एक तरफ यह इस्लामिक संगठन और इसके समर्थक देश और साथी होंगे !जो विश्व को इस्लामिक स्टेट बनाना चाहते हैं !जिनमे कुरान के कानूनलागू होंगे !और धार्मिक अभि व्यक्ति की उतनी ही स्वतंत्रता होगी जो इस्लाम के अनुकूल होगी !और इस्लामिक कानून ही समाज व्यबस्था को नियंत्रित करेंगे ! और दूसरी और बे देश होंगे जो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और धार्मिक स्वतंत्रता के पक्छ धर है !इस्लामिक संगठन का हौसला इतना बड़ा हुआ है !कि वह फ्रांस में हुए हमले के समान अनेक हमले विश्व के सभी उन देशों पर करेगा !जो इस्लामिक संगठन के विरोधी है !यह तो भविष्य ही बताएगा !कि इस्लामिक संगठन का विश्व इस्लाम बाद का ख्याली पुलाव सफल होता है !या फिर इसको नेष्ट नाबूत करने के प्रयत्न में लगे देश सफल होते हैं !
Sunday, 15 November 2015
आत्तंकवाद मीडिया की जिम्मेदारी ------यूरोपियन मीडिया और भारत की मीडिया में वैसा ही फर्क है! जैसा यहाँ की राजनीति और यूरोपियन देशों की राजनीति में है !भारत ने लगभग १२०० साल की गुलामी के बाद आजादी प्राप्त की है !और आजादी की बड़ी भारी कीमत देश के बिभाजन के रूप में चुकाई है !जिस धार्मिक आधार पर देश का विभाजन हुआ !और लाखों लोगों को अपनी जन्मभूमि से पलायन करना पड़ा और लाखों लोगों की हत्याएं हुई उसके बाद भी देश में हिन्दू मुसलिम में सद्भाव कायम नहीं हो सका !आज भी इन दोनों धर्मों में दंगे और फसाद आये दिन होते ही रहते हैं !देश में अभी भी स्वतंत्र राष्ट्रीय चेतना के दर्शन न मीडिया में होते है !और ना राजनेताओं में होता है !मीडिया सत्ता धारी दल के नेताओं के आँख मीच कर समर्थन करती है !और सत्ता धारी दल के नेता सत्ता में बने रहने के लिए मीडिया के उपयोग करते हैं !इन दोनों के गठ बंधन के कारण आत्तंकवादी घटनाओं जैसी गंभीर ,दर्दनाक और क्रूरता की हद तक अमानवीय घटनाओं पर भी मीडिया की निष्पक्छ समाधानकारक राय प्रगट नहीं होती है !जब कोई अत्तंकवादी हिंसक घटना घटती है !तो विपक्छ के नेता सरकार से त्यागपत्र कीमाँग करते है !और मीडिया राजनेताओं के सुर में सुर मिलाकर आत्तंकवाद के बास्तविक समाधान परक वक्तव्य देने के बजाय यह कहना शुरू कर देती है !की आत्तंक वादियों का कोई धर्म नहीं होता है !और अत्तंकवाद के सहयोगी किसी व्यक्ति को पुलिस पकड़ती है !कुछ लोग जोर शोर से हल्ला मचाना शुरू कर देते हैं !कि अल्पसंख्यकों को झूठा फसाया जा रहा है !आत्तंकवाद की समस्या अधर में लटकी रह जाती है !किन्तु पश्चिमी देशों में इस तरह की बेतरतीब व्यान बाजी ना तो नेताओं के तरफ से होती है !और ना ही मीडिया सही रपोर्टिंग करने से कतराती है !मीडिया और राजनेता सभी एकस्वर से देश की रक्छा और आत्तंकवाद के विरुद्ध खड़े हो जाते हैं !पेरिस में जो आत्तंकवादी घटना घटी है !उसके साथ सारा देश और मीडया साकार के साथ खड़ा हुआ है !किन्तु भारत के एक मंत्री आजमखान ओए उच्चतम न्यायालय के अवकाश प्राप्त न्यायाधीश आत्तंकवादियों के समर्थन में व्यान बाजी करते दिखाई दे रहे हैं !जब तक देश में धार्मिक ,जातीय भेद भौं का विलीनी करण राष्ट्रिय भाव में नहीं बदलता तब तक भारत आत्तंकवाद के विरुद्ध पश्चिमी देशों की तरह एक जुट होकर भारत खड़ा नहीं हो सकता है !मीडिया अगर निर्भयता पूर्वक आत्तंकवाद के विरुद्ध अपनी राय प्रगट करे तो देश में ऐसा जनमत तैयार किया जा सकता है !जो अत्तंकवाद के सफाये में मददगार हो सकता है !
Saturday, 14 November 2015
पेरिस में आतंकवादी हमला और भारत में बढ़ता हुआ धार्मिक उन्माद ------यद्द्पि इन दोनों में कोई सामंजस्य नहीं है !किन्तु धार्मिक उन्माद और क्रूरता के उत्पन्न करने वाले और उसको समग्र विश्व में विस्तार देने वाली बृत्ति और सोच से भारत भी मुक्त नहीं है !मुम्बई समेत देश के अनेक भागोंमे पाकिस्तान के द्वारा प्रायोजित संरक्छित और रचित अनेक आत्तंकवादी हमले भारत पर हो चुके हैं ! और आज भी हो रहे हैं !इसमें देश के भी कुछ लोग शामिल पाये गए हैं !और जेलों में बंद है !इस धार्मिक उन्माद का प्रभाव उत्तरप्रदेश में अधिक दिखाई देरहा है !अलीगढ में इसी उन्माद का शिकार गौरव का परिवार हुआ ! और और उसकी मृत्यु हो गयी !तथा उसके परिवार की आर्थिक छति भी हुई !राज्य सरकार ने गौरव की मृत्यु पर १० लाख रूपए का चेक देने की कोशिश की जिसको गौरव के परिवार ने यह कहकर लेने से इंकार कर दिया कई उसे और उसके परिवार की उसी प्रकार की मदद दी जाय जो अख्लाख़ की मृत्यु पर उसके परिवार को दी गयी थी !इस बात पर विचार किया जाना चाहिए कि धार्मिक उन्माद की शुरुआत कैसे होती है !और उसको विकसित कौन करता है ? !मेरी समझ में इसका जन्म भारत के संविधान का अनादर और उसमे राष्ट्रीय एकता के लिए वर्णित वैधानिक कानूनों का पालन ना करने के कारण धार्मिक उन्माद का जन्म होता है !और फिर राजनेता उसका विकास और विस्तार करते हैं !संविधान चाहता है !कि भारत में रहने वाले सभी लोग जिस प्रकार से सभी नदियां और नाले अपने रूप और नाम को खो कर समुद्र में मिलकर समुद्र बन जाते हैं !उसी प्रकार भारत के सभी धर्म भारत रूपी राष्ट्र के रूप में सिर्फ भारतीय बन जाएँ !और अपनी धार्मिक अस्मिता और जातिगत भावनाओ को विधान के पालन में वाधा नहीं बन ने दे !यदि धार्मिक कटटरता के कारण जमीन पर इसका पालन न हो तो सरकार इसका पालन ईमानदारी से कराये !जमीन पर तो इसका पालन हो नहीं रहा है !इसका प्रमाण देश में लगातार होने वाली घटनाएँ है !और सरकारें भी इस धार्मिक उन्माद को विस्तार देने में लगी हुई हैं !कुछ सरकारें हिन्दू समर्थक है !तो कुछ मुसलिम समर्थक !दादरी में अखलाख की हत्या हुई !तो राजनेताओं और तथाकथित बुद्धि जीवियों ने इसको धार्मिक उन्माद का ऐसा रूप प्रदान किया कि अनेक पुरुष्कार प्राप्त लोगों ने अपने पुरूष्कार लौटा दिए !और राज्य सरकार ने भी अखलाख के परिवार पर आर्थिक सहायता की मदद की बौछार कर दी !और अभी एक उत्साही सज्जन २५ नवम्बर से अखलाख के निवास से दिल्ली तक पीस मार्च निकालने वाले है !किन्तु ना सरकारों ने और ना बुद्धि जीवियों ने इस तथ्य पर विचार किया कि अखलाख की हत्या अपराधिक बृत्ति के धार्मिक लोगों के द्वारा किया गया गंभीर अपराध था !दादरी गाओं के लोगों या हिन्दुओं का इसमें कोई हाथ नहीं था !यह एक धार्मिक पागलपन से ग्रस्त कुछ लोगों के द्वारा की गयी घटना थी !और हत्यारे गिरफ्तार कर लिए गए हैं !और उन पर अपराध सिद्ध होने पर उन्हें दण्डित भी किया जायेगा !उसी प्रकार से जो अलीगढ में घटना घटी है !उसमे मुसलमानो की कोई सक्रियता नहीं है !यह घटना भी धार्मिक उन्माद से ग्रस्त कुछ अपराधी किस्म के मुसलमानो ने की है !और उनको भी कानून के अनुसार दण्डित किया जाएगा !किन्तु सरकारें और बुद्धि जीवी इन घटनाओं को हिन्दू मुसलिम से जोड़ देती हैं !और उनका निस्तारण इसी रूप में करती हैं !और हिन्दू मुसलिम भेद भाव को बढाकर धार्मिक उन्माद का पोषण करती हैं १यहि कारण है की अब गौरव का परिवार भी राजयसरकार से वही मांग कर रहा है !जो अखलाख के परिवार को दी गयी थी !
नेहरू जी विराट व्यक्तित्त्व के धनी थे !राजनीति में कभी कभी ऐसा भी होता है ! कि गीदड़ शेर की मांद में प्रवेश कर जाता है !ऐसा ही आज नेहरूजी के साथ हो रहा है !नेहरूजी ने अटल बिहारी वाजपेयी की मुक्त कंठ से एक विदेशी प्रितिनिध मंडल के सामने प्रशंसा की थी ! और यहाँ तक कह दिया था की यह भारत के भविष्य के प्रधान मंत्री हैं !बाजपेयी जी ने भी इस परम्परा का जीवन भर पालन किया !बे अजात शत्रु रहे !नेहरूजी के पिता पंडित मोतीलाल नेहरू अपने समय के विख्यात वकील थे !उनका जीवन बहुत ठाट बाट का था !नेहरूजी अकेले पुत्र थे !उनका भवन आनंद भवन सभी सुख सुविधाओं से युक्त था !आज भी अलाहाबाद में उसके मुकाबले का भव्य भवन देखने में नहीं आता है !जब गांधीजी के प्रभाव में आकर नेहरूजी ने खादी के कपडे पहनना शुरूकिया और रुखा सूखा सादा भोजन करने लगे !तो उनके पिता का गुस्सा आसमान पर पहुँच गया !और उन्होंने गांधीजी से नेहरूजी की शिकायत की !किन्तु बे भी अपने पुत्र की तरह गांधीजी के चुंबकीय प्रभाव से मुक्त नहीं रह सके !और कांग्रेस में सम्मिलित हो गए थे !बाद में आनंद भवन राजनैतिक गतिविधियों का केंद्र और समाजवादी कोंग्रेसियों का आश्रय स्थल बन गया था !डॉ लोहिया जयप्रकाश नारायण आदि प्रायः वहां देखे जाते थे !मोतीलाल जी नेहरू की सादगी देख कर यह समझ गए थे !कि उनका पुत्र आनंद भबन को मेन्टेन नहीं कर पायेगा इसीलिए उन्होंने आनंद भवन के परिषर में ही एक और भवन का निर्माण करा दिया था !नेहरू जी १७ साल तक देश के प्रधान मंत्री रहे किन्तु आनंद भवन का गृह कर ना चुका पाने के कारण नगरनिगम ने आनंद भवन की कुड़की करा दी थी !नेहरूजी की मृत्यु के बाद इंदिरा गांधी ने आनंद भवन और स्वराज भवन दोनों राष्ट्र कोदान कर दिये थे !जबकि इंदिराजी के पास रहने के लिए खुद का मकान नहीं था! नेहरूजी की राष्ट्रीय सेवाओं को नकारने का प्रयत्न करने वाले लोगों को यह देश नकार देगा ! नेहरूजी के जीवन काल में यह प्रश्न उठता था कि नेहरू के बाद कौन ?उनके जीवन काल में कोई भी राजनैतिक दल उनके नेतृत्त्व को चुनौती नहीं दे पाया था !बे अपने राजनैतिक विरोधियों की आलोचना भी नहीं करते थे !उनके चुनावी भासणो में देश विदेश की चर्चा अधिक रहती थी !चुनाव और प्रत्याशी के सम्बन्ध में एकाध लाइन बे बोलते थे !राजनेता नेहरूजी से बहुत कुछ ग्रहण कर सकते हैं !
Friday, 13 November 2015
नेहरू का मूल्यांकन ---------- इस समय देश में नेहरू की घोर विरोधी सरकार केंद्र में बैठी हुई है ! इसीलिए देश के प्रमुख समाचार पत्रों में नेहरू जी के मूल्यांकन के सम्बन्ध में तटस्थ और निष्पक्छ मूल्यांकन की आशा नहीं की जा सकती है !जो कांग्रेसी विचार की पोषक पत्रिकाएं या समाचार पत्र हैं !बे भी नेहरूजी का निष्पक्छ मूल्यांकन प्रस्तुत नहीं करेंगे !राजनैतिक नेताओं के मूल्यांकन तो राजनैतिक दृष्टि से ही किये जाते हैं !इसीलिए इन मूल्यांकनों का प्रमुख उद्देश्य राजनैतिक लाभ और हानि का ही रहता है !फिर भी नेहरूजी ऐसे महान पुरुषों के बारे में गैर राजनैतिक दृष्टि से भी विचार जो राजनीति से प्रेरित नहीं है ! उनके द्वारा किया जा सकता है !और जरूर ऐसा किया भी जा रहा होगा !जब से केंद्र में भाजपा की सरकार आई है !तब से विशेष तौर पर भाजपा के द्वारा सरदार पटेल को प्रधान मंत्री न बनाये जाने और उनकी उपेक्छा के लिए नेहरूजी को प्रत्यक्छ और अप्रत्यक्छ रूप से जिम्मेदार ठहराया जा रहा है !और इसी आवाज को बुलंद भाजपा के सभी छोटे मोटे नेता भी कर रहे हैं !पटेल की इस प्रसंशा के पीछे भी राजनैतिक लाभ की ही आकांछा बलवती मालूम पड़ती है !अगर ऐसा न होता तो नेहरू जी पर अनावश्यक आरोप लगाने वाले ये लोग इस सम्बन्ध में सही तथ्य अवश्य प्रस्तुत करते !१९४६ में देश में केंद्र में अंतरिम सरकार की रचना हुई तभी से सरदार के कन्धों पर गृह मंत्री की भारी से भारी जिम्मेदारी आई सरदार के सर पर कार्य का अपार बोझ था ! उनका स्वास्थ्य इस विकट जिम्मेदारी का निर्बहन करते करते करते बुरी तरह बिगड़ गया था !उनका स्वास्थ्य आजादी की लड़ाई केदौरान भी ठीक नहीं रहा था !बे बार बार पर अश्वस्थ हो जाते थे !गांधी जी उनके स्वास्थ्य को लेकर विशेष तौर पर चिंतितरहते थे !अश्वस्थ रहते हुए भी उन्होंने देश की ६५० रियासतों का विलय किया ! उन्होंने गृह मंत्री पद पर ४साल कार्य किया ! किन्तु हृदय रोग के कारण अपने कार्यकाल के दो साल उन्होंने अस्पताल में रहकर ही चलाये ! उनका ह्रदय रोग लगातार बढ़ता गया डॉक्टरों ने उन्हें सलाह दी थी ! कि दिल्ली की प्रतिकूल जलवायु और वातावरण से मुक्त होकर बम्बई जाएँ इसलिए १५--१२--१९५० को उन्हें बम्बई ले जाया गया ! सरदार को अपनी मृत्यु का आभास हो गया था ! उन्होंने अपने एक मित्र से कहा था कि अब मेरे जीवन का अंत आ रहा है ! १५--१२--१९५० को बम्बई में उनका निधन हो गया था !इस तथ्य की चर्चा कभी भी ये राजनैतिक लाभ से ग्रस्त व्यक्ति कभी नहीं करते हैं !यह बात सत्य है !कि नेहरूजी और पटेल में वैचारिक मतभेद थे !किन्तु इन वैचारिक मत भेदों में उनके स्नेह में कभी कमी नहीं आई थी !दोनों ही महान पुरुष थे !और पद लोलुप नहीं थे !तथा अपने राजनैतिक पदों से ज्यादा ऊँचे थे !३० जनबरी १९४८ को जिस दिन गांधी जी शहीद हुए ४बजे सरदार अपनी पुत्री के साथ गांधी जी से मिलने पहुंचे थे ! और उनसे गांधीजी की एक घंटे से अधिक बात चीत हुई थी ! गांधी जी ने सरदार से कहा था कि यद्द्पि मेने पहले विचार प्रगट किया था कि तुमको या जवाहर को मंत्रिमंडल से हट जाने को कहूँ ! किन्तु अब में निश्चित तौर पर इस नतीजे पर पहुंचा हूँ ! कि दोनों का मंत्रिमंडल में रहना अनिवार्य है ! आप दोनों में जरा सी भी फूट इस स्थिति में विनाशकारी सिद्ध होगी ! में इस विषय पर आज अपनी प्रार्थना सभा में बोलूंगा ! और नेहरू मुझ से प्रार्थना सभा के बाद मिलेंगे तब उनसे भी यही बात कहूंगा !किन्तु गांधी जी प्रार्थना सभा के पूर्व ही मार दिए गए थे !!सरदार और नेहरू के बीच विचारधारा का संघर्श गांधी जी के निधन के बाद भी चलता रहा किन्तु नेहरू के प्रति बुनियादी बफादारी में रत्ती भर फर्क नहीं आया ! २ अक्टुबर १९५० को सरदार पटेल ने इंदौर में भासण में कहा था ! कि हमारे नेता पंडित जवाहर लाल नेहरू हैं ! गांधीजी ने अपने जीवन काल में उन्हें अपना उत्तराधिकारी घोषित किया था ! गांधीजी के सभी सिपाहियों का यह धर्म है ! कि बे उनके आदेश का पालन करें ! जो गांधी जी के आदेश का ह्रदय से पालन नहीं करेगा वह ईश्वर के सामने पापी सिद्ध होगा ! में बेवफा सिपाही नहीं हूँ ! में जिस स्थान पर हूँ वहीं ठीक हूँ ! में इतना ही जानता हूँ कि जहाँ बापू ने मुझे रखा था वही अब भी में हूँ ! महान देश भक्त सरदार पटेल को सत्ता प्राप्ति का मोहरा बनाकर या सत्ता में बने रहने का आधार बनाकर मनगढंत व्यानबाजी करना सरदार का अपमान करना है !सत्ता समुद्र में उठती गिरती तरंगो की तरह है !इसको सभी राजनैतिक नेताओं को ध्यान में रखना चाहिए !आज नेहरूजी पर धर्म निर्पेक्छ्ता को लेकर उनको हिन्दू धर्म के विध्वंसक के रूप में और उनपर जो चारित्रिक पतन के बे बुनियाद हमले किये जा रहे हैं !बे सही नहीं है !नेहरूजी की देश भक्ति और समाजवादी विचार के प्रति प्रतिबद्धता, लोकतान्त्रिक भाबना उत्कृष्ट ईमानदारी और देश को उन्नति की ओर ले जाने के लिए उनकी असाधारण कर्मनिष्ठा आदि गुणों को धारण करने की आवश्यकता है !जिसका लोप आज की राजनीति में तेजी से होता दिखाई दे रहा है !
भारत में इनटॉलेरेंस का कारण घटनाएँ कम भड़काऊ व्यान बाजी अधिक है !मोदी के तथाकथित समर्थक जो भड़काने वाली व्यान बाजी करते हैं !उसका परिणाम यह होता है !कि देश में विरोधी खेमे भी सक्रिय होकर इन बेतुके और भड़काऊ व्यानो को लेकर क्रिया शील हो जाते हैं !और बिना मतलब देश में शाव्दिक तनाव उत्पन्न होजाता है !मोदी के सत्ता में आने के पहले कभी भी अपने आपको हिंदुत्तव का समर्थक कहने वाले इतने उग्र और भड़काऊ भासण देने वाले नहीं हुए !बाजपेयी जी भी देश के प्रधान मंत्री रहे !किन्तु कभी भी मुसलमानो और ईसाइयों के प्रति इतने तीब्र तेवर भाजपा ,संघ या हिन्दू वादियों के और से नहीं दिखाए गए !कभी किसी ने नहीं कहा था ! कि भारत हिन्दू राष्ट्र बन जाएगा !और यह भी नहीं कहा गया था ! की मुसलमान देश छोड़ कर पाकिस्तान चले जाएँ !न कभी यह नारा बुलंद किया गया था कि गोडसे की मूर्तियां देश में स्थापित की जाएँ !न कभी नेहरूजी या कांग्रेस पर कभी अलोकतांत्रिक असभ्य हमले किये गए !इसका क्या कारण है !इसको समझने की चेस्टा की जानी चाहिए !कि ऐसा क्यों हो रहा है ?और इससे भाजपा को नुकसान हो रहा है !या लाभ हो रहा है ?मोदी जी से जब इनटॉलेरेंस के बारे में प्रश्न किया जाता है !तब बे भारत को गांधी और बुद्ध का देश कहते हैं !ऐसा उनके समर्थक भारत में क्योँ नहीं कहते हैं ?मोदी लगातार अपने भासणो में कहते हैं !सबका साथ सबका विकास !फिर उनके केंद्रीय मंत्री क्यों जहर उगलते हैं ?मंत्रिमंडल में राजनाथ सिंह और अरुण जेटली कैसे प्रबुद्ध और संविधान की समझ और आदर करने वाले लोग भी हैं !उनको प्रवक्ता के रूप में या उनके मार्ग दर्शन में जिम्मेदार लोगों को व्यान देने का उत्तर दायित्त्व क्योँ नहीं दिया जाता है ?ये लोग सम्वैधानिक मर्यादा के अंदर मोदीजी की सरकार क्योँ नहीं चलने देना चाहते हैं ?क्या इनको दिल्ली और बिहार के चुनाव परिणाम कोई सीख नहीं दे रहे हैं ? !इन्हे यह समझाना चाहिए की यदि इस तरह की भड़काऊ व्यान बाजी जारी रही !तो देश के बाहर मोदीजी को परेशानी खड़ी होगी और देश के अंदर जो होगा !वह भी इन लोगों की समझ में आ जाएगा !लोकतान्त्रिक व्यबस्था में संविधान के अनुसार आचरण करो !सत्ता हमेशा नहीं रहेगी !आये हो तो वायदों के मुताबिक कार्य करो !
Thursday, 12 November 2015
These
days persons politicise poverty.They speak a lot about the poverty
sticken people .But the paradox is that most of us including political
bosses and rich ,wealthy and general well to do persons are engaged and
busy in creating problems for poor people.If we are in service we
donot hesitate in taking bribes and ileagally consume most of the amount
reserved for welfare of downtrodden and deprived people .If we are
Dalits and backwarad we try to benefit our selves and our families from
the facilities given by the government to the Dalits and backwards
showing utmost apathy to those sections to which we belong.We are so
cruel that we usurp even houses built for the rehabilitation of these
poor people .AS government servant we want bribe in every scheme of
welfare ment for poor and the needy.Our journey of exploitation has no
station.The train of exploitation is running without stop with full
speed and still we dare to utter words of sympathy for these
destitutes.We are not ashamed of our black deeds.Our hollow words of
sympathy can not remove poverty. We are swindlers,hipocrites and we must
change our ways to remove poverty.Not to prove as jokers to join with
them in festivals to provide some sweets and clothes.
Wednesday, 11 November 2015
भारत अनादि काल से धार्मिक देश रहा है !इसलिए आत्मा परमात्मा का जितना विशद ज्ञान इस भूमि पर व्यक्त हुआ है !विश्व के किसी अन्य देश में नहीं हुआ !ऋषियों ने काल में होने वाले परिवर्तनों और उनमे धर्म के स्वरूपों को भी अध्यात्म से प्राप्त अपनी अंतर दृष्टि से काल को सतयुग ,त्रेता ,द्वापर ,और कलियुग में विभाजित बताया है !और इन काल खंडो में धर्म के स्वरुप स्वभाव और प्रभाव का भी बर्णन किया है !सतयुग धर्म प्रधान युग होता है !और कलियुग जो इस समय चल रहा है !भोग प्रधान होता है !इस युग में धर्म की अवनति होती है !और धर्म को आत्मज्ञान का साधन ना मानकर लोग भोग प्राप्ति का साधन मान लेते हैं !इसीलिए इस युग में धर्म के रूपमे ढोँग पाखंड झूठ और छल कपट आदि प्रभावी हो जाते हैं !धर्म के नाम से अधर्म प्रभावी होजाता है !इसीलिए समय समय पर धर्म को गति और उसका सही मर्म समझाने के लिए ऋषियों सन्यासियों और साधुओं का जन्म होता रहता है !इसी श्रंखला में आदि शंकराचार्य का जन्म हुआ !और उन्होंने वैदिक धर्म का सही रूप भारत में प्रस्तुत किया !और चारों दिशाओं में चार शंकराचार्यों के पीठ स्थापित किये !जिनका एकमात्र उद्देश्य वैदिक धर्म संस्कृति का शाश्त्रों द्वारा अनुमोदित वैदिक धर्म का ज्ञान लोगों तक पहुंचाना है !शंकराचार्य स्वामी स्वरूपा नन्द यही कार्य कर रहे हैं !यहाँ इस लेख में भी यह बात बतायी गयी है !कि सांई जन्म से मुसलमान थे !और उनके अंतिम संस्कार में विवाद भी उत्पन्न हुआ था !वह एक चमत्कारी फ़क़ीर थे !किन्तु उनको ईश्वर नहीं माना जा सकता है !वैदिक धर्म के अनुसार भगवान उसको कहा गया है !जो सम्पूर्ण विशाल ब्रह्माण्ड और जीव जगत का निर्माता ,पालन करने ,वाला ,और संघार करने वाला है !ये सभी लक्छण किसी भी साधु संत या फ़कीर में नहीं हो सकते हैं !इसीलिए फ़क़ीर आदर और श्रद्धा का पात्र तो हो सकता है !किन्तु वैदिक धर्म के अनुसार वह ईश्वर नहीं हो सकता है !यही बात शंकराचार्य वैदिक धर्म के मान ने वालों से कह रहे हैं !और साईं की ईश्वर रूप में पूजा का निषेध कर रहे हैं !
आत्मशक्ति बनाम भौतिक शक्ति -------जिस प्रकार समुद्र में लहरें उठती और गिरती हैं ! उसी प्रकार संसार में भी आत्मशक्ति और भौतिक शक्ति की लहरें उठती और गिरती हैं !भारत में प्राचीन काल के ऋषिओं ने आत्मशक्ति की लहरों के उठने का श्रेष्ठ का ल सतयुग बताया है !और भौतिक शक्तियों के उठने और विकसित होने का श्रेष्ठ समय कलयुग बताया है !जो इस समय चल रहा है !और जिसमे हम रह रहे हैं !आत्मशक्ति की प्राप्ति के लिए भौतिक साधनो का त्याग कर आत्मशक्ति के यंत्र जो कि प्रत्येक मनुष्य के पास हैं !मन ,बुद्धि ,चित्त , और अहंकार को शुद्ध और पवित्र करना पड़ता है !तथा इन सबको आत्मा की ओर केंद्रित करना पड़ता है !जब ये साधन आत्मकेन्द्रित हो जाते हैं !तो भौतिक साधन अपने आप प्रचुर मात्रा में उपलब्ध और प्राप्त होने लगते हैं !जमीन से अपने आप स्वादिष्ट अन्न बिना जोते बोये उत्पन्न होने लगते हैं १सनक्ल्प मात्र से ही बिना स्त्री पुरुष के सम्भोग के संतान प्राप्त हो जाती है !आत्मशक्ति से सिद्ध ऋषि मुनि पलक झपकते ही स्वर्ग लोक ,ब्रह्मलोक की यात्रा बिना किसी वाहन के कर लेते हैं !राजाओं के पास भी इक्छागामी वायुयान होते हैं जो बिना ईंधन के संकल्प मात्र से ही स्वचालित होते हैं !मनुष्यों की मृत्यु रोग से नहीं अपनी इक्छा से ही होतीहै !संसार में सभी सुखी और आनंद से जीवन जीते हैं !किन्तु भौतिक युग में जीने वाले अधिकांश लोग इनको सत्य नहीं मानते हैं !जब भौतिक युग में भौतिक शक्ति से ऐसे तथ्य सिद्ध होने लगते हैं !जिनकी चर्चा महाभारत आदि ग्रंथों में है !तो भौतिक शक्ति से संपन्न वैज्ञानिक भी आत्म शक्ति को स्वीकार करने लगते हैं !महाभारत में ऋषि मुनियों के जन्मो की ऐसी अनेक कथाएं हैं ! जिनका जन्म बिना स्त्री पुरुष के संयोग से हो गया था !इन तथ्यों को तथाकथित धार्मिक सुधारक भी कल्पना मानते रहते थे !और भूत चिंतक तो इनको गप्प मानते थे !किन्तु जब विज्ञान ने टेस्ट ट्यूव से मनुष्य का जन्म होना संभव बना दिया !और किराए की कोख में वीर्य की स्थापना वैज्ञानिक विधि से होने लगी !और अब तो वीर्य को एकत्रित कर उनको सुरक्छित रखने के लिए बीर्य बैंक भी खुल गए हैं !जहाँ बिना स्त्री पुरुष के संयोग से विवाहित और अविविवाहित लोग अपनी इक्छा के अनुसार योग्यता कद और रूप रंग की संतान प्राप्त कर सकते हैं !किन्तु अभी भी विज्ञानं संतान उत्पन्न करने के उतने उत्कृष्ट साधन प्राप्त नहीं कर पाया है !जो आत्मशक्ति से प्राप्त होते थे !महाभारत में राजा उपरचरी की एक कथा है !जिसमे बताया गया है कि उसका जंगल में शिकार खेलते हुए काम बेग के कारण वीर्य स्खलित हो गाय !उसने वह वीर्य बाज पक्छी के द्वारा अपनी पत्नी के पास भेजा !किन्तु मार्ग में दो बाज पक्छियों में झगड़ा हो गया जिस इस राजा का वह वीर्य नदी में गिर गया और उसको एक मछली ने खा लिया !परिणाम स्वरुप उस मछली के पेट से उसके चीरने से एक लड़की और एक लड़के का जन्म हुआ !आज भौतिक बादी इस तथ्य को स्वीकार नहीं करेंगे !क्योँकि इतना तो विज्ञान ने सिद्ध कर दिया है !कि बिना स्त्री पुरुष के मनुष्य पैदा हो सकता है !किन्तु अभी यह सिद्ध नहीं हुआ है !कि मछलीके पेट से भी लड़का लड़की का जन्म हो सकता है जब विज्ञान यह सिद्ध कर देगा तब भूत चिंतक इसको भी सही मानने ने लगेंगे !इन भूत चिंतकों के मान ने ना मानने से अत्मिकशक्ति की उत्कृष्टता गलत सिद्ध नहीं होती है !
Tuesday, 10 November 2015
दीपावली मूलरूप से तो भगवान श्री राम के द्वारा दुष्टों के विनाश के बाद बनवास से अयोध्या आने पर मनाई गयी थी !वैदिक काल गढ़ना के हिसाब से भगवान श्री राम का अवतरण त्रेता युग में आज से लगभग ९ लाख बरष पूर्व हुआ था !इस काल खंड के बीच में बहुत सी अन्य घटनाएं भी दीपावली मनाने का कारण बनगई! अब दीपावली के मनाने का स्वरुप भी तीब्र गति से नया रूप ग्रहण कर रहा है !काल के उलट फेर से भारत का विभाजन हो गया !और पाकिस्तान का जन्म हो गया !तथा यह मुसलिम राष्ट्र बन गया !इस देश में जो अल्पसंख्यक हिन्दू समुदाय है !उसे अब दीपबाली का उत्सव मनाने की वह स्वतंत्रता प्राप्त नहीं रही जो प्राचीन अविभाजित भारत में थी !भारत में भी अब मिटटी के दीयों के स्थान पर बिजली के बल्व आगये हैं !पारम्परिक मिष्ठानों गुलाब जामुन इमरती पेड़ा कलाकंद बालूशाही बसातफेनी आदि के स्थानो पर अब चॉक्लेट और ड्राई फ्रुइट्स का प्रयोग होना शुरू हो गया है !भारत के पारम्परिक मिष्ठान दूध घी से निर्मित होते थे !अब दूध देने वाले पशुओं का अभाव होता जा रहा है !बढ़ी मात्रा में कतलखाने देश में खुल गए हैं !भारत गाय आदि दूध देने वाले पशुओं के मास का सबसे बड़ा निर्यातक देश बन गया है !भारत में भी गाय के मास खाने वालों की संख्या असाधारण रूप से बढ़ी है !बाजारों में नकली घी दूध मक्खन पनीर भारी मात्रा में उपलब्ध हो रहा है !इसलिए मिलाबट के कारण अब धनी लोग ड्राई फ्रूट्स का प्रयोग करने लगे हैं !भारत में जो विकास हुआ है !उसमे कुछ खास बर्गों के पास अकूत धन संपत्ति इकट्ठी हो गयी है !और अधिकाँश देश की जनता गरीवी और भुखमरी की शिकार है !इसीलिए उनके लिए दीपावली आम दिनों की तरह ही है !किन्तु जिनके पास धन संपत्ति है !बे दीपावली का त्यौहार भव्यता के साथ मनाते हैं !और अपना नाम रोशन करने के लिए समाचार पत्रों में टेलेविज़न चैनल्स में दीपावली के शुभ सन्देश भी प्रसारित करते हैं !किन्तु यही बे लोग हैं जो आम आदमी की दीपावली के विनाशक हैं !दीपावली सबके लिए आनंद दायक और हर्ष प्रदान करने वाली बने इसके लिए फिर से अभाव ग्रस्त जनसमूह से अनेक श्री राम जन्म लें जो इन संख्या में कम किन्तु सार्वजानिक संपत्ति पर काबिज लोगों से संपत्ति और समृद्धि आम जान तक पहुंचा सकें !!
आजाद भारत में विकास राजनेताओं का तीब्र गति से हो रहा है !उत्तरप्रदेश में एक दृश्य आत्महत्या करते हुए किसानो का है !और कर्ज ना मिलने के कारण लड़की के पिता की सदमे से मृत्यु और टूटती शादियों का है !तो दूसरी और जिलापंचायत से लेक्रर छेत्र पंचायत और ग्राम पंचायत के चुनाव में प्रत्याशियों द्वारा लाखों करोड़ों रूपया खर्च करने वालों का है !और शादी समारोहों में हेलीकॉप्टरों से बरात के बधु और बर को विवाह के स्थान पर लाने लेजाने का है !और हजारों लोगों को स्वादिष्ट भोजन कराने का है !ये विवाह समारोह राजाओं और धन्ना सेठों के विवाहोतस्वों को भी फीका कर देते हैं !चुनाव में खर्च का ये हाल है !कि जिला पंचायत के सदस्य का चुनाव लड़ने वाले उम्मीदबारों का खर्च कम से कम १० लाख और अधिकतम २ ,३ करोड़ से भी अधिक है !और ये सभी राजनेता अत्यंत साधारण घरों से ही निकल कर राजनीति में आये और उदित हुए हैं !किन्तु राजनीति ने इनको असाधारण धन धान्य से समृद्ध कर दिया है !जिस देश में राजनेताओं का आर्थिक विकास होता है !उस देश में आम आदमी का आर्थक विनाश होता है !इसीलिए यहाँ जो आम आदमी गरीवी और तंगी में जी रहा है ,तथा किसान आत्महत्या कर रहा है ! कर्ज न मिलने के कारण शादियां टूट रही हैं !और सदमे पिता मर रहा है !उसका कारण है राजनेताओं का गगन चुम्बी आर्थिकविकास और उनके संरक्छण में भ्रष्टाचार की बृद्धि !
Monday, 9 November 2015
नीतियुक्त आचरण -------(१)कामभोग में अनुरक्त स्त्री पुरुष ,आलसी ,प्रमादी ,डरपोक ,क्रोधी ,अपने आप अपनी प्रशंसा करने वाले ,चोर ,कृतघ्न और रिश्वत खोर ऐसे लोग विश्वसनीय नहीं होते हैं !
(२)जो नित्य गुरुजनो को प्रणाम करते हैं ,और बृद्ध पुरुषों की यथायोग्य सेवा करते हैं उनकी कीर्ति ,आयु ,यश ,और बल ------ बढ़ती रहती है !
(३)जो संपत्ति अत्यंत क्लेश से और धर्म का उल्लंघन करने से और अनीति से तथा अनैतिक और अधार्मिक साधनो तथा ,कर्तव्य भ्रष्ट लोगों के सामने सर झुकाने से प्राप्त होती हो उसको विद्वान पुरुष को ग्रहण नहीं करना चाहिए !सज्जन और संत पुरुषों का हित ऐसी संपत्ति के त्याग में ही है !
(४)विद्या हीन स्त्री पुरुष ,संतान न उत्पन्न करने वाला स्त्री पुरुष मिलान ,भूख से तड़पती जनता और कर्तव्य भ्रष्ट जन प्रितिनिधि ये शोक और दुःख को जन्म देते हैं !
(५)अधिक सोकर नींद को जीतने का प्रयास ना करे !,कामोपभोग के द्वारा पुरुष स्त्री को और स्त्री पुरुष को जीतने का प्रयास न करे ! ,लकड़ी जला कर आग को जीतने की आशा ना रखे ! ,और अधिक शराब पीकर शराब पीने की आदत को जीतने की प्रयास न करे !
(६)जिनके पास करोड़ों रुपये हैं बे भी जीते हैं ! और जिनके पास सौ रुपये हैं बे भी जीते हैं ! इस लिए अधिक धन प्राप्ति के लिए अनीति का आश्रय ग्रहण कर देश समाज और स्वयं का विनाश ना करे !अधिक धन संपत्ति ना होने के कारण भी जीवन का नाश नहीं होता है !
(७)पृथ्वी पर जितना भी अन्न है ,सोना ,हीरे ,जवाहरात,पशु और स्त्रियां तथा पुरुष हैं बे सब के सब एक स्त्री पुरुष की भोग कामना के लिए पर्याप्त नहीं हैं ! इस प्रकार बिचार करने वाले स्त्री पुरुष कभी अत्यंत आसक्ति युक्त मोह और कामोपभोग में नहीं पड़ते हैं !और अपनी अवांछनीय इक्छाओं की तृप्ति के लिए अपने आत्मसुख का नाश नहीं करते हैं !
(२)जो नित्य गुरुजनो को प्रणाम करते हैं ,और बृद्ध पुरुषों की यथायोग्य सेवा करते हैं उनकी कीर्ति ,आयु ,यश ,और बल ------ बढ़ती रहती है !
(३)जो संपत्ति अत्यंत क्लेश से और धर्म का उल्लंघन करने से और अनीति से तथा अनैतिक और अधार्मिक साधनो तथा ,कर्तव्य भ्रष्ट लोगों के सामने सर झुकाने से प्राप्त होती हो उसको विद्वान पुरुष को ग्रहण नहीं करना चाहिए !सज्जन और संत पुरुषों का हित ऐसी संपत्ति के त्याग में ही है !
(४)विद्या हीन स्त्री पुरुष ,संतान न उत्पन्न करने वाला स्त्री पुरुष मिलान ,भूख से तड़पती जनता और कर्तव्य भ्रष्ट जन प्रितिनिधि ये शोक और दुःख को जन्म देते हैं !
(५)अधिक सोकर नींद को जीतने का प्रयास ना करे !,कामोपभोग के द्वारा पुरुष स्त्री को और स्त्री पुरुष को जीतने का प्रयास न करे ! ,लकड़ी जला कर आग को जीतने की आशा ना रखे ! ,और अधिक शराब पीकर शराब पीने की आदत को जीतने की प्रयास न करे !
(६)जिनके पास करोड़ों रुपये हैं बे भी जीते हैं ! और जिनके पास सौ रुपये हैं बे भी जीते हैं ! इस लिए अधिक धन प्राप्ति के लिए अनीति का आश्रय ग्रहण कर देश समाज और स्वयं का विनाश ना करे !अधिक धन संपत्ति ना होने के कारण भी जीवन का नाश नहीं होता है !
(७)पृथ्वी पर जितना भी अन्न है ,सोना ,हीरे ,जवाहरात,पशु और स्त्रियां तथा पुरुष हैं बे सब के सब एक स्त्री पुरुष की भोग कामना के लिए पर्याप्त नहीं हैं ! इस प्रकार बिचार करने वाले स्त्री पुरुष कभी अत्यंत आसक्ति युक्त मोह और कामोपभोग में नहीं पड़ते हैं !और अपनी अवांछनीय इक्छाओं की तृप्ति के लिए अपने आत्मसुख का नाश नहीं करते हैं !
Sunday, 8 November 2015
जो लोग पुरुष्कार लौटा रहे हैं !उनका पुरुष्कार लौटाने में क्या मंतव्य है !इस पर भाजपा के समर्थक और विरोधी अपने अपने ढंग से विरोध और समर्थन कर रहे हैं !मीडिया भी इस मामले में निष्पक्छ नहीं है !कुछ समाचार पत्र और चॅनेल्स भाजपा के समर्थक है !और कुछ विरोधी हैं !इसीलिए बे भी सही तथ्यात्मक दृष्टि प्रस्तुत नहीं कर रहे हैं !ये यहाँ जो कमल हासन गांधी जी का उदाहरण देकर अपना विरोध पुरुष्कार लौटने वाले लोगों के विरुद्ध रख रहे हैं !उसमे गांधी जी के नाम का इस्तेमाल गांधी जी के बारे में अधूरी जानकारी होने के कारण कर रहे हैं !गांधी जी पर १९२८ में राज्य द्रोह का मुकदद्मा चला था !जिसमे उनकी सजा हुई थी !परिणाम स्वरुप उनकी बैरिस्टर की डिग्री इनर टेम्पल ऑफ़ लॉ लंदन ने जब्त कर ली थी !उकत डिग्री गांधी जी की १९४८ में हत्या के बाद !१९८८ में इनर टेम्पल ऑफ़ लॉ लंदन की एकेडेमिक काउंसल ने सम्मान स्वरुप वापिस कर दी थी !इसीलिए गांधी जी का गलत उदाहरण देकर अपनी बात को सिद्ध करना उचित नहीं है !नरेंद्र मोदी के केंद्र में सत्ता में आते ही !गांधी जी को गलत ढंग से प्रस्तुत करने का सिलसिला बढ़ी तेज गति से प्रारम्भ होकर चल रहा है !कभी ये लोग गांधी जी को राष्ट्र के दुश्मन के रूप में प्रस्तुत करते हैं !और कभी अपने राजनैतिक लाभ के लिए उनको अपने मत के समर्थन में प्रस्तुत करते हैं !इन दोनों प्रकार के झूठों से विश्व वन्दित गांधी जी को दूर रखना चाहिए !
नीतियुक्त आचरण --------(१)घोर जंगल में, दुर्गम मार्ग में, कठिन आपत्ति के समय , घबराहट में , और प्रहार के लिए शस्त्र उठे रहने पर भी आत्मबल से युक्त पुरुषों को भय नहीं होता है !भारत में साधु, संतों ,ऋषि , मुनियों , महावीर , बुद्ध , नानक , कबीर , तुलसी आदि तथा आधुनकि काल में महात्मा गांधी आचार्य विनोबा भावे में इस आत्मबल का पूर्ण रूप से दर्शन होता है ! इसी आत्मबल का नाम अहिंसा है ! जिसका प्रयोग गांधी जी ने देश की आजादी की लड़ाई में किया था ! और बिना सैनिक शक्ति और धन जान की हानि के भारत को स्वतंत्रता प्राप्त करायी थी !और भारत की स्वतंत्रता के बाद भी जो १३७ देश गांधी जी की हत्या के ६० साल के अंदर आजाद हुए !उन सभी ने गांधी जी के अहिंसक आंदोलन से प्राप्त प्रेरणा से अपने देशों के लिए स्वतंत्रता प्राप्त की ! और गांधी जी को अपना प्रेरणा श्रोत्र बताया ! इसी अहंसिक आत्मबल के कारण ही गांधी जी नित्य विकसित हो कर विश्व मानब बन गए हैं ! और आज विश्व गांधी के प्रेम करुणा और सहस्णुता के आदर्शों का अनुयायी होता जा रहा है !
(२)उद्द्योग, संयम , ,दक्छता , ,सावधानी ,धैर्य ,स्मृति ,और सोच विचार कर कार्य आरम्भ करना ,----ये भौतिक और आत्मोन्नति के मूल मन्त्र हैं !
(३)तपस्वियों का बल है तप ,ज्ञानियो का बल है ज्ञान विज्ञान पापियों का बल है हिंसा और गुण बनो का बल है सहस्णुता और सर्वधर्म समभाव ,प्रेम करुणा छमा और अहिंसा !
(४)जल ,मूल ,फल ,गाय का दूध ,घी , गुरु का वचन और औषधि इनके व्रत में सेवन से व्रत भांग नहीं होता है !
(५)जो अपने प्रतिकूल जान पड़े ,उसे दूसरों के प्रति भी ना करे संक्छेप में यही धर्म का स्वरुप है ! इसके विपरीत जिस धार्मिक आचरण में कामना से प्रवृत्ति होती है ,वह तो अधर्म है !(
६)अक्रोध से क्रोध को जीते ,असाधु को सद्व्योहार से बस में करे कंजूस को दान से जीते और झूठ पर सत्य से विजय प्राप्त करे !
(२)उद्द्योग, संयम , ,दक्छता , ,सावधानी ,धैर्य ,स्मृति ,और सोच विचार कर कार्य आरम्भ करना ,----ये भौतिक और आत्मोन्नति के मूल मन्त्र हैं !
(३)तपस्वियों का बल है तप ,ज्ञानियो का बल है ज्ञान विज्ञान पापियों का बल है हिंसा और गुण बनो का बल है सहस्णुता और सर्वधर्म समभाव ,प्रेम करुणा छमा और अहिंसा !
(४)जल ,मूल ,फल ,गाय का दूध ,घी , गुरु का वचन और औषधि इनके व्रत में सेवन से व्रत भांग नहीं होता है !
(५)जो अपने प्रतिकूल जान पड़े ,उसे दूसरों के प्रति भी ना करे संक्छेप में यही धर्म का स्वरुप है ! इसके विपरीत जिस धार्मिक आचरण में कामना से प्रवृत्ति होती है ,वह तो अधर्म है !(
६)अक्रोध से क्रोध को जीते ,असाधु को सद्व्योहार से बस में करे कंजूस को दान से जीते और झूठ पर सत्य से विजय प्राप्त करे !
Wednesday, 4 November 2015
नीतियुक्त आचरण ------(१)जिस सुख का सेवन करते रहने पर भी मनुष्य सदाचार और नीति से भ्रष्ट नहीं होता है ! उसका वह यथेष्ठ सेवन करे किन्तु निद्रा आलस्य प्रमाद आदि के अधिक सेवन से बचता रहे !
(२)दुष्ट बुद्धि वाले मनुष्य सरलता से जीवन यापन करने वाले लोगों को असक्त और असमर्थ समझ कर उनका अपमान कर देते हैं !
(३)अत्यंत श्रेष्ठ ,अतिशय दानी ,अतीब शूरवीर अधिक ब्रत नियमों का पालन करने वाले और बुद्धि के घमंड में चूर रहने वाले मनुष्यों के पास सिर्फ जीवन निर्बाह के लिए ही संपत्ति होती है !बे ना अधिक धनी होते हैं ! और ना अधिक निर्धन !
(४)लक्छमी के रहने का और ठहरने का कोई निश्चित मान दंड नहीं है !अधिक गुणवान होने से लक्छमी प्राप्त हो जायेगी !या दुराचार के कारण नष्ट हो जायेगी !इसके सम्बन्ध में निश्चित तौर पर कुछ नहीं कहा जा सकता है !देखने में आता है ! कि अत्यंत बेईमान और कदाचार तथा दुराचार में आकंठ डूबे व्यक्ति भी धन संपत्ति से युक्त देखे जाते हैं !और ऐसे लोग निर्धन और संकट ग्रस्त देखने में भी आते हैं !इसी प्रक़र गुणवानो और सदाचारियों के पास भी संपत्ति देखी जाती है !किन्तु बहुत से गुणी व्यक्ति निर्धन भी देखे जाते हैं !लक्छमी निरंकुश होती है !और उन्मत्तत की भांति जहां चाहती है !वहां ठहर जाती है !और जब चाहे चली जाती है !इसलिए विद्वान पुरुष को लक्छमी होने के बाद उसका उपयोग लोकहित के कार्यों में करना चाहिए !और ना होने पर संतोष धारण करना चाहिए !किन्तु लक्छमी की प्राप्ति के लिए अपने आचरण को भ्रष्ट नहीं करना चाहिए !ऐसा विद्वानो का कथन है !
(५)जो अधर्म ,अनीति से कमाए हुए धन से पारलौकिक कर्म करके आत्मशांति प्राप्त करने का प्रयत्न करता है!!वह जीवन में कभी आत्मशांति नहीं पाता है और मरने के बाद भी उसे सद्गति की प्राप्ति नहीं होती है ! क्योँकि उसने संपत्ति की प्राप्ति राष्ट्र और समाज के हितों पर कुठारा घात कर प्राप्त की होती है
(२)दुष्ट बुद्धि वाले मनुष्य सरलता से जीवन यापन करने वाले लोगों को असक्त और असमर्थ समझ कर उनका अपमान कर देते हैं !
(३)अत्यंत श्रेष्ठ ,अतिशय दानी ,अतीब शूरवीर अधिक ब्रत नियमों का पालन करने वाले और बुद्धि के घमंड में चूर रहने वाले मनुष्यों के पास सिर्फ जीवन निर्बाह के लिए ही संपत्ति होती है !बे ना अधिक धनी होते हैं ! और ना अधिक निर्धन !
(४)लक्छमी के रहने का और ठहरने का कोई निश्चित मान दंड नहीं है !अधिक गुणवान होने से लक्छमी प्राप्त हो जायेगी !या दुराचार के कारण नष्ट हो जायेगी !इसके सम्बन्ध में निश्चित तौर पर कुछ नहीं कहा जा सकता है !देखने में आता है ! कि अत्यंत बेईमान और कदाचार तथा दुराचार में आकंठ डूबे व्यक्ति भी धन संपत्ति से युक्त देखे जाते हैं !और ऐसे लोग निर्धन और संकट ग्रस्त देखने में भी आते हैं !इसी प्रक़र गुणवानो और सदाचारियों के पास भी संपत्ति देखी जाती है !किन्तु बहुत से गुणी व्यक्ति निर्धन भी देखे जाते हैं !लक्छमी निरंकुश होती है !और उन्मत्तत की भांति जहां चाहती है !वहां ठहर जाती है !और जब चाहे चली जाती है !इसलिए विद्वान पुरुष को लक्छमी होने के बाद उसका उपयोग लोकहित के कार्यों में करना चाहिए !और ना होने पर संतोष धारण करना चाहिए !किन्तु लक्छमी की प्राप्ति के लिए अपने आचरण को भ्रष्ट नहीं करना चाहिए !ऐसा विद्वानो का कथन है !
(५)जो अधर्म ,अनीति से कमाए हुए धन से पारलौकिक कर्म करके आत्मशांति प्राप्त करने का प्रयत्न करता है!!वह जीवन में कभी आत्मशांति नहीं पाता है और मरने के बाद भी उसे सद्गति की प्राप्ति नहीं होती है ! क्योँकि उसने संपत्ति की प्राप्ति राष्ट्र और समाज के हितों पर कुठारा घात कर प्राप्त की होती है
जो साहित्यकार और लेखक पुरुष्कार लौटा रहे हैं !और जो साम्प्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने के लिए गैर जिम्मेदार व्यान बाजी कर रहे हैं !तथा जो राजनेता राजनैतिक हित साधन को ध्यान में रख कर साहित्यकारों के पुरुष्कार लौटाने का अन्ध समर्थन कर प्रधान मंत्री के विरद्ध व्यान बाजी कर उन पर असहष्णिता फैलाने और बढ़ाने का आरोप लगा रहे हैं !ये सब किसी ना किसी रूप में देश में सद्भाव बिगाड़ने और असहन शीलता बढ़ाने का काम कर रहे हैं !साहित्यकारों और लेखकों को पुरुष्कार लौटने के बजाय असहन शीलता का लेखों के द्वारा सामूहिक विरोध व्यक्त करना चाहिए था !तथा जनता के सामने अपना विरोध का पक्छ रखना चाहिए था !तथा असहन शीलता ना पनपे उसके लिए और उसके निवारण के ठोस उपाय भी प्रस्तुत करने चाहिए थे !तथा सरकार से भी सार्थक बात चीत करनी चाहिए थी !यदि इस सबके बाद भी सरकार न सुनती और कोई सही समाधान ना निकलता ! तब उनको पुरुष्कार लौटाना चाहिए था !इस प्रकार पुरुष्कार लौटा कर बे अनजाने में ही भाजपा विरोधी राजनैतिक दलों के समर्थक बन गए हैं !जो केंद्र सरकार और भाजपा सरकारों के मंत्री और सांसद तथा कार्यकर्ता जो मुसलमानो के विरुद्ध अनर्गल व्यान बाजी करते रहते हैं !यह भी उचित नहीं है !इस से केंद्र सरकार के विरुद्ध अनावश्यक वाताबरण बनता है !और प्रधान मंत्री पर असहन शीलता को बढ़ाने का आरोप लगता है !जो राजनैतिक दल प्रधान मंत्री को कट घरे में खड़ा कर रहे हैं !बे यह काम तो भाजपा के विरुद्ध हमेशा करते रहे हैं !भाजपा का जन्म ही कांग्रेस की नीतियों के विरुद्ध हुआ था !इसलिए देश में भाजपा एक मात्र ऐसा राजनैतिक दल है जिसका निर्माण कांग्रेस से टूट कर नहीं हुआ है !भाजपा की स्थापना एक विशेष प्रकार की राजनैतिक व्यबस्था देश में निर्माण करने के लिए हुई है !जबकि देश के अन्य सभी राजनैतिक दलों केनेता किसी ना किसी रूप में कांग्रेस से सम्बद्ध रहे हैं !और इन राजनैतिक दलों के नीति और कार्यक्रम भी कांग्रेस से मिलते जुलते हैं !इसीलिए ये दल कभी भी भाजपा सरकार की नीतियों के अनुगामी नहीं हो सकते हैं !भाजपा जब इसका नाम भारतीय जनसंघ था ! तब से हिन्दू विचार धरा की समर्थक रही है !सत्ता में आने के बाद उसने हिंदुत्तव के बहुत से मुद्दे छोड़ दिए हैं !अभी सिर्फ राजनेताओं की व्यान बाजी पर ही देश में असहन शीलता की बृद्धि का आरोप लग रहा है !और कहा जा रहा है !कि देश का साम्प्रदायिक सद्भाव बिगाड़ा जा रहा है !जब भाजपा अपना चिरपोषित हिन्दू एजेंडा देश में लागू करने का प्रयत्न करेगी !तब क्या होगा ? देश में सम्वैधानिक शाशन व्यबस्था है !संवेधानिक प्रावधानों के विधि सम्मत प्रावधानों की रक्छा करने के लिए स्वतंत्र और निष्पक्छ न्याय पालिका है !इसिलिय अगर कोई कार्य या वक्तव्य देश में असहन शीलता को बढ़ाबा दे रहा है !तो राजनेताओं को व्यान बाजी करने और साहित्यकारों को पुरुष्कार लौटाने के बजाय न्यायालय में जाना चाहिए !और वहां से जो निर्णय होगा उसको सरकार को लागु करना ही पड़ेगा !और यही देश हित में भी है !किन्तु यह ना करने के स्थान पर व्यान बाजी कर और पुरुष्कार लौटा कर देश में ये भी असहन शीलता की ही बृद्धि कर रहे हैं !
Tuesday, 3 November 2015
नीतियुक्त आचरण ------(१)इन्द्रियोँ को पूरी तरह नियंत्रण में रख पाना तो मृत्यु से भी बढ़कर कठिन है !किन्तु उन्हें बिलकुल अनियंत्रित खुला छोड़ देना देवताओं का भी नाश कर देता है !
(२)संपूर्ण प्राणियों के प्रति कोमलता का भाव ,गुणों में दोष न देखना ,छमा ,धैर्य ,और मित्रों का अपमान ना करना ----ये सब गुण आयु को बढ़ाने वाले हैं --ऐसा विद्वान लोगों का कथन है !
(३)जो नष्ट हुई संपत्ति को स्थिर बुद्धि का आश्रय ले उत्तम नीति से पुनः प्राप्त करने की इक्छा करता है !उसके इस आचरण की प्रसंसा सभी श्रेष्ठ पुरुष करते हैं !जो आनेवाले दुःख के रोकने का उपाय जनता है ! वर्तमान काल के कर्तव्य का पालन दृढ निश्चय से करता है ! और अतीतकाल में जो कर्तव्य शेष रह गया है उसे भी जानता समझता है ! वह मनुष्य कभी अर्थ से हीन नहीं होता है !
(४)मनुष्य मन वाणी से जिस कर्मका निरंतर चिंतन मनन और सेबन करता है ! ,वह कार्य उस पुरुष को अपनी और खींच लेता है !इसीलिए बुद्धिमान विद्वान पुरुष हमेशा कल्याण कारी विचारों का ही मनन ,चिंतन और कर्म करने में संलग्न रहते हैं !
(५)मांगलिक पदार्थों का स्पर्श ,चित्त बृत्तियों का निरोध ,उत्तम ग्रंथों का स्वाध्याय ,उद्द्योग शीलता ,सरलता ,और सत्पुरुषों का बार बार दर्शन और सत्संग ---ये सब कल्याण कारी हैं !
(६)हमेशा उद्द्योग में लगे रहना ,----उस से विरक्त ना होना ,इस से धन और संपत्ति की प्राप्ति होती है !और संपत्ति प्राप्त कर कल्याणकारी ,लोकहित के कार्यों में अनासक्त भावसे से रत रहना ये महान मनुष्यो के आचरण में हमेशा विद्यमान रहते हैं ! और वह प्रगति करता हुआ अनंत सुख का भागी होता है !
(७)समर्थ पुरुष के लिए सब जगह और सब समय में छमा के समान हितकारक और अत्यंत श्री संपन्न बनाने वाला उपाय दूसरा नहीं माना गया है !जो शक्ति हीन है वह तो समय पर छमा करे ही ! जो शक्तिमान है ! वह भी छमा करे ! तथा जिसकी दृष्टि में अर्थ और अनर्थ (नीति ,अनीति )दोनों समान है ! उसके लिए तो छमा सदा ही हितकारिणी होती है !
(२)संपूर्ण प्राणियों के प्रति कोमलता का भाव ,गुणों में दोष न देखना ,छमा ,धैर्य ,और मित्रों का अपमान ना करना ----ये सब गुण आयु को बढ़ाने वाले हैं --ऐसा विद्वान लोगों का कथन है !
(३)जो नष्ट हुई संपत्ति को स्थिर बुद्धि का आश्रय ले उत्तम नीति से पुनः प्राप्त करने की इक्छा करता है !उसके इस आचरण की प्रसंसा सभी श्रेष्ठ पुरुष करते हैं !जो आनेवाले दुःख के रोकने का उपाय जनता है ! वर्तमान काल के कर्तव्य का पालन दृढ निश्चय से करता है ! और अतीतकाल में जो कर्तव्य शेष रह गया है उसे भी जानता समझता है ! वह मनुष्य कभी अर्थ से हीन नहीं होता है !
(४)मनुष्य मन वाणी से जिस कर्मका निरंतर चिंतन मनन और सेबन करता है ! ,वह कार्य उस पुरुष को अपनी और खींच लेता है !इसीलिए बुद्धिमान विद्वान पुरुष हमेशा कल्याण कारी विचारों का ही मनन ,चिंतन और कर्म करने में संलग्न रहते हैं !
(५)मांगलिक पदार्थों का स्पर्श ,चित्त बृत्तियों का निरोध ,उत्तम ग्रंथों का स्वाध्याय ,उद्द्योग शीलता ,सरलता ,और सत्पुरुषों का बार बार दर्शन और सत्संग ---ये सब कल्याण कारी हैं !
(६)हमेशा उद्द्योग में लगे रहना ,----उस से विरक्त ना होना ,इस से धन और संपत्ति की प्राप्ति होती है !और संपत्ति प्राप्त कर कल्याणकारी ,लोकहित के कार्यों में अनासक्त भावसे से रत रहना ये महान मनुष्यो के आचरण में हमेशा विद्यमान रहते हैं ! और वह प्रगति करता हुआ अनंत सुख का भागी होता है !
(७)समर्थ पुरुष के लिए सब जगह और सब समय में छमा के समान हितकारक और अत्यंत श्री संपन्न बनाने वाला उपाय दूसरा नहीं माना गया है !जो शक्ति हीन है वह तो समय पर छमा करे ही ! जो शक्तिमान है ! वह भी छमा करे ! तथा जिसकी दृष्टि में अर्थ और अनर्थ (नीति ,अनीति )दोनों समान है ! उसके लिए तो छमा सदा ही हितकारिणी होती है !
Monday, 2 November 2015
नेति युक्त आचरण --------(१) जो उपदेश से या पढ़ने से प्राप्त ज्ञान को आचरण में उतरने का प्रयत्न नहीं करता है ! उसका ज्ञान व्यर्थ हो जाता हैं !वह सिर्फ ज्ञान के भार को ढोने वाला ही होता है !जो व्यक्ति किसी बात को सुनता और समझाता नहीं है ! उस से कही हुई बात भी नष्ट हो जाती है !जिस व्यक्ति की इन्द्रियां विषय भोगों में अत्यंत आसक्त हैं ! उसका शास्त्र ज्ञान भी व्यर्थ हो जाता है !
(२)बुद्धिमान व्यक्ति अपनी बुद्धि से भली प्रकार जाँच कर ! और अपने स्वयं के अनुभव से ज्ञान का उपदेश करने वाले विद्वान की योग्यता का निश्चय करे फिर दूसरों से सुनकर और स्वयं देखकर भलीभांत विचार करके विद्वानो के साथ मित्रता या सम्बन्ध स्थापित करे !
(३)विनय अपयश को दूर करती है ! पराक्रम अनर्थ को दूर करता है ! छमा सदा ही क्रोध का नाश करती है ! और सदाचार कुलक्छण का नाश करता है !
(४)जन्म किसी भी जाति या कुल में हुआ हो ---- जो मर्यादा का उल्लंघन नहीं करता है ! सत्कर्म करता है ! ,कोमल, करुणा प्रधान अहिंसक स्वाभाव वाला है ! वह व्यक्ति हजारों तथाकथित कुलीनों से उत्तम और बढ़कर है !
(५)जिन दो मनुष्यों की बुद्धि ,मन चित्त से बुद्धि ,मन और चित्त आपस में मिलजाते हैं ! और एकदूसरे में सभी प्रकार की गुप्तता समाप्त हो जाती है ! उनकी मित्रता कभी नष्ट नहीं होती है !
(६)मेधावी विद्वान पुरुष को चाहिए कि तृण से ढके हुए कुंए की भांति दुर्बुद्धि और विचार से हीन, कदाचारी व्यक्ति का परित्याग कर दे ! क्योँकि ऐसे लोगों के साथ मित्रता स्थायी नहीं रहती है !
(७)विद्वान पुरुष को उचित है कि वह अभिमानी ,मुर्ख ,क्रोधी और आचरण तथा नीति विहीन पुरुष के साथ मित्रता न करे !मित्र तो ऐसा होना चाहिए ,जो कृतज्ञ ,नैतिक, सदाचारी उदार ,दृढ अनुराग रखने वाला, अपनी इन्द्रियों को बस में रखने वाला, मर्यादा का पालन करने वाला और मित्रता का त्याग ना करने वाला हो !
(२)बुद्धिमान व्यक्ति अपनी बुद्धि से भली प्रकार जाँच कर ! और अपने स्वयं के अनुभव से ज्ञान का उपदेश करने वाले विद्वान की योग्यता का निश्चय करे फिर दूसरों से सुनकर और स्वयं देखकर भलीभांत विचार करके विद्वानो के साथ मित्रता या सम्बन्ध स्थापित करे !
(३)विनय अपयश को दूर करती है ! पराक्रम अनर्थ को दूर करता है ! छमा सदा ही क्रोध का नाश करती है ! और सदाचार कुलक्छण का नाश करता है !
(४)जन्म किसी भी जाति या कुल में हुआ हो ---- जो मर्यादा का उल्लंघन नहीं करता है ! सत्कर्म करता है ! ,कोमल, करुणा प्रधान अहिंसक स्वाभाव वाला है ! वह व्यक्ति हजारों तथाकथित कुलीनों से उत्तम और बढ़कर है !
(५)जिन दो मनुष्यों की बुद्धि ,मन चित्त से बुद्धि ,मन और चित्त आपस में मिलजाते हैं ! और एकदूसरे में सभी प्रकार की गुप्तता समाप्त हो जाती है ! उनकी मित्रता कभी नष्ट नहीं होती है !
(६)मेधावी विद्वान पुरुष को चाहिए कि तृण से ढके हुए कुंए की भांति दुर्बुद्धि और विचार से हीन, कदाचारी व्यक्ति का परित्याग कर दे ! क्योँकि ऐसे लोगों के साथ मित्रता स्थायी नहीं रहती है !
(७)विद्वान पुरुष को उचित है कि वह अभिमानी ,मुर्ख ,क्रोधी और आचरण तथा नीति विहीन पुरुष के साथ मित्रता न करे !मित्र तो ऐसा होना चाहिए ,जो कृतज्ञ ,नैतिक, सदाचारी उदार ,दृढ अनुराग रखने वाला, अपनी इन्द्रियों को बस में रखने वाला, मर्यादा का पालन करने वाला और मित्रता का त्याग ना करने वाला हो !
Sunday, 1 November 2015
नीति युक्त आचरण ----(१)जो विद्वान पाप रूप कर्मों का आरम्भ नहीं करता है वह भविष्य में अवश्य उन्नति प्राप्त करता है किन्तुजो पहले किये हुए पापों का विचार ना करके उन्ही पाप कर्मों को करता रहता है वह खोटी बूढी वाला मनुष्य अपनी उन्नति के सभी द्वार अपने पाप पूर्ण कार्यों से बंद कर देता है और पतन को प्राप्त हो j जाता है ! *२)-----बुद्धिमान पुरुष को संपत्ति और समृद्धि नाश के इन ६ बातों को कभी भी नहीं करना चाहिए --मादक वस्तुओं का सेवन ,अत्यधिक निद्रा , कार्य सम्पादन के लिए आवश्यक जान करी ना रखना ,नेत्र मुख आदि को गन्दा और कुरूप रखना ,अविश्वास नीय और धोखा देने वाले मित्रों पर विश्वास रखना ,और कार्य सम्पादन में अकुशल कर्मचारियों को कार्य की जिम्मेदारी सौपना जो कार्य कुशल व्यक्ति इन ६ दोषों से अपने आप को बचा कर चलता है उसके अर्थ और धर्म के कार्य हमेशा सफल होते हैं और वह विवेक पूर्वक इनका सेवन करता है !
आरक्छण का मूल्यांकन-------आरक्छण का मुख्यांकन दो तरह से होना चाहिए !(१)-- जिन दलित पिछड़ी जातियों को आरक्छण प्राप्त है !उन सभी जातियों को आरक्छण का लाभ प्राप्त हुआ है !या नहीं ? जिन अरक्छित जातियों को आरक्छण का अधिक लाभ हुआ है !उन जातियों के नाम प्रकाशित किये जाएँ !और शेष अरक्छित जातियां जिन्हे आरक्छण का कम लाभ या बिलकुल लाभ नहीं मिला है !उनका भी नाम प्रकाशित होना चाहिए !जिन अरक्छित जातियों के लोगों को आरक्छण के कारण मंत्री ,सांसद , विधायक आदि बनने का अवसर प्राप्त हुआ !तथा जिनको भारतीय प्रशासनिक सेवा और भारतीय पुलिस सेवा आदि में तथा अन्य महत्त्व पूर्ण पदों जैसे प्रांतीय चिकित्सा के छेत्र प्रांतीय प्रशाशनिक सेवा पुलिस सेवा ,रेलवे आदि में महत्त्व पूर्ण पदों पर नियुक्ति हुई है !उन परिवारों का भी प्रकाशन होना चाहिए !क्या आरकच्छित जातियों के चंद लोग, जातियां और परिवार ही आरक्छण का लाभ ले रहे है !और अन्य अरक्छित जातियों को आरक्छण के लाभ से वंचित कर रहे है ?इस प्रश्न पर भी विचार होना चाहिए !(२) जिन जातियों को आरक्छण प्राप्त नहीं हैं !उनकी आर्थिक स्थिति का सर्वेक्छन् किया जाना चाहिए !और इस तथ्य पर भी विचार किया जाना चाहिए !कि आरक्छण से लाभ प्राप्त करने वाले व्यक्तियों का आर्थिक स्तर यदि सामान्य से बहुत अधिक बढ़ गया हो !तो उन्हें आरक्छण का लाभ जारी रखना चाहिए या नहीं ?इसी प्रकार से आरक्छण की समीक्छा और मूल्यांकन किया जाना चाहिए !जिस आरक्छण का विधान संविधान में शोषित ,पिछड़ी जातियों के लिए किया था !आज उन्ही अरक्छित जातियों के आरक्छण से लाभान्वित और समृद्ध हुए लोग अरक्छित जातियों का शोषण कर रहे हैं !और उनके संवेधानिक अधिकारों को उन तक नहीं पहुँचने दे रहे हैं !तथा सवर्ण कहे जाने वाले लोगों की आर्थिक स्थित बद से बदतर होती जा रही है !उन्हें किसी भी प्रकार का सरकारी संरक्छण गरीव और साधन हीन होने के बाद भी प्राप्तनहीं हो रहा है !उनका सिर्फ एक ही दोष है !कि बे सबर्ण हैं !
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