नीति युक्त आचरण ----(१)जो विद्वान पाप रूप कर्मों का आरम्भ नहीं करता है वह भविष्य में अवश्य उन्नति प्राप्त करता है किन्तुजो पहले किये हुए पापों का विचार ना करके उन्ही पाप कर्मों को करता रहता है वह खोटी बूढी वाला मनुष्य अपनी उन्नति के सभी द्वार अपने पाप पूर्ण कार्यों से बंद कर देता है और पतन को प्राप्त हो j जाता है ! *२)-----बुद्धिमान पुरुष को संपत्ति और समृद्धि नाश के इन ६ बातों को कभी भी नहीं करना चाहिए --मादक वस्तुओं का सेवन ,अत्यधिक निद्रा , कार्य सम्पादन के लिए आवश्यक जान करी ना रखना ,नेत्र मुख आदि को गन्दा और कुरूप रखना ,अविश्वास नीय और धोखा देने वाले मित्रों पर विश्वास रखना ,और कार्य सम्पादन में अकुशल कर्मचारियों को कार्य की जिम्मेदारी सौपना जो कार्य कुशल व्यक्ति इन ६ दोषों से अपने आप को बचा कर चलता है उसके अर्थ और धर्म के कार्य हमेशा सफल होते हैं और वह विवेक पूर्वक इनका सेवन करता है !
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