आत्मशक्ति बनाम भौतिक शक्ति -------जिस प्रकार समुद्र में लहरें उठती और गिरती हैं ! उसी प्रकार संसार में भी आत्मशक्ति और भौतिक शक्ति की लहरें उठती और गिरती हैं !भारत में प्राचीन काल के ऋषिओं ने आत्मशक्ति की लहरों के उठने का श्रेष्ठ का ल सतयुग बताया है !और भौतिक शक्तियों के उठने और विकसित होने का श्रेष्ठ समय कलयुग बताया है !जो इस समय चल रहा है !और जिसमे हम रह रहे हैं !आत्मशक्ति की प्राप्ति के लिए भौतिक साधनो का त्याग कर आत्मशक्ति के यंत्र जो कि प्रत्येक मनुष्य के पास हैं !मन ,बुद्धि ,चित्त , और अहंकार को शुद्ध और पवित्र करना पड़ता है !तथा इन सबको आत्मा की ओर केंद्रित करना पड़ता है !जब ये साधन आत्मकेन्द्रित हो जाते हैं !तो भौतिक साधन अपने आप प्रचुर मात्रा में उपलब्ध और प्राप्त होने लगते हैं !जमीन से अपने आप स्वादिष्ट अन्न बिना जोते बोये उत्पन्न होने लगते हैं १सनक्ल्प मात्र से ही बिना स्त्री पुरुष के सम्भोग के संतान प्राप्त हो जाती है !आत्मशक्ति से सिद्ध ऋषि मुनि पलक झपकते ही स्वर्ग लोक ,ब्रह्मलोक की यात्रा बिना किसी वाहन के कर लेते हैं !राजाओं के पास भी इक्छागामी वायुयान होते हैं जो बिना ईंधन के संकल्प मात्र से ही स्वचालित होते हैं !मनुष्यों की मृत्यु रोग से नहीं अपनी इक्छा से ही होतीहै !संसार में सभी सुखी और आनंद से जीवन जीते हैं !किन्तु भौतिक युग में जीने वाले अधिकांश लोग इनको सत्य नहीं मानते हैं !जब भौतिक युग में भौतिक शक्ति से ऐसे तथ्य सिद्ध होने लगते हैं !जिनकी चर्चा महाभारत आदि ग्रंथों में है !तो भौतिक शक्ति से संपन्न वैज्ञानिक भी आत्म शक्ति को स्वीकार करने लगते हैं !महाभारत में ऋषि मुनियों के जन्मो की ऐसी अनेक कथाएं हैं ! जिनका जन्म बिना स्त्री पुरुष के संयोग से हो गया था !इन तथ्यों को तथाकथित धार्मिक सुधारक भी कल्पना मानते रहते थे !और भूत चिंतक तो इनको गप्प मानते थे !किन्तु जब विज्ञान ने टेस्ट ट्यूव से मनुष्य का जन्म होना संभव बना दिया !और किराए की कोख में वीर्य की स्थापना वैज्ञानिक विधि से होने लगी !और अब तो वीर्य को एकत्रित कर उनको सुरक्छित रखने के लिए बीर्य बैंक भी खुल गए हैं !जहाँ बिना स्त्री पुरुष के संयोग से विवाहित और अविविवाहित लोग अपनी इक्छा के अनुसार योग्यता कद और रूप रंग की संतान प्राप्त कर सकते हैं !किन्तु अभी भी विज्ञानं संतान उत्पन्न करने के उतने उत्कृष्ट साधन प्राप्त नहीं कर पाया है !जो आत्मशक्ति से प्राप्त होते थे !महाभारत में राजा उपरचरी की एक कथा है !जिसमे बताया गया है कि उसका जंगल में शिकार खेलते हुए काम बेग के कारण वीर्य स्खलित हो गाय !उसने वह वीर्य बाज पक्छी के द्वारा अपनी पत्नी के पास भेजा !किन्तु मार्ग में दो बाज पक्छियों में झगड़ा हो गया जिस इस राजा का वह वीर्य नदी में गिर गया और उसको एक मछली ने खा लिया !परिणाम स्वरुप उस मछली के पेट से उसके चीरने से एक लड़की और एक लड़के का जन्म हुआ !आज भौतिक बादी इस तथ्य को स्वीकार नहीं करेंगे !क्योँकि इतना तो विज्ञान ने सिद्ध कर दिया है !कि बिना स्त्री पुरुष के मनुष्य पैदा हो सकता है !किन्तु अभी यह सिद्ध नहीं हुआ है !कि मछलीके पेट से भी लड़का लड़की का जन्म हो सकता है जब विज्ञान यह सिद्ध कर देगा तब भूत चिंतक इसको भी सही मानने ने लगेंगे !इन भूत चिंतकों के मान ने ना मानने से अत्मिकशक्ति की उत्कृष्टता गलत सिद्ध नहीं होती है !
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