Saturday, 28 November 2015

४(४२)मोक्ष प्राप्ति i का अधात्म शास्त्र के अनुसार ज्ञान ही एक सत्य मार्ग है ज्ञान शब्द का अर्थ व्योबहार ज्ञान या संसार का ज्ञान नहीं है यहां उसका अर्थ ब्रह्मात्म ज्ञान है इसी को विद्द्या भी कहते है जैसे आग में जलेहुए बीज फिर नहीं उगते उसी प्रकार ज्ञान के द्वारा अविद्द्या आदि क्लेशों के नष्ट हो जाने पर आत्मा का पुनः उनसे संयोग नहीं होता है आत्मस्वरूप का ज्ञान तथा आत्मा की अलिप्तता का ज्ञान प्राप्त करके उसे जीवन पर्यन्त स्थिर रखना ही कर्म बंधन से मुक्त होने का सच्चा मार्ग है यहां भगवान श्री कृष्ण अर्जुन से कहते है तुम ह्रदय में स्थित अज्ञान से उत्पन्न अपने संशय को विवेकज्ञान रूप तलवार से काटकर कर्म योग में स्थित हो जा और युद्ध कर अधूरे ज्ञान में आसक्त अर्थात इन्द्रिय ज्ञान को ही ज्ञान मैंने वाले मनुष्य सकाम कर्म करते हैं और शरीर में बंधे हुए जीवात्मा में शरीर से मोक्ष के लिए आत्मनिष्ठा बुद्धि से कर्म करने की तथा आत्मज्ञान से मोक्ष प्राप्त करने की जो यह स्वतंत्र शक्ति है इसकी और उनका ध्यान ही नहीं जाता है इसकी ओर ध्यान देकर ही श्री कृष्णा ने अर्जुन से कहा है की आत्मनिष्ठ बुद्धि से प्राप्त कर्त्तव्य कर यानि युद्ध कर

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