Monday, 9 November 2015

नीतियुक्त आचरण -------(१)कामभोग में अनुरक्त स्त्री पुरुष ,आलसी ,प्रमादी ,डरपोक ,क्रोधी ,अपने आप अपनी प्रशंसा करने वाले ,चोर ,कृतघ्न और रिश्वत खोर  ऐसे लोग विश्वसनीय नहीं होते हैं  !
(२)जो नित्य गुरुजनो को प्रणाम करते हैं ,और बृद्ध पुरुषों की यथायोग्य सेवा करते हैं उनकी  कीर्ति ,आयु ,यश ,और बल ------ बढ़ती रहती है !
(३)जो संपत्ति अत्यंत क्लेश से और धर्म का उल्लंघन करने से और अनीति से तथा अनैतिक और अधार्मिक साधनो तथा  ,कर्तव्य भ्रष्ट लोगों के सामने सर झुकाने से प्राप्त होती हो उसको विद्वान पुरुष को ग्रहण नहीं करना चाहिए !सज्जन और संत पुरुषों का हित ऐसी संपत्ति के त्याग में ही है !
(४)विद्या हीन स्त्री पुरुष ,संतान न उत्पन्न करने वाला स्त्री पुरुष मिलान ,भूख से तड़पती जनता और कर्तव्य भ्रष्ट जन प्रितिनिधि ये शोक और दुःख को जन्म देते हैं !
(५)अधिक सोकर नींद को जीतने का प्रयास ना करे  !,कामोपभोग के द्वारा पुरुष स्त्री को और स्त्री पुरुष को जीतने का प्रयास न करे ! ,लकड़ी जला कर आग को जीतने की आशा ना रखे ! ,और अधिक शराब पीकर शराब पीने की आदत को जीतने की प्रयास न करे !
(६)जिनके पास करोड़ों रुपये हैं बे भी जीते हैं ! और जिनके पास सौ रुपये हैं बे भी जीते हैं ! इस लिए अधिक धन प्राप्ति के लिए अनीति का आश्रय ग्रहण कर देश समाज और स्वयं का विनाश ना करे !अधिक धन संपत्ति ना होने के कारण भी जीवन का नाश नहीं होता है !
(७)पृथ्वी पर जितना भी अन्न है ,सोना ,हीरे ,जवाहरात,पशु और स्त्रियां तथा पुरुष हैं बे सब के सब एक स्त्री पुरुष की भोग कामना के लिए पर्याप्त नहीं हैं ! इस प्रकार बिचार करने वाले स्त्री पुरुष कभी अत्यंत आसक्ति युक्त मोह और कामोपभोग में नहीं पड़ते हैं !और अपनी अवांछनीय इक्छाओं की तृप्ति के लिए अपने आत्मसुख का नाश नहीं करते हैं !

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