आरक्छण का मूल्यांकन-------आरक्छण का मुख्यांकन दो तरह से होना चाहिए !(१)-- जिन दलित पिछड़ी जातियों को आरक्छण प्राप्त है !उन सभी जातियों को आरक्छण का लाभ प्राप्त हुआ है !या नहीं ? जिन अरक्छित जातियों को आरक्छण का अधिक लाभ हुआ है !उन जातियों के नाम प्रकाशित किये जाएँ !और शेष अरक्छित जातियां जिन्हे आरक्छण का कम लाभ या बिलकुल लाभ नहीं मिला है !उनका भी नाम प्रकाशित होना चाहिए !जिन अरक्छित जातियों के लोगों को आरक्छण के कारण मंत्री ,सांसद , विधायक आदि बनने का अवसर प्राप्त हुआ !तथा जिनको भारतीय प्रशासनिक सेवा और भारतीय पुलिस सेवा आदि में तथा अन्य महत्त्व पूर्ण पदों जैसे प्रांतीय चिकित्सा के छेत्र प्रांतीय प्रशाशनिक सेवा पुलिस सेवा ,रेलवे आदि में महत्त्व पूर्ण पदों पर नियुक्ति हुई है !उन परिवारों का भी प्रकाशन होना चाहिए !क्या आरकच्छित जातियों के चंद लोग, जातियां और परिवार ही आरक्छण का लाभ ले रहे है !और अन्य अरक्छित जातियों को आरक्छण के लाभ से वंचित कर रहे है ?इस प्रश्न पर भी विचार होना चाहिए !(२) जिन जातियों को आरक्छण प्राप्त नहीं हैं !उनकी आर्थिक स्थिति का सर्वेक्छन् किया जाना चाहिए !और इस तथ्य पर भी विचार किया जाना चाहिए !कि आरक्छण से लाभ प्राप्त करने वाले व्यक्तियों का आर्थिक स्तर यदि सामान्य से बहुत अधिक बढ़ गया हो !तो उन्हें आरक्छण का लाभ जारी रखना चाहिए या नहीं ?इसी प्रकार से आरक्छण की समीक्छा और मूल्यांकन किया जाना चाहिए !जिस आरक्छण का विधान संविधान में शोषित ,पिछड़ी जातियों के लिए किया था !आज उन्ही अरक्छित जातियों के आरक्छण से लाभान्वित और समृद्ध हुए लोग अरक्छित जातियों का शोषण कर रहे हैं !और उनके संवेधानिक अधिकारों को उन तक नहीं पहुँचने दे रहे हैं !तथा सवर्ण कहे जाने वाले लोगों की आर्थिक स्थित बद से बदतर होती जा रही है !उन्हें किसी भी प्रकार का सरकारी संरक्छण गरीव और साधन हीन होने के बाद भी प्राप्तनहीं हो रहा है !उनका सिर्फ एक ही दोष है !कि बे सबर्ण हैं !
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