अगर देश में कृषि उत्पादकों को उनका सही मूल्य नहीं दिया गया !और कृषि भूमि का उपयोग आवासीय और व्यबसायिक उपयोग के लिए इसी प्रकार जारी रहा और ग्रामीण अर्थव्यबस्था को पूरी तरह से नष्ट भ्रष्ट कर दिया जाता है !और जिस तरह से राजनेताओं और सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के बेतन और सुविधाओं में लगातार बृद्धि की जा रही है !और बे अपने कर्तव्यों का निर्बहन नहीं कर रहे हैं !आवश्यक खाद्य बस्तुओं का अभाव हो रहा है !बाजारों में मिलावटी और प्रदूषित तथा जहरीले केमिकल्स और जानवरों की हड्डियों और चर्वी से निर्मित खाद्द्य पदार्थ बेचे जा रहे हैं !उस से यह स्पष्ट आभास हो रहा है !कि देश को भी मुद्रा स्फीति के भयानक परिणाम भोगना पड़ सकते हैं !उत्पादन के केंद्र गाओं होते हैं !शहरों में तो सिर्फ उनका भोग होता है !देश में स्मार्ट सिटीज का निर्माण और गाओं का विनाश हो रहा है !रूपया जो नासिक में छपता है !उसकी प्राप्ति को ही प्रधानता दी जा रही है !सरकार महगाई का मुकाबला रूपए छाप कर और बाँट कर कर रही है !चारों ओर रपया की मांग हो रही है !जबकि रूपया लक्छमी नहीं है !विनोबा जी कहते थे रूपया लफंगा है !वास्तविक लक्छमी वह है जो श्रम और भूमि के सहयोग से उत्पन्न होती है !किन्तु आराम तलबी और भोग विलास में लिप्त कर्तव्य हीं उत्पादन ना करने वाले लोग अपने चारित्रिक नैतिक पतन के इतिहास का निर्माण कर रहे हैं !और देश को गंभीर संकट की और ले जा रहे हैं !तथा मुद्रा स्फीति का मार्ग प्रस्तुत कर रहे हैं !
No comments:
Post a Comment