Tuesday, 24 November 2015

भाजपा के समर्थक और भाजपा के विरोधी दोनों ही प्रकार के लोग सहन शीलता के विरोध में आक्रामक शब्दों के गोले दागते हैं !शब्दों की मर्यादा नष्ट होती दिखाई देती है !यही इनटॉलेरेंस है !लोकतंत्र के लिए यह ठीक और उचित नहीं है !हमारा लोकतंत्र विचारों की अभिव्यक्ति में ठहरा हुआ सा दिख रहा है !विकसित  लोकतंत्र में विचारों की अभिव्यक्ति की पूर्ण स्वतंत्रता होती है !सिर्फ वही विचार प्रतिबन्धितहोते है !जिनकी अभिव्यक्ति कानून द्वारा प्रति बंधितहोती है ! कुछ लोग भाजपा की सत्ता को घृणा की दृष्टि से देखते हैं !बे भी मतदाताओं का अपमान करते हैं !उनकी यह घृणा भी लोकतंत्र की दृष्टि से उचित नहीं है ! लोक्तन्त्र में मत दाता ही नेताओं को जनप्रितिनिधि बनाता है !इसलिए मतदाताओं के निर्णय को गलत बताकर अपने को बुद्धिमान सिद्ध करना ये भी लोकतंत्र के लिए घातक है ! मोदीजी के अंध भक्त मोदीजी की लोकतान्त्रिक दृष्टि से की गयी समालोचना को स्वीकार नहीं करते हैं !और मोदीजी के विरुद्ध थोड़ा सा भी बोलने पर उनको भद्दी भद्दी गलियों से नबाजते हैं !सोनिया गांधी ,राहुलगाँधी और कांग्रेस पर बहुत ऊल ज़लूल शब्दों से आक्रमण करते हैं !यह भी लोकतान्त्रिक भावना के प्रतिकूल है !लोकतंत्र के इस सिद्धांत को सभी राजनैतिक दलों को ध्यान में रखना चाहिए कि    लोकतंत्र में सत्ता समुद्र की उठती गिरती तरंगों के समान है !कुछ तरंगे ज्यादा ऊँची उठती हैं !और कुछ कम उचाई तक उठ पाती  हैं !कांग्रेस की तरंग काफी उचाई तक उठी रही !अब भाजपा की तरंग उठी है !किन्तु यह अभी मुकाम तक नहीं पहुंची है !तरंग चाहे ऊँची हो या नीची वापिस आकर समुद्र में ही गिरती है !इसीलिए विकसित लोकतंत्र में शव्दों का आक्रमण व्यक्तियों पर नहीं नीतियों पर होता है !भारत में चुनाव जीतने केलिए राजनेता जनता को सब्ज बाग़ दिखाते हैं !किन्तु सत्ता में आने के बाद बे जनता से किये हुए वायदे भूल जाते हैं !और सत्ता में बने रहने के प्रयत्न में जुट जाते हैं !इसलिए जन समस्यायों का निराकरण नहीं होता है !देश में भाजपा को अपनी सारी शक्ति महगाई कम करने में लगानी चाहिए !और देश में जो भ्रष्टाचार है !  उसको स्वयं के आचरण को शुद्ध कर  समाप्त करने का प्रयत्न करना चाहिए !तथा देश में जो शाब्दिक इनटॉलेरेंस की बृद्धि हो रही है उसको भीसमाप्त करना चाहिए !

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