मंजिल प्राप्ति के मार्ग को नष्ट किया जा रहा है -------- मंजिल पर पहुँचने के लिए पुरुषार्थी और परमार्थी लोग मार्ग निर्माण करते थे !यही जीवन पद्धति भविष्य के समग्र विकास की मार्ग दर्शक और प्रेरणा श्रोत्र होती थी !अब यह विकास की परम्परा भारत में टूटती जा रही है !विकास के लिए अब लागों की तैयारी संपूर्ण विनाश की है !सबके पास दिल दिमाग और ऑंखें है !सबलोग इस को देख और समझ सकते हैं !फिर भी कुछ उदाहरण यहां प्रस्तुत हैं !विद्यार्थी विना पढ़े प्रथम श्रेणी की डिग्री नक़ल करके प्राप्त कर रहे हैं !इस कार्य में उनके माता पिता और अध्यापक उनका सहयोग कर शिक्छा प्राप्त के मार्ग को नष्ट कर मंजिल की प्राप्ति करा रहे हैं !अधिकारी कर्मचारी अदि काम नहीं कर रहे हैं !काम करने के लिए रिश्बत ले रहे हैं ! और सुविधा ,वेतन और पेन्सन अदि के लिए हड़ताल और आंदोलन कर रहे हैं ! न्यायाधीश लम्बित मुकददमों के लिए न्यायाधीशों की कमी के लिए रो रहे हैं !अधिवक्ता हड़ताल कर रहे हैं ! कानून की विरासत ,शक्ति और सामर्थ्य का विनाश कर ,रिश्बत खोरी का विरोध ना कर अपने को सम्मानित घोषित कर रहे हैं !प्रवचन करने वाले धार्मिक मंचों से अधर्म के प्रतीक रावण ,कंस अदि की निंदा कर रहे हैं !तप त्याग ,संयम ,साधना ,भगवत भक्त आदि का गुण गान कर रहे हैं ! किन्तु अधर्म की बृद्धि हो रही है और धर्म के सदाचार ,नीति आदि के आवश्यक अंगों का लोप हो रहा है ! धर्म की प्राप्ति के लिए धर्म के मार्ग को नष्ट किया जा रहा है !सन्सद से लेकर विधान सभा और गाओं सभा तक के निर्वाचन के लिए लोकतांत्रिक प्रक्क्रियाओं को नष्ट कर जनप्रीतिनिधि चुने जा रहे हैं !राजनीति में षड्यंत्र झूठ और कूटनीति ,झूठी प्रशंशा ,निंदा और चरित्र हनन का आधिपत्य हो गया है !पद प्राप्ति के लिए लोकतंत्र का मार्ग नष्ट किया जा रहा है !समाचार पत्र और दृश्य मीडिया सही समाचार न पहुंचाकर मीडिया की निष्पक्छ्ता की प्रमाणिकता को नष्ट कर रहे है !महगाई से पीड़ित जनता नित्य अच्छे दिनों के आगमन की प्रतीक्छा कर रही है !ये सब कौन कर रहा है ? हमीं सब सामूहिक और व्यक्तिगत रूप से कर रहे हैं !क्योंकि चपरासी से लेकर प्रधान मंत्री तक हम ही बैठे हुए हैं !सभी रूपों स्वरूपों में हम ही विदयमान हैं ! हम ही हैं जो हम सुधरेंगे तो जग सुधरेगा का नारा लगा रहे हैं !और हम ही इस नारे कोविफल कर रहे हैं ! अपना सुधार संसार की सबसे बड़ी सेवा है !इसका उद्घोष करने वाले लोग आत्मसुधार के मार्ग को नष्ट कर रहे हैं !हमलोग महापुरुषों के कथनों को जो उनके जीवन के अनुभव से निकलते हैं !उनका लेखन ,पाठन और कथन तो करते हैं !किन्तु इन कथनों की प्राप्ति के लिए मार्ग का निर्माण नहीं करते हैं !उलटे इस परमार्थ के मार्ग को अपने स्वार्थ से नष्ट करते हैं !अगर हमें मंजिल तक पहुँचना है तो मार्ग का निर्माण भी करना होगा !यश की धरोहर की प्राप्ति सिर्फ शव्दों से नहीं हो सकती है ! अभी तो हमारी गति मार्ग नष्ट कर मंजिल प्राप्ति की ही है ! l
Saturday, 30 April 2016
काल और परिस्थिति के अनुसार स्त्री पुरुषो राजाओं राज्य अधिकारीयों और
धर्माधिकारियों आदि के लिए जिस आचरण पद्धति का निर्माण होता है! उसे
शास्त्र कहते है !इसलिए शास्त्र का उल्लंघन न करने की मनाही शास्त्र
ग्रंथोँ में की गयी है !भगवान श्री कृष्णा ने गीता में कहा है कि जो मनुष्य
शाश्त्र विधि को त्याग कर वासनाओं की तृप्ति के लिए मन माना आचरण करता है!
उसको ना अन्तः करण की शुद्धि प्राप्त होती है और ना ही उसे सुख ,शांति और
परम गति की प्राप्ति होती है ! इसलिए सभी को कर्तव्य अकर्तव्य की जानकारी
के लिए शाश्त्र ही प्रमाण है इसलिए सभी को शाश्त्र विधि जान कर ही अपने
नियत कर्तव्य कर्म को करना चाहिए ! १६(२३,२४) !किन्तु वर्तमान समय भी सभी
को शाश्त्र या शस्त्र विधि की जानकारी नहीं होती है !इसलिए भगवान ने फिर
कहा कि मनुष्य को यदि शाश्त्र का ज्ञान नहीं है! तो उसको अपनी श्रद्धा के
अनुसार आचरण करना चाहिए !यहाँ स्त्रियोँ के लिए शाश्त्र आज्ञा के अनुसार जो
कर्म वर्जित किये गए है !बे गृहस्थ धर्म के परिपालन के लिए बहुत उत्तम है
!किन्तु काल, परिस्थति, देश, समाज और समय के अनुसार इनमे शंशोधन परिवर्धन
और परिवर्तन भी किया जा सकता है!
Thursday, 28 April 2016
सपा विधायक ने जड़ा लखनऊ विकास प्राधिकरण के सचिव को थप्पड़ ------- लोकतंत्र में आत्मसंयम ,मनोनिग्रह और इंद्रिय संयम की महत्त्व पूर्ण भूमिका होती है !लोकतंत्र एक ऐसी शाशन व्यबस्था है जो आत्मसंयम से संचालित होती है !राजव्यबस्था का सञ्चालन कठोर दण्ड के भय से होता है !इसिलए दण्ड के भय से अपराध लोकतंत्र की अपेक्छा काफी कम होते हैं !राज्य व्यबस्था बंश परंपरा से संचालित होती थी !किन्तु लोक्तान्तरिक व्यबस्था का संचालन आम जनता द्वारा निर्वाचित जनप्रितिनिधियों द्वारा होता है !यही जनप्रितिनिधि गाओं सभा से लेकर संसद तक शाशन व्यबस्था के लिए विधान का निर्माण करते हैं !और विधान का पालन कार्यपालिका और न्यायपालिका द्वारा किया जाता है ! लोकतंत्र में मानव अधिकारों की रक्छा सुरक्छा पर विशेष ध्यान दिया जाता है !समाज के बंचित ,पीड़ित ,दलित ,पिछड़े अल्पसंख्यक ,निर्बल ,अपंग और महिलाओं आदि के विकास के लिए अनेक कानूनों का निर्माण होता है !रजयकर्मचार्यों ,अधिकारियों ,व्योपरिओं और अनेक अनगिनित समाजिक स्वेक्छिक संगठन अदि भी लोकतंत्र के कुशल संचालन के लिए निर्मित हो जाते हैं !इन सब संगठनो का ध्येय कागजों और भसणो में सामाजिक न्याय दिलाने का होता है! !ग्रामसभा से लेकर संसद तक का संवैधानिक दायित्तव निष्पक्छ रूप से समाज के पास सभी संसाधनों को न्याय पूर्वक पहुँचाने का होता है !किन्तु यह सब जभी सफल हो पाता है ! जब सभी संस्थाएं अपने कर्तव्यों का पालन करती है !और कर्त्तव्य पालन के लिए क़ानून से अधिक आत्मसंयम की आवश्यकता होती है !आत्मसंयम के अभाव में लोकतंत्र बेअसर और नुमायशी बन जाता है !और प्रितिनिधयों के रूपमे अत्यन्त निकृष्ट स्वार्थ पोषक लोग प्रवेश कर जाते हैं !यहाँ प्रश्न किसी राजनैतिक दल के विधयक का नहीं है ?प्रश्न विधायक और अधिकारी के आचरण का है ?!और बे जिस पिछड़े और दलित समुदाय से आते हैं ! उसके विकास और पिछड़ेपन को दूर करने का है ?! विधायक पिछड़ी जाति के हैं ! जिनके अवैध निर्माण को तोड़ने का कार्य दलित अधिकारी के द्वारा किया जा रहा है !एपिछ्डे विधायक अब इस लोकतांत्रिक व्यबस्था में इतने मजबूत हो गए हैं कि इनके पास विलास और बैभव के और शक्ति सामर्थ्य के वैधानिक और अवैधानिक इतने साधन है !kee जनप्रीतिनिधि के रूप में एक अधिकारी को थप्पड़ भी मार सकते हैं !और अपने इस अवैधानिक और आपराधिक कृत्य की रक्छा के लिए अवैध शस्त्रों से पुलिस से मुकाबला भी कर सकते हैं !दूसरी और दलित अधिकारी हैं जो थप्पड़ खाकर भी इतने भयग्रस्त है कि घटना की सही जानकारी भी नहीं दे पा रहे हैं ! दोनों में आत्मसंयम का अभाव है !यह अभाव लोकतंत्र के लिए गम्भीर खतरे के रूप में व्याप्त है !न्याय की दृष्टि का लोप हो गाय है !जो विकसित हो गया है !उसने विकास की गंगा के प्रवाह को स्वार्थ के बाँध से अवरुद्ध कर दिया है !अभी भी पिछड़े और दलित विकसित नहीं हो पाये हैं !किन्तु जो विकसित हो गए हैं !उन्होंने भोग और विलास के लिए अकूतधन संपत्ति का संचय कर लिया है !और जिन्हे सवर्ण जाति कहा जाता है !उनके पीछे ये विकसित और दलित नेता डंडा लेकर पड़े रहते हैं !और ये ज्ञानशून्य निम्न स्वार्थ निष्ठ ,वैदिक संस्कृति के आचरण ,संस्कृति ,और इतिहास से अनभिज्ञ दलित ,पिछड़े नेता ब्राह्मणो पर दलितों के उत्पीड़न का अनर्गल आरोप लगाते हैं !जबकि ब्राह्मणों ने कभी भी किसी का उत्पीड़न नहीं किया ! आज आर्थिक दृष्टि से ब्राह्मण इतना कमजोर है कि उसकी गढ़ना भी आर्थिक स्थिति के आधार पर दलितों और अति पिछड़ों में की जानी चाहिए !कुछ समृद्ध ब्राह्मणो के आधार पर ब्राह्माणों को समृद्ध मानने की गलती नहीं करनी चाहिए ! ,
Wednesday, 27 April 2016
आजाद
भारत में लोगों ने रूपया को ही लक्ष्मी समझने की भूल की !जबकि रूपया तो
नासिक में छपता है और लक्ष्मी मनुष्योँ के परिश्रम और भूमि ,वनस्पति
पशुओं ,और अन्य जीव धारियों के सक्रिय सहयोग से उत्पन्न होती है !रुपये को
लक्ष्मी समझ कर धन बृद्धि की वासना से ग्रस्त लोगों ने ब्रक्छों को काटना
भूमि को खोद कर उसमे से खनिज पदार्थ निकलना पहाड़ों को तोड़कर गट्टी निकालना
दूध देने वाले पशुओं गाय आदि को मार कर उनके मांश का भक्छण कर उनके मांश का
निर्यात करना ,नदियोँ की बालू निकालना और भूखंडों पर
नियम विरुद्ध बड़े बड़े भवन निर्माण करना आदि से देश का पर्यावरण पूरी तरह
से दूषित हो गया !और देश में असमय वारिश और भूकम्प आदि की सम्भावना पूरी
तरह से बढ़ा दी !तथा रूपया कमाने और संग्रह करने की होड़ में नेता अभिनेता
अधिकारी कर्मचारी अधिवक्ता व्योपारी धर्माचारी आदि सभी शामिल हो गए !और
सारे देश में अकर्मण्यता रिश्वत खोरी कामचोरी बेईमानी आदि का बाहुल्य हो
गया !आज रूपया लोगों के पास आवश्यकता से बहुत अधिक है !किन्तु बाजारों में
जहरीला खाद्द्यान्न चर्वी से बना हुआ घी चेमिकल्स और हानिकारक अशुद्ध
वस्तुओं से बने हुए दूध पनीर मक्खन आदि तथा नकली मसाले .नकली खाद जहरीले फल
सब्जी आदि तथा नकली दवाइयाँ फर्जी डिग्रियां आदि की ही बाजारों में भरमार
है ! और सबसे बड़ा मनुष्यता के समूल नाश का खतरा भूकम्प भी उत्पन्न हो गया
है !इसीलिए अगर मनुष्य यह चाहता है की प्राणी मात्र का असितत्त्व नष्ट न
हो और लोगों को शुद्ध स्वास्थ्य वर्धक सामग्री की प्राप्ति हो तो उसे
लक्ष्मी को प्राथमिकता रुपये के स्थान पर देनी होगी !भूमि से अन्न पशुओं से
दूध घी मक्खन आदि कपास की उपज से वस्त्र आदि का साधन बनाना होगा ! और जल
.वायु की शुद्धता के लिए जहरीली गैसें छोड़ने वाली फैक्टरियों और भूमि की
रक्षा के लिए सभी प्रकार के अवैध खनन और वर्षा तथा पर्यावरण की शुद्धि के
लिए ब्रक्छों की अवैध कटानो को रोना होगा और इस कार्य को प्राथमिकता के
आधार पर करना होगा !तभी सबका जीवन सुरक्छित रहेगा
भ्रष्टाचारी, ही भ्रष्टाचार विरोध का मन्त्र जाप कर रहे हैं ------- भ्रष्टाचार करने वालों ने एक नया तरीका ईजाद किया है !वह है छिप कर और खुलकर जैसे भी कर सकते हो भ्रष्टाचार करो और भ्रष्टाचार का जोर दार विरोध भी करो ! देश की विकास यात्रा ,प्रमाणिकता ,मानवता ,धार्मिकता ,वैधानिकता ,स्वस्थ्य ,शिक्छा ,पारिवारिक सम्बन्ध विश्वसनीयता अदि सभी सत्कर्म भ्रष्टाचार ने नष्ट कर दिए हैं !भ्रष्टाचार इतनी तीव्रगति से बढ़ा है और बढ़ रहा है कि इसने तूफ़ान का रूप ले लिया है !जैसे अंधड़ में आँखों में धूल भर जाती है जिस से दिखना बंद हो जाता है !उसी प्रकार भ्रष्टाचार के जनक लोभ ,लालच की आंधी ने भ्रष्टाचारियों को अंधा कर दिया है !अब उनको अपने स्वार्थ के अलावा और कुछ नहीं दिखाई दे रहा है ! भ्रष्टाचार निवारण के उपाय के रूप में यदि कर्तव्य निष्ठा का पालन करना लोग शुरू करें तो इसका प्रभाव कुछ कम हो सकता है !एक बार अगर लोग भ्रष्टाचार से मुक्त जीवन जीने का लाभ लेने लगें तो जितना लाभ अभी भ्रष्टाचारियों को भ्रष्ट आचरण से प्राप्त हो रहा है उस से कई गुना लाभ उनको कर्तव्या पालन से होगा ! और देश की भी सभी रचनात्मक गतिविधियाँ भ्रष्टाचार से मुक्त हो जाएंगी !सभी देश बासियों का एक ही नारा होना चाहिए ! हमें चाहिए भ्रष्टाचार मुक्त भारत ! सभी प्रकार की समस्याओं से मुक्ति भ्रष्टाचार मुक्त भारत के निर्माण से होगी !
Monday, 25 April 2016
कोई भी व्यक्ति किसी भी तरह से धन संपत्ति अर्जित करले तो वह महत्त्व पूर्ण हो जाता है !और अगर उसने धन सम्पत्ति संग्रह करने में हत्या .बलात्कार अदि के सर्वाधिक संगीन अपराध किये हों !तब तो फिर समाचार पत्रों और चैनलों की सुर्खियां बन जाता है !भारत में सैकंडों लोगों की हत्या कर पाकिस्तान में बस जाने वाला यह कुख्यात अपराधी भी ख़बरों की सुर्ख़ियों में रहता है !पकिस्तान में रहकर भी वह सभी प्रकार के आर्थिक और अन्य नृशंश अपराध करता रहता है !पकिस्तान की सरकार भी उसको सम्मान दे रहेी है और उसको भारत को नहीं सौंप रही है !इस प्रकार के अपराधियों को प्रमुखता देने के कारण अब लोगों में विशेषकर सम्मान और नाम प्रकाशन के लिए लालायित लोग अब येनकेन प्रकारेण धन संचय में ही संलगन देखे जाते
उच्च्तम न्यायालय के मुख्या न्यायाधीश का मुकददमों के शीघ्र निस्तारण के सम्बन्ध में न्यायाधीशों के अभाव की चर्चा करते हुए भावुक हो जाना !यह उनकी वादकारियों के प्रति तीव्र वेदना की अभिव्यक्ति प्रदर्शित करती है! न्याय प्राप्ति में विलम्ब के अनेक कारण है !इन कारणों के पीछे सबसे महत्त्व पूर्ण कारण लोगों का अपने कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक पालन करने का अभाव है !दो प्रकार के मुकदद्मे न्यायालय में पेश होते है ----- १ ---- आपराधिक मुकदद्मे जिनमे अधिकाँश में शाशन वादी होता है ! २------ दीवानी ,माल ,और व्यक्तिगत आपराधिक मामले जिनमे अधिकाँश में पीड़ित व्यक्ति स्वयं वादी होते हैं ! न्यायालय में इन सभी प्रकार के मुकददमों के निस्तारण में अधिवक्ताओं ,न्यायालय के कर्मचारियों ,और न्यायाधीशों की विशेष भूमिका होती है !अधिवक्ता कभी भी किसी भी समय हड़ताल कर देते हैं !मुकददमों के सुनबाई में भी अधिवक्ताओं की प्रमुख भूमिका होती है !न्यायाधीश चाहकर भी अधिवक्ताओं की हड़ताल या उनके दूवारा दिए गए प्रकरण की सुनबाई स्थगित करने के प्रार्थना पत्र के बाद सुनबाई नहीं कर सकते हैं !इसके अलावा भ्रष्टाचार भी न्याय प्राप्ति के मार्ग में सबसे बड़ी बाधा है !धन कमाने की असीमित आकांछा ने लोगों को भ्रष्टाचार की अँधेरी कोठरी में प्रवेश करा दिया है !जिस से बाहर आने की इक्छा भ्रष्ट लोगों की नहीं है ! फिलहाल लोगों की कर्त्तव्य निष्ठां के अभाव के कारण अभी किसी भी प्रकार के न्यायिक समाधान की सम्भावना नहीं है !
भूकम्प से ज्यादा तबाही हिमालय छेत्र में स्थित नेपाल में हुई और थोड़ी बहुत
तबाही भारत में भी हुई ! भकंप को वैज्ञानिक और धार्मिक दोनों कारणों से
देखा जाना चाहिए !धर्म के पांच चरण होते हैं श्रद्धा ,सत्य ,प्रेम , करुणा
और त्याग !इनमे श्रद्धा तो धार्मिक लोगों में दिखाई देती है !किन्तु बाकी
चार चरणो का दर्शन नहीं होता है !हिन्दुओं के आयोजनो में श्री मद भगवत
रामायण कथा और यज्ञ आदि आयोजनो के कार्यक्रम प्रधानता से होतेहैं !भगवत ७
दिनों में मोक्ष मार्ग बताने वाला ग्रन्थ है !रामायण दैनिक
व्योहार में मर्यादा पालन की बात कहती है और यज्ञ पारमार्थिक जीवन जीने की
विद्या बतात है !किन्तु भगवत की कथा में भगवत नहीं होती है !भजनो गीतों
आडम्बरों की भरमार होती है !भगवत कराने वाले अनीति अनैकित्ता और बालू मिटटी
गिट्टी ज़मीन खोद कर उसको पोलाकर और ब्रक्छ काटकर पर्यावरण का विनाश करने
बाले और जोर जबर्दश्ती से लोकतान्त्रिक व्यबश्था को नष्ट करने वाले तथा
शराब के व्योपारी आदि होते हैं!और कथा वाचक भी बहुत ऊँचे किस्म के ऊँची
दक्छिणा पर भगवत की कथा कहते हैं !इस प्रकार भगवत का मोक्ष का सिद्धांत
आयोजक और कथा बाचक भोग में बदल देते हैं और आयोजक गण आशीर्वाद प्राप्त कर
पूरी शक्ति से फिर अपने पुराने धन्दों में लग जाते हैं !यही हाल रामायण कथा
का होता है ! यज्ञ का तो पारमार्थिक उद्देश्य और बिधि तथा पवित्रता का ही
नाश हो गया है !क्रिकेट की जीत चुनाव में नेताओं की विजय बुद्धि शुद्धि
यज्ञ आदि बिना पवित्रता और विधि विधान के सम्पन्न किये जाते हैं !कुछ
यज्ञों में गुरूजी के चित्रों को देवताओं से ज्यादा महत्त्व दिया जाता है
!कुछ धार्मिक कार्य सिर्फ नेताओं और अधिकारिओं को प्रसन्न करने के लिए किये
जाते हैं !इसलिए इस प्रकार के आयोजनो के भयंकर परिणाम भी श्रद्धालुओं की
मौत के रूप में सामने आते हैं !मुसलमानो के ईद आदि के जलसों में तलवारों की
भरमार होती है !और नमाज में शांति और सद्भाव की कामना की जाती है !और कभी
कभी तो यह देखने में आता है कि नवाज के बाद मुसलमान और उग्र हो कर भयंकर
खून खराबी और तोड़ फोड़ करते पाये जाते हैं!इस प्रकार सार रूप मेसभी धर्म
त्याग प्रेम करुणा और सत्य का सन्देश ना देकर हिंसा शोषण अनीति अत्याचार
भ्रष्टाचार और मानवता के विरुद्ध और पर्यावरण के नाशक हो गए हैं !और परिणाम
में अभी का भूकम्प आया है ! और भविष्य के भूकम्प जनता के सामने आएंगे और
आते रहेंगे !हम सुधरेंगे नहीं इसीलिए प्रकृति का प्रकोप होता रहेगा!
Saturday, 23 April 2016
नेता
अधिकारी कर्मचारी बहुत धार्मिक हो गए हैं !और सरकारी कर्तव्य कर्म का
त्याग कर सरकारी साधनो से धार्मिक आयोजनो में शामिल भी होते हैं !मुख्य
मंत्री मंत्री स्तर के नेता तो हेलीकाप्टर से यात्रा करते हैं !इसीलिए उनको
टूटी फूटी गड़्ढोँ से युक्त सड़कों पर यात्रा करने से होने वाले कष्टों से
नहीं गुजरना पड़ता है !और जो इनसे छोटे स्तर के नेता है उनके पास भी लक्छरी
कारें हैं !इसिलए बे भी आराम से इन सड़कोँ से निकल जाते हैं !धार्मिक प्रवचन
करने वाले कथा व्यास भी इन नेताओं को अपना भर पूर आशीर्बाद
प्रदान करते हैं !धामिक श्रद्धा का दर्शन तो इन आयोजनो में होता है
!किन्तु धार्मिक धारणा का दर्शन इन आयोजनो में नहीं होता है !अपने
स्वार्थोँ की पूर्ति में संलग्न ये लोग सड़कों के लिए दिया गए धन से ये
अपना बैंक बैलेंस बढ़ाते हैं! और आम जनता के लिए नर्क का निर्माण करते हैं!
धर्म धारणा का जो सिद्धांत कर्तव्य निष्ठां का है उसका संपूर्ण अभाव
आयोजकों प्रवचन कर्ताओं में और इन श्रद्धा व्यक्त करने वालों में पूर्ण रूप
से देखा जा सकता है !अनीति से उपार्जित धन से इन आयोजनो को संपन्न कराने
से और कथावाचकोँ से आशीर्वाद प्राप्त कर ये लोग नए उत्साह के साथ कर्तव्योँ
की अवहेलना करने के लिए और अपने निम्न स्वार्थोँ की पूर्ति के लिए पुरे
मनोयोग से जुट जाते हैं! !इस तरह से धर्म की धारणा भी सिद्ध नहीं होती है
!और इन धार्मिक आयोजनो का खामयाजा आम जनता भ्रष्ट आचरण के रूप में सहन करने
की लिए बाध्य होती है !भगवान श्री कृष्णा ने गीता १८(४५,४६)में भगवान की
प्राप्ति का साधन बताते हुए धार्मिक धारणा कोधारण करने के लिए कहा है !कि
अपने अपने कर्तव्य कर्मों में लगा हुआ मनुष्य परमात्मा को प्राप्त कर लेता
है !अपने कर्तव्य कर्मों को करता हुआ मनुष्य जिस प्रकार सिद्धि को प्राप्त
होता है उस प्रकार को तू मुझ से सुन! जिस परमात्मा से संपूर्ण प्राणियों की
उत्पत्ति होती है! और जिस परमात्मा से यह सम्पूर्ण संसार व्याप्त है! उस
परमात्मा का अपने कर्तव्य कर्म के द्वारा पूजन करके मनुष्य मात्र सिद्धि को
प्राप्त हो जाता है !अगर देश के नेता अधिकारी कर्मचारी कथावाचक धार्मिक
आयोजक अगर इस उपदेश का पालन करें तो उनको भी भगवान का आशीर्वाद प्राप्त
होगा! और आम जनता को टूटी फूटी सड़कों और भयानक भ्रष्टाचार से मुक्ति मिलेगी
!
भारतीय जनतापार्टी का उद्देश्य इसके जन्म काल से ही भारतीय राष्ट्रीयता को स्थापित करने का रहा है !इस कार्य को शव्दों के घेरे से उठाकर आचरण में उतारने में इसको अभी तक सफलता प्राप्त नहीं हुई दीखती है !भारतीय बाणिज्य की पुरातन पद्धति में विदेशों से आयातित साम्य बाद और समाजबाद के स्थान पर भारत भूमि में उत्पन्न भारतीय समाज बाद रहा है !जिसके अंतर्गत व्योपारी वाणिज्य उचित मुनाफा लेकर देश बासियों की सेवा करते थे !आधुनिक शव्दों में उसे मुक्त बाजार व्यबस्था कहते हैं !केंद्र की भाजपा और राज्यों की भाजपा सरकारें पूंजीपतियों और ,उद्द्योगपतियों को पूर्ण स्वतंत्रता दिए हुए है !किन्तु ये उद्दोगपति स्वतंत्रता का दुरपयोग कर रहे हैं !और सरकारी बैंकों से भारी मात्रा में ऋण प्राप्त कर जनता का भयानक आर्थिक शोषण कर रहे हैं !जमाखोरी और अत्यधिक मूल्य बृद्धि कर बेशुमार लाभ प्राप्त कर रहे हैं !इन उद्द्योगपतियों और व्यापारियों के इस अपराध के कारण भाजपा की सरकारों को पूंजीपतियों और उद्द्योग पतियों का हिमायती कहा जाने लफा है !व्योपारी अपनी जमाखोरी और मुनाफा खोरी की बृत्ति बदलते नहीं दिखाई देते हैं !दालों और खाद्य पदार्थों में अत्यधिक मूल बृद्धि व्यापारियों की इस मुनाफा खोरी का एक उदहारण है !केंद्र सरकार को बाजार पर अंकुश लगाना चाहिए !और पूंजीपति तथा उद्द्योग पति जनता के हित में कार्य करेंगे ? सरकार को इस भ्रम से मुक्त हो जाना चाहिए !और जमाखोरों के विरुद्ध सख्त वैधानिक कार्यबाही करना चाहिए !
Friday, 22 April 2016
विश्व पुस्तक दिवस ------शव्द ज्ञान यदि अनुभव और आचरण में नहीं उतरता है !तो यह पाखण्ड ,दम्भ ,छल ,कपट का श्रोत बन जाता है !फिर ये शव्द ग्यानी समाज का मानसिक स्वस्थ्य नष्ट करने का काम करते हैं !ये कपट कला के विशेषज्ञ अपनी प्रतिष्ठा के पोषण के लिए और भौतिक समृद्धि प्राप्त करने के लिए उत्तम शव्दों का जाल प्रकाशन के भिन्न भिन्न माध्यमों से फैलाकर अपसंस्कृति का निर्माण करते हैं !कथनी और करनी का अंतर इन शव्द ज्ञानियों में तो होता ही है !इनका अनुकरण समाज के लोग भी करने लगते हैं !शुद्ध पदार्थ बेचने का बोर्ड लगाने वाले मिलावटी पदार्थ बेचते हैं !डाकटर,नेता ,अधिकारी ,कर्मचारी ,शिक्छक ,अधिवक्ता ,व्योपारी ,पारिवारिक सम्बन्धों ,धार्मिक प्रवचनों ,जातीय संगठनों ,लेखन कार्य करने ,समाज सेव करने वाले संगठनों प्रवन्ध समितियों अदि में ये शव्द ज्ञानी असत्य ,छल ,कपट ,दम्भ ,और अपनी प्रशंसा अदि के दुर्गुण प्रवेश कराकर मानवीय मूल्यों के स्थान पर राकछसी ,आसुरी जीवन पद्धति का प्रवेश करा देते हैं ! इसीलिए भारत की अदि संस्कृति ग्रन्थ प्रधान रही है !ग्रन्थ अध्यात्म ज्ञान के अनुभव के प्रकाशक होते हैं !जिनके अध्यन ,मनन ,चिंतन से आत्म ज्ञान और आत्म विकास होता है !जैसे गर्मी का अनुभवपहले होता है और शव्दों में प्रगट बाद में होता है !उसी प्रकार अध्यात्म ज्ञान का अनुभव ऋषियों में पहले उतरा और अध्यात्म ज्ञान का प्रगटीकरण ग्रंथों में बाद में होता है !जैसे कूलर ,पंखे ,येसी अदि उपकरणों का निर्माण ताप के कष्ट निवारण के लिए हुआ है !उसी प्रकार ग्रंथों में ग्रथित अध्यात्म ज्ञान का उद्भव मनुष्यों के काम ,क्रोध ,लोभ तृष्णा ,लालच ,क्रूरता ,दम्भ ,पाखण्ड झूठ ,अदि दुर्गणों के विनाश और सद्गुणों के विकास के लिए हुआ है !जिस प्रकार माता सीता का अपहरण काम तृप्ति के लिए दुराचारी रावण ने कर लिया था !किन्तु वह दुराचारी भी माता सीता के पवित्रता के तेज की कारण अपनी अत्यन्त छुद्र काम वासना का हेतु माता सीता को बनाने में विफल रहा था !और अंत में उसका सर्व नाश हो गाय था !जैसे बादलों में छिप जाने से सूर्य का प्रकाश कुछ काल के लिए छिप जाता है !किन्तु बदल विनिष्ट हो जाते हैं !और सूर्य यथाबत प्रकाशित होता रहता है !उसी प्रकार से भारत का ग्रंथों में ग्रथित अध्यात्म ज्ञान ढपोल शंखी पुस्तक ज्ञान से ढक गया है !ग्रन्थ ज्ञान के अभाव के कारण संपूर्ण विश्व क्रूर हिंसा ,और अशांति से ग्रस्त हो गया है !इसका निवारण आत्मज्ञान से ही होगा !और वह भारत के ग्रंथों में प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है ! भारत में आत्मज्ञानी भी हैं !किन्तु बे ढपोल शंखी शव्द ज्ञानियों के कारण प्रकाशित नहीं हैं !जबतक ढपोल शंखियों का वर्चस्व रहेगा !तब विश्व मानवता पीड़ित ही रहेगी !जैसे नमक में शक्कर का स्वाद उत्पन्न नहीं किया जा सकता है ! वैसे ही इन तथाकथित विश्व पुस्तक दिवस अदि के मनाने से अज्ञान के अन्धकार का नाश नहीं हो सकता है !अगर मात्र पुस्तकों के संग्रह ,पठन ,पाठन से अज्ञान का निवारण संभव होता तो सभी शव्द ग्यानी दम्भ ,पाखण्ड अदि दुर्गुणों से मुक्त हो गए होते !
सत्य
बोलना अत्युत्तम है !इसकी महिमा वैदिक धर्म ग्रंथों में गयी गयी है
!गांधी जी पहले मानते थे ईश्वर सत्य है !किन्तु ईश्वर की साधना से उनको
आत्मानुभव हुआ की सत्य ही ईश्वर है ! उन्होंने सत्य अहिंसा को अपने जीवन की
समस्त क्रियाओं यहाँ तक की राजनैतिक गतिविधियों को भी सत्य अहिंसा का आधार
दिया था !वह कहते थे !कि अंतर बाह्य जीवन की पूर्ण शुचिता और शुद्धि ही
अहिंसा है !और बिना सत्य के अहिंसा की प्राप्ति नहीं हो सकती है !किन्तु
व्योहार जगत में सत्य के आंतरिक मर्म को समझ कर उसका उपयोग
करना पड़ता है !महाभारत में एक प्रसंग में कहा गया है !की जिसकर्म के
परिणाम में लोक कल्याण हो और हिंसा न हो वही सत्य है !और जिस शव्दिक सत्य
के कथन से हिंसा हो वहां शव्दिक झूठ भी सत्य ही होता है !भगवान श्री कृष्ण
ने अर्जुन को एक सत्यवादी मुनि की कथा सुनाते हुए कहा था !की एक मुनि थे जो
सदा सत्य बोलते थे और सत्यबादी के नाम से ही जाने जाते थे !एक बार कुछ
डाँकू एक सेठ का पीछा कर रहे थे !और वह सेठ उन सत्य वादी मुनि के आश्रम के
पास ही ब्रक्छों झाड़ियों की ओट में छिपा हुआ था !डाकुओं ने मुनि से सेठ का
पता पूंछा और मुनि ने सेठ का सत्य बोलकर पता बता दिया !परिणाम स्वरुप
डाकुओं ने सेठ को लूटकर उसकी हत्या कर दी ! इस शाब्दिक सत्य के कारण मुनि
को मृत्यु के बाद नर्क की प्राप्ति हुई! जिस शव्दिक सत्य के परिणाम में
हिंसा होती हो वहां मौन रहना ही सत्य है !और यदि मजबूर होकर बोलना ही पड़े
तो प्राण रक्छा के लिए वहां झूठ बोलना ही सत्य के समान श्रेयष्कर है !
शाब्दिक सत्य कभी झूठ से भी ज्यादा अपराध करने का साधन बनाया जा सकता है
!विनोबा भावे एक उदहारण से इस बात को समझाते थे !दो चोर थे और दोनों ही
सत्य बादी थे !उन्होंने एक बार मिठाई बेचने वाले की दूकान से जब वह चोरों
को पिलाने के लिए दुकांके अंदर पानी लेने गया था उनमे से एक चोर ने उसके
पेड़े चोरी कर दूसरे चोर को दे दिए !जब मिठाई वाले ने पूंछा की तुमने पेड़े
चुराए हैं तो जिस चोर के पास पेड़े थे उसने कहा हम लोग कभी झूठ नहीं बोलते
हैं !पेड़े मेने नहीं चुराए है !और जिसने पेड़े चुराए थे उसने कहा पेड़े मेरे
पास नहीं है !इस प्रकार चोरों ने अपने शव्दिक सत्य से चोरी के अपराध की
सुरक्छा की !इसलिए वास्तविक सत्य अंतर से उत्पन्न लोक हित और प्रमाणिकता की
भावना से श्रेष्ठ कार्य और साधारण कार्य की प्रमाणिकता के लिए उत्पन्न
होना चाहिए !और उसकी अभिव्यक्ति शव्दों मेंहै ! होनी चाहिए !जिस सत्य
से जीव हत्या न होती हो और परिणाम में लोक कल्याण का हित होता हो !वह भी
सत्य ही है !
Thursday, 21 April 2016
साधु संत महाब्रती होते हैं ! इन ब्रतों का एक मात्र उद्देश्य भोग वासनाओं को समाप्त कर अपने पूज्य इष्ट की प्राप्ति या आत्मजागृति होती है ! प्राचीन काल से संतों की यह ब्रतनिष्ठा चली आरही है !शरीर को परमात्मा की साधना में लगाने के लिए जितने अन्न जल की आवश्यकता होती है !मात्र उतना ही अन्न जल संत ग्रहण करते हैं !कुछ संत अश्मकुट्टक होते हैं !अर्थात वे पक हुआ अन्न ग्रहण नहीं करते हैं !सिर्फ पत्थर से फोड़कर भोज्य पदार्थ ग्रहण करते हैं !कुछ संत मरीचिप होते हैं !अर्थात सिर्फ सूर्य किरणों से ही अपना उदर भरते हैं !कुछ परिपुष्टक और विघस अन्न ग्रहण करते हैं ! कुछ शिल बृत्ति और उन्छ बृत्ति से भोजन ग्रहण करते हैं !ऐसे अनेकों प्रकार के महाब्रती संतों के दर्शन कुम्भ में हो सकते हैं !ऐसे महाब्रती संत आमतौर पर देखने में नहीं आते हैं !
उत्तरप्रदेश के मुख्य्मंत्री के आदेश को अमलीजामा पहनाने के लिए समाजवादी पार्टी के कार्यकरताओं मंत्रियों ,विधायकों सांसदों को कमरकश कर प्राणपण से जुट जाना चाहिए !यदि ये लोग मुख्य्मंत्री की सूखे से प्रभावित पात्र व्यक्तियों को ४ महीने तक मुफ्त अनाज देने की योजना को सही ढंग से क्रियांबित करने में लग जाएँ तो बुंदेलखंड में समाजवादी पार्टी का विकास का लक्छ्य आम आदमी तक पहुँच जायेगा !समाजवादी पार्टी से जुड़े हुए सभी लोग अगर यह प्रतिज्ञा करलें कि सरकारी सुविधाओं को बे पात्र व्यक्तियों तक निश्चित पहुंचाएंगे !तो यह काम उनके लिए मुश्किल नहीं है !प्रदेश को अखिलेश के रूप में एक शालीन सभ्य सुशकछित और निरहंकार युवा मुख्यमंत्री प्राप्त हुआ है !और इस सरकार की योजनाएं जनसामान्य के हित की रही हैं !यदि उनके क्रियांबन में समाजवादी पार्टी के सभी अंगों ने ठीक से काम किया होता !तो आज प्रदेश की हालत ही कुछ और होती ! किन्तु अभी भी समय है !क़ि बे व्यक्तिगत स्वार्थों से ऊपर उठकर अब प्रदेश की जनता के लिए काम करें !बुंदेलखंड के लिए जल जमीन और जंगल के लिए जो फंड आवंटित हुए हैं !उनको जनता तक पहुंचाए !अधिकारियों पर अनुचित कामों के लिए दबाव ना बनाकर लोकहित के कार्यों को ठीक से और तत्परत से काम करने के लिए कहें ! य्दि बे चाहते हैं कि समाजवादी सरकार समाजवादी सरकार की तरह दिखे तो उनको अपने अबतक के आर्थिक विकास और धनसम्पत्ति वैभव अदि के संग्रह से ध्यान हटाकर लोगों को समृद्ध होने के अवसर प्रदान करने चाहिए !
Wednesday, 20 April 2016
जहाँ श्री कृष्णा और सुदामा ठहरे थे उस स्थान को महत्त्व प्रदान कर उसको
स्मरणीय बनाने के लिए मित्र स्थल के रूप में उसका नामकरण करना प्रसंसनीय
कदम है !किन्तु महाभारत काल की गरीवी का आज के सन्धर्वों में प्रयुक्त करना
ठीक नहीं है !आज के गरीवी अमीरी के मानदंड उस समय के गरीबी अमीरी के मान
दण्डों से भिन्न है !भौतिक पदार्थोँ की अधिकता या राजा के रूप में प्राप्त
शक्ति की मान्यता समाज में श्रेष्ठता के रूप में नहीं थी और नहीं भौतिक
पदार्थो की प्राप्ति के के लिए सामान्य प्रजा में अनैतिक साधनो
से संपत्ति प्राप्त करने की होड़ थी !भौतिक पदार्थो और राज शक्ति का त्याग
आत्मिक शक्ति को जाग्रत करने के लिए आवश्यक उपाय समझा जाता था !ब्राह्मण का
शरीर भोग पदार्थो के लिए नहीं योग प्राप्ति का साधन था !ब्राह्मण का जीवन
गुण प्रधान होता था भोग प्रधान नहीं !भगवान श्री कृष्णा ने गीता में
ब्राह्मण के स्वाभाविक कर्म १८(४२)में बताते हुए कहा है कि मन का निग्रह
करना इन्द्रियों को वष में करना धर्म पालन के लिए कष्ट सहना बाहर भीतर से
शुद्ध रहना दूसरे के अपराधोँ को छमा करना शरीर नाम बुद्धि आदि तथा धार्मिक
कार्य सरलता पूर्वक करना वेद शास्त्र आदि का स्वाध्याय चिंतन मनन कर उनको
अपने आचरण में धारण करना पारमार्थिक प्रजा कि और खुद कि आत्मतत्त्व कि
प्राप्ति के लिए लोकोपकार के यज्ञ आदि विधि पूर्वक संपन्न करना तथा कराना
परमात्मा कि प्राप्ति को ही जीवन का एकमात्र ध्येय बनाना ये सब ब्राह्मण के
स्वाभाविक कर्म हैं !सुदामा भी इन्ही सब स्वाभाविक कर्मों का पालन करते थे
!इसलिए वह अपने बाल सखा श्री कृष्णा से मिलने तो गए थे किन्तु उन्होंने
उनसे याचना नहीं कि थी !इसलिए सुदामा कि गरीबी में भौतिक बस्तुओं का आभाव
तो था किन्तु दीनता नहीं थी !उसमे ब्राह्मणत्वव का तेज था !और स्वधर्म पालन
कि श्रेष्ठ वृत्ति थी
भगवान
परशराम का फरशाधारण किये हुए रूप का ही चित्रण और वर्णन आजकल प्रमुखता से
किया जारहा है !और उनको छत्रिय राजाओं के विनाशक के रूप में ही प्रस्तुत
किया जाता है !आजकल ब्राह्मण परशराम जी के साथ चाणक्य का भी पूजन करने लगे
है !ब्राह्मण बंधू इन दो को एक को भगवान के रूप में अपना आदर्श मानते है और
दूसरे महान पुरुष के रूप में अपनी श्रद्धा अर्पित करते हैं !किन्तु इन
दोनों के काल खंड और कार्य छेत्र भिन्न भिन्न होने के बाबजूद उनकी महानता
का आधार त्याग और तपस्या ही था !और दोनों के ही जीवन
में इसका स्पष्ट दर्शन होता है !भगवान परशररम छत्रिय विरोधी नहीं थे !उनकी
दादी सत्यवती और माँ रेणुका दोनों ही राजाओं की पुत्रियां थी !और महाभारत
काल में जो उनका भीष्म से युद्ध हुआ वह भी एक छत्रिय कन्या को न्याय दिलाने
के लिए हुआ !और वह भी उनके बाल सखा राजऋषि होत्रवर्ण के कहने से हुआ था !
परशु राम के छात्र कर्म को ऋचीक भृगु आदि ने स्वीकार नहीं किया था !और अंत
में भगवान परशुराम ने मन को एकाग्र करके ध्यान योग का साधन किया और इस
ध्यान रूपी फरसे से उन बलशाली भगवान परशुराम समस्त इन्द्रियों को परास्त कर
दिया बे ध्यान योग के द्वारा आत्मा में प्रवेश करके परम सीधी को प्राप्त
हो गए !तथा बे घोर तपस्या में लग गए !और इस से उन्हें परम दुर्लभ सिद्धि
प्राप्त हुई !महाभारत काल में उनके ब्राह्मणोचित तपस्या से अहिंसा युक्त
चित्त का दर्शन जब होता है !जब भगवान श्री कृष्णा से अन्य ऋषियों असित देवल
नारद आदि के साथ मार्ग में मिलते है जब भगवान श्री कृष्ण कौरवों पांडवों
में मैत्री स्थापना के लिए हस्तिनापुर जाते हुए इन ऋषियों को देख कर रथ से
उत्तर कर इनका अभिवादन करते हैं !तब भगवान परशराम यह कहते हैं कि हम सब का
कौरव सभा में धर्म नीति सद्भाव और अहिंसा युक्त प्रवचन सुन ने के लिए जारहे
हैं !और कौरव सभा में भगवान परशुराम दुर्योधन को दम्भोद्भव की कथा सुनाकर
युद्ध न करने की सलाह देते है !और श्री कृष्ण के शांति प्रस्ताव का समर्थन
करते हैं !चाणक्य भी चन्द्र गुप्त मौर्य का महा अमात्य तो बना !किन्तु वह
झोपड़ी में ही रहा !पहनने के लिए धोती ओढ़ने के लिए चादर और जल के लिए मिटटी
का घड़ा इसके अलावा और कोई भौतिक वास्तु चाणक्य के पास नहीं थी !भगवान
परशुराम ने भी संपूर्ण पृथ्वी महर्षि कश्यप को दान कर दी थी !जब द्रोणा
चार्य उनके पास अस्त्र सस्त्र आदि की शिक्छा ग्रहण करने गए !तब भगवान
परशुराम ने उनसे कहा था की मेरे पास देने के लिए सिर्फ यह शरीर है !या
विद्या है !तुम इन दोनों में से जो चाहो ले सकते हो !इस प्रकार ब्राह्मणत्व
की त्याग और तपस्या का सन्देश ही भगवान के रूप में परशराम से प्राप्त
होता है !और महापुरुष के रूप में चाणक्य से !
Monday, 18 April 2016
विदेश मंत्री ने ईरान केराष्ट्रपति से मुलाकात में जो इस्लामिक संस्कृति के अनुसार वस्त्र धारण किये हैं !उनको वैसे वस्त्र धारण करने की कोई आवश्यकता नहीं थी !वह विदेश मंत्री हैं !इसीलिए उनको अपनी पहचान महिला के रूप में प्रस्तुत करने के लिए इस्लामिक ड्रेस पहनने की कोई आवष्यकता नहीं थी !इसके बाद भी अगर उन्होंने किसी कूटनीति के तहत यह ड्रेस पहनी है ! तो इस पर विशेष हो हल्ला करने की आवश्यकता नहीं थी !परन्तु विदेश मंत्री ने स्वयं ये चित्र प्रकाशित किया हैं !इसिलए यह चर्चा शुरू होगई है !हो सकता है इसमें भी विदेश मंत्री की कोई कूटनीति हो ?
Friday, 15 April 2016
स्वार्थनिष्ठ व्यक्ति महापुरुषों की महानता का सही आकलन नहीं कर सकते हैं
!आज डॉ आंबेडकर का जो सभी राजनैतिक दलों द्वारा गुण गान किया जा रहा है
उसका कारण राजनेताओं का राज नैतिक स्वार्थ है !डॉ अम्बेडकर हिन्दू धर्म से
छुआ छूत को समाप्त करना चाहते थे !इस छुआ छूत की व्य्वश्था का पोषक बो
वर्णाश्रम धर्म को मानते थे ! गांधी जी और उनके दृष्टिकोण में इस मामले को
लेकर सतही मतभेद था !गांधी जी विकृत वर्ण व्यवस्था के समर्थक नहीं थे !वह
कहते थे कि अगर हिन्दू धर्म में इस छुआ छूत का नाश नहीं हुआ
तो हिन्दू धर्म का नाश हो जायेगा !इसीलिए उन्होंने छुआ छूत का जो सबसे
निकृष्ट कार्य था पाखाना साफ़ करने का उसको अपने आश्रम का महत्त्व पूर्ण अंग
बनाया था !वह स्वयं संडाशों की सफाई करते थे और सभी आश्रम वासीयों को
पाखाना अनिवार्य रूप से साफ़ करना पड़ता था !गांधी जी ने नेहरू जी से कह कर
डॉ अम्बेडकर को कानून मंत्री और श्यामा प्रसाद मुखेर्जी को मंत्री मंडल में
शामिल कराया था ! उस समय की राजनीति में सामाजिक व्यवश्था परिवर्तन और देश
की सेवा ही मुख्य लक्छ्य था !इसीलिए सभी राष्ट्रीय नेताओं का लक्छ्य देश
के लिए अपनी योग्यता और सामर्थ्य को सम्पर्पित करना था !धीरे धीरे इस
दृष्टि का अभाव राजनेताओं में बढ़ता गया और राजनीति में स्थान पक्का करने की
इक्छा का विकास बढ़ता गया !और आज यह चरम विंदू पर पहुंचा दिखाई देता है
!सामाजिक व्य्वश्था को न्याय पर आधारित समत्व्व युक्त स्वरुप देने वाले डॉ
अम्बेडकर कर्ज में मृत्यु को प्राप्त हुए !किन्तु आज दलित उत्थान की बात
करने वाले नेताओं के पास अकूति धन संचय हो गया है !सभी पार्टियों के
राजनेता अकूत संपत्ति के मालिक है !जबकि राजनीति में प्रवेश के पहले बे
अत्यंत सामान्य घरों से आये थे !आज डॉ अम्बेडकर की समाज व्यवस्था परिवर्तन
एक जाति विशेष तक सीमित हो कर रह गयी है !यही हाल पिछड़ी जातियों का है
!किन्तु इतिहास यह बताता है !की स्वार्थी व्यक्ति अपने पतन का इतिहास स्वयं
लिखते हैं !डॉ अम्बेडकर की चर्चा भले हे स्वार्थ दृष्टि से दलित सवर्ण
पिछड़े नेता करें किन्तु डॉ अम्बेडकर के विचार जैसे जैसे आने वाली पीढ़ियों
के सामने आएंगे तब इन स्वार्थी नेताओं का स्वार्थ का प्रकोप इन्ही स्वार्थी
नेताओं की खोपड़ी पर पड़ेगा और डॉ अम्बेडकर के साथ किया गया विश्वासघात इनको
इतिहास के उस स्थान में पहुंचा देगा जो स्थान विश्वास घातियोँ के लिए
सुरक्छित रहता है
शहर में रहने वाले किसी भी व्यक्ति को ८ बजे के बाद घर से निकलने की इजाजत नहीं है ! ८ बजे के बाद यदि कोई भी व्यक्ति बाहर दिखाई देगा तो उसे गोली मारी जा सकती है ! इस घोसणा के कारण लोग बहुत अधिक भयभीत थे इसीलिए बहुत से घायल जो बाग़ से निकलने में कामयाब हो गए थे बे रास्ते में सहायता प्राप्त ना होने के कारण घाओं से मरगए और सड़कों पर पड़े रहे ! बैसाखी का पर्व अमृतसर की जनता को इस तरह से मनाना पड़ा था ! मृतकों की संख्या की गड़ना के सम्बन्ध में जांच सरकार ने २० अगस्त से शुरू की थी ! अर्थात गोली काण्ड के ४ महीने बाद सरकारी जाँच में कहा गया था कि गोली कांड में २९० से अधिक लोग नहीं मरे थे ! किन्तु सेवा समिति द्वारा की गयी जाँच में मरने वालों की संख्या ५०० बतायी गयी थी जिसे सरकार ने भी स्वीकार कर लिया था ! किन्तु ठीक संख्या की गढ़ना कभी भी नहीं हो सकी थी ! लाला गिरधारी लाल ने हिसाब लगाकर जो १००० संख्या बतायी थी वह अधिक प्रमाणिक थी ! १३ तारीख की बीभत्स घटना का तफ्सील से व्यान कर सकना ----जस्टिस रेकिन के शब्दों में संभव नहीं था ! कांग्रेस ने जालिया वाले गोलीकांड की जांच के लिए एक समिति गठित की थी ! उसमे महात्मा गांधी ,सी आर दास अब्बास एस तैयबजी,और एम आर जयकर थे ! उस जाँच समिति ने अपनी जाँच के निष्कर्ष में कहा था कि जरनल डायर,कर्नल जॉनसन ,कर्नल ओ ब्रायन श्री बॉसवर्थ ,स्मिथ ,राय साहब श्री राम सूद और मलिक साहब खान ने ऐसे घोर अवैधानिक कृत्य किये हैं कि इन सबको विशेष अदालत में खड़ा किया जाय ! कर्नल मेकरे और कप्तान डोबतन ने भी अपना दायितव निभाने में ही उतनी ही चूक की है ! लेकिन इन अधिकारियों के खिलाफ भी सरकारी कार्यबाही करने की सलाह हमलोगों ने जान बूझ कर नहीं दी है ! क्योंकि ये दोनों अधिकारी अन्य अधिकारियों की भांति अनुभवी नहीं थे !
Thursday, 14 April 2016
महभारत में पाप निवारण और शुभ कर्म करने के अनेक उपाय और विधियां बतायी
गयीहै ! करत पापों का निवारण पाप कर्मों को स्पष्ट रूप से स्वीकार करने से
शुभ कर्म करने से ,पछताने से ,दान करने से ,और तपस्या से भी नष्ट होते हैं
१किन्तु पाप कर्मो की पुनरा वृत्ति नहीं करना चाहिए !त्याग करने से ,तीर्थ
यात्रा करने से ,तथा गीता आदि का नियमित स्वाध्याय कर जीवन को उपदेश के
अनुसार ढालने से भी पाप दूर होता है !धन की श्रष्टि परोपकार के ही लिए
विधाता ने की है !इसीलिए धन का उपयोग परोपकार के लिए ही करना
चाहिए भोग के लिए धन का उपयोग न तो हितकर है और न श्रेष्ठ है !मनुष्य में
अहंकार तीन रूपों में दिखाई देता है !में कुलीन हूँ .सिद्ध हूँ ,और कोई
साधारण मनुष्य नहीं हूँ !मनुष्यों को बार बार मानशिक दुखों की प्राप्ति दो
ही कारणों से होती है !चित्त का भ्रम और अनिष्ट की प्राप्ति !बुढ़ापा और
मृत्यु ये दोनों भेड़ियों के समान हैं जो बलवान दुर्बल छोटे और बड़े सभी
प्राणियों को खा जाते हैं !कोई भी मनुष्य कभी बृद्धावस्था और मृत्यु को
लाँघ नहीं सकता !भले ही वह सम्पूर्ण पृथ्वी पर विजय पाले !प्राणियों के
निकट जो सुख या दुःख उपस्थित होता है वह सब उन्हें विवश होकर सहना ही पड़ता
है !क्योँकि उसके टालने का कोई उपाय नहीं है !पूर्वा वष्था मध्यावश्था अथवा
उत्तरावश्था में कभी न कभी क्लेश अनिवार्य रूप से प्राप्त होते ही हैं
!मनुष्य सुखों और दुखों को प्रारवध के अनुसार पाते रहते हैं !बृद्धावस्था
और मृत्यु के वश में पड़े हुए मनुष्य को औषधि मन्त्र होम और जप भी नहीं बचा
पाते हैं
सत्ता की होड़ में लगे हुए नेताओं को इस बात का यह्सस नहीं है की भविष्य में
इस बात पर उनका मुल्यांकन नहीं किया जाएगा की उन्होंने डॉ अम्बेडकर की
जयंती कितनी धूम धाम से मनाई थी!या जब ये नेता लोग डॉ आंबेडकर की मूर्ति को
माला पहना रहे थे या उनकी जिंदाबाद बोल रहे थे या पुष्पों की वर्षा कर
उनका गुण गान कर रहे थे !और ये नेता लोग किस राजनैतिक पार्टी के सदस्य
पदाधिकारी या मंत्री मुख्यमंत्री थे !इन नेताओं का मुल्यांकन इनके कार्योँ
से होगा नेताओं का त्याग उद्द्यम ईमानदारी और चरित्र की शुद्धता
से ही नेताओं का मुल्यांकन होगा !जनता यह जानना चाहेगी की वास्तव में
इन्होने आंबेडकर के आदर्शों को अपनाकर लोकतंत्र को कितना उपयोगी और सार्थक
संविधान के अनुसार बनाया !अगर नेता लोग यह नहीं करेंगे और जनता के मौजूदा
दुःख और अशंतोष से लाभ उठाकरउस से अपना स्वार्थ सिद्ध करेंगे ,अपनी धन
संपत्ति की बृद्धि करेंगे और अपनी सत्ता और कुर्सी पर पकड़ मजबूत करेंगे और
सत्ताका दुरूपयोग करेंगे जनता को अपनी सत्ता की आकांछा की प्राप्ति का
माध्यम बनाएंगे तो जनता का यह दुःख और अशंतोष कभी न कभी पलट कर इन्ही
नेताओं के सर पर पढ़ेगा और जनता से इस विश्वास घात के लिए न इन्हे भगवान माफ़
करेंगे और न आंबेडकर छमा करेंगे ! ये नेता लोग स्वार्थ के कारण अंधे हो गए
हैं और इनके द्वारा खुद भ्रष्टाचार होता है और इन्ही के संरक्छण में
अधिकारी कर्मचारी आदि भी भ्रष्टाचार में लिप्त हैं !फिर भी ये बाबा साहेब
अम्बेडकर का स्तुति गान सत्ता की पप्ति के लिए कर रहे है !
Wednesday, 13 April 2016
भूख आत्मसम्मान की भी होती है ! इसका प्रगटीकरण सामान्य मनुष्यों में शरीर सम्मान के रूप में प्रगट होता है ! इसीलिए मनुष्यों ने आत्मसम्मान के रूप में शरीरों के सम्मान के अनेकों मंच रच लिये हैं ! किन्तु समाज को सही रचनात्मक गति और दिशा देने वाले तो वही व्यक्ति होते हैं जो शरीर को आत्मसम्मान के लिए समर्पित कर देते हैं ! डॉ भीमराव आंबेडकर ऐसे ही व्यक्तियों में से थे ! किन्तु आज के समय में शरीर सम्मान के भूखे लोगों ने उनको भी शरीर सम्मान का शशक्त माध्यम बन लिया है ! गांधी जी ने कहा था कि डॉ आंबेडकर में त्याग शक्ति है कुर्बानी करने की शक्ति है ! गांधी जी भी हिन्दू धर्म में अश्पृश्यता के घोर विरोधी थे ! और अम्बेडकर भी अश्पृश्यता निवारण के लिए कृत संकल्पित थे ! किन्तु गांधीजी हिन्दू धर्म में अश्पृश्यता को पाप मान कर इसका शोधन करना चाहते थे ! किन्तु अम्बेडकर हिन्दू धर्म को ही त्यागना चाहते थे और उन्होंने बौद्ध धर्म का वरण कर हिन्दू धर्म त्याग दिया था ! गांधी जी ह्रदय से आंबेडकर का बड़ा आदर करते थे !उन्होंने अपने एक लेख में १९३६ की एक घटना का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया है ! लाहौर (उस समय पाकिस्तान नहीं बना था) में वहां के जाति .पांत तोड़क मंडल का बार्षिक अधिवेशन होने वाला था और अम्बेडकर उसके सभापति चुने गए थे ! लेकिन डॉ अम्बेडकर ने उसके लिए जो भासणतैयार किया था उसको स्वागत समिति ने स्वीकार नहीं किया था इस कारण से वह अधिवेशन ही निरस्त हो गया था ! डॉ अम्बेडकर ने स्वागत समिति की अस्वीकृति के बाद भी अपना भासन अपने ही खर्च से प्रकाशित कर दिया था और उसकी कीमत ८ आने राखी थी ! गांधी जी ने सुझाव दिया था कि अम्बेडकर का भासन ज्यादा ज्यादा से लोग पढ़ सकें इसीलिए उसकी कीमत २आने कर देनी चाहिए गांधीजी ने लिखा था कि डॉ आंबेडकर का वह भासण ऐसा था कि कोई भी सुधारक उसकी उपेक्छा नहीं कर सकता था ! डॉ अम्बेडकर हिन्दू धर्म के लिए एक चुनौती थे ! हिन्दू की तरह पलने और एक हिन्दू राजा के द्वारा शिक्छित किये जाने पर भी सवर्ण कहे जाने वाले हिन्दुओं द्वारा अपने और अपनी जाति वालों के साथ होने वाले व्योहारों से वह इतने निराश हो गए थे कि वह ना केवल उन्हें बल्कि उस धर्म को भी छोड़ने का विचार कर रहे थे जो उनकी और सभी हिन्दुओं की संयुक्त विरासत है ! डॉ अम्बेडकर का यह मानना था कि सवर्ण हिन्दुओं ने उनको और उनकी जाति वालों को अश्पृश्य शुमार करने में हिन्दू धर्म शास्त्रों का भी आदेश है ! इसके प्रमाण में उन्होंने शास्त्रों से बहुत से श्लोक भी उद्धृत किये थे १----शास्त्रों में निर्दय व्योहार करने के आदेश हैं २------ऐसा निर्दय व्योहार करने वालों का समर्थन किया गया है ३-----परिणाम स्वरुप यह अनुसंधान किया गया है कि इस निर्दयता का समर्थन शास्त्र सम्मत है ! ऐसा कोई भी हिन्दू जो अपने धर्म को अपने प्राणो से अधिक प्यारा समझता है इस दोषारोप की गम्भीरता की उपेक्छा नहीं कर सकता है ! डॉ अम्बेडकर जो बात कहते हैं कम या ज्यादा जोश के साथ वही बात दलित जातियों के और नेता भी कहते हैं फर्क सिर्फ इतना है की दूसरे जैसे -----राव बहादुर एम सी राजा.और दीवान बहादुर श्रीनिवासन अदि हिन्दू धर्म छोड़ने की धमकी नहीं देते हैं ! सवर्ण हिन्दुओं को अपने विश्वास और आचरण में सुधार करना ही पड़ेगा इसके अलावा सवर्णो में जो लोग अपने ज्ञान और अनुभव के आधार पर शास्त्रों की प्रमाणिक व्याख्या कर सकें उन्हें शास्त्रों के यथार्थ आशय का स्पष्टीकरण करना चाहिए ! डॉ अम्बेडकर के दोषारोपण से जो प्रश्न उठते हैं बे ये हैं १---- शास्त्र क्या है ? २----- आज जोकुछ शास्त्रों में छपा हुआ मिलता है वह क्या सभी शास्त्रों का अभिन्न भाग है ? या बे झूठ मुठ से हिन्दू धर्म को बदनाम करने के लिए लिख दिए गए हैं > ३----- इस तरह शास्त्रों का सही अर्थ प्रकाशन कर लोगों के सामने यह तथ्य लाएं कि हिन्दू धर्मशास्त्रों का अश्पृश्यता ,जाति प्रथा ,समानता सहभोज या अंतरजातीय विवाहों के सम्बन्ध में क्या कथन है ? इन सब प्रश्नों की डॉ अम्बेडकर ने अपने लेख में योगयता पूर्वक छान बीन की है !
Monday, 11 April 2016
हंटर जाँच समिति के सामने जनरल डायर ने जाँच समिति के प्रश्नों के उत्तर में कहा था --------- १-जब आप बाग में पहुंचे तब आपने क्या किया ? उत्तर --- मेने गोली चलाई ! २-- एकदम ? उत्तर ----तत्काल मेने इस विषय में विचार कर लिया था और मेरा ख्याल है कि यह निश्चय करने में मुझे ३० सेकण्ड से अधिक नहीं लगे ३---- जहांतक भीड़ का सम्बन्ध है ,वह वहां क्या कर रही थी ? उत्त्तर ----वहां बे लोग सभा कर रहे थे ,बीच में एक ऊंची सी चीज पर एक व्यक्ति खड़ा था उसके हाथ हिल रहे थे स्पष्ट ही वह भासन दे रहा था !४----- जब आपने भीड़ को तितर बितर किया ,क्या भीड़ ने उसके पूर्व कोई कार्यबाही की थी ?उत्तर --- नहीं बे भाग गए थे ! जन मेने गोलियां चलाना शुरू किया तो मध्य भाग में जो बड़ी भीड़ थी ,वह दाहनी और भागने लगी थी जब भीड़ भागने लगी थी तब आपने गोली चलाना बंद क्यों नहीं किया ?उत्तर ----मेने सोचा कि यह मेरा कर्त्तव्य है कि जब तक गोली चलाता रहूं जब तक बे बिलकुल भाग ना जाएँ !
--------- जनरल डायर ने १६५० गोलियां चलाईं थी ! उन्होंने यह भी स्वीका किया था कि यदि बे बख्तरबंद गाड़ियां बाग़ के अंदर ले जा सकते ,तो बे अवश्य ऐसा करते और उनसे गोलियां चलवाते ! उन्होंने गोलियां चलाना इसीलिए बंद कर दिया था क्योंकि कारतूस ख़त्म हो गए थे और भीड़ बहुत अधिक थी ! उन्होंने घायलों को प्राथमिक चिकत्सा के लिए ले जाने की कोई व्यबस्था नहीं की थी ! भीड़ में घायल लोगों की प्राथमिक चिकित्सा कराना बे अपना कर्तव्य नहीं मानते थे ! प्रत्यक्छ दर्शी गबाह लाला गिरधारी लाल ने अपने व्यान में कहा था !कि मेने सेकंडों लोगों को जहाँ तहांमरते देखा था ! सबसे बुरी बात यह थी कि गोलियां उन रास्तों पर चलाईं जा रही थी जहाँ से लोग बाहर की और भाग रहे थे ! निकलने के लिए केवल ४,५ छोटे रास्ते थे और इन सभी रास्तों पर भीड़ के ऊपर गोलियों की बौछार हो रही थी ! कई लोग भागती हुई भीड़ में पैरों के नीचे कुचल कर मर गए थे ! खून की नदियां बह रही थी ! जो लोग जमीन पर लेट गए थे उन पर भी गोलियां चलाई गयीं थी ! मृतकों या घायलों के लिए अधिकारियों ने कोई प्रबन्ध नहीं किया था ! तब मेने घायलों को पानी पिलाया और उनकी जो सहायता में कर सकता था वह की मेने पूरी जगह का चक्कर लगाया और वहां पडी लगभग एक एक लाश को देखा ! जगह जगह पर मृतकों के ढेर लगे हुए थे ! मृतकों में व्यस्क और किशोर दोनों ही थे ! किसी की खोपड़ी खुल गयी थी और किसी की आँख गोली से उड़ गयी थी किसी की नाक किसी का सीना किसीके हाथ पैरों के टुकड़े टुकड़े उड़ गए थे ! मेरा ख्याल है कि मैदान में १००० से अधिक लाशें थी ! मेने देखा कि लोग जल्दी जल्दी भाग रहे थे !और बहुतों को अपने घायल या मृतक परिजनों को वहां छोड़ना पड़ा था ,क्योंकि उन्हें भय था कि रात के ८बजे के बाद उन पर फिर गोली चलाई जायेगी ! !
--------- जनरल डायर ने १६५० गोलियां चलाईं थी ! उन्होंने यह भी स्वीका किया था कि यदि बे बख्तरबंद गाड़ियां बाग़ के अंदर ले जा सकते ,तो बे अवश्य ऐसा करते और उनसे गोलियां चलवाते ! उन्होंने गोलियां चलाना इसीलिए बंद कर दिया था क्योंकि कारतूस ख़त्म हो गए थे और भीड़ बहुत अधिक थी ! उन्होंने घायलों को प्राथमिक चिकत्सा के लिए ले जाने की कोई व्यबस्था नहीं की थी ! भीड़ में घायल लोगों की प्राथमिक चिकित्सा कराना बे अपना कर्तव्य नहीं मानते थे ! प्रत्यक्छ दर्शी गबाह लाला गिरधारी लाल ने अपने व्यान में कहा था !कि मेने सेकंडों लोगों को जहाँ तहांमरते देखा था ! सबसे बुरी बात यह थी कि गोलियां उन रास्तों पर चलाईं जा रही थी जहाँ से लोग बाहर की और भाग रहे थे ! निकलने के लिए केवल ४,५ छोटे रास्ते थे और इन सभी रास्तों पर भीड़ के ऊपर गोलियों की बौछार हो रही थी ! कई लोग भागती हुई भीड़ में पैरों के नीचे कुचल कर मर गए थे ! खून की नदियां बह रही थी ! जो लोग जमीन पर लेट गए थे उन पर भी गोलियां चलाई गयीं थी ! मृतकों या घायलों के लिए अधिकारियों ने कोई प्रबन्ध नहीं किया था ! तब मेने घायलों को पानी पिलाया और उनकी जो सहायता में कर सकता था वह की मेने पूरी जगह का चक्कर लगाया और वहां पडी लगभग एक एक लाश को देखा ! जगह जगह पर मृतकों के ढेर लगे हुए थे ! मृतकों में व्यस्क और किशोर दोनों ही थे ! किसी की खोपड़ी खुल गयी थी और किसी की आँख गोली से उड़ गयी थी किसी की नाक किसी का सीना किसीके हाथ पैरों के टुकड़े टुकड़े उड़ गए थे ! मेरा ख्याल है कि मैदान में १००० से अधिक लाशें थी ! मेने देखा कि लोग जल्दी जल्दी भाग रहे थे !और बहुतों को अपने घायल या मृतक परिजनों को वहां छोड़ना पड़ा था ,क्योंकि उन्हें भय था कि रात के ८बजे के बाद उन पर फिर गोली चलाई जायेगी ! !
६अप्रिल और १३ अप्रैल ---------इन तिथियों को भुलाया नहीं जा सकता है ! ६अप्रिल ने भारत में एक जीवनी शक्ति का संचार किया था !और १३ अप्रेल ने निरपराध लोगों का रक्त बहाकर जालियां बाले बाग़ को समस्त देश के लिए पवित्र तीर्थ बना दिया था ! ६अप्रेल को रॉलेट एक्ट के विरोध में देश व्यापी सत्याग्रह का प्रारम्भ हुआ था ! और वह एक निष्प्राण चीज बनकर रह गया था ! १३ अप्रेल को वह अतीब क्रूरतापूर्ण घटना ही नहीं घटी बल्कि उसमे हिन्दुओं और मुसलमानो का रक्त एक साथ एक होकर बहा था ! १३ अप्रेल को सुबह ९.३० बजे के लगभग जनरल डायर ने एक अंगरकछक टुकड़ी के साथ शहर में प्रवेश किया था ! और एक घोसणा की थी कि शहर में या शहर के किसी भी भाग में या शहर के बाहर किसी भी प्रकार का कोई भी जुलूस किसी भी समय निकालने की मुमानियत है ! इस प्रकार के किसी भी जुलूस या ४ व्यक्तियों के जमघट को गैर कानूनी जमघट माना जाएगा और आवश्यक होने पर शस्त्र बल से तितर बितर कर दिया जाएगा ! जनरल डायर ज्यों ज्यों शहर में आगे बढ़ते गए इस घोसणा को पंजाबी और उर्दू में एक दुभाषिया पढता गया ! जिस समय यह घोसणा हो रही थी उसी समय एक लड़का अमृतसर की गलियों में कनस्तर बजाकर ऐलान कर रहा था ! कि ४ बजे जालियाँ वाले बाग़ मेंएक सभा होगी और लाला कन्हैया लाल उसका सभापित्तव करेंगे ! करीब १२.४५ मिनट पर जनरल डायर को सूचना दी गयी की उसी दिन सायंकाल ४.३० मिनट पर जालियाँ वाले बाग़ में एक बड़ी सभा होने वाली है !जनरल डायर ने हंटर जाँच समिति के आगे यह अपने व्यान में स्वीकार किया था कि सभा को रोकने के लिए उन्होंने कोई कदम नहीं उठाया था ! ४ बजे उन्हें निश्चित सूचना मिली की सभा शुरू हो गयी है ! जल्द्दे ही बे नाके बंदी के लिए सैनिक लेकर शहर की ओर चलपडे ! इनमे २५ राईफल वाले गोरखे और २५ सिख भी शामिल थे ! उनके साथ ४० गोरखे और थे जिनके पास खुखरियाँ थी ! और बे अपने साथ दो बख्तरबंद गाड़ियां भी साथ ले गए थे ! बे ५ बजे शाम को जालियाँ बाले बाघ में पहुंचे थे ! जालियावाला बाग नहीं था !जालियां उसके मूल मालिकों का जाति नाम है !यह स्थान मकानों से घिरा एक परती जमीन का टुकड़ा था ! इस स्थान पर एक टूटी फूटी गुंबददार समाधि थी और एक कुआँ था ! अंदर जाने का मुख्य रास्ता एक तांग गली से था उसमें बख्तरबंद गाड़ियां नहीं जा सकती थी ! अंदर जाने के लिए और कोई रास्ते नहीं थे सिर्फ ४,५ स्थानों पर संकरे रस्ते से बाहर निकला जा सकता था ! जनरल डायर ने ९० सैनिकों के साथ बाग़ में प्रवेश किया था ! उस समय भीड़ के लिए बाहर निकल सकने के लिए कोई आसान रास्ता नहीं था ! जनरल डायर के पहुँचने के पहले सभा में लगभग २०००० लोग थे ! हंसराज व्याख्यान दे रहे थे बे और थोड़े से दूसरे लोग एक मंच पर खड़े थे सैनिकों के पहुंचने से पहले एक वायुयान सभास्थल के ऊपर मड़रा रहा था ! श्रोताओं में बहुत से बच्चे और लडके थे ! और कुछ लोग गोद में शिशुओं को भी लेकर आये थे ! लोग पूरी तरह निहत्थे थे ! ख़ुफ़िया पुलिस के भी कुछ लोग सभा में मौजूद थे ! जनरल डायर ने २५ सैनिक बाईं और और २५ सैनिक दाईं और तैनात कर दिए थे !
Sunday, 10 April 2016
श्रिष्टि
का रचने वाले भगवान है या यह अपने आप बिना किसी के बन गयी !यह दार्शनिक
विवाद तो कभी ख़त्म नहीं होगा !किन्तु जब से श्रिष्टि बनी है तब से सभी
प्राणिओ के दिल दिमाग ऑंखें सभी आगे लगी हैं तथा सभी प्राणी गति भी आगे की
ओर करते हैं !जितनी भी पवित्र धार्मिक पुस्तकें है और जितने भी भगवान या
भगवान के दूत या ऋषि और महापुरुष पृथ्वी पर आये हैं !उन सभी ने सभी
प्राणिओं में संचारित जीवन को सुन्दर सुरक्षित गतिशील बनाने की विधियां
अपने अपने समय में काल और परिश्थिति के अनुसार प्रस्तुत की हैं
!किन्तु उपदेश का सार यही रहा है की श्रिष्टि में जितने भी जीव धारी हैं
उनका जीवन सिर्फ काल या स्वाभाविक मृत्यु द्वारा ही समाप्त हो मनुष्य को यह
अधिकार नहीं है कि वह किसी जीव धारी को अपने किसी पूर्व प्रचलित धार्मिक
मान्यता के आधार पर उसको अपनी स्वार्थ पूर्ति के लिए नष्ट करे !पशु जगत में
यह नियम लागू नहीं है !किन्तु मनुष्य अपनी व्यबश्था खुद बनाता है और उसमे
काल समय और परिशिश्थिति के अनुसार बदलाओ भी करता है ! और सुख दुःख मान
अपमान हानि लाभ आदि घटनाओं से प्रभावित होकर सुखी और दुखी भी होता है
!इसीलिए उस पर यह विशेष उत्तर दायित्त्व है कि वह ऐसे किसी कार्य को ना करे
जिस से प्राणिओं को दुःख की प्राप्ति हो या जीवन हानि हो! !किन्तु ऐसा
तमाम धर्मों और धर्म ग्रंथो और महापुरुषों के उपदेशों के बाद भी मानव जीवन
में दिखाई नहीं देताहै !और स्थिति तब ओर अत्यंत विकट हो जाती है जब पशुओं
पक्छिओं और दूध देने वाले जानवरों को मारने और खाने की पुष्टि धर्म से
स्वीकृत होने की बात जोर शोर से कही जाने लगाती है !लोग यह समझने की भूल कर
बैठते हैं कि धर्म ग्रंथों में जो सनातन बात है वह है सत्य अहिंसा
ब्रह्मचर्य अस्तेय और अपरिग्रह! और इन्ही सनातन सत्यों से जीवन को विकसित
सुन्दर और समर्थ बनाने के के लिए ऋषि पैगम्बर या ईश्वर के पुत्र या गुरु
या भगवान काल समय और परिश्थिति के अनुसार जीवन में धारण करने के नियम
बताते और बनाते हैं!प्रत्येक देश की जलवायु परिश्थिति एक सी नहीं होती है
!इसलिए धार्मिक आचरण परमात्मा की पूजा रहन सहन आदि की क्रियाएँ भी उन्ही
देशों में जन्मे धर्मों के अनुसार ही होती हैं !इसलिए धार्मिक आचरण तो देश
काल के अनुसार ही होगा !किन्तु धर्म का लक्छ्य जीवन की रक्षा करना सभी
धर्मों में समान होना चाहिए! मक्का में जन्म लेने वाले इस्लाम या इजराइल
में जन्म लेने वाले ईशा के धर्म का आंतरिक स्वरुप शांति और सेवा भाव सद्भाव
प्रेम आदि को तो भारत भूमि में स्वीकार किया जा सकता है और अवश्य स्वीकार
किया जाना चाहिए ! किन्तु उनकी उपासना या आचरण पद्धत्ति को भारत की
परिश्थित में स्वीकार नहीं किया जा सकता है !और ना ही भारत भूमि में धर्म
परिवर्तन होना चाहिए ! क्योँकि जिन धर्मो का जन्म भारत भूमि में नहीं हुआ
है, उनकी पूजा पद्धति यहाँ की धार्मिक पूजा पद्धति से भिन्न है !किन्तु आज
के युग की आवश्यकता पूजा पद्धति पर जोर देने की नहीं है !आचरण में सत्य
अहिंसा त्याग प्रेम करुणा और भाई चारा उतारने की है जो मानवता की रक्षा
सुरक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक है
Saturday, 9 April 2016
शंकराचार्य का कोई भी व्यान विवादित नहीं है !साईं मुस्लिम फ़कीर थे !यह
सत्य है !इसके बाद भी अगर बहुत से लोग उनको ईश्वर समझ कर उनकी पूजा करते
हैं !तो हिन्दू धर्म के सबसे बड़े आचार्य होने के कारण उनका यह धार्मिक
कर्तव्य हो जाता है कि वह सनातन धर्म मान ने वालों को सनातन धर्म के अनुसार
आचरण करने की सलाह दें !इसी प्रकार ताजमहल पूर्व में शिव मंदिर था !इसकी
पुष्टि में कई इतिहास कारों ने मत व्यक्त किया है !इसलिए शंकराचार्य अगर इस
बात को कह रहे हैं तो इसकी जाँच की जानी चाहिए !और एक बार यह
निश्चित हो जाना चाहिए की ताजमहल के नीचे शिव मंदिर है या नहीं १इस व्यान
में भी विवाद जैसी कोई बात नहीं है !सिर्फ जाँच की आवश्यकता है !बात सिर्फ
इतनी सी है कि शंकराचार्य को सनातन धर्म कि बात करने का अधिकार है या नहीं
?अगर उनकी या किसी भी धर्माचार्य कि बात संविधान के विरुद्ध हो तो कानूनी
कार्यबाही की जा सकती है !किन्तु विधान की मर्यादा के अंतर्गत तो उन्हें
सनातन धर्म के बारे में तथ्य रखने का अधिकार तो है ही !सनातन धर्मी हिन्दू
उनकी बात माने या ना माने यह उनके ऊपर हैं
कश्मीरी पंडितों के साथ कश्मीर की सरकार राज धर्म का पालन नहीं कर रही है
!१९८९ ९० में आतंक बाद के कारण विश्थापित हुए ५७६९७ कश्मीरी पंडितों के
परिवार अपने ही देश में अभी भी शरणार्थी की तरह रह रहे हैं !जिन आतंक
बादियोँ के कारण उन्हें अपना घर द्वार जर जमीन छोड़ना पड़ा !उनको आज तक सरकार
ने विधान के अनुसार दण्डित नहीं किया !जैसे काठ का हाथी चमड़े का हिरन
हिजड़ा मनुष्य उसरखेत और वर्षा ना करने वाले बादल सब व्यर्थ होते हैं ऐसे ही
अपराधियोँ को दंड ना देने वाली सरकार भी सर्वथा निरर्थक ही होती
है ! जो निरपराध नागरिकों की रक्षा करे और अपराधियोँ को दण्डित करे और
उनको अपराध करने से रोके वही सरकार कहलाने योग्य होती है !कश्मीरी पंडितो
के साथ इस राजधर्म का पालन ना केंद्र की सरकार ने किया और ना राज्य की
सरकारों ने !कश्मीरी पंडित अब उन आतंक बादियोँ के साथ नहीं रहना चाहते हैं
जो सरकार के संरक्छण में आतंकबादी गतिविधिओं को अंजाम देते हैं !और उनकी
दमदार आवाज यासीन मालिक जैसे अलगाओबादी नेताओं के मुख से मुखरित होती है
!की अगर कश्मीर में पंडितो को अलग से जमीन दी गयी तो कश्मीर इजराइल बन
जायेगा !कश्मीरी पण्डितोँ में अगर यहूदिओं कैसी ताकत होती तो बे अपनी आँखोँ
के सामने टूटते हुए मंदिर उजड़ते हुए घर बे इज्जत होती महिलाओं को कभी
वर्दास्त ना करते और आतंकबादिओं के अन्याय के विरुद्ध खड़े होते !किन्तु
उनके साथ दुहरा दुर्भाग्य जुड़ गया है !ना उनमे शक्ति है मुकाबला करने की और
ना ही कश्मीर की आतंकबादी समर्थक सरकार उनकी न्यायोचित मांग मान रही है
!अब भारत सरकार इस मामले में क्या करती है ?
कश्मीरी पंडितों के साथ कश्मीर की सरकार राज धर्म का पालन नहीं कर रही है
!१९८९ ९० में आतंक बाद के कारण विश्थापित हुए ५७६९७ कश्मीरी पंडितों के
परिवार अपने ही देश में अभी भी शरणार्थी की तरह रह रहे हैं !जिन आतंक
बादियोँ के कारण उन्हें अपना घर द्वार जर जमीन छोड़ना पड़ा !उनको आज तक सरकार
ने विधान के अनुसार दण्डित नहीं किया !जैसे काठ का हाथी चमड़े का हिरन
हिजड़ा मनुष्य उसरखेत और वर्षा ना करने वाले बादल सब व्यर्थ होते हैं ऐसे ही
अपराधियोँ को दंड ना देने वाली सरकार भी सर्वथा निरर्थक ही होती
है ! जो निरपराध नागरिकों की रक्षा करे और अपराधियोँ को दण्डित करे और
उनको अपराध करने से रोके वही सरकार कहलाने योग्य होती है !कश्मीरी पंडितो
के साथ इस राजधर्म का पालन ना केंद्र की सरकार ने किया और ना राज्य की
सरकारों ने !कश्मीरी पंडित अब उन आतंक बादियोँ के साथ नहीं रहना चाहते हैं
जो सरकार के संरक्छण में आतंकबादी गतिविधिओं को अंजाम देते हैं !और उनकी
दमदार आवाज यासीन मालिक जैसे अलगाओबादी नेताओं के मुख से मुखरित होती है
!की अगर कश्मीर में पंडितो को अलग से जमीन दी गयी तो कश्मीर इजराइल बन
जायेगा !कश्मीरी पण्डितोँ में अगर यहूदिओं कैसी ताकत होती तो बे अपनी आँखोँ
के सामने टूटते हुए मंदिर उजड़ते हुए घर बे इज्जत होती महिलाओं को कभी
वर्दास्त ना करते और आतंकबादिओं के अन्याय के विरुद्ध खड़े होते !किन्तु
उनके साथ दुहरा दुर्भाग्य जुड़ गया है !ना उनमे शक्ति है मुकाबला करने की और
ना ही कश्मीर की आतंकबादी समर्थक सरकार उनकी न्यायोचित मांग मान रही है
!अब भारत सरकार इस मामले में क्या करती है ?
Thursday, 7 April 2016
आज
विश्व स्वास्थ्य दिवस है !इस दिवस को भौतिक स्तर पर मनाने की शुरुआत वहां
से हुई है !जिन्होंने विश्व के स्वास्थ्य के बिगाड़ने की तमाम प्रबृत्तियों
का आविष्कार किया और उन स्वास्थ्य बिनाशक अविष्कारों का विकास बिगत वर्षोँ
में किया और अभी भी लगातार कर रहे हैं !किन्तु अब उनकी इन स्वास्थ्य
विनाशक क्रियायोँ का तीब्र विरोध उन देशों में ही प्रारम्भ हो गया है !
स्वस्थ्य के संरक्छन के लिए जिन दबाएं का निर्माण किया गया उनका परीक्छन
निर्दोष बेजुबान जनबरों पर किया गया !जिस कारन हिंसा का तत्त्व उन दबाएं
में समां गया और उन दबाएं के सेवन से मनुष्य शरीर की दृष्टि से तो स्वस्थ
हुआ किन्तु मानशिक दृष्टि से क्रूर और हिंसक हो गया ! तथा जीव दया के स्थान
पर जीव हिंसा ही उसके जीवन का ध्येय हो गया !परिणाम स्वरुप उसके भोजन का
प्रधान अंग माशाहार हो गया !और उनकी प्रबृत्ति भी पशुबत हो गयी है !
भारी मात्रा में जीव हत्याओं से पर्यावरण भी प्रदूषित हुआ है और अनेक
प्राकृतिक विपदाएँ भी मनुष्योँ के असितत्त्व पर भी प्रश्न चिन्ह लगाने लगी
हैं !अब पश्चिमी राष्ट्र भी इन विश्व ब्यापी संकटों से निबृत्ति के रूप
में जीवों के संरक्छण के लिए विविध प्रकार के आयोजन कर रहे हैं !और शाकाहार
अपना रहे हैं !कुछ राष्ट्रों ने तो सप्ताह में एक दिन माशाहार कानून
बनाकर प्रतिबंधित किया है ! किन्तु आश्चर्य यह है कि विश्व स्वाथ्य दिवस
भारत में मनाने की भी जरुरत पड़ रही है! कि जिसकी संस्कृति के मूल में ही
प्राणिमात्र के अखंड स्वास्थ्य सम्बर्धन संरक्छण और विकास का सनातन बीज
विद्यमान है और जिसका उद्घोष ही सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः
है (सभी प्राणी सुखी और सवाथ हों ) तथा जिस देश ने यह पहचान लिया था कि
ब्रक्छोँ लताओं में भी जीवन है! और पर्वतो पृथ्वी और जल में भी परमात्मा का
निवास है 1 और सभी जीव जन्तु अवध्य हैं!और इन सब तत्त्वों को अंदर धारण
करने के लिए प्रतिनिधि के रूप में सम्पूर्ण प्रकार से प्राणी कल्याण को
संरक्छित करने वाली स्वास्थ्य प्रदान करने वाली और अपने दूध से मात्रबत
पोषण देने वाली और गोबर और मूत्र से औषधि तथा कृषि के लिए अमृत तुल्य खाद
देने वाली तथा मृत्यु के बाद भी अपनी हड्डी चार्वी आदि से उत्तम खाद प्रदान
करने बाली और पुत्र रूप में कृषि कार्य के रूप में अपने पुत्र अर्पित करने
वाली सर्व मंगल मयी सर्व कल्याण मयी करुणा प्रधान गाय को महत्त्व प्रदान
किया था और लोक स्वास्थ्य का स्थायी उपाय खोज निकाला था ! किन्तु हम भारत
बसिओ ने उसी को अपना भोजन बना लिया है !परिणाम स्वरुप उसके मास का
भाक्छन् करने वाले तर्क देते हैं कि उसके मास से उन्हें सस्ता प्रोटीन
प्राप्त होता है और खाने पीने के अधिकार का हनन होता है ! किन्तु
दुर्बुद्धि और पशु प्रबृत्ति होने के कारण ये दुष्ट लोगयह भूल जाते हैं कि
गाय का मांश के खाने से लोकमंगल और लोक स्वास्थ्य का नाश भी होता है !फिर
मॉस खाने वाले लोगों के लिए और भी तमाम तरह के मास खाने के लिए हैं !बे
बकरा मुर्गा कुत्ता गधा छिपकली सांप सूअर चूहा बिल्ली आदिका भी मास खा सकते
है और खाते भी है !फिर सिर्फ गाय का मास के खाने पर ही क्योँ अड़ कर आम
लोगों को उसके घी दूध मक्खन आदि तथा खाद और औषधीय गुणों से वंचित कर रहे
हैं !काटजू भी सूअर कि चाप खाएं उसकेसम्बन्ध में फिल्म स्टार ऋषिकपूर ने
कहा है कि वह बहुत स्वादिष्ट होती है !और काटजू गाय के पक्छ में अपना
फैसला सुनाएँ !तथा गाय को माता कि तरह पूजने वाले भी गाय माता का दर्ज दें
और उसको कूड़ा करकट खाने पर मजबूर ना करें !और हिंदुस्तान कि जमीन से यह
सन्देश विश्व को दे कि विश्व को स्वस्थ रखने का फार्मूला भारत के पास गाय
के पालने पोषण के रूप में हैं और विश्व को भो स्वास्थ्य सम्बर्द्धन के लिए
उसका प्रयोग और उपयोग करना चाहिए !नरोत्तम स्वामी सिविल लाइन्स झाँसी
Wednesday, 6 April 2016
हमें चाहिए भूख से आजादी -------- भूख से आजादी दिलाने के लिए सारेविश्व में मानवता वादी लोग प्रयत्न शील रहे हैं इसी प्रयत्न में दो दर्शन भारत से बाहर के देशों में साम्य्वाद और समाजवाद के रूप में जन्मे उनका प्रभाव भारत में भी बढ़ा ! साम्यवाद और समाजवादी विचार के लोगों का काफी प्रभाव आज भी भारत के बुद्धिजीवियों पर देखने में मिलता है देश को गरीवी भुखमरी और आर्थिक विषमता तथा सामाजिक भेदभाव अदि से मुक्त करने के लिए बहुत से कानूनों का भी निर्माण हुआ है ! और उनके सार्थक परिणाम भी देश में दिखाई देते हैं !किन्तु जितना परिवर्तन होना चाहिए था उतना परिवर्तन नहीं हुआ !एक और करोड़ पतियों की संख्या में बृद्धि हुई तो दूसरी और कंगाली भी बढी है ! देश में नक्सलवाद के नाम से एक हिंसक आंदोलन चल रहा है !सरकारें उसको समाप्त करने के लिए प्रयत्न कर रही हैं वहीं दूसरी ओर कुछ लोग नक्सलवाद का समर्थन भी कर रहे हैं !भारत बर्ष की एक सबसे बड़ी समस्या यह है की आदर्श की बातें करने वालों की बहुतायत है ! किन्तु तदनुसार जीवन जीना का घोर अभाव है !साम्यवाद की बात करने वाले लोग खुद को भोग मुक्त नहीं करपाते हैं !समाजवादी लोग भी ऐश्वर्य का जीवन जीते हैं !भूख से आजादी दिलाने का काम आचार्य विनोबा भावे ने भी किया था !उन्होंने ३२ साल तक मजदूरी का जीवन जिया !और पाखाना सफाई से लेकर बढई, जूता बनाने खेती करने कचड़ा साफ़ करने के अनेक मजदूरी के कार्य किये !१९१७ में उनका भोजन का खर्च मात्र ११ पैसे प्रतिदिन था !जिसमे केला और नीबू ४पैसे ,ज्वार दो पैसे और ५पैसे का दूध शामिल था सामान के रूप में उनके पास लकड़ी की थाली एक कटोरा ,आश्रम का एक लोटा धोती और कम्बल तथा पुस्तकें थी ! कुर्ता ,कोट टोपी बगैरह उन्होंने जीवन में कभीनहीं पहनी थी !उनके अंतिम दिनों में भी उनका खाने का खर्च मात्र ३ रूपया प्रति दिन था !उन विनोबा भावे ने देश की भूख की समस्या के समाधान के लिए सारे देश का साढ़े तरह साल पैदल भ्रमण किया ! और जब शरीर पैदल चलने के काबिल नहीं रहा तब लगभग ४ साल मोटर से यात्रा की !और सारे देश में ६०००० किलोमीटर की पैदल यात्रा की और दान स्वरुप लगभग ४५ लाख एकड़ भूमि प्राप्त कर भूमि हीेन किसानों में वितरित भूदान समितियों के माध्यम से कराई ! उनके इस कार्य में देश विदेश के सेकंडों तपोनिष्ठ ,गृहत्यागी ,सादगी पूर्ण जीवन जीने वालों ने प्रेम पूर्ण करुणा युक्त सहयोग दिया किन्तु जो साम्यवाद विचार में दीक्छित बुद्धिजीवी हैं और जो सरकारी खर्चे से जे एन यु में पढ़ने वाले साम्यवाद विचार के पोषक छात्र हैं बे नारे लगा रहे हैं की हमें चाहिए भूख से आजादी ! जो साम्यवाद अपने जन्मस्थान में ही समाप्त हो गया है ! इन्ही साम्यवादियों ने तेलंगाना में विनोवा के विरुद्ध तेलगु भाषा में पत्रक बांटे थे ! कि विनोबा संत दीखता है परन्तु वह बड़ा भयानक आदमी है ! वह तो जमींदारों का एजेंट है ! उनके फायदे का ही काम करने वाला है ! इसीलिए उसके आंदोलन से हमारे आंदोलन को ठेस पहुंचेगी ! और साम्यवादियों जो कुछ क्रांतिकारी भावना पैदा की है वह ठंडी पड़ जायेगी ! और बिनोवा क्रांतिकारी भावना को ठंडा करने का काम कर रहा है ! इसीलिए यह अत्यन्त खतरनाक आदमी है इस से सावधान रहने की आवष्यकता है !इन भूख से आजादी मांगने वाले छात्रों को पहले अपना विद्याध्यन पूरा करना चाहिए !क्योंकि जो पैसा भारत सरकार इन पर खर्च कर रही है !वह शोध और शिक्छन् के लिए कर रही है !यदि उनके दिल दिमाग में देश में विषमता समाप्त करने की तड़प है तो उन्हें पढ़ाई छोड़ कर मैदान में उतरना चाहिए !देश की शिक्छन् संस्थाओं में सरकारी पोषण से प्राप्त सुविधाओं का दुरपयोग कर देश का शैकछनिक माहौल नहीं बिगाड़ना चाहिए !अराजकता क्रांति नहीं है !क्रांति कभी भी हिंसक साधनों से प्राप्त नहीं की जा सकती है !सामजिक बदलाव के लिए ह्रदय परिवर्तन और चित्त शुद्धि की आवशयकता होती है !शोषक सिर्फ पैसे वाले ही नहीं होते है बे भी होते है जो अपने कर्तव्यों का निर्वहन नहीं करते हैं और देश में अराजकता फैलाते हैं !
सिद्ध योगी में चमत्कारिक दिव्य शक्तियों का उदय हो जाता है !किन्तु वह योग
से प्राप्त सिद्धियों से भौतिक समृद्धि नाम धन की प्राप्ति तथा तथा काम
जनित वासनाओं की तृप्ति के लिए नहीं करता है १ भोग बुद्धि से संग्रह न करने
वाळा इक्छा रहित और अंतःकरण को बश में रखने वाळा योगी अकेला एकांत में
स्थित होकर मन को निरंतर परमात्मा में लगाता है ! ध्यान योग का अधिकारी वह
है जो अपने शारीरिक सुख भोगों की अपने मन में कामना नहीं रखता है !ध्यान
योग के साधक का उद्देश्य केवल परमात्मा को प्राप्त करने का
ही हो लौकिक सिद्धियों को प्राप्त करने का नहीं !ये तथाकथित योगी योग से
अल्पशक्ति प्राप्त कर जो भोग से संतप्त और अत्यधिक भोगों से जन्मी शरीरूिक
मानसिक व्यधिओं से ग्रस्त होकर मानसिक शांति और शारीरिक स्वास्थ्य खो चुके
हैं !उनसे योग की बहिरंग क्रियाएँ आसान प्राणायाम आदि को करवाते है !और
उनसे धन प्राप्त कर अकूत संपत्ति का संग्रह कर अत्यधिक विलासता पूर्ण जीवन
जीते हैं बड़ी बड़ी विलासता युक्त कारों में यात्रा करते हैं और महिलाओं के
संग साथ में रह कर उनसे यौन सम्बन्ध भी कायम करते है !कभी किन्ही महिलाओं
से सम्बन्ध सहमति से भी होते हैं !किन्तु काम जनित वासना से ग्रसित ये
भ्रष्ट योगी कभी कभी बलात्कार से भी अपनी काम तृप्ति करते हैं ! उसके
परिणाम में फिर बलात्कार के मुकदद्मे उनके विरुद्ध दायर होते है !और फिर
जेल में सड़ते हैं !यह दंड उनको उनके पापकर्मों से और परमात्मा के साथ धोखा
धडी करने के कारण प्राप्त होता है !यह भ्रष्ट योगी भी अपने दुष्कर्म का फल
भोग रहा है !और पश्चिमी संस्कृति को दोष दे रहा है !योग को भोग का साधन बना
कर भारतीय योग की परम्परा का नाश करने वाले इन योगिओं को परमात्मा की और
से अवश्य दंड प्राप्त होता ही है !
Tuesday, 5 April 2016
सत्याग्रह सप्ताह ---------६अप्रेल से १३ अप्रेल तक सत्याग्रह सप्ताह मनाया जाता था ! ६ अप्रेल १९१९ को रॉलेट एक्ट अधिनियम के विरोध में गांधीजी के आवाहन पर संपूर्ण भारत में हड़ताल की गयी थी ! १३ अप्रेल १९१९ को जालियां वाले बाग की दुखद घटना हुई थी 1 गांधीजी ने देशवासियों का आवाहन करते हुए कहा था यह सप्ताह शुद्ध तपश्चर्या ,शुद्ध भक्ति का और शुद्ध फकीरी का होना चाहिए ! इस सप्ताह में हमें अपनी सब भूलों के लिए ईश्वर से और जिसके प्रति ह्मने बे भूलें की हैं उनसे माफ़ी मांगनी चाहिए ! हमारा बल हमारी नम्रता में हैं ! इन सात दिनों में हम यह रटें कि हम इसी वर्ष स्वराज्य प्राप्त करेंगे ! इसी वर्ष खिलाफत के प्रश्न का निपटारा करेंगे ! और इसी वर्ष पंजाब के बारे में न्याय प्राप्त करेंगे 1 इन उद्देश्यों को प्राप्त करने के साधनों पर विचार करके हमें उनकी प्राप्ति के लिए महान प्रयत्न करना चाहिए !
१--ख़िताब प्राप्त व्यक्ति अपना खिताब छोड़ दें
२----वकील वकालत छोड़ दें
३---विद्यार्थी सरकारी स्कूल छोड़ दें
४----वादी और प्रतिवादी सरकारी अदालत का परित्याग करें
५---शराबी तथा और प्रकार के व्यसन करने वाले व्यक्तियों को शराब ,व्यसन ,व्यभिचार ,चोरी और जुआ खेलना अदि छोड़ देना चाहिए!
६---सभी सत्य पर आचरण करने का ब्रत लें
७----अपने अपने घरों में चरखा दाखिल करके ,स्त्री ,पुरुष सभी अमुक समय चरखा कातने का आग्रह रखें
८---सबलोग विदेशी वस्त्रों का त्याग करके सिर्फ हाथ के कते सूत के हाथ से बने हुए कपडे ही पहने
९--हिन्दू ,मुसलमान ,सिख ,ईशाई ,पारसी ,यहूदी ----भारत में जन्मे हुए सभी लोगों को चाहिए की बे परस्पर एक दूसरे के प्रति भाई बहन का व्योहार करें !
१०--- कोई भी हिन्दू किसी को अश्पृश्य ना माने और सबके प्रति समभाव रखे !
११---तिलक स्वराज्य कोष में सभी यथाशक्ति दान दें
--------------------- स्वयं उपर्युक्त कार्य करते हुए और दूसरों से उसे कराने का आग्रह करते समय कोई भी व्यक्ति कड़वी भाषा का प्रयोग ना करे ! ऊपर जो सूची दी गयी है उस से स्पष्ट है कि सबसे बड़ा कार्य चरखे का प्रचार करना है ,खादी पहनना और दान इकठ्ठा करना है ! हमें छठी और सातवीं तारिख को हड़ताल करनी चाहिए 1 मिल मजदूरों को भी पहले से ही इन दो दिनों के लिए छुट्टी का प्रवन्ध कर लेना चाहिए ! जिन्हे छुट्टी ना मिले उन्हें काम बंद नहीं करना चाहिए! ६ और ७ तारीख को पिछली सांझ से २४ घंटों का उपवास करना चाहिए ! जहां सरकारी प्रतिबन्ध ना हो वहां हमें ६,और १३ तारीख को सभाएं आयोजित कर उचित प्रस्ताव पास करने चाहिए प्रत्येक सभा में चन्दा उगाह कर तिलक स्वराज्य कोष में भेज देना चाहिए ! सातवें दिन और मुख्य रूप से उपबास के दो दिनों में एक निश्चित समय लोग सिर्फ शांति और प्रार्थना में बिताएं और इस तरह यह सिद्ध करें की हमारी लड़ाई धर्म की लड़ाई हैं ! हिन्दुस्तान में एक भी गाओं ऐसा नहीं होना चाहिए जहाँ सत्याग्रह का सन्देश ना पहुंचा हो !१४ तारीख को हिन्दुस्तान में प्रत्येक स्त्री पुरुष को यह अनुभव होना ही चाहिए की उन्होंने देश सेवा में और धर्म सेवा में ठीक ठीक भाग लिया है ! और बे पहले से अधिक पवित्र हुए हैं ! -----नवजीवन --२०--३-1921
१--ख़िताब प्राप्त व्यक्ति अपना खिताब छोड़ दें
२----वकील वकालत छोड़ दें
३---विद्यार्थी सरकारी स्कूल छोड़ दें
४----वादी और प्रतिवादी सरकारी अदालत का परित्याग करें
५---शराबी तथा और प्रकार के व्यसन करने वाले व्यक्तियों को शराब ,व्यसन ,व्यभिचार ,चोरी और जुआ खेलना अदि छोड़ देना चाहिए!
६---सभी सत्य पर आचरण करने का ब्रत लें
७----अपने अपने घरों में चरखा दाखिल करके ,स्त्री ,पुरुष सभी अमुक समय चरखा कातने का आग्रह रखें
८---सबलोग विदेशी वस्त्रों का त्याग करके सिर्फ हाथ के कते सूत के हाथ से बने हुए कपडे ही पहने
९--हिन्दू ,मुसलमान ,सिख ,ईशाई ,पारसी ,यहूदी ----भारत में जन्मे हुए सभी लोगों को चाहिए की बे परस्पर एक दूसरे के प्रति भाई बहन का व्योहार करें !
१०--- कोई भी हिन्दू किसी को अश्पृश्य ना माने और सबके प्रति समभाव रखे !
११---तिलक स्वराज्य कोष में सभी यथाशक्ति दान दें
--------------------- स्वयं उपर्युक्त कार्य करते हुए और दूसरों से उसे कराने का आग्रह करते समय कोई भी व्यक्ति कड़वी भाषा का प्रयोग ना करे ! ऊपर जो सूची दी गयी है उस से स्पष्ट है कि सबसे बड़ा कार्य चरखे का प्रचार करना है ,खादी पहनना और दान इकठ्ठा करना है ! हमें छठी और सातवीं तारिख को हड़ताल करनी चाहिए 1 मिल मजदूरों को भी पहले से ही इन दो दिनों के लिए छुट्टी का प्रवन्ध कर लेना चाहिए ! जिन्हे छुट्टी ना मिले उन्हें काम बंद नहीं करना चाहिए! ६ और ७ तारीख को पिछली सांझ से २४ घंटों का उपवास करना चाहिए ! जहां सरकारी प्रतिबन्ध ना हो वहां हमें ६,और १३ तारीख को सभाएं आयोजित कर उचित प्रस्ताव पास करने चाहिए प्रत्येक सभा में चन्दा उगाह कर तिलक स्वराज्य कोष में भेज देना चाहिए ! सातवें दिन और मुख्य रूप से उपबास के दो दिनों में एक निश्चित समय लोग सिर्फ शांति और प्रार्थना में बिताएं और इस तरह यह सिद्ध करें की हमारी लड़ाई धर्म की लड़ाई हैं ! हिन्दुस्तान में एक भी गाओं ऐसा नहीं होना चाहिए जहाँ सत्याग्रह का सन्देश ना पहुंचा हो !१४ तारीख को हिन्दुस्तान में प्रत्येक स्त्री पुरुष को यह अनुभव होना ही चाहिए की उन्होंने देश सेवा में और धर्म सेवा में ठीक ठीक भाग लिया है ! और बे पहले से अधिक पवित्र हुए हैं ! -----नवजीवन --२०--३-1921
कन्या भ्रूण हत्या और लिंग भेद पर विचार गोष्ठी के आयोजन के समाचार प्रायः
आते रहते हैं !ऐसी ही एक गोष्ठी का आयोजन बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के गांधी
सभा कक्छ में हुआ !जिसमे भाषण विशारद वक्ताओं के भाषण पढ़ने को मिले
!कन्या भ्रूण हत्या के कर्ता धर्ता डॉक्टर होते हैं !और भ्रूणहत्या लिंग की
जानकारी के बाद ही हो पाती है !और यह अपराध रूपए के लिए डॉक्टर लोग करते
हैं !और लिंगभेद की जानकारी कराने वाले बे दंपत्ति होते हैं! जो कन्या को
नहीं चाहते हैं !इसलिए जो कन्या को जन्म से पहले ही मार देना
चाहते हैं !इन पर प्रतिबन्ध लगाने के लिए धार्मिक और नैतिक शिक्छण दिया
जाना चाहिए तथा महिलाओं को भी मजबूती से विरोध में खड़ा होना चाहिए !और
लिंग भेद के आधार पर कन्या को जन्म से मार देने के लिए तत्पर डॉकटरों पर
कठोर कार्यवाही कर उनको सजा तो होनी ही चाहिए इसके अतिरिक्त उनकी डॉक्टरी
डिग्री को भी जब्त कर लेना चाहिए १इस काम को अमली जामा पहनाने के लिए उन
डॉकटरों का सहयोग लेना चाहिए जो लोभ ग्रस्त नहीं है !और ये जो सामाजिक
संगठन है जो कन्या भ्रूण हत्या के विरोध में सभाओं का आयोजन करते हैं
!इन्हे भी क्रियात्मक रूप से सक्रियता दिखानी चाहिए !तथा भ्रूण हत्या के
संदिग्ध मामलों को तुरत पुलिस के पास पहुचाना चाहिए !भाषणो के स्थान पर यह
अधिक उपयोगी कार्य होगा !कन्या भ्रूण हत्या न हो इस लक्छ की प्राप्ति
क्रियाशीलता से ही संभव है ,भाषणो से नहीं !
Sunday, 3 April 2016
ब्राह्मणबाद का विरोध ---------एक नारा आजकल बहुत बुलंद हो रहा है कि हमें ब्राह्मणवाद से आजादी चाहिए !मनुस्मिृत को भी ब्राह्मणवाद का पोषक मान कर पिछले दिनों जे इन यु में कुछ छात्रों द्वारा जलाया गया !जो लोग ब्राह्मणो का इस तरह का विरोध कर रहे हैं ! बे ब्राह्मणो को माध्यम बनाकर भारत के सनातन धर्म पर प्रहार कर रहे हैं ! जिन धर्मों ने भारत में हिन्दू धर्म को नष्ट करने का प्रयत्न किया था ! ब्राह्मणो पर प्रहार करने का सिल सिला उन्होंने प्रारम्भ किया था !और लालच से भय से भारी मात्रा में धर्म परिवर्तन कराने में भी बे सफल हुए थे !किन्तु दुर्भाग्य यह है कि हिन्दू धर्म को छोड़ कर उन्होंने जिस धर्म को ग्रहण कर लिया है ! उस धर्म के दोषों और दुर्गुणों की और उनका ध्यान नहीं हैं !बे आज भी हिन्दू धर्म पर ही दोषा रोपण करते रहते हैं !कोई भी धर्म बिना ब्राह्मणो के नहीं है 1 हिन्दुओं में जो ब्राह्मण कहे जाते हैं ! मुसलमानो में उनका नाम मुल्ला मौलवी ,हाफिज और मुफती अदि है !,ईसाईयों में बे पोप ,पादरी ,बिशप ,आदि के नाम से जाने जाते हैं ! और बौद्धों में भुिकछु कहे जाते हैं !जितने भी धर्म हैं उन सबमे भिन्न भिन्न नामों से ब्राह्मण मौजूद हैं !और धार्मिक पुसतके हैं !किन्तु सनातन धर्म पर ही प्रहार करने की परंपरा कायम हैं !इस विरोध में कुछ पतित आचरण भ्रष्ट ब्राह्मण और अज्ञानी हिन्दू भी शामिल हैं !ब्राह्मणो के विरोध की इस मुहीम का उत्तर गांधीजी ने बीजापुर की सार्वजानिक सभा में २७ मई १९२१ में दिया था ! उन्होंने कहा था कि में ऐसा नहीं मानता हूँ कि ब्राह्मणो में कोई दोष नहीं है ! और ब्राह्मण भी अपने को पूरी तरह निर्दोष होने का दावा नहीं करते हैं ! ब्राह्मणो ने अपनी धार्मिक भावनाओं की उपेक्छा की है ! और सभी ब्राह्मणो का जीवन अब उतना पवित्र नहीं रह गया है ! बे कभी जिस उचाई पर प्रतिष्ठित थे उस से अब च्युत हो गए हैं ! किन्तु लोगों को ब्राह्मणो के द्वारा आचरित महान गुण धर्मों को नहीं भूलना चाहिए 1 ब्राह्मणो की बदौलत ही आज सारी जातियां धर्म के आदर्शों को जानती और पहचानती हैं ! आज भी ब्राह्मण राजनैतिक और समाजिक सभी आन्दोलनोंमे सबसे आगे हैं !दलित बर्गों की उन्नत्ति के लिए अन्य जातियों की अपेक्छा ब्राह्मण ही अधिक प्रयत्न कर रहे हैं !लोगों के सभी बर्ग लोकमान्य तिलक का आदर करते हैं 1 आंध्र के एक ब्राह्मण सज्जन ने अछूत बर्गों की सेवा में अपना जीवन समर्पित कर दिया है ! स्वर्गीय श्री गोखले ,स्वर्गीय श्री रानाडे और आदरणीय श्री शास्त्री इन सबने पिछड़े बर्गों की उन्नत्ति की लिए बहुत सुन्दर काम किये हैं 1 ये सब ब्राह्मण थे 1 मेरी समझ में ब्राह्मण हमेशा ही आत्मत्याग के लिए प्रसिद्ध रहे हैं 1 ब्राह्मणो ने अपने बुद्धिबल ,आत्मत्याग और तपस्या द्वारा अपनी प्रभुता स्थापित की ! किसी को भी उनकी प्रभुता से ईर्ष्या नहीं करनी चाहिए 1 में भी आज जो कुछ हूँ और मेरे जिन गुणों की आप प्रसंसा करते हैं 1 बे गुण मेने आधुनिक शिक्छा से प्राप्त नहीं किये हैं 1 मेने बहुत पहले इस शिक्छा के सम्मोहक प्रभाव से अपने कोमुक्त कर लिया था ! मेने अपने सभी धार्मिक गुण और शाश्वत सनातन जीवन के गुण ब्राह्मणो द्वारा लिखित भगवद्गीता ,महाभारत और रामायण जैसे ग्रंथों के अध्ययन ,मनन और धारण करके ही प्राप्त किए हैं !आज उन्ही ब्राह्मणो पर शाव्दिक और शारीरिक हमाल हो रहे हैं !उनका आर्थिक स्तर दलितों और पिछड़ी जातियों से भी नीचे हो गया है !उनकी बुद्धि ,त्याग ,और तपस्या को आरक्छण का ग्रहण लग गया है !अधिकाँश ब्राह्मण आज घोर गरीबी और कष्ट का जीवन जी रहे हैं !कुछ ब्राह्मण जो सत्ता संपत्ति और प्रशशन के शीर्ष पर बैठे हैं ! बे भी अपनी स्वार्थ पूर्ति के लिए ब्राह्मणो का उपयोग करते हैं !आरक्छण की इस व्यार में किसी भी राजनैतिक दल ने आज तक ब्राह्मणो की आर्थिक मदद की दृष्टि से कोई और किसी भी नीति का निर्माण नहीं किया है !इस सबके बाद भी यह घोर अपमान ब्राह्माण से मुकति चाहिए ब्राह्मणो को झेलना पड़ रहा है !जिन ब्राह्मणो ने ज्ञान की गंगा इस धराधाम में बहाई और जो कभी भू देव कहलाते थे !और जिनकी त्याग और तपस्या से इन तथाकथित वुद्वानो को ज्ञान की प्राप्ति हुई बे सब आज क्रतिघनी होकर अहिंसक ब्राह्मणो पर हमले कर रहे हैं !
जेलों में रिश्वत खोरी खुले आम चलती है !ये तथ्य किसी से छिपा हुआ नहीं हैं !जो राजनैतिक नेता या बड़े खतरनाक कैदी कारागारों में बन्दी होेे ते हैं बे अपने राजनैतिक रसूखों और दबंग अपराधी अपनी दबंगई के बल पर जेल में सभी प्रकार की सुखप्रद सुविधाएं पा जाते हैं !जेल में कुछ कैदी निरपराध होने के बाद भी पार्टीबन्दी या रंजिश के कारण सजा पाकर जेलों में बंदी जीवन बिताने के लिए मजबूर होाते हैं !कुछ कैदी गरीबी के कारण जो सुविधाएँ कानून के अनुसार उनको प्राप्त होनी चाहिए बो उनको नहीं मिलती हैं जबकि उनके सामने जो कैदी पैसे खर्च करके जेल के सिपाहियों अदि की मुट्ठी गरम कर देते हैं !उनको सभी प्रकार की सुविधाएं प्राप्त होजाती हैं !कुछ जेल अधीकछक ईमानदारी से कर्त्तव्य निष्ठां का पालन करना चाहते हैं !किन्तु बे कर नही पते हैं !इस तरह से वाराणसी जेल में जो कैदियों ने विद्रोह कर डिप्टी जेलर और जेलर की पिटाई की है !इसकी वास्तविकता तो सही जाँच से ही पता चलेगी !किन्तु जाँच सही ही होगी इसकी क्या गारंटी है ? !एक बात निश्चित रूप से कही जा सकती है कि जेल के अधिकारीयों ,डॉक्टरों और कर्मचारियों को अपने भ्रष्ट आचरण पर नियंत्रण लगाना चाहिए !बेसे भी अब राज्य कर्मचारियों के बेतन और सुविधाओं में असाधारण बृद्धि हुई है !बे अपना जीवन सुख पूर्वक बिना रिश्वत लिए जी सकते हैं !
Friday, 1 April 2016
विविधता में एकता ---------------विनोबाजी ने लिखा है कि भारत की एकता का दर्शन मुझे ऋग्वेद में हुआ उसके एक सूत्र में कहा है-------- द्वाबिमऔ बातों बातःआ सिन्धोः आपरवतह------- अर्थात भारत में दो वायु बहती हैं एक जाती है परावत से सिंधु की तरफ और दूसरी समुद्र से परावत की तरफ ! सिंधु यानी दक्छिन महासागर और परावत यानी हिमालय की गुहा ! समुद्र की तरफ से मानसून की हबाएं बहती हैं ! और हिमालय की तरफ से भारत के पूर्व की ओर हबाएं बहती हैं इस तरह ऋग्वेद में सिंधु से पराबत तक अपने देश की मर्यादा मानी है ! विविध भाषाओँ को मान्य करके सारा देश एक मानना भारतीय संस्कृति ही है ! भारत के ऋषियों और महृषियों ने आत्मसाधना ,त्याग और तपश्या से दिव्यदर्शन किया कि भारत बड़ी पुण्यभूमि है ! वे भारत में भ्रमण करके लोगों को प्रेरणा देते थे कि उनको इस पुण्यभूमि की यात्रा करनी चाहिए ! इस पुण्यभूमि भारत में अनादिकाल से ऋषियों मुनियों ,महर्षियों के साधना स्थल रहे काशी, ,रामेशवरम, बद्रीनाथ ,जगन्नाथ ,द्वारिका और अन्य पवित्र तीर्थ छेत्र दर्शन से लोगों को अपने आप को पवित्र करना चाहिए ! उन दिनों यात्रा के उत्तम साधन नहीं थे फिर भी लोग इन पवित्र स्थानोे दर्शन करने के लिए कष्ट सहन कर भी यात्रा करते थे ! यह भावना आध्यात्मिक होने के साथ राष्ट्रीय भावना भी थी ! हमारा देश बड़ा है ! किन्तु यह देश यों ही बड़ा नहीं बनगया ! इसके पीछे महान संस्कृति और सभ्यता पडी है ! बहुत लम्बे साधना ओर तपस्या के प्रयत्न से यह सम्भव हुआ है !उसी के परिणाम स्वरुप यह देश बड़ा बना है ! अनेक भेद होते हुए भी हमारे पूर्वजों ने एक राष्ट्र की भावना हमारे चित्त में इस भांति बैठा दी उसका ऐसा बंदोबस्त किया कि आश्चर्य होता है ! तमिलनाडु ,कर्णाटक ,या महाराष्ट्र का मनुष्य स्नान के लिए कावेरी ,तुंगभद्रा ,या गोदावरी पर जाएगा तो कहेगा कि में गंगास्नान के लिए जाता हूँ ! भारत में अनेक भाषायें और अनेक धर्म हैं फिर भी हम अपने को एक देश के निवासी मानते हैं ! हमारा यह भारत देश अत्यन्त वैभव शाली है ! समस्त पृथ्वी में जो बैभव है वह भारत में हैं ! पृथ्वी में अनेक धर्म हैं ,तो हमारे देश में भी अनेक धर्म हैं ! पृथ्वी में अनेक मानव बंश हैं ,तो हमारे देश में भी हैं ! पृथ्वी में अनेक भाषायें हैं लेकिन अनेक समर्थ भाषाओँ को एक साथ निभानेवाला भारत जैसा दूसरा देश पृथ्वी पर नहीं है ! ऐसा अपना यह विशाल भारत है ! इस विशाल भारत की आध्यात्मिक त्यगयुक्त सर्व धर्म लोकोपकारी ओर जनहित कल्याणकारी कारी करुणा प्रधान अहिंसक परंपरा और ज्ञान गंगा को सुरक्छित और संरकछित तथा पोषण करने का कर्त्तव्य प्रत्येक भारतीय का है !जो इस पुण्यभूमि भारत में जन्मता है !इसका अन्न जल खता है !और मरकर इसी देश की मिट्टी में जलजाता है या दफ़न हो जाता है !यह पुण्यभूमि भारत माता सभी प्रकार से वंदनीय और पुजयनीय हैं !जो इस भारतमाता के उपासक नहीं हैं बे कृतघ्नी हैं !
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