हमें चाहिए भूख से आजादी -------- भूख से आजादी दिलाने के लिए सारेविश्व में मानवता वादी लोग प्रयत्न शील रहे हैं इसी प्रयत्न में दो दर्शन भारत से बाहर के देशों में साम्य्वाद और समाजवाद के रूप में जन्मे उनका प्रभाव भारत में भी बढ़ा ! साम्यवाद और समाजवादी विचार के लोगों का काफी प्रभाव आज भी भारत के बुद्धिजीवियों पर देखने में मिलता है देश को गरीवी भुखमरी और आर्थिक विषमता तथा सामाजिक भेदभाव अदि से मुक्त करने के लिए बहुत से कानूनों का भी निर्माण हुआ है ! और उनके सार्थक परिणाम भी देश में दिखाई देते हैं !किन्तु जितना परिवर्तन होना चाहिए था उतना परिवर्तन नहीं हुआ !एक और करोड़ पतियों की संख्या में बृद्धि हुई तो दूसरी और कंगाली भी बढी है ! देश में नक्सलवाद के नाम से एक हिंसक आंदोलन चल रहा है !सरकारें उसको समाप्त करने के लिए प्रयत्न कर रही हैं वहीं दूसरी ओर कुछ लोग नक्सलवाद का समर्थन भी कर रहे हैं !भारत बर्ष की एक सबसे बड़ी समस्या यह है की आदर्श की बातें करने वालों की बहुतायत है ! किन्तु तदनुसार जीवन जीना का घोर अभाव है !साम्यवाद की बात करने वाले लोग खुद को भोग मुक्त नहीं करपाते हैं !समाजवादी लोग भी ऐश्वर्य का जीवन जीते हैं !भूख से आजादी दिलाने का काम आचार्य विनोबा भावे ने भी किया था !उन्होंने ३२ साल तक मजदूरी का जीवन जिया !और पाखाना सफाई से लेकर बढई, जूता बनाने खेती करने कचड़ा साफ़ करने के अनेक मजदूरी के कार्य किये !१९१७ में उनका भोजन का खर्च मात्र ११ पैसे प्रतिदिन था !जिसमे केला और नीबू ४पैसे ,ज्वार दो पैसे और ५पैसे का दूध शामिल था सामान के रूप में उनके पास लकड़ी की थाली एक कटोरा ,आश्रम का एक लोटा धोती और कम्बल तथा पुस्तकें थी ! कुर्ता ,कोट टोपी बगैरह उन्होंने जीवन में कभीनहीं पहनी थी !उनके अंतिम दिनों में भी उनका खाने का खर्च मात्र ३ रूपया प्रति दिन था !उन विनोबा भावे ने देश की भूख की समस्या के समाधान के लिए सारे देश का साढ़े तरह साल पैदल भ्रमण किया ! और जब शरीर पैदल चलने के काबिल नहीं रहा तब लगभग ४ साल मोटर से यात्रा की !और सारे देश में ६०००० किलोमीटर की पैदल यात्रा की और दान स्वरुप लगभग ४५ लाख एकड़ भूमि प्राप्त कर भूमि हीेन किसानों में वितरित भूदान समितियों के माध्यम से कराई ! उनके इस कार्य में देश विदेश के सेकंडों तपोनिष्ठ ,गृहत्यागी ,सादगी पूर्ण जीवन जीने वालों ने प्रेम पूर्ण करुणा युक्त सहयोग दिया किन्तु जो साम्यवाद विचार में दीक्छित बुद्धिजीवी हैं और जो सरकारी खर्चे से जे एन यु में पढ़ने वाले साम्यवाद विचार के पोषक छात्र हैं बे नारे लगा रहे हैं की हमें चाहिए भूख से आजादी ! जो साम्यवाद अपने जन्मस्थान में ही समाप्त हो गया है ! इन्ही साम्यवादियों ने तेलंगाना में विनोवा के विरुद्ध तेलगु भाषा में पत्रक बांटे थे ! कि विनोबा संत दीखता है परन्तु वह बड़ा भयानक आदमी है ! वह तो जमींदारों का एजेंट है ! उनके फायदे का ही काम करने वाला है ! इसीलिए उसके आंदोलन से हमारे आंदोलन को ठेस पहुंचेगी ! और साम्यवादियों जो कुछ क्रांतिकारी भावना पैदा की है वह ठंडी पड़ जायेगी ! और बिनोवा क्रांतिकारी भावना को ठंडा करने का काम कर रहा है ! इसीलिए यह अत्यन्त खतरनाक आदमी है इस से सावधान रहने की आवष्यकता है !इन भूख से आजादी मांगने वाले छात्रों को पहले अपना विद्याध्यन पूरा करना चाहिए !क्योंकि जो पैसा भारत सरकार इन पर खर्च कर रही है !वह शोध और शिक्छन् के लिए कर रही है !यदि उनके दिल दिमाग में देश में विषमता समाप्त करने की तड़प है तो उन्हें पढ़ाई छोड़ कर मैदान में उतरना चाहिए !देश की शिक्छन् संस्थाओं में सरकारी पोषण से प्राप्त सुविधाओं का दुरपयोग कर देश का शैकछनिक माहौल नहीं बिगाड़ना चाहिए !अराजकता क्रांति नहीं है !क्रांति कभी भी हिंसक साधनों से प्राप्त नहीं की जा सकती है !सामजिक बदलाव के लिए ह्रदय परिवर्तन और चित्त शुद्धि की आवशयकता होती है !शोषक सिर्फ पैसे वाले ही नहीं होते है बे भी होते है जो अपने कर्तव्यों का निर्वहन नहीं करते हैं और देश में अराजकता फैलाते हैं !
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